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GK नोट्ससामान्य विज्ञानरासायनिक बंधन और अभिक्रियाएं

रासायनिक बंधन और अभिक्रियाएं: प्रकार, नियम और तथ्य

परीक्षाओं के लिए रासायनिक बंधन और अभिक्रियाओं के नोट्स: अष्टक नियम, आयनिक तथा सहसंयोजक बंधन, सिग्मा-पाई बंध, अणु आकृति, अभिक्रिया प्रकार, संक्षारण और उत्प्रेरक।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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रासायनिक बंधन और अभिक्रियाएं: प्रकार, नियम और तथ्य — GK24 title card
रासायनिक बंधन और अभिक्रियाएं: प्रकार, नियम और तथ्य — GK24 title card

परमाणु प्रायः अकेले नहीं रहते। उत्कृष्ट गैसों को छोड़कर हर परमाणु का बाह्यतम कोश अपूर्ण होता है और वह इलेक्ट्रॉन देकर, लेकर या साझा करके तब तक स्थायित्व पाता है जब तक निकटतम उत्कृष्ट गैस जैसी इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था न बना ले। इसके बाद परमाणुओं को जोड़े रखने वाला बल रासायनिक बंधन कहलाता है और उन्हीं बंधनों का पुनर्विन्यास रासायनिक अभिक्रिया है। एसएससी, रेलवे, रक्षा और राज्य परीक्षाओं में इस अध्याय से लगातार एक अंक वाले प्रश्न आते हैं, क्योंकि इसके नियम थोड़े हैं और उदाहरण निश्चित।

परमाणु बंधन क्यों बनाते हैं

कोसेल-लुईस दृष्टिकोण बंधन को केवल संयोजी इलेक्ट्रॉनों से समझाता है। परमाणु तब स्थायी होता है जब उसके बाह्यतम कोश में आठ इलेक्ट्रॉन हों, जिसे अष्टक नियम कहते हैं, अथवा हाइड्रोजन, हीलियम और लिथियम की स्थिति में दो, जिसे द्विक नियम कहते हैं। धातुओं में एक से तीन संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए उन्हें छोड़ना आसान लगता है; अधातुओं में पाँच से सात होते हैं, इसलिए उन्हें लेना या साझा करना आसान लगता है। बंधन आयनिक होगा या सहसंयोजक, यह मुख्यतः दोनों परमाणुओं की विद्युत ऋणात्मकता के अंतर पर निर्भर करता है।

आयनिक और सहसंयोजक बंधन की तुलना

बिंदुआयनिक या विद्युत संयोजक बंधनसहसंयोजक बंधन
कैसे बनता हैइलेक्ट्रॉनों का पूर्ण स्थानांतरणइलेक्ट्रॉन युग्मों की साझेदारी
किनके बीचएक धातु और एक अधातुदो अधातुएँ
उदाहरणNaCl, MgO, CaCl2H2, Cl2, CH4, H2O
गलनांकउच्चसामान्यतः निम्न
विद्युत चालनगलित या जलीय अवस्था मेंप्रायः नहीं
विलेयताजल तथा अन्य ध्रुवीय विलायकों मेंकार्बनिक विलायकों में

दो और प्रकार के बंधन पूछे जाते हैं। उपसहसंयोजक या दाता बंधन ऐसा सहसंयोजक बंधन है जिसमें साझा किए गए दोनों इलेक्ट्रॉन एक ही परमाणु से आते हैं, जैसे अमोनियम आयन और हाइड्रोनियम आयन में। धात्विक बंधन धनावेशित धातु आयनों और मुक्त इलेक्ट्रॉनों के समुद्र के बीच का आकर्षण है, इसीलिए धातुएँ ऊष्मा और विद्युत की चालक होती हैं तथा पीटकर चादर बनाई जा सकती हैं। इन सबसे दुर्बल हाइड्रोजन बंधन है, जो जल को असामान्य रूप से ऊँचा क्वथनांक देता है और बर्फ को जल पर तैरने देता है।

एकल, द्विक और त्रिक बंधन

जब इलेक्ट्रॉनों का एक युग्म साझा होता है तो बंधन एकल होता है, जैसे हाइड्रोजन और क्लोरीन अणुओं में। दो साझा युग्म द्विबंध बनाते हैं, जैसे ऑक्सीजन और एथिलीन में; तीन युग्म त्रिबंध बनाते हैं, जैसे नाइट्रोजन और एसिटिलीन में। अतिव्यापन की दृष्टि से एकल बंध एक सिग्मा बंध है, द्विबंध एक सिग्मा और एक पाई बंध है तथा त्रिबंध एक सिग्मा और दो पाई बंध। आमने-सामने अतिव्यापन से बना सिग्मा बंध पार्श्व अतिव्यापन से बने पाई बंध से अधिक प्रबल होता है। बेंजीन में छह कार्बन-कार्बन बंध, छह कार्बन-हाइड्रोजन बंध और वलय में तीन द्विबंध होते हैं, इसलिए उसमें बारह सिग्मा और तीन पाई बंध होते हैं।

सामान्य अणुओं की आकृति

अणु की आकृति केंद्रीय परमाणु के चारों ओर इलेक्ट्रॉन युग्मों के प्रतिकर्षण से तय होती है। मेथेन चतुष्फलकीय है और उसका बंध कोण लगभग 109.5 अंश है। अमोनिया में एक एकाकी युग्म होता है, इसलिए वह पिरामिडी है और उसका कोण लगभग 107 अंश है, तथा जल में दो एकाकी युग्म होने से वह मुड़ी हुई आकृति का है और कोण लगभग 104.5 अंश है। कार्बन डाइऑक्साइड रैखिक है और बोरॉन ट्राइफ्लोराइड त्रिकोणीय समतलीय।

रासायनिक अभिक्रियाएँ और उनके प्रकार

रासायनिक अभिक्रिया परमाणुओं को नए पदार्थों में पुनर्व्यवस्थित करती है और द्रव्यमान संरक्षण के कारण समीकरण संतुलित होना चाहिए। अभिक्रिया होने के संकेत हैं रंग बदलना, अवस्था बदलना, गैस निकलना, अवक्षेप बनना और ताप में परिवर्तन।

  • संयोजन अभिक्रिया: दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं, जैसे बिना बुझा चूना जल से क्रिया करके बुझा चूना देता है।
  • वियोजन अभिक्रिया: एक पदार्थ दो या अधिक में टूटता है। यह तापीय हो सकती है, जैसे चूना पत्थर गर्म करने पर बिना बुझा चूना और कार्बन डाइऑक्साइड देता है, वैद्युत हो सकती है, जैसे जल में, या प्रकाशीय, जैसे सिल्वर क्लोराइड धूप में धूसर हो जाता है।
  • विस्थापन अभिक्रिया: अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील को हटा देता है, जैसे लोहा कॉपर सल्फेट विलयन से ताँबा विस्थापित करता है या जस्ता तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया कर हाइड्रोजन देता है।
  • द्विविस्थापन अभिक्रिया: दो यौगिक अपने आयनों का आदान-प्रदान करते हैं। अवक्षेपण और उदासीनीकरण इसी में आते हैं; बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट बेरियम सल्फेट का श्वेत अवक्षेप देते हैं।
  • उपचयन और अपचयन: ऑक्सीजन का जुड़ना, हाइड्रोजन का हटना या इलेक्ट्रॉन का त्याग उपचयन है और इसका उल्टा अपचयन। दोनों सदा साथ होते हैं, इसलिए ऐसी अभिक्रियाएँ रेडॉक्स कहलाती हैं।

जो अभिक्रियाएँ ऊष्मा देती हैं वे ऊष्माक्षेपी हैं, जैसे श्वसन, दहन और चूने का बुझना; जो ऊष्मा लेती हैं वे ऊष्माशोषी हैं, जैसे प्रकाश संश्लेषण और चूना पत्थर का वियोजन।

ऑक्साइड, उत्प्रेरक और दैनिक प्रभाव

धातु ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय और अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं, पर कुछ धातु ऑक्साइड, विशेषकर एल्युमिनियम ऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड, अम्ल तथा क्षार दोनों से क्रिया करते हैं और उभयधर्मी कहलाते हैं। उत्प्रेरक स्वयं व्यय हुए बिना अभिक्रिया की दर बदल देता है: वनस्पति घी बनाने के लिए वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में निकल, अमोनिया के हैबर प्रक्रम में लोहा तथा सल्फ्यूरिक अम्ल के संपर्क प्रक्रम में वैनेडियम पेंटॉक्साइड काम आता है।

दो मंद उपचयन बार-बार पूछे जाते हैं। संक्षारण वायु और नमी से धातु का क्षय है; लोहे को जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और जल दोनों चाहिए और उससे जलयोजित आयरन ऑक्साइड बनता है, तथा इसे पेंट करके, तेल लगाकर, जस्ते से यशदलेपन करके या मिश्रातु बनाकर, जैसे स्टेनलेस स्टील, रोका जाता है। विकृतगंधिता भोजन में वसा और तेलों का उपचयन है, जिससे दुर्गंध और बुरा स्वाद आता है, और इसे प्रतिऑक्सीकारकों, वायुरोधी पैकिंग तथा पैकेट में नाइट्रोजन भरकर टाला जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से

इस अध्याय से प्रश्नपत्र दो तरह के प्रश्न बनाते हैं। पहला वर्गीकरण माँगता है: बंधन का नाम, अभिक्रिया का प्रकार, या चार समीकरणों में से बेमेल छाँटना। दूसरा कोई निश्चित तथ्य पूछता है: मेथेन या जल की आकृति, बेंजीन में सिग्मा और पाई बंधों की संख्या, किसी औद्योगिक प्रक्रम का उत्प्रेरक, या उभयधर्मी ऑक्साइड। तनु अम्लों के साथ धातुओं की सक्रियता श्रेणी पर प्रश्न हर वर्ष आते हैं। जाल हैं उदासीनीकरण को विस्थापन कह देना, उपसहसंयोजक बंधन को इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण मान लेना और बेंजीन के बंध गिनते समय छह कार्बन-हाइड्रोजन सिग्मा बंध भूल जाना।

महत्वपूर्ण तथ्य

अष्टक नियमबाह्यतम कोश में आठ इलेक्ट्रॉन होने पर परमाणु स्थायी; हाइड्रोजन, हीलियम और लिथियम को दो चाहिए
आयनिक बंधनइलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण, धातु और अधातु के बीच, जैसे NaCl, MgO, CaCl2
सहसंयोजक बंधनअधातुओं के बीच इलेक्ट्रॉन युग्मों की साझेदारी, जैसे H2, CH4, H2O
उपसहसंयोजक बंधनदोनों साझा इलेक्ट्रॉन एक ही परमाणु से, जैसे अमोनियम और हाइड्रोनियम आयन
त्रिबंधनाइट्रोजन अणु और एसिटिलीन, एक सिग्मा तथा दो पाई बंध
बेंजीनबारह सिग्मा बंध और तीन पाई बंध
आकृतियाँमेथेन चतुष्फलकीय 109.5 अंश, अमोनिया पिरामिडी 107 अंश, जल मुड़ा 104.5 अंश
उभयधर्मी ऑक्साइडएल्युमिनियम ऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड
हाइड्रोजनीकरण उत्प्रेरकनिकल, वनस्पति तेल से वनस्पति घी बनाने में
हैबर प्रक्रम उत्प्रेरकलोहा, अमोनिया के निर्माण में
जंगजलयोजित आयरन ऑक्साइड, जिसके लिए ऑक्सीजन और जल दोनों आवश्यक
विकृतगंधितावसा और तेलों का उपचयन; प्रतिऑक्सीकारक और नाइट्रोजन भरकर रोका जाता है

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 29 Aug 2018, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सी द्विविस्थापन अभिक्रिया नहीं है?

  1. A.BaCl2 + H2SO4 → BaSO4 + 2HCl
  2. B.2H2 + O2 → 2H2O
  3. C.CuSO4 + H2S → CuS + H2SO4
  4. D.NaOH + HCl → NaCl + H2O
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2H2 + O2 → 2H2O

व्याख्या

सही उत्तर B है। द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो यौगिक अपने आयनों का आदान-प्रदान करते हैं, इसलिए दोनों अभिकारकों का यौगिक होना आवश्यक है। यहाँ हाइड्रोजन और ऑक्सीजन तत्व हैं जो मिलकर एक ही उत्पाद जल बनाते हैं, अतः यह संयोजन अभिक्रिया है और साथ ही दहन तथा रेडॉक्स भी, किंतु द्विविस्थापन निश्चित रूप से नहीं। विकल्प A इसलिए गलत विकल्प है क्योंकि बेरियम क्लोराइड और सल्फ्यूरिक अम्ल आयन बदलकर बेरियम सल्फेट का श्वेत अवक्षेप तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल देते हैं, जो द्विविस्थापन का प्रचलित अवक्षेपण प्रकार है। विकल्प C गलत है क्योंकि कॉपर सल्फेट और हाइड्रोजन सल्फाइड आयन बदलकर काला कॉपर सल्फाइड तथा सल्फ्यूरिक अम्ल देते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल आयन बदलकर लवण और जल देते हैं, जो उदासीनीकरण है और द्विविस्थापन का ही विशेष रूप है। पहचान सरल है: दो यौगिक साथी बदल रहे हों।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 14 Aug 2018, Shift 1आसान

निम्नलिखित यौगिकों में से किसमें द्विबंध होता है?

  1. A.एथेन
  2. B.मेथेन
  3. C.एसिटिलीन
  4. D.एथिलीन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. एथिलीन

व्याख्या

सही उत्तर D, एथिलीन है। एथिलीन, जिसे एथीन भी कहते हैं, का सूत्र C2H4 है और उसके दोनों कार्बन परमाणु इलेक्ट्रॉनों के दो युग्म साझा करते हैं, अर्थात उनके बीच कार्बन-कार्बन द्विबंध है, जो एक सिग्मा और एक पाई बंध से बना है; यह सबसे सरल एल्कीन है। विकल्प A गलत है क्योंकि एथेन, C2H6, एल्केन है जिसमें दोनों कार्बन केवल एकल बंध से जुड़े हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि मेथेन, CH4, में केवल एक कार्बन परमाणु है जो चार हाइड्रोजन से एकल बंधों द्वारा जुड़ा है और उसमें कार्बन-कार्बन बंध हो ही नहीं सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि एसिटिलीन या एथाइन, C2H2, में त्रिबंध होता है, अर्थात तीन साझा युग्म जो एक सिग्मा और दो पाई बंध बनाते हैं, द्विबंध नहीं। क्रम याद रखें: एथेन एकल, एथिलीन द्विक और एसिटिलीन त्रिक, तथा द्विबंध और त्रिबंध वाले यौगिक असंतृप्त होते हैं।

Q3.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 13 Aug 2018, Shift 1कठिन

बेंजीन में सिग्मा और पाई बंधों की संख्या क्रमशः कितनी होती है?

  1. A.12 और 3
  2. B.3 और 3
  3. C.6 और 3
  4. D.9 और 3
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 12 और 3

व्याख्या

सही उत्तर A, 12 और 3 है। बेंजीन का सूत्र C6H6 है और उसमें छह कार्बन परमाणुओं की वलय होती है, जिनमें से प्रत्येक पर एक हाइड्रोजन लगा रहता है। पहले सिग्मा बंध गिनें: वलय के चारों ओर छह कार्बन-कार्बन बंध और छह कार्बन-हाइड्रोजन बंध मिलकर बारह सिग्मा बंध देते हैं। केकुले संरचना के अनुसार वलय में तीन कार्बन-कार्बन द्विबंध भी हैं, और चूँकि प्रत्येक द्विबंध एक सिग्मा तथा एक पाई से बनता है, अतिरिक्त अंश तीन पाई बंध हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि केवल तीन कहना बारह सिग्मा के ढाँचे की उपेक्षा करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि छह में केवल कार्बन-कार्बन सिग्मा बंध गिने गए हैं और छह कार्बन-हाइड्रोजन बंध छूट गए हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि नौ का संरचना में कोई आधार नहीं है। सामान्य नियम याद रखें: एकल बंध एक सिग्मा, द्विबंध एक सिग्मा और एक पाई तथा त्रिबंध एक सिग्मा और दो पाई।

Q4.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 9 Aug 2018, Shift 3मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा उभयधर्मी ऑक्साइड है?

  1. A.एल्युमिनियम ऑक्साइड
  2. B.आयरन (II) ऑक्साइड
  3. C.मैग्नीशियम ऑक्साइड
  4. D.कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. एल्युमिनियम ऑक्साइड

व्याख्या

सही उत्तर A, एल्युमिनियम ऑक्साइड है। उभयधर्मी ऑक्साइड अम्ल और क्षार दोनों से क्रिया करके लवण तथा जल देता है। एल्युमिनियम ऑक्साइड हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में घुलकर एल्युमिनियम क्लोराइड देता है और सोडियम हाइड्रॉक्साइड में घुलकर सोडियम एल्युमिनेट, अर्थात एक स्थिति में वह क्षार जैसा और दूसरी में अम्ल जैसा व्यवहार करता है। जिंक ऑक्साइड भी ऐसा ही करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि आयरन ऑक्साइड क्षारीय ऑक्साइड है, जो अम्लों से क्रिया करता है पर क्षारों से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि मैग्नीशियम ऑक्साइड प्रबल क्षारीय है; जल में घुलने पर वह क्षारीय विलयन देता है और केवल अम्लों से क्रिया करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड अधातु का विशिष्ट अम्लीय ऑक्साइड है, जो जल से कार्बोनिक अम्ल बनाता है और चूने के पानी जैसे क्षारों से क्रिया करता है। सबसे अधिक पूछे जाने वाले उभयधर्मी ऑक्साइड एल्युमिनियम और जस्ते के हैं।

Q5.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 21 Aug 2018, Shift 3आसान

वनस्पति तेल के हाइड्रोजनीकरण में निम्नलिखित में से किसे उत्प्रेरक के रूप में प्रयोग किया जाता है?

  1. A.Pb
  2. B.Ni
  3. C.H2
  4. D.He
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. Ni

व्याख्या

सही उत्तर B, Ni अर्थात निकल है। वनस्पति तेलों में असंतृप्त वसा अम्ल होते हैं जिनमें कार्बन-कार्बन द्विबंध रहते हैं, और जब लगभग 60 डिग्री सेल्सियस पर बारीक विभाजित निकल की उपस्थिति में तेल में हाइड्रोजन प्रवाहित की जाती है तो द्विबंध हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त हो जाते हैं और द्रव तेल अर्ध-ठोस वनस्पति घी में बदल जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि सीसा हाइड्रोजनीकरण का उत्प्रेरक नहीं है; कुछ अभिक्रियाओं में तो उसे उत्प्रेरक विष के रूप में प्रयोग किया जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि हाइड्रोजन वह अभिकारक है जो द्विबंध पर जुड़ता है, उत्प्रेरक नहीं, जबकि प्रश्न उस पदार्थ का है जो स्वयं व्यय हुए बिना अभिक्रिया तेज करे। विकल्प D गलत है क्योंकि हीलियम उत्कृष्ट गैस है, रासायनिक रूप से निष्क्रिय, और किसी ऐसी अभिक्रिया में भाग नहीं लेती। औद्योगिक उत्प्रेरक याद रखें: हाइड्रोजनीकरण में निकल, हैबर प्रक्रम में लोहा और संपर्क प्रक्रम में वैनेडियम पेंटॉक्साइड।

Q6.सामान्य विज्ञानआसान

एक परमाणु से दूसरे परमाणु को इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से बनने वाला रासायनिक बंधन कहलाता है:

  1. A.सहसंयोजक बंधन
  2. B.आयनिक बंधन
  3. C.उपसहसंयोजक बंधन
  4. D.हाइड्रोजन बंधन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आयनिक बंधन

व्याख्या

सही उत्तर B, आयनिक बंधन है। आयनिक या विद्युत संयोजक बंधन में धातु परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉन अधातु परमाणु को दे देता है; धातु धनायन बन जाती है और अधातु ऋणायन, तथा दोनों के बीच का स्थिर वैद्युत आकर्षण यौगिक को जोड़े रखता है, जैसे सोडियम क्लोराइड और मैग्नीशियम ऑक्साइड में। विकल्प A गलत है क्योंकि सहसंयोजक बंधन दो परमाणुओं के बीच, प्रायः दो अधातुओं के बीच, इलेक्ट्रॉन युग्मों की साझेदारी से बनता है और उसमें स्थानांतरण होता ही नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि उपसहसंयोजक बंधन ऐसा विशेष सहसंयोजक बंधन है जिसमें दोनों साझा इलेक्ट्रॉन एक ही परमाणु से आते हैं, जैसे अमोनियम आयन में; वहाँ भी इलेक्ट्रॉन साझा होते हैं, स्थानांतरित नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि हाइड्रोजन बंधन अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक परमाणु से जुड़े हाइड्रोजन और दूसरे ऐसे परमाणु के एकाकी युग्म के बीच का दुर्बल आकर्षण है।

Q7.सामान्य विज्ञानमध्यम

नाइट्रोजन अणु में दोनों परमाणुओं के बीच कितने इलेक्ट्रॉन युग्म साझा होते हैं?

  1. A.एक
  2. B.दो
  3. C.तीन
  4. D.चार
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. तीन

व्याख्या

सही उत्तर C, तीन है। नाइट्रोजन परमाणु में पाँच संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं और अष्टक पूरा करने के लिए तीन और चाहिए, इसलिए दो नाइट्रोजन परमाणु तीन इलेक्ट्रॉन युग्म साझा करके त्रिबंध बनाते हैं। एक सिग्मा और दो पाई बंधों से बना यह त्रिबंध अत्यंत प्रबल होता है, इसीलिए नाइट्रोजन गैस इतनी अक्रिय है कि उसे खाद्य पैकेटों में भरा जाता है और अक्रिय वातावरण बनाने में प्रयोग किया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि एक साझा युग्म एकल बंध बनाता है, जैसे हाइड्रोजन या क्लोरीन अणु में। विकल्प B गलत है क्योंकि दो साझा युग्म द्विबंध बनाते हैं, जैसे ऑक्सीजन अणु या एथिलीन में। विकल्प D गलत है क्योंकि नाइट्रोजन का कोई साधारण सहसंयोजक अणु चार युग्म साझा नहीं करता; अष्टक नियम यहाँ अधिकतम तीन की अनुमति देता है। समूह याद रखें: हाइड्रोजन एकल, ऑक्सीजन द्विक, नाइट्रोजन त्रिक।

Q8.सामान्य विज्ञानआसान

जस्ता तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया करता है तो कौन-सी गैस निकलती है?

  1. A.ऑक्सीजन
  2. B.हाइड्रोजन
  3. C.कार्बन डाइऑक्साइड
  4. D.क्लोरीन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. हाइड्रोजन

व्याख्या

सही उत्तर B, हाइड्रोजन है। सक्रियता श्रेणी में जस्ता हाइड्रोजन से ऊपर है, इसलिए वह तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देता है: जस्ता और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से जिंक क्लोराइड तथा हाइड्रोजन गैस बनती है। यह विस्थापन अभिक्रिया है और गैस की पहचान परखनली के मुँह पर जलती हुई तीली ले जाकर की जाती है, जहाँ वह पॉप ध्वनि के साथ जलती है। विकल्प A गलत है क्योंकि धातु और अम्ल की क्रिया से ऑक्सीजन नहीं बनती; वह हाइड्रोजन परऑक्साइड या पोटैशियम क्लोरेट जैसे पदार्थों के वियोजन से मिलती है। विकल्प C गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड तब निकलती है जब अम्ल किसी कार्बोनेट या बाइकार्बोनेट से क्रिया करे, धातु से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि यहाँ क्लोरीन मुक्त नहीं होती; क्लोराइड आयन लवण जिंक क्लोराइड में चला जाता है। नियम याद रखें: सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर की धातु और तनु अम्ल से लवण तथा हाइड्रोजन बनते हैं।

Q9.सामान्य विज्ञानआसान

लोहे पर जंग लगना किस प्रकार के रासायनिक परिवर्तन का उदाहरण है?

  1. A.अपचयन
  2. B.उपचयन
  3. C.उदासीनीकरण
  4. D.वियोजन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. उपचयन

व्याख्या

सही उत्तर B, उपचयन है। जंग लगना एक मंद उपचयन है जिसमें लोहा नमी की उपस्थिति में ऑक्सीजन से मिलकर जलयोजित आयरन ऑक्साइड बनाता है, वही लाल-भूरा परतदार पदार्थ जिसे हम जंग कहते हैं। इसके लिए वायु और जल दोनों आवश्यक हैं, इसीलिए सूखी हवा में या घुली हुई ऑक्सीजन रहित उबले जल में लोहे पर जंग नहीं लगती, और इसीलिए उसे पेंट, तेल, जस्ते के लेप या स्टेनलेस स्टील जैसे मिश्रातु से बचाया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि अपचयन ऑक्सीजन का हटना या इलेक्ट्रॉन का ग्रहण है, जो यहाँ लोहे के साथ हो रहे परिवर्तन के ठीक विपरीत है। विकल्प C गलत है क्योंकि उदासीनीकरण अम्ल और क्षार की क्रिया से लवण तथा जल बनने की प्रक्रिया है, जिसका जंग से कोई संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि वियोजन में एक यौगिक सरल पदार्थों में टूटता है, जबकि जंग में नया यौगिक बनता है। जंग लगना संक्षारण का ही एक रूप है।

Q10.सामान्य विज्ञानमध्यम

मेथेन अणु की आकृति कैसी होती है?

  1. A.रैखिक
  2. B.त्रिकोणीय समतलीय
  3. C.चतुष्फलकीय
  4. D.पिरामिडी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. चतुष्फलकीय

व्याख्या

सही उत्तर C, चतुष्फलकीय है। मेथेन में कार्बन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणुओं से चार एकल बंधों द्वारा जुड़ा होता है और उस पर कोई एकाकी युग्म नहीं होता, इसलिए चारों बंधन युग्म एक दूसरे को अधिकतम दूर धकेलते हैं और एक समचतुष्फलक के कोनों की ओर संकेत करते हैं, जिनका बंध कोण लगभग 109.5 अंश होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि रैखिक आकृति, जिसका बंध कोण 180 अंश होता है, कार्बन डाइऑक्साइड और एसिटिलीन जैसे अणुओं की है। विकल्प B गलत है क्योंकि त्रिकोणीय समतलीय आकृति, जिसके कोण 120 अंश होते हैं, बोरॉन ट्राइफ्लोराइड जैसे अणुओं की है जिनमें केवल तीन बंधन युग्म होते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि पिरामिडी आकृति अमोनिया की है, जहाँ नाइट्रोजन का एक एकाकी युग्म तीनों बंधों को दबाकर कोण लगभग 107 अंश कर देता है। दो एकाकी युग्मों वाला जल लगभग 104.5 अंश पर मुड़ा होता है; इन चारों आकृतियों को साथ याद करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयनिक और सहसंयोजक बंधन में क्या अंतर है?

आयनिक बंधन तब बनता है जब इलेक्ट्रॉन धातु से अधातु को पूरी तरह स्थानांतरित हो जाते हैं और विपरीत आवेश वाले आयन एक दूसरे को आकर्षित करते हैं, जैसे सोडियम क्लोराइड में। सहसंयोजक बंधन तब बनता है जब दो परमाणु, प्रायः अधातुएँ, इलेक्ट्रॉन युग्म साझा करते हैं, जैसे जल और मेथेन में। आयनिक यौगिक उच्च ताप पर पिघलते हैं और विलयन में चालन करते हैं, सहसंयोजक प्रायः नहीं।

बेंजीन में कितने सिग्मा और पाई बंध होते हैं?

बारह सिग्मा और तीन पाई बंध। वलय के छह कार्बन-कार्बन बंध और छह कार्बन-हाइड्रोजन बंध मिलकर बारह सिग्मा बंध बनाते हैं, जबकि तीन कार्बन-कार्बन द्विबंध अपने सिग्मा अंश के अतिरिक्त एक-एक पाई बंध देते हैं।

रासायनिक अभिक्रियाओं के पाँच मुख्य प्रकार कौन-से हैं?

संयोजन, जिसमें पदार्थ मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं; वियोजन, जिसमें एक पदार्थ टूटता है; विस्थापन, जिसमें अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील को हटाता है; द्विविस्थापन, जिसमें दो यौगिक आयन बदलते हैं और जिसमें अवक्षेपण तथा उदासीनीकरण आते हैं; और उपचयन-अपचयन या रेडॉक्स, जिसमें इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण होता है।

लोहे पर जंग क्यों लगती है और उसे कैसे रोका जाता है?

जंग लगना नमी की उपस्थिति में ऑक्सीजन द्वारा लोहे का मंद उपचयन है, जिससे जलयोजित आयरन ऑक्साइड बनता है। इसके लिए वायु और जल दोनों चाहिए, इसलिए उन्हें दूर रखकर इसे रोका जाता है: पेंट करके, ग्रीस या तेल लगाकर, जस्ते की परत चढ़ाकर यशदलेपन से, विद्युत लेपन से, अथवा लोहे में क्रोमियम और निकल मिलाकर स्टेनलेस स्टील बनाकर।

उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होता है?

यह ऐसा ऑक्साइड है जो अम्ल और क्षार दोनों से क्रिया करके लवण तथा जल देता है। एल्युमिनियम ऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड इसके मानक उदाहरण हैं: एल्युमिनियम ऑक्साइड हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से एल्युमिनियम क्लोराइड और सोडियम हाइड्रॉक्साइड से सोडियम एल्युमिनेट देता है, अर्थात पहली स्थिति में क्षार और दूसरी में अम्ल जैसा व्यवहार करता है।

स्रोत

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