ब्रिटिश विस्तार और भारत के गवर्नर-जनरल: परीक्षा नोट्स
भारत में ब्रिटिश विस्तार के पूरे नोट्स: प्लासी और बक्सर के युद्ध, सहायक संधि, व्यपगत का सिद्धांत तथा वारेन हेस्टिंग्स से लॉर्ड कैनिंग तक हर गवर्नर-जनरल के सुधार।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

1757 से 1857 के बीच अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी कुछ कोठियों वाली एक व्यापारिक संस्था से बढ़कर लगभग पूरे उपमहाद्वीप की शासक बन गई। उसने यह काम युद्ध, संधि और विलय से किया, और हर चरण का संचालन बंगाल का गवर्नर, बाद में बंगाल का गवर्नर-जनरल और अंत में भारत का गवर्नर-जनरल करता रहा। परीक्षक इस अध्याय को पसंद करते हैं क्योंकि हर गवर्नर-जनरल से कुछ निश्चित युद्ध, संधियां और सुधार जुड़े हैं, इसलिए एक ही नाम को कई कोणों से पूछा जा सकता है।
नींव: प्लासी और बक्सर
प्लासी का युद्ध 23 जून 1757 को रॉबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच हुआ और उसका निर्णय लड़ाई से कम, मीर जाफर के विश्वासघात से अधिक हुआ। 22 अक्टूबर 1764 का बक्सर का युद्ध असली सैन्य परीक्षा थी, क्योंकि वहां हेक्टर मुनरो ने बंगाल के मीर कासिम, अवध के शुजाउद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेनाओं को हराया। इसके बाद 1765 की इलाहाबाद की संधि हुई, जिससे कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी अर्थात राजस्व वसूलने का अधिकार मिला। इसके बाद क्लाइव ने द्वैध शासन चलाया, जिसमें राजस्व कंपनी के पास रहा और प्रशासन की जिम्मेदारी नवाब के पास, और यह व्यवस्था अगले दशक के अकाल और कुशासन में समाप्त हुई।
वारेन हेस्टिंग्स से कॉर्नवालिस तक
वारेन हेस्टिंग्स 1772 से बंगाल का गवर्नर था और 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट के अंतर्गत बंगाल का पहला गवर्नर-जनरल बना। उसने द्वैध शासन समाप्त किया, कोषागार मुर्शिदाबाद से कलकत्ता लाया, 1774 में कलकत्ता में उच्चतम न्यायालय की स्थापना कराई और 1781 में कलकत्ता मदरसा खोला। उसने प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध लड़ा, जो 1782 की सालबाई की संधि से समाप्त हुआ, तथा द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध भी लड़ा। 1786 से गवर्नर-जनरल रहे लॉर्ड कॉर्नवालिस को 1793 के बंगाल के स्थायी बंदोबस्त, राजस्व और न्याय के कार्यों को अलग करने, कॉर्नवालिस संहिता तथा भारतीयों को ऊंचे पदों से दूर रखने की नीति के लिए याद किया जाता है, और इसी कारण उसे भारत में सिविल सेवा का जनक कहा जाता है।
वेलेजली, हेस्टिंग्स और बेंटिंक
1798 से गवर्नर-जनरल लॉर्ड वेलेजली ने सहायक संधि की व्यवस्था चलाई, जिसके अंतर्गत भारतीय शासक अपने खर्च पर ब्रिटिश सेना रखता था, अपने विदेशी संबंध छोड़ देता था और अपने दरबार में ब्रिटिश रेजीडेंट स्वीकार करता था। 1798 में हैदराबाद ने सबसे पहले इस पर हस्ताक्षर किए, और उसके बाद मैसूर, अवध, पेशवा तथा अन्य ने इसे माना। लॉर्ड हेस्टिंग्स ने 1816 की सुगौली की संधि से आंग्ल-नेपाल युद्ध समाप्त किया और तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध में मराठों को कुचला। 1833 के चार्टर एक्ट के अंतर्गत भारत का पहला गवर्नर-जनरल बने लॉर्ड विलियम बेंटिंक ने 1829 में सती प्रथा पर रोक लगाई, विलियम स्लीमैन की सहायता से ठगी का दमन किया और 1835 के मैकाले के प्रस्ताव को स्वीकार किया, जिसने उच्च शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी बना दिया।
| गवर्नर-जनरल | कार्यकाल | किसके लिए याद |
|---|---|---|
| वारेन हेस्टिंग्स | 1773 से 1785 | बंगाल का पहला गवर्नर-जनरल, रेग्युलेटिंग एक्ट, सालबाई की संधि |
| लॉर्ड कॉर्नवालिस | 1786 से 1793 | स्थायी बंदोबस्त, कॉर्नवालिस संहिता, सिविल सेवा |
| लॉर्ड वेलेजली | 1798 से 1805 | सहायक संधि, चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध |
| लॉर्ड हेस्टिंग्स | 1813 से 1823 | सुगौली की संधि, तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध |
| लॉर्ड विलियम बेंटिंक | 1828 से 1835 | सती प्रथा का अंत, भारत का पहला गवर्नर-जनरल |
| लॉर्ड डलहौजी | 1848 से 1856 | व्यपगत का सिद्धांत, रेल, तार, डाक |
| लॉर्ड कैनिंग | 1856 से 1862 | 1857 का विद्रोह, भारत का पहला वायसराय |
डलहौजी और व्यपगत का सिद्धांत
1848 से गवर्नर-जनरल रहे लॉर्ड डलहौजी ने अपने से पहले किसी भी अधिकारी से अधिक भूभाग मिलाया। व्यपगत के सिद्धांत के अनुसार जिस देशी रियासत के शासक की मृत्यु प्राकृतिक उत्तराधिकारी के बिना हो जाती, वह कंपनी के अधीन आ जाती और गोद लिए पुत्र को मान्यता नहीं मिलती। 1848 में सतारा, 1849 में जैतपुर और संबलपुर, 1852 में उदयपुर, 1853 में झांसी तथा 1854 में नागपुर इसी आधार पर मिलाए गए। अवध को 1856 में कुशासन के अलग आधार पर मिलाया गया। डलहौजी ने ही 1853 में बंबई से ठाणे तक पहली रेल चलाई, कलकत्ता से आगरा तक तार सेवा आरंभ की, आधे आने का डाक टिकट चलाया, लोक निर्माण विभाग बनाया और 1854 का वुड का घोषणापत्र स्वीकार किया, जिसे भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहते हैं। इन विलयों से उपजा असंतोष सीधे 1857 के विद्रोह तक पहुंचा।
गवर्नर-जनरल से वायसराय तक
1858 के भारत शासन अधिनियम ने सत्ता कंपनी से ब्रिटिश ताज को सौंप दी, नियंत्रण बोर्ड तथा निदेशक मंडल समाप्त किए, और भारत के राज्य सचिव का पद बनाया जिसकी सहायता के लिए भारत परिषद रखी गई। अब गवर्नर-जनरल को वायसराय भी कहा जाने लगा, अर्थात ताज का व्यक्तिगत प्रतिनिधि, और लॉर्ड कैनिंग के पास दोनों पदवियां रहीं। इस प्रकार पद का नाम तीन बार बदला और हर बार किसी अधिनियम से जुड़ा: 1773 तक बंगाल का गवर्नर, रेग्युलेटिंग एक्ट से बंगाल का गवर्नर-जनरल, 1833 के चार्टर एक्ट से भारत का गवर्नर-जनरल, और 1858 से वायसराय भी। पदवी के साथ अधिनियम याद रखना इन प्रश्नों का सबसे तेज उत्तर है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला, नाम और घटना की जोड़ी: प्लासी किसने लड़ी, सालबाई पर किसने हस्ताक्षर किए, सती प्रथा किसने बंद की, व्यपगत का सिद्धांत किसने चलाया। दूसरा, पद का नाम और उसे बनाने वाला अधिनियम, जिसमें 1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट, 1833 का चार्टर एक्ट और 1858 का भारत शासन अधिनियम तीन मील के पत्थर हैं। तीसरा, कालक्रम, जिसमें पूछा जाता है कि कौन सा विलय या सुधार पहले हुआ। सामान्य जाल हैं वारेन हेस्टिंग्स और लॉर्ड हेस्टिंग्स को मिला देना, बंगाल के पहले गवर्नर-जनरल को भारत का पहला गवर्नर-जनरल समझ लेना, तथा सहायक संधि को वेलेजली के स्थान पर डलहौजी से जोड़ देना। यह भी याद रखें कि प्लासी विश्वासघात से जीती गई जबकि बक्सर वास्तविक सैन्य विजय थी।
महत्वपूर्ण तथ्य
| प्लासी का युद्ध | 23 जून 1757, क्लाइव बनाम सिराजुद्दौला |
|---|---|
| बक्सर का युद्ध | 22 अक्टूबर 1764, मुनरो बनाम मीर कासिम, शुजाउद्दौला और शाह आलम द्वितीय |
| बंगाल की दीवानी | इलाहाबाद की संधि, 1765 |
| बंगाल का पहला गवर्नर-जनरल | वारेन हेस्टिंग्स, रेग्युलेटिंग एक्ट 1773 |
| स्थायी बंदोबस्त | लॉर्ड कॉर्नवालिस, 1793 |
| सहायक संधि | लॉर्ड वेलेजली, पहले 1798 में हैदराबाद ने स्वीकारी |
| सालबाई की संधि | 1782, प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध की समाप्ति |
| सुगौली की संधि | 1816, नेपाल के साथ, लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय |
| सती प्रथा पर रोक | लॉर्ड विलियम बेंटिंक, 1829 का विनियम 17 |
| भारत का पहला गवर्नर-जनरल | लॉर्ड विलियम बेंटिंक, चार्टर एक्ट 1833 |
| व्यपगत का सिद्धांत | लॉर्ड डलहौजी, 1848 से 1856 |
| पहली रेल लाइन | बंबई से ठाणे, 1853 |
| वुड का घोषणापत्र | 1854, भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा |
| अवध का विलय | 1856, कुशासन के आधार पर |
| भारत का पहला वायसराय | लॉर्ड कैनिंग, भारत शासन अधिनियम 1858 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
सालबाई की संधि निम्नलिखित में से किस वर्ष हुई थी?
- A.1817
- B.1769
- C.1800
- D.1782
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1782
व्याख्या
सही उत्तर D, 1782 है। सालबाई की संधि ने प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त किया, जो वारेन हेस्टिंग्स के कार्यकाल में लड़ा गया था। इसकी शर्तों के अनुसार साल्सेट कंपनी के पास रहा, रघुनाथराव का पेशवा पद का दावा छोड़ दिया गया और माधवराव द्वितीय को पेशवा माना गया। इससे अंग्रेजों को मराठों के साथ लगभग बीस वर्ष की शांति मिली।
विकल्प A गलत है क्योंकि 1817 में लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध आरंभ हुआ, जिसने मराठा शक्ति ही समाप्त कर दी। विकल्प B गलत है क्योंकि 1769 में मद्रास की संधि हुई थी, जिसने हैदर अली के विरुद्ध प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध समाप्त किया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1800 में ऐसी कोई संधि नहीं हुई; चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध एक वर्ष पहले 1799 में श्रीरंगपट्टनम में टीपू सुल्तान की मृत्यु के साथ समाप्त हो चुका था। केवल 1782 सालबाई से मेल खाता है।
बक्सर का युद्ध किस वर्ष लड़ा गया था?
- A.1757
- B.1764
- C.1765
- D.1772
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1764
व्याख्या
सही उत्तर B, 1764 है। बक्सर का युद्ध 22 अक्टूबर 1764 को वर्तमान बिहार में लड़ा गया, जहां हेक्टर मुनरो के नेतृत्व में कंपनी की सेना ने बंगाल के मीर कासिम, अवध के शुजाउद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेनाओं को हराया। प्लासी के विपरीत यह वास्तविक सैन्य विजय थी और इसी ने कंपनी को पूर्वी भारत की असली शक्ति बना दिया।
विकल्प A गलत है क्योंकि 1757 सिराजुद्दौला के विरुद्ध प्लासी के युद्ध का वर्ष है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1765 इलाहाबाद की संधि का वर्ष है, जो बक्सर के बाद हुई और जिससे कंपनी को बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा की दीवानी मिली, पर उस वर्ष कोई युद्ध नहीं हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि 1772 में वारेन हेस्टिंग्स बंगाल का गवर्नर बना और उसने द्वैध शासन समाप्त किया, वह भी युद्ध का वर्ष नहीं है।
बंगाल का पहला गवर्नर-जनरल कौन था?
- A.रॉबर्ट क्लाइव
- B.लॉर्ड कॉर्नवालिस
- C.वारेन हेस्टिंग्स
- D.लॉर्ड विलियम बेंटिंक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. वारेन हेस्टिंग्स
व्याख्या
सही उत्तर C, वारेन हेस्टिंग्स है। 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट ने बंगाल के गवर्नर का पदनाम बदलकर बंगाल का गवर्नर-जनरल कर दिया और उसे चार सदस्यों की परिषद दी, तथा वारेन हेस्टिंग्स, जो पहले से गवर्नर था, इस नई पदवी को धारण करने वाला पहला व्यक्ति बना। इसी अधिनियम ने कलकत्ता में उच्चतम न्यायालय का प्रावधान किया, जो 1774 में स्थापित हुआ।
विकल्प A गलत है क्योंकि रॉबर्ट क्लाइव बंगाल का गवर्नर और द्वैध शासन का जनक था, पर उसके समय गवर्नर-जनरल का पद था ही नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि लॉर्ड कॉर्नवालिस बाद में, 1786 में आया और स्थायी बंदोबस्त के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड विलियम बेंटिंक भारत का पहला गवर्नर-जनरल था, जो पदवी 1833 के चार्टर एक्ट ने बनाई, और यही इस प्रश्न का सबसे बड़ा जाल है।
बंगाल में स्थायी बंदोबस्त 1793 में किस गवर्नर-जनरल ने लागू किया था?
- A.वारेन हेस्टिंग्स
- B.लॉर्ड कॉर्नवालिस
- C.लॉर्ड वेलेजली
- D.लॉर्ड डलहौजी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लॉर्ड कॉर्नवालिस
व्याख्या
सही उत्तर B, लॉर्ड कॉर्नवालिस है। स्थायी बंदोबस्त, जिसे जमींदारी व्यवस्था भी कहते हैं, 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू हुआ। इसने जमींदारों को भूमि का स्वामी माना और उनकी राजस्व मांग सदा के लिए निश्चित कर दी, जिससे राज्य को निश्चित आय तो मिली पर बढ़ते उत्पादन में हिस्सा नहीं रहा। इसकी तैयारी जॉन शोर ने की थी और कॉर्नवालिस ने इसे लागू किया।
विकल्प A गलत है क्योंकि वारेन हेस्टिंग्स ने पंचवर्षीय और फिर वार्षिक इजारेदारी व्यवस्था आजमाई थी, स्थायी नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि लॉर्ड वेलेजली सहायक संधि और चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध से जुड़ा है, भू-राजस्व बंदोबस्त से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड डलहौजी आधी शताब्दी बाद आया और व्यपगत के सिद्धांत, रेल तथा तार के लिए याद किया जाता है।
परीक्षा में इसे प्रायः रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्थाओं के साथ पूछा जाता है, इसलिए यह भी याद रखें कि स्थायी बंदोबस्त जमींदार से, रैयतवाड़ी सीधे किसान से और महालवाड़ी पूरे गांव से राजस्व लेता था।
लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि को स्वीकार करने वाला पहला भारतीय शासक कौन था?
- A.अवध का नवाब
- B.पेशवा बाजीराव द्वितीय
- C.हैदराबाद का निजाम
- D.मैसूर का राजा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. हैदराबाद का निजाम
व्याख्या
सही उत्तर C, हैदराबाद का निजाम है। उसने वेलेजली के कार्यकाल के पहले ही वर्ष, 1798 में सहायक संधि पर हस्ताक्षर किए और अपनी फ्रांसीसी प्रशिक्षित सेना भंग करके अपने खर्च पर ब्रिटिश सेना रखना स्वीकार किया। इस व्यवस्था में शासक अपने विदेशी संबंधों का नियंत्रण भी छोड़ देता था और अपने दरबार में ब्रिटिश रेजीडेंट स्वीकार करता था, जिससे वह संरक्षित पर परावलंबी राजा बन जाता था।
विकल्प A गलत है क्योंकि अवध ने यह संधि तीन वर्ष बाद, 1801 में मानी और उसका खर्च चुकाने के लिए रुहेलखंड तथा निचला दोआब देना पड़ा। विकल्प B गलत है क्योंकि पेशवा ने 1802 में बेसीन की संधि की, जब होल्कर ने उसे पूना से बाहर कर दिया था। विकल्प D गलत है क्योंकि मैसूर 1799 में, चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध में टीपू सुल्तान की पराजय और मृत्यु के बाद इस व्यवस्था में आया।
निम्नलिखित में से किस रियासत का विलय व्यपगत के सिद्धांत के अंतर्गत नहीं हुआ था?
- A.सतारा
- B.झांसी
- C.नागपुर
- D.अवध
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. अवध
व्याख्या
सही उत्तर D, अवध है। अवध को लॉर्ड डलहौजी ने 1856 में मिलाया, किंतु इसका आधार नवाब वाजिद अली शाह का कथित कुशासन बताया गया, प्राकृतिक उत्तराधिकारी का अभाव नहीं। इसीलिए इसे व्यपगत वाले विलयों से अलग गिना जाता है, और यही अंतर इस प्रश्न का मर्म है।
विकल्प A गलत है क्योंकि सतारा 1848 में व्यपगत के सिद्धांत से मिलाई गई पहली रियासत थी। विकल्प B गलत है क्योंकि झांसी 1853 में राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद मिलाई गई, जब रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र का दावा अस्वीकार कर दिया गया, और इसी अस्वीकृति ने उन्हें 1857 के विद्रोह की नायिका बनाया। विकल्प C गलत है क्योंकि नागपुर 1854 में भोंसले वंश के रघुजी तृतीय की मृत्यु के बाद इसी सिद्धांत से मिलाया गया।
इस प्रश्न में यह भी ध्यान रखें कि व्यपगत के सिद्धांत से मिलाई गई रियासतों का क्रम सतारा 1848, जैतपुर और संबलपुर 1849, उदयपुर 1852, झांसी 1853 तथा नागपुर 1854 है, और अवध इस सूची से बाहर रहता है।
भारत में सती प्रथा 1829 में किसके कार्यकाल में कानूनन समाप्त की गई थी?
- A.लॉर्ड कॉर्नवालिस
- B.लॉर्ड विलियम बेंटिंक
- C.लॉर्ड कैनिंग
- D.लॉर्ड हेस्टिंग्स
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लॉर्ड विलियम बेंटिंक
व्याख्या
सही उत्तर B, लॉर्ड विलियम बेंटिंक है। 4 दिसंबर 1829 के विनियम 17 ने बंगाल प्रेसीडेंसी में सती को अवैध घोषित किया और उसे दंड न्यायालयों द्वारा दंडनीय बनाया, तथा 1830 में इसे मद्रास और बंबई तक बढ़ाया गया। बेंटिंक ने यह कदम राजा राम मोहन राय के समर्थन से उठाया, जिनके अभियान ने इस प्रथा के विरुद्ध जनमत तैयार किया था।
विकल्प A गलत है क्योंकि लॉर्ड कॉर्नवालिस 1793 में भारत छोड़ चुका था और उसका काम राजस्व तथा न्याय सुधार तक सीमित था, सामाजिक कानून तक नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि लॉर्ड कैनिंग बहुत बाद में आया, 1857 के विद्रोह के समय पद पर था और 1858 में पहला वायसराय बना। विकल्प D गलत है क्योंकि 1813 से 1823 तक गवर्नर-जनरल रहे लॉर्ड हेस्टिंग्स को सुगौली की संधि और तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के लिए याद किया जाता है।
1853 में आरंभ हुई भारत की पहली रेल किन दो स्थानों के बीच चली थी?
- A.हावड़ा और हुगली
- B.मद्रास और आरकाट
- C.बंबई और ठाणे
- D.कलकत्ता और आगरा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. बंबई और ठाणे
व्याख्या
सही उत्तर C, बंबई और ठाणे है। लगभग चौंतीस किलोमीटर लंबी भारत की पहली यात्री रेल लाइन 16 अप्रैल 1853 को लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में खुली, जिसने 1853 के अपने रेल ज्ञापन में भारतीय रेल जाल की योजना रखी थी। इसीलिए डलहौजी को भारतीय रेल का जनक कहा जाता है।
विकल्प A गलत है क्योंकि हावड़ा से हुगली की लाइन अगले वर्ष, 1854 में खुली और वह पूर्वी भारत की पहली थी, देश की नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि मद्रास से आरकाट की लाइन 1856 में बनी और वह दक्षिण भारत की पहली थी। विकल्प D गलत है क्योंकि कलकत्ता से आगरा पहली तार लाइन का मार्ग था, जिसे भी डलहौजी ने आरंभ किया, और रेल के साथ तार को मिला देना ही सामान्य जाल है।
यह भी याद रखें कि यह लाइन ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे ने चलाई थी और उसमें तीन इंजन साहिब, सिंध और सुल्तान लगे थे, जो परीक्षा में अलग से पूछा जाता है।
भारत का पहला वायसराय कौन था?
- A.लॉर्ड डलहौजी
- B.लॉर्ड कैनिंग
- C.लॉर्ड लिटन
- D.लॉर्ड रिपन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लॉर्ड कैनिंग
व्याख्या
सही उत्तर B, लॉर्ड कैनिंग है। 1858 के भारत शासन अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर सत्ता ब्रिटिश ताज को सौंप दी, इसलिए गवर्नर-जनरल को ताज के व्यक्तिगत प्रतिनिधि के रूप में वायसराय भी कहा जाने लगा। उस समय कैनिंग पद पर था और 1857 के विद्रोह का सामना कर चुका था, इसलिए वही कंपनी का अंतिम गवर्नर-जनरल और भारत का पहला वायसराय दोनों माना जाता है।
विकल्प A गलत है क्योंकि लॉर्ड डलहौजी 1856 में भारत छोड़ चुका था, अर्थात वायसराय का पद बनने से दो वर्ष पहले। विकल्प C गलत है क्योंकि लॉर्ड लिटन 1876 में आया और वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट तथा 1877 के दिल्ली दरबार के लिए याद किया जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड रिपन 1880 में आया और वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट रद्द करने तथा 1882 के स्थानीय स्वशासन प्रस्ताव के लिए जाना जाता है।
1833 का चार्टर एक्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने:
- A.भारत के गवर्नर-जनरल का पद बनाया
- B.कलकत्ता में उच्चतम न्यायालय की स्थापना की
- C.भारत के राज्य सचिव का पद समाप्त किया
- D.स्थायी बंदोबस्त लागू किया
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भारत के गवर्नर-जनरल का पद बनाया
व्याख्या
सही उत्तर A, इसने भारत के गवर्नर-जनरल का पद बनाया है। 1833 के चार्टर एक्ट ने बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया और उसे बंबई तथा मद्रास प्रेसीडेंसियों पर अधिकार दिया, उनकी विधि बनाने की शक्ति छीन ली, और परिषद में एक विधि सदस्य जोड़ा, जिस पद पर पहले लॉर्ड मैकाले आया। इसी अधिनियम ने कंपनी का व्यापार समाप्त करके उसे विशुद्ध प्रशासनिक संस्था बना दिया।
विकल्प B गलत है क्योंकि कलकत्ता का उच्चतम न्यायालय 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट से बना और 1774 में स्थापित हुआ। विकल्प C गलत है क्योंकि भारत के राज्य सचिव का पद समाप्त नहीं, बल्कि बनाया गया था, और वह भी 1858 में। विकल्प D गलत है क्योंकि स्थायी बंदोबस्त 1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस का राजस्व उपाय था और इस अधिनियम से उसका कोई संबंध नहीं।
1854 का वुड का घोषणापत्र, जिसे भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहा जाता है, किसके कार्यकाल में जारी हुआ?
- A.लॉर्ड विलियम बेंटिंक
- B.लॉर्ड डलहौजी
- C.लॉर्ड ऑकलैंड
- D.लॉर्ड कर्जन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लॉर्ड डलहौजी
व्याख्या
सही उत्तर B, लॉर्ड डलहौजी है। नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष चार्ल्स वुड ने यह घोषणापत्र 1854 में भेजा, जब डलहौजी गवर्नर-जनरल था। इसमें हर प्रांत में शिक्षा विभाग, कलकत्ता, बंबई तथा मद्रास में विश्वविद्यालय, गांव से महाविद्यालय तक विद्यालयों का जाल, निजी विद्यालयों को सहायता अनुदान और निचले स्तर पर देशी भाषाओं के प्रयोग की सिफारिश थी।
विकल्प A गलत है क्योंकि लॉर्ड विलियम बेंटिंक का संबंध 1835 के मैकाले के प्रस्ताव से है, जिसने उच्च शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी बनाया, इस घोषणापत्र से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि लॉर्ड ऑकलैंड को प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध के लिए याद किया जाता है और वह 1842 में भारत छोड़ चुका था। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड कर्जन 1899 में आया और 1904 के भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम तथा 1905 के बंगाल विभाजन से जुड़ा है।
कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी किस संधि से मिली थी?
- A.इलाहाबाद की संधि
- B.बेसीन की संधि
- C.सुगौली की संधि
- D.मद्रास की संधि
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. इलाहाबाद की संधि
व्याख्या
सही उत्तर A, इलाहाबाद की संधि है। बक्सर के युद्ध के बाद 1765 में हुई यह संधि रॉबर्ट क्लाइव ने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय तथा अवध के शुजाउद्दौला के साथ की। शाह आलम द्वितीय ने वार्षिक राशि के बदले कंपनी को दीवानी दी, अर्थात बंगाल, बिहार और उड़ीसा का राजस्व वसूलने और उसका प्रबंध करने का अधिकार, और इसी को भारत में ब्रिटिश शासन का कानूनी आरंभ माना जाता है।
विकल्प B गलत है क्योंकि 1802 की बेसीन की संधि ने पेशवा बाजीराव द्वितीय को सहायक संधि के अधीन किया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1816 की सुगौली की संधि ने आंग्ल-नेपाल युद्ध समाप्त किया और अंग्रेजों को कुमाऊं, गढ़वाल तथा तराई का भाग दिलाया। विकल्प D गलत है क्योंकि 1769 की मद्रास की संधि ने हैदर अली के साथ प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध को पारस्परिक वापसी की शर्तों पर समाप्त किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्लासी और बक्सर के युद्ध में क्या अंतर है?
1757 में लड़ी गई प्लासी मुख्यतः मीर जाफर के विश्वासघात से जीती गई और उसने कंपनी को बंगाल में राजनीतिक प्रभाव दिया। 1764 में लड़ी गई बक्सर बंगाल, अवध और मुगल सम्राट की संयुक्त सेनाओं पर वास्तविक सैन्य विजय थी, और उसी से 1765 की इलाहाबाद की संधि हुई जिससे कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिली।
भारत का पहला गवर्नर-जनरल कौन था?
लॉर्ड विलियम बेंटिंक। 1833 के चार्टर एक्ट ने पदनाम बंगाल के गवर्नर-जनरल से बदलकर भारत का गवर्नर-जनरल कर दिया और उस समय पद पर रहे बेंटिंक इस पदवी को धारण करने वाले पहले व्यक्ति बने। वारेन हेस्टिंग्स इससे पहले 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट के अंतर्गत बंगाल का पहला गवर्नर-जनरल था।
सहायक संधि क्या थी?
लॉर्ड वेलेजली द्वारा चलाई गई वह व्यवस्था जिसके अंतर्गत भारतीय शासक अपने क्षेत्र में ब्रिटिश सेना रखता और उसका खर्च देता था, अन्य शक्तियों से संबंध रखने का अधिकार छोड़ देता था, ब्रिटिश अनुमति के बिना किसी यूरोपीय को नौकरी नहीं दे सकता था और अपने दरबार में ब्रिटिश रेजीडेंट स्वीकार करता था। इसे सबसे पहले 1798 में हैदराबाद के निजाम ने माना।
व्यपगत के सिद्धांत से कौन सी रियासतें मिलाई गईं?
1848 में सतारा, 1849 में जैतपुर और संबलपुर, 1852 में उदयपुर, 1853 में झांसी तथा 1854 में नागपुर। अवध को 1856 में लिया गया, किंतु कथित कुशासन के अलग आधार पर, व्यपगत के सिद्धांत से नहीं।
लॉर्ड कॉर्नवालिस को भारत में सिविल सेवा का जनक क्यों कहते हैं?
उसने कंपनी की सेवा को आधुनिक रूप दिया, वेतन इतना ऊंचा किया कि निजी व्यापार और घूसखोरी घटे, पदोन्नति का आधार वरिष्ठता बनाया और 1793 की कॉर्नवालिस संहिता में आचरण के स्पष्ट नियम रखे। उसने भारतीयों को ऊंचे पदों से भी वंचित किया, जिसे उसके सुधार का नस्लभेदी पक्ष माना जाता है।
गवर्नर-जनरल वायसराय कब बना?
1858 में। भारत शासन अधिनियम, 1858 ने कंपनी का शासन समाप्त कर सत्ता ब्रिटिश ताज को सौंपी, इसलिए गवर्नर-जनरल को ताज के व्यक्तिगत प्रतिनिधि के रूप में वायसराय भी कहा जाने लगा। उस समय लॉर्ड कैनिंग पद पर था और उसे ही भारत का पहला वायसराय गिना जाता है।
स्रोत
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 3 (कक्षा 12), अध्याय 10: उपनिवेशवाद और देहात — एनसीईआरटी
- हमारे अतीत 3 (कक्षा 8), अध्याय 2: व्यापार से साम्राज्य तक — एनसीईआरटी
- भारत शासन अधिनियम, 1858 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय





