मौर्य साम्राज्य: अशोक, अभिलेख और प्रशासन
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मौर्य साम्राज्य के नोट्स: चंद्रगुप्त और चाणक्य, बिंदुसार, अशोक के अभिलेख, प्रशासन, कला, स्रोत और साम्राज्य के पतन के कारण।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

मौर्य साम्राज्य भारत का पहला ऐसा राज्य था जिसने लगभग पूरे उपमहाद्वीप को एक ही शासन के नीचे ला दिया, और यही कारण है कि प्राचीन भारतीय इतिहास में सबसे अधिक प्रश्न इसी अध्याय से पूछे जाते हैं। इसकी स्थापना लगभग 321 ईसा पूर्व में हुई और अंत लगभग 185 ईसा पूर्व में। इसी काल से भारत को पहले तिथियुक्त अभिलेख मिले, राजनीति का एक पूरा ग्रंथ मिला, और अशोक जैसा शासक मिला जिसके अपने शब्द आज भी शिलाओं और स्तंभों पर पढ़े जा सकते हैं।
चंद्रगुप्त मौर्य और साम्राज्य की नींव
चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरु और मंत्री चाणक्य की सहायता से मगध के अंतिम नंद शासक धनानंद को हराकर सत्ता प्राप्त की। चाणक्य को कौटिल्य और विष्णुगुप्त भी कहा जाता है और अर्थशास्त्र की रचना उन्हीं की मानी जाती है। साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी, जो गंगा और सोन के संगम पर बसी थी। लगभग 305 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त का युद्ध सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर से हुआ। संधि के बाद मौर्यों को एरिया, अराकोसिया, गेड्रोसिया और पेरोपनिसदाई के प्रदेश मिले और बदले में पाँच सौ हाथी दिए गए। सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को अपना राजदूत बनाकर पाटलिपुत्र भेजा, जिसने इंडिका नामक विवरण लिखा। यह ग्रंथ मूल रूप में नष्ट हो चुका है और केवल बाद के यूनानी लेखकों के उद्धरणों में बचा है। जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त ने अंत में सिंहासन त्यागकर भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला में सल्लेखना द्वारा देह त्याग किया।
बिंदुसार और अशोक का शासन
चंद्रगुप्त के पुत्र बिंदुसार को यूनानी लेखकों ने अमित्रघात अर्थात शत्रुओं का नाश करने वाला कहा। उसके दरबार में सेल्यूकस वंश के राजा एंटिओकस प्रथम ने डाइमेकस को राजदूत बनाकर भेजा। बिंदुसार ने साम्राज्य को संभाले रखा और संभवतः दक्कन तक बढ़ाया, किंतु सुदूर दक्षिण के चोल, पांड्य, सतियपुत्र और केरलपुत्र साम्राज्य के बाहर ही रहे और अशोक के अभिलेखों में पड़ोसी राज्यों के रूप में गिनाए गए हैं।
अशोक के अभिलेख और धम्म
