कार्य, ऊर्जा और शक्ति: सूत्र, मात्रक और रूपांतरण
परीक्षा के लिए कार्य, ऊर्जा और शक्ति के नोट्स: कार्य का सूत्र, शून्य कार्य की स्थितियाँ, गतिज तथा स्थितिज ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण, शक्ति और मात्रक रूपांतरण।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

कार्य, ऊर्जा और शक्ति सुनने में रोजमर्रा के शब्द लगते हैं, और इसी कारण यह अध्याय इतने अंक लाता है। भौतिकी में इन तीनों की परिभाषा संकुचित है, हर एक का अपना सूत्र और मात्रक है, और परीक्षक प्रश्न ठीक वहीं बनाते हैं जहाँ सामान्य अर्थ और वैज्ञानिक अर्थ अलग हो जाते हैं। जो व्यक्ति भारी बैग एक घंटे तक थामे खड़ा है वह थक अवश्य जाता है पर कार्य बिल्कुल नहीं करता, और केवल इसी विचार पर बना प्रश्न प्रश्नपत्र दर प्रश्नपत्र आता रहता है।
भौतिकी में कार्य का अर्थ
कार्य तब होता है जब किसी वस्तु पर बल लगे और वस्तु उस बल की दिशा में विस्थापित हो। इसका मान बल, विस्थापन तथा दोनों के बीच के कोण की कोज्या के गुणनफल के बराबर होता है, अर्थात जब दोनों एक ही दिशा में हों तो कार्य बल और विस्थापन का गुणनफल है। कार्य अदिश राशि है, इसका एसआई मात्रक जूल है, और एक जूल वह कार्य है जो एक न्यूटन बल किसी वस्तु को अपनी दिशा में एक मीटर खिसकाने पर करता है। सीजीएस पद्धति में इसका मात्रक अर्ग है और एक जूल एक करोड़ अर्ग के बराबर होता है। कार्य का विमीय सूत्र द्रव्यमान गुणा लंबाई का वर्ग गुणा समय की घात ऋण दो है, जो ऊर्जा का भी है, क्योंकि कार्य और ऊर्जा एक ही विचार के दो पक्ष हैं।
कार्य तीन स्थितियों में शून्य होता है, और इसी से इस अध्याय का सबसे अधिक दोहराया जाने वाला प्रश्न बनता है।
- जब बल शून्य हो, जैसे अंतरिक्ष में स्वतंत्र रूप से चलती वस्तु पर।
- जब विस्थापन शून्य हो, जैसे दीवार को धकेलने पर जब दीवार हिलती ही नहीं।
- जब बल विस्थापन के लंबवत हो, अर्थात कोण नब्बे अंश हो: सिर पर बोझ लेकर समतल पर चलने वाला कुली गुरुत्व के विरुद्ध कोई कार्य नहीं करता, और वृत्ताकार पथ पर चलती वस्तु पर लगा अभिकेंद्र बल भी कोई कार्य नहीं करता।
जब बल गति का विरोध करता है तो कार्य ऋणात्मक होता है, इसीलिए घर्षण और वायु प्रतिरोध सदैव ऋणात्मक कार्य करते हैं, और जब दोनों एक दिशा में हों तो कार्य धनात्मक होता है, जैसे गिरते पत्थर पर गुरुत्व का कार्य।
ऊर्जा और उसके दो यांत्रिक रूप
ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है, इसलिए उसका मात्रक भी जूल ही है। यांत्रिक ऊर्जा के दो रूप हैं। गतिज ऊर्जा गति की ऊर्जा है और वह द्रव्यमान तथा चाल के वर्ग के गुणनफल की आधी होती है; चाल वर्ग में आती है, इसलिए चाल दोगुनी करने पर गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जाती है, और इसी तथ्य से ब्रेक दूरी वाले प्रश्न बनते हैं। स्थितिज ऊर्जा स्थिति की ऊर्जा है और पृथ्वी की सतह के पास उठाई गई वस्तु के लिए वह द्रव्यमान गुणा गुरुत्वीय त्वरण गुणा ऊँचाई होती है। खिंची या दबी हुई कमानी में प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा संचित रहती है, जो कमानी नियतांक और विस्तार के वर्ग के गुणनफल की आधी होती है।
कार्य ऊर्जा प्रमेय दोनों को जोड़ती है: किसी वस्तु पर लगे परिणामी बल द्वारा किया गया कार्य उसकी गतिज ऊर्जा के परिवर्तन के बराबर होता है। ऊर्जा संरक्षण का नियम कहता है कि ऊर्जा न तो बनाई जा सकती है न नष्ट की जा सकती है, केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदली जा सकती है, इसलिए किसी विलगित निकाय की कुल ऊर्जा स्थिर रहती है। मुक्त पतन में स्थितिज और गतिज ऊर्जा का योग अपरिवर्तित रहता है: उच्चतम बिंदु पर पूरी ऊर्जा स्थितिज होती है, भूमि से टकराने के क्षण पूरी गतिज, और आधी ऊँचाई पर दोनों में बँटी हुई। आइंस्टीन ने इस नियम को द्रव्यमान ऊर्जा संबंध तक बढ़ाया, जिसमें ऊर्जा द्रव्यमान और प्रकाश की चाल के वर्ग का गुणनफल है।
शक्ति और ऊर्जा के मात्रक
शक्ति कार्य करने की दर है, अर्थात कार्य को समय से भाग देने पर मिलने वाली राशि, और यह भी अदिश है। इसका एसआई मात्रक वाट है और एक वाट का अर्थ है एक जूल प्रति सेकंड। बड़े मात्रक किलोवाट और अश्वशक्ति हैं, तथा एक अश्वशक्ति लगभग 746 वाट होती है। जब बल और वेग एक ही दिशा में हों तो शक्ति को बल और वेग के गुणनफल के रूप में भी लिखा जा सकता है।
| राशि | सूत्र | एसआई मात्रक और उपयोगी रूपांतरण |
|---|---|---|
| कार्य | बल गुणा विस्थापन गुणा कोण की कोज्या | जूल; एक जूल बराबर एक करोड़ अर्ग |
| गतिज ऊर्जा | द्रव्यमान और चाल के वर्ग के गुणनफल की आधी | जूल; एक इलेक्ट्रॉन वोल्ट लगभग 1.6 गुणा 10 की घात ऋण 19 जूल |
| स्थितिज ऊर्जा | द्रव्यमान गुणा गुरुत्वीय त्वरण गुणा ऊँचाई | जूल; एक कैलोरी लगभग 4.2 जूल |
| शक्ति | कार्य बटा समय, अथवा बल गुणा वेग | वाट; एक अश्वशक्ति लगभग 746 वाट |
| विद्युत ऊर्जा | शक्ति गुणा समय | किलोवाट घंटा, व्यापारिक मात्रक; एक किलोवाट घंटा बराबर 36 लाख जूल |
एक रूप से दूसरे रूप में ऊर्जा का बदलना
उपकरण वास्तव में ऊर्जा परिवर्तक ही हैं, और किसी उपकरण को उसके रूपांतरण से मिलाना एक अंक का सामान्य प्रश्न है। विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है और डायनेमो इसका उल्टा करता है। सेल या बैटरी रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलती है, जबकि आवेशन इस क्रम को उलट देता है। माइक्रोफोन ध्वनि को विद्युत ऊर्जा में बदलता है और लाउडस्पीकर उसे वापस ध्वनि में। सौर सेल प्रकाश को विद्युत ऊर्जा में बदलता है, हरी पत्ती प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश को रासायनिक ऊर्जा में बदलती है, और विद्युत बल्ब विद्युत ऊर्जा को प्रकाश के साथ काफी ऊष्मा में भी बदल देता है। इनमें से हर स्थिति में पहले और बाद की कुल ऊर्जा समान रहती है; केवल रूप बदलता है, और जिसे हानि कहते हैं वह ऊष्मा के रूप में वातावरण में चली जाती है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय के अधिकांश प्रश्न मात्रक, सूत्र और शून्य कार्य की स्थितियों पर एक पंक्ति के होते हैं। कार्य या शक्ति का एसआई मात्रक, एक अश्वशक्ति का मान, किलोवाट घंटा और जूल का संबंध तथा चाल दोगुनी करने पर गतिज ऊर्जा पर प्रभाव, यही सामान्य प्रश्न हैं। सबसे प्रिय जाल कार्य का रोजमर्रा वाला अर्थ है: भार थामे खड़ा रहना, न हिलने वाली दीवार को धकेलना अथवा सिर पर बोझ लेकर समतल पर चलना, जहाँ वैज्ञानिक उत्तर शून्य है। दूसरा जाल शक्ति और ऊर्जा के मात्रक को मिला देना है, क्योंकि किलोवाट घंटा ऊर्जा का मात्रक है, शक्ति का नहीं। डायनेमो, मोटर, माइक्रोफोन और सौर सेल जैसे उपकरणों का रूपांतरण से मिलान भी नियमित रूप से पूछा जाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कार्य और ऊर्जा का एसआई मात्रक | जूल; एक जूल बराबर एक न्यूटन गुणा एक मीटर |
