सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फ़ौज: प्रमुख तथ्य
परीक्षाओं के लिए सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फ़ौज के नोट्स: कांग्रेस के वर्ष, फॉरवर्ड ब्लॉक, महानिष्क्रमण, आईएनए की ब्रिगेड और लाल किला मुकदमे।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

सुभाष चंद्र बोस स्वतंत्रता संग्राम के वही एक नेता हैं जिन्होंने विदेश में सेना खड़ी करके स्वतंत्रता पाने का प्रयास किया। उनका जीवन परीक्षकों को तिथियों की लंबी सूची देता है: भारतीय सिविल सेवा से त्यागपत्र, दो बार कांग्रेस अध्यक्ष पद, एक नया दल, नजरबंदी से पलायन, निर्वासन में सरकार और आज़ाद हिंद फ़ौज, जिसे अंग्रेजी में इंडियन नेशनल आर्मी कहा जाता है। उनका जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में जानकीनाथ बोस की नौवीं संतान के रूप में हुआ, और यह दिन अब पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसकी घोषणा भारत सरकार ने 2021 में की।
सिविल सेवा से कांग्रेस अध्यक्ष पद तक
बोस ने 1920 में इंग्लैंड में भारतीय सिविल सेवा परीक्षा चौथे स्थान के साथ उत्तीर्ण की और 1921 में असहयोग आंदोलन में शामिल होने के लिए त्यागपत्र दे दिया। बंगाल में उन्होंने चित्तरंजन दास के नीचे कार्य किया, जिन्हें वे अपना राजनीतिक गुरु कहते थे, और 1924 में जब दास कलकत्ता नगर निगम के महापौर थे तब बोस उसके मुख्य कार्यपालक अधिकारी बने। 1930 में वे स्वयं कलकत्ता के महापौर चुने गए। उन्होंने दास के लिए फॉरवर्ड और बाद में स्वराज पत्र का संपादन किया, तथा 1920 से 1934 तक के आंदोलन का इतिहास द इंडियन स्ट्रगल और अपूर्ण आत्मकथा एन इंडियन पिलग्रिम लिखी। कांग्रेस में वे उस अधीर धड़े के थे जो औपनिवेशिक स्वराज के स्थान पर पूर्ण स्वतंत्रता चाहता था, और 1928 के कलकत्ता अधिवेशन में उन्होंने बंगाल वॉलंटियर्स खड़ी की।
वे दो बार कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए। गुजरात का हरिपुरा अधिवेशन, 1938 उस राष्ट्रीय योजना समिति के लिए याद किया जाता है जो उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में बनाई। 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में वे फिर खड़े हुए और गांधीजी द्वारा समर्थित पट्टाभि सीतारमैया को 1,580 के मुकाबले 1,377 मतों से हराया। इसके बाद कार्यसमिति के गठन पर हुए विवाद ने उनकी स्थिति असंभव कर दी और अप्रैल 1939 में उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। 3 मई 1939 को उन्होंने कांग्रेस के भीतर फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की और शीघ्र ही उन्हें कांग्रेस का कोई पद धारण करने से वंचित कर दिया गया।
महानिष्क्रमण और विदेश के वर्ष
होलवेल स्मारक के विरुद्ध आंदोलन के कारण बोस 1940 में बंदी बनाए गए और कलकत्ता में नजरबंद कर दिए गए। 16 और 17 जनवरी 1941 की रात वे एल्गिन रोड के अपने घर से पठान बीमा एजेंट मोहम्मद जियाउद्दीन के वेश में निकले और गोमोह, पेशावर तथा काबुल के रास्ते मास्को और फिर बर्लिन पहुंचे, जहां वे 1941 के वसंत में पहुंचे। जर्मनी में उन्होंने फ्री इंडिया सेंटर बनाया, आज़ाद हिंद रेडियो आरंभ किया और भारतीय युद्धबंदियों से इंडियन लीजन खड़ी की। बर्लिन के भारतीयों ने ही उन्हें नेताजी की उपाधि दी। 1943 के आरंभ में वे कील से जर्मन पनडुब्बी यू-180 में चले, मेडागास्कर के निकट जापानी पनडुब्बी आई-29 में सवार हुए और मई 1943 में टोक्यो पहुंचे।
आज़ाद हिंद फ़ौज और आज़ाद हिंद सरकार
आज़ाद हिंद फ़ौज उनकी रचना नहीं थी। उसे पहली बार 1942 में कैप्टन मोहन सिंह ने सिंगापुर के पतन पर पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों से जापानी सहायता से खड़ा किया था, जबकि रासबिहारी बोस बैंकॉक से इंडियन इंडिपेंडेंस लीग का नेतृत्व कर रहे थे। जापानी कमान से विश्वास टूटने पर वह पहली सेना दिसंबर 1942 में भंग कर दी गई। बोस ने 4 जुलाई 1943 को सिंगापुर में लीग और पुनर्गठित फ़ौज का भार संभाला और अगले दिन चलो दिल्ली का नारा दिया।
| तिथि | घटना |
|---|---|
| 4 जुलाई 1943 | बोस सिंगापुर में इंडियन इंडिपेंडेंस लीग और आज़ाद हिंद फ़ौज का भार संभालते हैं |
| 21 अक्टूबर 1943 | सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार की घोषणा |
| दिसंबर 1943 | अंडमान और निकोबार द्वीप सौंपे गए तथा शहीद और स्वराज नाम दिए गए |
| जनवरी 1944 | फ़ौज का मुख्यालय सिंगापुर से रंगून स्थानांतरित |
| 14 अप्रैल 1944 | कर्नल शौकत मलिक द्वारा मणिपुर के मोइरांग में फ़ौज का ध्वज फहराया गया |
| 4 जुलाई 1944 | रंगून में "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा" का उद्घोष |
| 18 अगस्त 1945 | ताइवान के ताईहोकू में विमान दुर्घटना में बोस की मृत्यु की सूचना |
स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार, अर्थात आज़ाद हिंद सरकार, 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में घोषित हुई, जिसमें बोस राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री तथा युद्ध और विदेश मंत्री थे। उसे नौ सरकारों ने मान्यता दी, जिनमें जापान, जर्मनी, इटली, बर्मा, थाईलैंड और फिलीपींस थे, और उसने ब्रिटेन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की। उसने आज़ाद हिंद बैंक चलाया, अपने डाक टिकट और मुद्रा जारी की, तथा जय हिंद अभिवादन, इत्तेहाद, एतमाद, कुर्बानी अर्थात एकता, विश्वास और बलिदान का आदर्श वाक्य, कदम कदम बढ़ाए जा कूच गीत और शुभ सुख चैन राष्ट्रगान अपनाया। फ़ौज चार लड़ाकू ब्रिगेडों में बंटी थी, जिनके नाम गांधी, नेहरू, आज़ाद और सुभाष पर थे, और सुभाष ब्रिगेड का नेतृत्व शाहनवाज खान करते थे। उसकी महिला रेजिमेंट रानी झांसी रेजिमेंट थी, जिसकी कमान कैप्टन लक्ष्मी स्वामीनाथन के पास थी, जो बाद में लक्ष्मी सहगल कहलाईं। जापानियों के साथ लड़ते हुए फ़ौज 1944 में मणिपुर तक बढ़ी, पर इंफाल और कोहिमा में पीछे धकेल दी गई, और 1945 में जापान के आत्मसमर्पण से अभियान समाप्त हो गया।
लाल किला मुकदमे और उनका परिणाम
पकड़े गए फ़ौज के अधिकारियों पर 1945 और 1946 में दिल्ली के लाल किले में मुकदमे चले। पहला और सबसे प्रसिद्ध मुकदमा शाहनवाज खान, प्रेम कुमार सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों का था, जिनमें एक मुसलमान, एक हिंदू और एक सिख थे, और कांग्रेस ने आईएनए प्रतिरक्षा समिति बनाई जिसके वकीलों में भूलाभाई देसाई, तेज बहादुर सप्रू, आसफ अली, कैलाश नाथ काटजू और जवाहरलाल नेहरू थे। अधिकारियों को सम्राट के विरुद्ध युद्ध करने का दोषी ठहराया गया, पर जनभावना के सामने दंड माफ कर दिए गए। इन मुकदमों तथा फरवरी 1946 के रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह ने अंग्रेजों को विश्वास दिला दिया कि भारतीय सैनिकों और नाविकों पर अब भरोसा नहीं किया जा सकता, और सत्ता हस्तांतरण की जल्दी का बड़ा कारण यही खोज थी। बोस की मृत्यु अब भी विवादित है: 1956 की शाहनवाज समिति और 1970 के खोसला आयोग ने विमान दुर्घटना को स्वीकार किया, जबकि 2005 में रिपोर्ट देने वाले मुखर्जी आयोग ने नहीं, और सरकार ने उसका निष्कर्ष स्वीकार नहीं किया।
परीक्षा की दृष्टि से
यह अध्याय लगभग पूरी तरह तिथियों, स्थानों और नामों पर पूछा जाता है। सबसे अधिक दोहराए जाने वाले तथ्य हैं: 1943 की सिंगापुर घोषणा, त्रिपुरी का चुनाव, 1939 में फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना, मोहम्मद जियाउद्दीन का वेश, मोइरांग का ध्वज और रानी झांसी रेजिमेंट। दो जाल बार-बार आते हैं। पहला यह कि आज़ाद हिंद फ़ौज खड़ी करने का श्रेय बोस को दे दिया जाए, जबकि उसे 1942 में कैप्टन मोहन सिंह ने खड़ा किया और बोस ने जुलाई 1943 में संभाला। दूसरा नारों को मिला देना: चलो दिल्ली जुलाई 1943 में सिंगापुर में और तुम मुझे खून दो जुलाई 1944 में रंगून में दिया गया। कथन आधारित प्रश्न पूछते हैं कि गांधीजी को राष्ट्रपिता किसने कहा और आज़ाद हिंद सरकार ने किन क्षेत्रों का शासन किया।
महत्वपूर्ण तथ्य
| जन्म | 23 जनवरी 1897, कटक, ओडिशा; पिता जानकीनाथ बोस |
|---|---|
| सिविल सेवा | 1920 में आईसीएस परीक्षा चौथे स्थान से उत्तीर्ण; 1921 में त्यागपत्र |
| राजनीतिक गुरु | चित्तरंजन दास, देशबंधु |
| कांग्रेस अध्यक्ष | हरिपुरा, 1938 और त्रिपुरी, 1939 |
| फॉरवर्ड ब्लॉक | 3 मई 1939 को स्थापित |
| महानिष्क्रमण | 16 और 17 जनवरी 1941 की रात, मोहम्मद जियाउद्दीन के वेश में काबुल और बर्लिन |
| नेताजी उपाधि | जर्मनी के भारतीयों द्वारा, जहां उन्होंने आज़ाद हिंद रेडियो और इंडियन लीजन चलाई |
| फ़ौज किसने खड़ी की | कैप्टन मोहन सिंह, 1942; बोस ने 4 जुलाई 1943 को कमान संभाली |
| आज़ाद हिंद सरकार | 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में घोषित |
| द्वीप | अंडमान और निकोबार, दिसंबर 1943 में शहीद और स्वराज नाम |
| भारतीय भूमि पर ध्वज | मोइरांग, मणिपुर, 14 अप्रैल 1944, कर्नल शौकत मलिक द्वारा |
| महिला रेजिमेंट | रानी झांसी रेजिमेंट, कैप्टन लक्ष्मी स्वामीनाथन के नेतृत्व में |
| नारे | जय हिंद, चलो दिल्ली, तथा तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा |
| पुस्तकें | द इंडियन स्ट्रगल तथा एन इंडियन पिलग्रिम |
| लाल किला मुकदमे | दिल्ली, 1945 और 1946; शाहनवाज खान, पी. के. सहगल और जी. एस. ढिल्लों |
| मृत्यु की सूचना | ताईहोकू, ताइवान में विमान दुर्घटना, 18 अगस्त 1945 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
21 अक्टूबर 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार के गठन की घोषणा कहां की?
- A.सिंगापुर
- B.रूस
- C.जापान
- D.जर्मनी
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व्याख्या
सही उत्तर A, सिंगापुर है। बोस 1943 में दक्षिण-पूर्व एशिया पहुंचे, 4 जुलाई 1943 को सिंगापुर में इंडियन इंडिपेंडेंस लीग और आज़ाद हिंद फ़ौज का भार संभाला, और 21 अक्टूबर 1943 को उसी नगर में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार, अर्थात आज़ाद हिंद सरकार की घोषणा की। वे उसके राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री तथा युद्ध और विदेश मंत्री बने, और उस सरकार ने शीघ्र ही ब्रिटेन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के विरुद्ध युद्ध घोषित कर दिया।
विकल्प B, रूस गलत है: बोस 1941 में जर्मनी जाते समय केवल मास्को से गुजरे थे और उन्हें वहां कोई सहायता नहीं मिली। विकल्प C, जापान वह सहयोगी था जिसने आज़ाद हिंद सरकार को सबसे पहले मान्यता दी और बोस मई 1943 में टोक्यो पहुंचे थे, पर घोषणा वहां नहीं हुई। विकल्प D, जर्मनी में उन्होंने 1941 और 1942 बिताए और फ्री इंडिया सेंटर तथा इंडियन लीजन बनाई, जो घोषणा से दो वर्ष पहले की बात है।
किस स्वतंत्रता सेनानी ने महात्मा गांधी को पहली बार राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया?
- A.जवाहरलाल नेहरू
- B.सुभाष चंद्र बोस
- C.सरोजिनी नायडू
- D.चंद्रशेखर आज़ाद
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व्याख्या
सही उत्तर B, सुभाष चंद्र बोस है। 1944 में आज़ाद हिंद रेडियो के एक प्रसारण में बोस ने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया और आज़ाद हिंद फ़ौज के संघर्ष के लिए उनका आशीर्वाद मांगा। दोनों के मार्ग में गहरा मतभेद था, फिर भी बोस गांधीजी को सदैव राष्ट्र का नेता मानते रहे, और तब से यह उपाधि प्रचलन में बनी हुई है।
विकल्प A, जवाहरलाल नेहरू गांधीजी के निकट सहयोगी थे और उन्होंने अपने लेखन में उन्हें बहुत नामों से पुकारा, पर यह उपाधि पहले उन्होंने नहीं दी। विकल्प C, सरोजिनी नायडू भारत कोकिला कहलाती हैं; उन्होंने यह उपाधि नहीं दी। विकल्प D, चंद्रशेखर आज़ाद की मृत्यु 1931 में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में हो गई थी, अर्थात उस प्रसारण से बहुत पहले। साथ में यह तथ्य भी याद रखें कि गांधीजी को महात्मा कहने का श्रेय रवींद्रनाथ टैगोर को दिया जाता है।
निम्नलिखित में से किसने 1939 में फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की?
- A.महात्मा गांधी
- B.सरदार वल्लभभाई पटेल
- C.सुभाष चंद्र बोस
- D.जवाहरलाल नेहरू
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व्याख्या
सही उत्तर C, सुभाष चंद्र बोस है। 1939 का त्रिपुरी अध्यक्ष पद का चुनाव पट्टाभि सीतारमैया के विरुद्ध जीतने और उसी वर्ष अप्रैल में त्यागपत्र देने के बाद बोस ने 3 मई 1939 को फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की, जो कांग्रेस के भीतर वामपंथी धड़ा था और तत्काल संघर्ष के लिए सभी उग्र तथा साम्राज्यवाद विरोधी शक्तियों को जोड़ने के लिए बना था।
विकल्प A, महात्मा गांधी स्वयं कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे थे और उसी चुनाव में सीतारमैया का समर्थन किया था, इसलिए उन्होंने कोई प्रतिद्वंद्वी संगठन नहीं बनाया। विकल्प B, सरदार वल्लभभाई पटेल उन कार्यसमिति सदस्यों में थे जिन्होंने बोस के नीचे काम करने से मना कर दिया। विकल्प D, जवाहरलाल नेहरू बोस के अनेक समाजवादी विचार साझा करते थे और उनके द्वारा बनाई राष्ट्रीय योजना समिति के अध्यक्ष भी थे, पर वे फॉरवर्ड ब्लॉक में नहीं गए। बाद में बोस को तीन वर्ष तक कांग्रेस का पद धारण करने से वंचित किया गया।
भारत को ब्रिटिश नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए आज़ाद हिंद फ़ौज किसने खड़ी की?
- A.रासबिहारी बोस
- B.भगत सिंह
- C.मोहन सिंह
- D.सुभाष चंद्र बोस
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व्याख्या
सही उत्तर C, मोहन सिंह है। पहली आज़ाद हिंद फ़ौज 1942 में कैप्टन मोहन सिंह ने सिंगापुर के पतन पर पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों से जापानी सेना की सहायता से खड़ी की थी। जापानी कमान से विश्वास टूटने के बाद वह दिसंबर 1942 में भंग कर दी गई।
विकल्प A, रासबिहारी बोस गदर काल के क्रांतिकारी थे, जिन्होंने बैंकॉक से इंडियन इंडिपेंडेंस लीग का नेतृत्व किया और बाद में लीग तथा फ़ौज का भार सुभाष चंद्र बोस को सौंपा, पर उन्होंने यह सेना खड़ी नहीं की। विकल्प B, भगत सिंह को 1931 में फांसी दी गई थी, अर्थात फ़ौज बनने से ग्यारह वर्ष पहले। विकल्प D, सुभाष चंद्र बोस ने 4 जुलाई 1943 को सिंगापुर में भार संभालने के बाद उसे पुनर्जीवित और पुनर्गठित किया और उसके सर्वोच्च सेनापति बने, इसी कारण उन्हें भूल से खड़ी करने वाला बता दिया जाता है।
सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित आज़ाद हिंद फ़ौज की महिला रेजिमेंट का नाम क्या था?
- A.रानी पद्मावती रेजिमेंट
- B.रानी दिद्दा रेजिमेंट
- C.रानी झांसी रेजिमेंट
- D.रानी अहल्याबाई रेजिमेंट
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व्याख्या
सही उत्तर C, रानी झांसी रेजिमेंट है। बोस ने 1943 में यह पूर्णतः महिला लड़ाकू इकाई खड़ी की और 1857 के विद्रोह की नायिका झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर उसका नाम रखा। इसकी कमान कैप्टन लक्ष्मी स्वामीनाथन के पास थी, जो सिंगापुर की चिकित्सक थीं और बाद में लक्ष्मी सहगल के नाम से जानी गईं, और इसकी भर्ती अधिकतर मलाया तथा बर्मा में बसे भारतीय परिवारों से हुई।
विकल्प A, B और D उन रानियों के नाम हैं जिनका आज़ाद हिंद फ़ौज से कोई संबंध नहीं है। रानी पद्मिनी अथवा पद्मावती चित्तौड़ की परंपराओं से जुड़ी हैं; दिद्दा दसवीं शताब्दी में कश्मीर की शासक थीं; और अहिल्याबाई होलकर अठारहवीं शताब्दी में महेश्वर से मालवा का शासन करती थीं तथा मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए स्मरण की जाती हैं। फ़ौज की अन्य इकाइयां गांधी, नेहरू, आज़ाद और सुभाष ब्रिगेड थीं।
सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को किस स्थान पर हुआ था?
- A.कटक
- B.कलकत्ता
- C.ढाका
- D.मेदिनीपुर
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व्याख्या
सही उत्तर A, कटक है, जो आज ओडिशा में है। बोस का जन्म वहीं 23 जनवरी 1897 को वकील जानकीनाथ बोस की नौवीं संतान के रूप में हुआ, और उनकी आरंभिक शिक्षा कटक के प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल तथा रेवेनशॉ कॉलेजिएट स्कूल में हुई। भारत सरकार ने 2021 में 23 जनवरी को पराक्रम दिवस घोषित किया।
विकल्प B, कलकत्ता वह नगर है जहां उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज में पढ़ाई की, एल्गिन रोड पर रहे, 1941 में वहीं से निकल भागे और 1930 में महापौर बने, पर वह जन्मस्थान नहीं है। विकल्प C, ढाका का उनके जीवन से कोई संबंध नहीं, यद्यपि परिवार का पैतृक गांव कोदालिया अविभाजित बंगाल में था। विकल्प D, मेदिनीपुर पश्चिम बंगाल का जिला है, जो क्रांतिकारी इतिहास में दूसरे कारणों से आता है।
1939 के त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन में सुभाष चंद्र बोस ने अध्यक्ष पद का चुनाव किसे हराकर जीता?
- A.सी. राजगोपालाचारी
- B.पट्टाभि सीतारमैया
- C.अबुल कलाम आज़ाद
- D.राजेंद्र प्रसाद
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व्याख्या
सही उत्तर B, पट्टाभि सीतारमैया है। बोस 1939 में गांधीजी की इच्छा के विरुद्ध दूसरे कार्यकाल के लिए खड़े हुए, जिन्होंने पट्टाभि सीतारमैया को आगे किया था, और 1,580 के मुकाबले 1,377 मतों से जीत गए। गांधीजी ने इस परिणाम को अपनी पराजय कहा, कार्यसमिति के अधिकांश सदस्यों ने बोस के नीचे काम करने से मना कर दिया, और उन्होंने अप्रैल 1939 में त्यागपत्र देकर अगले माह फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया।
विकल्प A, सी. राजगोपालाचारी मद्रास के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और बाद में प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल थे, पर इस चुनाव में प्रत्याशी नहीं थे। विकल्प C, अबुल कलाम आज़ाद 1940 से कांग्रेस अध्यक्ष रहे और भारत छोड़ो आंदोलन तथा सत्ता हस्तांतरण की वार्ताओं के समय पद पर थे। विकल्प D, राजेंद्र प्रसाद 1934 के बंबई अधिवेशन के अध्यक्ष थे और बाद में संविधान सभा के अध्यक्ष बने। त्रिपुरी में बोस के प्रतिद्वंद्वी केवल सीतारमैया थे।
सुभाष चंद्र बोस ने 4 जुलाई 1944 को "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा" का उद्घोष किस नगर में किया?
- A.सिंगापुर
- B.टोक्यो
- C.रंगून
- D.बर्लिन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, रंगून है, जो बर्मा में है और आज म्यांमार का यांगून कहलाता है। आज़ाद हिंद फ़ौज ने इंफाल अभियान के लिए जनवरी 1944 में अपना मुख्यालय सिंगापुर से रंगून स्थानांतरित किया था, और रंगून में ही 4 जुलाई 1944 को बोस ने वह भाषण दिया जिसमें उन्होंने देशवासियों से आज़ादी के बदले खून मांगा।
विकल्प A, सिंगापुर में उन्होंने 4 जुलाई 1943 को फ़ौज का भार संभाला, चलो दिल्ली का नारा दिया और 21 अक्टूबर 1943 को अस्थायी सरकार घोषित की, इसी कारण यह नगर यहां सामान्य गलत उत्तर है। विकल्प B, टोक्यो में वे मई 1943 में पहुंचे और जापानी प्रधानमंत्री से मिले। विकल्प D, बर्लिन में उन्होंने 1941 से 1943 तक फ्री इंडिया सेंटर और आज़ाद हिंद रेडियो चलाया। दोनों प्रसिद्ध नारे अलग नगरों और अलग वर्षों के हैं।
14 अप्रैल 1944 को आज़ाद हिंद फ़ौज ने भारतीय भूमि पर पहली बार अपना ध्वज मणिपुर के किस स्थान पर फहराया?
- A.इंफाल
- B.कोहिमा
- C.मोइरांग
- D.उखरुल
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, मोइरांग है। आज़ाद हिंद फ़ौज के कर्नल शौकत मलिक ने 14 अप्रैल 1944 को मणिपुर की लोकटक झील के निकट बसे मोइरांग में तिरंगा फहराया। उस स्थान पर आज आईएनए स्मारक और संग्रहालय है, और इस घटना को फ़ौज द्वारा भारतीय भूमि पर स्वतंत्र भारत का ध्वज फहराने की पहली घटना माना जाता है।
विकल्प A, इंफाल 1944 के आक्रमण का मुख्य लक्ष्य था, पर घेरा विफल रहा और नगर कभी नहीं जीता जा सका। विकल्प B, कोहिमा नगालैंड में है, जहां उस अभियान की दूसरी बड़ी लड़ाई हुई, और 1944 के मध्य में इंफाल तथा कोहिमा से जापानी और फ़ौजी पीछे हटने से अभियान टूट गया। विकल्प D, उखरुल मणिपुर का पहाड़ी जिला है, जहां से अभियान गुजरा पर ध्वज का ऐसा आयोजन नहीं हुआ। परीक्षक मोइरांग का उत्तर चाहते हैं।
दिसंबर 1943 में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार को कौन सा क्षेत्र सौंपा गया और उसे शहीद तथा स्वराज नाम दिए गए?
- A.लक्षद्वीप
- B.अंडमान और निकोबार द्वीप
- C.सिंगापुर
- D.मणिपुर
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व्याख्या
सही उत्तर B, अंडमान और निकोबार द्वीप है। जापानियों ने 1942 में इन द्वीपों पर अधिकार कर लिया था और दिसंबर 1943 में नाममात्र रूप से उन्हें आज़ाद हिंद सरकार को सौंप दिया, जिसके बाद बोस ने उनके नाम शहीद और स्वराज रखे, अर्थात बलिदान और स्वशासन। उन्होंने 30 दिसंबर 1943 को पोर्ट ब्लेयर जाकर ध्वज फहराया। व्यवहार में नियंत्रण जापानी सेना के पास ही रहा।
विकल्प A, लक्षद्वीप अरब सागर में है और युद्ध भर ब्रिटिश नियंत्रण में रहा। विकल्प C, सिंगापुर आज़ाद हिंद सरकार का केंद्र था, पर वह जापानी अधिकृत क्षेत्र था, उसे सौंपी गई भारतीय भूमि नहीं। विकल्प D, मणिपुर 1944 के अभियान का क्षेत्र था, जहां फ़ौज मोइरांग तक पहुंची, पर वह अस्थायी सरकार को कभी नहीं सौंपा गया। परीक्षाओं में द्वीपों का नाम बदलना ही पूछा जाता है।
1945 और 1946 में आज़ाद हिंद फ़ौज के अधिकारियों शाहनवाज खान, प्रेम कुमार सहगल तथा गुरबख्श सिंह ढिल्लों के मुकदमे कहां चले?
- A.लाल किला, दिल्ली
- B.फोर्ट विलियम, कलकत्ता
- C.सेल्युलर जेल, पोर्ट ब्लेयर
- D.मुंबई उच्च न्यायालय
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, लाल किला, दिल्ली है। इन तीन अधिकारियों, अर्थात एक मुसलमान, एक हिंदू और एक सिख का कोर्ट मार्शल नवंबर 1945 में दिल्ली के लाल किले में आरंभ हुआ, और कांग्रेस ने आईएनए प्रतिरक्षा समिति बनाई जिसके वकीलों में भूलाभाई देसाई, तेज बहादुर सप्रू, आसफ अली, कैलाश नाथ काटजू और जवाहरलाल नेहरू थे। उन्हें सम्राट के विरुद्ध युद्ध करने का दोषी ठहराया गया, पर जनभावना इतनी प्रबल हो गई थी कि दंड माफ कर दिए गए।
विकल्प B, कलकत्ता का फोर्ट विलियम पूर्वी कमान का मुख्यालय था और वहां ऐसा कोई मुकदमा नहीं हुआ। विकल्प C, पोर्ट ब्लेयर की सेल्युलर जेल में पहले की पीढ़ी के क्रांतिकारी रखे गए थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह कार्यवाही कोर्ट मार्शल थी, किसी उच्च न्यायालय का मुकदमा नहीं।
जनवरी 1941 में ब्रिटिश निगरानी से बचने के लिए सुभाष चंद्र बोस किस छद्म नाम से अपने कलकत्ता स्थित घर से निकले?
- A.मोहम्मद जियाउद्दीन
- B.अब्दुल रहमान
- C.ओरलैंडो मैजोटा
- D.रहमत खान
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, मोहम्मद जियाउद्दीन है। 16 और 17 जनवरी 1941 की रात बोस कलकत्ता के एल्गिन रोड वाले उस घर से निकले जहां वे नजरबंद थे, और इसी नाम के पठान बीमा एजेंट के वेश में बिहार के गोमोह तथा पेशावर के रास्ते काबुल गए, वहां से मास्को होकर बर्लिन पहुंचे। इस पलायन को महानिष्क्रमण कहा जाता है।
विकल्प C, ओरलैंडो मैजोटा बाद का छद्म नाम था: काबुल से यूरोप जाते समय बोस उसी नाम के इतालवी पासपोर्ट पर चले, इसलिए वह यात्रा के अगले चरण से जुड़ा है, कलकत्ता से निकलने की रात से नहीं। विकल्प B और D, अब्दुल रहमान तथा रहमत खान ऐसे नाम हैं जिनका उन्होंने प्रयोग नहीं किया। इस प्रश्न का सामान्य जाल कलकत्ता के पलायन को इतालवी पासपोर्ट के नाम से जोड़ देना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज़ाद हिंद फ़ौज की स्थापना बोस ने की या मोहन सिंह ने?
पहली फ़ौज 1942 में कैप्टन मोहन सिंह ने सिंगापुर में पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों से जापानी सहायता से खड़ी की थी और वह दिसंबर 1942 में भंग हो गई। सुभाष चंद्र बोस ने 4 जुलाई 1943 को सिंगापुर में भार संभालने के बाद उसे पुनर्जीवित और पुनर्गठित किया, इसलिए उन्हें संस्थापक के स्थान पर सर्वोच्च सेनापति कहा जाता है।
स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार कब और कहां बनी?
21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में। बोस उसके राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री तथा युद्ध और विदेश मंत्री थे। उसे नौ सरकारों ने मान्यता दी, उसने आज़ाद हिंद बैंक चलाया, ब्रिटेन और अमेरिका के विरुद्ध युद्ध घोषित किया, और दिसंबर 1943 से अंडमान तथा निकोबार द्वीपों का शासन संभाला।
महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की उपाधि किसने दी?
सुभाष चंद्र बोस ने। उन्होंने 1944 में आज़ाद हिंद रेडियो के प्रसारण में गांधीजी को राष्ट्रपिता कहकर फ़ौज के संघर्ष के लिए उनका आशीर्वाद मांगा। यह प्रिय एक पंक्ति का प्रश्न है, और सामान्य विकल्प नेहरू, सरोजिनी नायडू तथा रवींद्रनाथ टैगोर होते हैं, जिन्होंने गांधीजी को पहले महात्मा कहा था।
सुभाष चंद्र बोस ने 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र क्यों दिया?
उन्होंने 1939 का त्रिपुरी चुनाव गांधीजी द्वारा समर्थित पट्टाभि सीतारमैया के विरुद्ध जीता, पर कार्यसमिति के अधिकांश सदस्यों ने त्यागपत्र देकर उनके नीचे काम करने से मना कर दिया। कार्यकारी नेतृत्व न बन पाने पर उन्होंने अप्रैल 1939 में त्यागपत्र दिया और 3 मई 1939 को फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया।
1945 और 1946 के लाल किला मुकदमों का क्या महत्व था?
इन मुकदमों ने अभियुक्त अधिकारियों को राष्ट्रीय नायक बना दिया। कांग्रेस ने आईएनए प्रतिरक्षा समिति के माध्यम से मुकदमे लड़े, जनविरोध के बाद दंड माफ हुए, और इन मुकदमों तथा 1946 के रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह ने अंग्रेजों को दिखा दिया कि भारतीय सेनाओं की स्वामिभक्ति अब मानी नहीं जा सकती।
स्रोत
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 3 (कक्षा 12), राष्ट्रीय आंदोलन संबंधी अध्याय — एनसीईआरटी
- भारत का स्वतंत्रता संग्राम: आज़ाद हिंद फ़ौज और लाल किला मुकदमे — भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस: अभिलेख तथा आज़ाद हिंद सरकार के दस्तावेज — संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार





