भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण युद्ध: वर्ष, पक्ष और परिणाम
भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण युद्धों के पूर्ण नोट्स: वर्ष, दोनों पक्ष, विजेता, बाद में हुई संधियाँ और परीक्षा में दोहराए जाने वाले तथ्य, प्रश्नों के साथ।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

युद्ध हर सामान्य ज्ञान प्रश्नपत्र का प्रिय विषय हैं, क्योंकि एक ही युद्ध चार परीक्षा योग्य तथ्य देता है: वर्ष, दोनों पक्ष, विजेता और उसके बाद हुआ सत्ता परिवर्तन। प्रश्न युद्ध की रणनीति नहीं पूछते; वे पूछते हैं कि किसने किससे लड़ा, किस वर्ष, किस नदी के तट पर, और उससे कौन-सी संधि या कौन-सा राजवंश निकला। इस नोट में एसएससी, रेलवे, राज्य और यूपीएससी परीक्षाओं में वास्तव में आने वाले युद्ध कालक्रम में रखे गए हैं, जिससे क्रम स्वयं स्मरण में सहायक बन जाता है।
प्राचीन भारत के युद्ध
- दाशराज्ञ युद्ध, परुष्णी अर्थात् आज की रावी नदी पर लड़ा गया और ऋग्वेद में वर्णित है: भरत कुल के सुदास ने दस जनपद प्रमुखों के संघ को हराया।
- हाइडेस्पीज का युद्ध, 326 ईसा पूर्व: सिकंदर ने पौरव राज्य के शासक पोरस को हाइडेस्पीज अर्थात् झेलम के तट पर हराया। सिकंदर ने पोरस को उसका राज्य लौटा दिया और आगे उसकी सेना ने व्यास नदी पार करने से मना कर दिया, जिससे भारत में यूनानी बढ़त रुक गई।
- कलिंग युद्ध, 261 ईसा पूर्व: अशोक ने कलिंग, लगभग तटीय ओडिशा, को जीता। उसके तेरहवें शिलालेख में इस संहार और पश्चात्ताप का वर्णन है, जिसके बाद वह धम्म और बौद्ध धर्म की ओर मुड़ा। यह भारतीय इतिहास का एकमात्र युद्ध है जिसके विजेता ने सार्वजनिक रूप से पछतावा किया।
- वातापी का युद्ध, 642 ईस्वी: पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को हराकर मार डाला और वातापीकोंड की उपाधि ली।
- त्रिपक्षीय संघर्ष, आठवीं और नवीं शताब्दी: गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट कन्नौज पर अधिकार के लिए बार-बार लड़े, क्योंकि कन्नौज उत्तर भारत में सर्वोच्चता का प्रतीक था।
तुर्क सत्ता और सल्तनत लाने वाले युद्ध
| युद्ध | वर्ष | पक्ष | परिणाम |
|---|---|---|---|
| तराइन का प्रथम युद्ध | 1191 | पृथ्वीराज चौहान तृतीय और मुहम्मद गोरी | गोरी पराजित हुआ और लौट गया |
| तराइन का द्वितीय युद्ध | 1192 | मुहम्मद गोरी और पृथ्वीराज चौहान तृतीय | गोरी विजयी; उत्तर भारत में तुर्क शासन का निर्णायक युद्ध |
| चंदावर का युद्ध | 1194 | मुहम्मद गोरी और कन्नौज का जयचंद | गहड़वाल राज्य समाप्त |
| तैमूर का आक्रमण | 1398 | तैमूर और नासिरुद्दीन महमूद तुगलक | दिल्ली लूटी गई; तुगलक वंश शीघ्र समाप्त |
मुगल और मध्यकालीन युद्ध
पानीपत का प्रथम युद्ध, 1526 से आधुनिक भारतीय इतिहास की परीक्षा प्रायः आरंभ होती है। बाबर ने अंतिम लोदी सुल्तान इब्राहीम लोदी को हराकर मार डाला; उसने तुलुगमा पद्धति और उस्ताद अली कुली तथा मुस्तफा रूमी द्वारा चलाई गई तोपों का प्रयोग किया। मुगल साम्राज्य की गणना इसी युद्ध से होती है। अगले वर्ष खानवा (1527) में बाबर ने मेवाड़ के राणा सांगा को हराया और गाजी की उपाधि ली; चंदेरी (1528) में मेदिनी राय और घाघरा (1529) में बिहार तथा बंगाल के अफगानों के विरुद्ध विजय से उसकी विजय यात्रा पूरी हुई।
- चौसा, 1539 और कन्नौज या बिलग्राम, 1540: शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को हराया, जिसके बाद हुमायूँ लगभग पंद्रह वर्ष निर्वासन में रहा और दिल्ली पर सूर वंश का शासन रहा।
- पानीपत का द्वितीय युद्ध, 1556: अकबर के संरक्षक बैरम खाँ ने हेमू को हराया, जिसने स्वयं को हेमचंद्र विक्रमादित्य घोषित कर दिया था। मुगल सत्ता पुनः स्थापित हुई।
- तालीकोटा का युद्ध, 1565, जिसे राक्षसी-तांगड़ी या बन्नीहट्टी भी कहा जाता है: बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीदर की संयुक्त दक्कनी सल्तनतों ने रामराय के नेतृत्व वाली विजयनगर सेना को नष्ट कर दिया और विजयनगर नगर लूट लिया गया।
- हल्दीघाटी का युद्ध, 1576: मानसिंह और आसफ खाँ के नेतृत्व में अकबर की सेना ने मेवाड़ के महाराणा प्रताप से युद्ध किया। प्रताप पहाड़ों में चले गए और संघर्ष जारी रखा, इसलिए यह पराजय कभी समर्पण नहीं बनी।
- धरमत और सामूगढ़, 1658: उत्तराधिकार के युद्ध में औरंगजेब ने दारा शिकोह को हराया और अगले वर्ष सिंहासन प्राप्त किया।
- करनाल का युद्ध, 1739: फारस के नादिरशाह ने मुहम्मद शाह को हराकर तख्त-ए-ताऊस और कोहिनूर हीरा ले गया।
औपनिवेशिक विजय के युद्ध
| युद्ध | वर्ष | विजेता और पराजित | परिणाम |
|---|---|---|---|
| प्लासी | 23 जून 1757 | रॉबर्ट क्लाइव ने सिराजुद्दौला को हराया | मीर जाफर की गद्दारी निर्णायक रही; बंगाल में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता की नींव |
| वांडीवाश | 1760 | आयर कूट ने काउंट द लाली को हराया | तृतीय कर्नाटक युद्ध में भारत में फ्रांसीसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा समाप्त |
| पानीपत का तृतीय युद्ध | 14 जनवरी 1761 | अहमद शाह अब्दाली ने सदाशिवराव भाऊ के नेतृत्व वाले मराठों को हराया | विश्वासराव मारे गए; उत्तर में मराठा शक्ति टूटी और मैदान कंपनी के लिए खुल गया |
| बक्सर | 22 अक्टूबर 1764 | हेक्टर मुनरो ने मीर कासिम, शुजाउद्दौला और शाह आलम द्वितीय को हराया | इलाहाबाद की संधि 1765 से कंपनी को बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी मिली |
| पोल्लीलूर | 1780 | हैदर अली ने अंग्रेजों को हराया | द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध में कंपनी की सबसे बड़ी पराजय |
| चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध | 1799 | अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान को हराया | श्रीरंगपट्टनम की रक्षा करते हुए टीपू की मृत्यु; मैसूर वोडेयारों को सहायक संधि के अधीन मिला |
| असई | 1803 | आर्थर वेलेजली ने मराठों को हराया | द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध; 1802 की बसीन संधि के बाद |
| सोबराँव | 1846 | अंग्रेजों ने सिखों को हराया | प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध समाप्त; लाहौर की संधि हुई |
| चिलियाँवाला और गुजरात | 1849 | अंग्रेजों ने सिखों को हराया | लॉर्ड डलहौजी ने पंजाब का विलय किया |
श्रृंखला को याद रखने का तरीका
भारत पर शासन कौन करेगा, यह तीन युद्धों ने तय किया और तीनों अठारहवीं शताब्दी के मध्य में कुछ ही वर्षों के भीतर लड़े गए। प्लासी (1757) ने कंपनी को युद्ध से अधिक षड्यंत्र के बल पर बंगाल दिया; वांडीवाश (1760) ने फ्रांसीसियों को प्रतिद्वंद्वी के रूप में हटाया; पानीपत के तृतीय युद्ध (1761) ने सबसे सशक्त भारतीय शक्ति मराठों को कमजोर किया; और बक्सर (1764) ने कंपनी को व्यापारी से पूर्वी भारत का वैध राजस्व प्राधिकारी बना दिया, क्योंकि 1765 की इलाहाबाद संधि ने उसे दीवानी दे दी। बक्सर के बाद क्लाइव द्वारा चलाई गई बंगाल की द्वैध शासन व्यवस्था इसी श्रृंखला का परिणाम है, और 1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट उस पर संसद की पहली प्रतिक्रिया थी।
दिल्ली के उत्तर में स्थित छोटा नगर पानीपत उस मार्ग पर पड़ता था जिससे आक्रमणकारी उत्तर-पश्चिम से आते थे, इसलिए यहाँ साम्राज्य तय करने वाले तीन युद्ध हुए: 1526 ने मुगल साम्राज्य की स्थापना की, 1556 ने उसे पुनः स्थापित किया और 1761 ने मराठों से दिल्ली का दावा छीन लिया। यदि प्रश्न में केवल पानीपत और वर्ष पूछा जाए, तो उत्तर देने से पहले विकल्पों में दिए गए पक्षों को मिलाकर देखें।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न चार साँचों में दोहराए जाते हैं। पहला, युद्ध और वर्ष: तराइन 1191 और 1192, पानीपत 1526, 1556 और 1761, तालीकोटा 1565, हल्दीघाटी 1576, प्लासी 1757, वांडीवाश 1760, बक्सर 1764। दूसरा, किसने किससे लड़ा, जहाँ जाल तराइन के दोनों युद्धों के विजेता बदल देना या पानीपत के द्वितीय युद्ध में बैरम खाँ के स्थान पर स्वयं अकबर लिख देना है। तीसरा, युद्ध और उसका परिणाम या संधि: बक्सर से इलाहाबाद संधि और दीवानी, सोबराँव से लाहौर की संधि, असई से द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध, करनाल से तख्त-ए-ताऊस का जाना। चौथा, नदियाँ और स्थान: हाइडेस्पीज झेलम है, दाशराज्ञ परुष्णी अर्थात् रावी पर हुआ, प्लासी बंगाल में भागीरथी के तट पर है। यूपीएससी और सीजीएल के कथन आधारित प्रश्न पानीपत को खानवा से मिला देते हैं, इसलिए यह स्मरण रखें कि 1527 का खानवा मेवाड़ के राणा सांगा के विरुद्ध था, पानीपत में नहीं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| हाइडेस्पीज का युद्ध | 326 ईसा पूर्व, सिकंदर और पोरस, झेलम के तट पर |
|---|---|
| कलिंग युद्ध | 261 ईसा पूर्व, अशोक; तेरहवें शिलालेख में वर्णित |
| तराइन का प्रथम युद्ध | 1191, विजेता पृथ्वीराज चौहान तृतीय |
| तराइन का द्वितीय युद्ध | 1192, विजेता मुहम्मद गोरी |
| पानीपत का प्रथम युद्ध | 1526, बाबर ने इब्राहीम लोदी को हराया |
| खानवा का युद्ध | 1527, बाबर ने मेवाड़ के राणा सांगा को हराया |
| चौसा का युद्ध | 1539, शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को हराया |
| पानीपत का द्वितीय युद्ध | 1556, बैरम खाँ ने हेमू को हराया |
| तालीकोटा का युद्ध | 1565, दक्कनी सल्तनतों ने विजयनगर को हराया |
| हल्दीघाटी का युद्ध | 1576, अकबर की ओर से मानसिंह और महाराणा प्रताप |
| करनाल का युद्ध | 1739, नादिरशाह ने मुहम्मद शाह को हराया |
| प्लासी का युद्ध | 23 जून 1757, क्लाइव ने सिराजुद्दौला को हराया |
| पानीपत का तृतीय युद्ध | 14 जनवरी 1761, अब्दाली ने मराठों को हराया |
| बक्सर का युद्ध | 22 अक्टूबर 1764; इसके बाद 1765 की इलाहाबाद संधि |
| वांडीवाश का युद्ध | 1760, आयर कूट के नेतृत्व में अंग्रेजों ने फ्रांसीसियों को हराया |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
326 ईसा पूर्व का हाइडेस्पीज युद्ध सिकंदर और किस भारतीय शासक के बीच हुआ?
- A.आम्भी
- B.पोरस
- C.चंद्रगुप्त मौर्य
- D.धनानंद
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, पोरस है। पोरस झेलम और चिनाब के बीच पौरव राज्य का शासक था और उसने सिकंदर से हाइडेस्पीज, अर्थात् झेलम के तट पर युद्ध किया। सिकंदर जीता, परंतु भारतीय राजा के साहस से प्रभावित होकर उसने उसका राज्य लौटा दिया और उसे मित्र बना लिया। A गलत है क्योंकि तक्षशिला के राजा आम्भी ने बिना युद्ध आत्मसमर्पण कर पोरस के विरुद्ध सिकंदर की सहायता की थी; वह विपरीत उदाहरण है। C गलत है क्योंकि चंद्रगुप्त मौर्य सिकंदर के लौटने के बाद शक्ति में आया और उसने सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस को हराया, सिकंदर को नहीं। D गलत है क्योंकि धनानंद मगध का नंद शासक था, जिसकी विशाल सेना के भय से सिकंदर के सैनिकों ने व्यास पार करने से मना कर दिया; दोनों का युद्ध कभी नहीं हुआ। जोड़ी याद रखें: हाइडेस्पीज अर्थात् झेलम और भारतीय पक्ष पोरस।
1192 में लड़ा गया तराइन का द्वितीय युद्ध किसने जीता?
- A.पृथ्वीराज चौहान तृतीय
- B.मुहम्मद गोरी
- C.महमूद गजनवी
- D.कुतुबुद्दीन ऐबक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, मुहम्मद गोरी है। 1191 के तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान से हारने के बाद गोरी अगले वर्ष अधिक सुसंगठित घुड़सवार धनुर्धर सेना के साथ लौटा; 1192 के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज की पराजय और मृत्यु हुई और उत्तर भारत तुर्क शासन के लिए खुल गया। A गलत है क्योंकि पृथ्वीराज ने 1191 का प्रथम युद्ध जीता था, द्वितीय नहीं, और यही अदला-बदली इस विषय का सबसे आम जाल है। C गलत है क्योंकि महमूद गजनवी ने 1000 से 1027 के बीच आक्रमण किए और तराइन में कभी नहीं लड़ा; उसके सत्रह आक्रमण सोमनाथ की लूट पर समाप्त हुए। D गलत है क्योंकि कुतुबुद्दीन ऐबक गोरी का सेनापति और बाद में गुलाम वंश का संस्थापक था; वह अभियान में सम्मिलित था, परंतु विजय गोरी के नाम दर्ज है। तराइन, आज का तरावड़ी, हरियाणा में करनाल के निकट है।
1526 का पानीपत का प्रथम युद्ध किनके बीच हुआ?
- A.बाबर और राणा सांगा
- B.बाबर और इब्राहीम लोदी
- C.अकबर और हेमू
- D.अहमद शाह अब्दाली और मराठे
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, बाबर और इब्राहीम लोदी है। बाबर ने 1526 में पानीपत के मैदान में लोदी वंश के अंतिम सुल्तान इब्राहीम लोदी को हराकर मार डाला; उसने तुलुगमा पद्धति और उस्ताद अली कुली तथा मुस्तफा रूमी द्वारा संचालित तोपों का प्रयोग किया और मुगल साम्राज्य की स्थापना की। A गलत है क्योंकि बाबर ने मेवाड़ के राणा सांगा से 1527 में खानवा में युद्ध किया, एक वर्ष बाद और दूसरे स्थान पर, जिसके बाद उसने गाजी की उपाधि ली। C गलत है क्योंकि अकबर, वस्तुतः उसके संरक्षक बैरम खाँ ने 1556 के पानीपत के द्वितीय युद्ध में हेमू से युद्ध किया। D गलत है क्योंकि अहमद शाह अब्दाली ने 1761 के पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठों से युद्ध किया। ऐसे प्रश्नों के विकल्पों में तीनों पानीपत होते हैं, इसलिए वर्ष चुनने से पहले पक्षों को मिलाएँ।
1539 में शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को किस युद्ध में हराया?
- A.चौसा का युद्ध
- B.घाघरा का युद्ध
- C.चंदेरी का युद्ध
- D.खानवा का युद्ध
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, चौसा का युद्ध है, जो 1539 में बिहार में बक्सर के निकट लड़ा गया और जिसमें शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को पराजित किया; हुमायूँ एक भिश्ती की सहायता से गंगा पार कर भागा। अगले वर्ष शेरशाह ने उसे कन्नौज, जिसे बिलग्राम भी कहते हैं, में फिर हराया और हुमायूँ लगभग पंद्रह वर्ष भारत से बाहर रहा, जबकि दिल्ली पर सूर वंश का शासन रहा। B गलत है क्योंकि 1529 का घाघरा युद्ध बाबर ने बिहार तथा बंगाल के अफगानों और नुसरत शाह के विरुद्ध लड़ा था। C गलत है क्योंकि 1528 का चंदेरी युद्ध बाबर और मालवा के मेदिनी राय के बीच हुआ। D गलत है क्योंकि 1527 का खानवा बाबर की मेवाड़ के राणा सांगा पर विजय थी। चारों मुगलकालीन युद्ध हैं, परंतु हुमायूँ और शेरशाह केवल चौसा तथा कन्नौज में आते हैं।
1556 के पानीपत के द्वितीय युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व किसने किया?
- A.स्वयं अकबर
- B.बैरम खाँ
- C.मानसिंह
- D.टोडरमल
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, बैरम खाँ है। 1556 में अकबर केवल लगभग तेरह वर्ष का था और उसके संरक्षक बैरम खाँ ने उस सेना का नेतृत्व किया जिसने सूर पक्ष के योग्य सेनापति हेमू को हराया, जिसने दिल्ली जीतकर स्वयं को हेमचंद्र विक्रमादित्य घोषित कर लिया था। इस विजय ने हुमायूँ की मृत्यु के लगभग एक वर्ष बाद मुगल शासन पुनः स्थापित किया। A गलत है क्योंकि अकबर शिविर में उपस्थित था, परंतु नेतृत्व और श्रेय बैरम खाँ का है, जो 1560 तक संरक्षक रहा। C गलत है क्योंकि आमेर का मानसिंह अकबर की सेवा में बाद में आया और 1576 के हल्दीघाटी युद्ध में मुगल सेना के नेतृत्व के लिए स्मरण किया जाता है। D गलत है क्योंकि टोडरमल अकबर का राजस्व मंत्री था, जो जब्ती या बंदोबस्त भू-राजस्व व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध है।
1565 के तालीकोटा युद्ध में किस राज्य की पराजय हुई?
- A.बहमनी राज्य
- B.विजयनगर साम्राज्य
- C.मेवाड़ राज्य
- D.अहोम राज्य
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, विजयनगर साम्राज्य है। 1565 में बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीदर की संयुक्त दक्कनी सल्तनतों ने तालीकोटा में रामराय के नेतृत्व वाली विजयनगर सेना को हराया; इस युद्ध को राक्षसी-तांगड़ी या बन्नीहट्टी भी कहा जाता है। राजधानी विजयनगर, आज का हम्पी, लूट ली गई और साम्राज्य फिर कभी सँभल नहीं सका। A गलत है क्योंकि बहमनी राज्य सोलहवीं शताब्दी के आरंभ तक पाँच दक्कनी सल्तनतों में बँट चुका था और वही सल्तनतें यहाँ विजेता थीं। C गलत है क्योंकि मेवाड़ के बड़े युद्ध इस शताब्दी में 1527 का खानवा और 1576 का हल्दीघाटी थे, दोनों राजस्थान में। D गलत है क्योंकि ब्रह्मपुत्र घाटी के अहोम राज्य ने मुगलों से युद्ध किया, जिसमें 1671 का सराईघाट लचित बोड़फुकन के नेतृत्व में सर्वाधिक प्रसिद्ध है।
भारत में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता की नींव किस युद्ध को कहा जाता है?
- A.बक्सर का युद्ध
- B.प्लासी का युद्ध
- C.वांडीवाश का युद्ध
- D.असई का युद्ध
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, प्लासी का युद्ध है, जो 23 जून 1757 को भागीरथी के तट पर लड़ा गया और जिसमें रॉबर्ट क्लाइव ने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को हराया, मुख्यतः इसलिए कि नवाब के ही सेनापति मीर जाफर ने पूर्व समझौते के अनुसार अपनी टुकड़ियाँ रोक रखीं। भारत का सबसे समृद्ध प्रांत बंगाल कंपनी के राजनीतिक नियंत्रण में आ गया। A गलत है क्योंकि 1764 के बक्सर ने इलाहाबाद संधि की दीवानी से उस सत्ता को वैध और सुदृढ़ किया, इसलिए उसे नींव के स्थान पर सुदृढ़ीकरण कहा जाता है। C गलत है क्योंकि 1760 का वांडीवाश फ्रांसीसियों के विरुद्ध था और उसने एक यूरोपीय प्रतिद्वंद्वी हटाया। D गलत है क्योंकि 1803 का असई लगभग पचास वर्ष बाद द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध का भाग है। प्लासी यह भी दिखाता है कि इतना बड़ा परिणाम कितने कम युद्ध से निकला: लड़ाई कुछ घंटे चली और वास्तविक कार्य मीर जाफर तथा मुर्शिदाबाद के सेठ साहूकारों के षड्यंत्र ने किया।
1765 की इलाहाबाद संधि, जिससे ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी मिली, किस युद्ध के बाद हुई?
- A.प्लासी का युद्ध
- B.बक्सर का युद्ध
- C.पानीपत का तृतीय युद्ध
- D.सोबराँव का युद्ध
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, बक्सर का युद्ध है, जो 22 अक्टूबर 1764 को लड़ा गया और जिसमें हेक्टर मुनरो ने बंगाल के मीर कासिम, अवध के शुजाउद्दौला तथा मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेनाओं को हराया। अगले वर्ष इलाहाबाद की संधि से कंपनी को बंगाल, बिहार और ओडिशा में राजस्व वसूली का अधिकार अर्थात् दीवानी मिली, और क्लाइव ने उसी पर द्वैध शासन खड़ा किया। A गलत है क्योंकि 1757 के प्लासी के बाद मीर जाफर को नवाब बनाया गया, इस प्रकार की कोई संधि नहीं हुई। C गलत है क्योंकि 1761 का पानीपत का तृतीय युद्ध अब्दाली और मराठों के बीच था, जिसमें कोई ब्रिटिश पक्ष और कोई संधि नहीं थी। D गलत है क्योंकि 1846 के सोबराँव के बाद सिखों से लाहौर की संधि हुई।
1761 का पानीपत का तृतीय युद्ध अहमद शाह अब्दाली और किसके बीच हुआ?
- A.मराठों
- B.सिखों
- C.ईस्ट इंडिया कंपनी
- D.हैदराबाद के निजाम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, मराठों है। 14 जनवरी 1761 को अफगानिस्तान के अहमद शाह अब्दाली ने नजीबुद्दौला और शुजाउद्दौला की सहायता से सदाशिवराव भाऊ के नेतृत्व वाली मराठा सेना को हराया; पेशवा का पुत्र विश्वासराव मारा गया और इस पराजय ने दिल्ली में मुगलों का स्थान लेने की मराठा आशा समाप्त कर दी। B गलत है क्योंकि रणजीत सिंह के अधीन सिख शक्ति बाद में उठी और सिखों ने अब्दाली से पंजाब में अलग अभियानों में युद्ध किया, पानीपत में नहीं। C गलत है क्योंकि कंपनी इस युद्ध का पक्ष नहीं थी, यद्यपि सबसे बड़ा लाभ उसे हुआ, क्योंकि दिल्ली के दोनों संभावित भारतीय दावेदार एक-दूसरे को कमजोर कर गए। D गलत है क्योंकि निजाम इससे अलग रहा। तीनों को साथ याद रखें: प्लासी 1757, वांडीवाश 1760, पानीपत 1761 और बक्सर 1764।
1760 का वांडीवाश युद्ध अंग्रेजों और किस यूरोपीय शक्ति के बीच हुआ?
- A.पुर्तगालियों
- B.डचों
- C.फ्रांसीसियों
- D.डेनों
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, फ्रांसीसियों है। तमिलनाडु का वांडीवाश अर्थात् वंदवासी तृतीय कर्नाटक युद्ध का निर्णायक युद्ध था, जिसमें 1760 में सर आयर कूट ने काउंट द लाली को हराया। इसके कुछ समय बाद फ्रांसीसियों ने पुदुचेरी भी खो दिया और यद्यपि वह संधि से लौटा, भारत में फ्रांसीसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा समाप्त हो गई। A गलत है क्योंकि पुर्तगाली शक्ति बहुत पहले, सत्रहवीं शताब्दी में हिंद महासागर के एकाधिकार के अंत के साथ घट गई थी। B गलत है क्योंकि डचों को अंग्रेजों ने 1759 के बेदरा युद्ध में हराया और उन्होंने पूर्वी द्वीपसमूह पर ध्यान दिया। D गलत है क्योंकि डेनों के पास ट्रैंकोबार और सेरामपुर जैसी छोटी बस्तियाँ ही थीं और वे सैन्य प्रतिद्वंद्वी कभी नहीं बने। वांडीवाश कर्नाटक युद्धों का भाग है, जो कोरोमंडल क्षेत्र में लड़े गए।
नादिरशाह मुगल सम्राट मुहम्मद शाह को किस युद्ध में हराकर तख्त-ए-ताऊस और कोहिनूर ले गया?
- A.करनाल का युद्ध
- B.सामूगढ़ का युद्ध
- C.धरमत का युद्ध
- D.खजुआ का युद्ध
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, करनाल का युद्ध है, जो 1739 में लड़ा गया और जिसमें फारस के नादिरशाह ने मुगल सम्राट मुहम्मद शाह की सेना को कुछ घंटों में तितर-बितर कर दिया, दिल्ली में प्रवेश किया, कत्लेआम कराया और तख्त-ए-ताऊस तथा कोहिनूर सहित अपार संपत्ति ले गया। इस आक्रमण ने दिखा दिया कि औरंगजेब के बाद साम्राज्य कितना कमजोर हो चुका था। B गलत है क्योंकि 1658 का सामूगढ़ वह युद्ध है जिसमें औरंगजेब ने उत्तराधिकार के संघर्ष में अपने भाई दारा शिकोह को हराया। C गलत है क्योंकि धरमत भी 1658 का, उसी उत्तराधिकार युद्ध का पहले का संघर्ष था, जिसे भी औरंगजेब के पक्ष ने जीता। D गलत है क्योंकि 1659 का खजुआ औरंगजेब और उसके भाई शाह शुजा के बीच हुआ। केवल करनाल में विदेशी आक्रमणकारी तथा सिंहासन और हीरे की हानि जुड़ी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में ब्रिटिश सत्ता की नींव किस युद्ध ने रखी?
प्लासी के युद्ध ने, जो 23 जून 1757 को लड़ा गया और जिसमें रॉबर्ट क्लाइव ने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को हराया, क्योंकि नवाब का ही सेनापति मीर जाफर युद्ध में अलग हो गया। भारत के सबसे समृद्ध प्रांत का राजनीतिक नियंत्रण कंपनी को मिल गया, इसी कारण नींव प्लासी को कहा जाता है, बक्सर को नहीं।
बक्सर के युद्ध का परिणाम क्या रहा?
22 अक्टूबर 1764 को हेक्टर मुनरो के नेतृत्व में अंग्रेजों ने बंगाल के मीर कासिम, अवध के शुजाउद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेनाओं को हराया। 1765 की इलाहाबाद संधि से कंपनी को बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी अर्थात् राजस्व वसूली का अधिकार मिला और वह पूर्वी भारत की वैध स्वामी बन गई।
पानीपत में तीन युद्ध क्यों हुए?
पानीपत दिल्ली के उत्तर में खुले मैदान में उस मार्ग पर है जिससे उत्तर-पश्चिम से आने वाले आक्रमणकारी राजधानी तक पहुँचते थे, इसलिए दिल्ली की रक्षा करने वाली सेनाएँ वहीं उनका सामना करती थीं। 1526, 1556 और 1761 के युद्धों ने क्रमशः मुगल साम्राज्य की स्थापना की, उसे पुनः स्थापित किया और दिल्ली पर मराठा दावे को समाप्त कर दिया।
हल्दीघाटी का युद्ध कौन जीता?
1576 में मानसिंह और आसफ खाँ के नेतृत्व में मुगल सेना मैदान में टिकी रही, इसलिए इसे मुगल विजय गिना जाता है, परंतु महाराणा प्रताप बच निकले, पहाड़ों से मेवाड़ का संघर्ष जीवित रखा और बाद में अपना अधिकांश क्षेत्र वापस ले लिया, इसलिए यह विजय कुछ तय नहीं कर सकी।
भारत में फ्रांसीसी महत्वाकांक्षा किस युद्ध से समाप्त हुई?
1760 के वांडीवाश युद्ध से, जिसमें तृतीय कर्नाटक युद्ध के दौरान सर आयर कूट ने काउंट द लाली को हराया। फ्रांसीसियों के पास पुदुचेरी जैसी कुछ तटीय बस्तियाँ ही रह गईं और अंग्रेज भारत में राजनीतिक महत्व वाली एकमात्र यूरोपीय शक्ति बन गए।
विजयनगर की शक्ति किस युद्ध से समाप्त हुई?
1565 के तालीकोटा युद्ध से, जिसे राक्षसी-तांगड़ी या बन्नीहट्टी भी कहा जाता है और जिसमें बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुंडा तथा बीदर की संयुक्त सल्तनतों ने रामराय को हराया। यह मुगल युद्ध नहीं था; गठबंधन दक्कनी सल्तनतों का था और युद्ध के बाद विजयनगर नगर लूट लिया गया।
स्रोत
- हमारे अतीत II (कक्षा 7), दिल्ली के सुल्तान तथा मुगल साम्राज्य अध्याय — एनसीईआरटी
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II और भाग III (कक्षा 12) — एनसीईआरटी
- कलिंग युद्ध पर अशोक का तेरहवाँ शिलालेख — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण





