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GK नोट्सभारतीय इतिहासविजयनगर और बहमनी राज्य

विजयनगर और बहमनी राज्य: शासक, युद्ध और स्थापत्य

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विजयनगर और बहमनी राज्यों के संपूर्ण नोट्स: संस्थापक, वंश, राजधानियाँ, कृष्णदेव राय, महमूद गवाँ, तालीकोटा युद्ध और दक्कन की कला।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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विजयनगर और बहमनी राज्य: शासक, युद्ध और स्थापत्य — GK24 title card
विजयनगर और बहमनी राज्य: शासक, युद्ध और स्थापत्य — GK24 title card

विजयनगर और बहमनी मध्यकालीन दक्षिण भारत की दो बड़ी शक्तियाँ थीं। दोनों की स्थापना चौदहवीं शताब्दी में ग्यारह वर्ष के अंतर पर हुई और लगभग दो सौ वर्षों तक ये कृष्णा तथा तुंगभद्रा नदियों के आर-पार एक दूसरे से भिड़ती रहीं। इन्हीं दोनों ने दक्कन के किले, मंदिर, मस्जिदें और भाषाएँ गढ़ीं। परीक्षक इस अध्याय से जोड़े बनाकर प्रश्न पूछते हैं: संस्थापक और वर्ष, राजधानी और नदी, शासक और उपाधि, यात्री और उसका देखा हुआ दरबार।

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना

विजयनगर की स्थापना 1336 ईस्वी में संगम के दो पुत्रों हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम ने की। उन्होंने अपनी राजधानी तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट पर उस पथरीले क्षेत्र में बसाई जो आज कर्नाटक का हम्पी है। परंपरा के अनुसार शृंगेरी के संत विद्यारण्य ने दोनों भाइयों का मार्गदर्शन किया। साम्राज्य के आराध्य देव विरूपाक्ष थे, जो शिव का ही रूप हैं, और राजकीय आदेशों पर श्री विरूपाक्ष अंकित होता था। विजयनगर का अर्थ ही है विजय का नगर।

साम्राज्य पर बारी-बारी से चार वंशों ने शासन किया। संगम वंश 1336 से 1485 तक, सालुव वंश 1485 से 1505 तक, तुलुव वंश 1505 से 1570 तक और अराविडु वंश 1570 से लगभग 1646 तक सत्ता में रहा। सालुव नरसिंह ने संगम वंश का अंत किया और तुलुव वंश के वीर नरसिंह के बाद उनके सौतेले भाई कृष्णदेव राय गद्दी पर बैठे।

कृष्णदेव राय और साम्राज्य का चरमोत्कर्ष

कृष्णदेव राय ने 1509 से 1529 तक शासन किया और उन्हें विजयनगर का सबसे महान शासक माना जाता है। उन्होंने तेलुगु में आमुक्तमाल्यद नामक ग्रंथ लिखा, जो राजनीति और भक्ति दोनों पर है। उनके दरबार में आठ तेलुगु कवियों का समूह अष्टदिग्गज रहता था, जिनमें सर्वप्रमुख अल्लसानी पेद्दन्ना थे। पेद्दन्ना ने मनुचरितम् लिखा और उन्हें आंध्र कवितापितामह कहा गया। राजा ने स्वयं आंध्रभोज तथा यवनराज स्थापनाचार्य की उपाधियाँ धारण कीं। उन्होंने राजधानी में विट्ठलस्वामी और हजारा राम मंदिर बनवाए तथा अपनी माता नागला देवी की स्मृति में नागलापुरम नगर बसाया।

प्रशासन, राजस्व और सिक्के

साम्राज्य को जोड़े रखने वाली व्यवस्था नायंकार प्रणाली थी। अमर-नायक कहे जाने वाले सैन्य सरदारों को अमरम नामक भूमि दी जाती थी, जिसकी आय से वे घोड़े, हाथी और पैदल सैनिक रखते और राजा को नियत कर भेजते थे। गाँव के स्तर पर आयंगार प्रणाली चलती थी, जिसमें बारह वंशानुगत ग्राम अधिकारी वेतन के बदले करमुक्त भूमि पाते थे। मुख्य स्वर्ण सिक्का वराह था, जिसे यूरोपीय यात्री पगोडा कहते थे; छोटे सिक्कों में फणम और ताँबे का जीतल आते थे।

दक्कन आने वाले विदेशी यात्री

यात्रीदेशजिसके दरबार में आया
निकोलो डी कोंटीइटलीदेवराय प्रथम
अब्दुर रज्जाकफारस, हेरात के शाहरुख का दूतदेवराय द्वितीय
डोमिंगो पेसपुर्तगालकृष्णदेव राय
डुआर्ते बारबोसापुर्तगालकृष्णदेव राय
फर्नाओ नूनिजपुर्तगालअच्युत देव राय
अथानासियस निकितिनरूसबहमनी शासक मुहम्मद शाह तृतीय

बहमनी राज्य

बहमनी राज्य की स्थापना 1347 ईस्वी में अलाउद्दीन हसन बहमन शाह ने की, जिन्हें इतिहास में हसन गंगू के नाम से जाना जाता है। उन्हें दौलताबाद के अमीरान-ए-सदा अर्थात सौ-सौ सैनिकों के सरदारों ने सिंहासन पर बिठाया, जिन्होंने मुहम्मद बिन तुगलक के विरुद्ध विद्रोह किया था। उनकी राजधानी गुलबर्गा थी, जिसका नाम अहसनाबाद रखा गया। 1425 में अहमद शाह वली ने राजधानी बीदर स्थानांतरित कर दी, जिसे मुहम्मदाबाद कहा गया। राज्य पहले चार प्रांतों या तरफ में बँटा था: गुलबर्गा, दौलताबाद, बरार और बीदर।

फिरोज शाह बहमनी ने 1397 से 1422 तक शासन किया और वे इस वंश के सबसे विद्वान शासक थे; उन्होंने देवराय प्रथम की पुत्री से विवाह किया। हुमायूँ शाह ने 1458 से 1461 तक शासन किया और अपनी क्रूरता के कारण ज़ालिम की उपाधि पाई। राज्य को भीतर से कमजोर करने वाला कारण दक्कनी और आफाकी या परदेशी गुटों का झगड़ा था; दक्कनी पुराने बसे हुए अमीर थे और आफाकी फारस तथा अरब से आए नवागंतुक।

महमूद गवाँ और बहमनी राज्य का अंत

महमूद गवाँ फारस के व्यापारी थे जो मुहम्मद शाह तृतीय के समय वजीर बने। मुगलों से पहले दक्कन ने उनसे योग्य प्रशासक नहीं देखा। उन्हें मलिक-उत-तुज्जार अर्थात व्यापारियों का प्रधान कहा जाता था। उन्होंने चार तरफ को आठ में बाँट दिया ताकि कोई सूबेदार अधिक शक्तिशाली न हो, भूमि की पैमाइश कराई और 1472 में बीदर में तीन मंजिला मदरसा बनवाया, जिसकी दीवारें रंगीन टाइलों से सजी थीं और जिसका पुस्तकालय पूरे इस्लामी जगत में प्रसिद्ध था। दक्कनी गुट ने एक जाली पत्र बनाकर उन्हें देशद्रोही सिद्ध किया और 1481 में उनका वध कर दिया गया। इसके दस वर्ष के भीतर राज्य पाँच दक्कन सल्तनतों में टूट गया: बीजापुर के आदिलशाही, अहमदनगर के निजामशाही, बरार के इमादशाही, बीदर के बरीदशाही और गोलकुंडा के कुतुबशाही।

तालीकोटा का युद्ध, 1565

विजयनगर और बहमनी तीन चीजों के लिए लड़ते रहे: कृष्णा और तुंगभद्रा के बीच का रायचूर दोआब, कृष्णा-गोदावरी का डेल्टा और बंदरगाहों वाला मराठवाड़ा क्षेत्र। यह संघर्ष 26 जनवरी 1565 को तालीकोटा में निपटा, जिसे राक्षसी-तंगड़ी का युद्ध भी कहते हैं। इसमें बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीदर की संयुक्त सेनाओं ने आलिया राम राय की विजयनगर सेना को नष्ट कर दिया। राजधानी लूट ली गई और फिर कभी बसाई नहीं गई। अराविडु वंश ने पेनुकोंडा और बाद में चंद्रगिरि से शासन जारी रखा, पर साम्राज्य कभी सँभल नहीं पाया।

कला, स्थापत्य और भाषा

विजयनगर स्थापत्य की पहचान ऊँचा रायगोपुरम, कल्याण मंडप, पशुओं के रूप में तराशे गए एकाश्म स्तंभ और देवी के लिए अलग अम्मन मंदिर हैं। हम्पी में विरूपाक्ष मंदिर, पत्थर के रथ तथा संगीत स्तंभों वाला विट्ठल मंदिर, कमल महल, हाथी अस्तबल और हजारा राम मंदिर खड़े हैं; हम्पी के स्मारक समूह को 1986 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में रखा गया। बहमनी स्थापत्य गुलबर्गा की जामा मस्जिद में सबसे अच्छा दिखता है, जिसका आँगन असामान्य रूप से छत से ढका है, तथा बीदर के किले और मदरसे में। बहमनी दरबार ने दक्खिनी को, जो उर्दू का दक्षिणी रूप है, साहित्यिक भाषा के रूप में पाला।

परीक्षा की दृष्टि से

परीक्षक इस अध्याय से निश्चित जोड़ियाँ पूछते हैं। स्थापना वर्ष 1336 और 1347, संस्थापक हरिहर-बुक्का बनाम हसन गंगू, 1425 में गुलबर्गा से बीदर राजधानी परिवर्तन और तालीकोटा की तिथि 26 जनवरी 1565 बार-बार आते हैं। कृष्णदेव राय पर प्रश्न आमुक्तमाल्यद, अष्टदिग्गज और उपाधियों पर घूमते हैं, जबकि बहमनी पर प्रश्न महमूद गवाँ, बीदर मदरसा तथा दक्कनी-आफाकी झगड़े पर। यात्री और शासक का मिलान हमेशा पूछा जाता है और सामान्य जाल यह है कि अब्दुर रज्जाक को पुर्तगाली यात्रियों से बदल दिया जाए या खानदेश को पाँच दक्कन सल्तनतों में गिन लिया जाए।

महत्वपूर्ण तथ्य

विजयनगर की स्थापना1336, संगम वंश के हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम द्वारा
विजयनगर की राजधानीविजयनगर, अर्थात कर्नाटक में तुंगभद्रा तट पर हम्पी के खंडहर
बहमनी की स्थापना1347, अलाउद्दीन हसन बहमन शाह उर्फ हसन गंगू द्वारा
बहमनी राजधानियाँ1347 से गुलबर्गा या अहसनाबाद, 1425 से बीदर या मुहम्मदाबाद
विजयनगर का महानतम शासककृष्णदेव राय, 1509 से 1529, तुलुव वंश
कृष्णदेव राय की रचनाआमुक्तमाल्यद, तेलुगु में
दरबारी कविअष्टदिग्गज, प्रमुख अल्लसानी पेद्दन्ना, रचना मनुचरितम्
बहमनी वजीरमहमूद गवाँ, उपाधि मलिक-उत-तुज्जार, 1472 में बीदर मदरसा, 1481 में वध
तालीकोटा का युद्ध26 जनवरी 1565, राक्षसी-तंगड़ी का युद्ध भी कहलाता है
पाँच दक्कन सल्तनतेंबीजापुर, अहमदनगर, बरार, बीदर और गोलकुंडा
भूमि व्यवस्थानायंकार प्रणाली, जिसमें अमर-नायक अमरम भूमि रखते थे
हम्पी के स्मारक1986 से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CPO · 9 Nov 2022, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से किस नेता ने बहमनी सल्तनत की स्थापना की थी?

  1. A.महमूद गवाँ
  2. B.अलाउद्दीन हसन बहमन शाह
  3. C.मुहम्मद शाह
  4. D.मुहम्मद बिन तुगलक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अलाउद्दीन हसन बहमन शाह

व्याख्या

सही उत्तर B, अलाउद्दीन हसन बहमन शाह है। 1347 ईस्वी में दौलताबाद के अमीरान-ए-सदा नामक सरदारों ने दिल्ली सुल्तान के विरुद्ध विद्रोह किया और अपने ही एक साथी हसन गंगू को दक्कन का सिंहासन सौंप दिया। उन्होंने अलाउद्दीन हसन बहमन शाह की उपाधि ली और गुलबर्गा को, जिसका नाम अहसनाबाद रखा गया, अपनी राजधानी बनाया। उन्हीं के नाम पर यह वंश बहमनी कहलाया। विकल्प A गलत है क्योंकि महमूद गवाँ फारस के व्यापारी थे जो सौ वर्ष से भी अधिक बाद दक्कन आए और मुहम्मद शाह तृतीय के वजीर बने; वे मंत्री थे, संस्थापक नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि मुहम्मद शाह प्रथम हसन बहमन शाह के पुत्र और उत्तराधिकारी थे, जिन्होंने राज्य को चार तरफ में बाँटा पर उसे बनाया नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि मुहम्मद बिन तुगलक वही दिल्ली सुल्तान थे जिनके विरुद्ध दक्कन के अमीरों ने विद्रोह किया; बहमनी राज्य उन्हीं के साम्राज्य से कटकर बना था।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CPO · 9 Nov 2022, Shift 3आसान

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना निम्नलिखित में से किस वर्ष हुई थी?

  1. A.1210
  2. B.1315
  3. C.1336
  4. D.1368
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1336

व्याख्या

सही उत्तर C, 1336 है। संगम के पुत्रों हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम ने 1336 ईस्वी में तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट पर उस स्थान पर विजयनगर नगर और साम्राज्य की नींव रखी जिसे आज कर्नाटक का हम्पी कहा जाता है। परंपरा इस स्थापना को शृंगेरी के संत विद्यारण्य से जोड़ती है और साम्राज्य ने विरूपाक्ष को अपना आराध्य माना। विकल्प A गलत है क्योंकि 1210 दिल्ली सल्तनत का आरंभिक वर्ष है, जब कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु हुई थी, और तब दक्षिण में ऐसा कोई साम्राज्य नहीं बना। विकल्प B गलत है क्योंकि 1315 अलाउद्दीन खिलजी के अंतिम वर्षों में आता है, जब मलिक काफूर सुदूर दक्षिण पर आक्रमण कर रहा था; उस समय दक्कन में इतना बड़ा स्वतंत्र साम्राज्य नहीं था। विकल्प D गलत है क्योंकि 1368 स्थापना के बाद का वर्ष है, जब तक संगम शासक रायचूर दोआब को लेकर बहमनियों से लड़ रहे थे। विजयनगर 1336 और बहमनी 1347 की जोड़ी याद रखें।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: दिल्ली · 9 Sept 2018आसान

विजयनगर साम्राज्य का स्वर्ण काल किसके शासनकाल को माना जाता है?

  1. A.वीर नरसिंह
  2. B.कृष्णदेव राय
  3. C.सदाशिव राय
  4. D.अच्युत देव राय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कृष्णदेव राय

व्याख्या

सही उत्तर B, कृष्णदेव राय है। तुलुव वंश के कृष्णदेव राय ने 1509 से 1529 तक शासन किया और उनका काल विजयनगर का स्वर्ण युग माना जाता है। इसी काल में रायचूर दोआब फिर से जीता गया, ओडिशा के गजपति शासक को झुकाया गया, अष्टदिग्गज कहे जाने वाले आठ दरबारी कवियों के कारण तेलुगु साहित्य फला-फूला तथा विट्ठलस्वामी और हजारा राम मंदिर बने। उन्होंने स्वयं तेलुगु में आमुक्तमाल्यद लिखा। विकल्प A गलत है क्योंकि उनके सौतेले भाई और पूर्ववर्ती वीर नरसिंह ने केवल 1505 से 1509 तक शासन किया और वह समय विद्रोह दबाने में बीता। विकल्प C गलत है क्योंकि सदाशिव राय परवर्ती तुलुव वंश के नाममात्र के शासक थे, जिनके नाम पर आलिया राम राय शासन चलाते थे और 1565 की तालीकोटा की पराजय इसी काल में हुई। विकल्प D गलत है क्योंकि अच्युत देव राय, जिन्होंने 1529 से 1542 तक शासन किया, कृष्णदेव राय के कमजोर उत्तराधिकारी थे और उन्हीं के समय साम्राज्य ढलने लगा।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CPO · 05 Oct, 2023, Shift 3कठिन

निम्नलिखित में से कौन-सा बहमनी सुल्तान अपनी क्रूरता के लिए प्रसिद्ध था और इसी कारण उसे ‘ज़ालिम’ की उपाधि मिली?

  1. A.हुमायूँ शाह
  2. B.फिरोज शाह
  3. C.मुजाहिद शाह
  4. D.अहमद शाह
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. हुमायूँ शाह

व्याख्या

सही उत्तर A, हुमायूँ शाह है। हुमायूँ शाह बहमनी ने 1458 से 1461 तक शासन किया और दक्कन के इतिहासकारों ने उसके दंडों को इतना निर्मम बताया कि उसे ज़ालिम अर्थात अत्याचारी कहा जाने लगा। उसका छोटा शासनकाल मुख्यतः इसी उपाधि के लिए और इस तथ्य के लिए याद किया जाता है कि महमूद गवाँ उसके परामर्श मंडल में थे। विकल्प B गलत है क्योंकि फिरोज शाह बहमनी, जिन्होंने 1397 से 1422 तक शासन किया, इस वंश के सबसे विद्वान सुल्तान थे, जिन्होंने दौलताबाद में वेधशाला बनवाई और देवराय प्रथम की पुत्री से विवाह किया। विकल्प C गलत है क्योंकि मुजाहिद शाह, जिन्होंने 1375 से 1378 तक शासन किया, अपने विजयनगर अभियान और अपने चाचा द्वारा की गई हत्या के लिए जाने जाते हैं, क्रूरता के लिए नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि अहमद शाह वली, जिन्होंने 1422 से 1436 तक शासन किया, राजधानी गुलबर्गा से बीदर ले जाने और अपनी संत जैसी छवि के लिए याद किए जाते हैं।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

किस बहमनी शासक ने राजधानी गुलबर्गा से बीदर स्थानांतरित की थी?

  1. A.फिरोज शाह बहमनी
  2. B.अहमद शाह वली
  3. C.मुहम्मद शाह तृतीय
  4. D.अलाउद्दीन हसन बहमन शाह
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अहमद शाह वली

व्याख्या

सही उत्तर B, अहमद शाह वली है। 1425 ईस्वी में अहमद शाह वली ने बहमनी राजधानी गुलबर्गा से हटाकर बीदर कर दी और उसका नाम मुहम्मदाबाद रखा; राज्य के टूटने तक बीदर ही राजधानी रही। इस परिवर्तन से सत्ता का केंद्र उत्तर-पूर्व की ओर, तेलंगाना की सीमा के पास और विजयनगर की सीमा से दूर खिसक गया। विकल्प A गलत है क्योंकि उनके पूर्ववर्ती फिरोज शाह बहमनी गुलबर्गा से ही शासन करते थे और वे अपनी विद्वत्ता तथा वेधशाला के लिए जाने जाते हैं, राजधानी बदलने के लिए नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि मुहम्मद शाह तृतीय ने आधी सदी बाद बीदर से शासन किया; उन्हें राजधानी विरासत में मिली थी और उनका काल महमूद गवाँ के सुधारों तथा विजयों के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प D गलत है क्योंकि संस्थापक अलाउद्दीन हसन बहमन शाह ने 1347 में गुलबर्गा को राजधानी बनाया और उसे अहसनाबाद नाम दिया। याद रखने की जोड़ी है गुलबर्गा 1347 और बीदर 1425।

Q6.भारतीय इतिहासमध्यम

तालीकोटा का युद्ध, जिसे राक्षसी-तंगड़ी का युद्ध भी कहा जाता है, किस वर्ष लड़ा गया था?

  1. A.1526
  2. B.1556
  3. C.1565
  4. D.1576
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1565

व्याख्या

सही उत्तर C, 1565 है। 26 जनवरी 1565 को बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीदर की संयुक्त सेनाओं ने आलिया राम राय के नेतृत्व वाली विजयनगर सेना को तालीकोटा में हराया; पास के दो गाँवों के नाम पर इसे राक्षसी-तंगड़ी का युद्ध भी कहते हैं। राम राय पकड़े गए और मार डाले गए तथा राजधानी कई महीनों तक लूटी गई और फिर कभी बसाई नहीं गई। विकल्प A गलत है क्योंकि 1526 पानीपत का प्रथम युद्ध है, जिसमें बाबर ने इब्राहीम लोदी को हराकर मुगल शासन की नींव रखी। विकल्प B गलत है क्योंकि 1556 पानीपत का द्वितीय युद्ध है, जो बैरम खाँ के नेतृत्व में अकबर की सेना और हेमू के बीच हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि 1576 हल्दीघाटी का युद्ध है, जो अकबर की सेना और महाराणा प्रताप के बीच लड़ा गया। परीक्षक तालीकोटा को इन्हीं पानीपत तिथियों के बीच रखते हैं क्योंकि वर्ष मिलते-जुलते लगते हैं, इसलिए 1565 पक्का याद रखें।

Q7.भारतीय इतिहासमध्यम

तेलुगु ग्रंथ आमुक्तमाल्यद की रचना किस शासक ने की थी?

  1. A.अल्लसानी पेद्दन्ना
  2. B.कृष्णदेव राय
  3. C.देवराय द्वितीय
  4. D.हरिहर प्रथम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कृष्णदेव राय

व्याख्या

सही उत्तर B, कृष्णदेव राय है। आमुक्तमाल्यद तमिल संत आंडाल के जीवन पर लिखा तेलुगु काव्य है, जिसमें राजा के कर्तव्य भी बताए गए हैं, और इसकी रचना स्वयं कृष्णदेव राय ने की थी। इसी कारण उन्हें कवि-राजा कहा जाता है और आंध्रभोज की उपाधि मिली। विकल्प A गलत है क्योंकि अष्टदिग्गज कहे जाने वाले आठ दरबारी कवियों में सर्वप्रमुख अल्लसानी पेद्दन्ना ने मनुचरितम् लिखा और उन्हें आंध्र कवितापितामह कहा जाता है, पर आमुक्तमाल्यद उनकी रचना नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि संगम वंश के देवराय द्वितीय, जिन्हें गजबेटेकार कहा जाता था, लगभग एक शताब्दी पहले हुए और वे अपनी सेना में मुस्लिम तीरंदाजों की भर्ती तथा अब्दुर रज्जाक की यात्रा के लिए याद किए जाते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि हरिहर प्रथम 1336 में साम्राज्य के संस्थापक थे और उनकी कोई साहित्यिक रचना नहीं है। जोड़ी याद रखें: कृष्णदेव राय और आमुक्तमाल्यद, पेद्दन्ना और मनुचरितम्।

Q8.भारतीय इतिहासमध्यम

फारसी दूत अब्दुर रज्जाक ने किस शासक के शासनकाल में विजयनगर की यात्रा की थी?

  1. A.हरिहर द्वितीय
  2. B.देवराय द्वितीय
  3. C.कृष्णदेव राय
  4. D.आलिया राम राय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. देवराय द्वितीय

व्याख्या

सही उत्तर B, देवराय द्वितीय है। अब्दुर रज्जाक को हेरात के तैमूरी शासक शाहरुख ने भेजा था और वे 1443 में विजयनगर पहुँचे, जब संगम वंश के देवराय द्वितीय सिंहासन पर थे। उनके विवरण में राजधानी की सात परकोटों वाली दीवारों, बाजारों और दरबार की समृद्धि का वर्णन मिलता है और यह पंद्रहवीं शताब्दी के साम्राज्य पर बाहरी स्रोतों में प्रमुख है। विकल्प A गलत है क्योंकि हरिहर द्वितीय चौदहवीं शताब्दी के अंत में शासन कर रहे थे, अर्थात रज्जाक के दूतत्व से पहले। विकल्प C गलत है क्योंकि कृष्णदेव राय के दरबार में आने वाले यात्री पुर्तगाली डोमिंगो पेस और डुआर्ते बारबोसा थे, फारसी दूत नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि आलिया राम राय सोलहवीं शताब्दी के मध्य के हैं और उनका नाम तालीकोटा की पराजय से जुड़ा है। सामान्य जोड़ियाँ हैं: कोंटी और देवराय प्रथम, रज्जाक और देवराय द्वितीय, पेस और कृष्णदेव राय, नूनिज और अच्युत देव राय।

Q9.भारतीय इतिहासमध्यम

महमूद गवाँ ने अपना प्रसिद्ध तीन मंजिला मदरसा किस नगर में बनवाया था?

  1. A.गुलबर्गा
  2. B.बीदर
  3. C.दौलताबाद
  4. D.गोलकुंडा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. बीदर

व्याख्या

सही उत्तर B, बीदर है। मुहम्मद शाह तृतीय के फारसी मूल के वजीर महमूद गवाँ, जिन्हें मलिक-उत-तुज्जार की उपाधि मिली थी, ने 1472 ईस्वी में बीदर में मदरसा बनवाया। यह फारसी शैली की तीन मंजिला इमारत थी, जिसकी दीवारें रंगीन टाइलों से सजी थीं और जिसमें पुस्तकालय, कक्षाएँ तथा शिक्षकों और छात्रों के लिए कमरे थे; इसके खंडहर आज भी खड़े हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि गुलबर्गा पहले की बहमनी राजधानी थी, जो अपनी जामा मस्जिद के लिए प्रसिद्ध है जिसका पूरा आँगन छत से ढका है। विकल्प C गलत है क्योंकि दौलताबाद यादवों का और बाद में मुहम्मद बिन तुगलक का किला-नगर था तथा बहमनी काल में केवल एक तरफ का मुख्यालय रहा। विकल्प D गलत है क्योंकि गोलकुंडा बहमनी राज्य के टूटने के बाद कुतुबशाही राजधानी बना और उसकी बड़ी इमारतें उसी परवर्ती वंश की हैं। महमूद गवाँ को 1481 में एक जाली पत्र के आधार पर मरवा दिया गया।

Q10.भारतीय इतिहासकठिन

बहमनी राज्य के विघटन से बनी पाँच दक्कन सल्तनतों में से निम्नलिखित में कौन-सी नहीं थी?

  1. A.बीजापुर
  2. B.अहमदनगर
  3. C.गोलकुंडा
  4. D.खानदेश
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. खानदेश

व्याख्या

सही उत्तर D, खानदेश है। खानदेश पर फारुकी वंश का शासन था, जिसने चौदहवीं शताब्दी के अंत में ताप्ती घाटी में बहमनियों से अलग स्वतंत्र रूप से अपनी सत्ता जमाई और 1601 में अकबर ने उसे मुगल साम्राज्य में मिला लिया; वह कभी बहमनी राज्य का अंग नहीं रहा, इसलिए उसके विघटन से नहीं निकला। विकल्प A इसलिए गलत विकल्प है क्योंकि यूसुफ आदिल शाह के अधीन बीजापुर उन पाँच उत्तराधिकारी राज्यों में से एक था, जो आदिलशाही कहलाया। विकल्प B गलत है क्योंकि मलिक अहमद द्वारा स्थापित अहमदनगर निजामशाही राज्य बना, जिसकी रक्षा चाँद बीबी ने मुगलों से की थी। विकल्प C गलत है क्योंकि गोलकुंडा कुली कुतुब शाह के अधीन कुतुबशाही राज्य बना और आगे चलकर हैदराबाद को चारमीनार दिया। शेष दो उत्तराधिकारी राज्य बरार के इमादशाही और बीदर के बरीदशाही थे, और इन्हीं पाँच में से चार ने मिलकर 1565 में तालीकोटा जीता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किसने और किस वर्ष की थी?

संगम के दो पुत्रों हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम ने 1336 ईस्वी में तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट पर इसकी स्थापना की। परंपरा के अनुसार शृंगेरी के संत विद्यारण्य ने उनका मार्गदर्शन किया और साम्राज्य ने विरूपाक्ष को अपना आराध्य देव माना।

तालीकोटा का युद्ध क्यों महत्वपूर्ण है?

26 जनवरी 1565 को लड़े गए इस युद्ध ने विजयनगर की महाशक्ति के रूप में समाप्ति कर दी। बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीदर की संयुक्त सेनाओं ने आलिया राम राय को हराकर मार डाला तथा राजधानी लूटकर उजाड़ दी गई। अराविडु वंश पेनुकोंडा और चंद्रगिरि से चलता रहा, पर साम्राज्य फिर खड़ा नहीं हो सका।

महमूद गवाँ कौन थे?

वे फारस के व्यापारी थे जो मुहम्मद शाह तृतीय के समय बहमनी राज्य के वजीर बने और जिन्हें मलिक-उत-तुज्जार की उपाधि मिली। उन्होंने चार तरफ को आठ में बाँटा, भूमि राजस्व में सुधार किया और 1472 में बीदर में तीन मंजिला मदरसा बनवाया। दरबारी प्रतिद्वंद्वियों ने जाली पत्र बनाकर 1481 में उनका वध करा दिया।

विजयनगर में कौन-कौन से विदेशी यात्री आए थे?

इटली के निकोलो डी कोंटी देवराय प्रथम के समय आए, फारस के अब्दुर रज्जाक 1443 में देवराय द्वितीय के समय, पुर्तगाल के डोमिंगो पेस और डुआर्ते बारबोसा कृष्णदेव राय के समय तथा फर्नाओ नूनिज अच्युत देव राय के समय आए। रूस के अथानासियस निकितिन ने बहमनी दरबार का वर्णन किया।

नायंकार प्रणाली क्या थी?

यह विजयनगर की सैन्य और भूमि व्यवस्था थी। अमर-नायक कहे जाने वाले सरदारों को अमरम नामक भूमि दी जाती थी, जिसकी आय से वे राजा के लिए सेना रखते, नियत कर देते और दरबार में उपस्थित होते थे। यही व्यवस्था साम्राज्य की शक्ति भी थी और अंत में उसकी कमजोरी भी बनी।

स्रोत

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