अशोक का शासन लगभग 268 से 232 ईसा पूर्व तक माना जाता है। अपने अभिलेखों में वह स्वयं को देवानांपिय पियदसि कहता है। उसका व्यक्तिगत नाम अशोक केवल कुछ लघु शिलालेखों में मिलता है, जैसे कर्नाटक के मस्की तथा नेट्टूर और उडेगोलम और मध्य प्रदेश के गुज्जरा में। कलिंग युद्ध, जो उसके शासन के लगभग नौवें वर्ष में हुआ, का वर्णन तेरहवें वृहद शिलालेख में मिलता है और यही एकमात्र ऐसा अभिलेख है जो कलिंग में नहीं खुदवाया गया। इस युद्ध के पश्चाताप ने उसे धम्म की ओर मोड़ा, जो कोई संप्रदाय नहीं बल्कि आचरण की संहिता थी, और इसके प्रचार के लिए धम्म महामात्र नामक अधिकारी नियुक्त किए गए। अभिलेख अधिकांश भारत में ब्राह्मी लिपि में, उत्तर पश्चिम के शाहबाजगढ़ी और मानसेहरा में खरोष्ठी में, तथा कंधार में यूनानी और अरामाइक भाषा में हैं। ब्राह्मी लिपि को 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा और तभी से इस साम्राज्य का इतिहास इन्हीं अभिलेखों से बनाया गया है।
| अभिलेख | विषय |
|---|---|
| वृहद शिलालेख 1 | पशुबलि और उत्सव समाजों पर रोक |
| वृहद शिलालेख 12 | सभी संप्रदायों के बीच सहिष्णुता |
| वृहद शिलालेख 13 | कलिंग युद्ध, पश्चाताप और धम्म की नीति |
| स्तंभ लेख 7 | धम्म के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा |
| मस्की लघु शिलालेख | अशोक नाम का प्रयोग |
प्रशासन, अर्थव्यवस्था और समाज
कौटिल्य का अर्थशास्त्र राजनीति का ग्रंथ है, इतिहास की पुस्तक नहीं, किंतु उससे एक अत्यंत केंद्रीकृत राज्य का चित्र मिलता है। राजा की सहायता मंत्रिपरिषद करती थी, समाहर्ता राजस्व का प्रमुख संग्राहक था और सन्निधाता कोषाध्यक्ष। अभिलेखों में चार प्रांतों के मुख्यालय मिलते हैं, तक्षशिला, उज्जैन, तोसली और सुवर्णगिरि, जिन पर प्रायः कुमार कहे जाने वाले राजकुमार शासन करते थे। इनके नीचे जिले और गाँव थे, जहाँ राजुक, प्रादेशिक और युक्त जैसे अधिकारी काम करते थे और हर पाँचवें वर्ष दौरे पर निकलते थे। राज्य उपज का हिस्सा भाग और बलि के रूप में लेता था तथा खानों, वनों और सिंचाई का प्रबंध करता था। शक शासक रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख से पता चलता है कि सौराष्ट्र की सुदर्शन झील चंद्रगुप्त के राज्यपाल पुष्यगुप्त ने बनवाई और अशोक के समय तुषास्प ने उसमें नहरें जुड़वाईं।
कला, स्थापत्य और पतन
मौर्य कला की पहचान एक ही पत्थर से बने चमकदार बलुआ पत्थर के स्तंभ, उनके पशु शीर्ष और गया के पास की बराबर गुफाएँ हैं, जो अशोक और उसके पौत्र दशरथ ने आजीवक संप्रदाय को दान में दीं। सारनाथ का सिंह शीर्ष, जिसमें चार सिंह पीठ से पीठ जोड़े खड़े हैं और नीचे की पट्टी पर हाथी, बैल, घोड़ा और सिंह चक्रों से अलग किए गए हैं, भारत का राजकीय प्रतीक बना और उसी का चक्र राष्ट्रीय ध्वज में है। अशोक के शासन में पाटलिपुत्र में तीसरी बौद्ध संगीति मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में हुई और महेंद्र तथा संघमित्रा श्रीलंका भेजे गए। अशोक के बाद दुर्बल उत्तराधिकारियों, भारी प्रशासनिक खर्च और सीमांत के दबाव से साम्राज्य टूटता गया और अंतिम शासक बृहद्रथ की हत्या उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने कर दी, जिसने शुंग वंश की नींव रखी।