प्रकाश का व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण: नोट्स
तरंग प्रकाशिकी के नोट्स: व्यतिकरण और यंग का प्रयोग, फ्रिंज चौड़ाई, विवर्तन, विभेदन क्षमता, ध्रुवण, ब्रूस्टर तथा मैलस के नियम और परीक्षा प्रश्न।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

तीन प्रयोगों ने यह तय किया कि प्रकाश एक तरंग है। व्यतिकरण ने दिखाया कि प्रकाश की दो किरण-पुंज एक-दूसरे को बढ़ा या काट सकती हैं, विवर्तन ने दिखाया कि प्रकाश अवरोध के किनारे से मुड़ जाता है, और ध्रुवण ने दिखाया कि यह तरंग अनुप्रस्थ है, अर्थात कंपन गति की दिशा के लंबवत होते हैं। न्यूटन प्रकाश को कणों की धारा मानते थे, परंतु क्रिस्चियन हाइगेंस की तरंग-कल्पना, जिसे 1801 में थॉमस यंग ने पुनर्जीवित किया और ऑगस्टिन फ्रेनेल ने पूर्ण किया, इन तीनों की व्याख्या करती है। परीक्षाओं में यह अध्याय एक घटना, एक सूत्र या एक दैनिक उदाहरण के रूप में पूछा जाता है, इसलिए नाम, सूत्र और उदाहरण एक साथ याद करने चाहिए।
प्रकाश का व्यतिकरण
जब समान आवृत्ति और स्थिर कलांतर वाली दो तरंगें मिलती हैं, तो कुछ स्थानों पर परिणामी तीव्रता योग से अधिक और कुछ स्थानों पर लगभग शून्य हो जाती है। ऊर्जा के इस पुनर्वितरण को व्यतिकरण कहते हैं; ऊर्जा नष्ट नहीं होती, केवल अदीप्त स्थानों से दीप्त स्थानों पर चली जाती है। थॉमस यंग ने 1801 में एक ही स्रोत के प्रकाश को दो निकट झिरियों से गुजारकर पर्दे पर इसे दिखाया, जहाँ एकांतर क्रम में दीप्त और अदीप्त पट्टियाँ, जिन्हें फ्रिंज कहते हैं, बनीं। जहाँ पथांतर तरंगदैर्घ्य का पूर्ण गुणक होता है वहाँ दीप्त फ्रिंज और जहाँ अर्ध तरंगदैर्घ्य का विषम गुणक होता है वहाँ अदीप्त फ्रिंज बनती है। फ्रिंज की चौड़ाई तरंगदैर्घ्य और पर्दे की दूरी के गुणनफल को झिरियों के बीच की दूरी से भाग देने पर मिलती है, इसलिए पर्दा पीछे हटाने, झिरियाँ पास लाने या नीले के स्थान पर लाल प्रकाश लेने से फ्रिंज चौड़ी हो जाती हैं। स्थायी व्यतिकरण के लिए दो कला-सम्बद्ध स्रोत आवश्यक हैं, अर्थात स्थिर कलांतर वाले स्रोत, इसीलिए दो अलग लैंप लेने के बजाय एक ही स्रोत को दो भागों में बाँटा जाता है। साबुन के बुलबुले के रंग, गीली सड़क पर तेल की पतली परत के रंग और न्यूटन के वलय पतली झिल्ली में व्यतिकरण के दैनिक उदाहरण हैं, जो झिल्ली की ऊपरी और निचली सतह से परावर्तित प्रकाश के मिलने से बनते हैं।
प्रकाश का विवर्तन
तरंग का किसी अवरोध या छिद्र के किनारों से मुड़कर ज्यामितीय छाया में फैल जाना विवर्तन कहलाता है। यह तभी स्पष्ट दिखता है जब अवरोध या झिरी का आकार तरंगदैर्घ्य के समकक्ष हो। दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य केवल लगभग 400 से 700 नैनोमीटर है, इसलिए सामान्य कमरों में प्रकाश सीधी रेखा में चलता प्रतीत होता है, जबकि ध्वनि, जिसकी तरंगदैर्घ्य मीटर की कोटि की है, दरवाजे से सरलता से मुड़ जाती है और दूसरे कमरे से सुनी जा सकती है। एकल झिरी के प्रतिरूप में मध्य की दीप्त पट्टी सबसे चौड़ी और सबसे चमकीली होती है और दोनों ओर की पट्टियाँ क्रमशः धुँधली होती जाती हैं; विवर्तन ग्रेटिंग श्वेत प्रकाश को उसके रंगों में बाँट देती है, इसी कारण कॉम्पैक्ट डिस्क की निचली सतह पर इंद्रधनुषी रंग दिखते हैं। विवर्तन यह भी तय करता है कि कोई यंत्र कितनी सूक्ष्म वस्तुएँ अलग दिखा सकता है: दो बिंदु वस्तुएँ तब ही पृथक दिखती हैं जब उनका कोणीय पृथक्करण 1.22 गुना तरंगदैर्घ्य को द्वारक के व्यास से भाग देने पर प्राप्त मान के बराबर हो, इसीलिए बड़े अभिदृश्यक वाली दूरदर्शी अधिक सूक्ष्म विवरण दिखाती है और सूक्ष्मदर्शी में छोटी तरंगदैर्घ्य का प्रकाश बेहतर होता है।
प्रकाश का ध्रुवण
लैंप या सूर्य से आने वाला सामान्य प्रकाश अपनी गति की दिशा के लंबवत प्रत्येक तल में कंपन करता है और अध्रुवित कहलाता है। यदि कंपन केवल एक तल तक सीमित कर दिए जाएँ तो प्रकाश समतल ध्रुवित कहलाता है, और यह कार्य करने वाली युक्ति, अर्थात एक दिशा में व्यवस्थित लंबी शृंखला वाले अणुओं की शीट, पोलेरॉइड कहलाती है। ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों में संभव है, इसलिए यही प्रमाण है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है और इसी कारण अनुदैर्घ्य ध्वनि तरंग कभी ध्रुवित नहीं हो सकती। मैलस का नियम बताता है कि दूसरे पोलेरॉइड से निकलने वाली तीव्रता आपाती तीव्रता और दोनों के बीच के कोण की कोज्या के वर्ग का गुणनफल होती है, इसलिए नब्बे अंश पर रखे क्रॉस पोलेरॉइड प्रकाश को पूरी तरह रोक देते हैं। किसी सतह से परावर्तित प्रकाश आंशिक रूप से ध्रुवित होता है, और एक विशेष आपतन कोण, जिसे ध्रुवण कोण कहते हैं, पर परावर्तित प्रकाश पूर्णतः समतल ध्रुवित हो जाता है; ब्रूस्टर का नियम कहता है कि इस कोण की स्पर्शज्या सतह के अपवर्तनांक के बराबर होती है। कैल्साइट और क्वार्ट्ज एक किरण को दो ध्रुवित किरणों में बाँट देते हैं, जिसे द्विअपवर्तन कहते हैं और जिसका उपयोग निकोल प्रिज्म में होता है। प्रकीर्णित प्रकाश भी ध्रुवित होता है, इसीलिए आकाश का नीलापन आंशिक रूप से ध्रुवित होता है।
याद रखने योग्य सूत्र
| राशि | संबंध | टिप्पणी |
|---|---|---|
| दीप्त फ्रिंज | पथांतर तरंगदैर्घ्य का पूर्ण गुणक | संपोषी व्यतिकरण |
| अदीप्त फ्रिंज | पथांतर अर्ध तरंगदैर्घ्य का विषम गुणक | विनाशी व्यतिकरण |
| फ्रिंज चौड़ाई | तरंगदैर्घ्य गुणा पर्दे की दूरी, भाग झिरी अंतराल | लाल में नीले से अधिक |
| मैलस का नियम | तीव्रता कोण की कोज्या के वर्ग के अनुक्रमानुपाती | दो पोलेरॉइड |
| ब्रूस्टर का नियम | अपवर्तनांक ध्रुवण कोण की स्पर्शज्या के बराबर | साधारण काँच के लिए लगभग 57 अंश |
| विभेदन सीमा | 1.22 गुना तरंगदैर्घ्य भाग द्वारक व्यास | रेले कसौटी |
इन प्रभावों के उपयोग
- पोलेरॉइड धूप-चश्मे और कैमरा फिल्टर पानी, काँच तथा सड़क से परावर्तित चमक को काटते हैं, क्योंकि वह परावर्तित प्रकाश मुख्यतः एक तल में ध्रुवित होता है।
- घड़ियों, कैलकुलेटर और स्क्रीन के द्रव क्रिस्टल प्रदर्श दो पोलेरॉइड के बीच कार्य करते हैं।
- त्रिआयामी फिल्में समकोण पर रखे पोलेरॉइड से दिखाई जाती हैं, जिससे प्रत्येक आँख को अपना चित्र मिलता है।
- पारदर्शी प्रतिरूप में तनाव का अध्ययन पोलेरॉइड के बीच दिखने वाली रंगीन फ्रिंजों से किया जाता है, इस विधि को प्रकाश-प्रत्यास्थता कहते हैं।
- चीनी के विलयन की जाँच पोलेरिमीटर से होती है, क्योंकि चीनी ध्रुवण तल को सांद्रता के अनुसार घुमा देती है।
- कैमरा लेंस पर चढ़ाई गई पतली परतें व्यतिकरण से अवांछित परावर्तन समाप्त करती हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न चार प्रकार के आते हैं। पहला, कौन-सी घटना क्या सिद्ध करती है: अनुप्रस्थ प्रकृति के लिए ध्रुवण, तरंग प्रकृति के लिए व्यतिकरण और विवर्तन। दूसरा, सूत्र: फ्रिंज चौड़ाई, मैलस का नियम, ब्रूस्टर का नियम या रेले कसौटी, कभी-कभी छोटे संख्यात्मक प्रश्न के रूप में। तीसरा, दैनिक उदाहरण: साबुन के बुलबुले और तेल की परत के रंग पतली झिल्ली के व्यतिकरण के लिए, कॉम्पैक्ट डिस्क के रंग विवर्तन के लिए, पोलेरॉइड चश्मे और द्रव क्रिस्टल प्रदर्श ध्रुवण के लिए। चौथा, नाम और वर्ष: हाइगेंस की तरंग कल्पना, 1801 में यंग, फ्रेनेल, ब्रूस्टर, मैलस और निकोल। सामान्य भूलें हैं बुलबुले के रंगों को विक्षेपण कहना, विवर्तन में ऊर्जा बनना मानना, और यह भूल जाना कि ध्वनि ध्रुवित नहीं हो सकती।
महत्वपूर्ण तथ्य
| तरंग सिद्धांत | क्रिस्चियन हाइगेंस द्वारा प्रस्तावित; न्यूटन ने कणिका सिद्धांत दिया था |
|---|---|
| द्विझिरी प्रयोग | थॉमस यंग, 1801; व्यतिकरण का प्रमाण |
| कला-सम्बद्ध स्रोत | समान आवृत्ति और स्थिर कलांतर वाले स्रोत |
| फ्रिंज चौड़ाई | तरंगदैर्घ्य गुणा पर्दे की दूरी, भाग झिरियों के बीच की दूरी |
| पतली झिल्ली के रंग | साबुन का बुलबुला, पानी पर तेल, न्यूटन के वलय; व्यतिकरण, विक्षेपण नहीं |
| दृश्य तरंगदैर्घ्य | लगभग 400 नैनोमीटर (बैंगनी) से 700 नैनोमीटर (लाल) |
| विवर्तन की शर्त | अवरोध या छिद्र तरंगदैर्घ्य के समकक्ष हो |
| विवर्तन ग्रेटिंग | श्वेत प्रकाश को स्पेक्ट्रम में बाँटती है; कॉम्पैक्ट डिस्क पर दिखती है |
| रेले कसौटी | विभेदन सीमा 1.22 गुना तरंगदैर्घ्य भाग द्वारक व्यास |
| अध्रुवित प्रकाश | गति की दिशा के लंबवत सभी तलों में कंपन |
| पोलेरॉइड | एक दिशा में व्यवस्थित अणुओं की शीट, जो एक ही तल का कंपन पारित करती है |
| मैलस का नियम | तीव्रता दोनों पोलेरॉइड के बीच के कोण की कोज्या के वर्ग के अनुक्रमानुपाती |
| ब्रूस्टर का नियम | अपवर्तनांक ध्रुवण कोण की स्पर्शज्या के बराबर |
| द्विअपवर्तन | कैल्साइट और क्वार्ट्ज किरण को दो ध्रुवित किरणों में बाँटते हैं; निकोल प्रिज्म में उपयोग |
| ध्वनि तरंगें | अनुदैर्घ्य, इसलिए व्यतिकरण और विवर्तन दिखाती हैं, ध्रुवण कभी नहीं |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
ब्रूस्टर का नियम है (जहाँ mu अपवर्तनांक और i_p ध्रुवण कोण है)
- A.i_p = 90 अंश
- B.mu = tan i_p
- C.i_p घटा r = tan mu
- D.i_p = tan mu
उत्तर देखें
ब्रूस्टर ने पाया कि जब अध्रुवित प्रकाश किसी पारदर्शी सतह पर एक विशेष आपतन कोण, अर्थात ध्रुवण कोण, पर गिरता है तो परावर्तित प्रकाश पूर्णतः समतल ध्रुवित हो जाता है, और उस कोण की स्पर्शज्या सतह के अपवर्तनांक के बराबर होती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी दूर खड़ी कार की दोनों हेडलाइट 1.4 मीटर की दूरी पर हैं। यदि आँख की पुतली का व्यास 3 मिलीमीटर है, तो अधिकतम किस दूरी तक दोनों हेडलाइट अलग-अलग दिखाई दे सकती हैं? हेडलाइट को 500 नैनोमीटर तरंगदैर्घ्य के बिंदु स्रोत मानिए।
- A.3448 मीटर
- B.68.96 मीटर
- C.34.48 मीटर
- D.6896 मीटर
उत्तर देखें
रेले कसौटी के अनुसार आँख जिस न्यूनतम कोण को अलग देख सकती है वह 1.22 गुना तरंगदैर्घ्य को पुतली के व्यास से भाग देने पर मिलता है, अर्थात 1.22 गुणा 500 नैनोमीटर भाग 3 मिलीमीटर, जो लगभग 2.03 गुना दस की घात ऋण चार रेडियन होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →5890 आंगस्ट्रॉम तरंगदैर्घ्य के प्रकाश से चल रहे माइकेल्सन व्यतिकरणमापी की एक भुजा में 1.5 अपवर्तनांक वाली पतली काँच की पट्टिका रखने पर 10 फ्रिंजों का विस्थापन होता है। पट्टिका की मोटाई है
- A.5.89 मीटर
- B.5.89 गुना दस की घात ऋण तीन मीटर
- C.5.89 गुना दस की घात ऋण छह मीटर
- D.5.89 गुना दस की घात ऋण चार मीटर
उत्तर देखें
किसी एक भुजा में t मोटाई की पट्टिका रखने पर प्रकाश उसे दो बार पार करता है, इसलिए अतिरिक्त पथ मोटाई के दोगुने और अपवर्तनांक में से एक घटाने पर प्राप्त मान के गुणनफल के बराबर होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रकाश तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति किस घटना से सिद्ध होती है?
- A.व्यतिकरण
- B.विवर्तन
- C.ध्रुवण
- D.विक्षेपण
उत्तर देखें
केवल अनुप्रस्थ तरंग, जिसमें कंपन गति की दिशा के समकोण पर होते हैं, के कंपनों को पोलेरॉइड द्वारा एक ही तल में सीमित किया जा सकता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →साबुन के बुलबुले अथवा पानी पर फैली तेल की पतली परत में दिखने वाले चमकीले रंगों का कारण है
- A.झिल्ली की दोनों सतहों से परावर्तित प्रकाश का व्यतिकरण
- B.झिल्ली के भीतर पूर्ण आंतरिक परावर्तन
- C.प्रिज्म की तरह प्रकाश का विक्षेपण
- D.झिल्ली के अणुओं द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन
उत्तर देखें
पतली झिल्ली की ऊपरी सतह से परावर्तित प्रकाश और निचली सतह से परावर्तित प्रकाश कुछ भिन्न दूरियाँ तय करते हैं और परस्पर व्यतिकरण करते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →यंग के द्विझिरी प्रयोग में फ्रिंज की चौड़ाई बढ़ जाएगी यदि
- A.पर्दे को झिरियों के और निकट ले आया जाए
- B.दोनों झिरियों के बीच की दूरी घटा दी जाए
- C.लाल के स्थान पर नीला प्रकाश लिया जाए
- D.झिरियों के बीच की दूरी बदले बिना उन्हें संकरा कर दिया जाए
उत्तर देखें
फ्रिंज चौड़ाई तरंगदैर्घ्य और पर्दे की दूरी के गुणनफल को झिरियों के बीच की दूरी से भाग देने पर मिलती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दो पोलेरॉइड एक के पीछे एक रखे गए हैं। निर्गत प्रकाश पूर्णतः कट जाएगा जब उनके पारगमन तलों के बीच का कोण हो
- A.0 अंश
- B.45 अंश
- C.60 अंश
- D.90 अंश
उत्तर देखें
मैलस के नियम के अनुसार दूसरे पोलेरॉइड से पारगत तीव्रता उस पर पड़ने वाली तीव्रता और दोनों पारगमन तलों के बीच के कोण की कोज्या के वर्ग का गुणनफल होती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक व्यक्ति खुले दरवाजे से दूसरे कमरे में बोलने वाले की आवाज सुन लेता है, परंतु उसे देख नहीं पाता। इसका कारण है
- A.ध्वनि प्रकाश से तेज चलती है
- B.ध्वनि की तरंगदैर्घ्य दरवाजे की चौड़ाई के समकक्ष है, इसलिए ध्वनि का विवर्तन अधिक होता है
- C.ध्वनि अनुप्रस्थ और प्रकाश अनुदैर्घ्य तरंग है
- D.प्रकाश वायु द्वारा अवशोषित हो जाता है, ध्वनि नहीं
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विवर्तन, अर्थात तरंग का किनारे से मुड़ना, तभी स्पष्ट होता है जब अवरोध या छिद्र तरंगदैर्घ्य की ही कोटि का हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →खगोलीय दूरदर्शी की विभेदन क्षमता बढ़ाई जा सकती है
- A.अभिदृश्यक लेंस का व्यास बढ़ाकर
- B.नेत्रिका की फोकस दूरी बढ़ाकर
- C.अधिक तरंगदैर्घ्य वाला प्रकाश लेकर
- D.अभिदृश्यक लेंस का व्यास घटाकर
उत्तर देखें
दूरदर्शी जिस न्यूनतम कोणीय पृथक्करण को अलग दिखा सकती है वह 1.22 गुना तरंगदैर्घ्य को अभिदृश्यक के व्यास से भाग देने पर मिलता है, इसलिए बड़ा द्वारक विभेदन सीमा घटाता है और विभेदन क्षमता बढ़ाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किसका ध्रुवण नहीं किया जा सकता?
- A.दृश्य प्रकाश
- B.रेडियो तरंगें
- C.वायु में ध्वनि तरंगें
- D.एक्स-किरणें
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ध्रुवण का अर्थ तरंग के कंपनों को एक ही तल तक सीमित करना है, जो तभी संभव है जब कंपन गति की दिशा के लंबवत हों।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1801 में किया गया यंग का प्रसिद्ध द्विझिरी प्रयोग सिद्ध करता है कि प्रकाश
- A.भौतिक कणों से बना है
- B.व्यतिकरण दिखाता है और इसलिए तरंग की तरह व्यवहार करता है
- C.जल में वायु की अपेक्षा तेज चलता है
- D.सात रंगों से बना है
उत्तर देखें
थॉमस यंग ने एक ही स्रोत के प्रकाश को निकट रखी दो संकरी झिरियों से गुजारा और पर्दे पर एकांतर दीप्त तथा अदीप्त पट्टियाँ प्राप्त कीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
साबुन के बुलबुले में रंग क्यों दिखते हैं?
बुलबुले की पतली झिल्ली की ऊपरी सतह से परावर्तित प्रकाश निचली सतह से परावर्तित प्रकाश के साथ व्यतिकरण करता है। झिल्ली की मोटाई हर स्थान पर भिन्न होती है, इसलिए प्रत्येक बिंदु पर कोई एक तरंगदैर्घ्य कट जाती है और शेष रंग दिखते हैं। यह पतली झिल्ली का व्यतिकरण है, प्रिज्म जैसा विक्षेपण नहीं।
दूसरे कमरे की बात सुनाई देती है पर बोलने वाला दिखता नहीं, क्यों?
विवर्तन तभी स्पष्ट होता है जब अवरोध या छिद्र तरंगदैर्घ्य के समकक्ष हो। श्रव्य ध्वनि की तरंगदैर्घ्य कुछ सेंटीमीटर से कुछ मीटर तक होती है, इसलिए वह दरवाजे से मुड़ जाती है, जबकि दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य कुछ सौ नैनोमीटर ही है और वह लगभग सीधी रेखा में चलता है।
कौन-सी घटना सिद्ध करती है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है?
ध्रुवण। केवल अनुप्रस्थ तरंग के कंपन, जो गति की दिशा के लंबवत होते हैं, पोलेरॉइड द्वारा एक तल तक सीमित किए जा सकते हैं। व्यतिकरण और विवर्तन केवल तरंग प्रकृति सिद्ध करते हैं, अनुप्रस्थ या अनुदैर्घ्य होना नहीं, और अनुदैर्घ्य होने के कारण ध्वनि ध्रुवित नहीं हो सकती।
ब्रूस्टर का नियम क्या है?
जब अध्रुवित प्रकाश किसी सतह पर ध्रुवण कोण पर गिरता है तो परावर्तित प्रकाश पूर्णतः समतल ध्रुवित होता है, और उस कोण की स्पर्शज्या सतह के अपवर्तनांक के बराबर होती है। लगभग 1.5 अपवर्तनांक वाले साधारण काँच के लिए यह कोण करीब 57 अंश होता है और परावर्तित तथा अपवर्तित किरणें परस्पर समकोण पर होती हैं।
पर्दा दूर हटाने पर फ्रिंज चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ता है?
फ्रिंज चौड़ाई पर्दे की दूरी के अनुक्रमानुपाती होती है, इसलिए पर्दा पीछे हटाने पर फ्रिंज चौड़ी हो जाती हैं। झिरियों को पास लाने पर अथवा नीले के स्थान पर लाल जैसी अधिक तरंगदैर्घ्य वाला प्रकाश लेने पर भी वे चौड़ी होती हैं।
क्या व्यतिकरण में अदीप्त फ्रिंज पर ऊर्जा नष्ट हो जाती है?
नहीं। व्यतिकरण में ऊर्जा का केवल पुनर्वितरण होता है। अदीप्त फ्रिंज से गायब ऊर्जा दीप्त फ्रिंजों की अतिरिक्त चमक के रूप में प्रकट होती है, इसलिए पर्दे पर पड़ने वाली कुल ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है और ऊर्जा संरक्षण का नियम बना रहता है।





