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GK नोट्सभारतीय इतिहासगांधी युग: असहयोग से भारत छोड़ो तक

गांधी युग: असहयोग से भारत छोड़ो आंदोलन तक

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गांधी युग के पूरे नोट्स: असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन, उनकी तिथियाँ, समझौते, अधिवेशन और प्रमुख व्यक्ति।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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गांधी युग: असहयोग से भारत छोड़ो आंदोलन तक — GK24 title card
गांधी युग: असहयोग से भारत छोड़ो आंदोलन तक — GK24 title card

1917 से 1947 तक के काल को गांधी युग कहा जाता है, क्योंकि महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय आंदोलन को सत्याग्रह की पद्धति दी और उसे शिक्षित वर्ग के कार्य से किसानों, मजदूरों, महिलाओं तथा विद्यार्थियों के जनांदोलन में बदल दिया। इस युग को तीन अखिल भारतीय आंदोलन परिभाषित करते हैं: 1920 से 1922 तक असहयोग, 1930 से 1934 तक सविनय अवज्ञा और 1942 में भारत छोड़ो। प्रत्येक का अपना कारण, कार्यक्रम, नारा और समाप्ति का कारण है, और परीक्षक ठीक यही चार बातें पूछते हैं। यह नोट पूरे युग को क्रम से देखता है और अंत में एक सारणी देता है जो हर आंदोलन को उसके वर्ष के साथ रखती है।

आरंभिक सत्याग्रह, 1917 और 1918

गांधीजी 1915 में भारत लौटे और पहले स्थानीय संघर्षों में सत्याग्रह की परीक्षा ली। 1917 में बिहार के चंपारण में उन्होंने तिनकठिया पद्धति से बंधे नील की खेती करने वाले किसानों का पक्ष लिया और जाँच समिति बनवाई, जिसके वे स्वयं सदस्य बने। 1918 में गुजरात के खेड़ा में उन्होंने फसल खराब होने पर लगान में छूट माँगने वाले किसानों का साथ दिया। 1918 में अहमदाबाद में उन्होंने अपना पहला अनशन करके मिल मजदूरों के लिए मजदूरी वृद्धि प्राप्त की। इन तीन संघर्षों ने किसी अखिल भारतीय आंदोलन से पहले ही उन्हें राष्ट्रीय नेता बना दिया।

रौलट अधिनियम, जलियांवाला बाग और खिलाफत, 1919

1919 के रौलट अधिनियम ने बिना मुकदमे के नजरबंदी की अनुमति दी, और गांधीजी ने इसके विरुद्ध पहला अखिल भारतीय सत्याग्रह करते हुए 6 अप्रैल 1919 को हड़ताल का आह्वान किया। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर के आदेश पर निरस्त्र भीड़ पर गोलियाँ चलाई गईं; इसकी जाँच हंटर समिति ने की और रवींद्रनाथ टैगोर ने विरोध में नाइटहुड की उपाधि लौटा दी। उसी समय भारतीय मुसलमान तुर्की के खलीफा के साथ हुए व्यवहार पर आंदोलित थे और अली बंधुओं, मुहम्मद अली तथा शौकत अली, के नेतृत्व वाली खिलाफत समिति कांग्रेस के साथ आ गई। खिलाफत के प्रश्न पर बनी हिंदू-मुस्लिम एकता ने गांधीजी को पहले जनांदोलन का आधार दिया।

असहयोग आंदोलन, 1920 से 1922

कार्यक्रम सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में स्वीकृत हुआ और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में उसकी पुष्टि हुई। इसकी पद्धति औपनिवेशिक सरकार से सहयोग वापस लेना थी: सरकारी विद्यालयों, न्यायालयों, परिषदों, उपाधियों और विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार, और उनके स्थान पर जामिया मिलिया इस्लामिया, काशी विद्यापीठ तथा गुजरात विद्यापीठ जैसे राष्ट्रीय विद्यालय, विवादों के लिए पंचायतें, खादी और चरखा। नवंबर 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स की यात्रा का बहिष्कार किया गया। गोरखपुर जिले के चौरी चौरा में 5 फरवरी 1922 को भीड़ ने थाना जला दिया, जिसके बाद गांधीजी ने यह मानते हुए कि लोग अहिंसक जनकार्रवाई के लिए तैयार नहीं हैं, 12 फरवरी 1922 को बारदोली में आंदोलन वापस करा दिया। इसके बाद चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने 1923 में विधानमंडलों में प्रवेश के लिए स्वराज पार्टी बनाई।

