ब्रिटिश भारत में ट्रेड यूनियन और वामपंथी आंदोलन: नोट्स
औपनिवेशिक भारत में श्रमिक आंदोलन के नोट्स: लोखंडे और वाडिया, एटक 1920, ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926, कानपुर तथा मेरठ षड्यंत्र केस और 1928 की हड़तालें।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

भारत में संगठित श्रमिक आंदोलन उन मिलों, खानों, रेलवे और बागानों से निकला जिन्हें औपनिवेशिक पूंजी ने 1850 के दशक से खड़ा किया था। पंद्रह घंटे की पाली, बाल श्रम, जुर्माना और सुरक्षा नियमों का अभाव, इन सबने पहले सुधारवादी प्रयास, फिर यूनियनें और अंत में राष्ट्रीय आंदोलन के भीतर एक वामपंथी धारा पैदा की। परीक्षाओं में यह अध्याय पहली घटनाओं, तिथियों और संक्षिप्त नामों के समूह के रूप में पूछा जाता है: किसने क्या स्थापित किया, किस वर्ष, और किस षड्यंत्र केस में कौन नेता अभियुक्त बना।
1918 से पहले के प्रारंभिक प्रयास
शुरुआती प्रयास मजदूरों ने नहीं, समाज सुधारकों ने किए। शशिपद बनर्जी ने 1870 में बंगाल के बारानगर में एक श्रमिक क्लब खोला और भारत श्रमजीवी नामक पत्रिका निकाली। बंबई में ज्योतिबा फुले के अनुयायी और दीनबंधु पत्र के संपादक नारायण मेघाजी लोखंडे ने 1884 में बॉम्बे मिल हैंड्स एसोसिएशन की स्थापना की। इसे भारत का पहला श्रमिक संगठन माना जाता है, यद्यपि इसकी न सदस्यता सूची थी, न चंदा और न आधुनिक अर्थ में पदाधिकारी। लोखंडे के आंदोलन का असर 1881 के पहले फैक्ट्री अधिनियम और 1891 के फैक्ट्री अधिनियम पर पड़ा, जिसने साप्ताहिक अवकाश दिया और महिलाओं के काम के घंटे सीमित किए।
पहली वास्तविक यूनियनें और एटक की स्थापना
आधुनिक अर्थ में भारत की पहली ट्रेड यूनियन मद्रास लेबर यूनियन थी, जिसे 1918 में बी. पी. वाडिया ने बकिंघम और कर्नाटिक मिलों के मजदूरों के बीच स्थापित किया। मद्रास उच्च न्यायालय ने इसके विरुद्ध जो निषेधाज्ञा दी, उसने दिखा दिया कि यूनियनों को कानून का कोई संरक्षण प्राप्त नहीं था। उसी वर्ष महात्मा गांधी ने अहमदाबाद के मिल मजदूरों की हड़ताल का नेतृत्व किया और उससे 1920 में अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन अर्थात मजूर महाजन संघ बना, जो टकराव के बजाय पंचाट पर जोर देता था। अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस यानी एटक की स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को बंबई में हुई। लाला लाजपत राय इसके पहले अध्यक्ष और दीवान चमन लाल पहले महासचिव बने। इसका तात्कालिक कारण अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन था, जो 1919 में वर्साय की संधि के अंतर्गत बना और जिसमें हर सदस्य देश को एक श्रमिक प्रतिनिधि भेजना था; भारत इस संगठन का संस्थापक सदस्य है।
साम्यवादी शुरुआत और षड्यंत्र केस
एम. एन. रॉय ने 17 अक्टूबर 1920 को ताशकंद में प्रवासी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बनाई। देश के भीतर बिखरे हुए समूह दिसंबर 1925 में कानपुर के सम्मेलन में एकत्र हुए और भारत में कम्युनिस्ट पार्टी की गणना वहीं से की जाती है। खुला संगठन खतरनाक था, इसलिए साम्यवादी वैध मजदूर और किसान पार्टियों के माध्यम से काम करते थे, जो 1926 में बंगाल में और उसके बाद बंबई, पंजाब तथा संयुक्त प्रांत में बनीं। सरकार ने मुकदमों की झड़ी लगाकर उत्तर दिया।
| मुकदमा | वर्ष | प्रमुख अभियुक्त |
|---|---|---|
| पेशावर षड्यंत्र केस | 1922 से 1927 | सोवियत रूस में प्रशिक्षण पाए मुहाजिर |
| कानपुर बोल्शेविक षड्यंत्र केस | 1924 | एम. एन. रॉय, मुजफ्फर अहमद, एस. ए. डांगे, शौकत उस्मानी, नलिनी गुप्ता |
| मेरठ षड्यंत्र केस | 1929 से 1933 | मुजफ्फर अहमद, एस. ए. डांगे, पी. सी. जोशी, फिलिप स्प्रैट, बी. एफ. ब्रैडली, लेस्टर हचिंसन |
रॉय विदेश में थे, इसलिए कानपुर केस में उनकी अनुपस्थिति में सुनवाई हुई; मुजफ्फर अहमद, डांगे, उस्मानी और नलिनी गुप्ता को सजा हुई। मेरठ का मुकदमा इकतीस अभियुक्तों के साथ चार वर्ष चला, जिनमें तीन अंग्रेज भी थे, और अभियुक्तों के लंबे बयान उनके विचारों का मुफ्त प्रचार बन गए। जवाहरलाल नेहरू बंदियों से मिलने गए और उनके लिए एक बचाव समिति बनी।
1928 की हड़तालें और कानून
वर्ष 1928 मजदूर उग्रता का शिखर था। गिरनी कामगार यूनियन ने बंबई में लगभग छह महीने लंबी कपड़ा हड़ताल चलाई, और दक्षिण भारतीय रेलवे तथा जमशेदपुर के टाटा आयरन एंड स्टील कारखाने में भी बड़ी हड़तालें हुईं। सरकार ने पब्लिक सेफ्टी बिल और 1929 के ट्रेड डिस्प्यूट्स अधिनियम से उत्तर दिया, जिसने जनोपयोगी सेवाओं में हड़ताल कठिन बना दी और जांच न्यायालयों की व्यवस्था की। इन्हीं दो उपायों के विरोध में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधान सभा में बम फेंके। इससे पहले 1926 के ट्रेड यूनियन अधिनियम ने पंजीकृत यूनियनों को विधिक व्यक्तित्व और कुछ दीवानी तथा फौजदारी कार्यवाहियों से उन्मुक्ति दी थी, और व्हिटली आयोग के नाम से प्रसिद्ध श्रम पर शाही आयोग ने 1929 से 1931 के बीच काम की दशाओं की जांच की।
फूट, समाजवादी और 1947 की ओर
एटक में दो बार फूट पड़ी। 1929 के नागपुर अधिवेशन में एन. एम. जोशी के नेतृत्व में उदारवादी अलग होकर अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन फेडरेशन बना गए; 1931 में साम्यवादी अलग होकर रेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस बनाने चले गए। ये धाराएं 1935 और 1938 के बीच फिर एक हुईं। जुलाई 1934 में कम्युनिस्ट पार्टी को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। उसी वर्ष कांग्रेस के भीतर कांग्रेस समाजवादी पार्टी बनी, जिसके अध्यक्ष आचार्य नरेंद्र देव और महासचिव जयप्रकाश नारायण थे। भारत में पहला मई दिवस इससे पहले ही 1 मई 1923 को मद्रास में सिंगारवेलु चेट्टियार के नेतृत्व में मनाया जा चुका था। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद मजदूर क्षेत्र दलीय आधार पर बंट गया: मई 1947 में कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस बनाई, 1948 में हिंद मजदूर सभा और 1949 में यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस बनी।
परीक्षा की दृष्टि से
परीक्षाओं में यह अध्याय जोड़ियों के रूप में आता है। संस्थापक और संगठन की जोड़ी पूछी जाती है, जैसे लोखंडे के साथ बॉम्बे मिल हैंड्स एसोसिएशन, वाडिया के साथ मद्रास लेबर यूनियन और गांधी के साथ मजूर महाजन। इसके अलावा एटक का वर्ष तथा उसके पहले पदाधिकारी, ट्रेड यूनियन अधिनियम का वर्ष और कानपुर तथा मेरठ केस के अभियुक्त पूछे जाते हैं। सामान्य भूलें ये हैं: 1884 के पहले श्रमिक संगठन को 1918 की पहली ट्रेड यूनियन समझ लेना, कम्युनिस्ट पार्टी की तिथि कानपुर के स्थान पर ताशकंद से गिनना, और 1926 के ट्रेड यूनियन अधिनियम को 1929 के ट्रेड डिस्प्यूट्स अधिनियम से मिला देना। यूपीएससी तथा राज्य परीक्षाओं में कथन आधारित प्रश्न 1928 की हड़तालों, 1929 के दो दमनकारी विधेयकों और असेंबली बम कांड को एक साथ जोड़ते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पहला श्रमिक संगठन | बॉम्बे मिल हैंड्स एसोसिएशन, 1884, एन. एम. लोखंडे |
|---|---|
| पहली ट्रेड यूनियन | मद्रास लेबर यूनियन, 1918, बी. पी. वाडिया |
| एटक | 31 अक्टूबर 1920, बंबई; पहले अध्यक्ष लाला लाजपत राय |
| एटक के पहले महासचिव | दीवान चमन लाल |
| अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन | 1919, वर्साय की संधि के अंतर्गत; भारत संस्थापक सदस्य |
| प्रवासी कम्युनिस्ट पार्टी | ताशकंद, 17 अक्टूबर 1920, एम. एन. रॉय |
| भारत में कम्युनिस्ट पार्टी | कानपुर सम्मेलन, दिसंबर 1925 |
| ट्रेड यूनियन अधिनियम | 1926, यूनियनों का पंजीकरण और विधिक उन्मुक्ति |
| ट्रेड डिस्प्यूट्स अधिनियम | 1929, जनोपयोगी सेवाओं में हड़ताल पर प्रतिबंध |
| मेरठ षड्यंत्र केस | 1929 से 1933, इकतीस अभियुक्त, उनमें तीन अंग्रेज |
| असेंबली बम कांड | 8 अप्रैल 1929, भगत सिंह और बी. के. दत्त |
| श्रम पर शाही आयोग | व्हिटली आयोग, 1929 से 1931 |
| कांग्रेस समाजवादी पार्टी | 1934, आचार्य नरेंद्र देव और जयप्रकाश नारायण |
| भारत में पहला मई दिवस | मद्रास, 1 मई 1923, सिंगारवेलु चेट्टियार |
| अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन | मजूर महाजन संघ, 1920, महात्मा गांधी से प्रेरित |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
निम्नलिखित में से कौन 1924 के कानपुर षड्यंत्र केस से संबद्ध नहीं था?
- A.मुजफ्फर अहमद
- B.नलिनी गुप्ता
- C.शौकत उस्मानी
- D.एम. ए. अंसारी
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मुख्तार अहमद अंसारी चिकित्सक और कांग्रेस नेता थे, जिन्होंने 1927 के मद्रास अधिवेशन की अध्यक्षता की थी; साम्यवादी मुकदमों से उनका कोई संबंध नहीं था और वे कानपुर बोल्शेविक षड्यंत्र केस में कभी अभियुक्त नहीं बने।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत का पहला श्रमिक संगठन माना जाने वाला बॉम्बे मिल हैंड्स एसोसिएशन 1884 में किसने स्थापित किया?
- A.नारायण मेघाजी लोखंडे
- B.शशिपद बनर्जी
- C.बी. पी. वाडिया
- D.दीवान चमन लाल
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ज्योतिबा फुले के अनुयायी और मराठी पत्र दीनबंधु के संपादक लोखंडे ने 1884 में बंबई के मिल मजदूरों को संगठित किया और कम घंटों तथा साप्ताहिक अवकाश की उनकी मांगें फैक्ट्री आयोग के सामने रखीं, इसीलिए इस संस्था को भारत का पहला श्रमिक संगठन कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की पहली ट्रेड यूनियन मानी जाने वाली मद्रास लेबर यूनियन की स्थापना 1918 में किसने की?
- A.सिंगारवेलु चेट्टियार
- B.बी. पी. वाडिया
- C.एन. एम. जोशी
- D.एस. ए. डांगे
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एनी बेसेंट से जुड़े थियोसॉफिस्ट बहमन पेस्तनजी वाडिया ने 1918 में मद्रास की बकिंघम और कर्नाटिक मिलों के मजदूरों को मद्रास लेबर यूनियन में संगठित किया, जो सदस्यों, चंदे और पदाधिकारियों वाला भारत का पहला संगठन था और इसीलिए आधुनिक अर्थ में पहली ट्रेड यूनियन कहलाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1920 में स्थापित अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के पहले अध्यक्ष कौन थे?
- A.दीवान चमन लाल
- B.जोसेफ बैप्टिस्टा
- C.लाला लाजपत राय
- D.वी. वी. गिरि
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अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को बंबई में हुई और पंजाब के कांग्रेस नेता लाला लाजपत राय ने इसके पहले अध्यक्ष के रूप में अध्यक्षता की, जिससे मजदूर आंदोलन राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1920 में बना अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन अर्थात मजूर महाजन संघ किस नेता की हड़ताल से निकला था?
- A.महात्मा गांधी
- B.वल्लभभाई पटेल
- C.इंदुलाल याज्ञिक
- D.लाला लाजपत राय
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1918 में गांधी ने अहमदाबाद के मिल मजदूरों की मजदूरी वृद्धि की मांग का नेतृत्व किया और किसी औद्योगिक विवाद में पहली बार अनशन को हथियार बनाया; उसी संघर्ष से 1920 में अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन बना, जो वर्ग संघर्ष के बजाय मालिकों और मजदूरों के बीच पंचाट का पक्षधर…
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस अधिनियम ने भारत में पंजीकृत ट्रेड यूनियनों को सर्वप्रथम विधिक व्यक्तित्व और कुछ दीवानी वादों से उन्मुक्ति दी?
- A.फैक्ट्री अधिनियम, 1881
- B.ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926
- C.ट्रेड डिस्प्यूट्स अधिनियम, 1929
- D.औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947
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इसने यूनियनों को पंजीकरण की सुविधा दी, पंजीकृत यूनियन को संपत्ति रखने और वाद दायर करने योग्य विधिक निकाय बनाया, तथा वैध संघ कार्य के लिए उसके पदाधिकारियों को कुछ दीवानी वादों और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप से संरक्षण दिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →17 अक्टूबर 1920 को ताशकंद में प्रवासी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी किसके नेतृत्व में बनी?
- A.मुजफ्फर अहमद
- B.सत्यभक्त
- C.एम. एन. रॉय
- D.पी. सी. जोशी
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मानवेंद्र नाथ रॉय प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान हथियारों की खोज में विदेश गए थे और मेक्सिको की कम्युनिस्ट पार्टी बनाने में सहायक रहे; उन्होंने 17 अक्टूबर 1920 को ताशकंद में कुछ मुहाजिरों और क्रांतिकारियों के साथ छोटी सी प्रवासी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बनाई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →श्रमिक और साम्यवादी संगठनकर्ताओं पर चलाया गया मेरठ षड्यंत्र केस किस वर्ष आरंभ हुआ?
- A.1924
- B.1927
- C.1929
- D.1934
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1928 की बड़ी हड़तालों के तुरंत बाद मार्च 1929 में व्यापक गिरफ्तारियां हुईं और मेरठ में चला मुकदमा 1933 तक खिंचा, जिससे यह औपनिवेशिक काल के सबसे लंबे राजनीतिक मुकदमों में गिना जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन अंग्रेज मेरठ षड्यंत्र केस के अभियुक्तों में शामिल था?
- A.एलन ऑक्टेवियन ह्यूम
- B.फिलिप स्प्रैट
- C.विलियम डिग्बी
- D.हेनरी कॉटन
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स्प्रैट को ग्रेट ब्रिटेन की कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत भेजा था और उन्होंने मजदूर किसान पार्टियों के साथ काम किया; मार्च 1929 में वे गिरफ्तार हुए और बेंजामिन फ्रांसिस ब्रैडली तथा लेस्टर हचिंसन के साथ मेरठ में उन पर मुकदमा चला, ये तीन ही अंग्रेज अभियुक्त थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधान सभा में किसके विरोध में बम फेंके थे?
- A.रौलट एक्ट और प्रेस एक्ट
- B.पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल
- C.भारत सरकार अधिनियम और सांप्रदायिक पंचाट
- D.वर्नाकुलर प्रेस एक्ट और आर्म्स एक्ट
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ये दोनों उपाय बढ़ते मजदूर और साम्यवादी आंदोलन के विरुद्ध थे, पहला विदेशी आंदोलनकारियों को निर्वासित करने के लिए और दूसरा जनोपयोगी सेवाओं में हड़ताल रोकने के लिए, और दोनों युवकों ने बम तथा पर्चे फेंककर बहरों को सुनाने का काम किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में पहला मई दिवस 1 मई 1923 को मद्रास में किसके नेतृत्व में मनाया गया?
- A.सिंगारवेलु चेट्टियार
- B.वी. वी. गिरि
- C.एस. एस. मिराजकर
- D.एन. एम. जोशी
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मद्रास के वकील चेट्टियार मजदूर आंदोलन की ओर मुड़े और उन्होंने 1 मई 1923 को भारत की पहली मई दिवस सभाएं आयोजित कीं तथा लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान की स्थापना की; इस अवसर पर लाल झंडे का प्रयोग हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1934 में बनी कांग्रेस समाजवादी पार्टी के पहले महासचिव कौन थे?
- A.आचार्य नरेंद्र देव
- B.जयप्रकाश नारायण
- C.राम मनोहर लोहिया
- D.मीनू मसानी
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कांग्रेस समाजवादी पार्टी 1934 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर एक समूह के रूप में बनी ताकि कांग्रेस को समाजवाद की ओर धकेला जा सके, और जयप्रकाश नारायण इसके पहले महासचिव बने।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत की पहली ट्रेड यूनियन कौन सी थी?
मद्रास लेबर यूनियन, जिसे 1918 में बी. पी. वाडिया ने बकिंघम और कर्नाटिक मिलों के मजदूरों के बीच स्थापित किया, आधुनिक अर्थ में भारत की पहली ट्रेड यूनियन मानी जाती है, क्योंकि इसमें सदस्य, चंदा और पदाधिकारी थे। 1884 का बॉम्बे मिल हैंड्स एसोसिएशन, जिसे एन. एम. लोखंडे ने शुरू किया, इससे पहले का है पर वह सदस्यता सूची के बिना एक ढीला संगठन था, इसलिए उसे पहला श्रमिक संगठन कहा जाता है, पहली यूनियन नहीं।
एटक के पहले अध्यक्ष कौन थे?
लाला लाजपत राय अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के पहले अध्यक्ष थे। इसकी स्थापना 31 अक्टूबर 1920 को बंबई में हुई थी और दीवान चमन लाल इसके पहले महासचिव बने।
मेरठ षड्यंत्र केस क्यों महत्वपूर्ण था?
1929 से 1933 तक चले इस मुकदमे में इकतीस श्रमिक और साम्यवादी संगठनकर्ताओं पर अभियोग चलाया गया, जिनमें फिलिप स्प्रैट, बी. एफ. ब्रैडली और लेस्टर हचिंसन नामक तीन अंग्रेज भी थे। अभियुक्तों ने अदालत में जो लंबे बयान दिए उन्हें अखबारों ने व्यापक रूप से छापा और समाजवादी विचार अदालत से बहुत दूर तक फैल गए। जवाहरलाल नेहरू सहित कांग्रेस के नेताओं की सहानुभूति भी इस मुकदमे को मिली।
1926 के ट्रेड यूनियन अधिनियम ने क्या किया?
इसने ट्रेड यूनियनों को पंजीकरण की सुविधा दी, पंजीकृत यूनियन को ऐसी विधिक संस्था बनाया जो संपत्ति रख सके और वाद दायर कर सके, तथा वैध संघ कार्य से उत्पन्न कुछ दीवानी वादों और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप से उसके पदाधिकारियों को संरक्षण दिया। यह उस कानूनी असहायता का सीधा उत्तर था जो बी. पी. वाडिया की यूनियन के विरुद्ध मद्रास उच्च न्यायालय की निषेधाज्ञा से उजागर हुई थी।
भगत सिंह ने असेंबली में किन विधेयकों के विरोध में बम फेंके थे?
भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधान सभा में पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल के विरोध में बम फेंके थे। ये दोनों विधेयक बढ़ते हुए श्रमिक और साम्यवादी आंदोलन को दबाने के लिए लाए गए थे।
भारत में पहला मई दिवस कब मनाया गया?
भारत में पहला मई दिवस 1 मई 1923 को मद्रास में सिंगारवेलु चेट्टियार के नेतृत्व में मनाया गया, जिन्होंने लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान की भी स्थापना की थी।
स्रोत
- ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 — इंडिया कोड, विधि और न्याय मंत्रालय
- भारत और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, 1919 से — अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग तीन, कक्षा बारह — एनसीईआरटी





