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GK नोट्सभारतीय इतिहासभारत के वायसराय (1858–1947) और प्रमुख घटनाएं

भारत के वायसराय 1858 से 1947: सूची और प्रमुख घटनाएं

लॉर्ड कैनिंग से लॉर्ड माउंटबेटन तक भारत के वायसरायों के पूर्ण नोट्स, प्रत्येक नाम के साथ परीक्षा में पूछे जाने वाले अधिनियम, आंदोलन और घटनाएं।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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भारत के वायसराय 1858 से 1947: सूची और प्रमुख घटनाएं — GK24 title card
भारत के वायसराय 1858 से 1947: सूची और प्रमुख घटनाएं — GK24 title card

1857 के विद्रोह के दमन के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी की राजनीतिक भूमिका समाप्त हो गई। 1858 के भारत शासन अधिनियम ने भारत का शासन ब्रिटिश ताज को सौंप दिया, लंदन में पंद्रह सदस्यों की परिषद के साथ भारत सचिव का पद बनाया और भारत के गवर्नर-जनरल को वायसराय, अर्थात ब्रिटिश सम्राट का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि बना दिया। 1858 से 1947 के बीच बीस वायसराय इस पद पर रहे, और विद्यार्थी को जिन घटनाओं का क्रम याद रखना है, भारतीय परिषद अधिनियमों से लेकर बंगाल विभाजन तक, राजधानी के स्थानांतरण से भारत छोड़ो आंदोलन तक, उन्हें याद रखने का सबसे सरल तरीका है प्रत्येक घटना को उस वायसराय से जोड़ना जिसके कार्यकाल में वह घटी।

गवर्नर-जनरल से वायसराय तक

वारेन हेस्टिंग्स रेगुलेटिंग एक्ट के अंतर्गत बंगाल का पहला गवर्नर-जनरल बना था और लॉर्ड विलियम बेंटिक 1833 के चार्टर एक्ट के अंतर्गत भारत का पहला गवर्नर-जनरल। विद्रोह के समय गवर्नर-जनरल रहे लॉर्ड कैनिंग 1858 में पहले वायसराय बने। उनके कार्यकाल में 1861 के भारतीय परिषद अधिनियम ने बंबई और मद्रास प्रेसीडेंसी की विधायी शक्ति लौटाई तथा भारतीयों को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में विधान परिषद में लिया, 1861 के भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम ने कलकत्ता, बंबई और मद्रास में उच्च न्यायालय स्थापित किए और व्यपगत का सिद्धांत वापस ले लिया गया। 1869 से वायसराय रहे लॉर्ड मेयो ने 1872 की पहली नियमित जनगणना कराई, कृषि विभाग तथा काठियावाड़ में राजकुमार कॉलेज स्थापित किया, और वे एकमात्र वायसराय हैं जिनकी पद पर रहते हत्या हुई; 1872 में अंडमान के पोर्ट ब्लेयर में शेर अली अफरीदी ने उन पर छुरे से हमला किया।

लिटन, रिपन और कर्जन

लॉर्ड लिटन दमन और 1876 से 1878 के अकाल के लिए याद किए जाते हैं, जिसके दौरान उन्होंने 1877 का भव्य दिल्ली दरबार आयोजित कर महारानी विक्टोरिया को भारत की साम्राज्ञी घोषित किया। उन्होंने 1878 का वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट पारित किया, जिसने भारतीय भाषाओं के समाचारपत्रों का मुंह बंद कर दिया, तथा 1878 का आर्म्स एक्ट पारित किया, और सिविल सेवा परीक्षा की अधिकतम आयु इक्कीस से उन्नीस वर्ष कर दी। वायसरायों में सर्वाधिक उदार लॉर्ड रिपन ने 1882 में वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट निरसित किया, 1882 का स्थानीय स्वशासन प्रस्ताव पारित किया जिससे उन्हें भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक कहा जाता है, 1882 में शिक्षा पर हंटर आयोग नियुक्त किया और 1881 का पहला फैक्ट्री अधिनियम पारित किया। 1883 के इल्बर्ट बिल ने, जो भारतीय न्यायाधीशों को यूरोपीय अभियुक्तों के मुकदमे सुनने की अनुमति देना चाहता था, यूरोपीय समुदाय में ऐसा विरोध खड़ा किया कि उसे कमजोर करना पड़ा। 1899 से 1905 तक वायसराय रहे लॉर्ड कर्जन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण बनाया और 1904 का प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम पारित किया, एंड्रयू फ्रेजर की अध्यक्षता में पुलिस आयोग तथा थॉमस रैले की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय आयोग बनाया, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत बनाया और 1905 में बंगाल विभाजन का आदेश दिया, जिससे स्वदेशी आंदोलन प्रारंभ हुआ।

वायसराय और राष्ट्रीय आंदोलन

वायसरायकार्यकालयाद रखने योग्य घटनाएं
लॉर्ड कैनिंग1858 से 1862पहला वायसराय, भारतीय परिषद अधिनियम 1861, उच्च न्यायालय अधिनियम 1861
लॉर्ड मेयो1869 से 1872पहली जनगणना 1872, पोर्ट ब्लेयर में हत्या
लॉर्ड लिटन1876 से 1880दिल्ली दरबार 1877, वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट 1878, आर्म्स एक्ट
लॉर्ड रिपन1880 से 1884स्थानीय स्वशासन 1882, हंटर आयोग, इल्बर्ट बिल
लॉर्ड डफरिन1884 से 18881885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना
लॉर्ड लैंसडाउन1888 से 1894भारतीय परिषद अधिनियम 1892, डूरंड रेखा 1893
लॉर्ड कर्जन1899 से 1905बंगाल विभाजन 1905, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
लॉर्ड मिंटो द्वितीय1905 से 1910मॉर्ले-मिंटो सुधार 1909, पृथक निर्वाचन मंडल
लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय1910 से 19161911 में राजधानी दिल्ली स्थानांतरित, बंगाल विभाजन रद्द
लॉर्ड चेम्सफोर्ड1916 से 1921रौलट अधिनियम और जलियांवाला बाग 1919, मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार
लॉर्ड रीडिंग1921 से 1926चौरी चौरा 1922, स्वराज पार्टी 1923, काकोरी 1925
लॉर्ड इरविन1926 से 1931साइमन आयोग 1928, दांडी मार्च 1930, गांधी-इरविन समझौता 1931
लॉर्ड विलिंग्डन1931 से 1936सांप्रदायिक पंचाट और पूना पैक्ट 1932, 1935 का अधिनियम
लॉर्ड लिनलिथगो1936 से 1944अगस्त प्रस्ताव 1940, क्रिप्स मिशन और भारत छोड़ो 1942
लॉर्ड वेवेल1944 से 1947वेवेल योजना और शिमला सम्मेलन 1945, कैबिनेट मिशन 1946
लॉर्ड माउंटबेटन1947अंतिम वायसराय, 3 जून योजना, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947

अंतिम वर्ष

लॉर्ड लिनलिथगो सबसे लंबे समय तक रहने वाले वायसराय थे। उनके कार्यकाल में विधानमंडलों से परामर्श किए बिना भारत को द्वितीय विश्वयुद्ध में शामिल किया गया, 1939 में कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने त्यागपत्र दिए, मुस्लिम लीग ने 1940 का लाहौर प्रस्ताव पारित किया और अगस्त 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उन्हीं के समय कुचला गया। लॉर्ड वेवेल ने वेवेल योजना के आधार पर 1945 का शिमला सम्मेलन बुलाया, 1946 में कैबिनेट मिशन का स्वागत किया और प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस तथा उसके बाद के सांप्रदायिक दंगों का सामना किया। लॉर्ड माउंटबेटन मार्च 1947 में आए, उन्होंने देश के विभाजन के लिए 3 जून 1947 की योजना घोषित की और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के अंतर्गत स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने; उनके बाद सी राजगोपालाचारी इस पद पर आसीन होने वाले पहले और एकमात्र भारतीय बने।

परीक्षा की दृष्टि से

सामान्य प्रश्न किसी वायसराय का नाम देकर घटना पूछता है, अथवा घटना देकर वायसराय पूछता है। बार-बार पूछे जाने वाले नाम हैं: पहले वायसराय के रूप में कैनिंग, जनगणना और हत्या के लिए मेयो, वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट तथा 1877 के दरबार के लिए लिटन, स्थानीय स्वशासन और इल्बर्ट बिल के लिए रिपन, कांग्रेस की स्थापना के लिए डफरिन, बंगाल विभाजन के लिए कर्जन, पृथक निर्वाचन के लिए मिंटो, राजधानी स्थानांतरण के लिए हार्डिंग, जलियांवाला बाग के लिए चेम्सफोर्ड, गांधी-इरविन समझौते के लिए इरविन, भारत छोड़ो के लिए लिनलिथगो और सत्ता हस्तांतरण के लिए माउंटबेटन। जाल हैं: 1911 के लिए मिंटो और हार्डिंग का भ्रम, पहले वायसराय के लिए डलहौजी और कैनिंग का भ्रम, तथा कैबिनेट मिशन के लिए वेवेल और माउंटबेटन का भ्रम।

महत्वपूर्ण तथ्य

पद की स्थापनाभारत शासन अधिनियम, 1858
पहला वायसरायलॉर्ड कैनिंग, 1858 से 1862
पहली जनगणना1872, लॉर्ड मेयो के कार्यकाल में
हत्या किए गए वायसरायलॉर्ड मेयो, पोर्ट ब्लेयर, 1872
वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट1878, लॉर्ड लिटन; 1882 में लॉर्ड रिपन द्वारा निरसित
कांग्रेस की स्थापना1885, लॉर्ड डफरिन के कार्यकाल में
बंगाल विभाजन1905, लॉर्ड कर्जन; 1911 में रद्द
पृथक निर्वाचन मंडलमॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909, लॉर्ड मिंटो द्वितीय
राजधानी दिल्लीदिल्ली दरबार, 1911, लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय
जलियांवाला बाग13 अप्रैल 1919, लॉर्ड चेम्सफोर्ड के कार्यकाल में
गांधी-इरविन समझौता5 मार्च 1931, लॉर्ड इरविन
सबसे लंबा कार्यकाललॉर्ड लिनलिथगो, 1936 से 1944
कैबिनेट मिशन1946, लॉर्ड वेवेल के कार्यकाल में
अंतिम वायसरायलॉर्ड माउंटबेटन, 1947

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय इतिहासआसान

1858 के भारत शासन अधिनियम के बाद भारत का पहला वायसराय कौन था?

  1. A.लॉर्ड डलहौजी
  2. B.लॉर्ड कैनिंग
  3. C.लॉर्ड मेयो
  4. D.लॉर्ड लिटन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लॉर्ड कैनिंग

1858 के भारत शासन अधिनियम ने भारत का प्रशासन ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश ताज को सौंपा और भारत के गवर्नर-जनरल का नाम वायसराय कर दिया; 1857 के विद्रोह के समय गवर्नर-जनरल रहे कैनिंग 1858 में पहले वायसराय बने और 1862 तक इस पद पर रहे।

Q2.भारतीय इतिहासआसान

भारत के किस वायसराय की पद पर रहते हुए हत्या हुई?

  1. A.लॉर्ड मेयो
  2. B.लॉर्ड नॉर्थब्रुक
  3. C.लॉर्ड एल्गिन
  4. D.लॉर्ड लैंसडाउन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लॉर्ड मेयो

फरवरी 1872 में अंडमान के पोर्ट ब्लेयर स्थित दंड बस्ती के निरीक्षण के दौरान बंदी शेर अली अफरीदी ने छुरे से उनकी हत्या कर दी थी, और वे पद पर रहते मारे गए एकमात्र वायसराय हैं।

Q3.भारतीय इतिहासआसान

1878 का वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट किस वायसराय के कार्यकाल में पारित हुआ?

  1. A.लॉर्ड रिपन
  2. B.लॉर्ड लिटन
  3. C.लॉर्ड डफरिन
  4. D.लॉर्ड कर्जन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लॉर्ड लिटन

1878 के वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट के अनुसार भारतीय भाषा के समाचारपत्र के प्रकाशक को बंध-पत्र देना पड़ता था और राजद्रोही सामग्री छापने पर सरकार प्रेस जब्त कर सकती थी, जबकि अंग्रेजी समाचारपत्र इससे मुक्त थे; इसीलिए इसे मुंह बंद करने वाला अधिनियम कहा गया।

Q4.भारतीय इतिहासमध्यम

भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक किसे कहा जाता है?

  1. A.लॉर्ड कैनिंग
  2. B.लॉर्ड मेयो
  3. C.लॉर्ड रिपन
  4. D.लॉर्ड मिंटो
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लॉर्ड रिपन

1882 के उनके स्थानीय स्वशासन प्रस्ताव में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए ऐसे बोर्डों की बात थी जिनमें निर्वाचित गैर-सरकारी सदस्यों का बहुमत और गैर-सरकारी अध्यक्ष हो, तथा उन्हें स्थानीय निधियों पर नियंत्रण दिया जाए; इसीलिए उन्हें भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक कहा जाता है।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

1905 का बंगाल विभाजन किस वायसराय ने किया?

  1. A.लॉर्ड कर्जन
  2. B.लॉर्ड मिंटो द्वितीय
  3. C.लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय
  4. D.लॉर्ड लैंसडाउन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लॉर्ड कर्जन

उन्होंने जुलाई 1905 में बंगाल प्रेसीडेंसी के विभाजन की घोषणा की और यह 16 अक्टूबर 1905 से लागू हुआ, जिससे पूर्वी बंगाल और असम प्रांत बना; आधिकारिक कारण प्रशासनिक सुविधा बताया गया, परंतु वास्तविक उद्देश्य हिंदू और मुसलमान जनसंख्या को बांटकर बंगाल के राष्ट्रवादी नेतृत्व को कमजोर करना था।

Q6.भारतीय इतिहासमध्यम

ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली किस वायसराय के कार्यकाल में स्थानांतरित हुई?

  1. A.लॉर्ड कर्जन
  2. B.लॉर्ड मिंटो द्वितीय
  3. C.लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय
  4. D.लॉर्ड चेम्सफोर्ड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय

राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा सम्राट जॉर्ज पंचम ने दिसंबर 1911 के दिल्ली दरबार में हार्डिंग के कार्यकाल में की थी, और उसी दरबार में बंगाल विभाजन रद्द किया गया।

Q7.भारतीय इतिहासमध्यम

1919 का जलियांवाला बाग हत्याकांड किस वायसराय के कार्यकाल में हुआ?

  1. A.लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय
  2. B.लॉर्ड चेम्सफोर्ड
  3. C.लॉर्ड रीडिंग
  4. D.लॉर्ड इरविन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लॉर्ड चेम्सफोर्ड

उनके कार्यकाल में मार्च 1919 में रौलट अधिनियम पारित हुआ और 13 अप्रैल 1919 को जनरल डायर ने अमृतसर के जलियांवाला बाग में निहत्थी भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया; इसकी जांच के लिए हंटर समिति नियुक्त हुई और रवींद्रनाथ टैगोर ने विरोध में अपनी नाइटहुड की उपाधि लौटा…

Q8.भारतीय इतिहासकठिन

1931 का गांधी-इरविन समझौता किस आंदोलन के अंत में हुआ?

  1. A.असहयोग आंदोलन
  2. B.सविनय अवज्ञा आंदोलन
  3. C.खिलाफत आंदोलन
  4. D.भारत छोड़ो आंदोलन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सविनय अवज्ञा आंदोलन

यह आंदोलन मार्च 1930 के दांडी मार्च से नमक कानून के विरुद्ध आरंभ हुआ, और पहले गोलमेज सम्मेलन के बाद वायसराय लॉर्ड इरविन ने 5 मार्च 1931 को महात्मा गांधी से समझौता किया: राजनीतिक बंदी छोड़े जाने थे, तटवर्ती क्षेत्रों में घरेलू उपयोग के लिए नमक बनाने की अनुमति मिली…

Q9.भारतीय इतिहासकठिन

किस वायसराय का कार्यकाल सबसे लंबा रहा और उन्हें भारत छोड़ो आंदोलन का सामना करना पड़ा?

  1. A.लॉर्ड विलिंग्डन
  2. B.लॉर्ड लिनलिथगो
  3. C.लॉर्ड वेवेल
  4. D.लॉर्ड रीडिंग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लॉर्ड लिनलिथगो

इस दौरान 1935 के भारत शासन अधिनियम के अंतर्गत 1937 के प्रांतीय चुनाव हुए, विधानमंडलों से परामर्श किए बिना भारत को द्वितीय विश्वयुद्ध में शामिल किया गया और 1939 में कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने त्यागपत्र दिए, मुस्लिम लीग ने 1940 का लाहौर प्रस्ताव पारित किया, 1940 में अगस्त प्रस्ताव आया, 1942…

Q10.भारतीय इतिहासकठिन

भारत के अंतिम वायसराय और स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल कौन थे?

  1. A.लॉर्ड वेवेल
  2. B.लॉर्ड माउंटबेटन
  3. C.सी राजगोपालाचारी
  4. D.लॉर्ड लिनलिथगो
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लॉर्ड माउंटबेटन

उन्होंने मार्च 1947 में कार्यभार संभाला, 3 जून 1947 की योजना घोषित की जिसके अंतर्गत देश का विभाजन हुआ, और 1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम लागू होने पर वे जून 1948 तक भारतीय अधिराज्य के पहले गवर्नर-जनरल बने रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गवर्नर-जनरल और वायसराय में क्या अंतर है?

गवर्नर-जनरल ईस्ट इंडिया कंपनी और बाद में ताज के अधीन प्रशासन का प्रमुख था। 1858 के अधिनियम के बाद वही अधिकारी वायसराय भी था, अर्थात देशी रियासतों के साथ संबंधों में ब्रिटिश सम्राट का व्यक्तिगत प्रतिनिधि। वायसराय की उपाधि 1947 में समाप्त हुई, जबकि गवर्नर-जनरल का पद 1950 तक चला।

किस वायसराय को उनके प्रशंसक आधुनिक भारत का निर्माता कहते हैं?

लॉर्ड कर्जन, उनके प्रशासनिक कार्यों के कारण: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, 1904 का प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम, पुलिस आयोग, विश्वविद्यालय अधिनियम तथा उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत का निर्माण। भारतीय जनमत उन्हें 1905 के बंगाल विभाजन के लिए याद करता है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किस वायसराय के कार्यकाल में हुई?

लॉर्ड डफरिन के कार्यकाल में। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला अधिवेशन दिसंबर 1885 में बंबई में बहत्तर प्रतिनिधियों के साथ डब्ल्यू सी बनर्जी की अध्यक्षता में हुआ, और कहा जाता है कि डफरिन की मौन सहमति इसमें थी।

भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल कौन थे?

सी राजगोपालाचारी, जो जून 1948 में लॉर्ड माउंटबेटन के उत्तराधिकारी बने और 26 जनवरी 1950 तक पद पर रहे, जब भारत गणराज्य बना और इस पद के स्थान पर राष्ट्रपति का पद आया।

वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट किस वायसराय ने निरसित किया?

लॉर्ड रिपन ने, 1882 में। 1878 का यह अधिनियम लॉर्ड लिटन ने भारतीय भाषाओं के समाचारपत्रों का मुंह बंद करने के लिए पारित किया था, और वायसरायों में सर्वाधिक उदार रिपन ने उसे निरसित करने के साथ उसी वर्ष स्थानीय स्वशासन प्रस्ताव भी पारित किया।

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