तरल: उत्प्लावन, श्यानता और पृष्ठ तनाव के नोट्स
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तरल के पूर्ण नोट्स: पास्कल का नियम, आर्किमिडीज का सिद्धांत, प्लवन, आपेक्षिक घनत्व, श्यानता, स्टोक का नियम और पृष्ठ तनाव।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

तरल वह है जो बहता है, इसलिए द्रव और गैस दोनों तरल हैं, और परीक्षक इनके तीन गुण सर्वाधिक पूछते हैं: तरल में रखी वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल, बहाव का विरोध करने वाला आंतरिक घर्षण, और वह तनाव जो द्रव की मुक्त सतह को खिंची हुई झिल्ली जैसा बना देता है। ये तीनों मिलकर बताते हैं कि लोहे का जहाज क्यों तैरता है जबकि लोहे की कील डूब जाती है, शहद पानी से धीमे क्यों ढलता है, वर्षा की बूंद गोल क्यों होती है और पानी बत्ती में ऊपर क्यों चढ़ता है। यह अध्याय सामान्य विज्ञान के प्रश्नपत्र में अंक पाने का सबसे भरोसेमंद स्रोत भी है, क्योंकि तथ्य थोड़े हैं, वे बदलते नहीं और वही एक दर्जन अनुप्रयोग बार-बार पूछे जाते हैं।
तरल में दाब और पास्कल का नियम
प्रणोद वह बल है जो कोई वस्तु किसी सतह पर लंबवत् लगाती है, और दाब प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रणोद है, जिसे पास्कल में मापा जाता है, जहां एक पास्कल एक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर है। रो घनत्व वाले द्रव में h गहराई पर दाब h गुणा रो गुणा g होता है, इसलिए वह केवल गहराई, घनत्व और गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करता है, पात्र के आकार अथवा उसके तल के क्षेत्रफल पर नहीं। तरल में किसी बिंदु पर दाब सभी दिशाओं में समान रूप से कार्य करता है, इसीलिए बांध नीचे की ओर अधिक मोटा बनाया जाता है और गोताखोर को हर ओर से दबाव अनुभव होता है।
पास्कल का नियम कहता है कि बंद तरल पर लगाया गया दाब तरल के प्रत्येक भाग तथा पात्र की दीवारों तक बिना घटे पहुंचता है। अतः संकरे पिस्टन पर लगा छोटा बल चौड़े पिस्टन पर बड़ा बल उत्पन्न करता है, और वह उनके क्षेत्रफलों के अनुपात में होता है; यही द्रवचालित उत्थापक, द्रवचालित प्रेस और वाहन के द्रवचालित ब्रेक का सिद्धांत है। एक मानक वायुमंडलीय दाब 101,325 पास्कल के बराबर है, अर्थात् 760 मिलीमीटर ऊंचे पारे के स्तंभ का दाब।
आर्किमिडीज का सिद्धांत और प्लवन
- आर्किमिडीज का सिद्धांत: तरल में पूर्ण या आंशिक रूप से डूबी वस्तु पर उतना उत्प्लावन बल लगता है जितना उसके द्वारा विस्थापित तरल का भार होता है, अतः उत्प्लावन बल डूबे भाग के आयतन, तरल के घनत्व और g के गुणनफल के बराबर है।
- इसलिए उत्प्लावन बल तरल के घनत्व और डूबे आयतन पर निर्भर करता है, वस्तु के आकार, द्रव्यमान अथवा पदार्थ पर नहीं।
- उत्प्लावन केंद्र विस्थापित तरल का गुरुत्व केंद्र है, और तैरती वस्तु स्थायी संतुलन में तब होती है जब उसका उत्प्लावन मध्य बिंदु अर्थात् मेटासेंटर उसके गुरुत्व केंद्र से ऊपर हो।
