होयसल, काकतीय और यादव: दक्कन के राज्य नोट्स
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए होयसल, काकतीय, देवगिरि के यादव और कल्याणी के चालुक्य वंशों के नोट्स: उनकी राजधानियां, शासक, मंदिर, विद्वान तथा पतन।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

दसवीं से चौदहवीं शताब्दी के बीच दक्कन एक साम्राज्य नहीं, चार राज्यों में बंटा था। राष्ट्रकूटों के पतन के बाद कल्याणी के चालुक्यों ने पठार संभाला और उनके ही सामंतों से तीन राज्य निकले जो उनसे अधिक जीवित रहे: दक्षिण कर्नाटक में द्वारसमुद्र के होयसल, तेलंगाना में वारंगल के काकतीय और महाराष्ट्र में देवगिरि के यादव, जिन्हें सेउण भी कहा जाता है। परीक्षाएं इस अध्याय से जोड़े पूछती हैं: वंश के साथ राजधानी, शासक के साथ मंदिर और कवि या विद्वान के साथ आश्रयदाता। चारों राज्यों का अंत भी एक जैसा हुआ; अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफूर के अभियानों ने 1307 से 1311 के बीच इन सबको तोड़ दिया।
चालुक्यों की तीन शाखाएं
वंश पढ़ने से पहले शाखाएं अलग कर लीजिए। बादामी या वातापी के चालुक्यों ने लगभग 543 से 753 तक शासन किया और उनके शासक पुलकेशिन द्वितीय के दरबारी कवि रविकीर्ति ने ऐहोल अभिलेख की रचना की। वेंगी के पूर्वी चालुक्यों ने तटीय आंध्र पर शासन किया। इस अध्याय का विषय कल्याणी के पश्चिमी चालुक्य हैं, जिनकी स्थापना 973 में तैलप द्वितीय ने अंतिम राष्ट्रकूट शासक को हराकर की। उनकी राजधानी मान्यखेट से कल्याणी, अर्थात आज के बसवकल्याण, कर्नाटक चली गई।
कल्याणी के चालुक्य
इस वंश का सबसे बड़ा शासक विक्रमादित्य षष्ठ था, जिसने 1076 से 1126 तक राज्य किया और चालुक्य विक्रम संवत चलाया। उसके दरबार में विक्रमांकदेव चरित के रचयिता बिल्हण और विज्ञानेश्वर थे, जिनकी मिताक्षरा, याज्ञवल्क्य स्मृति पर टीका, हिंदू विधि का सर्वाधिक उद्धृत ग्रंथ बनी। सोमेश्वर तृतीय ने मानसोल्लास, जिसे अभिलषितार्थ चिंतामणि भी कहा जाता है, लिखा, जो पाकशास्त्र से हस्तिविद्या तक विषयों का विश्वकोश है। यह वंश वेंगी और तुंगभद्रा दोआब के लिए चोलों से एक शताब्दी से अधिक लड़ा और स्थापत्य में वेसर शैली को पूर्णता तक पहुंचाया, जिसका उदाहरण इटगी का महादेव मंदिर और लक्कुंडी का काशीविश्वेश्वर मंदिर है। बारहवीं शताब्दी में कलचुरि शासक बिज्जल के दरबार के मंत्री बसवन्ना ने वीरशैव या लिंगायत आंदोलन चलाया, जिसका अनुभव मंटप कल्याण में था और जिसकी वचन कविता कन्नड़ में रची गई। कलचुरियों के अधिकार हड़पने से वंश दुर्बल हुआ और 1189 तक होयसल, यादव तथा काकतीय उसका क्षेत्र बांट चुके थे।
द्वारसमुद्र के होयसल
होयसल आरंभ में पश्चिमी घाट के पहाड़ी सरदार थे और द्वारसमुद्र, अर्थात हासन जिले के आज के हलेबिड से शासन करते थे। विष्णुवर्धन ने लगभग 1108 से 1152 तक राज्य किया, तलकाड में चोलों को हराया और बेलूर का चेन्नकेशव मंदिर बनवाया; हलेबिड का होयसलेश्वर मंदिर भी उसी के काल में आरंभ हुआ। वैष्णव आचार्य रामानुज को उसके राज्य में शरण मिली और राजा जैन मत से वैष्णव मत की ओर मुड़ा। वीर बल्लाल द्वितीय ने चालुक्य अधीनता त्यागकर सम्राट की उपाधियां लीं। होयसल मंदिर मृदु सेलखड़ी पत्थर में जगती नामक ऊंचे चबूतरे पर बने हैं, जिनकी योजना तारे के आकार की है, स्तंभ खराद पर गढ़े हुए हैं और दीवारों पर मूर्ति पट्टियां हैं; दासोज और मल्लितम्म जैसे शिल्पी अपने पट्ट पर नाम अंकित करते थे। सोमनाथपुर का केशव मंदिर 1268 में बना। बेलूर, हलेबिड और सोमनाथपुर के होयसल मंदिर समूह 2023 में यूनेस्को विश्व विरासत सूची में सम्मिलित हुए। अंतिम शासक वीर बल्लाल तृतीय 1343 में मदुरै सल्तनत से लड़ते हुए मारा गया, तब तक विजयनगर का उदय हो चुका था।
वारंगल के काकतीय
काकतीय अनुमकोंडा, अर्थात आज के हनमकोंडा से उठे और बाद में ओरुगल्लु या वारंगल चले गए। रुद्रदेव, जिसे प्रतापरुद्र प्रथम भी कहा जाता है, ने लगभग 1163 में चालुक्यों से स्वतंत्रता घोषित की और हनमकोंडा का सहस्र स्तंभ मंदिर बनवाया। सबसे दीर्घकालिक शासक गणपतिदेव ने अभय शासन नामक अभिलेख जारी करके मोटुपल्ली बंदरगाह विदेशी व्यापारियों के लिए खोला, जिसमें व्यापारियों की सुरक्षा का वचन और शुल्क की दरें दी गई थीं। उसकी पुत्री रुद्रमा देवी ने स्वयं शासन किया और मध्यकालीन भारत की गिनी-चुनी रानियों में है; मार्को पोलो ने उसके राज्य की प्रशंसा लिखी। पालमपेट का रामप्पा अथवा रुद्रेश्वर मंदिर, जिसे 1213 में गणपतिदेव के सेनापति रेचर्ल रुद्र ने बनवाया, 2021 में यूनेस्को विश्व विरासत सूची में सम्मिलित हुआ। यह वंश पाखल और लकनवरम जैसे श्रृंखला तालाबों तथा वारंगल किले के काकतीय कला तोरण के लिए भी स्मरण किया जाता है। प्रतापरुद्र द्वितीय 1323 में दिल्ली सल्तनत की सेना से हार गया और वारंगल का नाम सुल्तानपुर कर दिया गया।
देवगिरि के यादव
यादव स्वयं को सेउण कहते थे और लगभग 1187 में भिल्लम पंचम के समय देवगिरि, जो बाद में दौलताबाद कहलाया, उनकी राजधानी बनी। सिंहण द्वितीय उनका सबसे शक्तिशाली शासक था, जिसने संगीत रत्नाकर के रचयिता शारंगदेव को आश्रय दिया; यह ग्रंथ भारतीय संगीत का मानक मध्यकालीन शास्त्र है। महादेव और रामचंद्र के मंत्री हेमाद्रि ने चतुर्वर्ग चिंतामणि लिखा और उनके नाम पर काले पत्थर की, गारे के बिना जोड़ी जाने वाली हेमाडपंती मंदिर शैली प्रसिद्ध हुई। मराठी प्रशासन और भक्ति की भाषा बनी: ज्ञानेश्वर ने अपनी गीता टीका ज्ञानेश्वरी 1290 में रामचंद्र के शासनकाल में रची। अलाउद्दीन खिलजी ने 1296 में देवगिरि पर आक्रमण किया, मलिक काफूर ने 1307 में उसे झुकाया और लगभग 1317 में अंतिम शासक हरपाल का वध कर दिया गया, जिससे वंश समाप्त हो गया।
चार राज्यों की तुलना
| वंश | राजधानी | संस्थापक | प्रसिद्ध शासक | स्मारक या ग्रंथ |
|---|---|---|---|---|
| कल्याणी के चालुक्य | कल्याणी, पहले मान्यखेट | तैलप द्वितीय, 973 | विक्रमादित्य षष्ठ | इटगी का महादेव मंदिर; मिताक्षरा |
| होयसल | द्वारसमुद्र, हलेबिड | नृप काम द्वितीय तथा आरंभिक होयसल सरदार | विष्णुवर्धन | बेलूर का चेन्नकेशव मंदिर |
| काकतीय | अनुमकोंडा, फिर वारंगल | रुद्रदेव, लगभग 1163 में स्वतंत्र | गणपतिदेव और रुद्रमा देवी | पालमपेट का रामप्पा मंदिर |
| यादव अथवा सेउण | देवगिरि | भिल्लम पंचम, लगभग 1187 | सिंहण द्वितीय और रामचंद्र | संगीत रत्नाकर; ज्ञानेश्वरी |
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से प्रायः मिलान वाले प्रश्न आते हैं। वंश के साथ राजधानी याद कीजिए: होयसल और द्वारसमुद्र, काकतीय और वारंगल, यादव और देवगिरि, पश्चिमी चालुक्य और कल्याणी। शासक के साथ स्मारक याद कीजिए: विष्णुवर्धन और बेलूर, गणपतिदेव तथा उसके सेनापति रेचर्ल रुद्र के बनवाए रामप्पा मंदिर, रुद्रदेव और सहस्र स्तंभ मंदिर। आश्रयदाता के साथ ग्रंथ याद कीजिए: विक्रमादित्य षष्ठ के साथ मिताक्षरा और विक्रमांकदेव चरित, सोमेश्वर तृतीय के साथ मानसोल्लास, सिंहण द्वितीय के साथ संगीत रत्नाकर, रामचंद्र के साथ ज्ञानेश्वरी। जाल दो हैं: चालुक्यों की तीन शाखाएं, बादामी, वेंगी तथा कल्याणी, और दो विश्व विरासत वर्ष, रामप्पा मंदिर के लिए 2021 तथा होयसल मंदिर समूह के लिए 2023।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कल्याणी के पश्चिमी चालुक्य | 973 में तैलप द्वितीय द्वारा स्थापित; राजधानी मान्यखेट और कल्याणी, अर्थात आज का बसवकल्याण |
|---|---|
| कल्याणी का सबसे बड़ा शासक | विक्रमादित्य षष्ठ, 1076 से 1126, जिसने चालुक्य विक्रम संवत चलाया |
| मिताक्षरा | विज्ञानेश्वर द्वारा याज्ञवल्क्य स्मृति पर टीका, विक्रमादित्य षष्ठ का दरबार |
| लिंगायत आंदोलन | बारहवीं शताब्दी में कलचुरि शासक बिज्जल के दरबार में बसवन्ना द्वारा; कल्याण में अनुभव मंटप |
| होयसल राजधानी | द्वारसमुद्र, अर्थात आज का हलेबिड, हासन जिला, कर्नाटक |
| होयसल मंदिर | बेलूर का चेन्नकेशव, हलेबिड का होयसलेश्वर, सोमनाथपुर का केशव, 1268; सेलखड़ी पत्थर, जगती पर तारे के आकार की योजना |
| काकतीय राजधानी | अनुमकोंडा, अर्थात आज का हनमकोंडा, फिर ओरुगल्लु या वारंगल |
| मोटुपल्ली अभिलेख | गणपतिदेव का अभय शासन, जिसमें विदेशी व्यापारियों को सुरक्षा और निश्चित शुल्क का वचन |
| रामप्पा मंदिर | पालमपेट, मुलुगु जिला, तेलंगाना, 1213 में रेचर्ल रुद्र द्वारा निर्मित; यूनेस्को विश्व विरासत 2021 |
| यादव राजधानी | देवगिरि, बाद में दौलताबाद; लगभग 1187 में भिल्लम पंचम के समय स्वतंत्र |
| संगीत रत्नाकर | देवगिरि के सिंहण द्वितीय के दरबार में शारंगदेव द्वारा रचित |
| अंतिम शासक | कल्याणी का सोमेश्वर चतुर्थ, होयसल वीर बल्लाल तृतीय, काकतीय प्रतापरुद्र द्वितीय, यादव हरपाल |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
होयसल वंश का संबंध किस राज्य से था?
- A.कर्नाटक
- B.गुजरात
- C.तमिलनाडु
- D.मध्य प्रदेश
उत्तर देखें
होयसल द्वारसमुद्र, अर्थात कर्नाटक के हासन जिले के आज के हलेबिड से शासन करते थे और बेलूर, हलेबिड तथा सोमनाथपुर के उनके प्रसिद्ध मंदिर इसी राज्य में हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन काकतीय राज्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण बंदरगाह था?
- A.काकिनाडा
- B.मोटुपल्ली
- C.मछलीपट्टनम (मसूलीपट्टनम)
- D.नेल्लूर
उत्तर देखें
काकतीय वंश के गणपतिदेव ने मोटुपल्ली में अभय शासन नामक अभिलेख जारी किया, जिसमें विदेशी व्यापारियों को उनके जहाजों और माल की सुरक्षा का आश्वासन दिया गया तथा देय शुल्क की दरें निर्धारित की गईं, और यह बंदरगाह बंगाल की खाड़ी के समुद्री व्यापार की ओर राज्य का मुख्य द्वार…
पूरी व्याख्या पढ़ें →रविकीर्ति निम्नलिखित में से किस वंश के शासक का दरबारी कवि था?
- A.चोल
- B.चेर
- C.पल्लव
- D.चालुक्य
उत्तर देखें
रविकीर्ति बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय का दरबारी कवि था और उसने ऐहोल अभिलेख की रचना की, जो संस्कृत की प्रशस्ति है और जिसमें हर्षवर्धन की पराजय सहित राजा की विजयों का वर्णन है तथा कवि स्वयं को कालिदास और भारवि के समान बताता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →होयसल राज्य की राजधानी कौन सा नगर थी?
- A.देवगिरि
- B.द्वारसमुद्र
- C.वारंगल
- D.कल्याणी
उत्तर देखें
सही उत्तर है B, द्वारसमुद्र, अर्थात कर्नाटक के हासन जिले का आज का हलेबिड, जहां होयसलेश्वर मंदिर आज भी खड़ा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रकूटों को अपदस्थ करके 973 में कल्याणी के पश्चिमी चालुक्य वंश की स्थापना किसने की?
- A.विक्रमादित्य षष्ठ
- B.सोमेश्वर तृतीय
- C.तैलप द्वितीय
- D.बिज्जल
उत्तर देखें
वह चालुक्य सामंत था, जिसने 973 में अंतिम राष्ट्रकूट शासक को अपदस्थ करके उस वंश की स्थापना की जिसने दो शताब्दियों से अधिक समय तक मान्यखेट और फिर कल्याणी से दक्कन पर शासन किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →याज्ञवल्क्य स्मृति पर प्रसिद्ध टीका मिताक्षरा विज्ञानेश्वर ने किस शासक के दरबार में लिखी?
- A.कल्याणी के विक्रमादित्य षष्ठ
- B.होयसल विष्णुवर्धन
- C.काकतीय गणपतिदेव
- D.यादव सिंहण द्वितीय
उत्तर देखें
1076 से 1126 तक चला उसका दीर्घ शासन पश्चिमी चालुक्यों का सांस्कृतिक शिखर था और उसके दरबार में राजा की प्रशंसा में विक्रमांकदेव चरित लिखने वाला बिल्हण तथा विज्ञानेश्वर दोनों थे, जिनकी मिताक्षरा भारत के बड़े भाग में हिंदू विधि का सर्वाधिक मान्य प्रमाण बनी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पालमपेट का रामप्पा अथवा रुद्रेश्वर मंदिर, जो 2021 में यूनेस्को विश्व विरासत सूची में सम्मिलित हुआ, किस काकतीय शासक के शासनकाल में बना?
- A.रुद्रदेव
- B.गणपतिदेव
- C.रुद्रमा देवी
- D.प्रतापरुद्र द्वितीय
उत्तर देखें
तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट का यह मंदिर 1213 में गणपतिदेव के सेनापति रेचर्ल रुद्र ने बनवाया और इसका नाम इसके शिल्पी रामप्पा के नाम पर है; भारत में यही एकमात्र मंदिर है जो अपने शिल्पी के नाम से जाना जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →रुद्रमा देवी, जो मध्यकालीन भारत में स्वयं शासन करने वाली गिनी-चुनी महिलाओं में थीं, किस वंश से संबंधित थीं?
- A.होयसल
- B.काकतीय
- C.देवगिरि के यादव
- D.पश्चिमी चालुक्य
उत्तर देखें
रुद्रमा देवी गणपतिदेव की पुत्री थीं और वारंगल में उनकी उत्तराधिकारी बनीं; उन्होंने सामंतों के विद्रोहों तथा यादवों और पांड्यों के आक्रमणों के बीच लगभग तीन दशक शासन किया और वेनिस के यात्री मार्को पोलो ने उनके शासन की प्रशंसा लिखी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भगवद्गीता पर मराठी टीका ज्ञानेश्वरी की रचना 1290 में किस शासक के काल में हुई?
- A.भिल्लम पंचम
- B.सिंहण द्वितीय
- C.देवगिरि के रामचंद्र
- D.वीर बल्लाल तृतीय
उत्तर देखें
इस अंतिम बड़े यादव शासक के काल में मराठी प्रशासन और भक्ति की भाषा के रूप में फली-फूली और संत ज्ञानेश्वर ने 1290 में ज्ञानेश्वरी, जिसे भावार्थदीपिका भी कहा जाता है, लिखी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारतीय संगीत का मानक मध्यकालीन ग्रंथ संगीत रत्नाकर शारंगदेव ने किस वंश के आश्रय में लिखा?
- A.देवगिरि के यादव
- B.वारंगल के काकतीय
- C.द्वारसमुद्र के होयसल
- D.कल्याणी के चालुक्य
उत्तर देखें
शारंगदेव सबसे शक्तिशाली यादव शासक सिंहण द्वितीय के दरबार में थे और उनका संगीत रत्नाकर वही ग्रंथ है जिससे हिंदुस्तानी तथा कर्नाटक, दोनों परंपराओं ने आगे राग और ताल का शास्त्र लिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बेलूर का चेन्नकेशव मंदिर किस होयसल शासक ने बनवाया?
- A.नृप काम द्वितीय
- B.विष्णुवर्धन
- C.वीर बल्लाल द्वितीय
- D.नरसिंह तृतीय
उत्तर देखें
उसने हासन जिले के बेलूर में चेन्नकेशव मंदिर अपनी विजयों के उपलक्ष्य में बनवाया, जिनमें तलकाड में चोलों की पराजय सम्मिलित है, और लगभग 1108 से 1152 तक चले उसके शासन में हलेबिड के होयसलेश्वर मंदिर का निर्माण भी आरंभ हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कल्याणी के चालुक्य कौन थे और वे बादामी के चालुक्यों से कैसे भिन्न हैं?
बादामी अथवा वातापी के चालुक्यों ने लगभग 543 से 753 तक दक्कन पर शासन किया और उसी शाखा के पुलकेशिन द्वितीय ने हर्षवर्धन को हराया। कल्याणी के चालुक्य, जिन्हें पश्चिमी चालुक्य भी कहा जाता है, बाद की शाखा हैं, जिसकी स्थापना 973 में तैलप द्वितीय ने की और जिसने 1189 तक मान्यखेट और फिर कल्याणी से शासन किया। वेंगी के पूर्वी चालुक्य तीसरी शाखा थी।
पालमपेट का रामप्पा मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
यह भारत का एकमात्र मंदिर है जो अपने शिल्पी रामप्पा के नाम से जाना जाता है। इसे 1213 में काकतीय शासक गणपतिदेव के सेनापति रेचर्ल रुद्र ने बनवाया और यह अपनी हल्की तैरती ईंटों, चमकदार काले बेसाल्ट स्तंभों तथा कोष्ठ प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध है; 2021 में यह यूनेस्को विश्व विरासत सूची में सम्मिलित हुआ।
होयसल मंदिर स्थापत्य की विशेषता क्या है?
होयसल मंदिर मृदु सेलखड़ी पत्थर से जगती नामक ऊंचे चबूतरे पर, प्रायः तारे के आकार की योजना पर बने हैं, जिनमें खराद पर गढ़े स्तंभ, गहरे छज्जे और जुलूस, महाकाव्य तथा नर्तकियों की क्षैतिज मूर्ति पट्टियां हैं। शिल्पी अपने पट्ट पर नाम अंकित करते थे, जो भारतीय कला में दुर्लभ है।
काकतीय वंश की महिला शासक कौन थीं?
रुद्रमा देवी, गणपतिदेव की पुत्री, जिन्होंने तेरहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लगभग तीन दशक वारंगल से शासन किया। उन्हें सामंतों के विद्रोह तथा यादवों और पांड्यों के आक्रमण झेलने पड़े और मार्को पोलो ने उनके राज्य की प्रशंसा लिखी।
दक्कन के ये चार राज्य कैसे समाप्त हुए?
इन्हें दिल्ली सल्तनत ने तोड़ा। अलाउद्दीन खिलजी ने 1296 में देवगिरि पर आक्रमण किया और उसके सेनापति मलिक काफूर ने 1307 में देवगिरि, 1310 में वारंगल तथा 1311 में द्वारसमुद्र को झुकाया। वारंगल 1323 में मिला लिया गया, अंतिम यादव शासक का लगभग 1317 में वध हुआ और अंतिम होयसल राजा 1343 में मारा गया।
स्रोत
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 2, कक्षा 12 इतिहास — एनसीईआरटी
- विश्व विरासत सूची: होयसल मंदिर समूह तथा काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर — यूनेस्को विश्व विरासत केंद्र





