सूक्ष्मजीव: जीवाणु, विषाणु, कवक और रोग
परीक्षा के लिए विज्ञान नोट्स: जीवाणु, विषाणु, कवक और प्रोटोजोआ की संरचना, उनसे होने वाले रोग तथा वाहक, और भोजन, कृषि एवं औषधि में उपयोगी सूक्ष्मजीव।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

सूक्ष्मजीव वे जीव हैं जो नंगी आँखों से नहीं दिखते। इन्हें पहली बार सत्रहवीं शताब्दी के सातवें दशक में एंटोनी वान ल्यूवेनहॉक ने अपने बनाए सूक्ष्मदर्शी से देखा, और इनके अध्ययन अर्थात सूक्ष्मजीव विज्ञान की नींव उन्नीसवीं शताब्दी में लुई पाश्चर ने रखी, जिन्होंने स्वतः जनन के सिद्धांत का खंडन किया, रोग का जीवाणु सिद्धांत स्थापित किया और पाश्चुरीकरण दिया, तथा रॉबर्ट कोख ने, जिन्होंने एंथ्रेक्स और क्षय रोग के जीवाणु पहचाने और वे नियम दिए जिनसे सिद्ध होता है कि कोई सूक्ष्मजीव किसी रोग का कारण है। इस नाम के अंतर्गत पाँच समूह पढ़े जाते हैं: जीवाणु, विषाणु, कवक, प्रोटोजोआ तथा कुछ शैवाल।
जीवाणु
जीवाणु प्रोकैरियोट हैं: एक कोशिका, जिसमें झिल्लीबद्ध केंद्रक नहीं होता, माइटोकॉन्ड्रिया और लवक नहीं होते, कोशिका भित्ति पेप्टिडोग्लाइकन की होती है, राइबोसोम 70S प्रकार के होते हैं और अनेक बार अतिरिक्त जीन लिए प्लाज्मिड भी रहता है। इनका गुणन द्विविभाजन से होता है, इसी कारण गर्म और नम भोजन में इनकी संख्या इतनी तेजी से बढ़ती है। आकार के अनुसार ये गोलाणु अर्थात कोकस, दंडाणु अर्थात बेसिलस, सर्पिलाणु अर्थात स्पाइरिलम तथा अल्पविराम जैसे विब्रियो में बाँटे जाते हैं; क्रिश्चियन ग्राम की अभिरंजन विधि से ये ग्राम धनात्मक और ग्राम ऋणात्मक में बाँटे जाते हैं, और यही अंतर बताता है कि कौन सा प्रतिजैविक काम करेगा। कुछ जीवाणु अत्यंत उपयोगी हैं। राइजोबियम दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथिकाओं में रहकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है; एजोटोबैक्टर मिट्टी में स्वतंत्र रहकर तथा नील हरित जीवाणु नॉस्टॉक और एनाबीना जल में यही कार्य करते हैं। नाइट्रोसोमोनास और नाइट्रोबैक्टर नाइट्रीकरण करते हैं, जिसमें अमोनिया पहले नाइट्राइट और फिर नाइट्रेट बनता है, जबकि स्यूडोमोनास विनाइट्रीकरण से नाइट्रोजन वायु में लौटा देता है। लैक्टोबैसिलस दूध को दही बनाता है और एसिटोबैक्टर एल्कोहॉल को सिरका। कुछ रोग भी करते हैं: माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस, विब्रियो कॉलेरी, सालमोनेला टाइफी, क्लॉस्ट्रिडियम टिटेनी, कोरिनेबैक्टीरियम डिफ्थीरी, यर्सीनिया पेस्टिस, माइकोबैक्टीरियम लेप्री तथा बैसिलस एंथ्रेसिस।
विषाणु
विषाणु कोशिका नहीं है। यह न्यूक्लिक अम्ल का कण है, जिसमें डीएनए अथवा आरएनए होता है, दोनों कभी नहीं, और उसके ऊपर प्रोटीन का आवरण होता है जिसे कैप्सिड कहते हैं और जो कैप्सोमीयर नामक इकाइयों से बनता है; कुछ में बाहरी आवरण भी होता है। विषाणु का अपना उपापचय नहीं होता और वह केवल जीवित पोषी कोशिका के भीतर गुणन कर सकता है, इसी कारण उसे सजीव और निर्जीव की सीमा पर कहा जाता है: पोषी के बाहर निष्क्रिय, क्रिस्टलित भी किया जा सकने वाला, और भीतर पूर्णतः सक्रिय। दमित्री इवानोव्स्की ने 1892 में दिखाया कि तंबाकू मोजैक रोग का कारक उस छनना से निकल जाता है जो जीवाणु रोक देता है, मार्टिनस बाइजेरिंक ने ऐसे कारक को विषाणु नाम दिया और डब्ल्यू. एम. स्टेनली ने 1935 में तंबाकू मोजैक विषाणु को क्रिस्टल रूप में प्राप्त किया। जीवाणु पर आक्रमण करने वाला विषाणु बैक्टीरियोफेज कहलाता है। मनुष्य के विषाणु रोगों में इन्फ्लुएंजा, सामान्य जुकाम, खसरा, कनफेड़, छोटी माता, चेचक, पोलियो, रेबीज, हेपेटाइटिस, डेंगू, चिकनगुनिया तथा उपार्जित प्रतिरक्षा अभाव सिंड्रोम सम्मिलित हैं, जिसका कारण रेट्रोवाइरस एचआईवी है। विषाणुओं पर प्रतिजैविक काम नहीं करते; टीके और प्रतिविषाणु औषधियां काम करती हैं।
कवक
कवक यूकैरियोट हैं, जिनकी कोशिका भित्ति काइटिन की होती है, और ये परपोषी होते हैं, मृतजीवी बनकर मृत पदार्थ पर, परजीवी बनकर जीवित पोषी पर अथवा सहजीवी रूप में रहते हैं। अधिकांश कवक तंतु जैसे कवक तंतुओं से बने होते हैं, जो मिलकर कवक जाल बनाते हैं, और बीजाणुओं से प्रजनन करते हैं। यीस्ट सैकरोमाइसीज सेरेविसी एक कोशिकीय कवक है, जो रोटी फुलाने और मदिरा बनाने में प्रयुक्त होता है, क्योंकि किण्वन में वह शर्करा को एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड में बदल देता है। पेनिसिलियम से पहला प्रतिजैविक मिला, एस्परजिलस से सिट्रिक अम्ल बनता है, राइजोपस सामान्य ब्रेड मोल्ड है और एगेरिकस खाद्य कुकुरमुत्ता है। सहजीवन में कवक पौधों की जड़ों के साथ माइकोराइजा बनाते हैं, जिससे पौधे को फॉस्फोरस के अवशोषण में सहायता मिलती है, तथा शैवाल के साथ लाइकेन बनाते हैं। कवक रोग भी करते हैं: मनुष्य में दाद और एथलीट फुट, तथा फसलों में गेहूं का रतुआ, कंड और पछेती अंगमारी।
प्रोटोजोआ, शैवाल और रोगवाहक
प्रोटोजोआ एक कोशिकीय यूकैरियोट हैं और इनमें कई मनुष्य के परजीवी हैं: प्लाज्मोडियम मलेरिया करता है, एंटअमीबा हिस्टोलिटिका अमीबीय अतिसार, जियार्डिया जियार्डिएसिस, लीशमानिया डोनोवानी कालाजार तथा ट्रिपैनोसोमा निद्रा रोग। ऐसे अनेक रोग किसी वाहक के माध्यम से हम तक पहुँचते हैं, और परीक्षा में रोगकारक जितनी बार पूछा जाता है, वाहक भी उतनी बार।
| रोग | रोगकारक समूह | वाहक या प्रसार |
|---|---|---|
| मलेरिया | प्रोटोजोआ, प्लाज्मोडियम | मादा एनोफिलीज मच्छर |
| डेंगू और चिकनगुनिया | विषाणु | एडीज एजिप्टाई मच्छर |
| कालाजार | प्रोटोजोआ, लीशमानिया | बालू मक्खी |
| प्लेग | जीवाणु, यर्सीनिया पेस्टिस | चूहे का पिस्सू |
| हैजा और टाइफाइड | जीवाणु | दूषित जल और भोजन |
| क्षय रोग और इन्फ्लुएंजा | जीवाणु तथा विषाणु | वायु, बूंदों के माध्यम से |
| रेबीज | विषाणु | संक्रमित पशु का काटना |
हमारे काम आने वाले सूक्ष्मजीव
सूक्ष्मजीवों के किण्वन से दही, पनीर, इडली और डोसा का घोल, रोटी, सिरका तथा मादक पेय बनते हैं। प्रतिजैविक सूक्ष्मजीवों के उत्पाद हैं: अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1928 में देखा कि पेनिसिलियम वंश के कवक ने स्टैफिलोकोकस की वृद्धि रोक दी, और हावर्ड फ्लोरी तथा अर्नस्ट चेन ने उस प्रेक्षण को पेनिसिलिन में बदला, तीनों को नोबेल पुरस्कार मिला; स्ट्रेप्टोमाइसिन स्ट्रेप्टोमाइसीज ग्रिसियस से मिलता है। उद्योग सिट्रिक अम्ल के लिए एस्परजिलस नाइजर, लैक्टिक अम्ल के लिए लैक्टोबैसिलस, एथेनॉल के लिए यीस्ट, कोलेस्ट्रॉल घटाने वाले स्टेटिन के लिए मोनास्कस परप्यूरियस तथा प्रतिरक्षा निरोधक साइक्लोस्पोरिन ए के लिए एक कवक का उपयोग करता है। कृषि में राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, एजोला-एनाबीना सहजीवन और माइकोराइजा जैसे जैव उर्वरक तथा इल्लियों के विरुद्ध बैसिलस थुरिंजिएंसिस और पादप रोगकारकों के विरुद्ध ट्राइकोडर्मा जैसे जैव नियंत्रक प्रयुक्त होते हैं। गोबर गैस संयंत्र में मेथैनोजन जीवाणु गोबर से बायोगैस बनाते हैं, जो मुख्यतः मेथेन है; मल जल उपचार में सक्रिय आपंक प्रक्रिया के वायुजीवी सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थ का अपघटन करते हैं और आपंक के अवायुजीवी पाचन से और बायोगैस मिलती है। आनुवंशिक अभियांत्रिकी में एशरीकिया कोलाई जैसे जीवाणु मानव इंसुलिन और अन्य प्रोटीन बनाने के कारखाने की तरह प्रयोग होते हैं।
खराबी, परिरक्षण और प्रतिरोध
वही जीव भोजन खराब करते हैं और संक्रमण भी फैलाते हैं। भोजन को सुखाकर, नमक या चीनी डालकर, तेल और सिरके में अचार बनाकर, प्रशीतन से तथा ताप से सुरक्षित रखा जाता है। पाश्चुरीकरण, जो पाश्चर की ही विधि है, दूध को लगभग सत्तर डिग्री सेल्सियस पर पंद्रह से तीस सेकंड तक गर्म करके तुरंत ठंडा कर देता है, जिससे हानिकारक सूक्ष्मजीव मर जाते हैं और स्वाद नहीं बदलता। प्रतिजैविक लापरवाही से लेने या अधूरा छोड़ने पर प्रतिरोधी जीवाणु बच जाते हैं और फैलते हैं, इसीलिए पूरा कोर्स लेना आवश्यक है और जुकाम जैसे विषाणु रोग में प्रतिजैविक व्यर्थ तथा हानिकारक हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न रोग का कारक और उसका वाहक, किसी खोज का वैज्ञानिक तथा किसी उत्पाद का सूक्ष्मजीव पूछते हैं। निश्चित रूप से आने वाले तथ्य हैं दही के लिए लैक्टोबैसिलस, रोटी और मदिरा के लिए यीस्ट, नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए राइजोबियम, पेनिसिलिन के लिए फ्लेमिंग, मलेरिया में प्लाज्मोडियम तथा एनोफिलीज और डेंगू में एडीज, काइटिन तथा पेप्टिडोग्लाइकन की भित्तियां और पाश्चुरीकरण के आँकड़े। जाल ये हैं: विषाणु रोग को जीवाणु रोग मानकर प्रतिजैविक बताना, विषाणु में डीएनए और आरएनए दोनों बताना, कवक को स्वपोषी कहना, तथा एनोफिलीज और एडीज अथवा नाइट्रोसोमोनास और नाइट्रोबैक्टर को बदल देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पहली बार देखा | एंटोनी वान ल्यूवेनहॉक ने, अपने सूक्ष्मदर्शी से |
|---|---|
| जीवाणु सिद्धांत और पाश्चुरीकरण | लुई पाश्चर |
| कोख के नियम | रॉबर्ट कोख, जिन्होंने एंथ्रेक्स और क्षय रोग के जीवाणु पहचाने |
| जीवाणु की भित्ति | पेप्टिडोग्लाइकन; कवक की भित्ति काइटिन |
| नाइट्रोजन स्थिरीकरण | दलहन की जड़ ग्रंथिकाओं में राइजोबियम, मिट्टी में एजोटोबैक्टर, जल में नॉस्टॉक और एनाबीना |
| नाइट्रीकरण | नाइट्रोसोमोनास अमोनिया से नाइट्राइट और नाइट्रोबैक्टर नाइट्राइट से नाइट्रेट बनाते हैं |
| दही और सिरका | लैक्टोबैसिलस तथा एसिटोबैक्टर |
| विषाणु की संरचना | डीएनए अथवा आरएनए, दोनों कभी नहीं, कैप्सोमीयर से बने प्रोटीन कैप्सिड में |
| पेनिसिलिन | अलेक्जेंडर फ्लेमिंग, 1928, पेनिसिलियम कवक से; फ्लोरी और चेन के साथ विकसित |
| स्ट्रेप्टोमाइसिन | स्ट्रेप्टोमाइसीज ग्रिसियस से |
| मलेरिया | प्लाज्मोडियम, वाहक मादा एनोफिलीज मच्छर |
| डेंगू और चिकनगुनिया | विषाणु रोग, वाहक एडीज एजिप्टाई मच्छर |
| कालाजार | लीशमानिया डोनोवानी, वाहक बालू मक्खी |
| सिट्रिक अम्ल | कवक एस्परजिलस नाइजर से औद्योगिक उत्पादन |
| बायोगैस | मुख्यतः मेथेन, गोबर से मेथैनोजन जीवाणुओं द्वारा |
| पाश्चुरीकरण | लगभग 70 डिग्री सेल्सियस पर 15 से 30 सेकंड, फिर तुरंत ठंडा करना |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
दूध को दही में जमाने के लिए कौन सा सूक्ष्मजीव उत्तरदायी है?
- A.लैक्टोबैसिलस
- B.राइजोबियम
- C.पेनिसिलियम
- D.प्लाज्मोडियम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, लैक्टोबैसिलस है। यह जीवाणु दूध की लैक्टोज शर्करा का किण्वन कर लैक्टिक अम्ल बनाता है, और यह अम्ल दूध के प्रोटीन को स्कंदित कर देता है, इसीलिए गुनगुने दूध में पुराने दही का एक चम्मच डालने से पूरा बर्तन जम जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि राइजोबियम दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथिकाओं में रहकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है, दूध से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि पेनिसिलियम वह कवक है जिससे पेनिसिलिन मिला और जो कुछ पनीरों को पकाता है, परंतु दही नहीं जमाता। विकल्प D गलत है क्योंकि प्लाज्मोडियम मलेरिया का प्रोटोजोआ परजीवी है, जिसे मादा एनोफिलीज मच्छर फैलाता है। इसके साथ याद रखने योग्य दूसरा उदाहरण एसिटोबैक्टर है, जो एल्कोहॉल को सिरका बनाता है। परीक्षा में दही, सिरका, रोटी और पनीर जैसे उत्पादों के साथ उनके सूक्ष्मजीव जोड़कर पूछे जाते हैं, इसलिए इन जोड़ों को एक साथ याद रखना लाभकारी है।
पहला प्रतिजैविक पेनिसिलिन 1928 में किसने खोजा?
- A.लुई पाश्चर
- B.रॉबर्ट कोख
- C.अलेक्जेंडर फ्लेमिंग
- D.एडवर्ड जेनर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, अलेक्जेंडर फ्लेमिंग है। उन्होंने देखा कि संवर्धन प्लेट पर संयोगवश उगे पेनिसिलियम वंश के कवक ने अपने चारों ओर स्टैफिलोकोकस की वृद्धि रोक दी है, और आगे हावर्ड फ्लोरी तथा अर्नस्ट चेन ने उस प्रेक्षण को उपयोगी औषधि में बदला; तीनों को नोबेल पुरस्कार मिला। विकल्प A गलत है क्योंकि लुई पाश्चर ने रोग का जीवाणु सिद्धांत स्थापित किया, स्वतः जनन का खंडन किया तथा पाश्चुरीकरण और रेबीज का टीका दिया। विकल्प B गलत है क्योंकि रॉबर्ट कोख ने एंथ्रेक्स और क्षय रोग के जीवाणु पहचाने तथा रोग का कारण सिद्ध करने के नियम बनाए। विकल्प D गलत है क्योंकि एडवर्ड जेनर ने 1796 में गोशीतला से चेचक का टीकाकरण आरंभ किया, जो प्रतिजैविकों से बहुत पहले की बात है। इसके बाद प्रसिद्ध प्रतिजैविक स्ट्रेप्टोमाइसिन स्ट्रेप्टोमाइसीज ग्रिसियस से मिला, और फ्लेमिंग के साथ पेनिसिलियम तथा स्ट्रेप्टोमाइसिन के साथ स्ट्रेप्टोमाइसीज का जोड़ा याद रखने से प्रतिजैविकों के अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं।
मलेरिया किस जीव से होता है और उसका वाहक कौन है?
- A.विषाणु से, वाहक एडीज एजिप्टाई मच्छर
- B.प्रोटोजोआ प्लाज्मोडियम से, वाहक मादा एनोफिलीज मच्छर
- C.जीवाणु से, वाहक चूहे का पिस्सू
- D.कवक से, प्रसार दूषित जल से
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। मलेरिया प्रोटोजोआ परजीवी प्लाज्मोडियम से होता है, जिसकी कई जातियां मनुष्य को संक्रमित करती हैं, और यह संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है; नर मच्छर पौधों का रस पीता है। विकल्प A गलत है क्योंकि एडीज एजिप्टाई डेंगू, चिकनगुनिया, पीत ज्वर और जीका जैसे विषाणु रोग फैलाता है, और यही जोड़ा इस अध्याय में सर्वाधिक भ्रम पैदा करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि चूहे का पिस्सू प्लेग फैलाता है, जिसका कारक जीवाणु यर्सीनिया पेस्टिस है। विकल्प D गलत है क्योंकि कोई कवक मलेरिया नहीं करता; दूषित जल से फैलने वाले रोग हैजा, टाइफाइड और अमीबीय अतिसार हैं। भारत में कार्यरत रोनाल्ड रॉस ने मलेरिया के प्रसार में मच्छर की भूमिका सिद्ध की थी। रोकथाम का आधार मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना, मच्छरदानी का प्रयोग और रोगी का समय पर उपचार है, क्योंकि परजीवी अपना जीवन चक्र आंशिक रूप से मच्छर में और आंशिक रूप से मनुष्य के यकृत तथा लाल रक्त कणिकाओं में पूरा करता है।
जीवाणु की कोशिका भित्ति मुख्यतः किससे बनी होती है?
- A.सेल्यूलोज
- B.काइटिन
- C.पेप्टिडोग्लाइकन
- D.लिग्निन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, पेप्टिडोग्लाइकन है, जिसे म्यूरिन भी कहते हैं; यह शर्करा श्रृंखलाओं का वह जाल है जिसे छोटे पेप्टाइड आपस में जोड़ते हैं। यही पेनिसिलिन का लक्ष्य है, जो इसके निर्माण को रोकता है, और भित्ति में इसकी मात्रा ही तय करती है कि जीवाणु ग्राम धनात्मक या ग्राम ऋणात्मक अभिरंजित होगा। विकल्प A गलत है क्योंकि सेल्यूलोज पादप कोशिकाओं तथा कुछ शैवालों की भित्ति का पदार्थ है। विकल्प B गलत है क्योंकि काइटिन कवक की भित्ति तथा कीटों और अन्य संधिपादों का बाह्य कंकाल बनाता है, और परीक्षा में यही जोड़ा सबसे अधिक बदला जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि लिग्निन काष्ठीय पादप ऊतक की भित्ति को दृढ़ करता है और सूक्ष्मजीव भित्ति का पदार्थ नहीं है। विषाणु में भित्ति होती ही नहीं, क्योंकि वह कोशिका नहीं है।
निम्नलिखित में से कौन सा रोग विषाणु से होता है?
- A.क्षय रोग
- B.खसरा
- C.टाइफाइड
- D.हैजा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, खसरा है, जो बूंदों से फैलने वाला विषाणु रोग है, इसीलिए इसकी रोकथाम टीकाकरण से होती है और प्रतिजैविकों से नहीं। विकल्प A गलत है क्योंकि क्षय रोग का कारण जीवाणु माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस है, जिसे रॉबर्ट कोख ने पहचाना, और इसका उपचार प्रतिजैविकों के लंबे कोर्स से होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि टाइफाइड का कारण जीवाणु सालमोनेला टाइफी है और यह दूषित भोजन तथा जल से फैलता है। विकल्प D गलत है क्योंकि हैजे का कारण जीवाणु विब्रियो कॉलेरी है और वह भी दूषित जल से फैलता है। साथ याद रखने योग्य अन्य विषाणु रोग हैं इन्फ्लुएंजा, सामान्य जुकाम, कनफेड़, छोटी माता, चेचक, पोलियो, रेबीज, हेपेटाइटिस, डेंगू तथा उपार्जित प्रतिरक्षा अभाव सिंड्रोम। ऐसे प्रश्न में सरल परीक्षण यह है कि उपचार टीका है या प्रतिजैविक: टीका विषाणु की ओर संकेत करता है और प्रतिजैविकों का कोर्स जीवाणु की ओर।
दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथिकाओं में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कौन करता है?
- A.राइजोबियम
- B.नाइट्रोबैक्टर
- C.स्यूडोमोनास
- D.सैकरोमाइसीज
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, राइजोबियम है। यह चना, मटर, मूंगफली तथा अन्य दलहनों की जड़ों की ग्रंथिकाओं में सहजीवी रूप में रहता है और वायुमंडलीय नाइट्रोजन को उन यौगिकों में बदलता है जिन्हें पौधा अवशोषित कर सकता है, और बदले में पौधे से भोजन लेता है। विकल्प B गलत है क्योंकि नाइट्रोबैक्टर नाइट्रोजन स्थिरीकरण नहीं करता, वह नाइट्रीकरण का दूसरा चरण करता है और नाइट्राइट का ऑक्सीकरण कर नाइट्रेट बनाता है, जबकि नाइट्रोसोमोनास पहले अमोनिया से नाइट्राइट बनाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि स्यूडोमोनास विनाइट्रीकरण करता है और मिट्टी की नाइट्रोजन वायुमंडल में लौटाता है, जो स्थिरीकरण का उलटा है। विकल्प D गलत है क्योंकि सैकरोमाइसीज बेकिंग और मदिरा निर्माण में प्रयुक्त यीस्ट है। एजोटोबैक्टर मिट्टी में स्वतंत्र रहकर तथा नॉस्टॉक और एनाबीना जल में स्थिरीकरण करते हैं।
कवक की कोशिका भित्ति किससे बनी होती है?
- A.पेप्टिडोग्लाइकन
- B.काइटिन
- C.केवल सेल्यूलोज
- D.केवल प्रोटीन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, काइटिन है। कवक यूकैरियोट हैं, उनमें वास्तविक केंद्रक होता है, और उनकी भित्ति काइटिन से बनी होती है, वही दृढ़ बहुशर्करा जो कीटों तथा क्रस्टेशियनों का बाह्य कंकाल बनाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि पेप्टिडोग्लाइकन जीवाणु भित्ति का पदार्थ है, और कवक के लिए काइटिन तथा जीवाणु के लिए पेप्टिडोग्लाइकन याद रखना प्रश्नों के पूरे समूह का उत्तर दे देता है। विकल्प C गलत है क्योंकि सेल्यूलोज पादप कोशिका भित्ति की विशेषता है, यद्यपि जल कवकों में वह पाया जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि केवल प्रोटीन से कोई कोशिका भित्ति नहीं बनती; भित्ति में प्रोटीन रहते हैं, परंतु दृढ़ता बहुशर्करा से आती है। कवक परपोषी होते हैं, मृतजीवी, परजीवी अथवा सहजीवी, अपना भोजन कभी नहीं बनाते। इनमें यीस्ट अपवाद है, जो एक कोशिकीय कवक है, और कुकुरमुत्ता, मोल्ड तथा मिल्ड्यू वे रूप हैं जिनसे विद्यार्थी का परिचय सबसे अधिक होता है।
रोटी बनाने में गूँथा आटा फूलने का कारण क्या है?
- A.लैक्टिक अम्ल बनाने वाले जीवाणु
- B.कार्बन डाइऑक्साइड बनाने वाला यीस्ट
- C.आटे में गुणन करने वाला विषाणु
- D.स्टार्च खाने वाले प्रोटोजोआ
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, कार्बन डाइऑक्साइड बनाने वाला यीस्ट है। यीस्ट सैकरोमाइसीज सेरेविसी आटे की शर्करा का किण्वन कर एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है, और ग्लूटेन में फँसी यह गैस आटे को फुला देती है तथा रोटी छिद्रयुक्त बनाती है; एल्कोहॉल पकाने के समय उड़ जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि लैक्टिक अम्ल जीवाणु दूध को दही बनाते हैं और इडली तथा डोसा के घोल को खट्टा करते हैं, परंतु गैस में उनकी भूमिका यीस्ट से कम रहती है। विकल्प C गलत है क्योंकि विषाणु जीवित पोषी कोशिका के बाहर गुणन ही नहीं कर सकता और आटे में उसकी कोई भूमिका नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि बेकिंग में प्रोटोजोआ का उपयोग नहीं होता। यीस्ट का यही किण्वन आगे बढ़कर मादक पेय और औद्योगिक एथेनॉल देता है।
मनुष्य में क्षय रोग का कारण क्या है?
- A.एक विषाणु
- B.जीवाणु माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस
- C.एस्परजिलस वंश का कवक
- D.प्रोटोजोआ एंटअमीबा हिस्टोलिटिका
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, जीवाणु माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस है, जिसे रॉबर्ट कोख ने 1882 में पहचाना, इसीलिए इसे कोख का दंडाणु भी कहा जाता है। यह वायु की बूंदों से फैलता है, मुख्यतः फेफड़ों पर आक्रमण करता है और इसका उपचार कई प्रतिजैविकों के लंबे तथा अखंडित कोर्स से होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि क्षय रोग जीवाणु जनित है; उसे विषाणु रोग मानने की भूल से परीक्षार्थी प्रतिजैविकों को अनुपयुक्त मान लेते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि एस्परजिलस दुर्बल प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों में फेफड़े के अन्य रोग करता है तथा उद्योग में सिट्रिक अम्ल के लिए प्रयुक्त होता है, परंतु क्षय रोग नहीं करता। विकल्प D गलत है क्योंकि एंटअमीबा हिस्टोलिटिका अमीबीय अतिसार करता है, जो दूषित भोजन और जल से फैलने वाला आंत्र रोग है। कुष्ठ रोग इसी वंश की जाति माइकोबैक्टीरियम लेप्री से होता है।
विषाणुओं को सजीव और निर्जीव की सीमा पर मुख्यतः किस कारण कहा जाता है?
- A.वे जीवाणुओं से छोटे होते हैं
- B.वे केवल जीवित पोषी कोशिका के भीतर गुणन कर सकते हैं और बाहर निष्क्रिय रहते हैं
- C.उनमें डीएनए और आरएनए दोनों होते हैं
- D.उन्हें प्रतिजैविकों से मारा जा सकता है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। विषाणु में आनुवंशिकता है और वह सजीव की तरह उत्परिवर्तित भी होता है, फिर भी उसके पास अपनी कोशिका, अपना उपापचय और प्रजनन का अपना साधन नहीं है; पोषी के बाहर वह निष्क्रिय कण है, जिसे क्रिस्टलित भी किया जा सकता है, जैसा डब्ल्यू. एम. स्टेनली ने 1935 में तंबाकू मोजैक विषाणु के साथ दिखाया, और पोषी कोशिका के भीतर वह उसी कोशिका से अपनी प्रतियां बनवाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि केवल छोटा आकार सजीवता के विषय में कुछ नहीं कहता; अनेक जीवाणु अत्यंत छोटे हैं और पूर्णतः सजीव हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि विषाणु में डीएनए अथवा आरएनए में से एक ही होता है, दोनों कभी नहीं, और यह परीक्षकों का प्रिय बिंदु है। विकल्प D गलत है क्योंकि प्रतिजैविक जीवाणु संरचनाओं पर कार्य करते हैं और विषाणुओं पर व्यर्थ हैं।
दूध के पाश्चुरीकरण में दूध को लगभग कितने ताप पर कितनी देर रखा जाता है?
- A.40 डिग्री सेल्सियस पर पाँच मिनट
- B.70 डिग्री सेल्सियस पर 15 से 30 सेकंड
- C.100 डिग्री सेल्सियस पर दस मिनट
- D.121 डिग्री सेल्सियस पर बीस मिनट
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 70 डिग्री सेल्सियस पर 15 से 30 सेकंड है, जिसके बाद दूध तुरंत ठंडा कर भंडारित किया जाता है। यह कम समय का तेज तापन रोगकारक तथा अधिकांश खराबी करने वाले सूक्ष्मजीवों को मार देता है, जबकि दूध का स्वाद और अधिकांश पोषक मान बना रहता है, जो उबालने से नहीं होता। विकल्प A गलत है क्योंकि चालीस डिग्री वह ताप है जिसके आस-पास सूक्ष्मजीव सबसे अच्छी वृद्धि करते हैं, इसलिए उससे कुछ परिरक्षित नहीं होगा। विकल्प C गलत है क्योंकि सौ डिग्री पर दस मिनट सामान्य उबालना है, जिससे स्वाद बदलता है और कुछ विटामिन नष्ट होते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि दाब में एक सौ इक्कीस डिग्री पर बीस मिनट ऑटोक्लेविंग है, जो उपकरण और संवर्धन माध्यम निर्जर्मीकरण के लिए है, दूध के लिए नहीं। यह विधि लुई पाश्चर के नाम पर है।
सिट्रिक अम्ल का औद्योगिक उत्पादन किस सूक्ष्मजीव की सहायता से होता है?
- A.एस्परजिलस नाइजर
- B.लैक्टोबैसिलस बल्गैरिकस
- C.क्लॉस्ट्रिडियम टिटेनी
- D.एनाबीना
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, एस्परजिलस नाइजर है, जो शर्करा माध्यम पर उगाया जाने वाला कवक है और विश्व का अधिकांश सिट्रिक अम्ल इसी से बनता है, जिसका उपयोग शीतल पेय, खाद्य पदार्थ और औषधियों में होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि लैक्टोबैसिलस जातियां लैक्टिक अम्ल बनाती हैं और दही तथा अन्य किण्वित दुग्ध उत्पादों में प्रयुक्त होती हैं, सिट्रिक अम्ल में नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि क्लॉस्ट्रिडियम टिटेनी टिटनेस का जीवाणु है, जो अवायुजीवी है और घाव से प्रवेश करता है; वह रोगकारक है, औद्योगिक जीव नहीं, यद्यपि इसी वंश की एक जाति से ब्यूटिरिक अम्ल मिलता है। विकल्प D गलत है क्योंकि एनाबीना नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला नील हरित जीवाणु है, जो जल फर्न एजोला के साथ धान के खेतों में जैव उर्वरक के रूप में प्रयुक्त होता है। याद रखने योग्य अन्य औद्योगिक जोड़े हैं एथेनॉल के लिए सैकरोमाइसीज और स्टेटिन के लिए मोनास्कस परप्यूरियस।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विषाणु को सजीव और निर्जीव की सीमा पर क्यों कहा जाता है?
पोषी के बाहर विषाणु में जीवन का कोई लक्षण नहीं दिखता: वह श्वसन, वृद्धि या प्रजनन नहीं करता और किसी रसायन की तरह क्रिस्टलित भी किया जा सकता है। जीवित कोशिका के भीतर वह उस कोशिका की मशीनरी अपने अधिकार में लेकर अपने न्यूक्लिक अम्ल और प्रोटीन आवरण की प्रतियां बनाता है और किसी भी सजीव की तरह गुणन करता है। उसमें आनुवंशिकता और उत्परिवर्तन है, परंतु अपना उपापचय और अपनी कोशिका नहीं, इसलिए उसे दोनों के बीच रखा जाता है।
विषाणु रोगों पर प्रतिजैविक क्यों काम नहीं करते?
प्रतिजैविक उन संरचनाओं और प्रक्रियाओं पर प्रहार करते हैं जो जीवाणुओं में होती हैं और विषाणुओं में नहीं, जैसे पेप्टिडोग्लाइकन की कोशिका भित्ति, जीवाणु राइबोसोम और जीवाणु एंजाइम। विषाणु में कोशिका भित्ति नहीं होती और अपना उपापचय भी नहीं, इसलिए औषधि के लिए कोई लक्ष्य ही नहीं रहता। विषाणु रोग टीकों से रोके जाते हैं और प्रतिविषाणु औषधियों से उपचारित होते हैं, तथा जुकाम में प्रतिजैविक लेने से केवल प्रतिरोधी जीवाणु बढ़ते हैं।
राइजोबियम किसान के किस काम आता है?
राइजोबियम चना, मटर, मूंगफली और सेम जैसे दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथिकाओं में रहता है और वायु की नाइट्रोजन को उन यौगिकों में बदलता है जिन्हें पौधा ले सकता है, बदले में पौधे से भोजन पाता है। इससे खेत की नाइट्रोजन घटने के स्थान पर बढ़ती है, इसीलिए अनाज के साथ फसल चक्र में दलहन बोई जाती है और राइजोबियम जैव उर्वरक के रूप में बेचा जाता है।
जीवाणु और कवक में क्या अंतर है?
जीवाणु प्रोकैरियोट हैं: एक कोशिका, जिसमें झिल्लीबद्ध केंद्रक नहीं होता और भित्ति पेप्टिडोग्लाइकन की होती है, तथा गुणन द्विविभाजन से होता है। कवक यूकैरियोट हैं, जिनमें वास्तविक केंद्रक होता है और भित्ति काइटिन की, जो सामान्यतः कवक तंतुओं से बने कवक जाल के रूप में रहते हैं और बीजाणुओं से प्रजनन करते हैं; यीस्ट एक कोशिकीय अपवाद है। दोनों मुख्यतः परपोषी हैं, परंतु भित्ति का पदार्थ और केंद्रक ही वे अंतर हैं जो परीक्षक पूछता है।
दूध के पाश्चुरीकरण में क्या होता है?
दूध को लगभग सत्तर डिग्री सेल्सियस तक गर्म कर पंद्रह से तीस सेकंड उसी ताप पर रखा जाता है, फिर तुरंत ठंडा कर भंडारित किया जाता है। यह कम समय का तेज तापन रोगकारक तथा अधिकांश खराबी करने वाले सूक्ष्मजीवों को मार देता है और दूध उबालना नहीं पड़ता, इसलिए स्वाद और पोषक मान बना रहता है। यह विधि लुई पाश्चर के नाम पर है, जिन्होंने मदिरा के खराब होने के अध्ययन के समय इसे निकाला।
स्रोत
- विज्ञान (कक्षा 8), सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु अध्याय — एनसीईआरटी
- जीव विज्ञान (कक्षा 11), जैव वर्गीकरण अध्याय — एनसीईआरटी
- जीव विज्ञान (कक्षा 12), मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव अध्याय — एनसीईआरटी