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से परीक्षक निश्चित जोड़े पूछते हैं, जैसे शासक और उसकी उपाधि, राजदूत और उसे भेजने वाला राजा, अभिलेख की संख्या और उसका विषय, अधिकारी और उसका कार्य, तथा प्रांत और उसका मुख्यालय। सबसे आम भ्रम मेगस्थनीज और डाइमेकस में, बारहवें और तेरहवें शिलालेख में, समाहर्ता और सन्निधाता में, तथा बराबर गुफाओं और बाद की बौद्ध गुफाओं में होता है। स्रोतों पर प्रश्न पूछे जाते हैं कि अर्थशास्त्र किसकी रचना है, ब्राह्मी किसने पढ़ी और सुदर्शन झील का उल्लेख किस अभिलेख में है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| संस्थापक और काल | चंद्रगुप्त मौर्य, लगभग 321 ईसा पूर्व |
|---|---|
| राजधानी | पाटलिपुत्र, गंगा और सोन के संगम पर |
| चाणक्य के अन्य नाम | कौटिल्य और विष्णुगुप्त; अर्थशास्त्र के रचयिता |
| यूनानी राजदूत | मेगस्थनीज सेल्यूकस निकेटर का, डाइमेकस एंटिओकस प्रथम का |
| अशोक की उपाधि | देवानांपिय पियदसि |
| कलिंग युद्ध | तेरहवें वृहद शिलालेख में वर्णित, लगभग नौवें शासन वर्ष में |
| लिपि और वाचन | ब्राह्मी, खरोष्ठी, यूनानी और अरामाइक; ब्राह्मी 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ी |
| प्रांतीय मुख्यालय | तक्षशिला, उज्जैन, तोसली और सुवर्णगिरि |
| राजस्व अधिकारी | समाहर्ता प्रमुख संग्राहक, सन्निधाता कोषाध्यक्ष |
| गुफाएँ | गया के पास बराबर की गुफाएँ, आजीवकों को दान |
| तीसरी बौद्ध संगीति | पाटलिपुत्र में, मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में |
| साम्राज्य का अंत | बृहद्रथ की हत्या पुष्यमित्र शुंग द्वारा, लगभग 185 ईसा पूर्व |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
सेल्यूकस निकेटर ने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में अपना राजदूत किसे भेजा था?
- A.डाइमेकस
- B.मेगस्थनीज
- C.डायोनिसियस
- D.टॉलेमी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मेगस्थनीज
व्याख्या
सही उत्तर B, मेगस्थनीज है। लगभग 305 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस निकेटर के बीच हुई संधि के बाद सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को पाटलिपुत्र में अपना राजदूत बनाकर भेजा। मेगस्थनीज ने भारत का विवरण इंडिका नाम से लिखा, जो मूल रूप में नष्ट हो गया और केवल एरियन, स्ट्रैबो तथा डायोडोरस जैसे बाद के यूनानी लेखकों के उद्धरणों में बचा है। इसमें पाटलिपुत्र की लकड़ी की प्राचीर, नगर का प्रबंध करने वाली समितियों और समाज के सात वर्गों का वर्णन मिलता है।
विकल्प A डाइमेकस भी राजदूत था, किंतु उसे एंटिओकस प्रथम ने चंद्रगुप्त के पुत्र बिंदुसार के दरबार में भेजा था, और यही इस प्रश्न का सबसे बड़ा भ्रम है। विकल्प C डायोनिसियस को मिस्र के टॉलेमी द्वितीय ने भेजा था और वह बाद के शासनकाल से जुड़ा है। विकल्प D टॉलेमी स्वयं राजदूत नहीं, बल्कि राजदूत भेजने वाला शासक था।
कलिंग युद्ध और उसके परिणामों का वर्णन अशोक के किस अभिलेख में मिलता है?
