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GK नोट्सभारतीय इतिहासमौर्योत्तर काल: कुषाण और सातवाहन

मौर्योत्तर काल: कुषाण, सातवाहन और विगत प्रश्न

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मौर्योत्तर काल के नोट्स: शुंग और कण्व वंश, हिंद-यवन, शक, कनिष्क तथा कुषाण, दक्कन के सातवाहन, कला शैलियाँ और रोमन व्यापार।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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मौर्योत्तर काल: कुषाण, सातवाहन और विगत प्रश्न — GK24 title card
मौर्योत्तर काल: कुषाण, सातवाहन और विगत प्रश्न — GK24 title card

लगभग 185 ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य के पतन और 319 ईस्वी में गुप्त वंश के उदय के बीच के समय को मौर्योत्तर काल कहा जाता है। इन शताब्दियों में पूरा उपमहाद्वीप किसी एक शक्ति के अधीन नहीं था। मगध पर शुंग और कण्व वंश का शासन रहा, उत्तर-पश्चिम से विदेशी वंशों की एक कड़ी भारत में आई, और दक्कन में सातवाहनों ने पहला बड़ा राज्य खड़ा किया। परीक्षक इस काल को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि यहाँ ऐसी जोड़ियाँ भरी पड़ी हैं जो एक पंक्ति में पूछी जा सकती हैं: शासक और उसका अभिलेख, राजा और उसका दरबारी विद्वान, वंश और उसकी राजधानी।

शुंग और कण्व वंश

अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ के सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने लगभग 185 ईसा पूर्व में अपने स्वामी की हत्या कर शुंग वंश की नींव रखी। राजधानी पाटलिपुत्र ही रही और विदिशा दूसरा प्रमुख केंद्र बना। पुष्यमित्र ने अश्वमेध यज्ञ किया, जिसे इतिहासकार मौर्यों के बाद ब्राह्मण कर्मकांड के पुनरुत्थान का चिह्न मानते हैं। भरहुत का स्तूप तथा साँची के स्तूप में जोड़ी गई पत्थर की वेदिका और तोरणद्वार शुंग काल की देन हैं। पाणिनि की व्याकरण पर महाभाष्य लिखने वाले पतंजलि इसी युग में हुए। अंतिम शुंग शासक देवभूति की हत्या उसके ही मंत्री वासुदेव ने की, जिसने लगभग 73 ईसा पूर्व में अल्पकालिक कण्व वंश की स्थापना की।

हिंद-यवन, शक और पह्लव

हिंद-यवन, जिन्हें बैक्ट्रियाई यूनानी या यवन भी कहा जाता है, भारत में सोने के सिक्के चलाने वाले पहले शासक थे और उनके सिक्कों पर पहली बार राजा का चित्र और नाम अंकित हुआ। उनका सबसे प्रसिद्ध शासक मिनांडर था, जिसे भारतीय स्रोतों में मिलिंद कहा गया है; बौद्ध भिक्षु नागसेन के साथ उसका संवाद पालि ग्रंथ मिलिंदपन्हो में संकलित है। विदिशा के पास बेसनगर का हेलियोडोरस स्तंभ अंतिआल्किदास के यूनानी राजदूत हेलियोडोरस ने खड़ा किया था, जो उस पर स्वयं को वासुदेव का भागवत बताता है। इसके बाद शक या सीथियन पश्चिमी भारत में आए। पश्चिमी क्षत्रप वंश का रुद्रदामन प्रथम सबसे प्रसिद्ध शक शासक है; लगभग 150 ईस्वी का उसका जूनागढ़ शिलालेख परिष्कृत संस्कृत का पहला बड़ा अभिलेख है और उसमें सुदर्शन झील की मरम्मत का विवरण है। क्षहरात वंश के शक शासक नहपान को सातवाहन राजा गौतमीपुत्र सातकर्णि ने पराजित किया और उसके चाँदी के सिक्कों पर अपनी मुहर लगवाई। पह्लव या पार्थियन शासक गोंडोफर्नीस के समय संत थॉमस के भारत आने की मान्यता है।

