रक्त समूह, प्रतिरक्षा और टीके: परीक्षा नोट्स
रक्त समूह, प्रतिरक्षा और टीकों के संपूर्ण नोट्स: एबीओ तथा आरएच तंत्र, दाता नियम, थक्का जमना, प्रतिरक्षी, टीकों के प्रकार और टीकाकरण कार्यक्रम।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है जो ऑक्सीजन, भोजन, हार्मोन, ऊष्मा और अपशिष्ट ढोता है और शरीर की रक्षा प्रणाली भी ढोता है। इसका लगभग पचपन प्रतिशत प्लाज्मा है, जो हल्के पीले रंग का तरल है और लगभग नब्बे प्रतिशत जल तथा उसमें घुले एल्बुमिन, ग्लोबुलिन और फाइब्रिनोजन जैसे प्रोटीन से बना है, और शेष लगभग पैंतालीस प्रतिशत रचित अंग हैं, अर्थात लाल रक्त कणिकाएं, श्वेत रक्त कणिकाएं तथा प्लेटलेट्स। यह नोट उस विषय के तीन भाग समेटता है जिन्हें परीक्षक एक साथ पूछते हैं: रक्त समूह, शरीर की रक्षा प्रणाली और वे टीके जो इस प्रणाली को प्रशिक्षित करते हैं।
रक्त की कोशिकाएं
| कोशिका | याद रखने योग्य तथ्य |
|---|---|
| लाल रक्त कणिका | हीमोग्लोबिन ढोती है, स्तनधारियों में इसमें केंद्रक नहीं होता, आयु लगभग 120 दिन, निर्माण अस्थि मज्जा में और विनाश प्लीहा में, जिसे लाल कणिकाओं का कब्रिस्तान कहा जाता है |
| श्वेत रक्त कणिका | प्रति घन मिलीमीटर लगभग पांच से ग्यारह हजार; न्यूट्रोफिल सर्वाधिक और भक्षी होते हैं, उसके बाद लसीकाणु विशिष्ट रक्षा चलाते हैं |
| प्लेटलेट | सबसे छोटी, केंद्रकहीन, घाव पर रक्त का थक्का जमना आरंभ करती है |
थक्का जमना अभिक्रियाओं की श्रृंखला है। प्लेटलेट्स थ्रोम्बोप्लास्टिन छोड़ती हैं, जो कैल्सियम आयनों के साथ प्रोथ्रोम्बिन को थ्रोम्बिन में बदलता है, और थ्रोम्बिन प्लाज्मा के घुलनशील प्रोटीन फाइब्रिनोजन को फाइब्रिन के अघुलनशील तंतुओं में बदल देता है, जो कोशिकाओं को फंसाकर घाव बंद कर देते हैं। यकृत को प्रोथ्रोम्बिन बनाने के लिए विटामिन के चाहिए, इसलिए उसकी कमी से थक्का देर से जमता है। शरीर में बनने वाला हिपैरिन प्राकृतिक प्रतिस्कंदक है, और रक्त बैंक संचित रक्त को सिट्रेट से तरल रखते हैं। हीमोफीलिया, जिसमें थक्का नहीं जमता, एक्स गुणसूत्र पर चलने वाला लिंग सहलग्न अप्रभावी रोग है।
एबीओ और आरएच रक्त समूह
कार्ल लैंडस्टीनर ने 1900 में एबीओ तंत्र की खोज की और 1930 में उसके लिए नोबेल पुरस्कार पाया; उनके जन्मदिन 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। समूह इस पर निर्भर करता है कि लाल कणिका पर कौन सा प्रतिजन है और प्लाज्मा में कौन सा प्रतिरक्षी।
| समूह | कणिका पर प्रतिजन | प्लाज्मा में प्रतिरक्षी | किसे दे सकता है |
|---|---|---|---|
| ए | ए | एंटी बी | ए तथा एबी |
| बी | बी | एंटी ए | बी तथा एबी |
| एबी | ए और बी | कोई नहीं | केवल एबी, इसलिए यह सर्वग्राही है |
| ओ | कोई नहीं | एंटी ए और एंटी बी | सभी समूहों को, इसलिए यह सर्वदाता है |
