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GK नोट्ससामान्य विज्ञानधातु और अधातु

धातु और अधातु: गुण, अयस्क और मिश्रधातुएँ

परीक्षाओं के लिए धातु और अधातु के पूर्ण नोट्स: गुण तथा अपवाद, सक्रियता श्रेणी, अयस्क और निष्कर्षण, मिश्रधातुएँ, संक्षारण, उपधातुएँ और सामान्य उपयोग।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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धातु और अधातु: गुण, अयस्क और मिश्रधातुएँ — GK24 title card
धातु और अधातु: गुण, अयस्क और मिश्रधातुएँ — GK24 title card

रसायन विज्ञान को ज्ञात तत्वों में अधिकांश धातुएँ हैं, एक छोटा समूह अधातुएँ हैं, और कुछ तत्व दोनों के बीच उपधातु के रूप में आते हैं। यह विभाजन नाम का विषय नहीं, व्यवहार का है: धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं, अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं, और इसके बाद आने वाला लगभग हर गुण, चमक से लेकर ऑक्साइड की प्रकृति तक, इसी एक अंतर से निकलता है। यह अध्याय एसएससी, रेलवे और राज्य परीक्षाओं में पूछे जाने वाले रसायन विज्ञान का बड़ा भाग देता है, क्योंकि इसका हर तथ्य एक पंक्ति में कहा जा सकता है।

भौतिक गुण और पूछे जाने वाले अपवाद

धातुएँ चमकदार, आघातवर्ध्य, तन्य, ध्वानिक, ताप और विद्युत की सुचालक, सामान्यतः घनी और उच्च गलनांक वाली होती हैं। अधातुएँ ठोस अवस्था में भंगुर, चमकहीन, अध्वानिक और कुचालक होती हैं। परीक्षा में नियम से अधिक अपवाद महत्व रखते हैं, क्योंकि प्रश्न वहीं से बनता है। पारा एकमात्र धातु है जो कमरे के ताप पर द्रव है। सोडियम और पोटैशियम इतने मृदु हैं कि चाकू से काटे जा सकते हैं, तथा गैलियम और सीजियम हाथ की गर्मी से पिघल जाते हैं। लीथियम सबसे हल्की धातु है और ऑस्मियम सबसे घनी। सोना सबसे अधिक आघातवर्ध्य और सबसे अधिक तन्य धातु है, इसीलिए एक ग्राम सोने से सैकड़ों मीटर लंबा तार खींचा जा सकता है। चाँदी विद्युत की सर्वोत्तम चालक है, उसके बाद ताँबा, और चाँदी ताप की भी सर्वोत्तम चालक है। अधातुओं में आयोडीन चमकदार है, ग्रेफाइट विद्युत का चालन करता है, और हीरा, जो कार्बन का दूसरा रूप है, सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ तथा ताप का उत्कृष्ट चालक है।

रासायनिक व्यवहार

धातुएँ विद्युत धनात्मक हैं: वे इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं, और उनके ऑक्साइड क्षारकीय होते हैं, जो घुलनशील होने पर लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। अधातुएँ विद्युत ऋणात्मक हैं: वे इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं, और उनके ऑक्साइड अम्लीय होते हैं, इसलिए कार्बन डाइऑक्साइड घुलकर कार्बोनिक अम्ल और सल्फर डाइऑक्साइड सल्फ्यूरस अम्ल देता है। एल्युमिनियम ऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड उभयधर्मी हैं, जो अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करते हैं, और यह जोड़ी सीधे पूछी जाती है। सक्रियता श्रेणी में ऊपर रखी धातु अपने से नीचे की धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है। याद रखने योग्य क्रम है पोटैशियम, सोडियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, जिंक, लोहा, सीसा, फिर हाइड्रोजन, फिर ताँबा, पारा, चाँदी, सोना और प्लैटिनम। हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ तनु अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करती हैं, नीचे की नहीं, इसीलिए ताँबा तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया नहीं करता। थर्माइट अभिक्रिया, जिसमें एल्युमिनियम चूर्ण आयरन ऑक्साइड को पिघले लोहे में अपचयित करता है, विस्थापन अभिक्रिया है और रेल की पटरियों की वेल्डिंग में प्रयुक्त होती है।

प्रमुख अयस्क

अयस्कसूत्रधातु
बॉक्साइटAl2O3 जल सहितएल्युमिनियम
हेमेटाइटFe2O3लोहा
मैग्नेटाइटFe3O4लोहा
कैलेमीनZnCO3जिंक
जिंक ब्लेंडZnSजिंक
गैलेनाPbSसीसा
सिनेबारHgSपारा
कॉपर पाइराइटCuFeS2ताँबा
कैसिटेराइटSnO2टिन

निष्कर्षण एक निश्चित क्रम से होता है। अयस्क को पहले सांद्रित किया जाता है, सल्फाइड अयस्कों के लिए फेन प्लवन विधि से और जहाँ कोई घटक चुंबकीय हो वहाँ चुंबकीय पृथक्करण से। इसके बाद कार्बोनेट अयस्क का निस्तापन होता है, अर्थात वायु की अनुपस्थिति में गर्म करना, और सल्फाइड अयस्क का भर्जन, अर्थात वायु में गर्म करना, और दोनों ऑक्साइड बन जाते हैं। ऑक्साइड को धातु में अपचयित किया जाता है, मध्यम सक्रिय धातुओं के लिए कार्बन द्वारा और अत्यधिक सक्रिय धातुओं के लिए विद्युत अपघटन द्वारा, इसीलिए एल्युमिनियम पिघले बॉक्साइट से विद्युत अपघटन द्वारा प्राप्त होता है, कार्बन अपचयन से कभी नहीं। अशुद्ध धातु का शोधन सामान्यतः विद्युत अपघटनी शोधन से होता है, जिसमें अशुद्ध धातु एनोड होती है और शुद्ध धातु कैथोड पर जमा होती है।

मिश्रधातुएँ

  • पीतल ताँबा और जिंक का मिश्रण है; काँसा ताँबा और टिन का। यह जोड़ी पूरे अध्याय में सर्वाधिक पूछी जाती है।
  • सोल्डर सीसा और टिन का मिश्रण है, जो कम गलनांक के कारण विद्युत तार जोड़ने में प्रयुक्त होता है।
  • स्टेनलेस स्टील लोहे के साथ क्रोमियम और निकल का मिश्रण है, इसीलिए वह जंग नहीं लगने देता।
  • ड्यूरालुमिन एल्युमिनियम के साथ ताँबा, मैग्नीशियम और मैंगनीज का मिश्रण है, और कम भार में मजबूती के कारण वायुयानों में प्रयुक्त होता है।
  • जर्मन सिल्वर ताँबा, जिंक और निकल का मिश्रण है, और इसमें चाँदी बिल्कुल नहीं होती।
  • घंटा धातु और गन मेटल दोनों ताँबा और टिन पर आधारित हैं, गन मेटल में जिंक भी मिलाया जाता है।
  • नाइक्रोम, जो निकल और क्रोमियम का मिश्रण है, उच्च प्रतिरोध रखता है और उपकरणों के तापन तत्वों में प्रयुक्त होता है।
  • अमलगम वह मिश्रधातु है जिसमें एक धातु पारा होती है।

संक्षारण और उसकी रोकथाम

संक्षारण वायु और आर्द्रता द्वारा धातु के धीरे-धीरे क्षय होने की प्रक्रिया है। लोहे पर जलयोजित आयरन ऑक्साइड के रूप में जंग लगती है, और जंग लगने के लिए ऑक्सीजन तथा जल दोनों आवश्यक हैं; शुष्क वायु में अथवा घुली वायु से मुक्त जल में लोहे पर जंग नहीं लगती। ताँबे पर क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट की हरी परत और चाँदी पर सिल्वर सल्फाइड की काली परत बनती है। संक्षारण को पेंट करके, तेल या ग्रीस लगाकर, विद्युत लेपन द्वारा, स्टेनलेस स्टील जैसी मिश्रधातु बनाकर, और यशदीकरण द्वारा रोका जाता है, जिसमें लोहे पर जिंक की परत चढ़ाई जाती है; जिंक लोहे की रक्षा उस स्थान पर भी करता है जहाँ परत खुरच गई हो, क्योंकि जिंक लोहे से अधिक सक्रिय है। एल्युमिनियम की रक्षा उसकी स्वयं की पतली ऑक्साइड परत करती है, जिसे एनोडीकरण नामक प्रक्रिया में जानबूझकर मोटा किया जाता है। सोडियम और पोटैशियम केरोसीन में रखे जाते हैं क्योंकि वे वायु और जल से तीव्र अभिक्रिया करते हैं, जबकि श्वेत फॉस्फोरस जल में रखा जाता है क्योंकि वह वायु में आग पकड़ लेता है।

उपधातुएँ और उपयोग

बोरॉन, सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक, एंटिमनी और टेल्यूरियम दोनों वर्गों के गुण दिखाते हैं और उपधातु कहलाते हैं; सिलिकॉन तथा जर्मेनियम अर्धचालक युक्तियों का आधार हैं। परीक्षक जिन उपयोगों को पूछते हैं उनमें हैं: विद्युत तारों के लिए ताँबा और एल्युमिनियम, पैकिंग के लिए एल्युमिनियम पन्नी, बहुत उच्च गलनांक के कारण बल्ब के तंतु के लिए टंगस्टन, थर्मामीटर में पारा, तथा अम्लराज, जो तीन भाग सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और एक भाग सांद्र नाइट्रिक अम्ल का मिश्रण है और सोना तथा प्लैटिनम को घोल देता है।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्नपत्र नियमों से अधिक अपवाद पूछते हैं: द्रव धातु, सबसे मृदु धातुएँ, सबसे हल्की और सबसे घनी, सबसे तन्य, सर्वोत्तम चालक, चमकदार अधातु और चालन करने वाली अधातु। अयस्क तथा धातु का सुमेलन लगभग निश्चित है, और मिश्रधातुओं की सूची भी, जिसमें पीतल बनाम काँसा मानक भ्रम है और जर्मन सिल्वर चाल है। निस्तापन बनाम भर्जन, उभयधर्मी ऑक्साइड, जंग लगने की शर्तें और यशदीकरण की विधि, तथा अम्लराज और उसका अनुपात, इन पर प्रश्न अपेक्षित हैं। सक्रियता श्रेणी से पूछा जाता है कि कौन धातु किसे विस्थापित करेगी, और ताँबा तनु अम्ल से हाइड्रोजन क्यों नहीं देता।

महत्वपूर्ण तथ्य

एकमात्र द्रव धातुपारा
सर्वाधिक तन्य और आघातवर्ध्य धातुसोना
ताप और विद्युत की सर्वोत्तम चालकचाँदी
सबसे हल्की धातुलीथियम
सर्वाधिक गलनांकटंगस्टन
सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थहीरा, कार्बन का अपररूप
विद्युत का चालन करने वाली अधातुग्रेफाइट
उभयधर्मी ऑक्साइडएल्युमिनियम ऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड
पीतलताँबा और जिंक
काँसाताँबा और टिन
स्टेनलेस स्टीललोहे के साथ क्रोमियम और निकल
अम्लराज3 भाग सांद्र HCl और 1 भाग सांद्र HNO3
यशदीकरणलोहे पर जिंक की परत चढ़ाना
भंडारणसोडियम और पोटैशियम केरोसीन में; श्वेत फॉस्फोरस जल में

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.सामान्य विज्ञानपूछा गया: उत्तर प्रदेश · 15 July 2018मध्यम

कैलेमीन किस धातु का अयस्क है?

  1. A.टिन
  2. B.मैग्नीशियम
  3. C.जिंक
  4. D.ताँबा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. जिंक

व्याख्या

सही उत्तर C, जिंक है। कैलेमीन जिंक कार्बोनेट है, और कार्बोनेट अयस्क होने के कारण उसे धातु में अपचयित करने से पहले निस्तापन द्वारा, अर्थात वायु की अनुपस्थिति में गर्म करके, ऑक्साइड में बदला जाता है। जिंक का दूसरा महत्वपूर्ण अयस्क जिंक ब्लेंड है, जो सल्फाइड है और जिसका भर्जन किया जाता है, निस्तापन नहीं। विकल्प A गलत है, क्योंकि टिन का मुख्य अयस्क कैसिटेराइट है, जो ऑक्साइड है। विकल्प B गलत है, क्योंकि मैग्नीशियम मैग्नेसाइट, डोलोमाइट तथा समुद्री जल से उसके क्लोराइड के रूप में प्राप्त होता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि ताँबा मुख्यतः कॉपर पाइराइट और क्यूप्राइट से मिलता है। दो परिभाषाएँ तैयार रखें: निस्तापन कार्बोनेट अयस्क को वायु के बिना गर्म करना है, और भर्जन सल्फाइड अयस्क को वायु में गर्म करना, तथा दोनों से ऑक्साइड बनता है।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 12 Feb 2019, Shift 2आसान

निम्नलिखित में से कौन मिश्रधातु नहीं है?

  1. A.सोल्डर
  2. B.चाँदी
  3. C.काँसा
  4. D.पीतल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. चाँदी

व्याख्या

सही उत्तर B, चाँदी है। चाँदी एक तत्व है, शुद्ध धातु है जिसका आवर्त सारणी में अपना स्थान है, इसलिए वह मिश्रधातु नहीं हो सकती; मिश्रधातु दो या अधिक धातुओं का, अथवा किसी धातु और कार्बन जैसी अधातु का समांगी मिश्रण होती है। विकल्प A, सोल्डर सीसा और टिन की मिश्रधातु है, जिसका कम गलनांक विद्युत तार जोड़ने में उपयोगी है। विकल्प C, काँसा ताँबा और टिन की मिश्रधातु है, जिसके नाम पर मानव इतिहास का एक युग पड़ा। विकल्प D, पीतल ताँबा और जिंक की मिश्रधातु है, जो बर्तन, फिटिंग और वाद्ययंत्रों में प्रयुक्त होती है। यहाँ जाल जर्मन सिल्वर है, जिसमें ताँबा, जिंक और निकल होते हैं और चाँदी बिल्कुल नहीं होती, इसलिए नाम के बावजूद वह मिश्रधातु है, जबकि चाँदी स्वयं नहीं।

Q3.सामान्य विज्ञानपूछा गया: दिल्ली · 16 March 2022, shift 3आसान

निम्नलिखित में से सबसे अधिक तन्य धातु कौन-सी है?

  1. A.सोना
  2. B.ताँबा
  3. C.चाँदी
  4. D.लोहा
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सोना

व्याख्या

सही उत्तर A, सोना है। तन्यता का अर्थ है तार के रूप में खींचे जाने का गुण, और सोना ज्ञात धातुओं में सबसे अधिक तन्य है; वह सबसे अधिक आघातवर्ध्य भी है, इसलिए बहुत कम मात्रा से अत्यंत पतली चादर पीटी जा सकती है अथवा बहुत लंबा तार खींचा जा सकता है। विकल्प C, चाँदी तन्यता में इसके बाद आती है और ताप तथा विद्युत दोनों की सर्वोत्तम चालक है, इसीलिए दोनों विशेषताओं में भ्रम होता है; याद रखें कि चालन में चाँदी आगे है और तन्यता तथा आघातवर्ध्यता में सोना। विकल्प B, ताँबा घरेलू वायरिंग के तार बनाने योग्य तन्य है, परंतु सोने से बहुत कम। विकल्प D, लोहा गर्म अवस्था में तन्य होता है, परंतु तुलनात्मक रूप से कठोर है और उसका महत्व मजबूती के कारण है, खींचे जाने के कारण नहीं।

Q4.सामान्य विज्ञानपूछा गया: उत्तर प्रदेश · 3 July 2022आसान

पीतल किसकी मिश्रधातु है?

  1. A.ताँबा और टिन
  2. B.ताँबा और निकल
  3. C.ताँबा और लोहा
  4. D.ताँबा और जिंक
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. ताँबा और जिंक

व्याख्या

सही उत्तर D, ताँबा और जिंक है। पीतल में ताँबे की सुघड़ता और जिंक की कठोरता दोनों आ जाती हैं, वह संक्षारण रोकता है और ढालने में सरल है, इसीलिए वह बर्तन, ताले, नल, फिटिंग और वायु वाद्ययंत्रों में प्रयुक्त होता है। विकल्प A, ताँबा और टिन काँसा है, और पीतल तथा काँसे की जोड़ी इस अध्याय में सर्वाधिक भ्रम पैदा करती है, इसलिए जिंक को पीतल के साथ और टिन को काँसे के साथ बाँध लें। विकल्प B, ताँबा और निकल क्यूप्रोनिकल है, जो सिक्कों और संघनित्र नलिकाओं में प्रयुक्त होता है। विकल्प C, ताँबा और लोहा इस प्रकार की मानक मिश्रधातु नहीं है, यद्यपि कॉपर पाइराइट अयस्क में लोहा और ताँबा साथ मिलते हैं। इनके साथ ये भी याद रखें: जर्मन सिल्वर ताँबा, जिंक और निकल; गन मेटल ताँबा, टिन और जिंक; तथा घंटा धातु में ताँबे के साथ टिन का अधिक अनुपात।

Q5.सामान्य विज्ञानआसान

कमरे के ताप पर कौन-सी धातु द्रव अवस्था में होती है?

  1. A.सोडियम
  2. B.पारा
  3. C.सीसा
  4. D.टंगस्टन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पारा

व्याख्या

सही उत्तर B, पारा है। पारा एकमात्र धातु है जो साधारण कमरे के ताप पर द्रव रहती है, इसीलिए उसका उपयोग लंबे समय तक थर्मामीटर और बैरोमीटर में होता रहा; वही धातु अमलगम भी बनाती है, अर्थात ऐसी मिश्रधातुएँ जिनमें पारा एक घटक होता है। विकल्प A, सोडियम ठोस है, यद्यपि बहुत मृदु है जिसे चाकू से काटा जा सकता है और जिसे केरोसीन में रखना पड़ता है क्योंकि वह वायु तथा जल से तीव्र अभिक्रिया करता है। विकल्प C, सीसा मृदु और घना ठोस है जिसका गलनांक कम है, परंतु वह कमरे के ताप पर द्रव नहीं होता। विकल्प D, टंगस्टन का गलनांक धातुओं में सबसे अधिक है, इसीलिए वह तापदीप्त बल्ब के तंतु में प्रयुक्त होता है। अधातुओं में ब्रोमीन कमरे के ताप पर द्रव रहती है, तथा गैलियम और सीजियम हाथ की गर्मी से पिघलने वाली धातुएँ हैं।

Q6.सामान्य विज्ञानमध्यम

सोने को घोलने वाला अम्लराज सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का किस अनुपात में मिश्रण है?

  1. A.1:1
  2. B.1:3
  3. C.3:1
  4. D.2:3
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 3:1

व्याख्या

सही उत्तर C, 3:1 है। अम्लराज तीन भाग सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और एक भाग सांद्र नाइट्रिक अम्ल का मिश्रण है, और इसका नाम राजकीय जल के अर्थ में है, क्योंकि यह मिश्रण सोना तथा प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुओं पर भी प्रभाव करता है, जिन्हें कोई भी अम्ल अकेले नहीं घोल सकता। विकल्प B, 1:3 वही दो अम्ल उल्टे क्रम में हैं और यह सबसे आम गलत उत्तर है, इसलिए ध्यान रखें कि अधिक भाग हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का होता है। विकल्प A और विकल्प D इस प्रकार के किसी मानक प्रयोगशाला अभिकर्मक से मेल नहीं खाते। रसायन एक पंक्ति में समझें: नाइट्रिक अम्ल सोने का ऑक्सीकरण करता है और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से मिला क्लोराइड बने आयनों को विलयन में रखता है, अर्थात प्रत्येक अम्ल वह करता है जो दूसरा नहीं कर सकता।

Q7.सामान्य विज्ञानमध्यम

विद्युत की सर्वोत्तम चालक धातु कौन-सी है?

  1. A.ताँबा
  2. B.एल्युमिनियम
  3. C.चाँदी
  4. D.सोना
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. चाँदी

व्याख्या

सही उत्तर C, चाँदी है। चाँदी की विद्युत चालकता सभी धातुओं में सर्वाधिक है और ताप चालकता भी सर्वाधिक है, परंतु वह महँगी है और धूमिल हो जाती है, इसलिए उसका उपयोग केवल विशेष संपर्कों और उपकरणों में होता है। विकल्प A, ताँबा इसके बाद आता है और वास्तव में घरेलू तथा औद्योगिक वायरिंग में यही प्रयुक्त होता है, क्योंकि उसमें उच्च चालकता, उचित लागत और अच्छी तन्यता तीनों हैं; जो विद्यार्थी गुण के स्थान पर दैनिक उपयोग से उत्तर देते हैं वे इसे चुन लेते हैं। विकल्प B, एल्युमिनियम हल्का और सस्ता चालक है जो ऊपरी संचरण लाइनों में प्रयुक्त होता है, जहाँ भार अधिक महत्वपूर्ण है। विकल्प D, सोना अच्छा चालन करता है और संक्षारित नहीं होता, इसलिए वह सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक संपर्कों पर चढ़ाया जाता है, परंतु वह चाँदी और ताँबे से नीचे है। क्रम याद रखें: चाँदी, ताँबा, सोना, एल्युमिनियम।

Q8.सामान्य विज्ञानमध्यम

गैलेना किस धातु का अयस्क है?

  1. A.सीसा
  2. B.पारा
  3. C.एल्युमिनियम
  4. D.लोहा
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सीसा

व्याख्या

सही उत्तर A, सीसा है। गैलेना लेड सल्फाइड है, वह मुख्य अयस्क जिससे सीसा प्राप्त होता है; सल्फाइड होने के कारण उसे फेन प्लवन विधि से सांद्रित किया जाता है और फिर अपचयन से पहले वायु में भर्जित करके ऑक्साइड बनाया जाता है। विकल्प B, पारा सिनेबार से प्राप्त होता है, जो मर्करी सल्फाइड है, और ये दोनों सल्फाइड सुमेलन प्रश्नों में प्रायः साथ रखे जाते हैं। विकल्प C, एल्युमिनियम बॉक्साइट से मिलता है, जो जलयोजित ऑक्साइड है, और एल्युमिनियम की अत्यधिक सक्रियता के कारण उसके ऑक्साइड का अपचयन विद्युत अपघटन से किया जाता है, कार्बन से नहीं। विकल्प D, लोहा हेमेटाइट और मैग्नेटाइट से मिलता है, जो दोनों ऑक्साइड हैं, और मैग्नेटाइट का पृथक्करण चुंबकीय विधि से होता है। अयस्क और धातु की जोड़ियाँ याद रखें: सीसे के लिए गैलेना, पारे के लिए सिनेबार, एल्युमिनियम के लिए बॉक्साइट।

Q9.सामान्य विज्ञानआसान

यशदीकरण में लोहे या इस्पात पर किस धातु की परत चढ़ाई जाती है?

  1. A.टिन
  2. B.जिंक
  3. C.क्रोमियम
  4. D.निकल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. जिंक

व्याख्या

सही उत्तर B, जिंक है। यशदीकरण में लोहे या इस्पात पर जिंक की परत चढ़ाई जाती है, सामान्यतः उसे पिघली धातु में डुबोकर, और यह परत लोहे की रक्षा दो प्रकार से करती है: वह वायु और आर्द्रता को रोकती है, तथा जिंक लोहे से अधिक सक्रिय होने के कारण उस स्थान पर भी स्वयं संक्षारित होता है जहाँ परत खुरच गई हो। विकल्प A, टिन का उपयोग खाद्य डिब्बों की टिनप्लेट में इस्पात पर परत चढ़ाने के लिए होता है, जिसे कलई करना कहते हैं, और वह केवल परत के अक्षत रहने तक रक्षा करता है। विकल्प C, क्रोमियम चमक तथा संक्षारण प्रतिरोध के लिए विद्युत लेपन द्वारा चढ़ाया जाता है और निकल के साथ स्टेनलेस स्टील में मिलाया भी जाता है। विकल्प D, निकल भी लेपन तथा मिश्रधातु की धातु है। याद रखें कि जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और आर्द्रता दोनों आवश्यक हैं।

Q10.सामान्य विज्ञानकठिन

निम्नलिखित में से कौन उभयधर्मी ऑक्साइड है?

  1. A.सोडियम ऑक्साइड
  2. B.एल्युमिनियम ऑक्साइड
  3. C.कार्बन डाइऑक्साइड
  4. D.सल्फर डाइऑक्साइड
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. एल्युमिनियम ऑक्साइड

व्याख्या

सही उत्तर B, एल्युमिनियम ऑक्साइड है। उभयधर्मी ऑक्साइड अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करके लवण बनाता है, और एल्युमिनियम ऑक्साइड ठीक यही करता है, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के प्रति क्षारक की तरह और सोडियम हाइड्रॉक्साइड के प्रति अम्ल की तरह व्यवहार करता है; जिंक ऑक्साइड दूसरा उभयधर्मी ऑक्साइड है जो परीक्षाओं में पूछा जाता है। विकल्प A, सोडियम ऑक्साइड सामान्य धातु ऑक्साइड है और इसलिए क्षारकीय है, जो जल में घुलकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड देता है। विकल्प C, कार्बन डाइऑक्साइड अधातु ऑक्साइड है और इसलिए अम्लीय है, जो जल में घुलकर कार्बोनिक अम्ल देता है, इसीलिए वह आर्द्र नीले लिटमस को लाल कर देता है। विकल्प D, सल्फर डाइऑक्साइड भी अम्लीय है और जल में सल्फ्यूरस अम्ल देता है। नियम और उसके दो अपवाद याद रखें।

Q11.सामान्य विज्ञानमध्यम

कौन-सी अधातु विद्युत की सुचालक है?

  1. A.सल्फर
  2. B.ग्रेफाइट
  3. C.फॉस्फोरस
  4. D.आयोडीन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ग्रेफाइट

व्याख्या

सही उत्तर B, ग्रेफाइट है। ग्रेफाइट कार्बन का अपररूप है जिसमें प्रत्येक परमाणु तीन अन्य परमाणुओं से बंधित रहता है, जिससे प्रत्येक परमाणु का एक इलेक्ट्रॉन परतों के बीच मुक्त रूप से चलने योग्य बचता है, इसलिए अधातु होते हुए भी वह विद्युत का चालन करता है; इसी कारण ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड तथा शुष्क सेलों में प्रयुक्त होता है। विकल्प A, सल्फर भंगुर और अचालक ठोस है, जो अधात्विक व्यवहार का मानक उदाहरण है। विकल्प C, फॉस्फोरस चालन नहीं करता और उसका श्वेत रूप जल में रखा जाता है क्योंकि वह वायु में जल उठता है। विकल्प D, आयोडीन वह अधातु है जो चमकदार है, अर्थात वह किसी दूसरे नियम का अपवाद है और यहाँ प्रिय भ्रामक विकल्प है। हीरे पर भी ध्यान दें, जो कार्बन का दूसरा अपररूप है: वह सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है और ताप का उत्कृष्ट चालन करता है, परंतु विद्युत का चालन नहीं करता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धातुएँ विद्युत की सुचालक क्यों होती हैं?

धातु में बाहरी इलेक्ट्रॉन किसी एक परमाणु से बँधे नहीं रहते, बल्कि धनायनों की जालक के बीच मुक्त रूप से चलते हैं। विभवांतर लगाने पर ये मुक्त इलेक्ट्रॉन एक दिशा में बहते हैं और वही धारा है। अधातुओं में ऐसे मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते, इसीलिए वे चालन नहीं करतीं, ग्रेफाइट अपवाद है।

निस्तापन और भर्जन में क्या अंतर है?

निस्तापन अयस्क को वायु की अनुपस्थिति अथवा सीमित वायु में तेज गर्म करना है, और यह कैलेमीन जैसे कार्बोनेट अयस्कों तथा जलयोजित अयस्कों के लिए प्रयुक्त होता है। भर्जन अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करना है, और यह गैलेना तथा जिंक ब्लेंड जैसे सल्फाइड अयस्कों के लिए प्रयुक्त होता है। दोनों अयस्क को अपचयन से पहले ऑक्साइड में बदल देते हैं।

एल्युमिनियम का निष्कर्षण कार्बन अपचयन से क्यों नहीं होता?

एल्युमिनियम सक्रियता श्रेणी में ऊपर है और ऑक्सीजन को इतनी मजबूती से पकड़ता है कि कार्बन उसे हटा नहीं सकता। इसलिए उसके ऑक्साइड का अपचयन पिघले अयस्क में विद्युत प्रवाहित करके किया जाता है, जिसे विद्युत अपघटनी अपचयन कहते हैं। यही तर्क सोडियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम पर भी लागू होता है।

यशदीकृत लोहा खुरचने पर भी जंग से क्यों बचा रहता है?

जिंक लोहे से अधिक सक्रिय है, इसलिए जहाँ परत टूट गई हो वहाँ भी जिंक नीचे के लोहे के स्थान पर स्वयं संक्षारित होता है, जो बलिदानी सुरक्षा का रूप है। इसके विपरीत टिन की परत केवल अक्षत रहने तक रक्षा करती है, क्योंकि टिन लोहे से कम सक्रिय है।

उपधातु क्या होती हैं?

उपधातुएँ वे तत्व हैं जिनके गुण धातु और अधातु के बीच आते हैं: बोरॉन, सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक, एंटिमनी और टेल्यूरियम। वे धात्विक दिख सकती हैं परंतु भंगुर होती हैं, और विद्युत का चालन केवल मध्यम रूप से करती हैं, और इसी कारण सिलिकॉन तथा जर्मेनियम अर्धचालक के रूप में उपयोगी हैं।

स्रोत

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