|---|---|
| कार्य का सीजीएस मात्रक | अर्ग; एक जूल बराबर एक करोड़ अर्ग |
| गतिज ऊर्जा | द्रव्यमान और चाल के वर्ग के गुणनफल की आधी |
| स्थितिज ऊर्जा | द्रव्यमान गुणा गुरुत्वीय त्वरण गुणा ऊँचाई |
| शक्ति का एसआई मात्रक | वाट; एक वाट बराबर एक जूल प्रति सेकंड |
| अश्वशक्ति | एक अश्वशक्ति लगभग 746 वाट के बराबर |
| ऊर्जा का व्यापारिक मात्रक | किलोवाट घंटा; एक किलोवाट घंटा बराबर 36 लाख जूल |
| कैलोरी | एक कैलोरी लगभग 4.2 जूल |
| इलेक्ट्रॉन वोल्ट | लगभग 1.6 गुणा 10 की घात ऋण 19 जूल |
| शून्य कार्य | जब बल, विस्थापन अथवा दोनों के बीच के कोण की कोज्या शून्य हो |
| कार्य का विमीय सूत्र | द्रव्यमान गुणा लंबाई का वर्ग गुणा समय की घात ऋण दो |
| द्रव्यमान ऊर्जा संबंध | ऊर्जा बराबर द्रव्यमान गुणा प्रकाश की चाल का वर्ग, आइंस्टीन द्वारा |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
कार्य का एसआई मात्रक क्या है?
- A.न्यूटन
- B.जूल
- C.वाट
- D.पास्कल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जूल
व्याख्या
सही उत्तर B, जूल है। कार्य बल और विस्थापन का गुणनफल है, इसलिए उसका मात्रक न्यूटन मीटर होता है, जिसे जूल नाम दिया गया है; एक जूल कार्य तब होता है जब एक न्यूटन का बल किसी वस्तु को अपनी दिशा में एक मीटर खिसका दे। ऊर्जा भी इसी मात्रक में मापी जाती है, क्योंकि किया गया कार्य वास्तव में स्थानांतरित ऊर्जा ही है।
विकल्प A, न्यूटन केवल बल का एसआई मात्रक है। विकल्प C, वाट शक्ति का मात्रक है, अर्थात कार्य करने की दर का, और वह एक जूल प्रति सेकंड के बराबर होता है। विकल्प D, पास्कल दाब का मात्रक है और एक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर के बराबर है। जो विद्यार्थी जूल और वाट में भ्रम करते हैं वे प्रश्नपत्र के अगले ही प्रश्न में अंक गँवा देते हैं, इसलिए जोड़ी इस तरह याद रखें: कार्य जूल में और शक्ति वाट में।
बल और विस्थापन के बीच कोण कितना होने पर किया गया कार्य शून्य होता है?
- A.0 अंश
- B.45 अंश
- C.90 अंश
- D.180 अंश
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 90 अंश
व्याख्या
सही उत्तर C, 90 अंश है। कार्य बल गुणा विस्थापन गुणा दोनों के बीच के कोण की कोज्या होता है, और नब्बे अंश की कोज्या शून्य है, इसलिए गति के लंबवत लगने वाला बल कोई कार्य नहीं करता। यही कारण है कि वृत्तीय गति में अभिकेंद्र बल कार्य नहीं करता और सिर पर बोझ लेकर समतल पर चलने वाला व्यक्ति गुरुत्व के विरुद्ध कार्य नहीं करता।
विकल्प A, शून्य अंश पर कार्य अधिकतम धनात्मक होता है, क्योंकि शून्य की कोज्या एक है और बल तथा विस्थापन एक ही दिशा में हैं। विकल्प B, पैंतालीस अंश पर आंशिक धनात्मक कार्य होता है, क्योंकि कोज्या लगभग 0.707 है। विकल्प D, 180 अंश पर कार्य अधिकतम ऋणात्मक होता है, जैसे गति का विरोध करता घर्षण। कोज्या के ये चार मान, एक, 0.707, शून्य और ऋण एक, याद कर लें तो इस वर्ग के सभी प्रश्न सध जाते हैं।
द्रव्यमान m की वस्तु जो v चाल से चल रही है, उसकी गतिज ऊर्जा का सूत्र क्या है?
- A.द्रव्यमान गुणा गुरुत्वीय त्वरण गुणा ऊँचाई
- B.द्रव्यमान और चाल के वर्ग के गुणनफल की आधी
- C.द्रव्यमान गुणा चाल
- D.द्रव्यमान गुणा चाल का वर्ग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. द्रव्यमान और चाल के वर्ग के गुणनफल की आधी
व्याख्या
सही उत्तर B, द्रव्यमान और चाल के वर्ग के गुणनफल की आधी है। गतिज ऊर्जा वह ऊर्जा है जो वस्तु को उसकी गति के कारण प्राप्त होती है, और वह चाल के वर्ग के साथ बढ़ती है, इसलिए दोगुनी चाल से चलती वस्तु के पास चार गुनी गतिज ऊर्जा होती है।
विकल्प A पृथ्वी की सतह के पास गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक है, अर्थात द्रव्यमान गुणा गुरुत्वीय त्वरण गुणा ऊँचाई, जो गति पर नहीं स्थिति पर निर्भर करता है। विकल्प C, द्रव्यमान गुणा चाल वस्तु का रैखिक संवेग है, जो सदिश राशि है और किलोग्राम मीटर प्रति सेकंड में मापी जाती है, ऊर्जा नहीं। विकल्प D में आधे का गुणक छूट गया है और यही इस प्रश्न की सामान्य असावधानी है। यह भी याद रखें कि गतिज ऊर्जा को संवेग के वर्ग बटा दो गुना द्रव्यमान के रूप में भी लिखा जा सकता है।
शक्ति का एसआई मात्रक क्या है?
- A.जूल
- B.वाट
- C.न्यूटन सेकंड
- D.किलोवाट घंटा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. वाट
व्याख्या
सही उत्तर B, वाट है। शक्ति कार्य करने की दर है, अर्थात कार्य को लगे समय से भाग देने पर मिलने वाली राशि, इसलिए उसका मात्रक जूल प्रति सेकंड है, जिसे जेम्स वाट के नाम पर वाट कहा जाता है। एक किलोवाट की मशीन प्रत्येक सेकंड में एक हजार जूल कार्य करती है।
विकल्प A, जूल कार्य या ऊर्जा मापता है, यह नहीं कि वह कितनी तेजी से दी जा रही है। विकल्प C, न्यूटन सेकंड आवेग तथा संवेग का मात्रक है। विकल्प D, किलोवाट घंटा नाम में वाट होने के बावजूद ऊर्जा का मात्रक है, क्योंकि वह शक्ति और समय का गुणनफल है; यही बिजली का व्यापारिक मात्रक है और 36 लाख जूल के बराबर होता है। कई प्रश्नपत्रों में वाट और किलोवाट घंटा जानबूझकर साथ रखे जाते हैं, इसलिए दर और मात्रा का अंतर स्पष्ट रखें।
एक अश्वशक्ति लगभग कितने वाट के बराबर होती है?
- A.100 वाट
- B.500 वाट
- C.746 वाट
- D.1000 वाट
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 746 वाट
व्याख्या
सही उत्तर C, 746 वाट है। अश्वशक्ति शक्ति का पुराना मात्रक है, जो आज भी मोटरों और वाहनों की क्षमता बताने में चलता है, और एक अश्वशक्ति को लगभग 746 वाट अर्थात लगभग पौन किलोवाट माना जाता है।
विकल्प A, 100 वाट पुराने तंतु बल्ब की क्षमता के आसपास है और अश्वशक्ति से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प B, 500 वाट केवल आधा किलोवाट है और गोल अंक होने के कारण भ्रम के लिए रखा गया है। विकल्प D, 1000 वाट एक किलोवाट है; सामान्य भूल यह है कि अश्वशक्ति और किलोवाट को बराबर मान लिया जाए, जबकि एक किलोवाट लगभग 1.34 अश्वशक्ति के बराबर होता है। 746 का अंक ठीक ठीक याद रखें, क्योंकि प्रश्न उल्टा भी पूछा जाता है कि इतनी अश्वशक्ति की मोटर कितने वाट खर्च करेगी।
विद्युत ऊर्जा का व्यापारिक मात्रक कौन सा है?
- A.जूल
- B.वाट
- C.किलोवाट घंटा
- D.अर्ग
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. किलोवाट घंटा
व्याख्या
सही उत्तर C, किलोवाट घंटा है। घरेलू बिजली का बिल इन्हीं मात्रकों में बनता है, और एक किलोवाट घंटा, जिसे बोलचाल में एक यूनिट कहते हैं, वह ऊर्जा है जो एक किलोवाट का उपकरण एक घंटे चलने पर खर्च करता है; एसआई में वह 36 लाख जूल के बराबर है।
विकल्प A, जूल ऊर्जा का एसआई मात्रक तो है पर बिल बनाने के लिए बहुत छोटा है, क्योंकि एक पंखा भी एक शाम में लाखों जूल खर्च कर देता है। विकल्प B, वाट शक्ति मापता है, ऊर्जा नहीं, इसलिए उसका बिल बन ही नहीं सकता। विकल्प D, अर्ग कार्य का सीजीएस मात्रक है और उससे भी छोटा है, क्योंकि एक जूल में एक करोड़ अर्ग होते हैं। प्रश्न प्रायः यह भी पूछा जाता है कि एक किलोवाट घंटा कितने जूल के बराबर है, इसलिए नाम के साथ 36 लाख का अंक भी याद रखें।
यदि किसी गतिशील वस्तु की चाल दोगुनी कर दी जाए तो उसकी गतिज ऊर्जा कितनी हो जाएगी?
- A.दोगुनी
- B.चार गुनी
- C.आधी
- D.अपरिवर्तित
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चार गुनी
व्याख्या
सही उत्तर B, चार गुनी है। गतिज ऊर्जा द्रव्यमान और चाल के वर्ग के गुणनफल की आधी होती है, इसलिए चाल को दो से गुणा करने पर ऊर्जा दो के वर्ग अर्थात चार से गुणा हो जाती है। यदि चाल तिगुनी कर दी जाए तो ऊर्जा नौ गुनी हो जाएगी।
विकल्प A, दोगुनी तब सही होता जब ऊर्जा चाल के सीधे अनुपात में बढ़ती, जो संवेग के साथ होता है, गतिज ऊर्जा के साथ नहीं। विकल्प C, आधी इस स्थिति में किसी राशि पर लागू नहीं होती और केवल ध्यान भटकाने के लिए है। विकल्प D, अपरिवर्तित तभी सही होता जब चाल बदली ही न हो, जैसे एकसमान वृत्तीय गति में। यही संबंध बताता है कि वाहन की रोक दूरी चाल बढ़ने पर तेजी से क्यों बढ़ती है, और सड़क सुरक्षा वाले प्रश्न भी इसी बिंदु का उपयोग करते हैं।
डायनेमो में ऊर्जा का रूपांतरण किस रूप में होता है?
- A.विद्युत ऊर्जा से यांत्रिक ऊर्जा में
- B.यांत्रिक ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा में
- C.रासायनिक ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा में
- D.प्रकाश ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा में
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. यांत्रिक ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा में
व्याख्या
सही उत्तर B, यांत्रिक ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा में है। डायनेमो अर्थात जनित्र को गिरते जल, भाप या साइकिल के पहिये जैसे किसी यांत्रिक साधन से घुमाया जाता है, और चुंबकीय क्षेत्र में कुंडली के घूमने से विद्युत चुंबकीय प्रेरण द्वारा धारा उत्पन्न होती है।
विकल्प A विद्युत मोटर का वर्णन है, जो डायनेमो के ठीक उल्टा काम करती है और पंखे, पंप तथा मिक्सर चलाती है। विकल्प C सेल या बैटरी का वर्णन है, जिसमें रासायनिक अभिक्रिया परिपथ में धारा बहाती है। विकल्प D सौर सेल का वर्णन है, जो सूर्य के प्रकाश को सीधे विद्युत में बदल देता है। उपकरण और रूपांतरण की जोड़ियाँ हर वर्ष पूछी जाती हैं, इसलिए माइक्रोफोन को ध्वनि से विद्युत और लाउडस्पीकर को विद्युत से ध्वनि के रूप में भी याद रखें।
कार्य ऊर्जा प्रमेय के अनुसार परिणामी बल द्वारा किया गया कार्य किसके परिवर्तन के बराबर होता है?
- A.संवेग
- B.गतिज ऊर्जा
- C.स्थितिज ऊर्जा
- D.शक्ति
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गतिज ऊर्जा
व्याख्या
सही उत्तर B, गतिज ऊर्जा है। कार्य ऊर्जा प्रमेय कहती है कि किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य उसकी अंतिम और आरंभिक गतिज ऊर्जाओं के अंतर के बराबर होता है, इसीलिए वस्तु को तेज करने वाला धक्का धनात्मक कार्य करता है जबकि उसे धीमा करने वाला घर्षण ऋणात्मक कार्य करता है।
विकल्प A, संवेग आवेग से बदलता है, अर्थात बल और उसके लगने के समय के गुणनफल से, जो एक भिन्न संबंध है। विकल्प C, स्थितिज ऊर्जा गुरुत्व जैसे संरक्षी बल के विरुद्ध किए गए कार्य से बदलती है, और यह प्रमेय उन शब्दों में नहीं कही जाती। विकल्प D, शक्ति एक दर है और उसे कार्य जैसी मात्रा के बराबर नहीं रखा जा सकता। एक उपयोगी जाँच यह है कि जो बल कार्य नहीं करता, जैसे अभिकेंद्र बल, वह चाल और इसलिए गतिज ऊर्जा भी नहीं बदलता।
एक कुली सिर पर बोझ रखकर समतल प्लेटफार्म पर चलता है। गुरुत्व के विरुद्ध उसके द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
- A.शून्य
- B.अधिकतम
- C.बोझ के भार के बराबर
- D.ऋणात्मक
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. शून्य
व्याख्या
सही उत्तर A, शून्य है। बोझ को थामने के लिए वह जो बल लगाता है वह ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर है, जबकि प्लेटफार्म पर उसका विस्थापन क्षैतिज है, इसलिए बल और विस्थापन के बीच का कोण नब्बे अंश है और गुरुत्व के विरुद्ध किया गया कार्य शून्य है, भले ही वह कितना ही थक जाए।
विकल्प B, अधिकतम तब होता जब बल और विस्थापन एक ही दिशा में होते, जैसे बोझ लेकर सीढ़ियाँ चढ़ने पर। विकल्प C में बल और कार्य का भ्रम है; बोझ का भार न्यूटन में मापा जाने वाला बल है, जबकि कार्य उस बल और ऊर्ध्वाधर विस्थापन का गुणनफल होगा। विकल्प D, ऋणात्मक तब होता है जब बल गति का विरोध करे, जैसे घर्षण करता है। कार्य शब्द के सामान्य और वैज्ञानिक अर्थ का अंतर समझाने वाला यही सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है।
किसी मीनार की चोटी पर थामे गए पत्थर की ऊर्जा पूर्णतः किस रूप में होती है?
- A.गतिज ऊर्जा
- B.स्थितिज ऊर्जा
- C.आधी गतिज और आधी स्थितिज
- D.ऊष्मा ऊर्जा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. स्थितिज ऊर्जा
व्याख्या
सही उत्तर B, स्थितिज ऊर्जा है। ऊँचाई पर विरामावस्था में रखे पत्थर में कोई गति नहीं है, इसलिए गतिज ऊर्जा शून्य है, पर उसमें गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा होती है, जो उसके द्रव्यमान, गुरुत्वीय त्वरण और मीनार की ऊँचाई के गुणनफल के बराबर होती है।
विकल्प A, गतिज ऊर्जा वही रूप है जिसमें गिरते समय यह स्थितिज ऊर्जा बदलती जाती है, और वह भूमि से टकराने के क्षण अधिकतम होती है। विकल्प C, दोनों का बराबर बँटवारा केवल उस बिंदु पर होता है जहाँ पत्थर आधी ऊँचाई गिर चुका हो, वायु प्रतिरोध को छोड़कर। विकल्प D, ऊष्मा ऊर्जा टकराव के बाद प्रकट होती है, जब यांत्रिक ऊर्जा बिखर जाती है। पूरे पतन में दोनों यांत्रिक रूपों का योग स्थिर रहता है, और यही ऊर्जा संरक्षण नियम का सरलतम उदाहरण है।
एक जूल कितने अर्ग के बराबर होता है?
- A.दस हजार
- B.एक लाख
- C.एक करोड़
- D.दस करोड़
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. एक करोड़
व्याख्या
सही उत्तर C, एक करोड़ है। अर्ग सीजीएस पद्धति में कार्य का मात्रक है, अर्थात एक डाइन बल का एक सेंटीमीटर तक कार्य, और चूँकि एक न्यूटन एक लाख डाइन के बराबर है तथा एक मीटर सौ सेंटीमीटर के, इसलिए एक जूल एक करोड़ अर्ग अर्थात 10 की घात सात अर्ग के बराबर निकलता है।
विकल्प A, दस हजार और विकल्प B, एक लाख वे अधूरे गुणनफल हैं जो केवल बल या केवल दूरी बदलने पर मिलते हैं, और प्रश्न बनाने वाला यही चूक अपेक्षित रखता है। विकल्प D, दस करोड़ में दस गुना अधिक हो गया है। सुरक्षित तरीका यह है कि दोनों राशियाँ बदलकर गुणा करें: एक लाख डाइन गुणा सौ सेंटीमीटर। इसे अध्याय के अन्य रूपांतरणों के साथ रखें, जैसे एक कैलोरी लगभग 4.2 जूल और एक किलोवाट घंटा 36 लाख जूल।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वृत्ताकार पथ पर समान चाल से घूमती वस्तु पर कार्य शून्य क्यों होता है?
वस्तु को वृत्त पर बनाए रखने वाला बल अभिकेंद्र बल है, जो सदैव केंद्र की ओर होता है, जबकि प्रत्येक क्षण विस्थापन स्पर्श रेखा के अनुदिश होता है। दोनों के बीच का कोण नब्बे अंश है और नब्बे अंश की कोज्या शून्य है, इसलिए कार्य शून्य हो जाता है। चाल और इसी कारण गतिज ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है, जो कार्य ऊर्जा प्रमेय के अनुरूप है।
किलोवाट घंटा शक्ति का मात्रक है या ऊर्जा का?
यह ऊर्जा का मात्रक है, शक्ति का नहीं, यद्यपि इसके नाम में वाट शब्द आता है। एक किलोवाट घंटा वह ऊर्जा है जो एक किलोवाट का उपकरण एक घंटे में खर्च करता है, और वह 36 लाख जूल के बराबर होती है। इसे व्यापारिक मात्रक या बोलचाल में बिजली की एक यूनिट कहते हैं, और बिजली का बिल इन्हीं यूनिटों के आधार पर बनता है।
किसी वस्तु की चाल दोगुनी कर दी जाए तो गतिज ऊर्जा का क्या होगा?
वह चार गुनी हो जाएगी, क्योंकि गतिज ऊर्जा चाल के वर्ग पर निर्भर करती है। चाल तिगुनी करने पर वह नौ गुनी हो जाती है। इसी कारण वाहन की रोक दूरी चाल की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ती है, और इसी कारण परीक्षक सूत्र सीधे पूछने के बजाय दोगुना, तिगुना या आधा जैसे शब्दों में प्रश्न बनाते हैं।
कार्य और शक्ति में क्या अंतर है?
कार्य यह बताता है कि कितना किया गया और शक्ति यह कि कितनी तेजी से किया गया। समान बोझ को समान सीढ़ियों तक ले जाने वाले दो श्रमिक बराबर कार्य करते हैं, पर जो पहले पहुँच जाता है उसकी शक्ति अधिक है। कार्य जूल में और शक्ति वाट में मापी जाती है, जहाँ एक वाट का अर्थ एक जूल प्रति सेकंड है, अर्थात शक्ति कार्य को लगे समय से भाग देने पर मिलती है।
डायनेमो और विद्युत मोटर में कौन सा ऊर्जा रूपांतरण होता है?
डायनेमो अर्थात जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है, जबकि विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है, अर्थात दोनों एक दूसरे के उल्टे हैं। ऐसी ही याद रखने योग्य जोड़ी है माइक्रोफोन, जो ध्वनि को विद्युत ऊर्जा में बदलता है, और लाउडस्पीकर, जो विद्युत ऊर्जा को पुनः ध्वनि में बदलता है।
स्रोत
- विज्ञान (कक्षा 9), कार्य तथा ऊर्जा अध्याय — एनसीईआरटी
- भौतिकी भाग एक (कक्षा 11), कार्य, ऊर्जा और शक्ति अध्याय — एनसीईआरटी