आरएच कारक, जिसे लैंडस्टीनर और वीनर ने 1940 में रीसस बंदर में खोजा, एक अलग प्रतिजन है, अर्थात डी प्रतिजन। जिस व्यक्ति में यह होता है वह आरएच धनात्मक और जिसमें नहीं वह आरएच ऋणात्मक कहलाता है। यदि आरएच ऋणात्मक माता आरएच धनात्मक शिशु धारण करती है, तो उसके रक्त में बने प्रतिरक्षी अगले शिशु की लाल कणिकाओं पर आघात कर सकते हैं, जिसे एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटैलिस कहा जाता है और जिसे माता को एंटी डी इम्यूनोग्लोबुलिन देकर रोका जाता है। दुर्लभ बॉम्बे रक्त समूह, जिसमें एच प्रतिजन भी नहीं होता, 1952 में मुंबई में खोजा गया।
सहज और उपार्जित प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षा दो प्रकार की होती है। सहज या अविशिष्ट प्रतिरक्षा जन्म से रहती है और सब पर समान रूप से कार्य करती है: अखंडित त्वचा, श्वास मार्ग का श्लेष्म, पेट का हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, आंसू तथा लार का लाइसोजाइम, भक्षी श्वेत कणिकाएं, प्रदाह अनुक्रिया और विषाणु संक्रमित कोशिकाओं से निकलने वाले इंटरफेरॉन। उपार्जित या विशिष्ट प्रतिरक्षा किसी विशेष रोगाणु के विरुद्ध बनती है और उसे स्मरण रखती है। इसकी दो शाखाएं हैं: तरल प्रतिरक्षा, जिसमें बी लसीकाणु प्लाज्मा कोशिका बनकर प्रतिरक्षी छोड़ते हैं, और कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा, जिसमें टी लसीकाणु संक्रमित कोशिकाओं को मारते और अनुक्रिया का नियमन करते हैं। प्राथमिक लसीका अंग, जहां लसीकाणु बनते और परिपक्व होते हैं, अस्थि मज्जा तथा थाइमस हैं; द्वितीयक अंग, जहां वे रोगाणु से मिलते हैं, प्लीहा, लसीका ग्रंथियां, टॉन्सिल, एपेंडिक्स तथा आंत की पेयर पट्टिकाएं हैं।
उपार्जित प्रतिरक्षा सक्रिय या निष्क्रिय हो सकती है। सक्रिय प्रतिरक्षा में शरीर अपने प्रतिरक्षी स्वयं बनाता है, चाहे संक्रमण के बाद या टीके के बाद; यह बनने में समय लेती है पर लंबे समय तक रहती है क्योंकि स्मृति कोशिकाएं बची रहती हैं। निष्क्रिय प्रतिरक्षा में बने हुए प्रतिरक्षी बाहर से दिए जाते हैं, जैसे सर्पदंश या टिटनेस के प्रतिविष में, अथवा जैसे शिशु को गर्भनाल से और पहले दूध यानी कोलोस्ट्रम से मिलते हैं; रक्षा तुरंत मिलती है पर थोड़े समय की होती है। प्रतिरक्षी वे प्रोटीन हैं जिन्हें इम्यूनोग्लोबुलिन कहा जाता है, और प्रत्येक चार पॉलीपेप्टाइड शृंखलाओं से बना होता है, दो भारी और दो हल्की। आईजीजी रक्त में सबसे अधिक है और एकमात्र वर्ग है जो गर्भनाल पार करता है, आईजीए दूध तथा स्रावों में रहता है, आईजीएम सबसे बड़ा है और संक्रमण में पहले आता है, आईजीई एलर्जी से जुड़ा है और आईजीडी बी कोशिका की सतह पर रहता है।
टीके
एडवर्ड जेनर ने 1796 में दिखाया कि गोशीतला के द्रव्य से चेचक से रक्षा होती है, इसीलिए उन्हें प्रतिरक्षा विज्ञान का जनक कहा जाता है और वैक्सीन शब्द लैटिन के वाक्का यानी गाय से बना है। लुई पाश्चर ने आगे बढ़कर दुर्बल किए गए रोगाणुओं को टीके के रूप में तैयार किया और 1885 में रेबीज का टीका बनाया। टीका इस प्रकार कार्य करता है कि वह प्रतिरक्षा तंत्र को रोगाणु का हानिरहित रूप या उसका एक भाग दिखा देता है, जिससे वास्तविक संक्रमण आने से पहले स्मृति कोशिकाएं तैयार हो जाती हैं।
| प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| जीवित दुर्बलीकृत, अर्थात कमजोर किया गया रोगाणु | क्षय रोग के विरुद्ध बीसीजी, मुख से दिया जाने वाला पोलियो टीका, खसरा तथा रूबेला |
| मृत या निष्क्रियित | इंजेक्शन से दिया जाने वाला पोलियो टीका, रेबीज का टीका |
| टॉक्सॉइड, अर्थात निष्क्रियित विष | टिटनेस तथा डिप्थीरिया |
| उप इकाई या संयुग्मी, रोगाणु का एक भाग | हेपेटाइटिस बी, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी, न्यूमोकोकल |
भारत का सार्वत्रिक टीकाकरण कार्यक्रम, जो 1978 के विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम से 1985 में विकसित हुआ, ये टीके निःशुल्क देता है, और 2014 का मिशन इंद्रधनुष छूट गए बच्चों तक पहुंचने के लिए आरंभ किया गया। अधिकांश टीकों को दो से आठ डिग्री सेल्सियस के बीच रखना पड़ता है, और शीत शृंखला का अर्थ यही है। चेचक को 1980 में विश्व से उन्मूलित घोषित किया गया, और दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र को, उसके साथ भारत को, 2014 में पोलियो मुक्त प्रमाणित किया गया। जब जनसंख्या का पर्याप्त भाग प्रतिरक्षित हो जाता है तो रोगाणु को पोषकों की श्रृंखला नहीं मिलती और बिना टीका लगे लोग भी सुरक्षित रहते हैं; इसे सामुदायिक प्रतिरक्षा कहा जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
निश्चित जोड़ियां हर वर्ष पूछी जाती हैं: लैंडस्टीनर के साथ एबीओ समूह और 1900, सर्वदाता के रूप में ओ तथा सर्वग्राही के रूप में एबी, आरएच कारक के साथ रीसस बंदर, थक्का जमने के साथ विटामिन के, चेचक के साथ जेनर और रेबीज के साथ पाश्चर, तथा क्षय रोग के साथ बीसीजी। दूसरा समूह निकट पदों का अंतर पूछता है, सहज और उपार्जित प्रतिरक्षा, सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा, तथा तरल और कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा, जहां विकल्प में दी गई कोशिका उत्तर तय करती है, प्रतिरक्षी के लिए बी लसीकाणु और संक्रमित कोशिका मारने के लिए टी लसीकाणु। तीसरा समूह किसी टीके का प्रकार पूछता है, जहां टिटनेस के लिए टॉक्सॉइड तथा बीसीजी और मुख पोलियो के लिए जीवित दुर्बलीकृत उत्तर बनते हैं, और शीत शृंखला की सीमा दो से आठ डिग्री सेल्सियस।
महत्वपूर्ण तथ्य
| एबीओ समूहों के अन्वेषक | कार्ल लैंडस्टीनर, 1900, नोबेल पुरस्कार 1930 |
|---|---|
| सर्वदाता | समूह ओ, जिसकी लाल कणिका पर कोई प्रतिजन नहीं होता |
