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GK नोट्ससामान्य विज्ञानआर्थिक जंतु विज्ञान: रेशम कीट पालन, मधुमक्खी पालन और लाख कीट पालन

आर्थिक जंतु विज्ञान: रेशम, मधुमक्खी और लाख कीट पालन

आर्थिक जंतु विज्ञान के परीक्षोपयोगी नोट्स: रेशम कीट और भारत के चार रेशम, मधुमक्खी की जातियाँ, छत्ते का समाज, लाख कीट, पोषक पौधे और प्रमुख संस्थान।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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आर्थिक जंतु विज्ञान: रेशम, मधुमक्खी और लाख कीट पालन — GK24 title card
आर्थिक जंतु विज्ञान: रेशम, मधुमक्खी और लाख कीट पालन — GK24 title card

जब किसी रेशम कीट बीज केंद्र में ग्रेनेज और शीतगृह जोड़े जाते हैं, जैसा हाल में असम के जोरहाट में हुआ, तो वहाँ आर्थिक जंतु विज्ञान काम कर रहा होता है—जंतु विज्ञान की वह शाखा जो बिकने वाली वस्तुओं के लिए कीटों और जंतुओं का पालन करती है। इनमें तीन उद्योग लगभग हर सामान्य विज्ञान के प्रश्नपत्र में आते हैं, क्योंकि तीनों किसी कीट को एक वस्तु में बदल देते हैं। रेशम कीट पालन से रेशम मिलता है, मधुमक्खी पालन से शहद और मोम, तथा लाख कीट पालन से लाख नामक राल। यह अध्याय शब्दावली का अध्याय है: कीट, उसका वैज्ञानिक नाम, उसका भोजन-पौधा, उसका उत्पाद और उस पर शोध करने वाली संस्था।

रेशम कीट पालन

रेशम कीट पालन का अर्थ है कच्चा रेशम प्राप्त करने के लिए रेशम कीटों का पालन, और इनमें सबसे महत्वपूर्ण कीट का भोजन शहतूत उगाने को मोरीकल्चर कहते हैं। शहतूती रेशम कीट बॉम्बिक्स मोराई है, इस समूह का एकमात्र पूर्णतः पालतू कीट; यह जंगल में जीवित नहीं रह सकता। इसका जीवन चक्र पूर्ण कायांतरण वाला है—अंडा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क शलभ—और व्यापारिक महत्व केवल लार्वा का है। लार्वा की रेशम ग्रंथि रूपांतरित लार ग्रंथि है, जो फाइब्रोइन नामक प्रोटीन निकालती है और उस पर सेरिसिन नामक गोंद की परत होती है। लार्वा इसे अपने चारों ओर लपेटकर कोकून बनाता है, और एक कोकून से लगभग एक हजार मीटर तक का एक अखंड तंतु मिलता है। प्यूपा को मारने की क्रिया स्टिफलिंग है, कोकून को उबालकर सेरिसिन नरम किया जाता है और तंतु खोलने की क्रिया रीलिंग कहलाती है। बाद में सेरिसिन हटाने को डीगमिंग कहते हैं, जिससे रेशम में चमक और कोमलता आती है। ग्रेनेज वह इकाई है जहाँ रेशम कीट के अंडे, जिन्हें बीज कहा जाता है, तैयार होकर पालकों को दिए जाते हैं; इसी कारण एक बीज केंद्र पूरे जिले के बुनकरों के लिए महत्व रखता है।

भारत के चार रेशम

भारत विश्व का एकमात्र देश है जो प्राकृतिक रेशम की सभी ज्ञात किस्मों का व्यापारिक उत्पादन करता है, और परीक्षक कीट, पोषक पौधा और राज्य एक साथ पूछते हैं।

रेशमरेशम कीटपोषक पौधाविशेष
शहतूतीबॉम्बिक्स मोराईशहतूतभारत का अधिकांश रेशम; कर्नाटक अग्रणी
टसरएंथेरिया माइलिटाअसन और अर्जुनउष्णकटिबंधीय टसर; ओक टसर एंथेरिया प्रोयलाई
एरीसामिया रिसिनीअरंडीकताई से बनता है, रीलिंग से नहीं; अहिंसा रेशम
मूँगाएंथेरिया असमेंसिससोम और सोआलूअसम का सुनहरा रेशम, जीआई टैग प्राप्त

एरी को अहिंसा रेशम कहा जाता है क्योंकि शलभ को कोकून से निकल जाने दिया जाता है, इसलिए टूटे तंतु को रीलिंग के बजाय कपास की तरह काता जाता है। रेशम को वस्त्रों की रानी कहते हैं, यह प्रोटीन तंतु है, और विश्व में सबसे अधिक रेशम चीन उत्पन्न करता है, उसके बाद भारत। केंद्रीय रेशम बोर्ड केंद्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948 के अंतर्गत बना, वस्त्र मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है; शोध का कार्य मैसूरु, बरहमपुर और पांपोर के केंद्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान करते हैं।

मधुमक्खी पालन और मधुमक्खी का समाज

मधुमक्खी पालन का अर्थ है शहद और मोम के लिए छत्तों में मधुमक्खियों को रखना, और आधुनिक चल-ढाँचा छत्ता यह संभव बनाता है कि कॉलोनी नष्ट किए बिना शहद निकाला जाए। एक कॉलोनी बहुरूपी होती है। एक उर्वर मादा, रानी, अंडे देती है; कुछ सौ नर, जिन्हें ड्रोन कहते हैं, अनिषेचित अंडों से बनते हैं और केवल समागम के लिए होते हैं; हजारों बंध्य मादाएँ, जिन्हें श्रमिक कहते हैं, भोजन लाती हैं, छत्ता बनाती हैं, शिशुओं को खिलाती हैं और रक्षा करती हैं। जिस लार्वा को पूरे लार्वा काल तक रॉयल जेली खिलाई जाती है वही रानी बनता है, इसलिए मधुमक्खी के समाज में जाति अंडे से नहीं, आहार से तय होती है। मधुमक्खियाँ नाच के द्वारा भोजन का पता बताती हैं: निकट के स्रोत के लिए वर्तुल नृत्य और दूर के स्रोत के लिए वैगल या पुच्छ-हिलाऊ नृत्य, जिसका कोण सूर्य के सापेक्ष दिशा बताता है। इसे कार्ल वॉन फ्रिश ने समझा और उन्हें 1973 का नोबेल पुरस्कार कोनराड लोरेंज तथा निकोलास टिनबर्गन के साथ मिला।

मधुमक्खीसामान्य नामयाद रखने योग्य बात
एपिस सेराना इंडिकाभारतीय मौनपरंपरागत रूप से भारतीय छत्तों में पाली जाती है
एपिस डॉर्सेटापहाड़ी या भृंग मक्खीसबसे बड़ी और सर्वाधिक उत्पादक; पालतू नहीं बनाई जा सकती
एपिस फ्लोरियाछोटी मक्खीसबसे छोटी, न्यूनतम उत्पादन
एपिस मेलिफेराइटैलियन या यूरोपीय मक्खीव्यापारिक मधुवाटिकाओं की पसंद
ट्राइगोनाडैमर या डंकरहित मक्खीडंक नहीं; उपयोगी परागणकर्ता

शहद में मुख्यतः प्रतिलोम शर्कराएँ फ्रक्टोज और ग्लूकोज होती हैं, साथ में जल, खनिज और एंजाइम; मोम, रॉयल जेली, प्रोपोलिस, मधु-पराग तथा मधुमक्खी विष अन्य उत्पाद हैं। मधुमक्खियों से होने वाला परागण कृषि के लिए शहद से भी अधिक मूल्यवान है, इसीलिए बाग वाले छत्ते किराये पर लेते हैं। भारत में शहद उत्पादन बढ़ाने के प्रयास को मधुर क्रांति कहा जाता है और इसके लिए राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन चलाया गया।

लाख कीट पालन

लाख एक राल है जिसे मादा लाख कीट केरिया लक्का स्रावित करती है; यह एक सूक्ष्म स्केल कीट है जो पोषक वृक्ष की टहनियों पर बैठकर उसका रस चूसता है। मुख्य पोषक पौधे पलास, कुसुम और बेर हैं। कीट की दो प्रजातियाँ हैं, रंगीनी और कुसुमी, और प्रत्येक वर्ष में दो फसलें देती है, इसलिए दो वर्षों में चार लाख फसलें ली जाती हैं: रंगीनी से कातकी और बैसाखी, कुसुमी से अगहनी और जेठवी। खुरचकर निकाली गई लाख से बीजलाख, बटनलाख और शेललाख बनते हैं, तथा लाख से रंग और मोम भी मिलते हैं; इसका उपयोग वार्निश, पॉलिश, लाख की मुहर, चूड़ियों और पुराने समय में ग्रामोफोन रिकॉर्ड में होता रहा है। विश्व में सबसे अधिक लाख भारत उत्पन्न करता है और झारखंड अग्रणी राज्य है, इसीलिए 1924 में रांची के निकट नामकुम में भारतीय लाख अनुसंधान संस्थान के रूप में स्थापित संस्था आज भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान के रूप में कार्य करती है।

परीक्षा में पूछे जाने वाले शब्द

  • सेरीकल्चर—रेशम कीट; एपीकल्चर—मधुमक्खी; लाख कीट पालन—लाख कीट
  • पिसीकल्चर—मछली; एवीकल्चर—पक्षी; वर्मीकल्चर—केंचुआ; मोती पालन—सीप
  • मोरीकल्चर—शहतूत; ग्रेनेज—रेशम कीट बीज; रीलिंग—तंतु खोलना

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्न एक पंक्ति के मिलान के रूप में आते हैं, इसलिए प्रत्येक कीट को उसके वैज्ञानिक नाम, पोषक पौधे और राज्य के साथ याद करें—बॉम्बिक्स मोराई के साथ शहतूत और कर्नाटक, एंथेरिया असमेंसिस के साथ सोम और असम, सामिया रिसिनी के साथ अरंडी, केरिया लक्का के साथ पलास, कुसुम, बेर और झारखंड। मधुमक्खी के छत्ते पर जाति व्यवस्था, अनिषेचित अंडों से ड्रोन की उत्पत्ति और वॉन फ्रिश की नृत्य-भाषा से प्रश्न बनते हैं। तीन तथ्य हर वर्ष दोहराए जाते हैं—पहाड़ी मधुमक्खी सर्वाधिक शहद देती है पर पाली नहीं जा सकती, सेरिसिन गोंद है और फाइब्रोइन तंतु, तथा मधुर क्रांति शहद से जुड़ी है। संस्थान आसान अंक देते हैं—1948 से बेंगलुरु में केंद्रीय रेशम बोर्ड, मैसूरु में रेशम अनुसंधान और रांची के नामकुम में लाख अनुसंधान।

महत्वपूर्ण तथ्य

शहतूती रेशम कीटबॉम्बिक्स मोराई; पोषक शहतूत
टसर रेशम कीटएंथेरिया माइलिटा; पोषक असन और अर्जुन; ओक टसर एंथेरिया प्रोयलाई
एरी रेशम कीटसामिया रिसिनी; पोषक अरंडी; कताई से बनता है, अहिंसा रेशम
मूँगा रेशम कीटएंथेरिया असमेंसिस; पोषक सोम और सोआलू; असम का सुनहरा रेशम
रेशम के प्रोटीनफाइब्रोइन तंतु है, सेरिसिन गोंद जो डीगमिंग से हटती है
केंद्रीय रेशम बोर्डकेंद्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948; मुख्यालय बेंगलुरु; वस्त्र मंत्रालय
मधुमक्खी की जातियाँएपिस सेराना इंडिका, एपिस डॉर्सेटा, एपिस फ्लोरिया, एपिस मेलिफेरा, ट्राइगोना
सर्वाधिक शहदएपिस डॉर्सेटा, पहाड़ी मधुमक्खी, जो पालतू नहीं बनाई जा सकती
ड्रोनअनिषेचित अंडों से बनने वाले अगुणित नर
नृत्य भाषावर्तुल और वैगल नृत्य; कार्ल वॉन फ्रिश, नोबेल 1973
लाख कीटकेरिया लक्का (पूर्व नाम लैसिफर लक्का); मादा लाख स्रावित करती है
लाख के पोषक और फसलेंपलास, कुसुम, बेर; रंगीनी से कातकी और बैसाखी, कुसुमी से अगहनी और जेठवी
लाख संस्थान1924 में नामकुम, रांची में स्थापित; अब आईसीएआर का आईआईएनआरजी
मधुर क्रांतिशहद उत्पादन; राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.सामान्य विज्ञानआसान

शहतूती रेशम कीट का वैज्ञानिक नाम क्या है?

  1. A.एंथेरिया माइलिटा
  2. B.बॉम्बिक्स मोराई
  3. C.सामिया रिसिनी
  4. D.केरिया लक्का
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बॉम्बिक्स मोराई

व्याख्या

सही उत्तर B, बॉम्बिक्स मोराई है, जो शहतूती रेशम कीट है, रेशम समूह का एकमात्र पूर्णतः पालतू कीट और विश्व के अधिकांश कच्चे रेशम का स्रोत। विकल्प A, एंथेरिया माइलिटा, उष्णकटिबंधीय टसर रेशम कीट है, जो असन और अर्जुन वृक्षों पर खुले में रहता है। विकल्प C, सामिया रिसिनी, एरी रेशम कीट है, जिसे अरंडी की पत्तियों पर पाला जाता है और जिसका टूटा तंतु काता जाता है, रीलिंग नहीं किया जाता। विकल्प D, केरिया लक्का, रेशम कीट नहीं बल्कि लाख कीट है, जिसकी मादा लाख नामक राल स्रावित करती है। इन चारों को अलग रखने का तरीका है प्रत्येक को उसके पोषक पौधे से जोड़ना—बॉम्बिक्स के लिए शहतूत, टसर के लिए असन और अर्जुन, एरी के लिए अरंडी और मूँगा के लिए सोम। यह भी ध्यान रखें कि मनुष्य इसे इतने लंबे समय से पाल रहा है कि वयस्क शलभ ठीक से उड़ भी नहीं पाता और पूर्णतः पालकों पर निर्भर रहता है, इसी कारण इसे सच्चा पालतू रेशम कीट कहा जाता है।

Q2.सामान्य विज्ञानआसान

प्राकृतिक सुनहरे रंग के लिए प्रसिद्ध मूँगा रेशम मुख्यतः किस राज्य में उत्पन्न होता है?

  1. A.कर्नाटक
  2. B.पश्चिम बंगाल
  3. C.असम
  4. D.झारखंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. असम

व्याख्या

सही उत्तर C, असम है। मूँगा रेशम एंथेरिया असमेंसिस से मिलता है, जिसे ब्रह्मपुत्र घाटी के सोम और सोआलू वृक्षों पर पाला जाता है, और असम के मूँगा को भौगोलिक संकेत टैग प्राप्त है। विकल्प A इस प्रश्न के उत्तर के रूप में गलत है, यद्यपि शहतूती रेशम में कर्नाटक देश में अग्रणी है, जो भिन्न किस्म है; जो छात्र केवल सबसे बड़ा रेशम उत्पादक शब्द याद रखते हैं वे यहीं चूकते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि पश्चिम बंगाल शहतूती रेशम और बरहमपुर के अनुसंधान संस्थान के लिए जाना जाता है, मूँगा के लिए नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि झारखंड टसर रेशम और सबसे अधिक लाख के लिए प्रसिद्ध है। जोड़ी याद रखें—शहतूती से कर्नाटक, मूँगा से असम, टसर से झारखंड और छत्तीसगढ़।

Q3.सामान्य विज्ञानमध्यम

एरी रेशम कीट को किस पौधे की पत्तियों पर पाला जाता है?

  1. A.शहतूत
  2. B.अरंडी
  3. C.अर्जुन
  4. D.सोम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अरंडी

व्याख्या

सही उत्तर B, अरंडी है। एरी रेशम कीट सामिया रिसिनी अरंडी की पत्तियाँ खाता है, और इसके रेशम को अहिंसा रेशम कहा जाता है क्योंकि कोकून के उपयोग से पहले शलभ को निकल जाने दिया जाता है, जिससे टूटा तंतु मिलता है और उसे रीलिंग के बजाय कपास की तरह काता जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि शहतूत बॉम्बिक्स मोराई का भोजन है और उसके लिए शहतूत उगाने को मोरीकल्चर कहते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि अर्जुन, असन के साथ, उष्णकटिबंधीय टसर कीट का पोषक वृक्ष है। विकल्प D गलत है क्योंकि सोम, सोआलू के साथ, असम के मूँगा कीट का पोषक वृक्ष है। परीक्षक का प्रिय जाल यही है कि अरंडी के साथ टसर और मूँगा समूह के दो वृक्ष नाम रख दिए जाते हैं।

Q4.सामान्य विज्ञानमध्यम

कौन सी मधुमक्खी सर्वाधिक शहद देती है किंतु पालतू नहीं बनाई जा सकती?

  1. A.एपिस फ्लोरिया
  2. B.एपिस सेराना इंडिका
  3. C.एपिस डॉर्सेटा
  4. D.एपिस मेलिफेरा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. एपिस डॉर्सेटा

व्याख्या

सही उत्तर C, एपिस डॉर्सेटा है, जो पहाड़ी मधुमक्खी है, भारतीय मधुमक्खियों में सबसे बड़ी, जो चट्टानों और ऊँची इमारतों पर एक ही विशाल छत्ता बनाती है और प्रति कॉलोनी सर्वाधिक शहद देती है, किंतु उग्र स्वभाव के कारण छत्तों में नहीं पाली जा सकती। विकल्प A गलत है क्योंकि एपिस फ्लोरिया, छोटी मक्खी, सबसे छोटी है और न्यूनतम शहद देती है। विकल्प B गलत है क्योंकि एपिस सेराना इंडिका, भारतीय मौन, परंपरागत रूप से भारतीय छत्तों में पाली जाती है, अतः पालतू है। विकल्प D गलत है क्योंकि एपिस मेलिफेरा, इटैलियन मक्खी, अपने शांत स्वभाव और प्रबंधित छत्तों में अधिक उत्पादन के कारण व्यापारिक मधुवाटिकाओं में सर्वाधिक प्रयुक्त होती है। एक और बिंदु याद रखें कि यह मक्खी चट्टानों और पेड़ों पर खुला छत्ता बनाती है, अत्यंत आक्रामक होती है और प्रवास भी करती है, इसलिए इसका शहद प्रायः वन उपज के रूप में इकट्ठा किया जाता है, पालन से नहीं।

Q5.सामान्य विज्ञानकठिन

मधुमक्खी के छत्ते में ड्रोन किससे विकसित होते हैं?

  1. A.रानी द्वारा दिए गए निषेचित अंडों से
  2. B.रानी द्वारा दिए गए अनिषेचित अंडों से
  3. C.सभी स्थितियों में श्रमिक मक्खियों के अंडों से
  4. D.पूरे काल तक रॉयल जेली खाने वाले लार्वा से
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रानी द्वारा दिए गए अनिषेचित अंडों से

व्याख्या

सही उत्तर B, अनिषेचित अंडों से है। रानी निषेचित और अनिषेचित दोनों प्रकार के अंडे दे सकती है; अनिषेचित अंडों से अगुणित नर बनते हैं जिन्हें ड्रोन कहते हैं, और यह अनिषेकजनन का एक रूप है, जबकि निषेचित अंडों से द्विगुणित मादाएँ बनती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि निषेचित अंडों से श्रमिक या रानी बनती है, ड्रोन नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि रानीविहीन कॉलोनी में अंडे देने वाली श्रमिक कभी-कभी ड्रोन उत्पन्न कर सकती है, किंतु यह अपवाद है और ड्रोन की सामान्य उत्पत्ति नहीं, अतः इसे सभी स्थितियों के लिए नहीं कहा जा सकता। विकल्प D गलत है क्योंकि पूरे लार्वा काल तक रॉयल जेली खिलाने से रानी बनती है, ड्रोन नहीं; मादाओं में जाति आहार से तय होती है और ड्रोन का लिंग अंडे के अनिषेचित होने से।

Q6.सामान्य विज्ञानमध्यम

मधुमक्खियाँ जिस वैगल नृत्य से भोजन की दिशा और दूरी बताती हैं, उसकी व्याख्या किसने की?

  1. A.कार्ल वॉन फ्रिश
  2. B.कोनराड लोरेंज
  3. C.चार्ल्स डार्विन
  4. D.निकोलास टिनबर्गन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कार्ल वॉन फ्रिश

व्याख्या

सही उत्तर A, कार्ल वॉन फ्रिश है, जिन्होंने मधुमक्खियों की नृत्य-भाषा को समझा: छत्ते के निकट के स्रोत के लिए वर्तुल नृत्य और दूर के स्रोत के लिए वैगल या पुच्छ-हिलाऊ नृत्य, जिसमें सीधी दौड़ का कोण सूर्य के सापेक्ष भोजन की दिशा बताता है। विकल्प B और D इस प्रश्न के उत्तर के रूप में गलत हैं, यद्यपि कोनराड लोरेंज और निकोलास टिनबर्गन को पशु व्यवहार पर कार्य के लिए 1973 का नोबेल पुरस्कार वॉन फ्रिश के साथ मिला था; लोरेंज पक्षियों में छापांकन के लिए और टिनबर्गन सहजवृत्ति के प्रयोगों के लिए याद किए जाते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक चयन पर लिखा और छत्ता निर्माण का अध्ययन भी किया, किंतु नृत्य-भाषा उनकी खोज नहीं थी। परीक्षा के लिए यह जोड़ी याद रखें—निकट के स्रोत के लिए वर्तुल नृत्य और दूर के स्रोत के लिए वैगल नृत्य, तथा दूरी नृत्य की अवधि से और दिशा उसके कोण से बताई जाती है।

Q7.सामान्य विज्ञानमध्यम

लाख किस कीट द्वारा स्रावित होती है?

  1. A.केरिया लक्का
  2. B.बॉम्बिक्स मोराई
  3. C.एपिस डॉर्सेटा
  4. D.एंथेरिया प्रोयलाई
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केरिया लक्का

व्याख्या

सही उत्तर A, केरिया लक्का है, जिसका पुराना नाम लैसिफर लक्का था; यह एक सूक्ष्म स्केल कीट है जिसकी मादा पोषक वृक्ष की टहनियों पर बैठकर रस चूसती है और वह राल स्रावित करती है जिसे लाख कहते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि बॉम्बिक्स मोराई शहतूती रेशम कीट है और रूपांतरित लार ग्रंथि से रेशम निकालता है। विकल्प C गलत है क्योंकि एपिस डॉर्सेटा पहाड़ी मधुमक्खी है, जो शहद और मोम बनाती है। विकल्प D गलत है क्योंकि एंथेरिया प्रोयलाई हिमालयी क्षेत्र का ओक टसर रेशम कीट है। एक और बिंदु अक्सर पूछा जाता है कि व्यापारिक राल मादा लाख कीट बनाती है, नर नहीं, और खुरची हुई लाख से बीजलाख, बटनलाख तथा शेललाख बनते हैं। लाख कीट हेमिप्टेरा गण का है, अर्थात रस चूसने वाले बग्स का समूह, और व्यापारिक लाख वही कठोर स्राव है जो टहनी पर मादा के शरीर को ढँक लेता है।

Q8.सामान्य विज्ञानकठिन

निम्नलिखित में से कौन लाख कीट का पोषक पौधा नहीं है?

  1. A.पलास
  2. B.कुसुम
  3. C.बेर
  4. D.अरंडी
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. अरंडी

व्याख्या

सही उत्तर D, अरंडी है, जो एरी रेशम कीट का पोषक पौधा है और लाख कीट पालन से इसका कोई संबंध नहीं है। विकल्प A, B और C तीनों वास्तविक लाख पोषक हैं: पलास, कुसुम और बेर वे तीन मुख्य वृक्ष हैं जिनकी कोमल टहनियों पर लाख कीट का संचारण किया जाता है। कुसुम पर कुसुमी प्रजाति पलती है, जो अगहनी और जेठवी फसलें देती है, जबकि पलास और बेर पर रंगीनी प्रजाति पलती है, जो कातकी और बैसाखी फसलें देती है, इस प्रकार दो वर्षों में चार फसलें ली जाती हैं। विश्व में सबसे अधिक लाख भारत उत्पन्न करता है और झारखंड अग्रणी राज्य है; रांची के निकट नामकुम में 1924 में स्थापित संस्थान आज भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान है। इसी कारण लाख कीट पालन वन क्षेत्रों की आय का साधन है, क्योंकि ये तीनों वृक्ष मध्य भारत की वन पट्टी में स्वाभाविक रूप से मिलते हैं।

Q9.सामान्य विज्ञानमध्यम

सन 1948 में स्थापित केंद्रीय रेशम बोर्ड का मुख्यालय कहाँ है?

  1. A.मैसूरु
  2. B.बेंगलुरु
  3. C.रांची
  4. D.गुवाहाटी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बेंगलुरु

व्याख्या

सही उत्तर B, बेंगलुरु है। केंद्रीय रेशम बोर्ड केंद्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948 के अंतर्गत गठित हुआ, वस्त्र मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है, जहाँ से देश का रेशम अनुसंधान और बीज संगठन चलता है। विकल्प A गलत है, यद्यपि मैसूरु में केंद्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान है; अन्य दो पश्चिम बंगाल के बरहमपुर और जम्मू-कश्मीर के पांपोर में हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि रांची, अधिक ठीक कहें तो उसके निकट नामकुम, लाख अनुसंधान संस्थान का स्थान है, रेशम बोर्ड का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि गुवाहाटी मूँगा क्षेत्र में है किंतु बोर्ड का मुख्यालय नहीं। तीनों नगर अलग रखें—रेशम प्रशासन के लिए बेंगलुरु, रेशम अनुसंधान के लिए मैसूरु और लाख के लिए रांची। एक और तथ्य याद रखें कि बोर्ड केवल प्रशासनिक निकाय नहीं है, यह बीज उत्पादन, कीट रोग नियंत्रण और रेशम की गुणवत्ता जाँच का कार्य भी करता है।

Q10.सामान्य विज्ञानकठिन

रेशम तंतु पर चढ़ी वह गोंद जो डीगमिंग से हटाई जाती है, कौन सी है?

  1. A.फाइब्रोइन
  2. B.सेरिसिन
  3. C.काइटिन
  4. D.किरेटिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सेरिसिन

व्याख्या

सही उत्तर B, सेरिसिन है। रेशम कीट की रेशम ग्रंथि फाइब्रोइन नामक प्रोटीन स्रावित करती है और उस पर दूसरा प्रोटीन सेरिसिन चढ़ाती है, जो गोंद की तरह काम करता है और कोकून को कठोर बनाता है; कोकून उबालने से सेरिसिन नरम होता है जिससे तंतु खोला जा सके, और बाद में उसे हटाने को डीगमिंग कहते हैं, जिससे रेशम में चमक और कोमलता आती है। विकल्प A गलत है क्योंकि फाइब्रोइन स्वयं तंतु है और उसे हटाया नहीं जाता। विकल्प C गलत है क्योंकि काइटिन कीट के बाह्यकंकाल और कवक की कोशिका भित्ति का पदार्थ है, रेशम का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि किरेटिन बाल, ऊन, नाखून, सींग और परों का प्रोटीन है; ऊन किरेटिन है और रेशम फाइब्रोइन, यह अंतर परीक्षक एक ही प्रश्न में जाँचना पसंद करते हैं।

Q11.सामान्य विज्ञानआसान

भारत में लाख का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन है?

  1. A.ओडिशा
  2. B.झारखंड
  3. C.असम
  4. D.कर्नाटक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. झारखंड

व्याख्या

सही उत्तर B, झारखंड है, जो भारत का अग्रणी लाख उत्पादक राज्य है; इसी कारण देश का लाख अनुसंधान संस्थान रांची के निकट नामकुम में स्थित है। विकल्प A गलत है, यद्यपि ओडिशा और छत्तीसगढ़ भी इसी वन पट्टी के लाख उत्पादक राज्य हैं और उत्तर के सबसे निकट का जाल बनते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि असम मूँगा और एरी रेशम से जुड़ा है, लाख से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि कर्नाटक शहतूती रेशम और चंदन में अग्रणी है, लाख में नहीं। परीक्षा के लिए तीनों अग्रणी एक साथ याद रखें—लाख में झारखंड, शहतूती रेशम में कर्नाटक और मूँगा रेशम में असम; और यह भी कि विश्व में सबसे बड़ा लाख उत्पादक भारत ही है। राज्य के वनों में कीट की दोनों प्रजातियाँ मिलती हैं—पलास और बेर पर रंगीनी तथा कुसुम पर कुसुमी—जिससे दो वर्षों में चार फसलें ली जा सकती हैं।

Q12.सामान्य विज्ञानआसान

भारत में मधुर क्रांति किसके उत्पादन से संबंधित है?

  1. A.गन्ना
  2. B.शहद
  3. C.दूध
  4. D.फल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. शहद

व्याख्या

सही उत्तर B, शहद है। मधुर क्रांति उस अभियान का नाम है जिसके द्वारा भारत में शहद उत्पादन और मधुमक्खी पालन बढ़ाने का प्रयास किया जाता है, और इसके लिए राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन चलाया गया। विकल्प A गलत है क्योंकि सामान्य सूची में गन्ने या चीनी की अपनी कोई रंग-क्रांति नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि दूध श्वेत क्रांति से जुड़ा है, जो ऑपरेशन फ्लड और वर्गीज कुरियन से संबंधित है। विकल्प D गलत है क्योंकि फल उत्पादन को स्वर्ण क्रांति कहा जाता है, जिसमें बागवानी आती है; इसी प्रकार पीली क्रांति तिलहन, नीली क्रांति मछली, हरित क्रांति खाद्यान्न और गुलाबी क्रांति झींगा या प्याज से जुड़ी है। ये रंग-क्रांतियाँ लगभग हर वर्ष पूछी जाती हैं, इसलिए इन्हें एक सारणी के रूप में याद करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेरीकल्चर, एपीकल्चर और लाख कीट पालन में क्या अंतर है?

सेरीकल्चर रेशम के लिए रेशम कीटों का पालन है, एपीकल्चर शहद और मोम के लिए मधुमक्खी पालन है, और लाख कीट पालन लाख नामक राल के लिए लाख कीट का पालन है। इनसे जुड़े शब्द हैं—मछली के लिए पिसीकल्चर, पक्षियों के लिए एवीकल्चर और केंचुए के लिए वर्मीकल्चर।

एरी रेशम को अहिंसा रेशम क्यों कहा जाता है?

क्योंकि कोकून के उपयोग से पहले एरी शलभ को बाहर निकल जाने दिया जाता है, जिससे किसी प्यूपा की हत्या नहीं होती। इसी कारण तंतु टूटा होता है और उसे अखंड तंतु की तरह रीलिंग करने के बजाय कपास की तरह काता जाता है।

कौन सा रेशम केवल असम में बनता है?

मूँगा, जो एंथेरिया असमेंसिस का सुनहरा रेशम है और ब्रह्मपुत्र घाटी के सोम तथा सोआलू वृक्षों पर पाला जाता है। असम के मूँगा रेशम को भौगोलिक संकेत टैग प्राप्त है और कहीं और इसका व्यापारिक उत्पादन नहीं होता।

रानी मक्खी कैसे बनती है?

निषेचित अंडे से, जिसके लार्वा को पूरे लार्वा काल तक रॉयल जेली खिलाई जाती है। जिन लार्वा को साधारण श्रमिक आहार पर ले जाया जाता है वे श्रमिक बनते हैं, अतः मादाओं में जाति आहार से तय होती है, अंडे से नहीं।

लाख से कौन से उत्पाद मिलते हैं?

बीजलाख, बटनलाख और शेललाख, तथा लाख का रंग और लाख का मोम। इनका उपयोग वार्निश, पॉलिश, लाख की मुहर और चूड़ियों में होता है, और एक समय ग्रामोफोन रिकॉर्ड बनाने में भी होता था।

स्रोत

  • जीव विज्ञान (कक्षा 12), खाद्य उत्पादन में वृद्धि की कार्यनीति — एनसीईआरटी
  • विज्ञान (कक्षा 7), रेशों से वस्त्र तक — एनसीईआरटी
  • केंद्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948 — वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार
  • आईसीएआर-भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान, रांची — भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
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