जाति सुधार और दलित वर्ग आंदोलन: पूरे नोट्स
जाति सुधार और दलित वर्ग आंदोलनों के पूरे नोट्स: फुले, नारायण गुरु, पेरियार, आंबेडकर, वैकम और महाड सत्याग्रह, पूना समझौता तथा पिछले वर्षों के प्रश्न।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

उन्नीसवीं सदी के मध्य से स्वतंत्रता तक भारतीय समाज में एक दूसरा स्वतंत्रता संग्राम भी चला, जो अंग्रेजों के विरुद्ध नहीं बल्कि जातीय असमानता के विरुद्ध था। इसके नेताओं का तर्क था कि जब आबादी के बड़े हिस्से को गाँव के तालाब से पानी, मंदिर में प्रवेश, विद्यालय में स्थान और सार्वजनिक भोज में बैठने से रोका जाता है, तब राजनीतिक स्वतंत्रता का अर्थ अधूरा है। इस अध्याय में वे स्त्री-पुरुष, उनके संगठन, उनके सत्याग्रह और वे संवैधानिक उपबंध हैं जिन्होंने अंत में अस्पृश्यता को अवैध ठहराया। परीक्षाओं में यह संस्थापक, संगठन और वर्ष के मिलान का विषय है, इसलिए जोड़े ध्यान से याद करें।
सामाजिक पृष्ठभूमि
पुरानी वर्ण व्यवस्था समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में बाँटती थी और अस्पृश्य मानी गई जातियाँ इसके बाहर रखी गई थीं। व्यवहार में हजारों जातियाँ थीं, जिनके विवाह, व्यवसाय और भोजन के अपने नियम थे। औपनिवेशिक शासन ने परिस्थिति को तीन तरह से बदला। पश्चिमी शिक्षा और छापेखाने ने निचली जातियों को अधिकारों की भाषा और व्यापक प्रचार का साधन दिया। 1871 से होने वाली जनगणना ने जाति को दर्ज किया और उसे राजनीतिक श्रेणी बना दिया, जिसके आधार पर समुदाय संगठित हुए। नई सड़कें, रेल, कारखाने, सैन्य सेवा और न्यायालय ऐसे स्थान बने जहाँ छुआछूत के पुराने नियम लागू करना कठिन था। इन्हीं परिस्थितियों से वे आंदोलन निकले जिन्हें गैर-ब्राह्मण, जाति विरोधी या दलित वर्ग आंदोलन कहा जाता है।
पश्चिमी भारत: फुले और सत्यशोधक समाज
ज्योतिराव फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए विद्यालय खोला और आगे विधवाओं के लिए आश्रय तथा अपने आँगन में अस्पृश्यों के लिए कुआँ खोला। फुले ने 1873 में प्रकाशित गुलामगिरी में पुरोहित वर्ग की श्रेष्ठता के दावे पर प्रहार किया और उसी वर्ष सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जो ब्राह्मण पुरोहित के बिना विवाह कराता था और शूद्रों तथा अति-शूद्रों की शिक्षा के लिए काम करता था। 1888 में उन्हें महात्मा की उपाधि मिली। उनके आंदोलन का फल कोल्हापुर रियासत में दिखा, जहाँ शाहू महाराज ने 1902 में राज्य सेवा के आधे पद पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित किए, जो भारत के आरंभिक आरक्षण आदेशों में से एक था। विट्ठल रामजी शिंदे ने 1906 में बंबई में डिप्रेस्ड क्लासेज मिशन बनाकर विद्यालय और छात्रावास चलाए।
दक्षिण भारत: नारायण गुरु, वैकम और आत्म-सम्मान आंदोलन
केरल में श्री नारायण गुरु ने 1888 में अरुविप्पुरम में शिव मंदिर की प्रतिष्ठा कर दिखाया कि एक एझवा भी वह कर सकता है जिसे ब्राह्मणों तक सीमित कहा जाता था, और 1903 में डॉ. पालपू तथा कवि कुमारन आसन के साथ श्री नारायण धर्म परिपालन योगम की स्थापना की। उनका सूत्र था: मनुष्य के लिए एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर। अय्यनकाली ने पुलय समुदाय को संगठित किया, 1893 में उस सार्वजनिक सड़क पर बैलगाड़ी चलाई जो उनके लिए वर्जित थी, और 1915 में कल्लुमाला आंदोलन चलाया, जिसमें पुलय स्त्रियों के सामान्य वस्त्र पहनने के अधिकार की माँग थी। 1924 और 1925 का वैकम सत्याग्रह, जिसका नेतृत्व टी. के. माधवन, के. केलप्पन और तमिल नेता ई. वी. रामासामी ने किया, त्रावणकोर के वैकम मंदिर के आसपास की सड़कों के उपयोग की माँग थी और इसी से रामासामी को वैकम वीरर की उपाधि मिली। त्रावणकोर की 1936 की मंदिर प्रवेश घोषणा ने राज्य के मंदिर सभी हिंदुओं के लिए खोल दिए। मद्रास प्रेसीडेंसी में 1916 में बने जस्टिस पार्टी, अर्थात दक्षिण भारतीय लिबरल फेडरेशन, ने सत्ता में आकर गैर-ब्राह्मणों के लिए पद आरक्षित करने के आदेश दिए, और ई. वी. रामासामी पेरियार ने 1925 में आत्म-सम्मान आंदोलन चलाया, जो आगे द्रविड़र कषगम बना।
आंबेडकर और दलित वर्ग
भीमराव रामजी आंबेडकर ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय मंच और विधिक दृष्टि दी। उन्होंने 1920 में मूकनायक पत्रिका और 1924 में बहिष्कृत हितकारिणी सभा आरंभ की, जिनका उद्देश्य शिक्षा और प्रतिनिधित्व की माँग था। मार्च 1927 में उन्होंने महाराष्ट्र में महाड सत्याग्रह का नेतृत्व किया, जिसमें चवदार तालाब से पानी लेने का अधिकार माँगा गया, और उसी वर्ष सार्वजनिक रूप से मनुस्मृति का दहन किया। 1930 में नासिक का कालाराम मंदिर सत्याग्रह हुआ। गोलमेज सम्मेलनों में उन्होंने पृथक राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग रखी और 1932 के सांप्रदायिक पंचाट ने दलित वर्गों को पृथक निर्वाचन मंडल दिया। गांधी ने यरवदा जेल में इसके विरुद्ध अनशन किया और विवाद 24 सितंबर 1932 के पूना समझौते से समाप्त हुआ, जिसमें पृथक निर्वाचन के स्थान पर संयुक्त निर्वाचन मंडल में दलित वर्गों के लिए अधिक संख्या में आरक्षित सीटें दी गईं। आंबेडकर ने 1936 में स्वतंत्र मजदूर दल और 1942 में अनुसूचित जाति संघ बनाया, 1936 में जाति का उच्छेद लिखा, संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष बने और 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में बौद्ध धर्म अपनाया।
आंदोलन और उनके संस्थापक
| आंदोलन या संस्था | संस्थापक | वर्ष | क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| सतनामी आंदोलन | गुरु घासीदास | उन्नीसवीं सदी का आरंभ | छत्तीसगढ़ |
| सत्यशोधक समाज | ज्योतिराव फुले | 1873 | पुणे, महाराष्ट्र |
| एसएनडीपी योगम | श्री नारायण गुरु, डॉ. पालपू और कुमारन आसन के साथ | 1903 | केरल |
| डिप्रेस्ड क्लासेज मिशन | विट्ठल रामजी शिंदे | 1906 | बंबई |
| बहिष्कृत हितकारिणी सभा | बी. आर. आंबेडकर | 1924 | बंबई |
| आत्म-सम्मान आंदोलन | ई. वी. रामासामी पेरियार | 1925 | मद्रास प्रेसीडेंसी |
| आद धर्म आंदोलन | मंगू राम | 1926 | पंजाब |
| हरिजन सेवक संघ | गांधी, अध्यक्ष जी. डी. बिड़ला और सचिव ए. वी. ठक्कर | 1932 | अखिल भारतीय |
| अनुसूचित जाति संघ | बी. आर. आंबेडकर | 1942 | अखिल भारतीय |
सत्याग्रह, समझौते और कानून
| घटना | वर्ष | विषय |
|---|---|---|
| वैकम सत्याग्रह | 1924-25 | त्रावणकोर के वैकम मंदिर के आसपास सड़कों का उपयोग |
| महाड सत्याग्रह | 1927 | महाड के चवदार तालाब से पानी लेने का अधिकार |
| कालाराम मंदिर सत्याग्रह | 1930 | नासिक में मंदिर प्रवेश |
| गुरुवायूर सत्याग्रह | 1931 | मलाबार में मंदिर प्रवेश, नेतृत्व के. केलप्पन |
| पूना समझौता | 1932 | पृथक निर्वाचन के स्थान पर संयुक्त निर्वाचन में आरक्षित सीटें |
| मंदिर प्रवेश घोषणा | 1936 | त्रावणकोर के मंदिर सभी हिंदुओं के लिए खुले |
| संविधान का अनुच्छेद 17 | 1950 | अस्पृश्यता का अंत और उसके आचरण पर रोक |
| अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम | 1955 | 1976 में नाम बदलकर नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम |
बंगाल, पंजाब और उत्तर भारत
बंगाल में नामशूद्र आंदोलन हरिचंद ठाकुर और उनके पुत्र गुरुचंद ठाकुर के इर्द-गिर्द बढ़ा, जिन्होंने पूर्वी जिलों के किसानों में विद्यालय और मतुआ संप्रदाय खड़ा किया। पंजाब में अमेरिका में काम कर चुके मंगू राम ने 1926 में आद धर्म आंदोलन चलाया और अपने अनुयायियों से कहा कि वे स्वयं को निम्न जाति के हिंदू के स्थान पर अलग धार्मिक समुदाय के रूप में दर्ज कराएँ। छत्तीसगढ़ में गुरु घासीदास के सतनामी आंदोलन ने मूर्ति पूजा और चमार समुदाय में जातीय भेद को अस्वीकार किया। गांधी ने हिंदू धर्म के भीतर से काम किया, अस्पृश्य जातियों को हरिजन कहा, 1932 में अखिल भारतीय अस्पृश्यता निवारण संघ बनाया जो हरिजन सेवक संघ बना, और 1933 में हरिजन साप्ताहिक आरंभ किया। आंबेडकर ने इस शब्द और इस मार्ग दोनों को अस्वीकार किया और कहा कि जाति को भीतर से सुधारा नहीं जा सकता। कानूनी प्रश्न 1950 में संविधान ने तय किया, जिसने अनुच्छेद 17 से अस्पृश्यता समाप्त की, आरक्षण दिया और वे संरक्षण बनाए जिन्हें 1989 के अत्याचार निवारण अधिनियम ने आगे मजबूत किया।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से चार प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, संस्थापक और संगठन का मिलान: फुले के साथ 1873 का सत्यशोधक समाज, नारायण गुरु के साथ 1903 का एसएनडीपी, शिंदे के साथ 1906 का डिप्रेस्ड क्लासेज मिशन, पेरियार के साथ 1925 का आत्म-सम्मान आंदोलन, मंगू राम के साथ 1926 का आद धर्म और आंबेडकर के साथ 1924, 1936 तथा 1942 की संस्थाएँ। दूसरा, सत्याग्रह के साथ स्थान और माँग: वैकम में सड़कें, महाड में चवदार तालाब, कालाराम तथा गुरुवायूर में मंदिर प्रवेश। तीसरा, सांप्रदायिक पंचाट और पूना समझौता, जिसमें आरक्षित सीटों के स्थान पर पृथक निर्वाचन चुन लेना आम भूल है। चौथा, पुस्तकें और पत्रिकाएँ: गुलामगिरी, जाति का उच्छेद, मूकनायक, बहिष्कृत भारत, कुडी अरसु और हरिजन। शिक्षक परीक्षाएँ जूठन जैसी दलित रचनाएँ जोड़ती हैं और राज्य परीक्षाएँ अपने क्षेत्र के सुधारक को प्राथमिकता देती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सत्यशोधक समाज | ज्योतिराव फुले, पुणे, 1873 |
|---|---|
| गुलामगिरी | ज्योतिराव फुले द्वारा लिखित, 1873 |
| कोल्हापुर आरक्षण | शाहू महाराज, 1902, राज्य सेवा के आधे पद |
| एसएनडीपी योगम | 1903, श्री नारायण गुरु की प्रेरणा से, डॉ. पालपू और कुमारन आसन के साथ |
| डिप्रेस्ड क्लासेज मिशन | विट्ठल रामजी शिंदे, बंबई, 1906 |
| बहिष्कृत हितकारिणी सभा | बी. आर. आंबेडकर, 1924 |
| वैकम सत्याग्रह | 1924-25, त्रावणकोर, महादेव मंदिर के आसपास की सड़कें |
| महाड सत्याग्रह | मार्च 1927, चवदार तालाब, नेतृत्व आंबेडकर |
| आत्म-सम्मान आंदोलन | ई. वी. रामासामी पेरियार, 1925; 1944 से द्रविड़र कषगम |
| पूना समझौता | 24 सितंबर 1932, गांधी और आंबेडकर, संयुक्त निर्वाचन में आरक्षित सीटें |
| मंदिर प्रवेश घोषणा | त्रावणकोर, 1936 |
| पत्रिकाएँ | आंबेडकर की मूकनायक 1920 और बहिष्कृत भारत 1927; पेरियार की कुडी अरसु 1925; गांधी की हरिजन 1933 |
| संवैधानिक उपबंध | अनुच्छेद 17 से अस्पृश्यता समाप्त; 1955 का अधिनियम, 1976 में नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
सत्यशोधक समाज की स्थापना किसने की थी?
- A.ज्योतिराव फुले
- B.हरिदास ठाकुर
- C.बी. आर. आंबेडकर
- D.घासीदास
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व्याख्या
सही उत्तर A, ज्योतिराव फुले है। उन्होंने 1873 में पुणे में सत्यशोधक समाज की स्थापना की, उसी वर्ष उनकी पुस्तक गुलामगिरी प्रकाशित हुई थी। यह समाज ब्राह्मण पुरोहित के बिना विवाह कराता था, शूद्र तथा अति-शूद्र बच्चों के लिए विद्यालय खोलता था और सरकारी सेवा निचली जातियों के लिए खोलने की माँग करता था; 1888 में फुले को महात्मा की उपाधि मिली। B गलत है, क्योंकि हरिचंद ठाकुर, जिन्हें हरिदास भी लिखा जाता है, बंगाल में नामशूद्र तथा मतुआ आंदोलन के नेता थे, महाराष्ट्र की किसी संस्था के नहीं। C गलत है, क्योंकि बी. आर. आंबेडकर ने 1924 में बहिष्कृत हितकारिणी सभा, 1936 में स्वतंत्र मजदूर दल और 1942 में अनुसूचित जाति संघ बनाया तथा उनका जन्म 1891 में हुआ, जो 1873 के बहुत बाद है। D गलत है, क्योंकि गुरु घासीदास ने उन्नीसवीं सदी के आरंभ में छत्तीसगढ़ के चमार समुदाय में सतनामी आंदोलन चलाया।
भारतीय समाज चार प्रमुख वर्णों में बँटा है। निम्नलिखित में से कौन उनमें से एक नहीं है?
- A.पंडित
- B.वैश्य
- C.शूद्र
- D.क्षत्रिय
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व्याख्या
सही उत्तर A, पंडित है। शास्त्रीय ग्रंथों की चतुर्वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र आते हैं। पंडित कोई वर्ण नहीं है; यह विद्वान व्यक्ति के लिए आदर का शब्द है, जो व्यवहार में कुछ ब्राह्मण समूहों के लिए प्रयुक्त होता है, अर्थात यह वर्ण के भीतर का पद और व्यवसाय बताता है, चार विभाजनों में से एक नहीं। B गलत है, क्योंकि वैश्य तीसरा वर्ण है, जो व्यापार, कृषि और पशुपालन से जुड़ा है। C गलत है, क्योंकि शूद्र चौथा वर्ण है, जिसे सेवा कार्य दिए गए, और अस्पृश्य मानी गई जातियाँ इस वर्ग से भी बाहर रखी गई थीं। D गलत है, क्योंकि क्षत्रिय दूसरा वर्ण है, जो शासन और युद्ध से जुड़ा है। याद रखें कि वर्ण ग्रंथों की चार स्तरीय योजना है, जबकि जाति समाज की वास्तविक कार्यकारी इकाई है।
ओमप्रकाश वाल्मीकि की उस आत्मकथा का नाम क्या है जिसमें वे जातीय भेदभाव की कथा कहते हैं?
- A.अछूत
- B.तिरस्कार
- C.पिछड़ा
- D.जूठन
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व्याख्या
सही उत्तर D, जूठन है। ओमप्रकाश वाल्मीकि की जूठन 1997 में प्रकाशित हुई और यह हिंदी की सबसे प्रसिद्ध दलित आत्मकथा है; शीर्षक उस बचे हुए भोजन की ओर संकेत करता है जो सवर्ण घरों से दलित परिवारों को दिया जाता था, और पुस्तक विद्यालय, गाँव तथा काम की जगह पर हुए अपमान का लेखा है। जाति और समाज सुधार से जुड़ी पाठ्यपुस्तकों में इसका उल्लेख रहता है, इसलिए शिक्षक भर्ती परीक्षाएँ इसे पूछती हैं। A गलत है, क्योंकि अछूत सामान्य हिंदी शब्द है, इस कृति का शीर्षक नहीं। B गलत है, क्योंकि तिरस्कार का अर्थ अनादर है और वाल्मीकि की ऐसी कोई आत्मकथा नहीं है। C गलत है, क्योंकि पिछड़ा केवल एक विशेषण है। जूठन के साथ मराठी में दया पवार और तमिल में बामा के लेखन को भी दलित आत्मकथा की उल्लेखनीय कृतियों के रूप में याद रखें।
1927 का महाड सत्याग्रह बी. आर. आंबेडकर ने किस अधिकार के लिए चलाया था?
- A.चवदार तालाब से पानी लेने का अधिकार
- B.कालाराम मंदिर में प्रवेश का अधिकार
- C.वैकम मंदिर के आसपास की सड़कों के उपयोग का अधिकार
- D.विधानमंडल में आरक्षित सीटों का अधिकार
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व्याख्या
सही उत्तर A, चवदार तालाब से पानी लेने का अधिकार है। मार्च 1927 में आंबेडकर हजारों लोगों के साथ बंबई प्रेसीडेंसी के कोलाबा जिले के महाड में चवदार तालाब पहुँचे और उसका जल पिया, यह कहते हुए कि नगरपालिका के प्रस्ताव से खोला गया सार्वजनिक तालाब प्रत्येक नागरिक का है। उसी वर्ष महाड के सम्मेलन में मनुस्मृति का सार्वजनिक दहन हुआ। B गलत है, क्योंकि कालाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह 1930 में नासिक में हुआ था। C गलत है, क्योंकि वैकम मंदिर के आसपास की सड़कें त्रावणकोर में 1924 और 1925 के वैकम सत्याग्रह का विषय थीं, जिसका नेतृत्व टी. के. माधवन, के. केलप्पन और ई. वी. रामासामी ने किया। D गलत है, क्योंकि आरक्षित सीटें 1932 के पूना समझौते से मिलीं, जो बातचीत से हुआ समझौता था, सत्याग्रह नहीं।
श्री नारायण धर्म परिपालन (एसएनडीपी) योगम की स्थापना 1903 में किस समाज सुधारक की प्रेरणा से हुई?
- A.अय्यनकाली
- B.श्री नारायण गुरु
- C.विट्ठल रामजी शिंदे
- D.मंगू राम
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व्याख्या
सही उत्तर B, श्री नारायण गुरु है। एसएनडीपी योगम की स्थापना 1903 में त्रावणकोर में उनकी प्रेरणा से हुई, जिसमें डॉ. पालपू संगठक और कवि कुमारन आसन पहले सचिव थे; इसका कार्य एझवा समुदाय के लिए विद्यालय, सबके लिए खुले मंदिर तथा मनुष्य के लिए एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर के सूत्र का प्रचार था। उन्होंने 1888 में अरुविप्पुरम में शिव मंदिर की प्रतिष्ठा पहले ही कर दी थी। A गलत है, क्योंकि अय्यनकाली ने पुलय समुदाय को संगठित किया, 1893 की विल्लुवंडी यात्रा और 1915 का कल्लुमाला आंदोलन चलाया तथा साधु जन परिपालन संघम बनाया। C गलत है, क्योंकि विट्ठल रामजी शिंदे ने 1906 में बंबई में डिप्रेस्ड क्लासेज मिशन बनाया। D गलत है, क्योंकि मंगू राम ने 1926 से पंजाब में आद धर्म आंदोलन चलाया।
1932 का पूना समझौता महात्मा गांधी और बी. आर. आंबेडकर के बीच हुआ था। इसमें क्या व्यवस्था की गई?
- A.दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल
- B.संयुक्त निर्वाचन मंडल में दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटें
- C.दलित वर्गों के लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण
- D.कानून द्वारा अस्पृश्यता की समाप्ति
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, संयुक्त निर्वाचन मंडल में आरक्षित सीटें है। अगस्त 1932 में रैम्जे मैक्डोनाल्ड द्वारा घोषित सांप्रदायिक पंचाट ने दलित वर्गों को पृथक निर्वाचन मंडल दिया था। गांधी ने इस पृथक्करण के विरोध में यरवदा जेल में आमरण अनशन आरंभ किया और 24 सितंबर 1932 के समझौते में पृथक निर्वाचन वापस लेकर दलित वर्गों को सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों में अधिक संख्या में आरक्षित सीटें दी गईं, जिन्हें प्राथमिक चयन के बाद सभी मतदाता मिलकर भरते थे। A गलत है, क्योंकि पृथक निर्वाचन मंडल ही वह व्यवस्था थी जो इस समझौते में छोड़ी गई। C गलत है, क्योंकि सेवाओं में आरक्षण बाद में प्रशासनिक आदेशों और फिर संविधान से आया, इस समझौते से नहीं। D गलत है, क्योंकि अस्पृश्यता कानूनी रूप से 1950 में संविधान के अनुच्छेद 17 से समाप्त हुई, जिसे 1955 के अधिनियम का समर्थन मिला।
1924 का वैकम सत्याग्रह किस रियासत में हुआ था?
- A.मैसूर
- B.त्रावणकोर
- C.कोल्हापुर
- D.हैदराबाद
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, त्रावणकोर है। वैकम पूर्व त्रावणकोर रियासत में, वर्तमान केरल के कोट्टायम जिले में है, और 1924 तथा 1925 के सत्याग्रह में माँग थी कि वहाँ के महादेव मंदिर के आसपास की सार्वजनिक सड़कें निचली जातियों के लिए खोली जाएँ। टी. के. माधवन और के. केलप्पन ने कांग्रेस के समर्थन से इसका नेतृत्व किया और ई. वी. रामासामी तमिलनाडु से इसमें शामिल होने आए, जिसके कारण उन्हें वैकम वीरर कहा जाता है। त्रावणकोर ने आगे 1936 में मंदिर प्रवेश घोषणा जारी की। A गलत है, क्योंकि मैसूर का नाम पिछड़े वर्गों के आरंभिक आरक्षण से जुड़ा है, वैकम से नहीं। C गलत है, क्योंकि कोल्हापुर में शाहू महाराज ने 1902 में राज्य के आधे पद आरक्षित किए थे। D गलत है, क्योंकि निजाम के हैदराबाद में दूसरे आंदोलन हुए, जिनमें बाद का तेलंगाना किसान संघर्ष शामिल है।
मद्रास प्रेसीडेंसी में 1925 में आत्म-सम्मान आंदोलन किसने आरंभ किया?
- A.सी. राजगोपालाचारी
- B.ई. वी. रामासामी पेरियार
- C.टी. एम. नायर
- D.एम. सी. राजा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, ई. वी. रामासामी पेरियार है। उन्होंने 1925 में कांग्रेस छोड़कर आत्म-सम्मान आंदोलन चलाया, जिसने पुरोहितवादी कर्मकांड को अस्वीकार किया, ब्राह्मण पुरोहित और धार्मिक कर्मकांड के बिना विवाह कराए, विधवा पुनर्विवाह तथा स्त्रियों के अधिकारों के लिए अभियान चलाया और आगे 1944 में द्रविड़र कषगम बना। A गलत है, क्योंकि सी. राजगोपालाचारी कांग्रेस नेता थे, जो मद्रास के मुख्यमंत्री और बाद में गवर्नर-जनरल बने, और पेरियार ने उनकी शिक्षा नीति का विरोध किया। C गलत है, क्योंकि टी. एम. नायर ने पी. त्यागराय चेट्टी के साथ 1916 में दक्षिण भारतीय लिबरल फेडरेशन, अर्थात जस्टिस पार्टी, की स्थापना की, जो पहले का गैर-ब्राह्मण दल था। D गलत है, क्योंकि एम. सी. राजा मद्रास के दलित नेता थे, जो 1932 के राजा-मूंजे समझौते के लिए जाने जाते हैं।
जाति और पुरोहितवादी प्रभुत्व पर तीखा प्रहार करने वाली पुस्तक गुलामगिरी किसने लिखी?
- A.ज्योतिराव फुले
- B.बी. आर. आंबेडकर
- C.श्री नारायण गुरु
- D.पेरियार ई. वी. रामासामी
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व्याख्या
सही उत्तर A, ज्योतिराव फुले है। गुलामगिरी, जिसका अर्थ दासता है, 1873 में मराठी में प्रकाशित हुई और इसमें भारत की निचली जातियों की स्थिति की तुलना अमेरिका के दासों से की गई तथा कृति उन लोगों को समर्पित की गई जिन्होंने वहाँ दासता के विरुद्ध संघर्ष किया। फुले ने किसानों के कष्ट पर शेतकऱ्याचा आसूड और सार्वजनिक सत्यधर्म पुस्तक भी लिखी। B गलत है, क्योंकि आंबेडकर ने 1936 में जाति का उच्छेद, 1946 में शूद्र कौन थे और बुद्ध और उनका धम्म लिखा। C गलत है, क्योंकि श्री नारायण गुरु आत्मोपदेश शतकम जैसी भक्ति तथा दर्शन की रचनाओं और एक जाति, एक धर्म के सूत्र के लिए याद किए जाते हैं। D गलत है, क्योंकि पेरियार मुख्यतः कुडी अरसु और विडुतलै पत्रिकाओं के माध्यम से लिखते और बोलते थे।
आद धर्म आंदोलन, जिसने अपने अनुयायियों से अलग धार्मिक समुदाय के रूप में दर्ज होने को कहा, पंजाब में किसने चलाया?
- A.मंगू राम
- B.गुरुचंद ठाकुर
- C.गुरु घासीदास
- D.अय्यनकाली
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, मंगू राम है। अमेरिका में वर्षों काम करने के बाद मंगू राम पंजाब लौटे और 1926 में आद धर्म आंदोलन की स्थापना की, जिसका तर्क था कि अस्पृश्य कही जाने वाली जातियाँ इस भूमि की मूल निवासी हैं और उनका अपना धर्म है; 1931 की जनगणना में लाखों लोग आद धर्मी के रूप में दर्ज हुए। B गलत है, क्योंकि हरिचंद ठाकुर के पुत्र गुरुचंद ठाकुर ने बंगाल में नामशूद्र तथा मतुआ आंदोलन खड़ा किया। C गलत है, क्योंकि गुरु घासीदास ने उन्नीसवीं सदी के आरंभ में छत्तीसगढ़ के चमार समुदाय में सतनामी आंदोलन चलाया। D गलत है, क्योंकि अय्यनकाली त्रावणकोर के पुलय समुदाय में काम करते थे और 1893 की विल्लुवंडी यात्रा का नेतृत्व किया। इन चार क्षेत्रीय जोड़ों को अलग-अलग याद रखें: पंजाब, बंगाल, छत्तीसगढ़ और केरल।
दलित वर्गों की शिकायतों को स्वर देने के लिए बी. आर. आंबेडकर ने 1920 में कौन-सी पत्रिका आरंभ की?
- A.हरिजन
- B.मूकनायक
- C.कुडी अरसु
- D.केसरी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, मूकनायक है, जिसका अर्थ है मूक लोगों का नेता। आंबेडकर ने इसे 1920 में मराठी पाक्षिक के रूप में कोल्हापुर के शाहू महाराज की आर्थिक सहायता से आरंभ किया। आगे उन्होंने 1927 से बहिष्कृत भारत, तथा समता और जनता निकाले, जो आगे प्रबुद्ध भारत बना। A गलत है, क्योंकि हरिजन वह साप्ताहिक था जो गांधी ने पूना समझौते के बाद 1933 में हरिजन सेवक संघ के अस्पृश्यता विरोधी कार्य के भाग के रूप में आरंभ किया। C गलत है, क्योंकि कुडी अरसु ई. वी. रामासामी पेरियार की तमिल पत्रिका थी, जो 1925 में आत्म-सम्मान आंदोलन के लिए निकली। D गलत है, क्योंकि केसरी बाल गंगाधर तिलक द्वारा 1881 में आरंभ किया गया मराठी समाचार पत्र था, जो पहले की पीढ़ी का राष्ट्रवादी पत्र था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के गैर-ब्राह्मण आंदोलन का जनक किसे कहा जाता है?
सामान्यतः ज्योतिराव फुले को। उनके 1873 के सत्यशोधक समाज ने पश्चिमी भारत की गैर-ब्राह्मण जातियों को पहला संगठित मंच दिया और शाहू महाराज से आंबेडकर तक के नेताओं ने उनके प्रभाव को स्वीकार किया।
अस्पृश्यता पर गांधी और आंबेडकर में क्या अंतर था?
गांधी हिंदू धर्म के भीतर से काम करते थे, अस्पृश्य जातियों को हरिजन कहते थे और हरिजन सेवक संघ जैसी संस्थाओं से सवर्ण हिंदुओं के हृदय परिवर्तन पर भरोसा करते थे। आंबेडकर का मत था कि जाति सामाजिक व्यवस्था में गुँथी हुई है, इसलिए उन्होंने विधिक अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अंत में बौद्ध धर्म का मार्ग चुना।
पूना समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
इसने 1932 के सांप्रदायिक पंचाट से मिले पृथक निर्वाचन मंडल का विवाद समाप्त किया। संयुक्त निर्वाचन में आरक्षित सीटों का यही प्रतिरूप आगे संविधान ने विधानमंडलों में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए अपनाया।
जल के अधिकार के लिए कौन-सा सत्याग्रह हुआ?
मार्च 1927 का महाड सत्याग्रह, जिसका नेतृत्व आंबेडकर ने महाराष्ट्र के महाड स्थित चवदार तालाब पर किया। वैकम, कालाराम और गुरुवायूर में विषय मंदिर प्रवेश था।
आद धर्म आंदोलन क्या था?
पंजाब में 1926 में मंगू राम द्वारा चलाया गया आंदोलन, जिसका मत था कि अस्पृश्य जातियाँ इस भूमि की मूल निवासी हैं और उनका अपना धर्म है, और जिसने उन्हें जनगणना में आद धर्मी दर्ज कराने को कहा।
स्रोत
- हमारे अतीत III (कक्षा 8), अध्याय: महिलाएँ, जाति एवं सुधार — एनसीईआरटी
- भारत का संविधान, अनुच्छेद 17 और भाग तीन — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 — इंडिया कोड, भारत सरकार