| सर्वग्राही | समूह एबी, जिसके प्लाज्मा में कोई प्रतिरक्षी नहीं होता |
| आरएच कारक | डी प्रतिजन, 1940 में लैंडस्टीनर और वीनर द्वारा रीसस बंदर में खोजा गया |
| थक्का जमने का विटामिन | विटामिन के, जिसकी यकृत को प्रोथ्रोम्बिन बनाने के लिए आवश्यकता होती है |
| प्राकृतिक प्रतिस्कंदक | हिपैरिन |
| प्राथमिक लसीका अंग | अस्थि मज्जा और थाइमस |
| गर्भनाल पार करने वाला प्रतिरक्षी | आईजीजी, जो रक्त में सबसे अधिक भी है |
| चेचक का टीका | एडवर्ड जेनर, 1796, गोशीतला से |
| रेबीज का टीका | लुई पाश्चर, 1885 |
| बीसीजी | बैसिलस कैल्मेट गुएरिन, क्षय रोग के विरुद्ध जीवित दुर्बलीकृत टीका |
| शीत शृंखला | अधिकांश टीकों के लिए दो से आठ डिग्री सेल्सियस |
| विश्व रक्तदाता दिवस | 14 जून |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
रक्त समूहों के एबीओ तंत्र की खोज किसने की?
- A.कार्ल लैंडस्टीनर
- B.विलियम हार्वे
- C.एडवर्ड जेनर
- D.अलेक्जेंडर फ्लेमिंग
उत्तर देखें
सही उत्तर A, कार्ल लैंडस्टीनर है, वे ऑस्ट्रियाई चिकित्सक जिन्होंने 1900 में पाया कि मानव रक्त लाल कणिकाओं पर उपस्थित प्रतिजनों के अनुसार समूहों में बंटा है, जिससे सुरक्षित रक्ताधान संभव हुआ, और जिन्हें इसके लिए 1930 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिला; वीनर के साथ उन्होंने 1940 में आरएच…
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस रक्त समूह को सर्वदाता कहा जाता है?
- A.ए
- B.बी
- C.एबी
- D.ओ
उत्तर देखें
समूह ओ की लाल कणिकाओं पर न ए प्रतिजन होता है न बी प्रतिजन, इसलिए जब उन्हें चढ़ाया जाता है तो ग्रहीता के प्लाज्मा के प्रतिरक्षी को बंधने के लिए कुछ नहीं मिलता और कणिकाएं नष्ट नहीं होतीं, इसी कारण आपात स्थिति में समूह ओ, और कड़े अर्थ में ओ…
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस रक्त समूह के व्यक्ति के प्लाज्मा में कोई प्रतिरक्षी नहीं होता और इसलिए वह सर्वग्राही होता है?
- A.ओ
- B.ए
- C.बी
- D.एबी
उत्तर देखें
एबी समूह के व्यक्ति की लाल कणिकाओं पर ए तथा बी दोनों प्रतिजन होते हैं, और चूंकि शरीर अपने ही प्रतिजनों के विरुद्ध प्रतिरक्षी नहीं बनाता, उसके प्लाज्मा में न एंटी ए होता है न एंटी बी; इसलिए ऐसे व्यक्ति में किसी भी समूह का रक्त चढ़ाया जा सकता है…
पूरी व्याख्या पढ़ें →मानव रक्त का आरएच कारक किसके नाम पर रखा गया है?
- A.रीसस बंदर
- B.खरगोश
- C.यूरोप की एक नदी
- D.वैज्ञानिक आरएच. वेबर
उत्तर देखें
लैंडस्टीनर और वीनर ने 1940 में रीसस बंदर के रक्त पर कार्य करते हुए यह प्रतिजन पाया, और रीसस के पहले दो अक्षरों से कारक का नाम बना; जिसकी लाल कणिकाओं पर डी प्रतिजन होता है वह आरएच धनात्मक और जिसमें नहीं होता वह आरएच ऋणात्मक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →रक्त का थक्का जमने के लिए कौन-सा विटामिन आवश्यक है?
- A.विटामिन ए
- B.विटामिन सी
- C.विटामिन डी
- D.विटामिन के
उत्तर देखें
यकृत को प्रोथ्रोम्बिन तथा कई अन्य स्कंदन कारक बनाने के लिए विटामिन के चाहिए, इसलिए इसकी कमी से थक्का जमने का समय बढ़ जाता है और रक्तस्राव होता है; इसी कारण नवजात शिशु को विटामिन के दिया जाता है और इसे रक्तस्राव रोधी विटामिन भी कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एडवर्ड जेनर किस रोग का टीका विकसित करने के लिए स्मरण किए जाते हैं?
- A.रेबीज
- B.चेचक
- C.क्षय रोग
- D.पोलियो
उत्तर देखें
वर्ष 1796 में एडवर्ड जेनर ने गोशीतला के फोड़े के द्रव्य से एक बालक को चेचक से सुरक्षित किया, जो आधुनिक अर्थ में पहला टीकाकरण था, और वैक्सीन शब्द लैटिन के वाक्का यानी गाय से आया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बीसीजी टीका किस रोग से रक्षा देता है?
- A.क्षय रोग
- B.टिटनेस
- C.टाइफाइड
- D.खसरा
उत्तर देखें
बीसीजी का अर्थ बैसिलस कैल्मेट गुएरिन है, जो गोजातीय क्षय जीवाणु का जीवित पर दुर्बल किया गया प्रभेद है, और भारत में इसे सार्वत्रिक टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत जन्म के तुरंत बाद दिया जाता है, मुख्यतः बाल्यकाल के गंभीर क्षय रोग को रोकने के लिए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मानव शरीर में प्रतिरक्षी किनके द्वारा बनाए जाते हैं?
- A.लाल रक्त कणिकाएं
- B.प्लेटलेट्स
- C.बी लसीकाणु
- D.न्यूट्रोफिल
उत्तर देखें
किसी प्रतिजन से मिलने पर बी लसीकाणु विभाजित होकर प्लाज्मा कोशिका बन जाता है, जो रक्त में प्रतिरक्षी यानी इम्यूनोग्लोबुलिन छोड़ता है; रक्षा की इस शाखा को तरल प्रतिरक्षा कहा जाता है, जबकि टी लसीकाणु संक्रमित कोशिकाओं को मारते और कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा में अनुक्रिया का नियमन करते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नवजात शिशु को माता के दूध से मिलने वाली प्रतिरक्षा किसका उदाहरण है?
- A.सक्रिय प्राकृतिक प्रतिरक्षा
- B.निष्क्रिय प्राकृतिक प्रतिरक्षा
- C.सक्रिय कृत्रिम प्रतिरक्षा
- D.सहज प्रतिरक्षा
उत्तर देखें
प्रतिरक्षी, मुख्यतः आईजीए वर्ग के, पहले दूध यानी कोलोस्ट्रम में बने हुए रूप में आते हैं और शिशु का अपना प्रतिरक्षा तंत्र कोई कार्य नहीं करता, इसी कारण रक्षा तुरंत आरंभ होती है और कुछ महीने ही चलती है; आईजीजी वर्ग के प्रतिरक्षी इसी प्रकार गर्भनाल से भ्रूण तक पहुंचते…
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन जीवित दुर्बलीकृत टीका है?
- A.टिटनेस टॉक्सॉइड
- B.मुख से दिया जाने वाला पोलियो टीका
- C.रेबीज टीका
- D.हेपेटाइटिस बी टीका
उत्तर देखें
सही उत्तर B, मुख से दिया जाने वाला पोलियो टीका है, जिसमें जीवित पोलियो विषाणु इतना दुर्बल किया जाता है कि वह आंत में बढ़कर प्रतिरक्षा उत्पन्न करे पर रोग न करे; पल्स पोलियो अभियान में यही दो बूंद के रूप में दिया जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी जोड़ी मानव शरीर के प्राथमिक लसीका अंग हैं?
- A.प्लीहा और लसीका ग्रंथियां
- B.टॉन्सिल और एपेंडिक्स
- C.अस्थि मज्जा और थाइमस
- D.यकृत और अग्न्याशय
उत्तर देखें
ये वे अंग हैं जिनमें लसीकाणु बनते हैं और जिनमें वे परिपक्व होकर स्व तथा पर में भेद करने योग्य बनते हैं; बी कोशिकाएं यह प्रशिक्षण अस्थि मज्जा में और टी कोशिकाएं थाइमस में पूरा करती हैं, जो उरोस्थि के पीछे की ग्रंथि है और आयु के साथ सिकुड़ती जाती…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
समूह ओ को सर्वदाता क्यों कहा जाता है?
क्योंकि समूह ओ की लाल कणिकाओं पर न ए प्रतिजन होता है न बी, इसलिए ग्रहीता के प्लाज्मा के प्रतिरक्षी को आघात करने के लिए कुछ नहीं मिलता। इसी कारण समूह एबी, जिसके प्लाज्मा में कोई प्रतिरक्षी नहीं है, सर्वग्राही कहलाता है।
सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा में क्या अंतर है?
सक्रिय प्रतिरक्षा में शरीर संक्रमण या टीके के बाद अपने प्रतिरक्षी स्वयं बनाता है, जिसमें समय लगता है पर स्मृति कोशिकाओं के कारण वह लंबी चलती है। निष्क्रिय प्रतिरक्षा में बने हुए प्रतिरक्षी दिए जाते हैं, जैसे प्रतिविष या कोलोस्ट्रम में, इसलिए रक्षा तुरंत पर अल्पकालिक होती है।
रक्त का थक्का जमने के लिए कौन-सा विटामिन आवश्यक है?
विटामिन के, क्योंकि यकृत को प्रोथ्रोम्बिन तथा अन्य स्कंदन कारक बनाने के लिए इसकी आवश्यकता होती है। कैल्सियम आयन भी आवश्यक हैं। विटामिन के की कमी से रक्त का थक्का जमने में अधिक समय लगता है।
बीसीजी किस रोग से रक्षा करता है?
क्षय रोग से। बीसीजी का अर्थ बैसिलस कैल्मेट गुएरिन है, जो गोजातीय क्षय जीवाणु के दुर्बल किए गए प्रभेद से बना जीवित टीका है, और सार्वत्रिक टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत जन्म के तुरंत बाद दिया जाता है।
टीकों के लिए शीत शृंखला क्यों आवश्यक है?
क्योंकि अधिकांश टीके गरम होने या जमने पर अपनी क्षमता खो देते हैं, इसलिए उन्हें कारखाने से स्वास्थ्य केंद्र तक रोधी वाहकों, बर्फ आस्तरित रेफ्रिजरेटरों और शीत बक्सों के माध्यम से दो से आठ डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाता है।
सामुदायिक प्रतिरक्षा क्या है?
जब जनसंख्या का पर्याप्त बड़ा भाग संक्रमण या टीकाकरण से प्रतिरक्षित हो जाता है, तो रोगाणु को संवेदनशील पोषकों की निरंतर श्रृंखला नहीं मिलती, संचरण घट जाता है और जो प्रतिरक्षित नहीं हैं वे भी अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षित रहते हैं।
स्रोत
- जीव विज्ञान (कक्षा ग्यारह), अध्याय 18: शरीर द्रव तथा परिसंचरण — एनसीईआरटी
- जीव विज्ञान (कक्षा बारह), अध्याय 8: मानव स्वास्थ्य तथा रोग — एनसीईआरटी
- सार्वत्रिक टीकाकरण कार्यक्रम — स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार





