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GK नोट्सभारतीय इतिहासदिल्ली सल्तनत

दिल्ली सल्तनत: वंश, शासक और प्रशासन

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए दिल्ली सल्तनत के पूरे नोट्स: पाँच वंश और उनके संस्थापक, अलाउद्दीन खिलजी के सुधार, तुगलक प्रयोग, कर, इक्ता और स्थापत्य कला।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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दिल्ली सल्तनत: वंश, शासक और प्रशासन — GK24 title card
दिल्ली सल्तनत: वंश, शासक और प्रशासन — GK24 title card

दिल्ली सल्तनत उस तुर्क और अफगान शासन का नाम है जिसने 1206 से 1526 तक दिल्ली से उत्तर भारत पर शासन किया। इस अवधि में पाँच वंश गद्दी पर बैठे: गुलाम या मामलूक, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी। मध्यकालीन भारतीय इतिहास में यह खंड परीक्षाओं में सबसे अधिक पूछा जाता है, क्योंकि इसमें संस्थापक, राजधानियाँ, उपाधियाँ, सिक्के, कर, इमारतें और युद्ध ऐसी जोड़ियों में मिलते हैं जिन्हें प्रश्न बनाना आसान है। नीचे तथ्य इस तरह रखे गए हैं कि हर तथ्य अलग से दोहराया जा सके।

पाँच वंश एक दृष्टि में

वंशकालसंस्थापकअंतिम शासक
गुलाम (मामलूक)1206 से 1290कुतुबुद्दीन ऐबकशम्सुद्दीन कयूमर्स
खिलजी1290 से 1320जलालुद्दीन खिलजीखुसरो खान
तुगलक1320 से 1414गयासुद्दीन तुगलकनासिरुद्दीन महमूद
सैयद1414 से 1451खिज्र खानअलाउद्दीन आलम शाह
लोदी1451 से 1526बहलोल खान लोदीइब्राहीम लोदी

पाँचों में खिलजी वंश ने लगभग तीस वर्ष, अर्थात सबसे कम समय, शासन किया; तुगलक वंश ने लगभग चौरानवे वर्ष, अर्थात सबसे लंबे समय तक।

गुलाम या मामलूक वंश

मुहम्मद गोरी के गुलाम और सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 में इस वंश की नींव रखी और लाहौर को अपना केंद्र बनाया। उसने सूफी संत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में कुतुब मीनार का निर्माण आरंभ कराया, दिल्ली में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और अजमेर में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनवाया। 1210 में चौगान, अर्थात पोलो के प्रारंभिक रूप, खेलते हुए घोड़े से गिरकर उसकी मृत्यु हो गई।

उसका दामाद इल्तुतमिश 1211 से 1236 तक शासक रहा और उसे ही सल्तनत का वास्तविक संगठक माना जाता है। उसने राजधानी लाहौर से दिल्ली स्थानांतरित की, कुतुब मीनार पूरा कराया, चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल चलाया, नकद वेतन के स्थान पर भूमि निर्धारण की इक्ता व्यवस्था संगठित की और चालीस तुर्क सरदारों का दल तुर्कान-ए-चहलगानी बनाया। 1229 में अब्बासी खलीफा ने उसे मान्यता-पत्र भेजा, जिससे उसके शासन को इस्लामी जगत में वैध स्थान मिला। उसकी पुत्री रजिया 1236 से 1240 तक शासन करने वाली दिल्ली की पहली और एकमात्र महिला शासक बनी।

बलबन ने 1266 से 1287 तक शासन किया, चहलगानी की शक्ति तोड़ी और सिजदा अर्थात भूमि पर लेटकर प्रणाम तथा पाइबोस अर्थात पैर चूमने की प्रथाओं से दरबार को सुल्तान के सामने झुकाया। उसने सुल्तान को ईश्वर का प्रतिनिधि, नियाबत-ए-खुदाई, कहा और सेना के लिए अलग विभाग दीवान-ए-अर्ज बनाया।

खिलजी वंश

जलालुद्दीन खिलजी ने 1290 में इस वंश की स्थापना की। उसका भतीजा और हत्यारा अलाउद्दीन खिलजी, जिसने 1296 से 1316 तक शासन किया, इस काल का सबसे शक्तिशाली सुल्तान था। उसने अनाज, कपड़े, पशु और दासों के दाम निर्धारित किए और उन्हें लागू कराने के लिए शहना-ए-मंडी नियुक्त किया, कपड़े के नियंत्रित बाजार सराय अदल की स्थापना की, और वह पहला सुल्तान था जिसने सैनिकों को पूरी तरह नकद वेतन दिया। सेना में धोखाधड़ी रोकने के लिए उसने दाग अर्थात घोड़ों पर निशान लगाना और चेहरा अर्थात हर सैनिक का हुलिया लिखना आरंभ किया। उसने भू-राजस्व की मांग उपज के आधे तक बढ़ाई और आकलन के लिए भूमि की पैमाइश कराई। 1301 में रणथंभौर और 1303 में चित्तौड़ उसके अधिकार में आए, और उसके सेनापति मलिक काफूर ने सल्तनत की सेना दक्षिण भारत तक पहुँचाई। अलाउद्दीन ने अलाई दरवाजा, सीरी किला और हौज-ए-अलाई बनवाए, और तूती-ए-हिंद कहे जाने वाले कवि अमीर खुसरो ने उसके दरबार की शोभा बढ़ाई।

तुगलक वंश

गयासुद्दीन तुगलक ने 1320 में इस वंश की स्थापना की। मुहम्मद बिन तुगलक, जिसने 1325 से 1351 तक शासन किया, अपने दो असफल प्रयोगों के लिए याद किया जाता है: राजधानी को दिल्ली से देवगिरि ले जाना, जिसका नाम उसने दौलताबाद रखा, और काँसे तथा ताँबे की सांकेतिक मुद्रा चलाना, जिसकी नकल जालसाजों ने खुलकर की। मोरक्को का यात्री इब्न बतूता उसके दरबार में आया और दिल्ली का काजी बनाया गया। फिरोजशाह तुगलक ने 1351 से 1388 तक शासन किया और उसका ध्यान लोकनिर्माण पर रहा। उसने यमुना और सतलुज से नहरें निकालीं, फिरोजाबाद, हिसार, फतेहाबाद और जौनपुर नगर बसाए, दान के लिए दीवान-ए-खैरात तथा बेरोजगारों के लिए रोजगार कार्यालय बनाया, और टोपरा तथा मेरठ से अशोक के दो स्तंभ दिल्ली लाए। उसने जजिया ब्राह्मणों पर भी लगाया और अपने शासन का विवरण फुतूहात-ए-फिरोजशाही लिखा। 1398 में तैमूर ने आक्रमण कर दिल्ली लूटी और इसके बाद यह वंश सँभल नहीं सका।

सैयद और लोदी वंश

खिज्र खान ने 1414 में सैयद वंश की स्थापना की और स्वतंत्र सुल्तान के बजाय एक प्रतिनिधि के रूप में शासन किया। बहलोल खान लोदी ने 1451 में लोदी वंश की नींव रखी; यह दिल्ली का पहला अफगान वंश था। सिकंदर लोदी ने 1504 में आगरा नगर बसाया और अपनी राजधानी वहाँ ले गया। उसके पुत्र इब्राहीम लोदी को 1517 के खातौली के युद्ध में मेवाड़ के राणा सांगा ने हराकर कुछ समय बंदी बनाया, और 21 अप्रैल 1526 को पानीपत के पहले युद्ध में बाबर ने उसे मार डाला, जिससे सल्तनत समाप्त हुई और मुगल शासन आरंभ हुआ।

प्रशासन और राजस्व

सुल्तान राज्य, सेना और न्याय का प्रमुख था, और उसकी सहायता वे विभाग करते थे जिनके नाम परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

  • दीवान-ए-विजारत: वित्त और राजस्व, प्रमुख वजीर।
  • दीवान-ए-अर्ज: सेना, प्रमुख आरिज-ए-मुमालिक।
  • दीवान-ए-इंशा: शाही पत्राचार और लेखन।
  • दीवान-ए-रिसालत: धार्मिक विषय, अनुदान और अपील।
  • दीवान-ए-कजा: न्याय, प्रमुख काजी-उल-कुजात।

राज्य चार करों पर चलता था। खराज भूमि कर था और आय का मुख्य स्रोत; जकात मुसलमानों द्वारा दिया जाने वाला धार्मिक कर था; जजिया गैर-मुस्लिमों से सुरक्षा के बदले लिया जाने वाला कर था; और खम्स युद्ध में लूटी गई संपत्ति में राज्य का हिस्सा था। साम्राज्य इक्ताओं में बँटा था, जिन्हें मुक्ती या वली रखते थे, जो उस क्षेत्र का राजस्व वसूलते, उसी से सेना रखते और शेष राशि केंद्र को भेजते थे। फिरोजशाह तुगलक ने इक्ता को वंशानुगत बना दिया, जिससे केंद्र की पकड़ कमजोर हुई।

स्थापत्य और संस्कृति

सल्तनतकालीन निर्माताओं ने मंदिर स्थापत्य की शहतीर और टोड़े वाली ट्रैबिएट शैली के स्थान पर सच्चा मेहराब और सच्चा गुंबद, अर्थात आर्कुएट शैली, लाई, और जोड़ने के लिए चूने के गारे का प्रयोग किया। लगभग 72.5 मीटर ऊँची कुतुब मीनार विश्व की सबसे ऊँची ईंट निर्मित मीनार है। फारसी प्रशासन की भाषा बनी, और इस युग के इतिहास-ग्रंथ इसके मुख्य स्रोत हैं: मिन्हाज-उस-सिराज ने तबकात-ए-नासिरी और जियाउद्दीन बरनी ने तारीख-ए-फिरोजशाही लिखी। अमीर खुसरो ने कई सुल्तानों की सेवा की और फारसी तथा दिल्ली की प्रारंभिक हिंदवी बोली, दोनों में लिखा।

परीक्षा की दृष्टि से

इस विषय में परीक्षक बँधी हुई जोड़ियों से प्रश्न बनाते हैं: वंश और संस्थापक, शासक और सुधार, इमारत और निर्माता, कर और उसे देने वाला, युद्ध और उसका वर्ष। 'किसने स्थापना की', 'किसने राजधानी बदली', 'दाग और चेहरा किसने आरंभ किया' तथा 'सबसे कम समय तक किस वंश ने शासन किया' जैसे प्रश्न आते हैं। एसएससी सीजीएल और सीएचएसएल में अलाउद्दीन खिलजी के बाजार सुधार तथा मुहम्मद बिन तुगलक की सांकेतिक मुद्रा पर कथन-आधारित प्रश्न सामान्य हैं। आम भ्रम ये हैं: कुतुब मीनार को लेकर ऐबक और इल्तुतमिश में उलझन, क्योंकि ऐबक ने आरंभ कराया और इल्तुतमिश ने पूरा कराया; अढ़ाई दिन का झोंपड़ा इल्तुतमिश के नाम कर देना; गयासुद्दीन और मुहम्मद बिन तुगलक को बदल देना; और लोदी वंश के संस्थापक बहलोल को सिकंदर या इब्राहीम समझ लेना। करों और दीवानों को अलग रखें: खराज भूमि पर है, जजिया गैर-मुस्लिमों पर, और दीवान-ए-अर्ज सेना का विभाग है, खजाने का नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य

अवधि1206 से 1526 तक, पाँच वंशों के अधीन
सल्तनत का संस्थापककुतुबुद्दीन ऐबक, गुलाम (मामलूक) वंश, 1206
सबसे कम शासन करने वाला वंशखिलजी, लगभग 30 वर्ष, 1290 से 1320
सबसे लंबे शासन वाला वंशतुगलक, लगभग 94 वर्ष, 1320 से 1414
अढ़ाई दिन का झोंपड़ाकुतुबुद्दीन ऐबक ने अजमेर में बनवाया
कुतुब मीनारऐबक ने आरंभ कराया, इल्तुतमिश ने पूरा कराया; लगभग 72.5 मीटर
सिक्केचाँदी का टंका और ताँबे का जीतल, इल्तुतमिश द्वारा
एकमात्र महिला शासकरजिया सुल्तान, 1236 से 1240
बाजार नियंत्रणअलाउद्दीन खिलजी; शहना-ए-मंडी बाजार अधीक्षक था
दाग और चेहराअलाउद्दीन खिलजी की घोड़ों पर निशान और सैनिकों का हुलिया व्यवस्था
सांकेतिक मुद्रामुहम्मद बिन तुगलक, काँसे और ताँबे की
राजधानी परिवर्तनमुहम्मद बिन तुगलक द्वारा दिल्ली से देवगिरि, नाम दौलताबाद
इब्न बतूतामुहम्मद बिन तुगलक के शासन में आया; दिल्ली का काजी बना
भूमि करखराज, राज्य की आय का मुख्य स्रोत
गैर-मुस्लिमों पर करजजिया
युद्ध की लूट में राज्य का हिस्साखम्स
सेना विभागदीवान-ए-अर्ज, प्रमुख आरिज-ए-मुमालिक
लोदी वंश का संस्थापकबहलोल खान लोदी, 1451, पहला अफगान वंश
खातौली का युद्ध, 1517मेवाड़ के राणा सांगा ने इब्राहीम लोदी को हराया
सल्तनत का अंतपानीपत का पहला युद्ध, 21 अप्रैल 1526; बाबर ने इब्राहीम लोदी को हराया

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC General Studies 2017 Official Papeमध्यम

दिल्ली सल्तनत के किस वंश ने सबसे कम समय तक शासन किया?

  1. A.खिलजी
  2. B.तुगलक
  3. C.सैयद
  4. D.लोदी
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. खिलजी

व्याख्या

सही उत्तर A, खिलजी है। खिलजी वंश ने दिल्ली की गद्दी 1290 में, जब जलालुद्दीन खिलजी ने सत्ता ली, से लेकर 1320 तक, जब गाजी मलिक ने खुसरो खान को हटाया, अपने पास रखी। यह लगभग तीस वर्ष होते हैं, जो दिल्ली सल्तनत के पाँच वंशों में सबसे कम अवधि है, भले ही इसी वंश ने अलाउद्दीन खिलजी जैसा सबसे शक्तिशाली शासक दिया। विकल्प B गलत है क्योंकि तुगलक वंश ने 1320 से 1414 तक, लगभग चौरानवे वर्ष शासन किया, जो पाँचों में सबसे लंबी अवधि है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1414 में खिज्र खान द्वारा स्थापित सैयद वंश 1451 तक चला, अर्थात लगभग सैंतीस वर्ष, जो खिलजी काल से अधिक है। विकल्प D गलत है क्योंकि लोदी वंश 1451 से 1526 तक, लगभग पचहत्तर वर्ष रहा और पानीपत में इब्राहीम लोदी की पराजय के साथ समाप्त हुआ। तुलना के लिए, गुलाम वंश 1206 से 1290 तक लगभग चौरासी वर्ष चला।

Q2.भारतीय इतिहासमध्यम

किस सुल्तान ने दिल्ली सल्तनत की राजधानी लाहौर से दिल्ली स्थानांतरित की और कुतुब मीनार पूरा कराया?

  1. A.कुतुबुद्दीन ऐबक
  2. B.इल्तुतमिश
  3. C.बलबन
  4. D.जलालुद्दीन खिलजी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. इल्तुतमिश

व्याख्या

सही उत्तर B, इल्तुतमिश है। शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने 1211 से 1236 तक शासन किया, शासन का केंद्र लाहौर से दिल्ली ले आया, अपने ससुर द्वारा आरंभ कराया गया कुतुब मीनार पूरा कराया, चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल जारी किया, भूमि निर्धारण की इक्ता व्यवस्था संगठित की और चालीस तुर्क सरदारों का दल तुर्कान-ए-चहलगानी बनाया। इसी कारण उसे सल्तनत का वास्तविक संगठक कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 में वंश की स्थापना की और लाहौर को ही अपना केंद्र बनाए रखा; उसने कुतुब मीनार केवल आरंभ कराया और 1210 में उसकी मृत्यु हो गई। विकल्प C गलत है क्योंकि बलबन बहुत बाद में, 1266 से 1287 तक शासक रहा और सिजदा तथा पाइबोस की प्रथाओं और चहलगानी की शक्ति तोड़ने के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि जलालुद्दीन खिलजी ने 1290 में एक भिन्न वंश की स्थापना की, जब राजधानी बहुत पहले बदल चुकी थी।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 13 Feb 2019, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से किस शासक ने 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' नामक मस्जिद बनवाई?

  1. A.बलबन
  2. B.इब्राहीम लोदी
  3. C.इल्तुतमिश
  4. D.कुतुबुद्दीन ऐबक
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. कुतुबुद्दीन ऐबक

व्याख्या

सही उत्तर D, कुतुबुद्दीन ऐबक है। अढ़ाई दिन का झोंपड़ा राजस्थान के अजमेर में स्थित है और इसे गुलाम वंश के संस्थापक तथा दिल्ली के पहले सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक ने एक पुराने संस्कृत महाविद्यालय के स्थान पर बनवाया था। इसी शासक ने दिल्ली में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद बनवाई और कुतुब मीनार का निर्माण आरंभ कराया, इसलिए सल्तनत की सबसे प्रारंभिक मस्जिदों के साथ ऐबक का नाम जोड़ना चाहिए। विकल्प A गलत है क्योंकि बलबन, जिसने 1266 से 1287 तक शासन किया, दरबारी शिष्टाचार और प्रशासनिक सुधारों के लिए जाना जाता है, इस मस्जिद के लिए नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि इब्राहीम लोदी तीन शताब्दी से अधिक बाद, 1517 से 1526 तक शासक रहा और पानीपत का पहला युद्ध बाबर से हारा। विकल्प C गलत है क्योंकि इल्तुतमिश ने कुतुब मीनार पूरा कराया और हौज-ए-शम्सी बनवाया, परंतु अजमेर की यह मस्जिद ऐबक का कार्य थी।

Q4.भारतीय इतिहासमध्यम

दाग (घोड़ों पर निशान लगाना) और चेहरा (सैनिकों का हुलिया लिखना) व्यवस्थाएँ किस सुल्तान ने आरंभ कीं?

