प्राचीन भारत के विश्वविद्यालय: नालंदा और तक्षशिला
परीक्षा के लिए प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालयों पर नोट्स: तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला के संस्थापक, आचार्य, चीनी यात्री तथा उनके विनाश की जानकारी।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारत में पहला आधुनिक महाविद्यालय खुलने से बहुत पहले इस उपमहाद्वीप में ऐसे बड़े आवासीय शिक्षा केंद्र चलते थे जहां मध्य एशिया, चीन, तिब्बत, कोरिया और दक्षिण-पूर्व एशिया से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। इनमें तीन के बारे में परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है: उत्तर-पश्चिम में तक्षशिला, मगध में नालंदा और पूर्वी बिहार में विक्रमशिला। ये आज के अर्थ में विश्वविद्यालय नहीं थे, जहां संकाय और उपाधियां हों, बल्कि महाविहार और गुरु-केंद्रित विद्यालय थे, जिनमें प्रवेश परीक्षा से मिलता था और शिक्षा निःशुल्क थी, जिसका खर्च राजाओं द्वारा दान में दिए गए गांवों से चलता था। परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है हर केंद्र का संस्थापक, संरक्षक वंश, प्रसिद्ध आचार्य और विद्यार्थी, विदेशी यात्री और उसके पतन का कारण।
तक्षशिला
तक्षशिला, जिसे यूनानी और अंग्रेजी स्रोतों में टैक्सिला लिखा गया, गांधार क्षेत्र में स्थित था, जो आज पाकिस्तान के रावलपिंडी जिले में है। बुद्ध के समय यानी छठी शताब्दी ईसा पूर्व में ही यह विद्या का प्रसिद्ध केंद्र बन चुका था और गांधार महाजनपद का भाग था। यहां कोई केंद्रीय प्रशासन नहीं था: विद्यार्थी किसी एक आचार्य से जुड़ता था, शुल्क के बदले सेवा करता था और आचार्य के कहने पर ही अध्ययन पूरा मानकर लौटता था। यहां तीन वेद और अठारह शिल्प पढ़ाए जाते थे, जिनमें चिकित्सा, धनुर्विद्या, सैन्य विज्ञान, विधि, ज्योतिष और लेखा शामिल थे। परंपरा अष्टाध्यायी के रचयिता व्याकरणाचार्य पाणिनि, अर्थशास्त्र के लेखक तथा चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु कौटिल्य और मगध के राजा बिंबिसार के वैद्य जीवक को तक्षशिला से जोड़ती है। बार-बार के आक्रमणों से यह नगर उजड़ता गया और पांचवीं शताब्दी ईस्वी में हूणों के आक्रमण से अंततः नष्ट हो गया। बीसवीं शताब्दी में सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में यहां उत्खनन हुआ और 1980 में इस स्थल को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
नालंदा
नालंदा मगध में, आज के बिहार के नालंदा जिले में राजगीर के पास स्थित था। इसकी स्थापना महाविहार के रूप में पांचवीं शताब्दी ईस्वी में गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम ने की थी और बाद के गुप्त शासकों, सातवीं शताब्दी में कन्नौज के हर्षवर्धन तथा उसके बाद बंगाल और बिहार के पाल राजाओं ने इसका विस्तार किया। यह महायान बौद्ध धर्म का आवासीय मठीय विश्वविद्यालय था, फिर भी यहां तर्कशास्त्र, व्याकरण, चिकित्सा, ज्योतिष और विरोधी दर्शनों की शिक्षा भी दी जाती थी, और प्रवेश के लिए द्वार पर बैठे विद्वान की परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ती थी। इसका पुस्तकालय धर्मगंज कहलाता था, जिसके तीन भवनों के नाम रत्नसागर, रत्नोदधि और रत्नरंजक बताए जाते हैं। चीनी यात्री ह्वेनसांग, जो हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया, यहां वृद्ध कुलपति शीलभद्र के पास अध्ययन करता रहा, और सातवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इत्सिंग यहां ठहरा; दोनों ने यहां की दिनचर्या का वर्णन छोड़ा है। नागार्जुन, आर्यदेव, धर्मकीर्ति और धर्मपाल जैसे आचार्य इससे जुड़े रहे। बारहवीं शताब्दी के अंत में बख्तियार खिलजी की सेना ने नालंदा को नष्ट कर दिया। उत्खनित अवशेषों को 2016 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया और संसद के 2010 के अधिनियम से राजगीर में आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय स्थापित हुआ।
| केंद्र | स्थान | संस्थापक या संरक्षक | विशेषता |
|---|---|---|---|
| तक्षशिला | गांधार, आज पाकिस्तान में | कोई एक संस्थापक नहीं; छठी शताब्दी ईसा पूर्व से प्रसिद्ध | पाणिनि, कौटिल्य, जीवक; चिकित्सा और अठारह शिल्प |
| नालंदा | राजगीर के निकट, बिहार | गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम | ह्वेनसांग और इत्सिंग, शीलभद्र, धर्मगंज पुस्तकालय |
| विक्रमशिला | अंतीचक, भागलपुर, बिहार | पाल शासक धर्मपाल | तांत्रिक बौद्ध शिक्षा; अतीश दीपंकर, जो तिब्बत गए |
| ओदंतपुरी | बिहारशरीफ, बिहार | पाल शासक गोपाल | तिब्बत के पहले मठों का आदर्श |
| सोमपुर | पहाड़पुर, आज बांग्लादेश में | पाल शासक धर्मपाल | हिमालय के दक्षिण का सबसे बड़ा बौद्ध मठ |
| वलभी | सौराष्ट्र, गुजरात | मैत्रक शासक | हीनयान केंद्र, नालंदा का प्रतिद्वंद्वी, इत्सिंग ने प्रशंसा की |
विक्रमशिला
विक्रमशिला की स्थापना नौवीं शताब्दी के आसपास पाल शासक धर्मपाल ने बिहार के भागलपुर जिले के अंतीचक में की थी, और कहा जाता है कि इसे इसलिए बनाया गया क्योंकि नालंदा का स्तर गिरता हुआ माना जा रहा था। यह तांत्रिक बौद्ध शिक्षा का विशेष केंद्र था और इसके द्वारों पर द्वारपंडित नाम के विद्वान बैठते थे, जिनका काम शास्त्रार्थ या अध्ययन के लिए आने वालों की परीक्षा लेना था। यहां के सबसे प्रसिद्ध आचार्य अतीश दीपंकर श्रीज्ञान थे, जो ग्यारहवीं शताब्दी में तिब्बत गए और वहां बौद्ध धर्म का सुधार किया। विक्रमशिला को भी तेरहवीं शताब्दी के आरंभ में बख्तियार खिलजी ने नष्ट कर दिया और अंतीचक के टीले का उत्खनन बीसवीं शताब्दी में हुआ। पहले पाल शासक गोपाल द्वारा स्थापित ओदंतपुरी और धर्मपाल द्वारा ही स्थापित पहाड़पुर के सोमपुर महाविहार के साथ मिलकर इसने पाल महाविहारों की वह श्रृंखला बनाई जिसके आचार्य बौद्ध धर्म को तिब्बत तक ले गए।
प्राचीन शिक्षा व्यवस्था कैसी थी
इन केंद्रों में शिक्षा मौखिक और शास्त्रार्थ पर आधारित थी; प्रवेश से पहले द्वार पर परीक्षा होती थी, विद्यार्थी विहार में या गुरु के साथ रहता था, कोई शुल्क नहीं देता था और व्यवस्था राजाओं द्वारा दिए गए ग्रामों के राजस्व से चलती थी। उपाधियां नहीं दी जाती थीं और प्रतिष्ठा बाहर से आए विद्वानों के साथ खुले शास्त्रार्थ से बनती थी। विषयों में धार्मिक और व्यावहारिक दोनों थे: वेद और बौद्ध त्रिपिटक के साथ व्याकरण, तर्कशास्त्र, चिकित्सा, गणित, ज्योतिष, धातुकर्म और राजनीति। तीन प्रसिद्ध केंद्रों के अलावा गुजरात में मैत्रकों के संरक्षण में वलभी, दक्षिण में कांचीपुरम, उज्जैन, वाराणसी, आंध्र में नागार्जुनकोंडा, ओडिशा में पुष्पगिरि, बंगाल में जगद्दल और कश्मीर में शारदा पीठ दूर-दूर से विद्यार्थियों को खींचते थे। राजकीय संरक्षण समाप्त होने, भारत में बौद्ध धर्म के ह्रास और अंततः बारहवीं शताब्दी के अंत तथा तेरहवीं शताब्दी के आरंभ में बिहार के विहारों के विनाश से यह व्यवस्था टूट गई, जिसके बाद शिक्षा छोटे मंदिर विद्यालयों, मठों और मदरसों में चली गई।