मानव प्रजनन और प्रजनन स्वास्थ्य: अंग और चक्र
मानव प्रजनन के पूर्ण नोट्स: प्रजनन अंग, युग्मक, मासिक चक्र, निषेचन, गर्भावस्था, गर्भनिरोध, एमटीपी अधिनियम, यौन संचारित रोग और अभ्यास प्रश्न।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

विज्ञान खंड में मानव प्रजनन सबसे भरोसेमंद अध्यायों में है, क्योंकि इसके तथ्य निश्चित हैं: कौन कोशिका कौन हार्मोन बनाती है, निषेचन कहाँ होता है, गर्भ जाँच किस हार्मोन को पकड़ती है, गर्भावधि कितनी होती है। विषय का दूसरा भाग, प्रजनन स्वास्थ्य, कानून और कार्यक्रम लाता है, जो राजव्यवस्था तथा समसामयिकी में भी पूछे जाते हैं।
नर प्रजनन तंत्र
वृषण शरीर के बाहर वृषणकोष में रहते हैं, जो उन्हें सामान्य शारीरिक ताप से लगभग दो से ढाई डिग्री सेल्सियस नीचे रखता है, और शुक्राणु निर्माण के लिए यही स्थिति आवश्यक है। प्रत्येक वृषण में कुंडलित शुक्रजनक नलिकाएँ होती हैं, जिनमें दो प्रकार की कोशिकाएँ मिलती हैं:
- सर्टोली कोशिकाएँ, जिन्हें पोषक या धात्री कोशिकाएँ भी कहते हैं, जो विकसित होते शुक्राणुओं को पोषण देती हैं।
- लेडिग या अंतराली कोशिकाएँ, जो नलिकाओं के बाहर रहती हैं और नर हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का स्रावण करती हैं।
नलिकाओं से शुक्राणु रेटे टेस्टिस, वासा एफरेंशिया, एपिडिडाइमिस, शुक्रवाहिका और स्खलन नलिका से होकर मूत्रमार्ग में आते हैं। सहायक ग्रंथियाँ शुक्राशय, पुरस्थ ग्रंथि तथा बल्बोयूरेथ्रल या काउपर ग्रंथियाँ हैं, जिनका स्राव शुक्राणुओं के साथ मिलकर वीर्य बनाता है। शुक्राणु में सिर होता है, जिस पर एंजाइम भरी एक्रोसोम टोपी होती है और जो अंड में प्रवेश में सहायक है; फिर ग्रीवा, ऊर्जा के लिए माइटोकॉन्ड्रिया से भरा मध्य भाग और गति के लिए पूँछ। एनसीईआरटी के अनुसार सामान्य स्खलन में लगभग 20 से 30 करोड़ शुक्राणु होते हैं, जिनमें सामान्य प्रजनन क्षमता के लिए कम से कम 60 प्रतिशत सामान्य आकार के और कम से कम 40 प्रतिशत तीव्र गतिशील होने चाहिए।
मादा प्रजनन तंत्र और मासिक चक्र
युग्मित अंडाशय अंड तथा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बनाते हैं। अंडवाहिनी या फैलोपियन नलिका में कीप जैसा इन्फंडिबुलम झालरों के साथ, फिर चौड़ा ऐम्पुला और सँकरा इस्थमस होता है, जो गर्भाशय में खुलता है। गर्भाशय की भित्ति की तीन परतें हैं: बाहरी परिगर्भाशय, मोटी पेशीय गर्भाशय पेशी स्तर और ग्रंथिल अंतर्गर्भाशय कला, जो मासिक स्राव में निकल जाती है। ग्रीवा से योनि जुड़ी होती है। अंडजनन भ्रूणीय अंडाशय में ही आरंभ हो जाता है, इसलिए जन्म के बाद नए अंडाणु नहीं बनते।
| प्रावस्था | 28 दिन के चक्र में दिन | क्या होता है |
|---|---|---|
| मासिक प्रावस्था | 1 से 5 | पिछले चक्र का कॉर्पस ल्यूटियम नष्ट हो जाने से अंतर्गर्भाशय कला टूटकर मासिक स्राव के रूप में निकलती है |
| पुटकीय या प्रचुरोद्भवन प्रावस्था | 6 से 13 | अग्र पीयूष से एफएसएच पुटक को पकाता है, एस्ट्रोजन बढ़ता है और अंतर्गर्भाशय कला पुनः बनती है |
| अंडोत्सर्ग | लगभग 14वाँ दिन | एलएच की तीव्र वृद्धि परिपक्व ग्राफी पुटक को फोड़कर अंड मुक्त करती है |