सविनय अवज्ञा आंदोलन, 1930 से 1934

दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की, कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का लक्ष्य स्वीकार किया और 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का आह्वान किया। लॉर्ड इरविन द्वारा गांधीजी की ग्यारह माँगें ठुकराए जाने पर गांधीजी ने दांडी यात्रा से आंदोलन आरंभ किया और 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से 78 स्वयंसेवकों के साथ लगभग 385 किलोमीटर चलकर 6 अप्रैल 1930 को दांडी में नमक कानून तोड़ा। आंदोलन कर न देने, सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में धरसाना नमक कारखाने पर धावा, उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान के खुदाई खिदमतगार आंदोलन और किसानों के लगान विरोधी अभियानों के रूप में फैला। 5 मार्च 1931 के गांधी-इरविन समझौते ने आंदोलन स्थगित कराया और गांधीजी कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में लंदन में दूसरे गोलमेज सम्मेलन में गए; 1930 का पहला और 1932 का तीसरा सम्मेलन कांग्रेस के बिना हुआ। अगस्त 1932 में रैम्जे मैक्डोनाल्ड ने सांप्रदायिक पंचाट घोषित किया, जिसमें दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल थे; गांधीजी ने यरवदा जेल में अनशन किया और 24 सितंबर 1932 के पूना समझौते में डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ यह तय हुआ कि पृथक निर्वाचन के स्थान पर संयुक्त निर्वाचन में आरक्षित सीटें दी जाएंगी। आंदोलन अंततः 1934 में वापस ले लिया गया।

युद्धकाल और भारत छोड़ो, 1940 से 1942

द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रश्न पर कांग्रेस मंत्रिमंडलों के त्यागपत्र के बाद सरकार ने 1940 का अगस्त प्रस्ताव रखा, जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया, और गांधीजी ने अक्तूबर 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह आरंभ किया, जिसमें विनोबा भावे पहले और जवाहरलाल नेहरू दूसरे सत्याग्रही थे। मार्च 1942 के क्रिप्स मिशन की विफलता, जिसे गांधीजी ने उत्तर तिथीय चेक कहा, के बाद बंबई के ग्वालिया टैंक में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया और करो या मरो का आह्वान हुआ। 9 अगस्त को लगभग पूरा नेतृत्व बंदी बना लिया गया और गांधीजी पुणे के आगा खाँ महल में रखे गए, जिससे आंदोलन नेतृत्वहीन जनविद्रोह बन गया। अरुणा आसफ अली ने ग्वालिया टैंक पर झंडा फहराया, उषा मेहता ने गुप्त कांग्रेस रेडियो चलाया, तथा जयप्रकाश नारायण और राममनोहर लोहिया ने भूमिगत कार्य का संचालन किया। समानांतर सरकारें बलिया में चित्तू पांडे के नेतृत्व में, मिदनापुर के तामलुक में जातीय सरकार के रूप में और सतारा में नाना पाटिल की प्रति सरकार के रूप में बनीं, जिनमें अंतिम सबसे अधिक समय तक चली।

तीनों आंदोलन एक दृष्टि में

आंदोलनवर्षतत्कालिक कारणसमाप्ति
असहयोग1920-1922रौलट अधिनियम, जलियांवाला बाग और खिलाफत का प्रश्नचौरी चौरा के बाद फरवरी 1922 में वापस
सविनय अवज्ञा1930-1934पूर्ण स्वराज प्रस्ताव के बाद ग्यारह माँगों की अस्वीकृति1931 के गांधी-इरविन समझौते से स्थगित, 1934 में वापस
व्यक्तिगत सत्याग्रह1940-1941अगस्त प्रस्ताव की अस्वीकृतिक्रिप्स मिशन से पहले समाप्त
भारत छोड़ो1942क्रिप्स मिशन की विफलताव्यापक गिरफ्तारियों और दमन से कुचला गया