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न लगभग हमेशा जोड़े के रूप में आते हैं। संस्थापक और केंद्र: कुमारगुप्त प्रथम-नालंदा, धर्मपाल-विक्रमशिला तथा सोमपुर, गोपाल-ओदंतपुरी। स्थान और केंद्र: गांधार, राजगीर, भागलपुर का अंतीचक, पहाड़पुर, बिहारशरीफ और सौराष्ट्र। व्यक्ति और केंद्र: पाणिनि, कौटिल्य और जीवक का तक्षशिला; शीलभद्र, नागार्जुन और धर्मकीर्ति का नालंदा; अतीश दीपंकर का विक्रमशिला। यात्री और शासक: ह्वेनसांग-हर्षवर्धन, फाह्यान-चंद्रगुप्त द्वितीय और इत्सिंग सातवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, जिनमें भ्रम कराया जाता है। विनाशक और तिथि: बिहार के विहारों के लिए बख्तियार खिलजी और तक्षशिला के लिए हूण। यूनेस्को वर्ष भी पूछे जाते हैं, टैक्सिला 1980 और नालंदा 2016, साथ ही पुस्तकालय का नाम धर्मगंज और द्वारपंडित की उपाधि। एक सामान्य भूल नालंदा की स्थापना का श्रेय अशोक या हर्ष को देना है; हर्ष संरक्षक थे, संस्थापक नहीं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| तक्षशिला | गांधार, रावलपिंडी जिला, पाकिस्तान |
|---|---|
| तक्षशिला से जुड़े नाम | पाणिनि, कौटिल्य, जीवक, चरक परंपरा |
| तक्षशिला उत्खनन | सर जॉन मार्शल; यूनेस्को विश्व धरोहर, 1980 |
| नालंदा के संस्थापक | गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम, पांचवीं शताब्दी ईस्वी |
| नालंदा के संरक्षक | परवर्ती गुप्त, हर्षवर्धन और पाल शासक |
| ह्वेनसांग के समय कुलपति | शीलभद्र |
| नालंदा का पुस्तकालय | धर्मगंज: रत्नसागर, रत्नोदधि, रत्नरंजक |
| नालंदा यूनेस्को सूची | नालंदा महाविहार पुरातात्विक स्थल, 2016 |
| विक्रमशिला के संस्थापक | पाल शासक धर्मपाल |
| विक्रमशिला का स्थान | अंतीचक, भागलपुर जिला, बिहार |
| विक्रमशिला के आचार्य | अतीश दीपंकर श्रीज्ञान, जो तिब्बत गए |
| ओदंतपुरी | पहले पाल शासक गोपाल द्वारा स्थापित, बिहार |
| सोमपुर महाविहार | पहाड़पुर, बांग्लादेश; संस्थापक धर्मपाल |
| विनाश | बख्तियार खिलजी, बारहवीं के अंत और तेरहवीं शताब्दी के आरंभ में |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग भारतीय उपमहाद्वीप में लगभग ______ वर्ष पहले आया था।
- A.1100
- B.1700
- C.2000
- D.1400
उत्तर देखें
ह्वेनसांग ईसा की सातवीं शताब्दी में, कन्नौज के हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था, जो आज से लगभग चौदह सौ वर्ष पहले का समय है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नालंदा महाविहार की स्थापना किस शासक ने की थी?
- A.अशोक
- B.कुमारगुप्त प्रथम
- C.हर्षवर्धन
- D.धर्मपाल
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गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम ने ईसा की पांचवीं शताब्दी में आज के बिहार में राजगीर के पास नालंदा महाविहार की स्थापना की और यहां से उनके नाम की मुहर भी मिली है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तांत्रिक बौद्ध शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र विक्रमशिला किस राजा ने स्थापित किया था?
- A.गोपाल
- B.धर्मपाल
- C.देवपाल
- D.महिपाल
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पाल शासक धर्मपाल ने नौवीं शताब्दी के आसपास बिहार के भागलपुर जिले के अंतीचक में विक्रमशिला की स्थापना की, जो तांत्रिक अध्ययन और द्वारपंडित कहे जाने वाले उन विद्वानों के लिए प्रसिद्ध हुआ जो द्वार पर प्रवेशार्थियों की परीक्षा लेते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्राचीन शिक्षा केंद्र तक्षशिला किस क्षेत्र में स्थित था?
- A.मगध
- B.गांधार
- C.अवंति
- D.वत्स
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तक्षशिला, जिसे यूनानी और बाद के अंग्रेज लेखक टैक्सिला कहते हैं, उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम में गांधार महाजनपद की राजधानी थी, जो आज पाकिस्तान के रावलपिंडी जिले में है, और बुद्ध के समय में ही यह विद्या का प्रसिद्ध केंद्र था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ह्वेनसांग के अध्ययन काल में नालंदा महाविहार के कुलपति कौन थे?
- A.नागार्जुन
- B.शीलभद्र
- C.धर्मकीर्ति
- D.अतीश दीपंकर
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चीनी यात्री ह्वेनसांग ने सातवीं शताब्दी में हर्षवर्धन के शासनकाल में नालंदा में शीलभद्र के पास योगाचार दर्शन का अध्ययन किया, जो उस समय विहार के वृद्ध कुलपति थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तिब्बत जाने वाले आचार्य अतीश दीपंकर श्रीज्ञान किस शिक्षा केंद्र से जुड़े थे?
- A.तक्षशिला
- B.वलभी
- C.विक्रमशिला
- D.कांचीपुरम
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अतीश दीपंकर श्रीज्ञान भागलपुर के अंतीचक स्थित पाल विहार विक्रमशिला के सबसे प्रसिद्ध आचार्य थे, और ग्यारहवीं शताब्दी में उन्हें तिब्बत बुलाया गया, जहां उन्होंने बौद्ध आचरण का सुधार किया और वे वहां के महान आचार्यों में गिने जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तिब्बत के आरंभिक विहारों का आदर्श बनने वाला ओदंतपुरी विहार किस शासक ने बनवाया था?
- A.गोपाल
- B.देवपाल
- C.कुमारगुप्त प्रथम
- D.हर्षवर्धन
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आठवीं शताब्दी में पाल वंश के संस्थापक गोपाल ने बिहारशरीफ क्षेत्र में ओदंतपुरी विहार बनवाया और कहा जाता है कि तिब्बत में पहले विहार बनाते समय इसी की रूपरेखा अपनाई गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मैत्रक शासकों के अधीन गुजरात में स्थित नालंदा का प्रतिद्वंद्वी प्राचीन शिक्षा केंद्र कौन सा था?
- A.वलभी
- B.जगद्दल
- C.पुष्पगिरि
- D.सोमपुर
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गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित वलभी मैत्रक शासकों की राजधानी और हीनयान बौद्ध शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र था; यात्री इत्सिंग ने लिखा कि प्रतिष्ठा में यह नालंदा के समकक्ष था और यहां से विद्यार्थी राजकीय सेवा में जाते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नालंदा के विशाल पुस्तकालय का नाम क्या था?
- A.रत्नोदधि
- B.धर्मगंज
- C.धम्मपद
- D.विद्यासागर
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परवर्ती तिब्बती विवरण नालंदा के पुस्तकालय को धर्मगंज यानी धर्म का कोष कहते हैं और बताते हैं कि इसमें रत्नसागर, रत्नोदधि और रत्नरंजक नाम के तीन भवन थे, जिनमें सबसे ऊंचा नौ मंजिला बताया गया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी के विहार किस आक्रमणकारी की सेना ने नष्ट किए थे?
- A.महमूद गजनवी
- B.मुहम्मद गोरी
- C.बख्तियार खिलजी
- D.तैमूर
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गोरी शासकों की सेवा में रहे सेनापति इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने बारहवीं शताब्दी के अंत और तेरहवीं शताब्दी के आरंभ में बिहार पर आक्रमण कर इस क्षेत्र के मठीय विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया, जिसके बाद पूर्वी भारत में संगठित बौद्ध शिक्षा समाप्त हो गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बीसवीं शताब्दी में टैक्सिला के अवशेषों का व्यवस्थित उत्खनन किस पुरातत्वविद के नेतृत्व में हुआ?
- A.अलेक्जेंडर कनिंघम
- B.सर जॉन मार्शल
- C.आर. डी. बनर्जी
- D.दया राम साहनी
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक के रूप में जॉन मार्शल ने 1913 से टैक्सिला में लंबा उत्खनन कराया और नगर की क्रमिक बसावटों का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया; बाद में 1980 में यह स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की थी?
गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम ने पांचवीं शताब्दी ईस्वी में आज के बिहार में राजगीर के पास नालंदा महाविहार की स्थापना की। बाद के गुप्त शासकों, सातवीं शताब्दी में कन्नौज के हर्षवर्धन और उसके बाद पाल राजाओं ने इसका विस्तार किया, इसलिए हर्ष संरक्षक हैं, संस्थापक नहीं।
नालंदा कौन-कौन से चीनी यात्री आए थे?
ह्वेनसांग ने सातवीं शताब्दी में हर्षवर्धन के शासनकाल में नालंदा में शीलभद्र के पास अध्ययन किया और इत्सिंग उसी शताब्दी के उत्तरार्ध में यहां रहा। फाह्यान बहुत पहले चंद्रगुप्त द्वितीय के समय भारत आया था और उसने नालंदा को उसके चरम पर नहीं देखा।
तक्षशिला कहां स्थित था?
तक्षशिला, जिसे यूनानी और अंग्रेजी लेखक टैक्सिला कहते हैं, गांधार क्षेत्र में था, जो आज पाकिस्तान के रावलपिंडी जिले में आता है। यह गांधार महाजनपद की राजधानी और लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व से विद्या का प्रसिद्ध केंद्र था; इसके अवशेष 1980 में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित हुए।
विक्रमशिला की स्थापना किसने की और यह किसलिए प्रसिद्ध था?
पाल शासक धर्मपाल ने नौवीं शताब्दी के आसपास बिहार के भागलपुर जिले के अंतीचक में विक्रमशिला की स्थापना की। यह तांत्रिक बौद्ध शिक्षा, द्वारों पर प्रवेशार्थियों की परीक्षा लेने वाले द्वारपंडितों और अतीश दीपंकर श्रीज्ञान के लिए प्रसिद्ध था, जो इसकी शिक्षा तिब्बत तक ले गए।
नालंदा और विक्रमशिला को किसने नष्ट किया?
दोनों को बख्तियार खिलजी की सेना ने नष्ट किया, नालंदा को बारहवीं शताब्दी के अंत में और विक्रमशिला तथा ओदंतपुरी को तेरहवीं शताब्दी के आरंभ में। राजकीय संरक्षण समाप्त होने और भारत में बौद्ध धर्म के ह्रास ने इन्हें पहले ही कमजोर कर दिया था।
परीक्षा के लिए अन्य कौन से प्राचीन शिक्षा केंद्र महत्वपूर्ण हैं?
मैत्रकों के अधीन सौराष्ट्र का वलभी, जिसकी प्रशंसा इत्सिंग ने की; गोपाल द्वारा स्थापित ओदंतपुरी; धर्मपाल द्वारा स्थापित बांग्लादेश के पहाड़पुर का सोमपुर; बंगाल का जगद्दल; तथा कांचीपुरम, उज्जैन, वाराणसी, आंध्र का नागार्जुनकोंडा, ओडिशा का पुष्पगिरि और कश्मीर की शारदा पीठ।
स्रोत
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 1 (कक्षा 12) — एनसीईआरटी
- नालंदा महाविहार पुरातात्विक स्थल, बिहार — यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र
- टैक्सिला — यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र
- विक्रमशिला उत्खनित स्थल, भागलपुर — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण





