सरल मशीनें: उत्तोलक, घिरनी, सूत्र और प्रश्न
परीक्षा के लिए सरल मशीनों पर नोट्स: यांत्रिक लाभ, वेग अनुपात और दक्षता, उत्तोलक के तीन वर्ग, घिरनी तंत्र, आनत तल, फलक तथा पेच की पूरी जानकारी।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

सरल मशीन वह युक्ति है जो बल का परिमाण या दिशा बदलकर किसी काम को आसान बना देती है। यह ऊर्जा नहीं बनाती और न ही किए जाने वाले काम को घटाती है: जितना बल यह बचाती है, उतनी ही अधिक दूरी तक बल लगाना पड़ता है। परंपरागत रूप से छह सरल मशीनें गिनी जाती हैं - उत्तोलक, घिरनी, चक्र और धुरी, आनत तल, फलक यानी वेज और पेच - और हर जटिल मशीन इन्हीं से बनी होती है। परीक्षा में वे तीन अनुपात पूछे जाते हैं जो किसी भी मशीन का वर्णन करते हैं, उत्तोलक के तीन वर्ग उनके दैनिक उदाहरणों के साथ, और घिरनी तथा ढलान का सरल गणित।
मशीन के तीन अनुपात
यांत्रिक लाभ भार को आयास से भाग देने पर मिलता है और बताता है कि मशीन लगाए गए बल को कितने गुना बढ़ाती है। वेग अनुपात वह संख्या है जो आयास द्वारा तय दूरी को उसी समय में भार द्वारा तय दूरी से भाग देने पर मिलती है, और यह केवल मशीन की बनावट से तय होता है। दक्षता निर्गत कार्य को निवेशित कार्य से भाग देकर प्रतिशत में निकाली जाती है और यह यांत्रिक लाभ को वेग अनुपात से भाग देने के बराबर भी होती है। ये तीनों शुद्ध संख्याएं हैं, इनका कोई मात्रक नहीं होता। आदर्श मशीन में घर्षण नहीं होता, दक्षता सौ प्रतिशत होती है और यांत्रिक लाभ वेग अनुपात के बराबर होता है। हर वास्तविक मशीन में कुछ कार्य घर्षण के विरुद्ध और मशीन के अपने भागों को उठाने में खर्च होता है, इसलिए यांत्रिक लाभ वेग अनुपात से कम और दक्षता सौ प्रतिशत से नीचे रहती है। जिस मशीन का यांत्रिक लाभ एक से अधिक है वह बल बढ़ाती है, और जिसका एक से कम है वह बल के बदले चाल या दूरी बढ़ाती है।
| राशि | सूत्र | अर्थ |
|---|---|---|
| यांत्रिक लाभ | भार भाग आयास | बल कितने गुना बढ़ा |
| वेग अनुपात | आयास की दूरी भाग भार की दूरी | मशीन की बनावट से तय |
| दक्षता | निर्गत कार्य भाग निवेशित कार्य, या यांत्रिक लाभ भाग वेग अनुपात | वास्तविक मशीन में सदा एक से कम |
उत्तोलक और आघूर्ण का सिद्धांत
उत्तोलक एक दृढ़ छड़ है जो आलंब नामक स्थिर बिंदु के चारों ओर घूमती है। संतुलन की स्थिति में आघूर्ण का सिद्धांत लागू होता है: भार गुणा भार भुजा बराबर आयास गुणा आयास भुजा, इसलिए उत्तोलक का यांत्रिक लाभ आयास भुजा को भार भुजा से भाग देने पर मिलता है। लंबी आयास भुजा का अर्थ है अधिक यांत्रिक लाभ। छड़ पर तीनों बिंदुओं के क्रम के अनुसार उत्तोलक तीन वर्गों में बांटे जाते हैं।
| वर्ग | क्रम | यांत्रिक लाभ | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| प्रथम वर्ग | आलंब आयास और भार के बीच | एक से अधिक, बराबर या कम हो सकता है | सीसा, सब्बल, कैंची, तुला, प्लास |
| द्वितीय वर्ग | भार आलंब और आयास के बीच | सदा एक से अधिक | ठेला, सरौता, बोतल खोलने वाला, नींबू निचोड़ने वाला |
| तृतीय वर्ग | आयास आलंब और भार के बीच | सदा एक से कम | मछली पकड़ने की छड़, चिमटी, चिमटा, झाड़ू, मनुष्य की भुजा |
घिरनी
घिरनी एक ऐसा पहिया है जिसकी परिधि में खांचा होता है और जिस पर रस्सी चलती है। कुएं पर लगी एकल स्थिर घिरनी का वेग अनुपात एक होता है; यह बल को बिल्कुल नहीं बढ़ाती, इसका लाभ केवल इतना है कि व्यक्ति अपने भार की सहायता से नीचे की ओर खींचकर भार ऊपर उठा लेता है। एकल चल घिरनी, जिसमें घिरनी स्वयं भार के साथ ऊपर उठती है, का वेग अनुपात दो होता है, इसलिए आदर्श स्थिति में भार से आधा आयास उसे उठा देता है। ब्लॉक और टैकल में कई घिरनियां दो ब्लॉकों में लगी होती हैं और वेग अनुपात चल ब्लॉक को संभालने वाली रस्सी की लटों की संख्या के बराबर होता है, जो प्रायः तंत्र की घिरनियों की संख्या के बराबर होती है। वास्तविक घिरनी तंत्र का यांत्रिक लाभ घर्षण और चल ब्लॉक के भार से घट जाता है, इसलिए इसकी दक्षता सदा सौ प्रतिशत से कम रहती है और भार बढ़ने पर सुधरती है।
आनत तल, फलक और पेच
आनत तल वह ढलवां सतह है जिस पर भार को सीधे ऊपर उठाने के बजाय धकेला जाता है। इसका वेग अनुपात ढलान की लंबाई को ऊर्ध्वाधर ऊंचाई से भाग देने पर मिलता है, इसलिए लंबी और कम ढाल वाली ढलान पर कम आयास लगता है; चिकने तल पर आवश्यक आयास वस्तु के भार और ढलान के कोण की ज्या के गुणनफल के बराबर होता है। यही कारण है कि पहाड़ी सड़क सीधे ऊपर चढ़ने के बजाय घुमावदार बनाई जाती है। फलक पीठ से पीठ जुड़े दो आनत तलों से बनता है, और कुल्हाड़ी, चाकू, छेनी तथा कील सभी फलक हैं; जिस फलक की ढलान लंबी और धार पतली होती है, उसका यांत्रिक लाभ अधिक होता है। पेच बेलन पर लिपटा हुआ आनत तल है और इसकी दो लगातार चूड़ियों के बीच की दूरी पिच कहलाती है; पेच का वेग अनुपात हत्थे द्वारा बनाए वृत्त की परिधि को पिच से भाग देने पर मिलता है, इसीलिए जैकस्क्रू एक हाथ के बल से कार उठा लेता है। छठी मशीन चक्र और धुरी का वेग अनुपात पहिये की त्रिज्या को धुरी की त्रिज्या से भाग देने पर मिलता है, और स्टीयरिंग व्हील, पेचकस तथा कुएं की चरखी इसी पर काम करते हैं।
वे बातें जो विद्यार्थी भूल जाते हैं
कोई मशीन कार्य या ऊर्जा को कभी नहीं बढ़ाती; आयास द्वारा किया गया कार्य सदा भार पर किए गए कार्य के बराबर या उससे अधिक होता है और अंतर घर्षण तथा ऊष्मा में नष्ट हो जाता है। एक से कम यांत्रिक लाभ वाली मशीन बेकार नहीं होती: मछली पकड़ने की छड़ और चिमटी इसलिए बनाई जाती हैं कि भार उसे चलाने वाले हाथ से अधिक दूरी या अधिक चाल से हिले। घर्षण तेल लगाकर और बॉल बेयरिंग के प्रयोग से घटाया जा सकता है, पर पूरी तरह हटाया नहीं जा सकता, इसलिए कोई वास्तविक मशीन सौ प्रतिशत दक्षता तक नहीं पहुंचती, और जो मशीन अपने में डाले गए कार्य से अधिक कार्य करने का दावा करे वह सतत गति मशीन है, जिसे ऊर्जा संरक्षण का नियम असंभव बताता है।
परीक्षा की दृष्टि से
सबसे अधिक संख्यात्मक प्रश्न आते हैं: आयास और यांत्रिक लाभ से भार निकालना, यांत्रिक लाभ और वेग अनुपात से दक्षता निकालना, या दी गई लंबाई और ऊंचाई की ढलान पर आयास निकालना। यह याद रखें कि दक्षता बराबर यांत्रिक लाभ भाग वेग अनुपात है, शेष इसी से निकल आता है। दूसरा पसंदीदा प्रश्न वर्गीकरण का है: किसी औजार का उत्तोलक वर्ग बताना, जिसमें कैंची प्रथम वर्ग, सरौता द्वितीय वर्ग तथा चिमटी, झाड़ू और भुजा तृतीय वर्ग होने के कारण भ्रम कराया जाता है। तीसरा प्रश्न घिरनी पर होता है: स्थिर घिरनी से बल में लाभ नहीं होता, चल घिरनी का वेग अनुपात दो होता है और ब्लॉक-टैकल का वेग अनुपात भार संभालने वाली रस्सी की लटों की संख्या के बराबर होता है। पिच की परिभाषा, फलक का दो आनत तलों से बनना और यह नियम कि कोई मशीन सौ प्रतिशत दक्ष नहीं हो सकती, भी पूछे जाते हैं, क्योंकि यांत्रिक लाभ, वेग अनुपात और दक्षता का कोई मात्रक नहीं होता।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सरल मशीनें | उत्तोलक, घिरनी, चक्र और धुरी, आनत तल, फलक, पेच |
|---|---|
| यांत्रिक लाभ | भार भाग आयास; कोई मात्रक नहीं |
| वेग अनुपात | आयास द्वारा तय दूरी भाग भार द्वारा तय दूरी |
| दक्षता | यांत्रिक लाभ भाग वेग अनुपात, प्रतिशत में |
| आघूर्ण का सिद्धांत | भार गुणा भार भुजा बराबर आयास गुणा आयास भुजा |
| प्रथम वर्ग उत्तोलक | आलंब बीच में: सीसा, सब्बल, कैंची, तुला |
| द्वितीय वर्ग उत्तोलक | भार बीच में: ठेला, सरौता, बोतल खोलने वाला |
| तृतीय वर्ग उत्तोलक | आयास बीच में: चिमटी, मछली पकड़ने की छड़, मनुष्य की भुजा |
| स्थिर घिरनी | वेग अनुपात एक; केवल बल की दिशा बदलती है |
| चल घिरनी | वेग अनुपात दो |
| ब्लॉक और टैकल | वेग अनुपात भार संभालने वाली रस्सी की लटों की संख्या के बराबर |
| आनत तल | वेग अनुपात बराबर ढलान की लंबाई भाग ऊंचाई |
| फलक | पीठ से पीठ जुड़े दो आनत तल: कुल्हाड़ी, चाकू, छेनी, कील |
| पेच | बेलन पर लिपटा आनत तल; पिच दो लगातार चूड़ियों के बीच की दूरी |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
किसी भार को हटाने के लिए लगाया गया आयास 15 इकाई है और यांत्रिक लाभ 3 पाया गया है। भार ज्ञात कीजिए।
- A.5 इकाई
- B.3 इकाई
- C.15 इकाई
- D.45 इकाई
उत्तर देखें
यांत्रिक लाभ की परिभाषा भार भाग आयास है, इसलिए भार बराबर यांत्रिक लाभ गुणा आयास होता है, यानी तीन गुणा पंद्रह, जो पैंतालीस इकाई देता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उस घिरनी तंत्र की दक्षता ज्ञात कीजिए जिसका यांत्रिक लाभ 2.5 है और जिसमें रस्सी को 10 मीटर खींचने पर भार 2.5 मीटर ऊपर उठता है।
- A.62.50%
- B.25.00%
- C.40.00%
- D.100.00%
उत्तर देखें
वेग अनुपात आयास द्वारा तय दूरी भाग भार द्वारा तय दूरी होता है, यानी दस भाग दो दशमलव पांच, जो चार है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी सरल मशीन का वेग अनुपात मशीन में ________ द्वारा तय की गई दूरी और ________ द्वारा तय की गई दूरी का अनुपात होता है।
- A.भार; भार
- B.आयास; भार
- C.भार; आयास
- D.आयास; आयास
उत्तर देखें
वेग अनुपात की परिभाषा है समान समय अंतराल में आयास द्वारा तय दूरी भाग भार द्वारा तय दूरी, और चूंकि यह केवल मशीन की बनावट पर निर्भर करता है, यांत्रिक लाभ के विपरीत यह घर्षण से नहीं बदलता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन सी यांत्रिक युक्ति कम आयास से भार को प्रभावी ढंग से बांटती या बढ़ाती है?
- A.गियर
- B.उत्तोलक
- C.शाफ्ट
- D.बेयरिंग
उत्तर देखें
उत्तोलक आलंब के चारों ओर घूमने वाली दृढ़ छड़ है, और आघूर्ण के सिद्धांत से भार गुणा भार भुजा बराबर आयास गुणा आयास भुजा होता है, इसलिए लंबी आयास भुजा से थोड़ा आयास बड़े भार को संभाल लेता है; बल बढ़ाने का यह सबसे सरल तरीका है और सब्बल, सरौता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →ठेला किस वर्ग के उत्तोलक का उदाहरण है?
- A.प्रथम वर्ग
- B.द्वितीय वर्ग
- C.तृतीय वर्ग
- D.यह उत्तोलक नहीं है
उत्तर देखें
ठेले में पहिया आलंब का काम करता है, भार पहिये और हाथों के बीच की ट्रे में रहता है और आयास हत्थों पर लगाया जाता है, जो द्वितीय वर्ग के उत्तोलक की व्यवस्था है; चूंकि आयास भुजा सदा भार भुजा से लंबी होती है, इसका यांत्रिक लाभ सदा एक से…
पूरी व्याख्या पढ़ें →चिमटी या चीनी उठाने वाला चिमटा किस वर्ग के उत्तोलक का उदाहरण है?
- A.प्रथम वर्ग
- B.द्वितीय वर्ग
- C.तृतीय वर्ग
- D.चतुर्थ वर्ग
उत्तर देखें
चिमटे में जोड़ आलंब होता है, हाथ भुजाओं के बीच कहीं दबाव डालता है और पकड़ी जाने वाली वस्तु दूसरे सिरे पर रहती है, इसलिए आयास आलंब और भार के बीच होता है; आयास भुजा भार भुजा से छोटी होती है, यांत्रिक लाभ एक से कम रहता है और लाभ…
पूरी व्याख्या पढ़ें →एकल स्थिर घिरनी का वेग अनुपात कितना होता है?
- A.एक
- B.दो
- C.चार
- D.शून्य
उत्तर देखें
एकल स्थिर घिरनी में जितनी दूरी तक रस्सी नीचे खींची जाती है, भार भी उतना ही ऊपर उठता है, इसलिए आयास द्वारा तय दूरी भार द्वारा तय दूरी के बराबर होती है और वेग अनुपात एक रहता है; इससे बल में कोई लाभ नहीं होता और इसका उपयोग केवल आयास…
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक आनत तल 10 मीटर लंबा और 2 मीटर ऊंचा है। इसका वेग अनुपात कितना है?
- A.2
- B.5
- C.10
- D.20
उत्तर देखें
आनत तल का वेग अनुपात ढलान की लंबाई भाग उसकी ऊर्ध्वाधर ऊंचाई होता है, क्योंकि भार पूरी ढलान पर धकेला जाता है जबकि वह केवल ऊंचाई तक ऊपर उठता है; यहां दस भाग दो से पांच मिलता है, इसलिए आदर्श स्थिति में भार के पांचवें हिस्से के बराबर आयास पर्याप्त…
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी पेच की दो लगातार चूड़ियों के बीच की दूरी क्या कहलाती है?
- A.पिच
- B.लीड कोण
- C.बलाघूर्ण
- D.वेग अनुपात
उत्तर देखें
पेच की पिच उसकी दो लगातार चूड़ियों के बीच अक्ष के अनुदिश नापी गई दूरी है, और यह वही दूरी भी है जितना पेच एक पूरे चक्कर में आगे बढ़ता है; पेच का वेग अनुपात हत्थे द्वारा बनाए वृत्त की परिधि भाग पिच होता है, इसलिए महीन चूड़ी अधिक यांत्रिक…
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन फलक यानी वेज का उदाहरण है?
- A.सब्बल
- B.कुल्हाड़ी
- C.घिरनी ब्लॉक
- D.स्टीयरिंग व्हील
उत्तर देखें
फलक पीठ से पीठ जुड़े दो आनत तलों से बनता है, और कुल्हाड़ी, चाकू, छेनी तथा कील सभी इसी सिद्धांत पर काम करते हैं: कुंद सिरे पर लगाया गया बल पैनी धार पर कहीं बड़े पार्श्व बल में बदल जाता है, और फलक जितना पतला और लंबा हो, उसका यांत्रिक…
पूरी व्याख्या पढ़ें →हर वास्तविक मशीन की दक्षता सौ प्रतिशत से कम क्यों होती है?
- A.क्योंकि भार सदा आयास से अधिक होता है
- B.क्योंकि किया गया कुछ कार्य घर्षण के विरुद्ध खर्च हो जाता है
- C.क्योंकि वेग अनुपात सदा एक से कम होता है
- D.क्योंकि मशीनें स्वयं ऊर्जा बनाती हैं
उत्तर देखें
हर वास्तविक मशीन में डाले गए कार्य का कुछ भाग चलने वाले भागों के बीच घर्षण दूर करने और मशीन के अपने भागों को उठाने में लगता है, और वह कार्य ऊष्मा तथा ध्वनि बनकर निकल जाता है, इसलिए भार तक पहुंचा कार्य आयास द्वारा किए गए कार्य से सदा…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यांत्रिक लाभ और वेग अनुपात में क्या अंतर है?
यांत्रिक लाभ भार भाग आयास है और घर्षण पर निर्भर करता है, इसलिए भार बदलने पर बदल जाता है। वेग अनुपात आयास द्वारा तय दूरी भाग भार द्वारा तय दूरी है और केवल मशीन की बनावट पर निर्भर करता है। इन दोनों का अनुपात, यानी यांत्रिक लाभ भाग वेग अनुपात, मशीन की दक्षता होती है।
कोई मशीन सौ प्रतिशत दक्ष क्यों नहीं हो सकती?
क्योंकि डाले गए कार्य का कुछ भाग सदा चलने वाले भागों के बीच घर्षण के विरुद्ध और मशीन के अपने भागों को उठाने में खर्च होता है, और वह कार्य भार तक पहुंचने के बजाय ऊष्मा तथा ध्वनि में बदल जाता है। तेल और बॉल बेयरिंग घर्षण घटाते हैं, समाप्त नहीं करते, इसलिए निर्गत कार्य सदा निवेशित कार्य से कम रहता है।
कैंची किस वर्ग का उत्तोलक है?
कैंची प्रथम वर्ग का उत्तोलक है: बीच की कील आलंब है, हाथ उसके एक ओर आयास लगाता है और भार, यानी कागज या कपड़ा, दूसरी ओर होता है। इसके विपरीत सरौता द्वितीय वर्ग का और चिमटी तृतीय वर्ग का उत्तोलक है।
यदि स्थिर घिरनी बल नहीं बढ़ाती तो उसका उपयोग क्या है?
इसका वेग अनुपात एक होता है, इसलिए आदर्श स्थिर घिरनी से बल में कोई लाभ नहीं होता; यह आयास की दिशा बदल देती है। यही बड़ी सुविधा है, क्योंकि व्यक्ति नीचे की ओर खींचकर अपने भार की सहायता से भार उठा लेता है, जो हाथ से ऊपर उठाने की तुलना में आसान और सुरक्षित है।
आनत तल काम को आसान कैसे बनाता है?
यह भार को दी गई ऊंचाई तक कम बल से, पर अधिक दूरी तक लगाकर, पहुंचा देता है। इसका वेग अनुपात ढलान की लंबाई भाग ऊंचाई होता है, इसलिए लंबी और कम ढाल वाली ढलान पर कम आयास लगता है; इसीलिए पहाड़ी सड़कें घुमावदार बनाई जाती हैं और भारी ड्रम उठाने के बजाय तख्ते पर लुढ़काए जाते हैं।
पेच की पिच क्या होती है?
पिच पेच की दो लगातार चूड़ियों के बीच की दूरी है, जो उसके अक्ष के अनुदिश नापी जाती है; यह वह दूरी भी है जितना पेच एक पूरे चक्कर में आगे बढ़ता है। पेच का वेग अनुपात हत्थे द्वारा बनाए वृत्त की परिधि भाग पिच होता है, इसलिए महीन चूड़ी वाला पेच अधिक यांत्रिक लाभ देता है।
स्रोत
- विज्ञान (कक्षा 9), कार्य और ऊर्जा अध्याय — एनसीईआरटी
- भौतिकी भाग 1 (कक्षा 11), कणों के निकाय तथा घूर्णी गति अध्याय — एनसीईआरटी
- विज्ञान (कक्षा 7), गति, मापन और सरल मशीनें अध्याय — एनसीईआरटी