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्न चार रूपों में आते हैं। पहला, तिथि वाला प्रश्न: प्रत्येक आंदोलन का वर्ष, जलियांवाला बाग, दांडी यात्रा, गांधी-इरविन समझौते, पूना समझौते और भारत छोड़ो प्रस्ताव की तिथि। दूसरा, कारण और समाप्ति वाला प्रश्न: कौन सी घटना से आंदोलन आरंभ हुआ और किससे समाप्त, जिसमें असहयोग के लिए चौरी चौरा मानक उत्तर है। तीसरा, व्यक्ति और स्थान वाला प्रश्न: भारत छोड़ो नारा किसने दिया, ग्वालिया टैंक पर झंडा किसने फहराया, कांग्रेस रेडियो किसने चलाया, समानांतर सरकारों का नेतृत्व किसने किया, पहला व्यक्तिगत सत्याग्रही कौन था और पूर्ण स्वराज किस अधिवेशन में स्वीकार हुआ। चौथा, अधिवेशन और अध्यक्ष की जोड़ी: लाहौर 1929 के साथ जवाहरलाल नेहरू और कराची 1931 के साथ वल्लभभाई पटेल। सामान्य जाल हैं 1920 और 1921 में भ्रम, गांधीजी को पहले या तीसरे गोलमेज सम्मेलन में बताना, तथा पूना समझौते को अंग्रेजों के साथ हुआ समझौता मान लेना।

महत्वपूर्ण तथ्य

चंपारण सत्याग्रह1917, बिहार, नील किसान और तिनकठिया पद्धति
जलियांवाला बाग13 अप्रैल 1919, अमृतसर, जनरल डायर के आदेश पर गोलीबारी
असहयोग की पुष्टिनागपुर अधिवेशन, दिसंबर 1920
चौरी चौरा5 फरवरी 1922, गोरखपुर जिला; 12 फरवरी 1922 को बारदोली में आंदोलन वापस
स्वराज पार्टी1923 में चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा स्थापित
पूर्ण स्वराज प्रस्तावलाहौर अधिवेशन, दिसंबर 1929, अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू
दांडी यात्रा12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से 78 स्वयंसेवकों के साथ; 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून टूटा
गांधी-इरविन समझौता5 मार्च 1931, इसके बाद दूसरा गोलमेज सम्मेलन
पूना समझौता24 सितंबर 1932, गांधीजी और डॉ. अंबेडकर के बीच; पृथक निर्वाचन के स्थान पर आरक्षित सीटें
व्यक्तिगत सत्याग्रहअक्तूबर 1940; पहले सत्याग्रही विनोबा भावे, दूसरे जवाहरलाल नेहरू
भारत छोड़ो प्रस्ताव8 अगस्त 1942, ग्वालिया टैंक, बंबई; नारा करो या मरो
समानांतर सरकारेंबलिया (चित्तू पांडे), तामलुक (जातीय सरकार), सतारा (नाना पाटिल की प्रति सरकार)
1942 में गांधीजी का कारावासआगा खाँ महल, पुणे

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC General Studies 2018 Paperमध्यम

भारत छोड़ो का नारा किसने दिया था?

  1. A.महात्मा गांधी
  2. B.पं. जवाहरलाल नेहरू
  3. C.यूसुफ मेहर अली
  4. D.अरुणा आसफ अली
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. यूसुफ मेहर अली

व्याख्या

सही उत्तर C, यूसुफ मेहर अली है। समाजवादी नेता यूसुफ मेहर अली, जो बंबई के महापौर भी रहे, ने भारत छोड़ो शब्द दिए, जैसे उन्होंने 1928 में साइमन वापस जाओ का नारा दिया था, और कांग्रेस ने 8 अगस्त 1942 के अपने प्रस्ताव के लिए यही शब्द अपनाए। विकल्प A आकर्षक होने पर भी गलत है, क्योंकि गांधीजी ने इस आंदोलन को उसका दूसरा और अधिक प्रसिद्ध आह्वान करो या मरो दिया, जो उन्होंने ग्वालिया टैंक के भाषण में कहा; आंदोलन का नाम उनका दिया हुआ नहीं था। विकल्प B गलत है क्योंकि जवाहरलाल नेहरू ने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति में प्रस्ताव प्रस्तुत किया और उसका समर्थन किया, किंतु नारा नहीं गढ़ा। विकल्प D गलत है क्योंकि अरुणा आसफ अली 9 अगस्त 1942 को ग्वालिया टैंक पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और भूमिगत आंदोलन चलाने के लिए स्मरण की जाती हैं, नारे के लिए नहीं।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: हरियाणा · 26 Sept 2021आसान

भारत छोड़ो आंदोलन कब आरंभ हुआ?

  1. A.7 अगस्त 1942
  2. B.15 अगस्त 1942
  3. C.8 अगस्त 1942
  4. D.11 अगस्त 1942
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 8 अगस्त 1942

व्याख्या

सही उत्तर C, 8 अगस्त 1942 है। बंबई के ग्वालिया टैंक में बैठी अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया और उसी शाम गांधीजी ने करो या मरो का भाषण दिया। सरकार ने 9 अगस्त की भोर में पूरे नेतृत्व को बंदी बना लिया, इसलिए आंदोलन नेतृत्वहीन जनविद्रोह के रूप में फैला। विकल्प A गलत है क्योंकि अधिवेशन 7 अगस्त को आरंभ हुआ था, किंतु प्रस्ताव अगले दिन स्वीकृत हुआ। विकल्प B गलत है क्योंकि 15 अगस्त 1947 की स्वतंत्रता के लिए स्मरण किया जाता है और आंदोलन के आरंभ से उसका कोई संबंध नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि 11 अगस्त तक आंदोलन अपने चरम पर था और संयुक्त प्रांत, बिहार तथा बंबई में हड़तालें, थानों पर हमले और रेल मार्गों को क्षति पहुँचाने की घटनाएँ हो रही थीं। स्मरण के लिए आंदोलन का दूसरा नाम अगस्त क्रांति ध्यान रखें।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC Civil Service 2013 Paperमध्यम

अरुणा आसफ अली निम्नलिखित में से किस आंदोलन से संबंधित हैं?

  1. A.असहयोग आंदोलन
  2. B.सविनय अवज्ञा आंदोलन
  3. C.व्यक्तिगत सत्याग्रह
  4. D.भारत छोड़ो आंदोलन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. भारत छोड़ो आंदोलन

व्याख्या

सही उत्तर D, भारत छोड़ो आंदोलन है। वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अरुणा आसफ अली ने 9 अगस्त 1942 को बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और फिर भूमिगत होकर जयप्रकाश नारायण तथा राममनोहर लोहिया के साथ आंदोलन का संचालन किया, जिससे उन्हें 1942 के आंदोलन की नायिका कहा गया। विकल्प A गलत है क्योंकि 1920 से 1922 तक का असहयोग आंदोलन गांधीजी ने अली बंधुओं और खिलाफत नेताओं के साथ चलाया था, जब वे सार्वजनिक जीवन में नहीं आई थीं। विकल्प B गलत है क्योंकि सविनय अवज्ञा आंदोलन की सबसे स्मरणीय महिलाएँ सरोजिनी नायडू, जिन्होंने धरसाना नमक कारखाने पर धावे का नेतृत्व किया, और कमलादेवी चट्टोपाध्याय हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1940 का व्यक्तिगत सत्याग्रह विनोबा भावे के पहले और जवाहरलाल नेहरू के दूसरे सत्याग्रही होने के लिए स्मरण किया जाता है।

Q4.भारतीय इतिहासमध्यम

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम की पुष्टि हुई?

  1. A.नागपुर अधिवेशन, दिसंबर 1920
  2. B.लखनऊ अधिवेशन, 1916
  3. C.लाहौर अधिवेशन, 1929
  4. D.कराची अधिवेशन, 1931
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नागपुर अधिवेशन, दिसंबर 1920

व्याख्या

सही उत्तर A, दिसंबर 1920 का नागपुर अधिवेशन है। असहयोग का कार्यक्रम सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में पहले स्वीकृत हुआ और दिसंबर 1920 के नागपुर वार्षिक अधिवेशन में उसकी पुष्टि हुई, जिसमें कांग्रेस के संविधान में भी परिवर्तन हुआ और भाषायी आधार पर प्रांतीय समितियाँ बनीं। विकल्प B गलत है क्योंकि 1916 का लखनऊ अधिवेशन नरमपंथियों और गरमपंथियों के पुनर्मिलन तथा मुस्लिम लीग के साथ लखनऊ समझौते के लिए स्मरण किया जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में, जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में, पूर्ण स्वराज का लक्ष्य स्वीकार हुआ और 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का आह्वान हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि 1931 के कराची अधिवेशन में, वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में, गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन हुआ और मूल अधिकारों तथा राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम का प्रस्ताव पारित हुआ।

Q5.भारतीय इतिहासआसान

गांधीजी ने किस घटना के बाद असहयोग आंदोलन वापस ले लिया?

  1. A.जलियांवाला बाग हत्याकांड
  2. B.चौरी चौरा कांड
  3. C.काकोरी षड्यंत्र कांड
  4. D.साइमन कमीशन का विरोध
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. चौरी चौरा कांड

व्याख्या

सही उत्तर B, चौरी चौरा कांड है। 5 फरवरी 1922 को संयुक्त प्रांत के गोरखपुर जिले के चौरी चौरा में भीड़ ने थाने में आग लगा दी और बाईस पुलिसकर्मी मारे गए। गांधीजी ने निष्कर्ष निकाला कि जनता अभी अहिंसा में प्रशिक्षित नहीं है और कांग्रेस कार्य समिति ने 12 फरवरी 1922 को बारदोली में आंदोलन वापस ले लिया, जिस निर्णय से अनेक युवा नेता नाराज हुए। विकल्प A गलत है क्योंकि 13 अप्रैल 1919 का जलियांवाला बाग हत्याकांड आंदोलन के कारणों में था, उसकी समाप्ति का कारण नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1925 का काकोरी षड्यंत्र कांड हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की क्रांतिकारी धारा से संबंधित है और आंदोलन की वापसी के तीन वर्ष बाद हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि साइमन कमीशन का विरोध 1928 और 1929 में हुआ और वह सविनय अवज्ञा आंदोलन की दिशा में ले गया।

Q6.भारतीय इतिहासआसान

1930 की दांडी यात्रा किस स्थान से आरंभ हुई थी?

  1. A.साबरमती आश्रम, अहमदाबाद
  2. B.सेवाग्राम आश्रम, वर्धा
  3. C.पोरबंदर
  4. D.सूरत
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. साबरमती आश्रम, अहमदाबाद

व्याख्या

सही उत्तर A, अहमदाबाद का साबरमती आश्रम है। गांधीजी 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से 78 चुने हुए स्वयंसेवकों के साथ निकले और चौबीस दिन में लगभग 385 किलोमीटर चलकर तटवर्ती गाँव दांडी पहुँचे, जहाँ 6 अप्रैल 1930 को उन्होंने प्राकृतिक नमक उठाकर नमक कानून तोड़ा और सविनय अवज्ञा आंदोलन आरंभ हुआ। विकल्प B गलत है क्योंकि वर्धा के निकट सेवाग्राम आश्रम 1936 के बाद गांधीजी का केंद्र बना और वह उनके रचनात्मक कार्यक्रम का केंद्र था, यात्रा का आरंभ स्थल नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि पोरबंदर गांधीजी का जन्मस्थान है और यात्रा से उसका कोई संबंध नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि सूरत यात्रा के मार्ग में पड़ता था किंतु आरंभ स्थल नहीं था; यात्रा खेड़ा और सूरत जिलों के गाँवों से होकर समुद्र तक गई।

Q7.भारतीय इतिहासमध्यम

गांधी-इरविन समझौता किस वर्ष हुआ था?

  1. A.1929
  2. B.1930
  3. C.1931
  4. D.1932
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1931

व्याख्या

सही उत्तर C, 1931 है। गांधी-इरविन समझौता, जिसे दिल्ली समझौता भी कहा जाता है, 5 मार्च 1931 को गांधीजी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच हुआ। इसके अनुसार सरकार हिंसा के अपराध में दंडित न हुए राजनीतिक बंदियों को छोड़ने और तटवर्ती क्षेत्रों में घरेलू उपयोग के लिए नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमत हुई, और कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा स्थगित करके दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया। विकल्प A गलत है क्योंकि 1929 लाहौर अधिवेशन और पूर्ण स्वराज प्रस्ताव का वर्ष है। विकल्प B गलत है क्योंकि 1930 में दांडी यात्रा से आंदोलन आरंभ हुआ और पहला गोलमेज सम्मेलन हुआ, जिसका कांग्रेस ने बहिष्कार किया। विकल्प D गलत है क्योंकि 1932 सांप्रदायिक पंचाट और डॉ. अंबेडकर के साथ पूना समझौते का वर्ष है, जब सविनय अवज्ञा फिर आरंभ हो चुकी थी और गांधीजी पुनः जेल में थे।

Q8.भारतीय इतिहासमध्यम

1932 का पूना समझौता महात्मा गांधी और किसके बीच हुआ था?

  1. A.लॉर्ड विलिंगडन
  2. B.डॉ. भीमराव अंबेडकर
  3. C.मुहम्मद अली जिन्ना
  4. D.रैम्जे मैक्डोनाल्ड
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. डॉ. भीमराव अंबेडकर

व्याख्या

सही उत्तर B, डॉ. भीमराव अंबेडकर है। पूना समझौता 24 सितंबर 1932 को हुआ, जब गांधीजी सांप्रदायिक पंचाट द्वारा दलित वर्गों को दिए गए पृथक निर्वाचन मंडल के विरोध में यरवदा जेल में आमरण अनशन पर थे। समझौते के अनुसार पृथक निर्वाचन छोड़ दिया गया और संयुक्त निर्वाचन मंडल के भीतर दलित वर्गों के लिए पहले से अधिक संख्या में सीटें आरक्षित की गईं। विकल्प A गलत है क्योंकि लॉर्ड विलिंगडन उस समय वायसराय थे, किंतु यह समझौता भारतीय नेताओं के बीच हुआ था और वे उसके पक्षकार नहीं थे। विकल्प C गलत है क्योंकि जिन्ना ने 1916 में कांग्रेस के साथ लखनऊ समझौता किया था और पूना समझौते में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। विकल्प D गलत है क्योंकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैक्डोनाल्ड ने अगस्त 1932 में सांप्रदायिक पंचाट घोषित किया था, और यह समझौता उस पंचाट का भारतीय उत्तर था, उनके साथ कोई करार नहीं।

Q9.भारतीय इतिहासमध्यम

पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव कांग्रेस के किस अधिवेशन में स्वीकार किया गया?

  1. A.कलकत्ता, 1928
  2. B.लाहौर, 1929
  3. C.कराची, 1931
  4. D.फैजपुर, 1936
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. लाहौर, 1929

व्याख्या

सही उत्तर B, 1929 का लाहौर अधिवेशन है। दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की, कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज को अपना लक्ष्य घोषित किया, सविनय अवज्ञा आरंभ करने की अनुमति दी और जनता से 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का आह्वान किया; इसी कारण आगे चलकर संविधान के प्रारंभ के लिए यही तिथि चुनी गई। विकल्प A गलत है क्योंकि 1928 के कलकत्ता अधिवेशन में नेहरू रिपोर्ट स्वीकार हुई और सरकार को औपनिवेशिक स्वराज देने के लिए एक वर्ष का समय दिया गया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1931 के कराची अधिवेशन में गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन तथा मूल अधिकारों और आर्थिक कार्यक्रम के प्रस्ताव पारित हुए। विकल्प D गलत है क्योंकि 1936 का फैजपुर अधिवेशन किसी गाँव में हुआ पहला कांग्रेस अधिवेशन माना जाता है, जिसकी अध्यक्षता भी जवाहरलाल नेहरू ने की थी।

Q10.भारतीय इतिहासआसान

1917 का चंपारण सत्याग्रह गांधीजी ने किस वर्ग के समर्थन में चलाया था?

  1. A.नील की खेती करने वाले किसान
  2. B.कपड़ा मिल के मजदूर
  3. C.असम के बागान मजदूर
  4. D.गुजरात के नमक मजदूर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नील की खेती करने वाले किसान

व्याख्या

सही उत्तर A, नील की खेती करने वाले किसान है। बिहार के चंपारण में किसानों को तिनकठिया पद्धति के अंतर्गत अपनी जोत के एक भाग पर यूरोपीय बागान मालिकों के लिए नील उगाने को विवश किया जाता था। राजकुमार शुक्ल के निमंत्रण पर गांधीजी 1917 में वहाँ गए, जिला छोड़ने के आदेश की अवज्ञा की और सरकारी जाँच समिति बनवाई, जिसके वे सदस्य बने, और इसके बाद यह पद्धति समाप्त हुई। विकल्प B गलत है क्योंकि मिल मजदूरों का प्रश्न 1918 के अहमदाबाद संघर्ष का था, जिसमें गांधीजी ने पहला अनशन करके मजदूरी वृद्धि दिलाई। विकल्प C गलत है क्योंकि असम के बागान मजदूर इस प्रकार के किसी गांधीवादी सत्याग्रह का विषय नहीं थे। विकल्प D गलत है क्योंकि नमक कानून 1930 की दांडी यात्रा का लक्ष्य था, जो तेरह वर्ष बाद हुई।

Q11.भारतीय इतिहासकठिन

1942 में भारत छोड़ो आंदोलन आरंभ होने के समय भारत का वायसराय कौन था?

  1. A.लॉर्ड इरविन
  2. B.लॉर्ड विलिंगडन
  3. C.लॉर्ड लिनलिथगो
  4. D.लॉर्ड वेवेल
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. लॉर्ड लिनलिथगो

व्याख्या

सही उत्तर C, लॉर्ड लिनलिथगो है। लिनलिथगो 1936 से 1944 तक वायसराय रहे, इसलिए द्वितीय विश्वयुद्ध, कांग्रेस मंत्रिमंडलों का त्यागपत्र, 1940 का अगस्त प्रस्ताव, 1942 का क्रिप्स मिशन और भारत छोड़ो आंदोलन का दमन सब उनके कार्यकाल में आता है। विकल्प A गलत है क्योंकि लॉर्ड इरविन 1926 से 1931 तक वायसराय रहे और दांडी यात्रा, पहले गोलमेज सम्मेलन तथा 1931 के गांधी-इरविन समझौते के लिए स्मरण किए जाते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि लॉर्ड विलिंगडन 1931 से 1936 तक वायसराय रहे और सांप्रदायिक पंचाट, पूना समझौते तथा 1935 के भारत शासन अधिनियम के लिए स्मरण किए जाते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड वेवेल 1944 में वायसराय बने और वेवेल योजना, 1945 के शिमला सम्मेलन तथा 1946 के कैबिनेट मिशन के लिए स्मरण किए जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असहयोग आंदोलन क्यों वापस लिया गया?

5 फरवरी 1922 के चौरी चौरा कांड के कारण, जिसमें गोरखपुर जिले में भीड़ ने थाना जला दिया था। गांधीजी ने माना कि जनता अभी अहिंसा में प्रशिक्षित नहीं है और कांग्रेस कार्य समिति ने 12 फरवरी 1922 को बारदोली में आंदोलन वापस ले लिया।

दांडी यात्रा कब और कहाँ से आरंभ हुई?

यह 12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के निकट साबरमती आश्रम से 78 स्वयंसेवकों के साथ आरंभ हुई और गुजरात तट पर दांडी तक लगभग 385 किलोमीटर चली, जहाँ गांधीजी ने 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ा।

गांधीजी किस गोलमेज सम्मेलन में सम्मिलित हुए?

केवल दूसरे में, जो सितंबर से दिसंबर 1931 तक लंदन में हुआ और जिसमें वे गांधी-इरविन समझौते के बाद कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में गए। कांग्रेस ने 1930 के पहले और 1932 के तीसरे सम्मेलन में भाग नहीं लिया।

पूना समझौता क्या था?

24 सितंबर 1932 का वह समझौता जो यरवदा जेल में आमरण अनशन पर बैठे गांधीजी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के बीच हुआ। इसमें सांप्रदायिक पंचाट द्वारा दलित वर्गों को दिए गए पृथक निर्वाचन मंडल छोड़ दिए गए और उनके लिए संयुक्त निर्वाचन में अधिक संख्या में सीटें आरक्षित की गईं।

भारत छोड़ो का नारा किसने दिया और करो या मरो किसने?

भारत छोड़ो शब्द समाजवादी नेता यूसुफ मेहर अली ने दिए थे, जिन्होंने पहले साइमन वापस जाओ का नारा भी दिया था। करो या मरो का आह्वान गांधीजी का था, जो उन्होंने 8 अगस्त 1942 को ग्वालिया टैंक के भाषण में दिया।

भारत छोड़ो आंदोलन की समानांतर सरकारें कौन सी थीं?

जहाँ ब्रिटिश सत्ता ढह गई वहाँ जनता द्वारा बनाई गई स्थानीय सरकारें: उत्तर प्रदेश में बलिया में चित्तू पांडे के नेतृत्व में, मिदनापुर के तामलुक में जातीय सरकार और महाराष्ट्र के सतारा में नाना पाटिल की प्रति सरकार, जो सबसे अधिक समय तक चली।

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