भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण संधियां और समझौते
परीक्षोपयोगी नोट्स: पुरंदर, इलाहाबाद, सालबाई, बसीन, सुगौली, लखनऊ समझौता, गांधी-इरविन, पूना पैक्ट, ताशकंद और शिमला समझौते के वर्ष, पक्ष तथा परिणाम।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारतीय इतिहास का लगभग प्रत्येक युद्ध किसी संधि पर समाप्त हुआ और स्वतंत्रता संग्राम का लगभग प्रत्येक राजनीतिक विवाद किसी समझौते पर। परीक्षक इस विषय को पसंद करते हैं क्योंकि प्रत्येक संधि तथ्यों की एक पंक्ति है: एक वर्ष, दो पक्ष, एक स्थान और एक परिणाम। प्रश्न जोड़ी मिलान के रूप में, किस युद्ध को समाप्त किया इस रूप में, अथवा कालक्रम के रूप में पूछा जाता है। यह नोट संधियों को तीन वर्गों में रखता है: कंपनी के विस्तार के युद्ध, सीमावर्ती संधियां, तथा राष्ट्रीय आंदोलन और स्वतंत्रता के बाद के समझौते।
कंपनी के विस्तार की संधियां
कंपनी का उत्थान उसकी संधियों से पढ़ा जा सकता है। 1757 की अलीनगर की संधि ने प्लासी से कुछ महीने पहले रॉबर्ट क्लाइव और सिराजुद्दौला के बीच अस्थायी समझौता कराया। 1764 के बक्सर युद्ध के बाद 1765 की इलाहाबाद की संधि क्लाइव ने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय तथा अवध के नवाब शुजाउद्दौला के साथ की; कंपनी को बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी अर्थात राजस्व वसूली का अधिकार मिला, और इसी दस्तावेज से भारत में ब्रिटिश शासन का आरंभ माना जाता है। इससे पहले 1665 में पुरंदर की संधि शिवाजी तथा औरंगजेब की ओर से मिर्जा राजा जय सिंह के बीच हुई थी, जिसमें शिवाजी ने तेईस किले सौंपे और बारह अपने पास रखे।
| संधि | वर्ष | पक्ष और परिणाम |
|---|---|---|
| पुरंदर | 1665 | शिवाजी और जय सिंह; शिवाजी ने 23 किले छोड़े |
| अलीनगर | 1757 | क्लाइव और सिराजुद्दौला; प्लासी से पहले संधि |
| इलाहाबाद | 1765 | क्लाइव, शाह आलम द्वितीय और शुजाउद्दौला; बंगाल, बिहार, ओडिशा की दीवानी |
| मद्रास | 1769 | हैदर अली के साथ प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध की समाप्ति |
| सूरत | 1775 | रघुनाथ राव और बंबई सरकार; प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का कारण |
| सालबाई | 1782 | वॉरेन हेस्टिंग्स और महादजी सिंधिया; प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध की समाप्ति |
| मंगलोर | 1784 | टीपू सुल्तान और कंपनी; द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध की समाप्ति |
| श्रीरंगपट्टनम | 1792 | टीपू सुल्तान और कॉर्नवालिस; तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध की समाप्ति, आधा मैसूर छिना |
| बसीन | 1802 | पेशवा बाजीराव द्वितीय ने सहायक संधि स्वीकार की; द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध का कारण |
| देवगांव और सुर्जी-अर्जुनगांव | 1803 | भोंसले और सिंधिया का समर्पण; द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध की समाप्ति |
| मंदसौर | 1818 | होल्कर; तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध और पेशवा पद की समाप्ति |
युद्ध और उन्हें लड़ने वाले गवर्नर-जनरल
युद्ध को व्यक्ति से जोड़ दें तो संधि स्वयं अपनी जगह बैठ जाती है। हैदर अली ने प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध लड़ा, जिसे 1769 की मद्रास संधि ने समाप्त किया। वॉरेन हेस्टिंग्स ने प्रथम आंग्ल-मराठा तथा द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध लड़े, जिन्हें सालबाई और मंगलोर ने समाप्त किया। कॉर्नवालिस ने तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध लड़ा, जो 1792 में श्रीरंगपट्टनम की संधि पर समाप्त हुआ। सहायक संधि प्रणाली के जनक वेलेजली ने 1799 का चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध लड़ा, जिसमें टीपू सुल्तान मारे गए, तथा द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध भी। लॉर्ड हेस्टिंग्स ने आंग्ल-नेपाल युद्ध और तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध लड़े। डलहौजी ने द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के बाद पंजाब और द्वितीय आंग्ल-बर्मा युद्ध के बाद निचले बर्मा का विलय किया।
सीमावर्ती और रियासती संधियां
- अमृतसर की संधि, 1809: रणजीत सिंह और कंपनी ने सतलुज को सिख विस्तार की सीमा माना।
- सुगौली की संधि, 1816: आंग्ल-नेपाल युद्ध की समाप्ति; नेपाल ने सिक्किम, कुमाऊं और गढ़वाल छोड़े तथा ब्रिटिश रेजिडेंट स्वीकार किया।
- यांडबू की संधि, 1826: प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध की समाप्ति; असम, मणिपुर, अराकान और तेनासरिम कंपनी को मिले।
- लाहौर की संधि, 1846: प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध की समाप्ति; उसी वर्ष अमृतसर की दूसरी संधि से कश्मीर गुलाब सिंह को पचहत्तर लाख रुपये में दिया गया।
- गंडमक की संधि, 1879: द्वितीय आंग्ल-अफगान युद्ध के दौरान अफगानिस्तान के साथ।
- सहायक संधि: सबसे पहले 1798 में हैदराबाद के निजाम ने वेलेजली के अधीन स्वीकार की, फिर मैसूर, अवध और मराठों ने।
राष्ट्रीय आंदोलन के समझौते
1916 के लखनऊ समझौते ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग को स्वशासन की संयुक्त मांग पर लाया, जिसमें कांग्रेस ने पृथक निर्वाचक मंडल स्वीकार किया; तिलक और जिन्ना इसके मुख्य शिल्पकार थे और उसी अधिवेशन में कांग्रेस के नरम तथा गरम दल भी एक हुए। गांधी-इरविन समझौता, जिसे दिल्ली समझौता भी कहते हैं, 5 मार्च 1931 को हुआ: गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित करने और द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने पर सहमति दी, और सरकार ने राजनीतिक बंदियों की रिहाई तथा घरेलू उपयोग के लिए नमक बनाने की अनुमति दी। 24 सितंबर 1932 का पूना पैक्ट यरवदा जेल में अनशन कर रहे गांधीजी और डॉ. बी. आर. आंबेडकर के बीच हुआ; इसने सांप्रदायिक निर्णय से दलित वर्गों को मिले पृथक निर्वाचक मंडल के स्थान पर प्रांतीय विधानमंडलों में उनके लिए अधिक आरक्षित सीटें दीं, जो संयुक्त निर्वाचक मंडल से भरी जातीं। आगे 1944 का सी. आर. फार्मूला, उसी वर्ष की गांधी-जिन्ना वार्ता और 1945 का देसाई-लियाकत समझौता आते हैं।
स्वतंत्रता के बाद के समझौते
अक्टूबर 1947 के विलय पत्र से जम्मू-कश्मीर भारत में सम्मिलित हुआ। 1950 का नेहरू-लियाकत समझौता दोनों देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़ा था। चीन के साथ पंचशील समझौता 29 अप्रैल 1954 को हुआ और उसमें शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पांच सिद्धांत रखे गए। 1960 की सिंधु जल संधि ने विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु प्रणाली की छह नदियां भारत और पाकिस्तान के बीच बांटीं। 10 जनवरी 1966 के ताशकंद घोषणापत्र ने 1965 का युद्ध समाप्त किया; इस पर लाल बहादुर शास्त्री और अयूब खान ने सोवियत प्रधानमंत्री कोसिगिन की मध्यस्थता में हस्ताक्षर किए और उसी रात शास्त्री जी का ताशकंद में निधन हो गया। 1971 के युद्ध के बाद 2 जुलाई 1972 के शिमला समझौते पर इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किए, जिसने युद्धविराम रेखा को नियंत्रण रेखा में बदला और दोनों देशों को विवाद द्विपक्षीय रूप से सुलझाने के लिए बाध्य किया। आंतरिक समझौते भी इसी क्रम में आए: 1985 में पंजाब समझौता तथा असम समझौता, 1986 में मिजो समझौता और 1987 में भारत-श्रीलंका समझौता।
परीक्षा की दृष्टि से
तीन प्रकार के प्रश्न बार-बार आते हैं। पहला, संधि को उस युद्ध से मिलाना जिसे उसने समाप्त किया: मद्रास प्रथम मैसूर युद्ध से, मंगलोर द्वितीय से, श्रीरंगपट्टनम तृतीय से, सालबाई प्रथम मराठा युद्ध से और देवगांव द्वितीय से। दूसरा, पक्षों के नाम: इलाहाबाद में क्लाइव, बसीन में बाजीराव द्वितीय, सुगौली में नेपाल, ताशकंद में शास्त्री और अयूब खान, शिमला में इंदिरा गांधी और भुट्टो। तीसरा, स्वतंत्रता संग्राम के समझौतों की सही तारीखें। सामान्य जाल: सूरत की संधि ने प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध शुरू कराया और सालबाई ने समाप्त किया; बसीन ने दूसरा मराठा युद्ध शुरू कराया; पूना पैक्ट ने सांप्रदायिक निर्णय में संशोधन किया, आरक्षण समाप्त नहीं किया; और कॉर्नवालिस तृतीय मैसूर युद्ध से जुड़े हैं, किसी मराठा युद्ध से नहीं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पुरंदर की संधि | 1665, शिवाजी और मिर्जा राजा जय सिंह; 23 किले सौंपे |
|---|---|
| इलाहाबाद की संधि | 1765, कंपनी को बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी |
| सालबाई की संधि | 1782, प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध की समाप्ति |
| मंगलोर की संधि | 1784, टीपू सुल्तान के साथ द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध की समाप्ति |
| श्रीरंगपट्टनम की संधि | 1792, तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध की समाप्ति; आधा मैसूर छिना |
| बसीन की संधि | 1802, पेशवा बाजीराव द्वितीय ने सहायक संधि स्वीकार की |
| सुगौली की संधि | 1816, नेपाल के साथ; सिक्किम, कुमाऊं और गढ़वाल छूटे |
| यांडबू की संधि | 1826, प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध की समाप्ति |
| लखनऊ समझौता | 1916, कांग्रेस और मुस्लिम लीग; तिलक तथा जिन्ना |
| गांधी-इरविन समझौता | 5 मार्च 1931, जिसे दिल्ली समझौता भी कहते हैं |
| पूना पैक्ट | 24 सितंबर 1932, गांधी और बी. आर. आंबेडकर |
| ताशकंद और शिमला | 10 जनवरी 1966 (शास्त्री और अयूब खान); 2 जुलाई 1972 (इंदिरा गांधी और भुट्टो) |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
किस संधि द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी प्राप्त हुई?
- A.अलीनगर की संधि
- B.इलाहाबाद की संधि
- C.सालबाई की संधि
- D.पुरंदर की संधि
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यह 1765 में रॉबर्ट क्लाइव ने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय तथा अवध के नवाब शुजाउद्दौला के साथ, 1764 के बक्सर युद्ध में कंपनी की विजय के बाद की थी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1782 में हुई सालबाई की संधि ने किस युद्ध को समाप्त किया?
- A.प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध
- B.द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध
- C.द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध
- D.तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध
उत्तर देखें
यह युद्ध 1775 की सूरत की संधि के बाद आरंभ हुआ था, जिसके द्वारा बंबई सरकार ने पेशवा पद पर रघुनाथ राव के दावे का समर्थन किया, और यह 1782 में वॉरेन हेस्टिंग्स तथा महादजी सिंधिया के बीच सालबाई की संधि से समाप्त हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1802 की बसीन की संधि ईस्ट इंडिया कंपनी और किस शासक के बीच हुई थी?
- A.टीपू सुल्तान
- B.पेशवा बाजीराव द्वितीय
- C.रणजीत सिंह
- D.हैदराबाद का निजाम
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पूना में होल्करों से पराजित होकर पेशवा ने कंपनी की शरण ली और दिसंबर 1802 में बसीन की संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उन्होंने वेलेजली की सहायक संधि तथा अपनी राजधानी में ब्रिटिश सेना रखना स्वीकार किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1792 की श्रीरंगपट्टनम की संधि किस युद्ध के अंत में हुई थी?
- A.प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध
- B.द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध
- C.तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध
- D.चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध
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यह 1790 से 1792 तक टीपू सुल्तान और लॉर्ड कॉर्नवालिस के बीच लड़ा गया, जिसमें निजाम तथा मराठों ने कंपनी का साथ दिया, और श्रीरंगपट्टनम की संधि से समाप्त हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1932 का पूना पैक्ट महात्मा गांधी और किसके बीच हुआ था?
- A.डॉ. बी. आर. आंबेडकर
- B.लॉर्ड इरविन
- C.मुहम्मद अली जिन्ना
- D.मदन मोहन मालवीय
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अगस्त 1932 के सांप्रदायिक निर्णय ने दलित वर्गों को पृथक निर्वाचक मंडल दिया था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता किस वर्ष हुआ?
- A.1906
- B.1909
- C.1916
- D.1919
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लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने स्वशासन की संयुक्त मांग रखी और कांग्रेस ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल स्वीकार किया; बाल गंगाधर तिलक तथा मुहम्मद अली जिन्ना इसके मुख्य शिल्पकार थे, और 1907 के सूरत विभाजन से अलग हुए कांग्रेस के नरम तथा गरम दल भी…
पूरी व्याख्या पढ़ें →सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित करने वाला गांधी-इरविन समझौता किस तारीख को हुआ?
- A.5 मार्च 1931
- B.12 मार्च 1930
- C.24 सितंबर 1932
- D.8 अगस्त 1942
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इसे दिल्ली समझौता भी कहा जाता है और इस पर महात्मा गांधी तथा वायसराय लॉर्ड इरविन ने हस्ताक्षर किए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1816 की सुगौली की संधि अंग्रेजों और किसके बीच हुई थी?
- A.बर्मा
- B.नेपाल
- C.अफगानिस्तान
- D.भूटान
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सुगौली की संधि ने लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय 1814 से 1816 तक लड़े गए आंग्ल-नेपाल युद्ध को समाप्त किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1966 का ताशकंद घोषणापत्र लाल बहादुर शास्त्री और किसके बीच हुआ था?
- A.जुल्फिकार अली भुट्टो
- B.अयूब खान
- C.लियाकत अली खान
- D.याह्या खान
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यह घोषणापत्र 10 जनवरी 1966 को सोवियत संघ के ताशकंद में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान ने, सोवियत प्रधानमंत्री एलेक्सी कोसिगिन की मध्यस्थता में, हस्ताक्षरित किया; इसने 1965 का युद्ध समाप्त किया और युद्ध से पहले की स्थितियों पर सेनाएं वापस बुलाने की व्यवस्था…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत और पाकिस्तान के बीच 1972 का शिमला समझौता मुख्य रूप से किसके लिए स्मरण किया जाता है?
- A.सिंधु प्रणाली की नदियों के बंटवारे के लिए
- B.कश्मीर में युद्धविराम रेखा को नियंत्रण रेखा में बदलने के लिए
- C.शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पांच सिद्धांतों के लिए
- D.दोनों देशों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए
उत्तर देखें
शिमला समझौते पर 1971 के युद्ध और बांग्लादेश के निर्माण के बाद 2 जुलाई 1972 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तथा राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
- A.हेक्टर मुनरो - बक्सर का युद्ध
- B.लॉर्ड हेस्टिंग्स - आंग्ल-नेपाल युद्ध
- C.लॉर्ड वेलेजली - चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध
- D.लॉर्ड कॉर्नवालिस - तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध
उत्तर देखें
लॉर्ड कॉर्नवालिस ने 1790 से 1792 तक टीपू सुल्तान के विरुद्ध तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध लड़ा और उसे श्रीरंगपट्टनम की संधि से समाप्त किया; तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध से उनका कोई संबंध नहीं था, जो 1817 और 1818 में, उनके समय के बहुत बाद लड़ा गया और मंदसौर की संधि तथा पेशवा…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
किस संधि को भारत में ब्रिटिश शासन का आरंभ कहा जाता है?
1765 की इलाहाबाद की संधि को। बक्सर युद्ध के बाद रॉबर्ट क्लाइव ने शाह आलम द्वितीय तथा शुजाउद्दौला के साथ इस पर हस्ताक्षर किए और कंपनी को बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी मिल गई, जिससे वह पूर्वी भारत की वास्तविक शासक बन गई।
प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध किस संधि से समाप्त हुआ?
1782 की सालबाई की संधि से, जो वॉरेन हेस्टिंग्स और महादजी सिंधिया के बीच हुई। इसने युद्ध से पहले की स्थिति बहाल की और कंपनी को मराठों के साथ लगभग बीस वर्ष की शांति दी। युद्ध स्वयं 1775 की सूरत की संधि के बाद आरंभ हुआ था।
पूना पैक्ट, 1932 में क्या तय हुआ?
गांधीजी और डॉ. बी. आर. आंबेडकर इस पर सहमत हुए कि दलित वर्गों को सांप्रदायिक निर्णय के अनुसार पृथक निर्वाचक मंडल नहीं मिलेगा, बल्कि प्रांतीय विधानमंडलों में उनके लिए अधिक सीटें आरक्षित होंगी, जो संयुक्त निर्वाचक मंडल से भरी जाएंगी।
ताशकंद घोषणापत्र और शिमला समझौते पर किसने हस्ताक्षर किए?
10 जनवरी 1966 के ताशकंद घोषणापत्र पर प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने सोवियत प्रधानमंत्री कोसिगिन की मध्यस्थता में हस्ताक्षर किए। 2 जुलाई 1972 के शिमला समझौते पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तथा राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने।
आंग्ल-नेपाल युद्ध किस संधि से समाप्त हुआ?
1816 की सुगौली की संधि से, जिसके अंतर्गत नेपाल ने सिक्किम पर दावा छोड़ा, कुमाऊं, गढ़वाल तथा तराई के क्षेत्र दिए, काठमांडू में ब्रिटिश रेजिडेंट स्वीकार किया और कंपनी की सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती आरंभ हुई।
लखनऊ समझौते, 1916 का महत्व क्या था?
लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने स्वशासन की संयुक्त मांग अंग्रेजों के सामने रखी और कांग्रेस ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल स्वीकार किया। 1907 के सूरत विभाजन से अलग हुए कांग्रेस के नरम तथा गरम दल भी वहीं एक हुए।
स्रोत
- हमारे अतीत III (कक्षा आठ), अध्याय 2: व्यापार से साम्राज्य तक — एनसीईआरटी
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय, भाग तीन (कक्षा बारह) — एनसीईआरटी
- शिमला समझौता, 2 जुलाई 1972: समझौते का पाठ — विदेश मंत्रालय, भारत सरकार