- प्लवन का नियम: तैरती वस्तु अपने भार के बराबर तरल विस्थापित करती है, इसलिए उसके आयतन का डूबा अंश उसके घनत्व तथा तरल के घनत्व के अनुपात के बराबर होता है।
- बर्फ का घनत्व लगभग 920 किलोग्राम प्रति घन मीटर है और जल का 1,000, इसलिए हिमशैल का लगभग नौ-दसवां भाग सतह के नीचे रहता है और केवल लगभग आठ प्रतिशत ऊपर दिखता है।
- जहाज इसलिए तैरता है कि उसका खोखला आकार जल का बड़ा आयतन विस्थापित करता है; समुद्री जल नदी के जल से घना होने के कारण जहाज उसमें कुछ ऊपर रहता है, और प्लिमसॉल रेखा सुरक्षित भार सीमा दर्शाती है।
- आपेक्षिक घनत्व अर्थात् विशिष्ट गुरुत्व किसी पदार्थ के घनत्व को चार डिग्री सेल्सियस पर जल के घनत्व से भाग देकर मिलता है और उसका कोई मात्रक नहीं होता; उसे हाइड्रोमीटर मापता है और दूध के लिए प्रयुक्त हाइड्रोमीटर लैक्टोमीटर कहलाता है।
श्यानता
श्यानता तरल का आंतरिक घर्षण है, वह गुण जिससे एक परत अपने पास वाली परत की गति का विरोध करती है। न्यूटन के श्यानता नियम के अनुसार दो परतों के बीच अपरूपण प्रतिबल वेग प्रवणता के समानुपाती होता है, और समानुपात का स्थिरांक श्यानता गुणांक है। इसका एसआई मात्रक पास्कल सेकंड है, जो न्यूटन सेकंड प्रति वर्ग मीटर के बराबर है, और सीजीएस मात्रक पॉइज है, जहां एक पास्कल सेकंड दस पॉइज के बराबर होता है। गतिक श्यानता श्यानता गुणांक को घनत्व से भाग देकर मिलती है, जिसका मात्रक वर्ग मीटर प्रति सेकंड और सीजीएस में स्टोक है। जो तरल न्यूटन के नियम का पालन करता है, जैसे जल या वायु, वह न्यूटनी तरल है; पेंट, रक्त और टमाटर की चटनी पालन नहीं करते और अन्यूटनी हैं। द्रव की श्यानता तापमान बढ़ने पर घटती है, इसीलिए इंजन गर्म होने पर उसका तेल पतला हो जाता है, परंतु गैस की श्यानता तापमान बढ़ने पर बढ़ती है। स्टोक के नियम से तरल में गिरते छोटे गोले पर श्यान कर्षण छह गुना पाई गुणा श्यानता गुणांक गुणा त्रिज्या गुणा वेग होता है, और वस्तु शीघ्र ही स्थिर सीमांत वेग प्राप्त कर लेती है, इसीलिए वर्षा की बूंद उस चाल से धरती पर नहीं टकराती जो मुक्त पतन से मिलती।
पृष्ठ तनाव और केशिकत्व
- पृष्ठ तनाव द्रव की सतह में खींची गई रेखा के अनुदिश प्रति इकाई लंबाई लगने वाला बल है, जिसे न्यूटन प्रति मीटर में मापा जाता है; उसी गुण को ऊर्जा के रूप में देखें तो वह पृष्ठ ऊर्जा है, जिसका मात्रक जूल प्रति वर्ग मीटर है।
- यह अणुओं के बीच संसक्ति से उत्पन्न होता है, जो सतह के अणुओं को भीतर खींचती है और सतह को न्यूनतम संभव क्षेत्रफल वाली खिंची झिल्ली जैसा बना देती है, इसीलिए मुक्त बूंद गोलाकार होती है।
- तापमान बढ़ने पर पृष्ठ तनाव घटता है और क्रांतिक तापमान पर शून्य हो जाता है; साबुन और अपमार्जक उसे घटाते हैं, इसी से साबुन का पानी कपड़े को भिगोकर उसमें प्रवेश करता है, जबकि घुला नमक उसे बढ़ाता है।
- द्रव की बूंद के भीतर आधिक्य दाब पृष्ठ तनाव का दो गुना भाग त्रिज्या होता है, और साबुन के बुलबुले के भीतर चार गुना भाग त्रिज्या, क्योंकि बुलबुले की दो सतहें होती हैं।
- केशिकत्व संकरी नली में द्रव का चढ़ना या गिरना है, जिसकी ऊंचाई दो गुना पृष्ठ तनाव गुणा स्पर्श कोण का कोज्या, भाग त्रिज्या, घनत्व और g होती है; अतः अधिक पृष्ठ तनाव वाला द्रव उसी नली में अधिक ऊंचा चढ़ता है।
- जल कांच को भिगोता है, अवतल पृष्ठ बनाता है और ऊपर चढ़ता है, क्योंकि कांच से आसंजन संसक्ति से अधिक है; पारा कांच को नहीं भिगोता, उन्नतोदर पृष्ठ बनाता है और नीचे गिरता है।
- सोखता कागज, दीपक की बत्ती, त्वचा पोंछने वाला तौलिया और मिट्टी से पौधों की जड़ों तक जल का पहुंचना, ये सब केशिका क्रिया के प्रभाव हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
तीन प्रकार के प्रश्न बार-बार आते हैं। पहला, कोई दैनिक तथ्य किस गुण से समझाया जाए: गोल वर्षा बूंद, तैरता जहाज, गर्म इंजन में पतला होता तेल, बत्ती में चढ़ता पानी। दूसरा, मात्रक: श्यानता के लिए पास्कल सेकंड तथा पॉइज, पृष्ठ तनाव के लिए न्यूटन प्रति मीटर, गतिक श्यानता के लिए स्टोक। तीसरा, प्लवन का एक चरण वाला संख्यात्मक प्रश्न, जिसमें डूबा अंश घनत्वों के अनुपात के बराबर होता है और हिमशैल उसका मानक उदाहरण है। जाल: जब प्रश्न जल से ऊपर का भाग पूछे तब डूबा 92 प्रतिशत लिख देना; यह कहना कि गर्म करने पर द्रव और गैस दोनों की श्यानता घटती है; और बूंद के गोलाकार होने का श्रेय उत्प्लावन या श्यानता को देना, जो वास्तव में पृष्ठ तनाव का है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| दाब | प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रणोद; एसआई मात्रक पास्कल, अर्थात् एक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर |
|---|---|
| गहराई पर दाब | h गुणा घनत्व गुणा g; पात्र के आकार और तल क्षेत्रफल से स्वतंत्र |
| पास्कल का नियम | बंद तरल पर दाब बिना घटे पहुंचता है; द्रवचालित मशीनों का आधार |
| आर्किमिडीज का सिद्धांत | उत्प्लावन बल विस्थापित तरल के भार के बराबर |
| उत्प्लावन केंद्र | विस्थापित तरल का गुरुत्व केंद्र |
| स्थायी प्लवन | मेटासेंटर गुरुत्व केंद्र से ऊपर |
| बर्फ का घनत्व | लगभग 920 किग्रा प्रति घन मीटर; हिमशैल का लगभग 8 प्रतिशत जल से ऊपर |
| आपेक्षिक घनत्व | पदार्थ का घनत्व भाग 4 डिग्री सेल्सियस पर जल का घनत्व; कोई मात्रक नहीं |
| श्यानता का मात्रक | एसआई में पास्कल सेकंड; एक पास्कल सेकंड दस पॉइज के बराबर |
| गतिक श्यानता | श्यानता गुणांक भाग घनत्व; सीजीएस मात्रक स्टोक |
| तापमान का प्रभाव | तापमान बढ़ने पर द्रव की श्यानता घटती और गैस की बढ़ती है |
| स्टोक का नियम | गोले पर श्यान कर्षण 6 पाई ईटा r v, जिससे सीमांत वेग मिलता है |
| पृष्ठ तनाव का मात्रक | न्यूटन प्रति मीटर; पृष्ठ ऊर्जा के रूप में जूल प्रति वर्ग मीटर |
| आधिक्य दाब | बूंद में 2T भाग r; साबुन के बुलबुले में 4T भाग r |
| एक वायुमंडल | 101,325 पास्कल, अर्थात् 760 मिलीमीटर पारा |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
किसी दिए गए तरल में रखी वस्तु पर लगने वाले उत्प्लावन बल का परिमाण निम्नलिखित में से किन कारकों पर निर्भर करता है?
- A.उसमें डूबी वस्तु का भार
- B.तरल में डूबी वस्तु का आकार
- C.तरल का घनत्व और उसमें डूबी वस्तु का द्रव्यमान
- D.तरल का घनत्व और उसमें डूबी वस्तु का आयतन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर D है। आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल उसके द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर होता है, और वह भार वास्तव में डूबे भाग के आयतन, तरल के घनत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण का गुणनफल है। इस व्यंजक में केवल यही दो गुण आते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि वस्तु का भार यह तय करता है कि वह तैरेगी या डूबेगी, परंतु उत्प्लावन बल का परिमाण नहीं; एक किलोग्राम सीसा और एक किलोग्राम कॉर्क बहुत भिन्न आयतन विस्थापित करते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि आकार केवल उतना ही महत्व रखता है जितना वह डूबे आयतन को बदलता है; पूर्ण रूप से डूबे एक ही धातु के पिंड और चादर पर समान उत्प्लावन बल लगता है। विकल्प C गलत है क्योंकि वह आयतन के स्थान पर द्रव्यमान रख देता है, और समान द्रव्यमान परंतु भिन्न घनत्व वाली दो वस्तुएं भिन्न आयतन विस्थापित करती हैं।
किसी हिमशैल के कुल आयतन का कितना प्रतिशत भाग जल की सतह से ऊपर तैरता है? बर्फ का घनत्व 920 किग्रा/मी3 और जल का घनत्व 1000 किग्रा/मी3 मानिए।
- A.6
- B.8
- C.92
- D.20
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 8 प्रतिशत है। तैरती वस्तु अपने भार के बराबर तरल विस्थापित करती है, इसलिए उसके आयतन का वह अंश जो सतह के नीचे रहता है, उसके घनत्व तथा तरल के घनत्व के अनुपात के बराबर होता है, अर्थात् यहां 920 भाग 1000 जो 0.92 है। इसका अर्थ है कि हिमशैल का 92 प्रतिशत डूबा रहता है और शेष 8 प्रतिशत जल से ऊपर रहता है। विकल्प A, 6 प्रतिशत, गलत है क्योंकि उसके लिए बर्फ का घनत्व 940 किलोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए। विकल्प C, 92 प्रतिशत, गलत है क्योंकि वह डूबा अंश है, और इस प्रश्न में यही सबसे आम भूल है, क्योंकि परीक्षार्थी एक चरण पहले ही रुक जाता है। विकल्प D, 20 प्रतिशत, बहुत अंतर से गलत है और उसके लिए घनत्व अनुपात 0.8 चाहिए। यही गणना बताती है कि समुद्र में हिमशैल का केवल शिखर क्यों दिखता है।
उत्प्लावन केंद्र क्या होता है?
- A.वस्तु का गुरुत्व केंद्र
- B.विस्थापित तरल का द्रव्यमान केंद्र
- C.गुरुत्व केंद्र और मेटासेंटर के बीच का मध्य बिंदु
- D.उत्प्लावन बल तथा वस्तु की केंद्र रेखा का प्रतिच्छेद बिंदु
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, विस्थापित तरल का द्रव्यमान केंद्र है। वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल उसके चारों ओर के तरल के दाब बलों का परिणामी है, और वह परिणामी उस तरल के गुरुत्व केंद्र से होकर जाता है जिसे वस्तु ने हटाया है, इसीलिए उस बिंदु को उत्प्लावन केंद्र कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि वस्तु का गुरुत्व केंद्र उसके अपने द्रव्यमान के वितरण पर निर्भर करता है, और दोनों बिंदु तभी मिलते हैं जब वस्तु एकसमान घनत्व की हो तथा पूर्णतः डूबी हो। विकल्प C गलत है क्योंकि मेटासेंटर पृथक् बिंदु है, जो तब परिभाषित होता है जब थोड़ा झुकी वस्तु में उत्प्लावन बल की रेखा केंद्र रेखा को काटती है, और स्थायी प्लवन में वह गुरुत्व केंद्र से ऊपर रहता है। विकल्प D उत्प्लावन केंद्र के स्थान पर मेटासेंटर का वर्णन करता है।
वह तरल, जिसमें विकृति का प्रतिरोध अपरूपण प्रतिबल से स्वतंत्र होता है, क्या कहलाता है?
- A.बिंघम प्लास्टिक तरल
- B.छद्म प्लास्टिक तरल
- C.डाइलेटेंट तरल
- D.न्यूटनी तरल
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर D, न्यूटनी तरल है। ऐसे तरल में अपरूपण प्रतिबल अपरूपण दर के सीधे समानुपाती होता है, इसलिए श्यानता गुणांक, जो विकृति के प्रतिरोध को मापता है, लगाए गए प्रतिबल से स्वतंत्र रहकर वही मान बनाए रखता है; जल, वायु, पेट्रोल और पतले तेल इसी प्रकार व्यवहार करते हैं। विकल्प A, बिंघम प्लास्टिक, गलत है क्योंकि वह तब तक बहता ही नहीं जब तक एक निश्चित प्रतिबल पार न हो, और टूथपेस्ट उसका जाना-पहचाना उदाहरण है। विकल्प B, छद्म प्लास्टिक तरल, गलत है क्योंकि अपरूपण दर बढ़ने पर उसकी आभासी श्यानता घटती है, जिससे ब्रश चलाने पर पेंट फैल जाता है। विकल्प C, डाइलेटेंट तरल, गलत है क्योंकि अपरूपण दर बढ़ने पर उसकी आभासी श्यानता बढ़ती है, जैसे मक्के के आटे और जल का गाढ़ा लेप चोट लगने पर कठोर हो जाता है। अंतिम तीनों को अन्यूटनी तरल कहा जाता है।
किसी दी गई केशनली में कोई द्रव जल से अधिक ऊंचाई तक चढ़ता है। इसका कारण यह हो सकता है कि
- A.द्रव जल से अधिक श्यान है।
- B.द्रव का तापमान जल के तापमान से अधिक है।
- C.जल का पृष्ठ तनाव द्रव के पृष्ठ तनाव से कम है।
- D.जल का पृष्ठ तनाव द्रव के पृष्ठ तनाव से अधिक है।
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C है। केशनली में चढ़ने की ऊंचाई द्रव के पृष्ठ तनाव के सीधे समानुपाती और उसके घनत्व तथा नली की त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होती है। यदि कोई द्रव उसी नली में जल से अधिक ऊंचा चढ़ता है, तो सबसे स्वाभाविक व्याख्या यह है कि उसका पृष्ठ तनाव जल से अधिक है, जो यही कहने का दूसरा रूप है कि जल का पृष्ठ तनाव उस द्रव से कम है। विकल्प D संबंध को उलट देता है और उससे द्रव जल से कम ऊंचा चढ़ता। विकल्प A गलत है क्योंकि श्यानता यह तय करती है कि द्रव कितनी तेजी से चढ़ेगा, कितना ऊंचा नहीं; अंतिम ऊंचाई संतुलन का विषय है। विकल्प B गलत है क्योंकि तापमान बढ़ाने पर पृष्ठ तनाव घटता है, जिससे चढ़ाव बढ़ने के स्थान पर घट जाएगा।
पास्कल का नियम निम्नलिखित में से किस उपकरण का सिद्धांत है?
- A.द्रवचालित ब्रेक
- B.बैरोमीटर
- C.हाइड्रोमीटर
- D.साइफन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, द्रवचालित ब्रेक है। पास्कल का नियम कहता है कि बंद तरल पर लगाया गया दाब तरल के प्रत्येक भाग तथा पात्र की दीवारों तक बिना घटे पहुंचता है, इसलिए ब्रेक पैडल पर लगा साधारण दबाव ब्रेक द्रव में ऐसा दाब बनाता है जो प्रत्येक पहिए के चौड़े पिस्टन तक पहुंचकर बड़ा बल बन जाता है। द्रवचालित उत्थापक और द्रवचालित प्रेस भी इसी प्रकार कार्य करते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि बैरोमीटर वायुमंडलीय दाब को पारे के स्तंभ से संतुलित करके मापता है। विकल्प C गलत है क्योंकि हाइड्रोमीटर द्रव में तैरकर आपेक्षिक घनत्व मापता है, जो प्लवन के नियम पर आधारित है। विकल्प D गलत है क्योंकि साइफन दो द्रव तलों की ऊंचाई के अंतर से उत्पन्न दाब अंतर पर कार्य करता है।
निम्नलिखित में से कौन श्यानता गुणांक का एसआई मात्रक है?
- A.पॉइज
- B.पास्कल सेकंड
- C.स्टोक
- D.न्यूटन प्रति मीटर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, पास्कल सेकंड है, जो न्यूटन सेकंड प्रति वर्ग मीटर के बराबर है और न्यूटन के श्यानता नियम से निकलता है, जिसमें पास्कल में अपरूपण प्रतिबल को प्रति सेकंड में वेग प्रवणता से भाग दिया जाता है। विकल्प A, पॉइज, गलत है क्योंकि वह उसी राशि का सीजीएस मात्रक है और एक पास्कल सेकंड दस पॉइज के बराबर होता है। विकल्प C, स्टोक, गलत है क्योंकि वह गतिक श्यानता का सीजीएस मात्रक है, जो श्यानता गुणांक को घनत्व से भाग देकर मिलती है और एसआई में वर्ग मीटर प्रति सेकंड में मापी जाती है। विकल्प D, न्यूटन प्रति मीटर, गलत है क्योंकि वह पृष्ठ तनाव का मात्रक है, अर्थात् प्रति इकाई लंबाई बल, और इस अध्याय में पृष्ठ तनाव तथा श्यानता के मात्रक आपस में बदलकर जाल बिछाना परीक्षकों का पसंदीदा तरीका है।
द्रव की छोटी बूंद का गोलाकार होना किस कारण से होता है?
- A.श्यानता
- B.पृष्ठ तनाव
- C.केशिकत्व
- D.उत्प्लावन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, पृष्ठ तनाव है। संसक्ति बल द्रव की सतह के अणुओं को भीतर की ओर खींचते हैं, इसलिए सतह खिंची झिल्ली जैसा व्यवहार करती है और दिए गए आयतन को घेरने वाला न्यूनतम क्षेत्रफल ले लेती है; निश्चित आयतन के लिए न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल वाली आकृति गोला है, इसीलिए मुक्त बूंद और साबुन का बुलबुला दोनों गोल होते हैं। विकल्प A, श्यानता, गलत है क्योंकि वह बहाव के प्रतिरोध को नियंत्रित करती है और गिरने की चाल तय करती है, आकृति नहीं। विकल्प C, केशिकत्व, गलत है क्योंकि वह पृष्ठ तनाव तथा आसंजन का परिणाम है और संकरी नली में द्रव के चढ़ने या गिरने का वर्णन करती है। विकल्प D, उत्प्लावन, गलत है क्योंकि वह चारों ओर के तरल का ऊपर की ओर बल है और तैरना समझाता है, आकृति नहीं; गिरती बड़ी बूंदें वायु के प्रतिरोध से चपटी हो जाती हैं।
तापमान बढ़ाने पर द्रव की श्यानता और गैस की श्यानता किस प्रकार व्यवहार करती हैं?
- A.दोनों बढ़ती हैं
- B.दोनों घटती हैं
- C.द्रव की श्यानता घटती है और गैस की बढ़ती है
- D.द्रव की श्यानता बढ़ती है और गैस की घटती है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C है। द्रव में श्यानता मुख्यतः अणुओं के बीच संसक्ति से आती है; गर्म करने पर वह संसक्ति दुर्बल पड़ जाती है, इसलिए परतें एक-दूसरे पर सरलता से सरकती हैं और श्यानता घट जाती है, इसीलिए इंजन गर्म होने पर उसका तेल पतला हो जाता है और गर्म करने पर शहद स्वतंत्र रूप से बहता है। गैस में श्यानता परतों के बीच आते-जाते अणुओं द्वारा संवेग के स्थानांतरण से आती है; गर्म करने पर वे अणु अधिक तेज चलते हैं, इसलिए अधिक संवेग पार जाता है और श्यानता बढ़ जाती है। विकल्प A और विकल्प B गलत हैं क्योंकि वे दोनों अवस्थाओं को समान मान लेते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि वह दोनों परिणाम उलट देता है। यह विरोध इस अध्याय का सर्वाधिक पूछा जाने वाला एकल तथ्य है और इसे जोड़ी बनाकर याद करना चाहिए।
जल से भरे गिलास में तैरती बर्फ का टुकड़ा पूरी तरह पिघल जाता है। गिलास में जल का तल क्या होगा?
- A.बढ़ जाएगा
- B.घट जाएगा
- C.अपरिवर्तित रहेगा
- D.पहले बढ़ेगा, फिर घटेगा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, अपरिवर्तित रहेगा है। जब तक बर्फ तैरती है, वह प्लवन के नियम के अनुसार उतना जल विस्थापित करती है जिसका भार बर्फ के भार के बराबर है। पिघलने पर वह ठीक उसी भार का जल बन जाती है, और उस भार का जल ठीक उतना ही आयतन घेरता है जितना तैरती बर्फ विस्थापित कर रही थी, इसलिए तल न बढ़ता है न घटता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पिघला जल उसी स्थान को भरता है जो बर्फ के डूबे भाग ने घेरा था और उससे अधिक कुछ नहीं जोड़ता। विकल्प B गलत है क्योंकि गिलास से कोई जल बाहर नहीं जाता। विकल्प D गलत है क्योंकि पिघलने की पूरी प्रक्रिया में संतुलन बना रहता है, इसलिए बीच में कोई परिवर्तन नहीं होता। यदि बर्फ में पत्थर या कॉर्क जड़ा हो तो उत्तर बदल जाएगा, और परीक्षक उसी रूप से उन परीक्षार्थियों को पकड़ते हैं जिन्होंने परिणाम बिना तर्क याद किया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लोहे का जहाज क्यों तैरता है जबकि लोहे की कील डूब जाती है?