  1. A.बलबन
  2. B.इल्तुतमिश
  3. C.अलाउद्दीन खिलजी
  4. D.फिरोजशाह तुगलक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अलाउद्दीन खिलजी

व्याख्या

सही उत्तर C, अलाउद्दीन खिलजी है। अलाउद्दीन खिलजी ने 1296 से 1316 तक शासन किया और वह ऐसी स्थायी सेना चाहता था जिसे राज्य सीधे वेतन दे और जो उसकी निगरानी में रहे। इसलिए उसने हर घुड़सवार के घोड़े पर राजकीय निशान लगवाया, जिसे दाग कहा गया, और हर सैनिक का लिखित हुलिया रखवाया, जिसे चेहरा कहा गया, जिससे सरदार घटिया घोड़े न बदल सकें और गैरहाजिर सैनिक गिनती में न दिखा सकें। वही पहला सुल्तान था जिसने सैनिकों को भूमि के बदले पूरी तरह नकद वेतन दिया। विकल्प A गलत है क्योंकि बलबन ने सेना विभाग दीवान-ए-अर्ज बनाया, ये दो जाँच व्यवस्थाएँ नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि इल्तुतमिश ने इक्ता व्यवस्था संगठित की और टंका तथा जीतल चलाए। विकल्प D गलत है क्योंकि फिरोजशाह तुगलक ने उलटी दिशा ली, इक्ता को वंशानुगत बनाया और सरदारों को भूमि में भुगतान किया, जिससे सैन्य अनुशासन कमजोर हुआ।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 22 Nov 2021, Shift 2आसान

दिल्ली सल्तनत के काल में निम्नलिखित में से कौन सा कर वसूला जाता था?

  1. A.रैयतवाड़ी कर
  2. B.आय कर
  3. C.महालवाड़ी कर
  4. D.खराज कर
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. खराज कर

व्याख्या

सही उत्तर D, खराज कर है। खराज कृषि उपज पर लगने वाला भूमि कर था और दिल्ली सल्तनत की आय का सबसे बड़ा एकल स्रोत था। अलाउद्दीन खिलजी ने दोआब में यह मांग उपज के आधे तक बढ़ाई और आकलन के लिए भूमि की पैमाइश कराई। खराज के साथ राज्य मुसलमानों से जकात, गैर-मुस्लिमों से जजिया और युद्ध की लूट में अपना हिस्सा खम्स लेता था। विकल्प A गलत है क्योंकि रैयतवाड़ी बंदोबस्त अंग्रेजों की भू-राजस्व व्यवस्था थी, जिसे थॉमस मुनरो और अलेक्जेंडर रीड ने मद्रास तथा बंबई प्रेसीडेंसी में सदियों बाद लागू किया। विकल्प B गलत है क्योंकि भारत में आय कर 1860 से आरंभ हुआ, जब जेम्स विल्सन ने औपनिवेशिक सरकार के अधीन इसे लागू किया। विकल्प C गलत है क्योंकि महालवाड़ी व्यवस्था भी अंग्रेजों का बंदोबस्त था, जो हॉल्ट मैकेंजी और बाद में विलियम बैंटिक से जुड़ा था और जिसमें गाँव या महाल राजस्व की इकाई था।

Q6.भारतीय इतिहासआसान

दिल्ली के किस सुल्तान ने काँसे और ताँबे की सांकेतिक मुद्रा चलाई?

  1. A.गयासुद्दीन तुगलक
  2. B.मुहम्मद बिन तुगलक
  3. C.फिरोजशाह तुगलक
  4. D.अलाउद्दीन खिलजी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या

सही उत्तर B, मुहम्मद बिन तुगलक है। मुहम्मद बिन तुगलक ने 1325 से 1351 तक शासन किया और काँसे तथा ताँबे के सिक्के जारी किए जो चाँदी के मूल्य पर चलने थे। विचार स्वयं ठीक था, परंतु टकसाल पर राज्य का एकाधिकार नहीं था और सिक्कों पर ऐसा कोई चिह्न नहीं था जिसकी नकल कठिन हो, इसलिए जालसाजों ने बड़ी संख्या में सिक्के ढाले, कर नकली सिक्कों में चुकाए गए और चाँदी प्रचलन से गायब हो गई। सुल्तान को यह जारी मुद्रा वापस लेकर सांकेतिक सिक्के बदलने पड़े। विकल्प A गलत है क्योंकि गयासुद्दीन तुगलक, जिसने 1320 में वंश की स्थापना की, सिंचाई कार्यों और संतुलित राजस्व नीति के लिए याद किया जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि फिरोजशाह तुगलक ने नहरें और नगर बनवाए तथा फुतूहात-ए-फिरोजशाही लिखी। विकल्प D गलत है क्योंकि अलाउद्दीन खिलजी का प्रसिद्ध आर्थिक कदम बाजार मूल्य नियंत्रण था, सांकेतिक मुद्रा नहीं।

Q7.भारतीय इतिहासपूछा गया: दिल्ली · 20 March 2022, shift 1आसान

खिलजी वंश के तुरंत बाद दिल्ली पर किस वंश ने शासन किया?

  1. A.तुगलक वंश
  2. B.राजपूत वंश
  3. C.सैयद वंश
  4. D.लोदी वंश
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. तुगलक वंश

व्याख्या

सही उत्तर A, तुगलक वंश है। खिलजी वंश 1320 में समाप्त हुआ, जब मुबारक शाह खिलजी के बाद गद्दी हथियाने वाले खुसरो खान को दीपालपुर के सूबेदार गाजी मलिक ने हराया। गाजी मलिक ने गयासुद्दीन तुगलक की उपाधि ली और तुगलक वंश की स्थापना की, जो 1414 तक चला और पाँचों में सबसे लंबे समय तक रहा। विकल्प B गलत है क्योंकि 1192 के बाद दिल्ली पर किसी राजपूत वंश का शासन नहीं रहा; पृथ्वीराज तृतीय के अधीन चाहमान या चौहान शासन सल्तनत के आरंभ से पहले ही समाप्त हो गया था। विकल्प C गलत है क्योंकि सैयद वंश बाद में आया, जिसकी स्थापना खिज्र खान ने 1414 में तैमूर के आक्रमण से तुगलक शक्ति टूटने के बाद की। विकल्प D गलत है क्योंकि बहलोल खान लोदी द्वारा 1451 में स्थापित लोदी वंश पाँचों में अंतिम था और सैयदों के बाद आया, खिलजियों के बाद नहीं।

Q8.भारतीय इतिहासमध्यम

कौन सा विदेशी यात्री मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया और दिल्ली का काजी नियुक्त हुआ?

  1. A.मार्को पोलो
  2. B.इब्न बतूता
  3. C.निकोलो कोंटी
  4. D.अब्दुर रज्जाक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. इब्न बतूता

व्याख्या

सही उत्तर B, इब्न बतूता है। इब्न बतूता तांजियर का मोरक्कोवासी यात्री था, जो मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दिल्ली पहुँचा, राजकीय सेवा में राजधानी का काजी अर्थात न्यायाधीश बनाया गया और बाद में दूत बनाकर चीन भेजा गया। अरबी में लिखा उसका यात्रा-वृत्तांत रिहला सल्तनतकालीन नगरों, बाजारों, डाक व्यवस्था तथा तटवर्ती नारियल और पान के विषय में प्रत्यक्ष स्रोत है। विकल्प A गलत है क्योंकि वेनिस का मार्को पोलो तेरहवीं शताब्दी के अंत के आसपास दक्षिण भारत के तट पर आया था और उसने दिल्ली में कभी सेवा नहीं की। विकल्प C गलत है क्योंकि वेनिस का निकोलो कोंटी पंद्रहवीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य आया था। विकल्प D गलत है क्योंकि अब्दुर रज्जाक तैमूरी शासक शाहरुख का दूत था, जो देवराय द्वितीय के समय विजयनगर आया और उसने वहाँ का विस्तृत विवरण लिखा। परीक्षाओं में यात्री और शासक की जोड़ी बनाकर पूछा जाता है, इसलिए इब्न बतूता के साथ मुहम्मद बिन तुगलक और विजयनगर के साथ निकोलो कोंटी तथा अब्दुर रज्जाक याद रखने चाहिए।

Q9.भारतीय इतिहासपूछा गया: दिल्ली · 7 Dec 2020, Shift 2आसान

निम्नलिखित में से लोदी वंश का संस्थापक शासक कौन है?

  1. A.दौलत खान लोदी
  2. B.सिकंदर खान लोदी
  3. C.इब्राहीम खान लोदी
  4. D.बहलोल खान लोदी
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. बहलोल खान लोदी

व्याख्या

सही उत्तर D, बहलोल खान लोदी है। बहलोल खान लोदी अफगान सरदार और सरहिंद का सूबेदार था, जिसने 1451 में अंतिम सैयद शासक अलाउद्दीन आलम शाह के बदायूँ चले जाने के बाद दिल्ली की गद्दी ली। उसका वंश दिल्ली पर शासन करने वाला पहला अफगान वंश था और सल्तनत के पाँच वंशों में अंतिम। विकल्प A गलत है क्योंकि दौलत खान लोदी पंजाब का सूबेदार था, जिसने बाबर को भारत पर आक्रमण के लिए आमंत्रित किया; उसने वंश की स्थापना नहीं की। विकल्प B गलत है क्योंकि सिकंदर लोदी बहलोल का पुत्र और उत्तराधिकारी था, वही शासक जिसने 1504 में आगरा नगर बसाया और उसे अपनी राजधानी बनाया। विकल्प C गलत है क्योंकि इब्राहीम लोदी इस वंश का अंतिम शासक था, जिसे 1517 में खातौली में राणा सांगा ने हराया और 1526 में पानीपत के पहले युद्ध में बाबर ने मार डाला।

Q10.भारतीय इतिहासकठिन

एक सुल्तान के अपने शासन और नीतियों का विवरण देने वाली फुतूहात-ए-फिरोजशाही निम्नलिखित में से किसने लिखी?

  1. A.जियाउद्दीन बरनी
  2. B.अमीर खुसरो
  3. C.फिरोजशाह तुगलक
  4. D.मिन्हाज-उस-सिराज
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. फिरोजशाह तुगलक

व्याख्या

सही उत्तर C, फिरोजशाह तुगलक है। फुतूहात-ए-फिरोजशाही आत्मकथात्मक विवरण है, जिसमें 1351 से 1388 तक शासन करने वाले फिरोजशाह तुगलक ने अपने कार्य और आदेश लिखे, जिनमें उसकी नहरें, दान विभाग दीवान-ए-खैरात, उसका चिकित्सालय और उसकी धार्मिक नीति सम्मिलित हैं। यह सल्तनतकाल के उन थोड़े स्रोतों में है जो किसी शासक के विषय में नहीं, बल्कि स्वयं शासक द्वारा लिखे गए। विकल्प A गलत है क्योंकि जियाउद्दीन बरनी ने तारीख-ए-फिरोजशाही और फतवा-ए-जहांदारी लिखीं, जो सुल्तानों के विषय में हैं, किसी सुल्तान द्वारा नहीं लिखी गईं। विकल्प B गलत है क्योंकि तूती-ए-हिंद कहे जाने वाले कवि अमीर खुसरो ने खजाइन-उल-फुतूह, तुगलकनामा तथा अन्य काव्य लिखे। विकल्प D गलत है क्योंकि मिन्हाज-उस-सिराज ने तबकात-ए-नासिरी लिखी, जो नासिरुद्दीन महमूद के शासन तक गुलाम वंश का मुख्य इतिहास-ग्रंथ है और उसी सुल्तान को समर्पित है। परीक्षा में इन चारों को अलग रखने का सरल तरीका यह है कि विकल्पों में केवल एक ही शासक है, और फुतूहात के शीर्षक में उसी शासक का नाम आता है।

Q11.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 5 March 2019, Shift 2मध्यम

खातौली के युद्ध (1517) में मेवाड़ के राणा सांगा ने दिल्ली के सुल्तान ______ लोदी को हराकर बंदी बनाया और फिर फिरौती लेकर छोड़ दिया।

  1. A.बहलोल खान
  2. B.कुतुबुद्दीन
  3. C.इब्राहीम
  4. D.सिकंदर
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. इब्राहीम

व्याख्या

सही उत्तर C, इब्राहीम है। इब्राहीम लोदी 1517 में गद्दी पर बैठा और लगभग तुरंत ही राजस्थान की सीमा के निकट खातौली में मेवाड़ के राणा सांगा का सामना करना पड़ा, जहाँ लोदी सेना हारी और सुल्तान की सेनाएँ पीछे हटा दी गईं। इस विजय ने राणा सांगा को उस समय की सबसे शक्तिशाली राजपूत शक्ति बना दिया, और बाद में उसने 1527 में खानवा में बाबर से युद्ध किया। विकल्प A गलत है क्योंकि वंश के संस्थापक बहलोल खान लोदी की मृत्यु 1489 में, इस युद्ध से बहुत पहले हो गई थी। विकल्प B गलत है क्योंकि कुतुबुद्दीन ऐबक गुलाम वंश का था और उसकी मृत्यु 1210 में हुई। विकल्प D गलत है क्योंकि इब्राहीम के पिता सिकंदर लोदी की मृत्यु 1517 में हुई और वह 1504 में आगरा बसाने के लिए जाना जाता है, खातौली के लिए नहीं। अंत में इब्राहीम लोदी 1526 में पानीपत के पहले युद्ध में मारा गया।

Q12.भारतीय इतिहासकठिन

दिल्ली सल्तनत के प्रशासन में दीवान-ए-अर्ज नामक विभाग निम्नलिखित में से किसका कार्य देखता था?

  1. A.वित्त और भू-राजस्व
  2. B.सेना
  3. C.शाही पत्राचार
  4. D.न्याय और अपील
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सेना

व्याख्या

सही उत्तर B, सेना है। दीवान-ए-अर्ज दिल्ली सल्तनत का सैन्य विभाग था, जिसका प्रमुख आरिज-ए-मुमालिक होता था, जो सैनिकों की भर्ती करता, गिनती कराता, घोड़ों तथा साज-सामान का निरीक्षण करता और वेतन की व्यवस्था करता था। बलबन ने इसे अलग विभाग के रूप में स्थापित किया और अलाउद्दीन खिलजी ने दाग तथा चेहरा की जाँच व्यवस्थाओं से इसे मजबूत किया। विकल्प A गलत है क्योंकि वित्त और भू-राजस्व दीवान-ए-विजारत के अधीन थे, जिसका प्रमुख वजीर राज्य का सबसे वरिष्ठ अधिकारी था। विकल्प C गलत है क्योंकि शाही पत्राचार और आदेशों का लेखन दीवान-ए-इंशा का कार्य था, जिसका प्रमुख दबीर-ए-खास होता था। विकल्प D गलत है क्योंकि न्याय काजी-उल-कुजात के अधीन दीवान-ए-कजा से होता था, जबकि दीवान-ए-रिसालत धार्मिक विषय, अनुदान और सुल्तान के नाम पर अपील देखता था। इस विषय के प्रश्न आमतौर पर विभाग और उसके प्रमुख की जोड़ी बनाकर पूछे जाते हैं, इसलिए चारों जोड़ियाँ एक साथ याद रखें: विजारत के साथ वजीर, अर्ज के साथ आरिज-ए-मुमालिक, इंशा के साथ दबीर-ए-खास और कजा के साथ काजी-उल-कुजात।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली सल्तनत की स्थापना किसने और किस वर्ष की?

मुहम्मद गोरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 में इसकी स्थापना की और गुलाम या मामलूक वंश आरंभ किया, जिसका पहला केंद्र लाहौर था। बाद में इल्तुतमिश ने राजधानी दिल्ली स्थानांतरित की।

दिल्ली सल्तनत के किस वंश ने सबसे कम समय तक शासन किया?

खिलजी वंश ने, जो 1290 से 1320 तक लगभग तीस वर्ष चला। सैयद लगभग सैंतीस वर्ष, लोदी लगभग पचहत्तर वर्ष और तुगलक लगभग चौरानवे वर्ष शासन करते रहे।

अढ़ाई दिन का झोंपड़ा किसने बनवाया?

कुतुबुद्दीन ऐबक ने यह मस्जिद राजस्थान के अजमेर में बनवाई। ढाई दिन की झोंपड़ी अर्थ वाला यह नाम बहुत बाद में प्रचलित हुआ। ऐबक ने दिल्ली में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद भी बनवाई थी।

दाग और चेहरा क्या थे?

अलाउद्दीन खिलजी द्वारा आरंभ की गई दो सैन्य जाँच व्यवस्थाएँ। दाग में घुड़सवारों के घोड़ों पर राजकीय निशान लगाया जाता था और चेहरा में हर सैनिक का लिखित हुलिया रखा जाता था, जिससे सरदार घटिया घोड़े या गैरहाजिर सैनिक गिनती में न दिखा सकें।

मुहम्मद बिन तुगलक की सांकेतिक मुद्रा क्यों असफल हुई?

उसने काँसे और ताँबे के सिक्के चाँदी के मूल्य पर जारी किए, परंतु टकसाल पर राज्य का एकाधिकार नहीं था और सिक्कों पर नकल करने में कठिन कोई चिह्न नहीं था। जालसाजों ने खुलकर सिक्के ढाले, कर नकली सिक्कों में चुकाए गए और चाँदी प्रचलन से हट गई, इसलिए उसे यह मुद्रा वापस लेनी पड़ी।

दिल्ली सल्तनत के काल में भूमि पर कौन सा कर लिया जाता था?

कृषि उपज पर लगने वाला खराज राज्य की आय का मुख्य स्रोत था। अलाउद्दीन खिलजी ने दोआब में यह मांग उपज के आधे तक बढ़ाई। जकात, जजिया और खम्स राजस्व के अन्य मुख्य मद थे।

दिल्ली सल्तनत का अंत कैसे हुआ?

21 अप्रैल 1526 को पानीपत के पहले युद्ध में बाबर ने इब्राहीम लोदी को हराकर मार डाला। इससे लोदी शासन और सल्तनत समाप्त हुई और भारत में मुगल शासन की नींव पड़ी।

स्रोत

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दिल्ली सल्तनत: वंश, शासक और प्रशासन: भारतीय इतिहास सामान्य ज्ञान