- A.बारहवाँ वृहद शिलालेख
- B.तेरहवाँ वृहद शिलालेख
- C.सातवाँ स्तंभ लेख
- D.पहला लघु शिलालेख
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सही उत्तर: B. तेरहवाँ वृहद शिलालेख
व्याख्या
सही उत्तर B, तेरहवाँ वृहद शिलालेख है। यह चौदह वृहद शिलालेखों में सबसे लंबा है और कलिंग युद्ध का एकमात्र ऐसा विवरण देता है जो स्वयं अशोक के शब्दों में है। इसमें मारे गए, बंदी बनाए गए और अन्य कारणों से मरे लोगों की संख्या, उससे उपजा पश्चाताप तथा शस्त्र विजय के स्थान पर धम्म विजय अपनाने की घोषणा है। इसी अभिलेख में पश्चिम के यूनानी राजाओं और दक्षिण के पड़ोसी जनपदों के नाम भी आते हैं।
विकल्प A बारहवाँ वृहद शिलालेख सहिष्णुता का अभिलेख है, जिसमें सभी संप्रदायों से एक दूसरे का आदर करने और अपने संप्रदाय की प्रशंसा में दूसरों की निंदा न करने को कहा गया है। विकल्प C सातवाँ स्तंभ लेख अशोक द्वारा धम्म के लिए किए गए कार्यों की अंतिम समीक्षा है। विकल्प D पहला लघु शिलालेख बौद्ध संघ से उसके जुड़ाव की बात करता है।
अशोक के अभिलेखों की ब्राह्मी लिपि को 1837 में किसने पढ़ा था?
- A.अलेक्जेंडर कनिंघम
- B.जेम्स प्रिंसेप
- C.जॉन मार्शल
- D.विलियम जोंस
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सही उत्तर: B. जेम्स प्रिंसेप
व्याख्या
सही उत्तर B, जेम्स प्रिंसेप है। कलकत्ता टकसाल के अधिकारी और एशियाटिक सोसाइटी के सचिव जेम्स प्रिंसेप ने 1837 में ब्राह्मी अक्षरों का मान निकालकर अशोक के अभिलेखों को पढ़ने योग्य बनाया। इससे पहले ये अभिलेख दिखाई तो देते थे पर मौन थे, और अभिलेखों के देवानांपिय पियदसि की पहचान बौद्ध परंपरा के अशोक से इसी कार्य के बाद संभव हुई।
विकल्प A अलेक्जेंडर कनिंघम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पहले महानिदेशक थे और उन्होंने अनेक स्थलों का सर्वेक्षण किया, किंतु वे बाद में आए और प्रिंसेप के वाचन का ही उपयोग किया। विकल्प C जॉन मार्शल बीसवीं शताब्दी में सर्वेक्षण के प्रमुख थे और हड़प्पा सभ्यता की घोषणा से जुड़े हैं। विकल्प D विलियम जोंस ने 1784 में एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना की थी, पर लिपि पढ़े जाने से बहुत पहले उनका निधन हो चुका था।
भारत के राजकीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया सिंह शीर्ष अशोक ने मूल रूप से कहाँ स्थापित किया था?
- A.साँची
- B.सारनाथ
- C.वैशाली
- D.लौरिया नंदनगढ़
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सही उत्तर: B. सारनाथ
व्याख्या
सही उत्तर B, सारनाथ है। सारनाथ के सिंह शीर्ष में चार सिंह पीठ से पीठ जोड़े खड़े हैं और उनके नीचे की पट्टी पर हाथी, बैल, घोड़ा और सिंह चक्रों से अलग किए गए हैं, तथा पूरा शीर्ष उलटे कमल पर टिका है। इसी को भारत का राजकीय प्रतीक बनाया गया और इसी पट्टी का चक्र राष्ट्रीय ध्वज में लिया गया। सारनाथ वही स्थान है जहाँ बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था।
विकल्प A साँची के स्तंभ पर भी चार सिंहों का शीर्ष है, किंतु वह खंडित है और राजकीय प्रतीक नहीं है। विकल्प C वैशाली के स्तंभ पर उत्तर दिशा की ओर मुख किए एक ही सिंह का शीर्ष है। विकल्प D बिहार के लौरिया नंदनगढ़ में भी एक सिंह वाला शीर्ष सुरक्षित स्तंभ पर है, इसलिए केवल सिंह शब्द याद रखने वाले छात्र के लिए तीनों भ्रामक हैं।
मौर्य प्रशासन में राजस्व का प्रमुख संग्राहक कौन अधिकारी था?
- A.सन्निधाता
- B.समाहर्ता
- C.राजुक
- D.प्रादेशिक
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सही उत्तर: B. समाहर्ता
व्याख्या
सही उत्तर B, समाहर्ता है। अर्थशास्त्र में समाहर्ता वह अधिकारी है जो भूमि, खानों, वनों, व्यापार मार्गों और नगर शुल्कों से मिलने वाले राज्य के राजस्व का निर्धारण और संग्रह करता था तथा आय और व्यय का लेखा रखता था, जिस पर पूरा राज्य चलता था।
विकल्प A सन्निधाता कोषाध्यक्ष था, अर्थात वह अधिकारी जो भंडारों और कोष की देखभाल करता था जिसमें यही राजस्व जमा होता था; यही जोड़ा इस प्रश्न का सबसे आम भ्रम है। विकल्प C राजुक ग्रामीण क्षेत्र का अधिकारी था, जिसे अशोक के चौथे स्तंभ लेख में पुरस्कार और दंड के अधिकार दिए गए हैं और प्रजा के कल्याण का दायित्व सौंपा गया है। विकल्प D प्रादेशिक जिला स्तर का अधिकारी था, जो अभिलेखों में राजुकों और युक्तों के साथ हर पाँचवें वर्ष दौरे से जोड़ा गया है।
अशोक का व्यक्तिगत नाम निम्नलिखित में से किस अभिलेख में मिलता है?
- A.मस्की का लघु शिलालेख
- B.गिरनार का वृहद शिलालेख
- C.सारनाथ का स्तंभ लेख
- D.बराबर गुफा का अभिलेख
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सही उत्तर: A. मस्की का लघु शिलालेख
व्याख्या
सही उत्तर A, मस्की का लघु शिलालेख है। अशोक के लगभग सभी अभिलेखों में केवल देवानांपिय पियदसि उपाधि मिलती है। कर्नाटक के मस्की का लघु शिलालेख वह प्रसिद्ध अपवाद है जिसमें व्यक्तिगत नाम अशोक लिखा है और जिससे यह निश्चित हुआ कि अभिलेखों का पियदसि ही बौद्ध परंपरा का अशोक है। गुज्जरा, नेट्टूर और उडेगोलम के अभिलेखों में भी यह नाम मिलता है।
विकल्प B गिरनार की शिला पर चौदह वृहद शिलालेखों का पूरा समूह है, पर वहाँ केवल उपाधियाँ आई हैं। विकल्प C सारनाथ का स्तंभ लेख संघभेद निषेध का अभिलेख है, जिसमें भिक्षु और भिक्षुणियों को संघ में फूट डालने से रोका गया है, और वहाँ भी उपाधि ही है। विकल्प D बराबर गुफाओं के अभिलेख आजीवकों को गुफाएँ दान देने का उल्लेख करते हैं और उनमें भी नाम के स्थान पर देवानांपिय ही लिखा है।
मौर्य वंश का अंतिम शासक कौन था?
- A.दशरथ
- B.सम्प्रति
- C.बृहद्रथ
- D.शालिशुक
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सही उत्तर: C. बृहद्रथ
व्याख्या
सही उत्तर C, बृहद्रथ है। वह मौर्यों में अंतिम था और लगभग 185 ईसा पूर्व में उसके अपने सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने उसकी हत्या कर दी, जिसने पाटलिपुत्र को राजधानी बनाकर शुंग वंश की स्थापना की। सभी मानक कालक्रमों में यही घटना मौर्य युग का अंत मानी जाती है।
विकल्प A दशरथ अशोक का पौत्र था, जिसने अशोक के कुछ ही समय बाद शासन किया और अपने पितामह की भाँति नागार्जुनी पहाड़ियों की गुफाएँ आजीवकों को दान दीं। विकल्प B सम्प्रति को जैन परंपरा में उस मत का संरक्षक कहा गया है और उसे बाद के मौर्यों में गिना जाता है। विकल्प D शालिशुक भी पुराणों की सूची में आने वाला एक दुर्बल उत्तराधिकारी था। तीनों पतन काल के शासक हैं, पर अंत के समय सिंहासन पर बृहद्रथ था।
चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में बनी सुदर्शन झील का उल्लेख किस अभिलेख से मिलता है?
- A.रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख
- B.खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख
- C.समुद्रगुप्त का प्रयाग प्रशस्ति
- D.अशोक का कंधार अभिलेख
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख
व्याख्या
सही उत्तर A, रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख है। शक शासक रुद्रदामन का यह अभिलेख परिष्कृत संस्कृत का सबसे पुराना लंबा अभिलेख माना जाता है। इसमें कहा गया है कि सौराष्ट्र की सुदर्शन झील का बाँध मूल रूप से चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यपाल पुष्यगुप्त ने बनवाया था और अशोक के समय तुषास्प ने उसमें नहरें जुड़वाईं; आगे रुद्रदामन के काल में बाँध की मरम्मत का वर्णन है।
विकल्प B कलिंग के खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख उसके अभियानों और निर्माण कार्यों का वर्णन करता है, सौराष्ट्र की झील का नहीं। विकल्प C हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति समुद्रगुप्त की विजयों की सूची है। विकल्प D कंधार के अभिलेख यूनानी और अरामाइक में धम्म से संबंधित हैं, और गुजरात में अशोक के वृहद शिलालेख जूनागढ़ की उसी शिला पर हैं, कंधार में नहीं।
अशोक के शासनकाल में पाटलिपुत्र में हुई तीसरी बौद्ध संगीति की अध्यक्षता किसने की थी?
- A.वसुमित्र
- B.मोग्गलिपुत्त तिस्स
- C.महाकस्सप
- D.सबाकामी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मोग्गलिपुत्त तिस्स
व्याख्या
सही उत्तर B, मोग्गलिपुत्त तिस्स है। बौद्ध परंपरा के अनुसार तीसरी संगीति अशोक के शासन में पाटलिपुत्र में हुई और उसकी अध्यक्षता मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की, जिन्हें संघ के विवाद सुलझाने और अभिधम्म पिटक के ग्रंथ कथावत्थु की रचना का श्रेय दिया जाता है। इसी संगीति के बाद धर्म प्रचार के लिए दल भेजे गए, जिनमें महेंद्र का श्रीलंका जाना प्रसिद्ध है।
विकल्प A वसुमित्र ने कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर में हुई चौथी संगीति की अध्यक्षता की थी, जिसमें अश्वघोष उपाध्यक्ष थे। विकल्प C महाकस्सप ने बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तुरंत बाद राजगृह में हुई पहली संगीति की अध्यक्षता की, जहाँ आनंद और उपालि ने उपदेश दोहराए। विकल्प D सबाकामी ने बुद्ध के लगभग सौ वर्ष बाद वैशाली में हुई दूसरी संगीति की अध्यक्षता की, जो अनुशासन के विवादों पर बुलाई गई थी।
गया के पास स्थित बराबर की गुफाएँ मौर्य शासकों ने किस संप्रदाय को दान में दी थीं?
- A.आजीवक
- B.जैन
- C.थेरवाद भिक्षु
- D.शैव
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आजीवक
व्याख्या
सही उत्तर A, आजीवक है। बराबर पहाड़ियों के दान अभिलेखों में अशोक द्वारा और पास की नागार्जुनी गुफाओं में उसके पौत्र दशरथ द्वारा ये गुफाएँ आजीवकों को दिए जाने का उल्लेख है। आजीवक मक्खलि गोसाल द्वारा चलाया गया तपस्वी संप्रदाय था, जो नियति के कठोर सिद्धांत में विश्वास करता था। ये गुफाएँ भीतर से दर्पण जैसी चमकदार पॉलिश के लिए प्रसिद्ध हैं, वही चमक जो मौर्य स्तंभों पर मिलती है।
विकल्प B इसलिए गलत है कि इस काल की जैन गुफाएँ ओडिशा की उदयगिरि और खंडगिरि पहाड़ियों में खारवेल के समय बनीं। विकल्प C इसलिए गलत है कि सबसे पुराने बौद्ध चैत्य और विहार भाजा, कार्ले और कन्हेरी जैसे पश्चिमी दक्कन के स्थलों पर बाद की शताब्दियों में बने। विकल्प D इसलिए गलत है कि एलोरा के कैलाश जैसे शैव गुफा मंदिर कई शताब्दी बाद के हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मौर्य साम्राज्य की स्थापना किसने की और उसे किसका सहयोग मिला?
मौर्य साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 321 ईसा पूर्व में मगध के अंतिम नंद शासक धनानंद को हराकर की। उसे अपने गुरु और मंत्री चाणक्य का मार्गदर्शन मिला, जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त भी कहा जाता है और जिनके नाम से अर्थशास्त्र जुड़ा है।
कलिंग युद्ध का वर्णन अशोक के किस अभिलेख में मिलता है?
तेरहवें वृहद शिलालेख में कलिंग की विजय, उससे हुए कष्ट और अशोक के धम्म की ओर मुड़ने का वर्णन है। यह चौदह वृहद शिलालेखों में सबसे लंबा है और इसे कलिंग में नहीं खुदवाया गया, वहाँ इसके स्थान पर दो अलग अभिलेख लगाए गए।
अशोक नाम किन अभिलेखों में लिखा मिलता है?
अधिकांश अभिलेखों में केवल देवानांपिय पियदसि उपाधि मिलती है। व्यक्तिगत नाम अशोक कुछ लघु शिलालेखों में है, जिनमें सबसे प्रसिद्ध कर्नाटक का मस्की है; इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश का गुज्जरा तथा कर्नाटक के नेट्टूर और उडेगोलम भी यह नाम देते हैं।
अशोक का धम्म क्या था?
धम्म कोई धर्म नहीं बल्कि आचरण की संहिता थी, जिसमें बड़ों और गुरुओं का आदर, सेवकों और पशुओं पर दया, सत्य, दान और सभी संप्रदायों के प्रति सहिष्णुता शामिल थी। इसके प्रचार तथा विभिन्न समुदायों के कल्याण के लिए अशोक ने धम्म महामात्र नियुक्त किए।
मौर्य साम्राज्य का अंतिम शासक कौन था और साम्राज्य का अंत कैसे हुआ?
अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ था। लगभग 185 ईसा पूर्व में उसके अपने सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने उसकी हत्या कर दी और शुंग वंश की स्थापना की। दुर्बल उत्तराधिकारी, खर्चीला प्रशासन और उत्तर पश्चिमी सीमांत का दबाव पहले ही साम्राज्य को बिखेर चुके थे।
मौर्य काल की कौन सी कलाकृति भारत का राजकीय प्रतीक है?
सारनाथ में अशोक द्वारा स्थापित सिंह शीर्ष भारत का राजकीय प्रतीक है, जिसमें चार सिंह पीठ से पीठ जोड़े खड़े हैं और नीचे की पट्टी पर हाथी, बैल, घोड़ा और सिंह चक्रों से अलग दिखाए गए हैं; इसी पट्टी का चक्र राष्ट्रीय ध्वज में लिया गया है।
स्रोत
- हमारे अतीत 1 (कक्षा 6), अशोक से संबंधित अध्याय — एनसीईआरटी
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 1 (कक्षा 12), राजा, किसान और नगर अध्याय — एनसीईआरटी