| ल्यूटियल या स्रावी प्रावस्था | 15 से 28 | फटा पुटक कॉर्पस ल्यूटियम बनता है, जो अंतर्रोपण के लिए अंतर्गर्भाशय कला बनाए रखने हेतु प्रोजेस्टेरोन स्रावित करता है |
चक्र यौवनारंभ में रजोदर्शन से शुरू होता है और लगभग पैंतालीस से पचास वर्ष की आयु के बीच रजोनिवृत्ति पर समाप्त होता है। पूरा क्रम हाइपोथैलेमस के जीएनआरएच से नियंत्रित होता है, जो पीयूष ग्रंथि पर कार्य करके एफएसएच और एलएच मुक्त कराता है।
निषेचन, गर्भावस्था और प्रसव
- निषेचन फैलोपियन नलिका के ऐम्पुला में होता है, गर्भाशय में नहीं; एक शुक्राणु अंड से संयुग्मित होकर द्विगुणित युग्मनज बनाता है।
- लिंग का निर्धारण शुक्राणु करता है: X गुणसूत्र वाला शुक्राणु पुत्री (XX) और Y वाला पुत्र (XY) देता है। अंड में सदैव X गुणसूत्र होता है।
- युग्मनज विभाजित होकर मोरुला और फिर ब्लास्टोसिस्ट बनाता है, जिसकी बाहरी ट्रोफोब्लास्ट परत अंतर्गर्भाशय कला से जुड़ती है; अंतर्रोपण निषेचन के लगभग एक सप्ताह बाद होता है और उससे प्लेसेंटा बनता है।
- प्लेसेंटा विनिमय का अंग भी है और अंतःस्रावी ग्रंथि भी: यह मानव कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन (एचसीजी), मानव प्लेसेंटल लैक्टोजन, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और रिलैक्सिन स्रावित करता है। मूत्र में एचसीजी ही गर्भ जाँच पकड़ती है।
- मानव गर्भावधि लगभग नौ माह, अर्थात् करीब 280 दिन या 40 सप्ताह की होती है। हृदय पहले माह में बनता है, दूसरे माह के अंत तक अंग और अंगुलियाँ, और पहली तिमाही के अंत तक अधिकांश अंग बन जाते हैं।
- प्रसव भ्रूण निष्कासन प्रतिवर्त तथा पश्च पीयूष से निकलने वाले ऑक्सीटोसिन से होता है, जो गर्भाशय पेशी में संकुचन कराता है।
- दुग्धस्रवण को प्रोलैक्टिन उद्दीपित करता है। पहला दूध कोलोस्ट्रम पतला और पीला होता है तथा प्रतिरक्षियों से भरपूर रहता है, इसलिए वह नवजात को निष्क्रिय प्रतिरक्षा देता है; यही कारण है कि आरंभिक दिनों के स्तनपान पर बल दिया जाता है।
प्रजनन स्वास्थ्य, गर्भनिरोध और कानून
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रजनन स्वास्थ्य का अर्थ प्रजनन के विषयों में पूर्ण शारीरिक, भावनात्मक, व्यवहारात्मक और सामाजिक कुशलता है। भारत ने 1952 में राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम आरंभ किया और ऐसा करने वाला विश्व का पहला देश बना; 1997 में इसे प्रजनन तथा शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के रूप में विस्तृत किया गया।
| विधि | उदाहरण और बिंदु |
|---|---|
| प्राकृतिक | कालिक संयम, वीर्य स्खलन से पूर्व निवर्तन तथा स्तनपान जनित रजोरोध; दुष्प्रभाव नहीं, परंतु विफलता की संभावना अधिक |
| अवरोधक | कंडोम, डायफ्राम, ग्रीवा टोपी; कंडोम यौन संचारित संक्रमणों से भी बचाता है |
| अंतर्गर्भाशयी युक्तियाँ | अहार्मोनी जैसे लिप्स लूप, ताम्र मुक्त करने वाली जैसे कॉपर टी, और हार्मोन मुक्त करने वाली जैसे एलएनजी-20 |
| मुखीय गोलियाँ | सहेली, केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान लखनऊ में विकसित सेंटक्रोमैन युक्त अहार्मोनी गोली, सप्ताह में एक बार ली जाती है; संयुक्त हार्मोनी गोलियाँ प्रतिदिन ली जाती हैं |
