प्रकाश: परावर्तन और अपवर्तन के नोट्स तथा विगत प्रश्न
परीक्षा के लिए प्रकाश के नोट्स: परावर्तन के नियम, दर्पण और लेंस के सूत्र, अपवर्तन तथा स्नेल का नियम, पूर्ण आंतरिक परावर्तन और वर्ण विक्षेपण।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

प्रकाश ऊर्जा का वह रूप है जो विद्युत चुंबकीय तरंग के रूप में चलता है और जिसे किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती, इसीलिए सूर्य का प्रकाश अंतरिक्ष के निर्वात को पार कर लेता है। निर्वात में इसकी चाल लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड है, जिसे 3 गुणा 10 की घात 8 मीटर प्रति सेकंड लिखा जाता है, और यह प्रकृति की ज्ञात सबसे बड़ी चाल है। हर दूसरे माध्यम में प्रकाश इससे धीमा चलता है, और इस अध्याय की लगभग हर बात इसी एक तथ्य से निकलती है। परावर्तन, अपवर्तन, पूर्ण आंतरिक परावर्तन और वर्ण विक्षेपण मिलकर दर्पण, लेंस, मरीचिका, इंद्रधनुष और चश्मे की व्याख्या कर देते हैं।
परावर्तन और दर्पण
किसी सतह से प्रकाश का लौट आना परावर्तन कहलाता है। इसके दो नियम हैं। आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है, तथा आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब एक ही तल में होते हैं। समतल दर्पण सदैव वस्तु के बराबर आकार का आभासी और सीधा प्रतिबिंब बनाता है, जो दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर होता है जितनी दूर वस्तु सामने है, और यह प्रतिबिंब पार्श्व उलटा होता है, इसीलिए वाहन के आगे एंबुलेंस शब्द उलटा लिखा जाता है।
गोलीय दर्पण किसी खोखले गोले का भाग होता है। अवतल दर्पण भीतर की ओर मुड़ा होता है और प्रकाश को अभिसरित करता है, इसलिए वह वास्तविक प्रतिबिंब बना सकता है; उत्तल दर्पण बाहर की ओर मुड़ा होता है और प्रकाश को अपसरित करता है, इसलिए उसका प्रतिबिंब सदा आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा होता है। गोलीय दर्पण की फोकस दूरी उसकी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है। दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f है और आवर्धन m = -v/u होता है। अवतल दर्पण दाढ़ी बनाने, दंत चिकित्सा, टॉर्च तथा हेडलाइट और सौर कुकर में काम आते हैं; उत्तल दर्पण वाहनों के पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में और अंधे मोड़ों पर लगाए जाते हैं क्योंकि वे विस्तृत दृष्टि क्षेत्र देते हैं।
अपवर्तन और लेंस
एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में जाते समय प्रकाश का मुड़ जाना अपवर्तन कहलाता है, और यह इसलिए होता है कि प्रकाश की चाल बदल जाती है। विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाने वाली किरण, जैसे वायु से काँच में, धीमी होकर अभिलंब की ओर मुड़ती है; सघन से विरल माध्यम में जाने वाली किरण तेज होकर अभिलंब से दूर हटती है। अभिलंब के अनुदिश पड़ने वाली किरण बिल्कुल नहीं मुड़ती। स्नेल के नियम के अनुसार आपतन कोण की ज्या और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात दो माध्यमों के लिए नियत रहता है, और वही नियतांक अपवर्तनांक कहलाता है। किसी माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक निर्वात में प्रकाश की चाल में उस माध्यम की चाल का भाग देने पर मिलता है, इसलिए अधिक अपवर्तनांक का अर्थ है अधिक धीमा और प्रकाशिक रूप से सघन माध्यम।
| माध्यम | अपवर्तनांक | वायु के साथ क्रांतिक कोण |
|---|---|---|
| जल | लगभग 1.33 | लगभग 48.6 अंश |
| साधारण काँच | लगभग 1.5 | लगभग 42 अंश |
| हीरा | लगभग 2.42 | लगभग 24.4 अंश |
उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है और प्रकाश को अभिसरित करता है; अवतल लेंस बीच में पतला होता है और उसे अपसरित करता है। लेंस सूत्र 1/v - 1/u = 1/f है और आवर्धन m = v/u होता है। लेंस की क्षमता मीटर में मापी गई फोकस दूरी का व्युत्क्रम होती है, अर्थात P = 1/f, और इसका मात्रक डायोप्टर है। अभिसारी लेंस की क्षमता धनात्मक और अपसारी लेंस की ऋणात्मक होती है, इसलिए ऋण 2.5 डायोप्टर के चश्मे का अर्थ है चालीस सेंटीमीटर फोकस दूरी वाला अवतल लेंस।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन और वर्ण विक्षेपण
जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाए और आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा हो, तो उसका कोई भाग बाहर नहीं निकलता और पूरा प्रकाश सघन माध्यम में ही लौट आता है। इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं। यही तराशे हुए हीरे की चमक की व्याख्या करता है, जिसका छोटा क्रांतिक कोण प्रकाश को भीतर ही रोक लेता है, यही प्रकाशिक तंतुओं की कार्यप्रणाली है जो दूरभाष और इंटरनेट के संकेत ले जाते हैं, और यही गर्म सड़क पर दिखने वाली मरीचिका का कारण है, जहाँ भिन्न घनत्व की वायु परतें आकाश से आते प्रकाश को मोड़ देती हैं। श्वेत प्रकाश का प्रिज्म द्वारा सात रंगों में बँट जाना वर्ण विक्षेपण कहलाता है, जिसे सबसे पहले आइजक न्यूटन ने दिखाया। लाल प्रकाश सबसे कम और बैंगनी सबसे अधिक मुड़ता है, क्योंकि काँच का अपवर्तनांक हर रंग के लिए अलग होता है। इंद्रधनुष तब बनता है जब वर्षा की बूँदें सूर्य के प्रकाश का अपवर्तन, आंतरिक परावर्तन और फिर अपवर्तन करती हैं।
नेत्र और उसके दोष
- निकट दृष्टि दोष: प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनता है और दूर की वस्तुएँ धुंधली दिखती हैं; अवतल लेंस से सुधार होता है।
- दूर दृष्टि दोष: प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है और पास की वस्तुएँ धुंधली दिखती हैं; उत्तल लेंस से सुधार होता है।
- जरा दूरदृष्टिता: आयु के साथ नेत्र की पेशियाँ कमजोर पड़ती हैं और निकट बिंदु दूर हट जाता है; द्विफोकसी लेंस से सुधार होता है।
- अबिंदुकता: कॉर्निया पूरी तरह गोलीय नहीं रहता; बेलनाकार लेंस से सुधार होता है।
- सामान्य वयस्क नेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी लगभग पच्चीस सेंटीमीटर होती है।
परीक्षा की दृष्टि से
यह अध्याय तीन तरह से पूछा जाता है। सीधे तथ्य: कौन सा दर्पण कहाँ प्रयुक्त होता है, समतल दर्पण कैसा प्रतिबिंब बनाता है, लेंस की क्षमता का मात्रक क्या है, किस माध्यम का अपवर्तनांक कितना है। दर्पण तथा लेंस सूत्र और क्षमता पर छोटे संख्यात्मक प्रश्न, जिनमें चिह्न परिपाटी ही उत्तर तय करती है और अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक लेनी पड़ती है। और रोजमर्रा की घटनाओं की व्याख्या: पानी में पेंसिल टेढ़ी क्यों दिखती है, तारे क्यों टिमटिमाते हैं, सूर्य उदय से पहले क्यों दिख जाता है, हीरा क्यों चमकता है और गर्म सड़क पर मरीचिका क्यों बनती है। सामान्य जाल ये हैं: यह भूल जाना कि उत्तल दर्पण कभी वास्तविक प्रतिबिंब नहीं बनाता, लेंस सूत्र में ऋण चिह्न छोड़ देना, और मरीचिका का कारण अपवर्तन के बजाय परावर्तन बता देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| निर्वात में प्रकाश की चाल | लगभग 3 गुणा 10 की घात 8 मीटर प्रति सेकंड |
|---|---|
| परावर्तन के नियम | आपतन कोण बराबर परावर्तन कोण; दोनों किरणें और अभिलंब एक तल में |
| समतल दर्पण का प्रतिबिंब | आभासी, सीधा, बराबर आकार का, पार्श्व उलटा |
| गोलीय दर्पण की फोकस दूरी | वक्रता त्रिज्या की आधी |
| दर्पण सूत्र | 1/v + 1/u = 1/f, आवर्धन m = -v/u |
| लेंस सूत्र | 1/v - 1/u = 1/f, आवर्धन m = v/u |
| लेंस की क्षमता | P = 1/f (मीटर में); मात्रक डायोप्टर; उत्तल धनात्मक, अवतल ऋणात्मक |
| पश्च-दृश्य दर्पण | उत्तल दर्पण, विस्तृत दृष्टि क्षेत्र और सीधे प्रतिबिंब के लिए |
| अपवर्तनांक | जल लगभग 1.33, काँच लगभग 1.5, हीरा लगभग 2.42 |
| पूर्ण आंतरिक परावर्तन | सघन से विरल माध्यम, क्रांतिक कोण से अधिक आपतन कोण पर |
| प्रकाशिक तंतु | पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर आधारित |
| वर्ण विक्षेपण | श्वेत प्रकाश सात रंगों में; बैंगनी सबसे अधिक, लाल सबसे कम मुड़ता है |
| निकट और दूर दृष्टि दोष | क्रमशः अवतल और उत्तल लेंस से सुधार |
| स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी | सामान्य वयस्क नेत्र के लिए लगभग 25 सेंटीमीटर |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाने वाली प्रकाश किरण:
- A.धीमी होती है और अभिलंब से दूर मुड़ती है
- B.धीमी होती है और अभिलंब की ओर मुड़ती है
- C.तेज होती है और अभिलंब से दूर मुड़ती है
- D.तेज होती है और अभिलंब की ओर मुड़ती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. धीमी होती है और अभिलंब की ओर मुड़ती है
व्याख्या
सही उत्तर B, वह धीमी होती है और अभिलंब की ओर मुड़ती है है। सघन माध्यम का अपवर्तनांक अधिक होता है, और अपवर्तनांक निर्वात में प्रकाश की चाल में माध्यम की चाल का भाग है, इसलिए उसके भीतर प्रकाश को धीमा चलना ही पड़ता है। जब किरण सतह पर तिरछी पड़ती है तो तरंगाग्र का जो भाग पहले प्रवेश करता है वही पहले धीमा होता है, जिससे किरण अभिलंब की ओर झुक जाती है। वायु से काँच और वायु से जल इसके मानक उदाहरण हैं।
विकल्प A में चाल का परिवर्तन सही है पर मुड़ने की दिशा गलत। विकल्प C उल्टी स्थिति का वर्णन करता है, जब प्रकाश सघन से विरल माध्यम में जाता है। विकल्प D में दोनों बातें गलत हैं। अभिलंब के अनुदिश पड़ने वाली किरण विशेष स्थिति है, जो बिना मुड़े निकल जाती है यद्यपि उसकी चाल तब भी बदलती है।
एक अवतल लेंस की फोकस दूरी 15 सेमी है। यदि वस्तु लेंस से 30 सेमी दूर रखी जाए तो प्रतिबिंब दूरी कितनी होगी?
- A.-20 सेमी
- B.-10 सेमी
- C.-15 सेमी
- D.-18 सेमी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. -10 सेमी
व्याख्या
सही उत्तर B, ऋण 10 सेंटीमीटर है। चिह्न परिपाटी के अनुसार अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है, इसलिए f ऋण 15 सेंटीमीटर है, और आपतित प्रकाश की दिशा के विरुद्ध मापी गई वस्तु दूरी ऋण 30 सेंटीमीटर है। इन्हें लेंस सूत्र 1/v - 1/u = 1/f में रखने पर 1/v बराबर 1/f जोड़ 1/u आता है, अर्थात ऋण 1/15 जोड़ ऋण 1/30, जो ऋण 3/30 या ऋण 1/10 है। इस प्रकार v ऋण 10 सेंटीमीटर मिलता है।
ऋण चिह्न बताता है कि प्रतिबिंब वस्तु की ही ओर बना है, अर्थात वह आभासी और सीधा है, और लेंस के अधिक निकट होने से छोटा भी है। अवतल लेंस के लिए वस्तु की हर स्थिति में यही होता है। विकल्प A, C और D चिह्न छोड़ने या व्युत्क्रम गलत जोड़ने से आते हैं।
सूर्य के प्रकाश का स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए सबसे पहले काँच के प्रिज्म का प्रयोग करने वाले वैज्ञानिक का नाम बताइए।
- A.सी. वी. रामन
- B.लॉर्ड रैले
- C.आइजक न्यूटन
- D.एस. चंद्रशेखर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. आइजक न्यूटन
व्याख्या
सही उत्तर C, आइजक न्यूटन है। न्यूटन ने अंधेरे कमरे में सूर्य के प्रकाश की पतली किरण को काँच के प्रिज्म से गुजारकर दीवार पर सात रंगों की पट्टी प्राप्त की, जिसे उन्होंने स्पेक्ट्रम नाम दिया। इसके बाद दूसरे प्रिज्म से उन्होंने दिखाया कि वही रंग फिर से मिलकर श्वेत प्रकाश बना देते हैं, जिससे सिद्ध हुआ कि प्रिज्म प्रकाश को रंग देता नहीं, केवल उसमें पहले से मौजूद रंगों को अलग करता है। प्रिज्म के आधार की ओर से रंगों का क्रम बैनीआहपीनाला के रूप में याद रखा जाता है।
विकल्प A सी. वी. रामन ने अपने नाम से जाना जाने वाला प्रकीर्णन प्रभाव खोजा और 1930 में नोबेल पुरस्कार पाया। विकल्प B लॉर्ड रैले ने आकाश के नीले रंग वाला प्रकीर्णन समझाया। विकल्प D एस. चंद्रशेखर ने तारों की संरचना और विकास पर काम किया।
समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव कैसा होता है?
- A.वास्तविक, उलटा और बराबर आकार का
- B.आभासी, सीधा और बराबर आकार का
- C.आभासी, सीधा और छोटा
- D.वास्तविक, सीधा और बड़ा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आभासी, सीधा और बराबर आकार का
व्याख्या
सही उत्तर B, आभासी, सीधा और बराबर आकार का है। समतल दर्पण से परावर्तित किरणें अपसरित होती हैं और केवल दर्पण के पीछे किसी बिंदु से आती प्रतीत होती हैं, इसलिए प्रतिबिंब परदे पर नहीं लिया जा सकता और आभासी होता है। यह वस्तु की ही तरह सीधा रहता है, ठीक वस्तु के बराबर होता है और दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूर वस्तु सामने है। यह पार्श्व उलटा भी होता है, इसीलिए बायाँ हाथ दायाँ दिखता है और एंबुलेंस शब्द वाहन के आगे उलटा लिखा जाता है ताकि आगे चलता चालक उसे दर्पण में सीधा पढ़ सके।
विकल्प A और D वास्तविक प्रतिबिंब का वर्णन करते हैं, जो समतल दर्पण कभी नहीं बनाता। विकल्प C उत्तल दर्पण के प्रतिबिंब का वर्णन है, जो वस्तु से छोटा होता है।
वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में किस प्रकार के दर्पण का प्रयोग होता है?
- A.समतल दर्पण
- B.अवतल दर्पण
- C.उत्तल दर्पण
- D.बेलनाकार दर्पण
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. उत्तल दर्पण
व्याख्या
सही उत्तर C, उत्तल दर्पण है। उत्तल दर्पण बाहर की ओर मुड़ा होता है और उस पर पड़ने वाले प्रकाश को फैला देता है, इसलिए वस्तु की दूरी चाहे जो हो, वह सदा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। प्रतिबिंब छोटा होने के कारण छोटा सा दर्पण भी बहुत विस्तृत दृष्टि क्षेत्र दिखा देता है और चालक पीछे की लंबी सड़क देख पाता है। इसी कारण पहाड़ी मार्गों के अंधे मोड़ों और दुकानों में भी उत्तल दर्पण लगाए जाते हैं।
विकल्प A समतल दर्पण वास्तविक आकार का प्रतिबिंब तो देता पर दृष्टि क्षेत्र संकरा रहता। विकल्प B अवतल दर्पण प्रकाश को अभिसरित करता है और दूर की वस्तु का बड़ा उलटा वास्तविक प्रतिबिंब बना सकता है, जो वाहन में खतरनाक होता; वह दाढ़ी बनाने, दंत चिकित्सा और हेडलाइट में काम आता है। विकल्प D इस प्रकार का दर्पण होता ही नहीं।
50 सेमी फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस की क्षमता कितनी होगी?
- A.+0.5 डायोप्टर
- B.+2 डायोप्टर
- C.-2 डायोप्टर
- D.+50 डायोप्टर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. +2 डायोप्टर
व्याख्या
सही उत्तर B, धन 2 डायोप्टर है। लेंस की क्षमता मीटर में व्यक्त फोकस दूरी का व्युत्क्रम होती है, अर्थात P बराबर 1 बटा f। पचास सेंटीमीटर का अर्थ है 0.5 मीटर, और 0.5 का व्युत्क्रम 2 होता है, इसलिए क्षमता दो डायोप्टर है। लेंस उत्तल है, अर्थात अभिसारी, इसलिए क्षमता का चिह्न धनात्मक रहता है। क्षमता बताती है कि लेंस प्रकाश को कितनी प्रबलता से मोड़ता है, इसलिए कम फोकस दूरी का अर्थ है अधिक शक्तिशाली लेंस।
विकल्प A में व्युत्क्रम लेने के बजाय मीटर में फोकस दूरी ही उत्तर मान ली गई है। विकल्प C संख्या तो सही देता है पर चिह्न गलत, जो अवतल लेंस का होता। विकल्प D में सूत्र में फोकस दूरी सेंटीमीटर में रख दी गई है, जो इस गणना की सबसे आम भूल है।
गर्म सड़क पर मरीचिका किस कारण बनती है?
- A.सड़क की सतह से परावर्तन
- B.सूर्य प्रकाश का वर्ण विक्षेपण
- C.वायु परतों में अपवर्तन के बाद पूर्ण आंतरिक परावर्तन
- D.धूल कणों द्वारा प्रकीर्णन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. वायु परतों में अपवर्तन के बाद पूर्ण आंतरिक परावर्तन
व्याख्या
सही उत्तर C, वायु परतों में अपवर्तन के बाद पूर्ण आंतरिक परावर्तन है। गर्म दिन में सड़क से लगी वायु तप जाती है और ऊपर की ठंडी वायु से विरल हो जाती है। आकाश से आता प्रकाश सघन परतों से विरल परतों में जाते हुए हर चरण पर अभिलंब से दूर मुड़ता है, और जब आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा हो जाता है तो पूरा प्रकाश ऊपर की ओर पूर्ण आंतरिक परावर्तित हो जाता है। नेत्र उसे सीधी रेखा में पीछे बढ़ाकर देखता है और झिलमिलाता हुआ वह धब्बा जल जैसा प्रतीत होता है।
विकल्प A गलत है क्योंकि सड़क खुरदरी होती है, दर्पण नहीं। विकल्प B वर्ण विक्षेपण श्वेत प्रकाश को रंगों में बाँटता है और इंद्रधनुष समझाता है, मरीचिका नहीं। विकल्प D प्रकीर्णन आकाश के नीलेपन और डूबते सूर्य की ललाई की व्याख्या करता है।
संचार में प्रयुक्त प्रकाशिक तंतु किस सिद्धांत पर कार्य करते हैं?
- A.वर्ण विक्षेपण
- B.पूर्ण आंतरिक परावर्तन
- C.विवर्तन
- D.ध्रुवण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पूर्ण आंतरिक परावर्तन
व्याख्या
सही उत्तर B, पूर्ण आंतरिक परावर्तन है। प्रकाशिक तंतु काँच या प्लास्टिक का पतला धागा होता है, जिसका भीतरी क्रोड अधिक अपवर्तनांक का होता है और उसके चारों ओर कम अपवर्तनांक का आवरण रहता है। एक सिरे से प्रवेश करता प्रकाश सीमा पर क्रांतिक कोण से बड़े कोण पर पड़ता है, इसलिए बाहर नहीं निकलता और पूरा का पूरा क्रोड में लौट आता है। हजारों बार ऐसा होने पर संकेत तंतु के मुड़े होने पर भी बहुत कम हानि के साथ आगे बढ़ता रहता है, इसीलिए तंतु दूरभाष, इंटरनेट और केबल टीवी के संकेत ले जाते हैं तथा एंडोस्कोप में भी लगते हैं।
विकल्प A वर्ण विक्षेपण प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का बँटना है। विकल्प C विवर्तन तरंगों का अवरोध के चारों ओर मुड़ना है। विकल्प D ध्रुवण प्रकाश के कंपन को एक तल तक सीमित करता है।
निकट दृष्टि दोष को ठीक करने के लिए किस प्रकार के लेंस का प्रयोग किया जाता है?
- A.उत्तल लेंस
- B.अवतल लेंस
- C.बेलनाकार लेंस
- D.द्विफोकसी लेंस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अवतल लेंस
व्याख्या
सही उत्तर B, अवतल लेंस है। निकट दृष्टि दोष में नेत्रगोलक बहुत लंबा हो जाता है या नेत्र लेंस अधिक अभिसारी हो जाता है, इसलिए दूर की वस्तु से आती किरणें रेटिना के आगे ही मिल जाती हैं और व्यक्ति दूर का स्पष्ट नहीं देख पाता। अवतल लेंस नेत्र में प्रवेश करने से पहले किरणों को अपसरित कर देता है, जिससे प्रतिबिंब पीछे खिसककर ठीक रेटिना पर बनता है।
विकल्प A उत्तल लेंस प्रकाश को अभिसरित करता है और दूर दृष्टि दोष में लगता है, जिसमें प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है और पास की वस्तुएँ धुंधली दिखती हैं। विकल्प C बेलनाकार लेंस अबिंदुकता ठीक करता है, जो कॉर्निया की असमान वक्रता से होती है। विकल्प D द्विफोकसी लेंस का ऊपरी भाग अवतल और निचला उत्तल होता है और वह जरा दूरदृष्टिता में काम आता है।
श्वेत प्रकाश के प्रिज्म से गुजरने पर कौन सा रंग सबसे अधिक मुड़ता है?
- A.लाल
- B.हरा
- C.पीला
- D.बैंगनी
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. बैंगनी
व्याख्या
सही उत्तर D, बैंगनी है। श्वेत प्रकाश अनेक रंगों का मिश्रण है, और प्रिज्म के काँच का अपवर्तनांक हर रंग के लिए थोड़ा भिन्न होता है, जो बैंगनी के लिए सबसे अधिक और लाल के लिए सबसे कम रहता है। अधिक अपवर्तनांक का अर्थ है अधिक मुड़ना, इसलिए बैंगनी सबसे अधिक और लाल सबसे कम विचलित होता है, और रंग फैलकर वह पट्टी बनाते हैं जिसे स्पेक्ट्रम कहते हैं तथा बैनीआहपीनाला के रूप में याद रखा जाता है। इसी बँटवारे को वर्ण विक्षेपण कहते हैं।
विकल्प A लाल की तरंगदैर्घ्य दृश्य रंगों में सबसे अधिक है और वह सबसे कम मुड़ता है, इसीलिए पट्टी के दूसरे छोर पर दिखता है। विकल्प B और C हरा तथा पीला स्पेक्ट्रम के बीच में आते हैं और उनका विचलन बैंगनी तथा लाल के बीच रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण क्यों लगाया जाता है?
उत्तल दर्पण वस्तु की किसी भी स्थिति में आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, और प्रतिबिंब छोटा होने के कारण उतने ही आकार के समतल दर्पण से कहीं अधिक विस्तृत दृष्टि क्षेत्र देता है। इसलिए चालक छोटे से दर्पण में पीछे की लंबी सड़क देख लेता है। इसकी कीमत यह है कि वस्तुएँ वास्तविक दूरी से अधिक दूर दिखती हैं, इसीलिए ऐसे दर्पणों पर चेतावनी लिखी रहती है।
पानी में आंशिक रूप से डूबी पेंसिल टेढ़ी क्यों दिखाई देती है?
पेंसिल के जलमग्न भाग से आने वाला प्रकाश सघन माध्यम जल से विरल माध्यम वायु में जाता है और सतह पर अभिलंब से दूर मुड़ जाता है। नेत्र इन मुड़ी किरणों को सीधी रेखा में पीछे की ओर बढ़ाकर देखता है, इसलिए डूबा हुआ भाग उठा हुआ और खिसका हुआ प्रतीत होता है और पेंसिल सतह पर टूटी दिखती है। इसी अपवर्तन के कारण तालाब वास्तविक गहराई से कम गहरा दिखता है।
हीरा काँच से अधिक क्यों चमकता है?
हीरे का अपवर्तनांक लगभग 2.42 है, जो काँच से कहीं अधिक है, इसलिए उसका क्रांतिक कोण केवल लगभग 24.4 अंश रह जाता है। हीरे में प्रवेश करने वाली किरण भीतरी फलकों पर बार-बार इससे बड़े कोण पर पड़ती है और हर बार पूर्ण आंतरिक परावर्तित होती है, तब कहीं जाकर बाहर निकलती है। रत्न की तराश इसी तरह की जाती है कि ऐसा कई बार हो, इसलिए बाहर निकलने वाला प्रकाश संकेंद्रित होता है और पत्थर दमकता दिखता है।
तारे क्यों टिमटिमाते हैं जबकि ग्रह नहीं?
तारे इतनी दूर हैं कि वे बिंदु स्रोत की तरह व्यवहार करते हैं। उनका प्रकाश बदलते घनत्व वाली वायुमंडलीय परतों से गुजरते हुए लगातार अलग-अलग मात्रा में अपवर्तित होता रहता है, इसलिए आभासी स्थिति और चमक बदलती रहती है और तारा टिमटिमाता प्रतीत होता है। ग्रह कहीं अधिक निकट है और अनेक बिंदु स्रोतों के समूह जैसा दिखता है; भिन्न बिंदुओं के उतार-चढ़ाव औसत में कट जाते हैं, इसलिए उसका प्रकाश स्थिर लगता है।
वास्तविक और आभासी प्रतिबिंब में क्या अंतर है?
वास्तविक प्रतिबिंब वहाँ बनता है जहाँ परावर्तन या अपवर्तन के बाद प्रकाश किरणें सचमुच मिलती हैं, इसे परदे पर लिया जा सकता है और यह उलटा होता है, जैसे सिनेमा के परदे पर। आभासी प्रतिबिंब वहाँ बनता है जहाँ किरणें केवल पीछे बढ़ाने पर मिलती प्रतीत होती हैं, इसे परदे पर नहीं लिया जा सकता और यह सीधा होता है, जैसे समतल दर्पण में या अक्षरों के पास रखे आवर्धक लेंस में।
स्रोत
- विज्ञान (कक्षा दस), प्रकाश: परावर्तन तथा अपवर्तन अध्याय — एनसीईआरटी
- विज्ञान (कक्षा दस), मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार अध्याय — एनसीईआरटी





