जीवों का वर्गीकरण: पांच जगत और वर्गिकी
जीवों के वर्गीकरण के नोट्स: वर्गिकी और द्विनाम पद्धति, वर्गिकीय पदानुक्रम तथा मोनेरा से जंतु जगत तक पांचों जगत और उनके मुख्य लक्षण, परीक्षा के तथ्यों सहित।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

पृथ्वी पर जीवों की लाखों जातियां रहती हैं और उन्हें एक-एक करके पढ़ना किसी के लिए संभव नहीं। वर्गीकरण उन्हें समान लक्षणों के आधार पर समूहों में बांट देता है, जिससे किसी समूह के बारे में सीखा गया तथ्य उसके प्रत्येक सदस्य पर लागू होता है। जीव विज्ञान की वह शाखा जो इस व्यवस्था से संबंधित है, वर्गिकी कहलाती है, और जीवों के प्रकार, विविधता तथा उनके पारस्परिक संबंधों का अध्ययन वर्गीकरण विज्ञान है। यह अध्याय परीक्षकों को प्रिय है, क्योंकि इसमें ऐसे नाम भरे हैं जो सीधे पूछे जा सकते हैं: कौन-सी प्रणाली किसने दी, उसमें कितने जगत थे, कोशिका भित्ति किससे बनी है और सबसे बड़ा संघ कौन है।
द्विनाम पद्धति
स्वीडिश प्रकृतिवैज्ञानिक कैरोलस लीनियस, जिन्हें वर्गिकी का जनक कहा जाता है, ने दो शब्दों वाले वैज्ञानिक नामों की वह पद्धति दी जो जीव विज्ञान आज भी प्रयोग करता है। प्रत्येक जीव को लैटिन में एक नाम मिलता है, जिसमें पहले वंश का नाम और फिर जाति का विशेषण होता है, जैसे मनुष्य के लिए होमो सेपियंस और आम के लिए मैंजिफेरा इंडिका। इसके नियम सरल हैं और उसी रूप में पूछे जाते हैं।
- नाम में दो शब्द होते हैं: पहला वंश और दूसरा जाति।
- वंश का आरंभ बड़े अक्षर से और जाति विशेषण का छोटे अक्षर से होता है।
- नाम तिरछे अक्षरों में छपता है और हाथ से लिखते समय दोनों शब्दों के नीचे अलग-अलग रेखा खींची जाती है।
- पादपों के नाम अंतरराष्ट्रीय नामपद्धति संहिता और जंतुओं के नाम अंतरराष्ट्रीय प्राणि नामपद्धति संहिता के अनुसार रखे जाते हैं।
| जीव | वैज्ञानिक नाम |
|---|---|
| मनुष्य | होमो सेपियंस |
| बाघ | पैंथेरा टाइग्रिस |
| मोर | पावो क्रिस्टेटस |
| धान | ओराइजा सेटाइवा |
| गेहूं | ट्रिटिकम एस्टाइवम |
| आम | मैंजिफेरा इंडिका |
| नीम | अजाडिरैक्टा इंडिका |
| कमल | नेलंबो न्यूसिफेरा |
वर्गिकीय पदानुक्रम
प्रत्येक जीव को व्यापक से सूक्ष्म की ओर जाती श्रेणियों की एक श्रृंखला में रखा जाता है: जगत, जंतुओं में संघ अथवा पादपों में प्रभाग, वर्ग, गण, कुल, वंश और जाति। इनमें से प्रत्येक श्रेणी को टैक्सॉन कहते हैं। श्रृंखला में नीचे आते-आते समूह में जीवों की संख्या घटती जाती है और उनके समान लक्षण बढ़ते जाते हैं। जाति वर्गीकरण की मूल इकाई है, अर्थात ऐसे जीवों का समूह जो एक-दूसरे से अत्यधिक मिलते हैं और आपस में प्रजनन कर सकते हैं। मनुष्य के लिए यह श्रृंखला एनिमेलिया, कॉर्डेटा, मैमेलिया, प्राइमेटा, होमिनिडी, होमो तथा सेपियंस है।
दो जगत से पांच जगत तक
लीनियस ने समस्त जीवन को दो जगतों, पादप और जंतु, में बांटा था, परंतु इससे जीवाणु, कवक तथा एककोशिकीय जीव असहज स्थिति में रह गए। अर्नस्ट हेकल ने एककोशिकीय रूपों के लिए प्रोटिस्टा जोड़ा, हर्बर्ट कोपलैंड ने जीवाणुओं को अलग किया और 1969 में रॉबर्ट एच. व्हिटेकर ने पांच जगत वाली वह प्रणाली दी जिसे पाठ्यपुस्तकें आज भी मानती हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप तथा जंतु। व्हिटेकर ने कोशिका संरचना, शरीर का संगठन, पोषण की विधि, प्रजनन तथा विकासात्मक संबंधों को आधार बनाया। बाद में कार्ल वोस ने कोशिका के रसायन के आधार पर आर्किया, बैक्टीरिया और यूकेरिया के तीन अधिजगत की प्रणाली प्रस्तावित की।
पांच जगत एक दृष्टि में
| जगत | कोशिका प्रकार | कोशिका भित्ति | पोषण | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| मोनेरा | प्रोकैरियोटिक | पेप्टाइडोग्लाइकन, माइकोप्लाज्मा में अनुपस्थित | स्वपोषी या परपोषी | जीवाणु, नीलहरित शैवाल, आर्किबैक्टीरिया, माइकोप्लाज्मा |
| प्रोटिस्टा | यूकैरियोटिक, एककोशिकीय | कुछ में उपस्थित | स्वपोषी या परपोषी | डायटम, डाइनोफ्लैजिलेट, यूग्लीना, अमीबा, प्लाज्मोडियम, पैरामीशियम |
| कवक | यूकैरियोटिक, अधिकतर बहुकोशिकीय | काइटिन | परपोषी, मृतजीवी या परजीवी | यीस्ट, पेनिसिलियम, एगैरिकस, रतुआ और कंडुआ |
| पादप | यूकैरियोटिक, बहुकोशिकीय | सेल्यूलोज | प्रकाश संश्लेषण से स्वपोषी | शैवाल, मॉस, फर्न, चीड़, पुष्पी पादप |
| जंतु | यूकैरियोटिक, बहुकोशिकीय | अनुपस्थित | परपोषी, भक्षण द्वारा | स्पंज से स्तनधारी तक |
माइकोप्लाज्मा ज्ञात सबसे छोटी जीवित कोशिका है और उसमें कोशिका भित्ति बिल्कुल नहीं होती। प्रोटिस्टा में डायटम अपने पीछे डायटमी मृदा नामक कठोर निक्षेप छोड़ते हैं, डाइनोफ्लैजिलेट लाल ज्वार उत्पन्न करते हैं और यूग्लीना मिक्सोट्रॉफिक है, जो प्रकाश में पादप की तरह और अंधकार में जंतु की तरह पोषण करता है।
पादप और जंतु जगत के भीतर
पादप जगत शैवाल, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, अनावृतबीजी तथा आवृतबीजी में बंटा है। मॉस जैसे ब्रायोफाइट पादप जगत के उभयचर कहे जाते हैं, क्योंकि वे स्थल पर रहते हैं पर प्रजनन के लिए जल चाहिए। फर्न जैसे टेरिडोफाइट प्रथम पादप हैं जिनमें वास्तविक संवहन ऊतक होता है। साइकस और पाइनस जैसे अनावृतबीजी नग्न बीज धारण करते हैं, जो फल में बंद नहीं होते, जबकि आवृतबीजी बीज फलों के भीतर रखते हैं और एकबीजपत्री तथा द्विबीजपत्री में बंटे हैं। जंतु जगत में आर्थ्रोपोडा सबसे बड़ा संघ है, जिसमें कीट आते हैं, मोलस्का दूसरा सबसे बड़ा है, और कॉर्डेटा वह संघ है जिसमें पृष्ठरज्जु होती है और जिसके वर्ग मछलियां, उभयचर, सरीसृप, पक्षी तथा स्तनधारी हैं।
वर्गीकरण से बाहर रह गए जीव
विषाणु, वाइरॉइड, प्रिऑन तथा लाइकेन पांच जगत प्रणाली में स्थान नहीं पाते। विषाणु अनिवार्य परजीवी है, जिसमें न्यूक्लिक अम्ल का केंद्र और प्रोटीन का आवरण होता है और जो परपोषी कोशिका के बाहर निष्क्रिय रहता है; दमित्री इवानोव्स्की ने 1892 में इसका पहला वर्णन किया, मार्टिनस बाइजेरिंक ने संक्रामक द्रव को जीवित द्रव कहा और डब्ल्यू. एम. स्टैनली ने तंबाकू मोजैक विषाणु का क्रिस्टलीकरण किया। वाइरॉइड और भी सरल हैं, जिनमें प्रोटीन आवरण के बिना केवल मुक्त न्यूक्लिक अम्ल होता है। लाइकेन शैवाल और कवक की साझेदारी है, जिसमें शैवाल भोजन बनाता है और कवक जल तथा खनिज रोकता है; प्रदूषित वायु में लाइकेन मर जाते हैं, इसलिए वे वायु प्रदूषण के सूचक माने जाते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्नपत्र पूछते हैं कि कौन-सी प्रणाली किसने और किस वर्ष दी, वर्गिकीय श्रेणियों का क्रम क्या है, प्रत्येक जगत में कोशिका भित्ति किससे बनी है, तथा एक पंक्ति वाली पहचान जैसे सबसे बड़ा संघ, सबसे छोटी कोशिका और पादप जगत के उभयचर। सामान्य पादपों तथा जंतुओं के वैज्ञानिक नाम सीधे पूछे जाते हैं। सामान्य जाल ये हैं: पांच जगत का श्रेय व्हिटेकर के बजाय हेकल को देना, कोशिका भित्ति होने के कारण कवक को पादप जगत में रख देना, यूग्लीना को पादप मान लेना, और जाति विशेषण को बड़े अक्षर से लिखना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| वर्गिकी के जनक | कैरोलस लीनियस, सिस्टेमा नेचुरे के लेखक |
|---|---|
| पांच जगत प्रणाली | 1969 में आर. एच. व्हिटेकर द्वारा प्रस्तावित |
| तीन अधिजगत | आर्किया, बैक्टीरिया और यूकेरिया, कार्ल वोस द्वारा प्रस्तावित |
| वर्गीकरण की मूल इकाई | जाति |
| वर्गिकीय पदानुक्रम | जगत, संघ या प्रभाग, वर्ग, गण, कुल, वंश, जाति |
| कोशिका भित्ति | जीवाणु में पेप्टाइडोग्लाइकन, कवक में काइटिन, पादप में सेल्यूलोज, जंतु में अनुपस्थित |
| सबसे छोटी जीवित कोशिका | माइकोप्लाज्मा, जिसमें कोशिका भित्ति नहीं होती |
| सबसे बड़ा जंतु संघ | आर्थ्रोपोडा; मोलस्का दूसरा सबसे बड़ा |
| पादप जगत के उभयचर | ब्रायोफाइट, जैसे मॉस और लिवरवर्ट |
| नग्न बीज | अनावृतबीजी, जैसे साइकस, पाइनस और जिंकगो |
| लाइकेन | शैवाल और कवक का साथ रहना; वायु प्रदूषण का सूचक |
| तंबाकू मोजैक विषाणु | डब्ल्यू. एम. स्टैनली ने क्रिस्टलीकरण किया; विषाणु का पहला अध्ययन 1892 में इवानोव्स्की ने किया |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
वर्गिकी का जनक किसे कहा जाता है?
- A.चार्ल्स डार्विन
- B.कैरोलस लीनियस
- C.अर्नस्ट हेकल
- D.रॉबर्ट हुक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, कैरोलस लीनियस है। स्वीडिश प्रकृतिवैज्ञानिक कार्ल वॉन लिने, जो लैटिन में कैरोलस लीनियस कहे जाते हैं, ने पादपों तथा जंतुओं को श्रेणियों के पदानुक्रम में व्यवस्थित किया और अपनी कृतियों सिस्टेमा नेचुरे तथा स्पीशीज प्लांटेरम में जीव विज्ञान को दो शब्दों वाले वैज्ञानिक नामों की पद्धति दी, इसीलिए उन्हें वर्गिकी का जनक कहा जाता है। A गलत है, क्योंकि चार्ल्स डार्विन ने ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज में प्राकृतिक चयन से जातियों के बदलने की व्याख्या की, जो नामकरण और श्रेणीकरण के बजाय विकासवादी जीव विज्ञान की नींव है। C गलत है, क्योंकि अर्नस्ट हेकल ने एककोशिकीय जीवों के लिए प्रोटिस्टा जगत जोड़ा, जो महत्वपूर्ण कदम था पर नामकरण पद्धति तय होने के बहुत बाद का। D गलत है, क्योंकि रॉबर्ट हुक ने कॉर्क की पतली काट में पहली बार कोशिकाएं देखीं और नाम दिया, जो कोशिका विज्ञान के इतिहास का भाग है।
जीवों का पांच जगत वर्गीकरण किसने प्रस्तावित किया था?
- A.अर्नस्ट हेकल
- B.कार्ल वोस
- C.आर. एच. व्हिटेकर
- D.हर्बर्ट कोपलैंड
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, आर. एच. व्हिटेकर है। रॉबर्ट हार्डिंग व्हिटेकर ने 1969 में मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप तथा जंतु ये पांच जगत प्रस्तावित किए और विभाजन के आधार बनाए कोशिका संरचना, शरीर का संगठन, पोषण की विधि, प्रजनन तथा विकासात्मक संबंध। A गलत है, क्योंकि अर्नस्ट हेकल ने पादप और जंतु के साथ प्रोटिस्टा जोड़कर तीन जगत की प्रणाली दी थी। B गलत है, क्योंकि कार्ल वोस बाद में आए और राइबोसोमी न्यूक्लिक अम्ल के रसायन के आधार पर आर्किया, बैक्टीरिया तथा यूकेरिया ये तीन अधिजगत प्रस्तावित किए, जिससे पुराना मोनेरा बंट गया। D गलत है, क्योंकि हर्बर्ट कोपलैंड ने चार जगत की प्रणाली दी, जिसमें जीवाणुओं को प्रोटिस्टा से अलग किया गया, जो हेकल और व्हिटेकर के बीच का चरण था। प्रणालियों का क्रम इस रूप में स्मरण रखें: लीनियस के दो जगत, हेकल के तीन, कोपलैंड के चार, व्हिटेकर के पांच और वोस के तीन अधिजगत, क्योंकि प्रश्न अक्सर इसी क्रम पर बनाए जाते हैं।
निम्नलिखित में से कौन हरे शैवाल का उदाहरण है?
- A.लैमिनेरिया
- B.सारगासम
- C.क्लैमाइडोमोनास
- D.फ्यूकस
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, क्लैमाइडोमोनास है। क्लैमाइडोमोनास क्लोरोफाइसी अर्थात हरे शैवाल का एककोशिकीय, कशाभिका युक्त सदस्य है, जिसमें पर्णहरिम ए तथा बी पादप को घास जैसा हरा रंग देते हैं और भोजन मंड के रूप में संचित रहता है। A गलत है, क्योंकि लैमिनेरिया एक केल्प है और फियोफाइसी अर्थात भूरे शैवाल में आता है, जिसमें फ्यूकोजैंथिन वर्णक पर्णहरिम को ढक देता है और संचित भोजन लैमिनेरिन तथा मैनिटॉल होता है। B गलत है, क्योंकि सारगासम भी भूरा शैवाल है, वही तैरता खरपतवार जिससे सारगासो सागर का नाम पड़ा। D गलत है, क्योंकि ठंडे तटों की चट्टानों पर उगने वाला फ्यूकस भी भूरा शैवाल है। इन चारों में केवल क्लैमाइडोमोनास में हरे वर्णक किसी ढकने वाले वर्णक के बिना रहते हैं, इसलिए वही हरा शैवाल है।
जैविक वर्गीकरण की मूल इकाई कौन-सी है?
- A.वंश
- B.कुल
- C.जाति
- D.गण
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, जाति है। जाति ऐसे जीवों का समूह है जो सभी आवश्यक लक्षणों में एक-दूसरे से मिलते हैं और आपस में प्रजनन कर उपजाऊ संतान उत्पन्न कर सकते हैं; यह वर्गीकरण की सबसे छोटी और मूल इकाई है और इससे ऊपर की सभी श्रेणियां जातियों को समूहबद्ध करके बनती हैं। A गलत है, क्योंकि वंश निकट संबंधी जातियों का समूह है, जैसे पैंथेरा में सिंह, बाघ और तेंदुआ आते हैं, इसलिए वह मूल इकाई से एक श्रेणी ऊपर है। B गलत है, क्योंकि कुल संबंधित वंशों का समूह है और इसलिए और भी व्यापक है। D गलत है, क्योंकि गण संबंधित कुलों का समूह है, जो कुल से दो श्रेणी ऊपर खड़ा है और मूल इकाई होने से बहुत दूर है। परीक्षा भवन में सरल परीक्षण यह है कि मूल इकाई वही समूह होगा जिसे आपस में प्रजनन करने वाले जीवों के और छोटे नामित समूहों में बांटा न जा सके, और यह वर्णन केवल जाति पर लागू होता है।
कवक की कोशिका भित्ति मुख्यतः किससे बनी होती है?
- A.सेल्यूलोज
- B.काइटिन
- C.पेप्टाइडोग्लाइकन
- D.लिग्निन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, काइटिन है। कवक कोशिका की भित्ति काइटिन से बनी होती है, जो नाइट्रोजनयुक्त बहुशर्करा है और कीटों के बाह्यकंकाल में भी मिलती है, और यही एक बड़ा कारण है कि कवक को पादप जगत से निकालकर अलग जगत दिया गया। A गलत है, क्योंकि सेल्यूलोज पादप कोशिकाओं तथा कुछ शैवालों की भित्ति का पदार्थ है और कवक में वह बहुत कम होता है। C गलत है, क्योंकि पेप्टाइडोग्लाइकन, जिसे म्यूरीन भी कहते हैं, जीवाणुओं अर्थात मोनेरा जगत की भित्ति का पदार्थ है और पेनिसिलिन जैसी प्रतिजैविक दवाएं उसी पर प्रहार करती हैं। D गलत है, क्योंकि लिग्निन कोई भित्ति बनाने वाली बहुशर्करा नहीं, बल्कि वह पदार्थ है जो उच्च पादपों के काष्ठ ऊतक को कठोर बनाता है। यह भी स्मरण रखें कि कोशिका भित्ति के पदार्थ पर आधारित प्रश्नों का क्रम जीवाणु, कवक, पादप और जंतु के रूप में याद करना सबसे सुरक्षित है, क्योंकि चारों में भित्ति का पदार्थ भिन्न है।
निम्नलिखित में से कौन सबसे छोटी जीवित कोशिका है, जिसमें कोशिका भित्ति नहीं होती?
- A.माइकोप्लाज्मा
- B.एश्चेरिकिया कोलाई
- C.यीस्ट
- D.क्लोरेला
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, माइकोप्लाज्मा है। माइकोप्लाज्मा ज्ञात सबसे छोटी जीवित कोशिकाएं हैं, उनमें कोशिका भित्ति बिल्कुल नहीं होती और इसी कारण वे आकार बदल सकती हैं तथा भित्ति पर प्रहार करने वाली प्रतिजैविक दवाओं से प्रभावित नहीं होतीं; वे पादपों और जंतुओं में रोग उत्पन्न करती हैं और मोनेरा जगत में रखी जाती हैं। B गलत है, क्योंकि एश्चेरिकिया कोलाई सामान्य दंडाकार जीवाणु है, जिसमें सुविकसित पेप्टाइडोग्लाइकन भित्ति होती है और जो माइकोप्लाज्मा से बहुत बड़ा है। C गलत है, क्योंकि यीस्ट एककोशिकीय कवक है, जिसमें काइटिन की भित्ति और वास्तविक केंद्रक होता है, अर्थात वह भित्तियुक्त तथा यूकैरियोटिक दोनों है। D गलत है, क्योंकि क्लोरेला हरा शैवाल है, भित्तियुक्त यूकैरियोटिक कोशिका जिसमें हरितलवक होते हैं और जो पोषण पूरक तथा प्रकाश संश्लेषण के अध्ययन में प्रयुक्त होती है।
ब्रायोफाइट को पादप जगत का उभयचर कहा जाता है, क्योंकि वे
- A.केवल जल में उगते हैं
- B.स्थल पर रहते हैं पर प्रजनन के लिए जल चाहिए
- C.खारे और मीठे जल दोनों में रह सकते हैं
- D.ऋतु के साथ अपना रूप बदल लेते हैं
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। मॉस और लिवरवर्ट नम मिट्टी, चट्टानों तथा वृक्ष तनों पर, अर्थात स्थल पर उगते हैं, परंतु उनमें संवहन ऊतक नहीं होता और उनके नर युग्मक को मादा युग्मक तक पहुंचने के लिए जल की पतली परत में तैरना पड़ता है, इसलिए जल के बिना प्रजनन नहीं होता; स्थल पर रहना और जल में प्रजनन करना ठीक वही स्थिति है जो जंतुओं में उभयचरों की है। A गलत है, क्योंकि ब्रायोफाइट जलीय पादप नहीं हैं; पादप जगत के वास्तविक जलीय सदस्य शैवाल हैं। C गलत है, क्योंकि खारे तथा मीठे जल दोनों की सहनशीलता कुछ मछलियों और कुछ शैवालों का लक्षण है, ब्रायोफाइट का नहीं। D गलत है, क्योंकि ऋतु के साथ रूप बदलना अनेक पादपों में सामान्य है और पादप जगत के उभयचर नाम से उसका कोई संबंध नहीं है।
लाइकेन किन दो जीवों का सहजीवी संघ है?
- A.कवक और जीवाणु
- B.शैवाल और कवक
- C.कवक और उच्च पादप की जड़
- D.शैवाल और जीवाणु
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, शैवाल और कवक है। लाइकेन में शैवाल साथी, जिसे फाइकोबायोंट कहते हैं, प्रकाश संश्लेषण करके भोजन देता है, जबकि कवक साथी अर्थात माइकोबायोंट आश्रय देता है और जल तथा खनिज अवशोषित करता है; लाइकेन नग्न चट्टान पर अग्रणी के रूप में उगते हैं और प्रदूषित वायु में मर जाते हैं, इसलिए वे वायु प्रदूषण के सूचक माने जाते हैं। A गलत है, क्योंकि कवक और जीवाणु का संघ लाइकेन नहीं है और उसका कोई ऐसा मानक नाम नहीं है। C गलत है, क्योंकि उच्च पादप की जड़ के साथ रहने वाला कवक माइकोराइजा बनाता है, जो एक अन्य प्रसिद्ध सहजीविता है पर भिन्न है। D गलत है, क्योंकि धान के खेत जैसी स्थिति में शैवाल और जीवाणु की नाइट्रोजन स्थिरीकरण वाली साझेदारी भी लाइकेन नहीं है।
जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ कौन-सा है?
- A.कॉर्डेटा
- B.मोलस्का
- C.आर्थ्रोपोडा
- D.एनेलिडा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, आर्थ्रोपोडा है। आर्थ्रोपोडा जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ है, जिसमें वर्णित जातियों की संख्या शेष सभी संघों से अधिक है, क्योंकि उसमें कीटों के साथ क्रस्टेशियन, मकड़ियां, बिच्छू तथा कनखजूरे आते हैं; इसके सदस्यों में काइटिन का बाह्यकंकाल और संधियुक्त टांगें होती हैं। A गलत है, क्योंकि पृष्ठरज्जु वाले जंतुओं का संघ कॉर्डेटा मछलियों, उभयचरों, सरीसृपों, पक्षियों तथा स्तनधारियों को रखता है, पर जातियों की संख्या में बहुत छोटा है। B गलत है, क्योंकि घोंघे, द्विकपाटी, स्क्विड तथा ऑक्टोपस वाला मोलस्का दूसरा सबसे बड़ा संघ है। D गलत है, क्योंकि केंचुआ और जोंक जैसे खंडयुक्त कृमियों का संघ एनेलिडा उससे भी छोटा है। परीक्षा के लिए यह आंकड़ा उपयोगी है कि वर्णित समस्त जंतु जातियों के दो-तिहाई से अधिक आर्थ्रोपोड हैं, जिनमें अधिकांश कीट हैं, इसलिए इस प्रश्न का उत्तर कोई अन्य संघ नहीं हो सकता।
वैज्ञानिक नाम पैंथेरा टाइग्रिस में पैंथेरा शब्द किसे दर्शाता है?
- A.जाति
- B.वंश
- C.कुल
- D.वर्ग
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, वंश है। द्विनाम पद्धति में नाम का पहला शब्द वंश का नाम होता है, अर्थात वह वंश जिससे जीव संबंधित है, और दूसरा शब्द जाति विशेषण; इस प्रकार पैंथेरा वह वंश है जिसमें सिंह पैंथेरा लियो और तेंदुआ पैंथेरा पार्डस के रूप में भी आते हैं, जबकि टाइग्रिस बाघ का विशेषण है। A गलत है, क्योंकि जाति का नाम दूसरे शब्द से बनता है और वैसे भी जाति का नाम अपने वंश के साथ ही अर्थ रखता है। C गलत है, क्योंकि बिल्लियों का कुल फेलिडी है, जो वंश से एक श्रेणी ऊपर है और दो शब्दों वाले नाम का भाग कभी नहीं बनता। D गलत है, क्योंकि यहां वर्ग मैमेलिया है, जो कई श्रेणी ऊपर है और द्विनाम में वह भी कभी नहीं लिखा जाता।
तंबाकू मोजैक विषाणु का क्रिस्टलीकरण करके यह दिखाने वाले वैज्ञानिक कौन थे कि वह मुख्यतः प्रोटीन है?
- A.दमित्री इवानोव्स्की
- B.मार्टिनस बाइजेरिंक
- C.डब्ल्यू. एम. स्टैनली
- D.एडवर्ड जेनर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, डब्ल्यू. एम. स्टैनली है। वेंडेल मेरेडिथ स्टैनली ने तंबाकू मोजैक विषाणु का क्रिस्टलीकरण किया और दिखाया कि वे क्रिस्टल मुख्यतः प्रोटीन के बने हैं, जिस कार्य ने सिद्ध किया कि विषाणु को रासायनिक पदार्थ की तरह संभाला जा सकता है और जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार में हिस्सा मिला। A गलत है, क्योंकि दमित्री इवानोव्स्की ने 1892 में केवल यह दिखाया था कि रोगग्रस्त तंबाकू पादप का रस जीवाणुओं को रोक लेने वाले छननी से गुजरने के बाद भी संक्रामक रहता है। B गलत है, क्योंकि मार्टिनस बाइजेरिंक ने उस प्रयोग को दोहराकर आगे बढ़ाया और कारक को जीवित संक्रामक द्रव कहा, परंतु उसे पृथक नहीं किया। D गलत है, क्योंकि एडवर्ड जेनर ने लगभग एक शताब्दी पूर्व चेचक के विरुद्ध टीकाकरण विकसित किया था और उन्होंने पादप विषाणुओं पर कभी काम नहीं किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पांच जगत वर्गीकरण किसने और किस वर्ष प्रस्तावित किया?
रॉबर्ट एच. व्हिटेकर ने 1969 में, जिसमें जीवों को मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप तथा जंतु में बांटा गया। उनके आधार थे कोशिका संरचना, शरीर का संगठन, पोषण की विधि, प्रजनन तथा विकासात्मक संबंध।
वर्गीकरण की मूल इकाई क्या है?
जाति। जाति ऐसे जीवों का समूह है जो सभी आवश्यक लक्षणों में एक-दूसरे से मिलते हैं और आपस में प्रजनन कर उपजाऊ संतान उत्पन्न कर सकते हैं। वंश से जगत तक की सभी ऊंची श्रेणियां समान लक्षण वाली जातियों को समूहबद्ध करके बनाई जाती हैं।
कवक को पादप जगत में क्यों नहीं रखा जाता?
कवक में कोशिका भित्ति होती है, परंतु वह सेल्यूलोज की नहीं, काइटिन की बनी होती है, उनमें पर्णहरिम नहीं होता और वे प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकते, तथा वे मृतजीवी या परजीवी बनकर घुले हुए पदार्थ अवशोषित करते हैं। पोषण और कोशिका रसायन पादपों से भिन्न होने के कारण व्हिटेकर ने उन्हें अलग जगत दिया।
ब्रायोफाइट को पादप जगत का उभयचर क्यों कहा जाता है?
मॉस और लिवरवर्ट स्थल पर, अधिकतर नम मिट्टी, चट्टानों तथा वृक्ष तनों पर उगते हैं, परंतु उनके नर युग्मक को मादा युग्मक तक पहुंचने के लिए जल की पतली परत में तैरना पड़ता है। स्थल पर रहकर भी प्रजनन के लिए जल पर निर्भर होने के कारण वे जंतुओं में उभयचरों जैसी स्थिति रखते हैं।
मैंजिफेरा इंडिका जैसे वैज्ञानिक नाम में दोनों शब्दों का क्या अर्थ है?
पहला शब्द मैंजिफेरा वंश का नाम है, अर्थात वह वंश जिससे यह पादप संबंधित है; दूसरा शब्द इंडिका जाति विशेषण है, जो उस वंश के भीतर जाति की पहचान कराता है। वंश बड़े अक्षर से और विशेषण छोटे अक्षर से लिखा जाता है और छपाई में दोनों तिरछे अक्षरों में आते हैं।
स्रोत
- जीव विज्ञान (कक्षा 11), अध्याय 1: जीव जगत तथा अध्याय 2: जीव जगत का वर्गीकरण — एनसीईआरटी
- विज्ञान (कक्षा 9), जीवों में विविधता संबंधी अध्याय — एनसीईआरटी
- फॉना ऑफ इंडिया, जंतु वर्गीकरण के प्रारंभिक खंड — भारतीय प्राणि सर्वेक्षण