| आपातकालीन गर्भनिरोध | सहवास के लगभग बहत्तर घंटे के भीतर ली जाने वाली गोलियाँ |
| बंध्यीकरण | पुरुष में वासेक्टोमी, जिसमें शुक्रवाहिका काटी या बाँधी जाती है, और स्त्री में ट्यूबेक्टोमी, जिसमें फैलोपियन नलिका अवरुद्ध की जाती है; दोनों अंतिम उपाय हैं |
गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971, जैसा 2021 में संशोधित हुआ, बीस सप्ताह तक एक पंजीकृत चिकित्सक की राय पर, बीस से चौबीस सप्ताह के बीच कुछ श्रेणियों की महिलाओं के लिए दो चिकित्सकों की राय पर, और भ्रूण की गंभीर असामान्यता चिकित्सा बोर्ड द्वारा निदान होने पर बिना किसी ऊपरी सीमा के समापन की अनुमति देता है। गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए एम्निओसेंटेसिस जैसी तकनीकों से लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध लगाता है। यौन संचारित संक्रमणों में गोनोरिया, सिफलिस, क्लैमाइडिया और ट्राइकोमोनिएसिस शीघ्र पकड़ में आने पर ठीक हो जाते हैं, परंतु जननांगी हर्पीज, हेपेटाइटिस बी और एचआईवी संक्रमण पूर्णतः ठीक नहीं होते। बंध्य दंपतियों के लिए सहायक प्रजनन तकनीकों में भ्रूण स्थानांतरण के साथ पात्रे निषेचन अर्थात् परखनली शिशु विधि, तथा जिफ्ट, गिफ्ट, अंतर्गर्भाशयी स्थानांतरण, कोशिकाद्रव्यी शुक्राणु निक्षेपण और कृत्रिम वीर्यसेचन सम्मिलित हैं। विश्व का पहला परखनली शिशु 1978 में यूनाइटेड किंगडम में और भारत का पहला उसी वर्ष कोलकाता में जन्मा।
परीक्षा की दृष्टि से
अंक मुख्यतः तीन समूहों से आते हैं। पहला, कोशिका और हार्मोन की जोड़ियाँ: पोषण के लिए सर्टोली, टेस्टोस्टेरोन के लिए लेडिग, प्रोजेस्टेरोन के लिए कॉर्पस ल्यूटियम, एचसीजी के लिए प्लेसेंटा, तथा एफएसएच, एलएच, ऑक्सीटोसिन और प्रोलैक्टिन के लिए पीयूष ग्रंथि। दूसरा, स्थान और समय: निषेचन ऐम्पुला में, अंतर्रोपण लगभग सात दिन बाद, अंडोत्सर्ग लगभग चौदहवें दिन, गर्भावधि लगभग नौ माह या 280 दिन। तीसरा, प्रजनन स्वास्थ्य: सहेली और केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, अंतर्गर्भाशयी युक्ति के रूप में कॉपर टी, पुरुष के लिए वासेक्टोमी और स्त्री के लिए ट्यूबेक्टोमी, 1971 का एमटीपी अधिनियम तथा उसका 2021 का संशोधन और बीस एवं चौबीस सप्ताह की सीमाएँ, तथा लिंग निर्धारण के विरुद्ध 1994 का पीसीपीएनडीटी अधिनियम। जाल निश्चित हैं: निषेचन का स्थान गर्भाशय बता दिया जाता है, सर्टोली और लेडिग बदल दी जाती हैं, कॉर्पस ल्यूटियम के लिए प्रोजेस्टेरोन के स्थान पर एस्ट्रोजन रख दिया जाता है, और ठीक होने वाले संक्रमण के प्रश्न में जननांगी हर्पीज, हेपेटाइटिस बी या एचआईवी छिपा दिया जाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| वृषणकोष का ताप | शारीरिक ताप से लगभग दो से ढाई डिग्री सेल्सियस कम |
|---|---|
| सर्टोली कोशिकाएँ | विकसित होते शुक्राणुओं को पोषण; धात्री कोशिकाएँ भी कहलाती हैं |
| लेडिग कोशिकाएँ | टेस्टोस्टेरोन का स्रावण; शुक्रजनक नलिकाओं के बाहर |
| एक्रोसोम | शुक्राणु के सिर पर एंजाइम भरी टोपी, जो अंड में प्रवेश में सहायक |
| निषेचन का स्थान | फैलोपियन नलिका का ऐम्पुला |
| अंतर्रोपण | ब्लास्टोसिस्ट का, निषेचन के लगभग एक सप्ताह बाद |
| अंडोत्सर्ग | 28 दिन के चक्र के लगभग 14वें दिन, एलएच वृद्धि के बाद |
| कॉर्पस ल्यूटियम | प्रोजेस्टेरोन स्रावित करके अंतर्गर्भाशय कला बनाए रखता है |
| गर्भावस्था का हार्मोन | मानव कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन, एचसीजी, प्लेसेंटा से |
| गर्भावधि | लगभग 9 माह, करीब 280 दिन |
| प्रसव का हार्मोन | पश्च पीयूष से ऑक्सीटोसिन |
| कोलोस्ट्रम | पहला दूध, प्रतिरक्षियों से भरपूर, निष्क्रिय प्रतिरक्षा देता है |
| सहेली | सेंटक्रोमैन युक्त साप्ताहिक अहार्मोनी गोली, सीडीआरआई लखनऊ से |
| एमटीपी अधिनियम | 1971, संशोधन 2021; 20 और 24 सप्ताह की सीमाएँ, गंभीर भ्रूण असामान्यता पर सीमा नहीं |
| पीसीपीएनडीटी अधिनियम | 1994, गर्भधारण पूर्व तथा प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
मनुष्य में निषेचन सामान्यतः मादा प्रजनन तंत्र के किस भाग में होता है?
- A.गर्भाशय
- B.फैलोपियन नलिका का ऐम्पुला
- C.गर्भाशय ग्रीवा
- D.अंडाशय
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, फैलोपियन नलिका का ऐम्पुला है। अंडोत्सर्ग में मुक्त अंड को इन्फंडिबुलम की झालरें पकड़ती हैं और वह नलिका के चौड़े मध्य भाग ऐम्पुला में शुक्राणु से मिलता है, जहाँ संयुग्मन होकर युग्मनज बनता है। A गलत है क्योंकि गर्भाशय अंतर्रोपण का स्थान है, निषेचन का नहीं; ब्लास्टोसिस्ट लगभग एक सप्ताह बाद वहाँ पहुँचकर अंतर्गर्भाशय कला से जुड़ता है। C गलत है क्योंकि गर्भाशय ग्रीवा गर्भाशय की सँकरी गर्दन है, जिससे शुक्राणु ऊपर जाते हैं; वहाँ कोई संयुग्मन नहीं होता। D गलत है क्योंकि अंडाशय केवल अंड मुक्त करता है; अंडाशय में या उसके पास निषेचित अंड असामान्य अस्थानिक गर्भावस्था होगी। यही एक अंतर, नलिका में निषेचन और गर्भाशय में अंतर्रोपण, इस अध्याय का सर्वाधिक दोहराया प्रश्न है। इसी कारण नलिका में अवरोध बंध्यता का कारण बनता है और ट्यूबेक्टोमी में यही नलिका अवरुद्ध की जाती है।
मानव नर में टेस्टोस्टेरोन का स्रावण किन कोशिकाओं से होता है?
- A.सर्टोली कोशिकाएँ
- B.लेडिग या अंतराली कोशिकाएँ
- C.पुरस्थ ग्रंथि की कोशिकाएँ
- D.एपिडिडाइमिस की कोशिकाएँ
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, लेडिग या अंतराली कोशिकाएँ है, जो वृषण की शुक्रजनक नलिकाओं के बीच के स्थानों में रहती हैं और अग्र पीयूष के ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन के प्रभाव में एंड्रोजन, मुख्यतः टेस्टोस्टेरोन स्रावित करती हैं। A गलत है क्योंकि सर्टोली कोशिकाएँ नलिकाओं के भीतर रहकर विकसित होते शुक्राणुओं को पोषण देती हैं, इसी कारण उन्हें धात्री कोशिकाएँ कहते हैं; यही अदला-बदली इस विषय की सबसे आम भूल है। C गलत है क्योंकि पुरस्थ ग्रंथि सहायक ग्रंथि है, जिसका स्राव वीर्य का भाग बनता है, हार्मोन नहीं। D गलत है क्योंकि एपिडिडाइमिस कुंडलित नलिका है, जहाँ शुक्राणु संचित और परिपक्व होते हैं; वह कोई लैंगिक हार्मोन नहीं स्रावित करती। जोड़ी एक बार में याद कर लें: सर्टोली पोषण, लेडिग स्रावण। टेस्टोस्टेरोन पुरुष के गौण लैंगिक लक्षणों, जैसे स्वर का भारी होना और दाढ़ी-मूँछ का आना, के लिए उत्तरदायी है।
वृषण में सर्टोली कोशिकाओं का मुख्य कार्य क्या है?
- A.टेस्टोस्टेरोन स्रावित करना
- B.विकसित होते शुक्राणुओं को पोषण देना
- C.परिपक्व शुक्राणुओं का संचय करना
- D.वीर्य का तरल भाग बनाना
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, विकसित होते शुक्राणुओं को पोषण देना है। सर्टोली कोशिकाएँ शुक्रजनक नलिकाओं की भित्ति बनाती हैं और जनन कोशिकाओं को विभाजन तथा शुक्राणु में रूपांतरण के दौरान पोषण एवं सहारा देती हैं, इसी कारण उन्हें धात्री कोशिकाएँ कहा जाता है; इन पर मुख्य नियंत्रण पुटक उद्दीपक हार्मोन का होता है। A गलत है क्योंकि टेस्टोस्टेरोन नलिकाओं के बाहर की लेडिग या अंतराली कोशिकाओं से आता है। C गलत है क्योंकि परिपक्व शुक्राणु एपिडिडाइमिस तथा शुक्रवाहिका में संचित होते हैं, सर्टोली कोशिकाओं में नहीं। D गलत है क्योंकि वीर्य का तरल भाग सहायक ग्रंथियाँ अर्थात् शुक्राशय, पुरस्थ ग्रंथि और बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथियाँ बनाती हैं। यह भी याद रखें कि वृषणकोष वृषण को शारीरिक ताप से लगभग दो से ढाई डिग्री नीचे रखता है, जो इस प्रक्रिया के लिए आवश्यक है।
शुक्राणु के सिर में उपस्थित एक्रोसोम में क्या होता है?
- A.ऊर्जा के लिए माइटोकॉन्ड्रिया
- B.वे एंजाइम जो अंड में प्रवेश में सहायक हैं
- C.शुक्राणु की आनुवंशिक सामग्री
- D.ग्लूकोज का संचय
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, वे एंजाइम जो अंड में प्रवेश में सहायक हैं। एक्रोसोम शुक्राणु के केंद्रक पर टोपी जैसी रचना है, जिसमें भरे एंजाइम अंड के चारों ओर की परतों को गलाते हैं, जिससे एक शुक्राणु उससे संयुग्मित हो पाता है। A गलत है क्योंकि माइटोकॉन्ड्रिया शुक्राणु के मध्य भाग में भरे होते हैं और पूँछ की गति के लिए ऊर्जा देते हैं। C गलत है क्योंकि आनुवंशिक सामग्री सिर के अगुणित केंद्रक में, एक्रोसोम के नीचे रहती है, और एक्रोसोम में कोई गुणसूत्र नहीं होता। D गलत है क्योंकि शुक्राणु अपनी ऊर्जा आसपास के तरल और अपने माइटोकॉन्ड्रिया से लेता है, सिर में संचित ग्लूकोज से नहीं। शुक्राणु के तीन भाग, एक्रोसोम युक्त सिर, माइटोकॉन्ड्रिया युक्त मध्य भाग और गति की पूँछ, आरेख आधारित प्रश्नों में आते हैं।
मूत्र जाँच से गर्भावस्था की पुष्टि किस हार्मोन से होती है?
- A.एस्ट्रोजन
- B.प्रोजेस्टेरोन
- C.मानव कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन
- D.प्रोलैक्टिन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, मानव कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन है, जिसे एचसीजी लिखा जाता है। इसे अंतर्रोपित ब्लास्टोसिस्ट की ट्रोफोब्लास्ट और फिर प्लेसेंटा स्रावित करता है, यह गर्भधारण के कुछ सप्ताह में रक्त तथा मूत्र में आ जाता है और केवल गर्भावस्था में बनता है, इसलिए जाँच किट इसके विरुद्ध प्रतिरक्षी का प्रयोग करती हैं। A गलत है क्योंकि एस्ट्रोजन पूरे चक्र में और गर्भावस्था में भी स्रावित होता है, अतः वह गर्भ की पुष्टि नहीं कर सकता। B गलत है इसी कारण: प्रोजेस्टेरोन निषेचन न होने पर भी प्रत्येक चक्र की ल्यूटियल प्रावस्था में बढ़ता है। D गलत है क्योंकि अग्र पीयूष का प्रोलैक्टिन दुग्ध स्रावण का हार्मोन है, जो गर्भावस्था के अंत में तथा प्रसव के बाद बढ़ता है। प्लेसेंटा मानव प्लेसेंटल लैक्टोजन, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और रिलैक्सिन भी स्रावित करता है।
कॉर्पस ल्यूटियम से कौन-सा हार्मोन स्रावित होता है?
- A.प्रोजेस्टेरोन
- B.ऑक्सीटोसिन
- C.पुटक उद्दीपक हार्मोन
- D.थायरॉक्सिन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, प्रोजेस्टेरोन है। अंडोत्सर्ग के बाद फटा ग्राफी पुटक पीले पिंड अर्थात् कॉर्पस ल्यूटियम में बदल जाता है, जो अंतर्रोपण के लिए अंतर्गर्भाशय कला को मोटा और सुरक्षित रखने हेतु अधिक मात्रा में प्रोजेस्टेरोन स्रावित करता है। निषेचन न होने पर कॉर्पस ल्यूटियम नष्ट हो जाता है, प्रोजेस्टेरोन घटता है और अंतर्गर्भाशय कला मासिक स्राव के रूप में निकल जाती है। B गलत है क्योंकि ऑक्सीटोसिन पश्च पीयूष से आता है और प्रसव के गर्भाशय संकुचन तथा दुग्ध निष्कासन कराता है। C गलत है क्योंकि पुटक उद्दीपक हार्मोन अग्र पीयूष से स्रावित होता है और चक्र में पहले अंडाशय पर कार्य करता है। D गलत है क्योंकि थायरॉक्सिन थायरॉयड ग्रंथि का आयोडीन युक्त हार्मोन है और अंडाशयी चक्र से उसका कोई संबंध नहीं है।
सामान्य 28 दिन के मासिक चक्र में अंडोत्सर्ग किस दिन और किस हार्मोन के कारण होता है?
- A.पाँचवें दिन, प्रोजेस्टेरोन के कारण
- B.चौदहवें दिन, ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन की तीव्र वृद्धि के कारण
- C.इक्कीसवें दिन, ऑक्सीटोसिन के कारण
- D.अट्ठाईसवें दिन, प्रोलैक्टिन के कारण
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, चौदहवाँ दिन और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन की तीव्र वृद्धि है। पकते पुटक से बढ़ता एस्ट्रोजन चक्र के मध्य में अग्र पीयूष से एलएच की तीव्र वृद्धि कराता है, और यही वृद्धि परिपक्व ग्राफी पुटक को फोड़कर अंड मुक्त करती है। A गलत है क्योंकि पाँचवाँ दिन मासिक प्रावस्था में आता है, जब प्रोजेस्टेरोन कम रहता है और अंतर्गर्भाशय कला निकल रही होती है। C गलत है क्योंकि इक्कीसवाँ दिन ल्यूटियल प्रावस्था में है, जब कॉर्पस ल्यूटियम सक्रिय रहता है, और ऑक्सीटोसिन की अंडाशयी चक्र में कोई भूमिका नहीं है। D गलत है क्योंकि अट्ठाईसवाँ दिन चक्र का अंत है और प्रोलैक्टिन दुग्ध स्रावण का हार्मोन है। चारों प्रावस्थाएँ दिनों के साथ याद रखें: मासिक 1 से 5, पुटकीय 6 से 13, अंडोत्सर्ग लगभग 14 और ल्यूटियल 15 से 28।
अहार्मोनी मुखीय गर्भनिरोधक गोली सहेली किस भारतीय संस्थान में विकसित हुई?