कुषाण और कनिष्क

कुषाण मध्य एशिया के यूची कबीले की एक शाखा थे। कुजुल कडफिसेस ने वंश की नींव रखी, विम कडफिसेस ने बड़ी मात्रा में स्वर्ण सिक्के चलाए और स्वयं को शिव का उपासक दिखाया, तथा लगभग 78 ईस्वी से शासन करने वाला कनिष्क प्रथम इस वंश का सबसे महान शासक माना जाता है। 78 ईस्वी से आरंभ शक संवत, जो भारत के राष्ट्रीय पंचांग का आधार है, सामान्यतः कनिष्क से जोड़ा जाता है। उसकी राजधानी पुरुषपुर यानी आज का पेशावर थी और मथुरा साम्राज्य की दूसरी राजधानी बनी। अफगानिस्तान में मिला रबातक अभिलेख इस वंश की वंशावली देता है। कनिष्क ने कश्मीर में चौथी बौद्ध संगीति बुलाई, जिसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की और अश्वघोष उपाध्यक्ष रहे; यहीं महायान संप्रदाय ने स्पष्ट रूप लिया। उसके दरबार में बुद्धचरित के रचयिता अश्वघोष, चिकित्सक चरक और शून्यवाद के प्रतिपादक दार्शनिक नागार्जुन थे।

दक्कन के सातवाहन

सातवाहन वंश की स्थापना सिमुक ने की और इसकी राजधानी प्रतिष्ठान अर्थात गोदावरी तट पर बसा आज का पैठण थी। सातवाहन राजा अपनी माता के नाम से जाने जाते थे, इसलिए गौतमीपुत्र या वाशिष्ठीपुत्र जैसे नाम मिलते हैं, जो पितृसत्तात्मक समाज में एक असामान्य परंपरा है। गौतमीपुत्र सातकर्णि इस वंश का सबसे बड़ा शासक है; उसकी माता गौतमी बलश्री द्वारा जारी नासिक प्रशस्ति उसे शकों, यवनों और पह्लवों का नाश करने वाला तथा चारों वर्णों के मिश्रण को रोकने वाला बताती है। उसके बाद वाशिष्ठीपुत्र पुलुमावी गद्दी पर बैठा। एक अन्य सातवाहन राजा हाल ने प्राकृत में सात सौ प्रेम-गाथाओं का संग्रह गाथासप्तशती संकलित किया। सातवाहन पहले ऐसे भारतीय शासक थे जिन्होंने अभिलेख के माध्यम से ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को भूमि अनुदान दिया, और इस परंपरा ने आगे की भारतीय राजव्यवस्था को गढ़ा।

कला, व्यापार और अवशेष

वंशसंस्थापकप्रसिद्ध शासकराजधानी
शुंगपुष्यमित्र शुंगपुष्यमित्र शुंगपाटलिपुत्र
कण्ववासुदेववासुदेवपाटलिपुत्र
पश्चिमी क्षत्रपभूमकरुद्रदामन प्रथमउज्जैन
कुषाणकुजुल कडफिसेसकनिष्क प्रथमपुरुषपुर
सातवाहनसिमुकगौतमीपुत्र सातकर्णिप्रतिष्ठान

इन शताब्दियों में मूर्तिकला की तीन शैलियाँ विकसित हुईं। गांधार शैली उत्तर-पश्चिम में स्लेटी शिस्ट पत्थर पर काम करती थी और बुद्ध को यूनानी तथा रोमन नयन-नक्श, लहरदार केश और भारी वस्त्र-सिलवटों के साथ गढ़ती थी। मथुरा शैली चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग करती थी और उसने बुद्ध, जैन तीर्थंकरों तथा हिंदू देवताओं की देशी शैली की प्रतिमाएँ बनाईं। सातवाहन संरक्षण में कृष्णा नदी की निचली घाटी की अमरावती शैली ने सफेद चूना-पत्थर पर बुद्ध के जीवन-प्रसंग उकेरे। बुद्ध की मानव रूप में पहली प्रतिमाएँ इसी काल की हैं और गांधार तथा मथुरा दोनों में बनीं। रोमन जगत से व्यापार चरम पर था: यूनानी नाविक-पुस्तिका पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी पश्चिमी तट के बंदरगाहों का वर्णन करती है और पुडुचेरी के पास अरिकामेडु से रोमन मृद्भांड तथा सिक्के मिले हैं। कार्ले का शैलकृत चैत्य, नासिक और भाजा की गुफाएँ तथा दक्कन के विहार इसी व्यापारिक युग में व्यापारियों और श्रेणियों के दान से कटवाए गए।

परीक्षा की दृष्टि से

इस पाठ से प्रश्न प्रायः एक पंक्ति की जोड़ियों के रूप में आते हैं: वंश और संस्थापक, राजा और दरबारी विद्वान, अभिलेख और उसका विषय, राजधानी और वंश। जाल भी तय हैं। पुरुषपुर कुषाणों की राजधानी थी जबकि मथुरा दूसरी राजधानी, इसलिए दूसरी राजधानी पूछे जाने पर उत्तर मथुरा होगा। नहपान शक था, कुषाण नहीं, और कुषाण शासकों की सूची में वही बेमेल नाम होता है। अश्वघोष कनिष्क के दरबार में था, अशोक के नहीं। जूनागढ़ अभिलेख रुद्रदामन प्रथम का है, जबकि जिस सुदर्शन झील की उसमें मरम्मत है वह मौर्य काल में बनी थी। गाथासप्तशती प्राकृत में है, संस्कृत में नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य

कालखंडलगभग 185 ईसा पूर्व से 319 ईस्वी तक, मौर्यों और गुप्तों के बीच
शुंग वंश का संस्थापकपुष्यमित्र शुंग, जिसने मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या की
कण्व वंश का संस्थापकवासुदेव, लगभग 73 ईसा पूर्व, शुंग शासक देवभूति की हत्या के बाद
भारत में पहले स्वर्ण सिक्केहिंद-यवन शासकों द्वारा जारी
हेलियोडोरस स्तंभविदिशा के पास बेसनगर, अंतिआल्किदास के राजदूत द्वारा स्थापित
जूनागढ़ शिलालेखरुद्रदामन प्रथम, लगभग 150 ईस्वी, सुदर्शन झील की मरम्मत
कुषाण राजधानियाँपुरुषपुर यानी पेशावर; दूसरी राजधानी मथुरा
शक संवत78 ईस्वी, कनिष्क प्रथम से संबद्ध; राष्ट्रीय पंचांग का आधार
चौथी बौद्ध संगीतिकश्मीर, कनिष्क के संरक्षण में, अध्यक्ष वसुमित्र
कनिष्क का दरबारअश्वघोष, वसुमित्र, चरक और नागार्जुन
सातवाहन राजधानीप्रतिष्ठान, गोदावरी तट पर आज का पैठण
नासिक प्रशस्तिगौतमी बलश्री द्वारा गौतमीपुत्र सातकर्णि की प्रशंसा में जारी
गाथासप्तशतीराजा हाल द्वारा संकलित प्राकृत की सात सौ गाथाएँ
कला शैलियाँगांधार स्लेटी शिस्ट में, मथुरा लाल बलुआ पत्थर में, अमरावती सफेद चूना-पत्थर में

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: दिल्ली · 8 Dec 2017, Shift 2आसान

प्राचीन भारत में कुषाणों की दूसरी राजधानी निम्नलिखित में से कौन सी थी?

  1. A.पाटलिपुत्र
  2. B.दिल्ली
  3. C.लाहौर
  4. D.मथुरा
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. मथुरा

व्याख्या

सही उत्तर D, मथुरा है। कुषाणों की मुख्य राजधानी पुरुषपुर यानी आज का पेशावर थी, जिसे कनिष्क प्रथम ने अपनी सत्ता का केंद्र बनाया। जैसे-जैसे साम्राज्य गंगा-यमुना के मैदान में फैला, यमुना तट पर बसा मथुरा उसकी दूसरी राजधानी और दक्षिणी मुख्यालय बन गया। मथुरा मूर्तिकला का बड़ा केंद्र भी बना और नगर के पास मात नामक स्थान से कुषाण राजाओं की प्रतिमाओं का देवकुल मिला है, जिसमें कनिष्क की प्रसिद्ध शीशविहीन मूर्ति भी है।

विकल्प A पाटलिपुत्र नंद, मौर्य और बाद में गुप्त शासकों की राजधानी थी, कुषाणों की नहीं। विकल्प B दिल्ली इस काल में राजधानी के रूप में थी ही नहीं और बारहवीं शताब्दी के बाद दिल्ली सल्तनत के समय उभरी। विकल्प C लाहौर कुषाण क्षेत्र में अवश्य था, पर कभी उनकी राजधानी नहीं रहा।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 12 April 2021, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से कौन कुषाण वंश का शासक नहीं था?

  1. A.नहपान
  2. B.वासिष्क
  3. C.वासुदेव
  4. D.हुविष्क
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नहपान

व्याख्या

सही उत्तर A, नहपान है। नहपान शकों के क्षहरात कुल का था, अर्थात पश्चिमी भारत में शासन करने वाले पश्चिमी क्षत्रपों का, और उसका कुषाण वंश से कोई संबंध नहीं था। वह इसलिए याद किया जाता है कि सातवाहन राजा गौतमीपुत्र सातकर्णि ने उसे पराजित कर उसके चाँदी के सिक्कों पर अपनी मुहर फिर से अंकित करवाई, जिनका बड़ा भंडार महाराष्ट्र के जोगलथेंबी से मिला है।

विकल्प B वासिष्क कनिष्क के कुल का कुषाण शासक था और अभिलेखों से ज्ञात है। विकल्प C वासुदेव अंतिम प्रमुख कुषाण राजा था, जिसके सिक्के और शिव भक्ति वंश के भारतीयकरण को दिखाते हैं; इसे कण्व वंश के संस्थापक वासुदेव से नहीं मिलाना चाहिए। विकल्प D हुविष्क कनिष्क और वासुदेव के बीच शासक था तथा अपने विपुल सिक्कों के लिए जाना जाता है।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: दिल्ली · 13 Nov 2019, Shift 1आसान

बुद्ध की जीवनी बुद्धचरित की रचना करने वाले कवि अश्वघोष किस शासक के दरबार में थे?

  1. A.अशोक
  2. B.बिंदुसार
  3. C.कनिष्क
  4. D.गौतमीपुत्र श्री सातकर्णि
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. कनिष्क

व्याख्या

सही उत्तर C, कनिष्क है। अश्वघोष कुषाण शासक कनिष्क प्रथम के दरबार का बौद्ध भिक्षु और संस्कृत कवि था। उसने संस्कृत पद्य में बुद्ध का जीवनचरित बुद्धचरित तथा सौंदरनंद लिखा, और कश्मीर में हुई चौथी बौद्ध संगीति में वसुमित्र के उपाध्यक्ष के रूप में भाग लिया। कनिष्क के दरबार में चिकित्सक चरक और दार्शनिक नागार्जुन भी थे, और यही समूह एक पंक्ति के प्रश्न के रूप में बार-बार पूछा जाता है। अश्वघोष को संस्कृत महाकाव्य परंपरा का आरंभिक कवि भी माना जाता है।

विकल्प A अशोक तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का शासक था, लगभग तीन सौ वर्ष पहले, और उससे मोग्गलिपुत्त तिस्स तथा तीसरी संगीति जुड़ी है। विकल्प B बिंदुसार अशोक का पिता था, जिसके दरबार में यूनानी राजदूत डाइमेकस आया था। विकल्प D गौतमीपुत्र सातकर्णि नासिक प्रशस्ति का सातवाहन राजा था।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Assistant Professor 2022 History Pमध्यम

राजा हाल द्वारा रचित गाथा सप्तशती किस भाषा में लिखी गई थी?

  1. A.संस्कृत
  2. B.पालि
  3. C.प्राकृत
  4. D.हिंदी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. प्राकृत

व्याख्या

सही उत्तर C, प्राकृत है। गाथासप्तशती सातवाहन राजा हाल द्वारा संकलित सात सौ छोटी गाथाओं का संग्रह है। यह महाराष्ट्री प्राकृत में रचा गया, वही बोलचाल की भाषा जिसे सातवाहन अपने अभिलेखों और साहित्य में अपनाते थे, और इसकी गाथाएँ राजकीय विजयों के बजाय दक्कन के ग्रामीण प्रेम और दैनिक जीवन का चित्र खींचती हैं। परीक्षा की दृष्टि से यह ग्रंथ इसलिए महत्वपूर्ण है कि यह दिखाता है कि सातवाहनों ने बाद के गुप्तों के विपरीत प्राकृत को राजभाषा के रूप में बढ़ावा दिया।

विकल्प A संस्कृत राजकीय अभिलेखों की भाषा बाद में बनी, जिसका पहला बड़ा उदाहरण रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख है। विकल्प B पालि बौद्ध त्रिपिटक और मिलिंदपन्हो की भाषा है, हाल के संग्रह की नहीं। विकल्प D हिंदी हाल के एक हजार वर्ष से भी अधिक बाद विकसित हुई, इसलिए पहली या दूसरी शताब्दी के ग्रंथ की भाषा नहीं हो सकती।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: राजस्थान · 12th Sept 2024कठिन

नालगिरि के दमन नाम से प्रसिद्ध मूर्तिशिल्प कहाँ से प्राप्त हुआ है?

  1. A.भरहुत
  2. B.अमरावती
  3. C.मथुरा
  4. D.साँची
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अमरावती

व्याख्या

सही उत्तर B, अमरावती है। देवदत्त द्वारा बुद्ध को मारने के लिए छोड़े गए मदमस्त हाथी नालगिरि के राजगृह की गली में शांत हो जाने का दृश्य आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी की निचली घाटी के अमरावती स्तूप की सबसे प्रसिद्ध पट्टिकाओं में गिना जाता है। अमरावती शैली सातवाहन संरक्षण में फली-फूली और सफेद चूना-पत्थर पर भीड़ भरे, छरहरे तथा प्रवाहमान आकृति-समूह उकेरती थी। अमरावती की अनेक पट्टिकाएँ आज चेन्नई के सरकारी संग्रहालय और लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में सुरक्षित हैं।

विकल्प A भरहुत मध्य प्रदेश का शुंगकालीन स्तूप है, जिसकी वेदिकाओं पर ब्राह्मी में नाम लिखे जातक दृश्य हैं। विकल्प C मथुरा उत्तर की लाल बलुआ पत्थर की शैली है, यह पट्टिका वहाँ की नहीं है। विकल्प D साँची अपने तोरणद्वारों के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ बुद्ध का जीवन प्रतीकों के माध्यम से दिखाया गया है।

Q6.भारतीय इतिहासआसान

शुंग वंश की स्थापना निम्नलिखित में से किस मौर्य शासक की हत्या के बाद हुई?

  1. A.दशरथ
  2. B.संप्रति
  3. C.बृहद्रथ
  4. D.देवभूति
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बृहद्रथ

व्याख्या

सही उत्तर C, बृहद्रथ है। बृहद्रथ मौर्य वंश का अंतिम शासक था। लगभग 185 ईसा पूर्व उसके अपने सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने, परंपरा के अनुसार सेना के निरीक्षण के अवसर पर, उसकी हत्या कर पाटलिपुत्र का सिंहासन ले लिया। इस घटना से मौर्य शासन समाप्त होता है और मौर्योत्तर काल आरंभ होता है, इसलिए लगभग 185 ईसा पूर्व की यह तिथि दोनों युगों की सीमा के रूप में याद रखनी चाहिए।

विकल्प A दशरथ अशोक का पौत्र था, जिसने नागार्जुनी गुफाएँ आजीवकों को दान दीं और वह वंश के अंत से काफी पहले हुआ। विकल्प B संप्रति एक अन्य परवर्ती मौर्य शासक था, जिसे जैन परंपरा जैन धर्म के प्रसार से जोड़ती है। विकल्प D देवभूति मौर्य था ही नहीं; वह अंतिम शुंग शासक था, जिसकी हत्या उसके मंत्री वासुदेव ने कर कण्व वंश की नींव रखी।

Q7.भारतीय इतिहासमध्यम

सुदर्शन झील की मरम्मत का उल्लेख करने वाला जूनागढ़ शिलालेख किस शासक ने जारी किया था?

  1. A.रुद्रदामन प्रथम
  2. B.नहपान
  3. C.गोंडोफर्नीस
  4. D.मिनांडर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. रुद्रदामन प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर A, रुद्रदामन प्रथम है। लगभग 150 ईस्वी का जूनागढ़ शिलालेख पश्चिमी क्षत्रप वंश के शक शासक रुद्रदामन प्रथम ने जारी किया था। यह परिष्कृत संस्कृत में लिखा पहला बड़ा अभिलेख है, जबकि उस समय राजकीय अभिलेख सामान्यतः प्राकृत में होते थे। इसमें आँधी से बाँध टूट जाने के बाद सौराष्ट्र की सुदर्शन झील की मरम्मत का वर्णन है। यह झील चंद्रगुप्त मौर्य के समय बनी और अशोक के समय सुधारी गई थी, इसलिए एक ही शिला पर तीन वंशों का इतिहास दर्ज है और उसी पर अशोक के बृहद् शिलालेख भी हैं।

विकल्प B नहपान पूर्ववर्ती क्षहरात शक शासक था, जिसके अभिलेख नासिक की गुफाओं से मिले हैं। विकल्प C गोंडोफर्नीस उत्तर-पश्चिम का पह्लव राजा था, जिसके समय संत थॉमस के भारत आने की मान्यता है। विकल्प D मिनांडर मिलिंदपन्हो का हिंद-यवन राजा था।

Q8.भारतीय इतिहासमध्यम

मिलिंदपन्हो में बौद्ध भिक्षु नागसेन और किस शासक का संवाद है?

  1. A.कनिष्क
  2. B.मिनांडर
  3. C.डेमेट्रियस
  4. D.अंतिआल्किदास
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मिनांडर

व्याख्या

सही उत्तर B, मिनांडर है। मिलिंदपन्हो का अर्थ है मिलिंद के प्रश्न, और मिलिंद दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में उत्तर-पश्चिम में शासन करने वाले हिंद-यवन राजा मिनांडर का भारतीय नाम है। इस पालि ग्रंथ में आत्मा, पुनर्जन्म और स्व के स्वरूप पर राजा के प्रश्न तथा भिक्षु नागसेन के उत्तर संकलित हैं, और अंत में राजा बौद्ध धर्म स्वीकार कर लेता है। यह यूनानी शासकों के भारतीय धर्म से संपर्क का प्रमुख उदाहरण है।

विकल्प A कनिष्क कुषाण शासक था और चौथी बौद्ध संगीति से जुड़ा है, इस ग्रंथ से नहीं। विकल्प C डेमेट्रियस पूर्ववर्ती हिंद-यवन शासक था जिसने भारत पर आक्रमण किया, पर संवाद का राजा वह नहीं है। विकल्प D अंतिआल्किदास वह हिंद-यवन राजा था जिसके दूत हेलियोडोरस ने बेसनगर में गरुड़ स्तंभ खड़ा किया।

Q9.भारतीय इतिहासकठिन

गौतमीपुत्र सातकर्णि की प्रशंसा करने वाली नासिक प्रशस्ति किसने जारी की थी?

  1. A.उसकी माता गौतमी बलश्री
  2. B.उसका पुत्र वाशिष्ठीपुत्र पुलुमावी
  3. C.परवर्ती राजा हाल
  4. D.वंश का संस्थापक सिमुक
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. उसकी माता गौतमी बलश्री

व्याख्या

सही उत्तर A, गौतमी बलश्री है। गौतमीपुत्र सातकर्णि की प्रशंसा करने वाला नासिक गुहा अभिलेख उसकी माता गौतमी बलश्री के नाम से, उसके पौत्र के शासनकाल में जारी हुआ था। इसमें राजा को शकों, यवनों और पह्लवों का नाश करने वाला, चारों वर्णों के मिश्रण को रोकने वाला तथा अनेक पर्वतश्रेणियों का स्वामी कहा गया है, और इसमें बौद्ध भिक्षुओं को भूमि अनुदान का उल्लेख भी है।

विकल्प B वाशिष्ठीपुत्र पुलुमावी अभिलेख उत्कीर्ण होते समय शासक अवश्य था, पर अभिलेख उसकी दादी के नाम से जारी हुआ। विकल्प C हाल गाथासप्तशती संकलित करने वाला सातवाहन राजा था और इस अभिलेख से उसका संबंध नहीं। विकल्प D सिमुक ने गौतमीपुत्र से बहुत पहले वंश की स्थापना की थी, इसलिए वह उसकी प्रशंसा नहीं कर सकता था।

Q10.भारतीय इतिहासमध्यम

कनिष्क के शासनकाल में हुई चौथी बौद्ध संगीति किस क्षेत्र में आयोजित की गई थी?

  1. A.राजगृह
  2. B.वैशाली
  3. C.पाटलिपुत्र
  4. D.कश्मीर
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. कश्मीर

व्याख्या

सही उत्तर D, कश्मीर है। चौथी बौद्ध संगीति कुषाण शासक कनिष्क प्रथम के संरक्षण में कश्मीर में हुई थी। इसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की और अश्वघोष उपाध्यक्ष रहे। इस संगीति में त्रिपिटक पर भाष्य संकलित किए गए और इसी के साथ बौद्ध धर्म महायान तथा हीनयान संप्रदायों में स्पष्ट रूप से बँट गया। परंपरा के अनुसार इसकी कार्यवाही ताम्रपत्रों पर उत्कीर्ण कर स्तूप में रखी गई थी, और इसी कारण बौद्ध साहित्य में कनिष्क को दूसरा अशोक कहा गया। चारों संगीतियों के स्थान, संरक्षक और अध्यक्ष परीक्षाओं की निश्चित सूची हैं।

विकल्प A राजगृह में बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तुरंत बाद अजातशत्रु के संरक्षण में पहली संगीति हुई, जिसकी अध्यक्षता महाकस्सप ने की। विकल्प B वैशाली में लगभग सौ वर्ष बाद कालाशोक के समय दूसरी संगीति हुई। विकल्प C पाटलिपुत्र में अशोक के संरक्षण में मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में तीसरी संगीति हुई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुंग वंश की स्थापना किसने और कैसे की?

लगभग 185 ईसा पूर्व पुष्यमित्र शुंग ने इसकी स्थापना की। वह अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ का सेनापति था और परंपरा के अनुसार सेना के निरीक्षण के समय उसने अपने स्वामी की हत्या कर सिंहासन ले लिया। उसने पाटलिपुत्र को ही राजधानी बनाए रखा और अश्वमेध यज्ञ किया, जिसे मौर्यों के बौद्ध संरक्षण के बाद ब्राह्मण कर्मकांड का पुनरुत्थान माना जाता है।

रुद्रदामन प्रथम का जूनागढ़ शिलालेख क्यों महत्वपूर्ण है?

यह लगभग 150 ईस्वी का है और परिष्कृत संस्कृत में लिखा पहला बड़ा अभिलेख है, जबकि उस समय राजकीय अभिलेख सामान्यतः प्राकृत में होते थे। इसमें सुदर्शन झील की मरम्मत का वर्णन है, जो चंद्रगुप्त मौर्य के समय बनी और अशोक के समय सुधारी गई थी। यह उसी जूनागढ़ शिला पर उत्कीर्ण है जिस पर अशोक के बृहद् शिलालेख भी हैं।

बौद्ध धर्म में कनिष्क का क्या योगदान था?

कनिष्क ने कश्मीर में चौथी बौद्ध संगीति बुलाई, जिसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की और अश्वघोष उपाध्यक्ष रहे; वहीं महायान संप्रदाय ने स्पष्ट रूप लिया। उसने बौद्ध विद्वानों को संरक्षण दिया, अपने सिक्कों पर बुद्ध की आकृति अंकित करवाई और अपने साम्राज्य के व्यापार मार्गों से बौद्ध धर्म मध्य एशिया तथा चीन तक पहुँचा।

सातवाहन राजाओं के नाम माता के नाम पर क्यों होते थे?

सातवाहन शासक मातृनाम का प्रयोग करते थे, इसलिए नाम माता के कुल से आरंभ होता है, जैसे गौतमी के पुत्र गौतमीपुत्र सातकर्णि और वाशिष्ठी के पुत्र वाशिष्ठीपुत्र पुलुमावी। उत्तराधिकार पिता से पुत्र को ही मिलता था, इसलिए यह मातृसत्ता नहीं बल्कि नामकरण की परंपरा थी, फिर भी इससे राजपरिवार में स्त्रियों का ऊँचा स्थान दिखता है।

गांधार और मथुरा कला शैली में क्या अंतर है?

गांधार शैली उत्तर-पश्चिम में विकसित हुई, स्लेटी शिस्ट पत्थर का प्रयोग करती थी और बुद्ध को यूनानी-रोमन नयन-नक्श, लहरदार केश तथा भारी सिलवटों वाले वस्त्रों के साथ दिखाती थी। मथुरा शैली मथुरा के आसपास पनपी, चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग करती थी और अधिक देशी तथा बलिष्ठ आकृतियाँ गढ़ती थी; उसने बुद्ध के साथ जैन तीर्थंकर और हिंदू देवता भी बनाए। दोनों ने पहली बार बुद्ध को मानव रूप में गढ़ा।

स्रोत

  • थीम्स इन इंडियन हिस्ट्री भाग एक (कक्षा बारह), राजा, किसान और नगर अध्याय — एनसीईआरटी
  • हमारे अतीत एक (कक्षा छह), व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री अध्याय — एनसीईआरटी
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