क्योंकि तैरना औसत घनत्व पर निर्भर करता है, पदार्थ पर नहीं। जहाज बड़े भाग में खोखला होता है, इसलिए वह जितना जल हटाता है उसका भार पूरे जहाज के भार के बराबर हो जाता है और उत्प्लावन बल उसका भार संतुलित कर देता है। उसी लोहे की कील ठोस होती है, केवल अपना छोटा आयतन जल हटाती है और उत्प्लावन बल उसके भार से बहुत कम रह जाता है, इसलिए वह डूब जाती है। इसी तर्क से समुद्री जल में, जो नदी के जल से घना है, जहाज कुछ ऊपर रहता है।
हिमशैल का कितना भाग जल की सतह के नीचे रहता है?
लगभग 92 प्रतिशत। तैरती वस्तु अपने भार के बराबर तरल विस्थापित करती है, इसलिए उसके आयतन का डूबा अंश उसके घनत्व तथा तरल के घनत्व के अनुपात के बराबर होता है। बर्फ का घनत्व लगभग 920 किलोग्राम प्रति घन मीटर और जल का लगभग 1,000 है, जिससे अनुपात 0.92 मिलता है। शेष लगभग 8 प्रतिशत ही सतह से ऊपर दिखता है, और इसी से हिमशैल के शिखर वाली कहावत बनी है।
श्यानता और पृष्ठ तनाव में क्या अंतर है?
श्यानता तरल का आंतरिक घर्षण है, अर्थात् एक परत का पास वाली परत की गति के प्रति प्रतिरोध, जिसे एसआई में पास्कल सेकंड में मापा जाता है, और वह तय करती है कि तरल कितनी सरलता से बहेगा। पृष्ठ तनाव केवल मुक्त सतह का गुण है, प्रति इकाई लंबाई बल, जिसे न्यूटन प्रति मीटर में मापा जाता है, और वह बूंदों की आकृति, केशिका चढ़ाव तथा यह तय करता है कि सतह तैरती सुई या कीट को संभाल सकेगी या नहीं।
संकरी नली में जल क्यों चढ़ता है और पारा क्यों गिरता है?
आसंजन और संसक्ति के संतुलन के कारण। कांच से जल का आसंजन उसके अणुओं की परस्पर संसक्ति से अधिक प्रबल है, इसलिए वह कांच को भिगोता है, अवतल पृष्ठ बनाता है और पृष्ठ तनाव उसे नली में ऊपर खींच लेता है। पारे की संसक्ति कांच से उसके आसंजन से बहुत अधिक है, इसलिए वह कांच को नहीं भिगोता, उन्नतोदर पृष्ठ बनाता है और नीचे खिंच जाता है, जिससे वह बाहर के तल से नीचे रह जाता है।
कपड़े धोने में अपमार्जक मिलाने से क्या लाभ होता है?
अपमार्जक के अणु सतह पर एकत्र होकर जल का पृष्ठ तनाव तेजी से घटा देते हैं। कम पृष्ठ तनाव के साथ जल बूंदों में ठहरने के स्थान पर फैलता है, रेशों को भिगोता है और कपड़े के सूक्ष्म छिद्रों में प्रवेश करता है, और वही अणु फिर चिकनाई को निलंबन में बांध लेते हैं। गर्म जल पृष्ठ तनाव और घटा देता है, इसीलिए गुनगुना साबुन का पानी ठंडे पानी से अच्छी सफाई करता है।
स्रोत
- विज्ञान (कक्षा 9), अध्याय 10: गुरुत्वाकर्षण, जिसमें प्रणोद, दाब और आर्किमिडीज का सिद्धांत है — एनसीईआरटी
- भौतिकी भाग 2 (कक्षा 11), अध्याय 10: तरलों के यांत्रिक गुण — एनसीईआरटी
- अंतरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली: पास्कल तथा व्युत्पन्न मात्रकों की परिभाषाएं — राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, भारत