- A.केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ
- B.अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली
- C.भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
- D.राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान, लखनऊ है। सहेली में सेंटक्रोमैन होता है और आरंभिक दैनिक खुराक के बाद यह सप्ताह में एक बार ली जाने वाली अहार्मोनी गोली है, जो उन संयुक्त हार्मोनी गोलियों से भिन्न है जिन्हें प्रतिदिन लेना पड़ता है और जिनके हार्मोनी दुष्प्रभाव होते हैं। B गलत है क्योंकि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान शिक्षण अस्पताल और अनुसंधान केंद्र है, परंतु इस औषधि का श्रेय उसे नहीं है। C गलत है क्योंकि भारतीय विज्ञान संस्थान मुख्यतः भौतिक, अभियांत्रिकी तथा आधारभूत जैव विज्ञानों में कार्य करता है। D गलत है क्योंकि राष्ट्रीय पोषण संस्थान आहार, पोषक तत्वों की आवश्यकता और खाद्य सुरक्षा पर कार्य करता है। केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद की प्रयोगशाला है, इसी कारण यह प्रश्न सामान्य विज्ञान में भी आता है।
गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम किस वर्ष संशोधित होकर कुछ श्रेणियों की महिलाओं के लिए ऊपरी सीमा चौबीस सप्ताह कर दी गई?
- A.1994
- B.2003
- C.2017
- D.2021
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर D, 2021 है। 2021 के संशोधन ने बीस सप्ताह तक एक पंजीकृत चिकित्सक की राय पर समापन बनाए रखा, बलात्कार या अगम्यागमन की पीड़िताओं जैसी कुछ श्रेणियों की महिलाओं के लिए बीस से चौबीस सप्ताह के बीच दो चिकित्सकों की राय पर अनुमति दी, और चिकित्सा बोर्ड द्वारा भ्रूण की गंभीर असामान्यता के निदान पर ऊपरी सीमा हटा दी। A गलत है क्योंकि 1994 प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम का वर्ष है, जो लिंग निर्धारण पर रोक लगाता है। B गलत है क्योंकि 2003 में उस अधिनियम के नियम कड़े किए गए और वह पीसीपीएनडीटी अधिनियम बना। C गलत है क्योंकि 2017 में एमटीपी अधिनियम में कोई संशोधन नहीं हुआ, यद्यपि उन वर्षों में न्यायालय बीस सप्ताह से आगे के व्यक्तिगत मामलों पर निर्णय दे रहे थे। मूल अधिनियम 1971 का है।
प्रसव के बाद स्रावित पहला दूध कोलोस्ट्रम नवजात के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
- A.यह प्रतिरक्षियों से भरपूर है और निष्क्रिय प्रतिरक्षा देता है
- B.यह लोहे से भरपूर है और रक्ताल्पता रोकता है
- C.इसमें अस्थि वृद्धि के लिए विटामिन डी होता है
- D.यह वसा से भरपूर है और भार तेजी से बढ़ाता है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A है। कोलोस्ट्रम प्रसव के बाद के पहले दिनों में स्रावित पतला पीला दूध है, जो प्रतिरक्षियों, विशेषकर इम्यूनोग्लोबुलिन ए से भरपूर होता है; ये प्रतिरक्षी शिशु में पहुँचकर उसे उस समय संक्रमण से बचाते हैं जब उसका अपना प्रतिरक्षा तंत्र अपरिपक्व है, और इसी सुरक्षा को निष्क्रिय प्रतिरक्षा कहा जाता है। B गलत है क्योंकि कोलोस्ट्रम लोहे के लिए विशेष नहीं है और शिशु मुख्यतः जन्म से पहले संचित लोहे पर निर्भर रहता है। C गलत है क्योंकि विटामिन डी त्वचा में सूर्य प्रकाश से बनता है और प्रायः पूरक के रूप में दिया जाता है; कोलोस्ट्रम का महत्व उससे नहीं है। D गलत है क्योंकि कोलोस्ट्रम में वसा कम और मात्रा थोड़ी होती है, फिर भी वह प्रोटीन तथा रक्षक तत्वों से भरपूर है, इसलिए उसे फेंकने की परंपरा गलत है।
निम्नलिखित यौन संचारित संक्रमणों में कौन-सा पूर्णतः ठीक नहीं हो सकता?
- A.गोनोरिया
- B.सिफलिस
- C.जननांगी हर्पीज
- D.क्लैमाइडिया
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, जननांगी हर्पीज है। यह विषाणु से होता है, जो जीवन भर तंत्रिका कोशिकाओं में निष्क्रिय पड़ा रहता है, इसलिए औषधियों से उसके प्रकोप नियंत्रित किए जा सकते हैं परंतु संक्रमण पूर्णतः ठीक नहीं होता; हेपेटाइटिस बी और एचआईवी संक्रमण भी इसी श्रेणी में आते हैं। A गलत है क्योंकि गोनोरिया जीवाणुजनित संक्रमण है, जो शीघ्र पकड़ में आने पर उचित प्रतिजैविक से ठीक हो जाता है। B गलत है क्योंकि सिफलिस भी जीवाणुजनित और उपचार योग्य है, और उपचार न होने पर ही वह गंभीर रूप लेता है। D गलत है क्योंकि जीवाणु से होने वाला क्लैमाइडिया भी ट्राइकोमोनिएसिस की तरह ठीक हो जाता है। परीक्षा यह सिखाना चाहती है कि शीघ्र निदान महत्वपूर्ण है और यौन संचारित रोगों में विषाणुजनित संक्रमण ही जीवन भर रहते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मनुष्य में निषेचन कहाँ होता है?
फैलोपियन नलिका के चौड़े मध्य भाग ऐम्पुला में, जहाँ शुक्राणु अंड से मिलता है। युग्मनज विभाजित होते हुए गर्भाशय तक पहुँचता है और ब्लास्टोसिस्ट निषेचन के लगभग एक सप्ताह बाद अंतर्गर्भाशय कला में अंतर्रोपित होता है, इसलिए गर्भाशय अंतर्रोपण का स्थान है, निषेचन का नहीं।
गर्भ जाँच किस हार्मोन को पकड़ती है?
मानव कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन अर्थात् एचसीजी को, जिसे अंतर्रोपण के तुरंत बाद ट्रोफोब्लास्ट और फिर प्लेसेंटा स्रावित करता है और जो मूत्र में निकलता है। घरेलू जाँच किट एचसीजी के विरुद्ध प्रतिरक्षी का प्रयोग करती हैं, इसी कारण वे कुछ सप्ताह में गर्भ की पुष्टि कर देती हैं।
सर्टोली और लेडिग कोशिकाओं में क्या अंतर है?
सर्टोली कोशिकाएँ शुक्रजनक नलिकाओं के भीतर रहती हैं और विकसित होते शुक्राणुओं को पोषण देती हैं, इसलिए उन्हें धात्री कोशिकाएँ कहते हैं। लेडिग या अंतराली कोशिकाएँ नलिकाओं के बाहर के स्थानों में रहती हैं और नर लैंगिक हार्मोन टेस्टोस्टेरोन स्रावित करती हैं। एक पोषण देती है, दूसरी स्रावण करती है।
नवजात के लिए कोलोस्ट्रम क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि प्रसव के तुरंत बाद के दिनों में स्रावित यह पहला दूध प्रतिरक्षियों, विशेषकर इम्यूनोग्लोबुलिन ए से भरपूर होता है और शिशु को उस समय संक्रमण से बचाता है जब उसका अपना प्रतिरक्षा तंत्र पूरी तरह काम नहीं कर रहा होता। यह सुपाच्य और प्रोटीन से भरपूर भी होता है।
एमटीपी अधिनियम के 2021 के संशोधन से क्या बदला?
इसने कुछ श्रेणियों की महिलाओं, जैसे बलात्कार या अगम्यागमन की पीड़िताओं के लिए समापन की सीमा बीस से चौबीस सप्ताह कर दी, जिसके लिए दो पंजीकृत चिकित्सकों की राय आवश्यक है, और चिकित्सा बोर्ड द्वारा भ्रूण की गंभीर असामान्यता के निदान पर ऊपरी सीमा पूरी तरह हटा दी। बीस सप्ताह तक एक चिकित्सक की राय पर्याप्त है।
कौन-से यौन संचारित संक्रमण ठीक नहीं हो सकते?
जननांगी हर्पीज, हेपेटाइटिस बी और एचआईवी संक्रमण पूर्णतः ठीक नहीं हो सकते, यद्यपि औषधियों से उन्हें नियंत्रित रखा जा सकता है। गोनोरिया, सिफलिस, क्लैमाइडिया और ट्राइकोमोनिएसिस शीघ्र पकड़ में आने और उचित उपचार से ठीक हो जाते हैं, इसी कारण शीघ्र निदान पर बल दिया जाता है।
स्रोत
- जीव विज्ञान (कक्षा 12), मानव प्रजनन तथा प्रजनन स्वास्थ्य अध्याय — एनसीईआरटी
- गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971 तथा संशोधन अधिनियम, 2021 — स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
- विज्ञान (कक्षा 10), जीव जनन कैसे करते हैं अध्याय — एनसीईआरटी





