विद्युत और चुंबकत्व: नियम, सूत्र और परीक्षा प्रश्न
विद्युत और चुंबकत्व पर परीक्षोपयोगी नोट्स: धारा, ओम का नियम, प्रतिरोध, ऊष्मीय प्रभाव, चुंबकीय क्षेत्र के नियम, प्रेरण और घरेलू परिपथ की पूरी जानकारी।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

विद्युत और चुंबकत्व दो अलग विषय नहीं बल्कि एक ही विषय हैं, क्योंकि धारा से चुंबकीय क्षेत्र बनता है और बदलते चुंबकीय क्षेत्र से धारा उत्पन्न होती है। एसएससी, रेलवे और रक्षा परीक्षाओं का लगभग हर विज्ञान प्रश्नपत्र इस अध्याय से तीन-चार प्रश्न पूछता है, प्रायः किसी परिभाषा, मात्रक, दिशा के नियम या एक चरण वाले संख्यात्मक प्रश्न पर। इस लेख में धारा और विभवांतर, ओम का नियम, प्रतिरोध, ऊष्मीय प्रभाव, चुंबक, धारा का चुंबकीय प्रभाव, प्रेरण तथा घरेलू परिपथ क्रम से लिए गए हैं।
आवेश, धारा और विभवांतर
विद्युत आवेश कूलॉम में मापा जाता है। धारा आवेश के प्रवाह की दर है, इसलिए प्रवाहित आवेश धारा और समय के गुणनफल के बराबर होता है, अर्थात Q बराबर I गुणा t, और धारा एम्पियर में मापी जाती है तथा अमीटर श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। परंपरागत धारा सेल के बाहर धन सिरे से ऋण सिरे की ओर मानी जाती है, जो इलेक्ट्रॉनों के वास्तविक अपवाह की विपरीत दिशा है। दो बिंदुओं के बीच विभवांतर वह कार्य है जो एकांक धन आवेश को एक बिंदु से दूसरे तक ले जाने में किया जाता है, इसलिए एक वोल्ट का अर्थ है प्रति कूलॉम एक जूल; इसे वोल्टमीटर से मापते हैं, जो दोनों बिंदुओं के बीच समांतर क्रम में जोड़ा जाता है।
ओम का नियम और प्रतिरोध
ओम का नियम कहता है कि स्थिर ताप पर किसी चालक से बहने वाली धारा उसके सिरों के बीच के विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है, जिससे V बराबर I गुणा R मिलता है। यह स्थिरांक R प्रतिरोध है, जिसे ओम में मापा जाता है। प्रतिरोध पदार्थ और चालक के आकार दोनों पर निर्भर है: यह लंबाई के अनुक्रमानुपाती और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, इसलिए लंबा पतला तार छोटे मोटे तार से अधिक प्रतिरोध देता है। इसमें पदार्थ का गुण प्रतिरोधकता है, जिसका मात्रक ओम मीटर है। धातुओं की प्रतिरोधकता कम होती है, विद्युतरोधियों की बहुत अधिक, और नाइक्रोम, मैंगनिन तथा कॉन्स्टेंटन जैसी मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता उन शुद्ध धातुओं से अधिक होती है जिनसे वे बनी हैं, इसीलिए ऊष्मक तत्व ताँबे के नहीं बल्कि नाइक्रोम के बनाए जाते हैं।
| राशि | संकेत | एसआई मात्रक |
|---|---|---|
| आवेश | Q | कूलॉम |
| धारा | I | एम्पियर |
| विभवांतर | V | वोल्ट |
| प्रतिरोध | R | ओम |
| प्रतिरोधकता | रो | ओम मीटर |
| शक्ति | P | वाट |
| चुंबकीय फ्लक्स घनत्व | B | टेस्ला |
श्रेणीक्रम और समांतर क्रम
श्रेणीक्रम में हर प्रतिरोधक से एक ही धारा गुजरती है और कुल प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों का योग होता है, इसलिए कुल प्रतिरोध सबसे बड़े प्रतिरोध से भी अधिक होता है। समांतर क्रम में हर प्रतिरोधक पर एक ही विभवांतर लगता है, कुल प्रतिरोध का व्युत्क्रम सभी व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है, और कुल प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम रहता है। घरेलू वायरिंग समांतर क्रम में की जाती है, ताकि हर उपकरण को पूरा आपूर्ति वोल्टेज मिले, हर एक को अलग से चालू-बंद किया जा सके, और एक के खराब होने पर दूसरों का परिपथ न टूटे।
ऊष्मीय प्रभाव और विद्युत शक्ति
जूल के तापन नियम के अनुसार किसी प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और धारा प्रवाहित होने के समय के अनुक्रमानुपाती होती है। विद्युत ऊष्मक, विद्युत इस्तरी, गीजर, तंतु वाला बल्ब और फ्यूज सभी इसी प्रभाव पर चलते हैं। बल्ब का तंतु टंगस्टन का बनता है, क्योंकि उसका गलनांक बहुत ऊँचा है और वह पिघले बिना दमक सकता है। विद्युत शक्ति विभवांतर और धारा का गुणनफल है, और इसे धारा के वर्ग गुणा प्रतिरोध या वोल्टेज के वर्ग भाग प्रतिरोध के रूप में भी लिखा जा सकता है। इसका एसआई मात्रक वाट है, जबकि ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक किलोवाट घंटा है, जिसी पर बिजली का बिल बनता है।
चुंबक और धारा का चुंबकीय प्रभाव
स्वतंत्र रूप से लटकाई गई छड़ चुंबक लगभग उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है, इसीलिए उसके सिरों को उत्तरमुखी और दक्षिणमुखी ध्रुव कहा जाता है। समान ध्रुव प्रतिकर्षण करते हैं और असमान आकर्षण, तथा चुंबकीय ध्रुव सदैव युग्म में ही होते हैं। चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के बाहर उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर और भीतर दक्षिण से उत्तर की ओर जाकर बंद वक्र बनाती हैं; जहाँ क्षेत्र प्रबल होता है वहाँ वे सघन होती हैं और वे कभी नहीं काटतीं, क्योंकि एक बिंदु पर क्षेत्र की दो दिशाएँ असंभव हैं। 1820 में ओर्स्टेड ने देखा कि धारावाही तार के पास रखी चुंबकीय सुई विक्षेपित हो जाती है, जिससे सिद्ध हुआ कि धारा से चुंबकीय क्षेत्र बनता है। सीधे चालक के चारों ओर इस क्षेत्र की दिशा दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम से मिलती है: तार को दाहिने हाथ में इस प्रकार पकड़ें कि अंगूठा धारा की दिशा में हो, तो उँगलियों के मुड़ने की दिशा क्षेत्र की दिशा बताती है। अनेक फेरों वाली कुंडली या परिनालिका छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करती है, और उसके भीतर नरम लोहे की क्रोड रखने पर विद्युत चुंबक बनता है, जिसे चालू-बंद किया जा सकता है और जो क्रेन, घंटी तथा रिले में काम आता है।
मोटर, प्रेरण और जनित्र
चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है, और उस बल की दिशा फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम से मिलती है, जिसमें तर्जनी क्षेत्र की दिशा, मध्यमा धारा की दिशा और अंगूठा बल की दिशा बताता है। यही विद्युत मोटर का सिद्धांत है, जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। इसकी उलटी प्रक्रिया विद्युत चुंबकीय प्रेरण है, जिसे माइकल फैराडे ने 1831 में खोजा: जब किसी कुंडली से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स बदलता है तो उसमें धारा प्रेरित हो जाती है। प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त नियम से मिलती है, और यही विद्युत जनित्र का सिद्धांत है, जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
घरेलू विद्युत परिपथ
भारत में घरेलू आपूर्ति प्रत्यावर्ती धारा के रूप में लगभग दो सौ बीस वोल्ट और पचास हर्ट्ज आवृत्ति पर होती है, अर्थात धारा की दिशा एक सेकंड में सौ बार पलटती है। घर में तीन तार आते हैं: विद्युन्मय तार, उदासीन तार और भू-तार, जो जमीन में गड़ी धातु की पट्टी से जुड़ा होता है और उपकरण की धात्विक बॉडी से रिसने वाली धारा को सुरक्षित रूप से जमीन में पहुँचा देता है। फ्यूज या लघु परिपथ वियोजक सदैव विद्युन्मय तार में लगाया जाता है, ताकि धारा सुरक्षित मान से अधिक होने पर उपकरण आपूर्ति से कट जाए। दो सामान्य दोष हैं अतिभारण, जब बहुत से उपकरण एक साथ धारा खींचते हैं, और लघु पथन, जब विद्युन्मय और उदासीन तार सीधे छू जाते हैं और प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से चार प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, मात्रक और परिभाषाएँ: आवेश, प्रतिरोध, प्रतिरोधकता, शक्ति और चुंबकीय फ्लक्स घनत्व के एसआई मात्रक तथा एक वोल्ट की परिभाषा। दूसरा, दिशा के नियम, जो एक पंक्ति में पूछे जाते हैं: तार के चारों ओर क्षेत्र के लिए दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम, मोटर के लिए फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम, जनित्र के लिए दक्षिण हस्त नियम। तीसरा, एक चरण वाले संख्यात्मक प्रश्न: वोल्टेज और धारा से प्रतिरोध निकालना, धारा और समय से आवेश निकालना, या वोल्टेज आधा करने पर धारा पर प्रभाव बताना। चौथा, दैनिक जीवन के अनुप्रयोग: ऊष्मक में नाइक्रोम क्यों, बल्ब में टंगस्टन क्यों, फ्यूज विद्युन्मय तार में क्यों और घरेलू वायरिंग समांतर क्यों। सामान्य भूलें हैं फ्लेमिंग के दोनों नियम आपस में बदल देना, अमीटर को समांतर क्रम में जोड़ देना और माइक्रोवेव ओवन को धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर चलने वाला उपकरण मान लेना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आवेश | Q बराबर धारा गुणा समय; एसआई मात्रक कूलॉम |
|---|---|
| एक वोल्ट | प्रति कूलॉम आवेश पर एक जूल कार्य |
| ओम का नियम | स्थिर ताप पर V बराबर I गुणा R |
| तार का प्रतिरोध | लंबाई के अनुक्रमानुपाती, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती |
| ऊष्मक तत्व | नाइक्रोम, ऊँची प्रतिरोधकता वाली मिश्रधातु जो जल्दी ऑक्सीकृत नहीं होती |
| बल्ब का तंतु | टंगस्टन, जिसका गलनांक बहुत ऊँचा है |
| जूल का नियम | ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और समय के अनुक्रमानुपाती |
| ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक | किलोवाट घंटा, जो 36 लाख जूल के बराबर है |
| धारा का चुंबकीय प्रभाव | हंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड ने 1820 में खोजा |
| विद्युत चुंबकीय प्रेरण | माइकल फैराडे ने 1831 में खोजा |
| मोटर का नियम | फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम बल की दिशा बताता है |
| जनित्र का नियम | फ्लेमिंग का दक्षिण हस्त नियम प्रेरित धारा की दिशा बताता है |
| भारत की घरेलू आपूर्ति | प्रत्यावर्ती धारा, लगभग 220 वोल्ट, 50 हर्ट्ज |
| फ्यूज | विद्युन्मय तार में लगाया जाता है और नीचे गलनांक वाले तार का बनता है |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
यदि किसी चालक के सिरों के बीच का विभवांतर आधा कर दिया जाए, तो उससे बहने वाली धारा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- A.वह बढ़ जाएगी
- B.वह दोगुनी हो जाएगी
- C.वह घट जाएगी
- D.वह आधी हो जाएगी
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. वह आधी हो जाएगी
व्याख्या
सही उत्तर D, वह आधी हो जाएगी है। ओम के नियम के अनुसार स्थिर ताप पर किसी चालक से बहने वाली धारा उसके सिरों के विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है, क्योंकि धारा विभवांतर भाग प्रतिरोध के बराबर होती है। वोल्टेज बदलने पर चालक का प्रतिरोध नहीं बदलता, इसलिए विभवांतर आधा करने पर धारा ठीक आधी रह जाती है।
विकल्प A गलत है, क्योंकि कम चालक बल उसी प्रतिरोध में से अधिक धारा नहीं बहा सकता। विकल्प B भी इसी कारण गलत है, और वह उस स्थिति का वर्णन करता है जब वोल्टेज आधा नहीं बल्कि दोगुना किया जाए। विकल्प C, कि धारा घट जाएगी, जहाँ तक जाता है वहाँ तक ठीक है, पर वह सर्वोत्तम उत्तर नहीं है, क्योंकि प्रश्न का ठीक-ठीक उत्तर संभव है: धारा केवल घटती नहीं, आधी रह जाती है। ऐसे प्रश्नों में दिशा बताने के बजाय सटीक अनुपातिक परिवर्तन बताना चाहिए।
किसी धारावाही विद्युत परिपथ में एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य क्या कहलाता है?
- A.दाब दूरी
- B.विभवांतर
- C.विभव दूरी
- D.दाबांतर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विभवांतर
व्याख्या
सही उत्तर B, विभवांतर है। परिपथ के दो बिंदुओं के बीच विभवांतर की परिभाषा ही यह है कि एकांक धन आवेश को एक बिंदु से दूसरे तक ले जाने में कितना कार्य करना पड़ता है। इसी परिभाषा से मात्रक निकलता है: एक वोल्ट का अर्थ है प्रति कूलॉम आवेश पर एक जूल कार्य, और इसे दोनों बिंदुओं के बीच समांतर क्रम में जुड़े वोल्टमीटर से मापा जाता है।
विकल्प A, दाब दूरी, कोई भौतिक राशि है ही नहीं, और दाब परिपथ का नहीं यांत्रिकी का विषय है। विकल्प C, विभव दूरी, भी कोई परिभाषित शब्द नहीं; उसमें विभव शब्द केवल विकल्प को विश्वसनीय दिखाने के लिए है। विकल्प D, दाबांतर, वास्तविक राशि तो है पर वह तरलों की है, जहाँ वह द्रव या गैस के प्रवाह को चलाती है; पढ़ाते समय उसे केवल वोल्टेज की उपमा के रूप में प्रयोग किया जाता है, विद्युत राशि के नाम के रूप में नहीं। प्रश्न में जिस परिभाषा की माँग है वह विभवांतर की है।
निम्नलिखित में से कौन सा उपकरण धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित नहीं है?
- A.विद्युत ऊष्मक
- B.तंतु वाला विद्युत बल्ब
- C.विद्युत इस्तरी
- D.माइक्रोवेव
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. माइक्रोवेव
व्याख्या
सही उत्तर D, माइक्रोवेव है। माइक्रोवेव ओवन किसी प्रतिरोध में धारा बहाकर भोजन नहीं पकाता। वह मैग्नेट्रॉन में सूक्ष्म तरंगें उत्पन्न करता है, और ये तरंगें भोजन के जल अणुओं को तेजी से घुमाती हैं, जिससे भोजन भीतर से परावैद्युत तापन द्वारा गरम होता है। इसमें धारा के ऊष्मीय प्रभाव की कोई भूमिका नहीं होती।
विकल्प A, विद्युत ऊष्मक, ठीक जूल तापन पर चलता है: नाइक्रोम तत्व से बहती धारा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और समय के अनुपात में ऊष्मा देती है। विकल्प B, तंतु वाला बल्ब, पतले टंगस्टन तार से धारा बहाता है जो श्वेत तप्त होकर चमकता है, अर्थात वही प्रभाव बहुत ऊँचे ताप पर। विकल्प C, विद्युत इस्तरी, में भी तली के भीतर कुंडलित प्रतिरोध तत्व होता है। चारों में से तीन साधारण प्रतिरोध तापन उपकरण हैं, इसलिए माइक्रोवेव ओवन ही अलग पड़ता है।
एक अज्ञात प्रतिरोधक के सिरों पर 12 V की बैटरी जोड़ी गई है। यदि परिपथ में 2 mA धारा बह रही है, तो प्रतिरोध का मान _________ होगा।
- A.600 ओम
- B.6 ओम
- C.6000 ओम
- D.60 ओम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 6000 ओम
व्याख्या
सही उत्तर C, 6000 ओम है। ओम के नियम से प्रतिरोध विभवांतर भाग धारा के बराबर होता है। यहाँ पहले धारा को मूल मात्रक में बदलना होगा: दो मिली एम्पियर का अर्थ है 0.002 एम्पियर। बारह वोल्ट में 0.002 एम्पियर का भाग देने पर छह हजार ओम, अर्थात छह किलो ओम मिलता है।
विकल्प A, 600 ओम, तब आता है जब मिली को हजारवाँ भाग मानने के बजाय सौवाँ भाग मान लिया जाए, जो समय के दबाव में होने वाली सामान्य चूक है। विकल्प B, 6 ओम, किसी और प्रश्न का उत्तर है, अर्थात बारह वोल्ट भाग दो एम्पियर, और उसमें मिली उपसर्ग की उपेक्षा कर दी गई है। विकल्प D, 60 ओम, दिए गए अंकों से निकलता ही नहीं और केवल विकल्प भरने के लिए है। सीख यह है कि भाग देने से पहले मिली, माइक्रो, किलो या मेगा जैसे हर उपसर्ग को मूल मात्रक में बदल लें।
विद्युत बल्ब का तंतु बनाने के लिए निम्नलिखित में से किस धातु के पतले तार का उपयोग किया जाता है?
- A.टंगस्टन
- B.चाँदी
- C.नाइक्रोम
- D.ताँबा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. टंगस्टन
व्याख्या
सही उत्तर A, टंगस्टन है। सभी धातुओं में टंगस्टन का गलनांक सबसे ऊँचा है, तीन हजार डिग्री सेल्सियस से भी अधिक, इसलिए पतला टंगस्टन तार पिघले बिना श्वेत तप्त होकर चमक सकता है। इसकी प्रतिरोधकता भी अच्छी-खासी है और कार्य ताप पर वाष्पन की दर कम रहती है, इसीलिए निष्क्रिय गैस भरे बल्ब में तंतु सैकड़ों घंटे चलता है।
विकल्प B, चाँदी, सभी धातुओं में विद्युत की सर्वोत्तम चालक है, पर इसी कारण उससे ऊष्मा लगभग नहीं बनेगी, और उसका गलनांक तंतु के लिए बहुत कम है। विकल्प C, नाइक्रोम, ऊष्मक या टोस्टर के तत्व के लिए उपयुक्त है, जहाँ लाल तप्त अवस्था चाहिए, पर वह प्रकाश देने लायक श्वेत तप्त अवस्था तक नहीं पहुँच सकता। विकल्प D, ताँबा, संयोजक तारों में ठीक इसीलिए लगता है कि उसका प्रतिरोध कम है और वह धारा बहाते हुए ठंडा रहता है।
सीधे धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा किससे ज्ञात की जाती है?
- A.फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम से
- B.दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम से
- C.फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त नियम से
- D.लेंज के नियम से
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम से
व्याख्या
सही उत्तर B, दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम है, जिसे मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम भी कहते हैं। चालक को दाहिने हाथ में इस प्रकार पकड़ें कि फैला हुआ अंगूठा परंपरागत धारा की दिशा में हो; तब उँगलियाँ तार के चारों ओर जिस दिशा में मुड़ती हैं वही संकेंद्री चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा है। तार के पास क्षेत्र सबसे प्रबल होता है और दूरी के साथ घटता जाता है।
विकल्प A, फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम, चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा बताता है, जो विद्युत मोटर का सिद्धांत है, तार के चारों ओर क्षेत्र का आकार नहीं। विकल्प C, फ्लेमिंग का दक्षिण हस्त नियम, चुंबकीय क्षेत्र में गतिशील चालक में प्रेरित धारा की दिशा देता है, जो जनित्र का सिद्धांत है। विकल्प D, लेंज का नियम, कहता है कि प्रेरित धारा उस परिवर्तन का विरोध करती है जिसने उसे उत्पन्न किया, और यह भी प्रेरण से जुड़ा है।
फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम का उपयोग किसकी दिशा ज्ञात करने में होता है?
- A.जनित्र में प्रेरित धारा
- B.चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाला बल
- C.परिनालिका के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र
- D.प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाला बल
व्याख्या
सही उत्तर B है। फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम में बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा और अंगूठे को परस्पर समकोण पर रखा जाता है: तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में, मध्यमा धारा की दिशा में, और तब अंगूठा बल की दिशा बताता है। यही विद्युत मोटर का नियम है, जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।
विकल्प A फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त नियम का वर्णन करता है, जो जनित्र के लिए है, और दोनों नियमों को आपस में बदल देना इस अध्याय की सबसे आम भूल है। विकल्प C कुंडली के प्रत्येक फेरे पर दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम लगाकर ज्ञात होता है, जिससे सिद्ध होता है कि परिनालिका छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करती है। विकल्प D दिशा का प्रश्न ही नहीं है: विभवांतर वोल्टमीटर से मापा जाता है और उसके लिए किसी हस्त नियम की आवश्यकता नहीं। जोड़ा याद रखें, मोटर के लिए वाम हस्त और जनित्र के लिए दक्षिण हस्त।
विद्युत चुंबकीय प्रेरण की खोज किसने की?
- A.हंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड
- B.माइकल फैराडे
- C.एलेसांद्रो वोल्टा
- D.जेम्स वाट
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. माइकल फैराडे
व्याख्या
सही उत्तर B, माइकल फैराडे है। 1831 में फैराडे ने दिखाया कि जब किसी बंद कुंडली से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स बदलता है, चाहे चुंबक हिलाकर, कुंडली हिलाकर या पास की कुंडली की धारा बदलकर, तो उसमें धारा प्रेरित हो जाती है। यही खोज जनित्र, ट्रांसफार्मर और लगभग पूरी विद्युत शक्ति अभियांत्रिकी का आधार है।
विकल्प A, ओर्स्टेड, ने इससे ग्यारह वर्ष पहले 1820 में पूरक खोज की थी, जब उन्होंने पाया कि धारावाही तार के पास चुंबकीय सुई विक्षेपित होती है, जिससे सिद्ध हुआ कि धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। विकल्प C, वोल्टा, ने वोल्टीय पाइल अर्थात पहली विद्युत बैटरी बनाई और वोल्ट मात्रक उन्हीं के नाम पर है। विकल्प D, जेम्स वाट, वाष्प इंजन के अभियंता थे और शक्ति का मात्रक उनके नाम पर है, पर प्रेरण से उनका कोई संबंध नहीं। याद रखने योग्य जोड़ा है 1820 में ओर्स्टेड और 1831 में फैराडे।
घरेलू विद्युत परिपथ में फ्यूज कहाँ जोड़ा जाता है?
- A.उदासीन तार में
- B.विद्युन्मय तार में
- C.भू-तार में
- D.उपकरण के समांतर क्रम में
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विद्युन्मय तार में
व्याख्या
सही उत्तर B, विद्युन्मय तार में है। फ्यूज नीचे गलनांक वाले तार का छोटा टुकड़ा होता है जो विद्युन्मय लाइन में श्रेणीक्रम में लगाया जाता है, ताकि अत्यधिक धारा उसे पिघला दे और परिपथ टूट जाए। चूँकि विच्छेद विद्युन्मय ओर पर होता है, उपकरण ऊँचे विभव से पूरी तरह कट जाता है और उसे छूना सुरक्षित रहता है।
विकल्प A गलत है, क्योंकि उदासीन तार में लगा फ्यूज धारा तो रोक देगा, पर उपकरण विद्युन्मय तार से जुड़ा रहेगा और छूने वाले को झटका लग सकता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि भू-तार जमीन तक का सुरक्षा पथ है और उसमें फ्यूज कभी नहीं लगाया जाता, क्योंकि उसका टूटना उसी सुरक्षा को समाप्त कर देगा जिसके लिए वह है। विकल्प D गलत है, क्योंकि समांतर क्रम में लगा फ्यूज उपकरण की रक्षा करने के बजाय उसे लघु पथित कर देगा; फ्यूज सदैव उस भार के श्रेणीक्रम में होता है जिसकी वह रक्षा करता है।
दो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटतीं, क्योंकि
- A.उस बिंदु पर क्षेत्र शून्य हो जाएगा
- B.उस एक ही बिंदु पर क्षेत्र की दो दिशाएँ हो जाएँगी, जो असंभव है
- C.ये रेखाएँ काल्पनिक होती हैं
- D.चुंबकीय ध्रुव सदैव युग्म में होते हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उस एक ही बिंदु पर क्षेत्र की दो दिशाएँ हो जाएँगी, जो असंभव है
व्याख्या
सही उत्तर B है। किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र रेखा पर खींची गई स्पर्श रेखा वहाँ क्षेत्र की दिशा बताती है। यदि दो रेखाएँ कटें तो कटान बिंदु पर दो भिन्न स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकेंगी, अर्थात वहाँ रखी चुंबकीय सुई को एक साथ दो दिशाओं में संकेत करना पड़ेगा। यह असंभव है, इसलिए क्षेत्र रेखाएँ कभी नहीं कटतीं।
विकल्प A गलत है, क्योंकि क्षेत्र का शून्य होना अलग स्थिति है, जिसे उदासीन बिंदु कहते हैं, जहाँ कोई रेखा गुजरती ही नहीं, दो रेखाएँ कटती नहीं। विकल्प C प्रसंग से बाहर है: क्षेत्र रेखाएँ क्षेत्र को चित्रित करने का तरीका अवश्य हैं, पर चित्र के रूप में भी उन्हें हर बिंदु पर एक ही दिशा दिखानी होती है, इसलिए काल्पनिक होना कारण नहीं है। विकल्प D सही तथ्य कहता है कि चुंबक में सदैव दोनों ध्रुव होते हैं और एकल ध्रुव नहीं हो सकता, पर इससे यह समझाया जाता है कि रेखाएँ बंद वक्र क्यों हैं, यह नहीं कि वे क्यों नहीं कटतीं।
विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक, जिस पर घरेलू बिल बनता है, कौन सा है?
- A.वाट
- B.वोल्ट एम्पियर
- C.किलोवाट घंटा
- D.जूल प्रति सेकंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. किलोवाट घंटा
व्याख्या
सही उत्तर C, किलोवाट घंटा है। यह एक किलोवाट के उपकरण द्वारा एक घंटे में खपत की गई ऊर्जा है और छत्तीस लाख जूल के बराबर होती है। घर में लगा विद्युत मीटर इन्हीं इकाइयों को गिनता है, इसीलिए किलोवाट घंटा को सामान्य बोलचाल में बिजली की यूनिट कहा जाता है।
विकल्प A, वाट, शक्ति का एसआई मात्रक है, अर्थात ऊर्जा खर्च होने की दर, स्वयं ऊर्जा नहीं, इसलिए वह बिल में खपत की मात्रा के रूप में नहीं आ सकता। विकल्प B, वोल्ट एम्पियर, भी शक्ति का ही मात्रक है, जो प्रत्यावर्ती धारा के काम में आभासी शक्ति के लिए प्रयुक्त होता है, और वह भी दर ही मापता है। विकल्प D, जूल प्रति सेकंड, वाट का ही दूसरा नाम है, इसलिए उसमें भी वही कमी है। केवल किलोवाट घंटा ही शक्ति को समय से गुणा करता है और इसलिए ऊर्जा मापता है।
किसी समान मोटाई वाले धात्विक तार का प्रतिरोध होता है
- A.उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के अनुक्रमानुपाती
- B.उसकी लंबाई के व्युत्क्रमानुपाती
- C.उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती
- D.लंबाई और अनुप्रस्थ काट दोनों से स्वतंत्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती
व्याख्या
सही उत्तर C है। तार का प्रतिरोध पदार्थ की प्रतिरोधकता गुणा लंबाई भाग अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के बराबर होता है। लंबा तार इलेक्ट्रॉनों को अधिक लंबा पथ और अधिक टक्करें देता है, इसलिए लंबाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है; मोटा तार उन्हें अधिक जगह देता है, इसलिए क्षेत्रफल बढ़ने पर प्रतिरोध घटता है।
विकल्प A मोटाई पर निर्भरता उलट देता है, और यही कारण है कि समान धारा पर पतला तार मोटे तार से अधिक गरम होता है। विकल्प B लंबाई पर निर्भरता उलट देता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि नमूने के आकार से केवल प्रतिरोधकता स्वतंत्र होती है, प्रतिरोध नहीं; प्रतिरोधकता पदार्थ का गुण है और केवल पदार्थ तथा ताप बदलने पर बदलती है। एक उपयोगी जाँच: लंबाई दोगुनी करने पर प्रतिरोध दोगुना हो जाता है, जबकि व्यास दोगुना करने पर क्षेत्रफल चार गुना हो जाता है और प्रतिरोध एक चौथाई रह जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ओम का नियम क्या कहता है?
यह कहता है कि किसी चालक से बहने वाली धारा उसके सिरों के बीच के विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है, बशर्ते ताप और अन्य भौतिक परिस्थितियाँ अपरिवर्तित रहें। अनुपात का स्थिरांक प्रतिरोध है, इसलिए नियम को V बराबर I गुणा R लिखा जाता है।
घरेलू उपकरण समांतर क्रम में क्यों जोड़े जाते हैं?
क्योंकि समांतर क्रम में हर उपकरण को पूरा आपूर्ति वोल्टेज मिलता है, हर एक को अलग से चालू या बंद किया जा सकता है, और एक के खराब होने पर शेष का परिपथ नहीं टूटता। श्रेणीक्रम में सभी से एक ही धारा गुजरती और एक के बंद होते ही सब बंद हो जाते।
ऊष्मक के तत्व में नाइक्रोम का उपयोग क्यों होता है?
नाइक्रोम ऐसी मिश्रधातु है जिसकी प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं से कहीं अधिक है, इसलिए उतनी ही धारा पर वह बहुत अधिक ऊष्मा देती है। इसका गलनांक भी ऊँचा है और लाल तप्त होने पर भी यह जल्दी ऑक्सीकृत नहीं होती, इसलिए तत्व लंबे समय चलता है।
फ्लेमिंग के वाम और दक्षिण हस्त नियम में क्या अंतर है?
वाम हस्त नियम मोटर के लिए है: यह चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा बताता है। दक्षिण हस्त नियम जनित्र के लिए है: यह चुंबकीय क्षेत्र में गतिशील चालक में प्रेरित धारा की दिशा बताता है।
फ्यूज सदैव विद्युन्मय तार में क्यों लगाया जाता है?
ताकि फ्यूज पिघलने पर उपकरण विद्युन्मय आपूर्ति से पूरी तरह कट जाए और उसका कोई भाग ऊँचे विभव पर न रहे। यदि फ्यूज उदासीन तार में होता तो धारा रुक तो जाती, पर उपकरण विद्युन्मय तार से जुड़ा रहता और छूने पर खतरनाक बना रहता।
लघु पथन किस कारण होता है?
लघु पथन तब होता है जब विद्युन्मय और उदासीन तार सीधे एक-दूसरे को छू जाते हैं, प्रायः विद्युतरोधन खराब होने से। तब पथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है, बहुत बड़ी धारा बहती है, तार अचानक गरम हो जाते हैं और फ्यूज या परिपथ वियोजक को आपूर्ति काटनी पड़ती है।
स्रोत
- विज्ञान (कक्षा दस), विद्युत अध्याय — एनसीईआरटी
- विज्ञान (कक्षा दस), विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव अध्याय — एनसीईआरटी
- भौतिकी भाग एक और दो (कक्षा बारह), विद्युत धारा, चुंबकत्व और विद्युत चुंबकीय प्रेरण अध्याय — एनसीईआरटी
- अंतरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली: एम्पियर, वोल्ट, ओम और टेस्ला की परिभाषाएँ — अंतरराष्ट्रीय माप-तौल ब्यूरो





