परमाणु संरचना और आवर्त सारणी: मॉडल और प्रवृत्तियाँ
परीक्षाओं के लिए परमाणु संरचना तथा आवर्त सारणी के नोट्स: कणों की खोज, थॉमसन, रदरफोर्ड और बोर के मॉडल, कोश, समस्थानिक तथा आवर्ती प्रवृत्तियाँ।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

रसायन विज्ञान की हर बात परमाणु से आरंभ होती है, और रसायन का प्रश्न पूछने वाला हर प्रतियोगी प्रश्नपत्र उन्हीं दो क्षेत्रों से आरंभ करता है: परमाणु की रचना कैसी है, और तत्व किस क्रम में रखे गए हैं। दोनों स्थापित विज्ञान हैं, इसलिए यहाँ के तथ्य बदलते नहीं: खोजकर्ता, वर्ष, इलेक्ट्रॉनों की संख्या, समूह संख्या। यह नोट पहले परमाणु लेता है और बाद में आवर्त सारणी, क्योंकि दूसरी पहली से ही निकली है।
परमाणु के भीतर किसने क्या खोजा
| कण | खोजकर्ता | आवेश | स्थान |
|---|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉन | जे. जे. थॉमसन, 1897, कैथोड किरण प्रयोगों से | ऋणात्मक | नाभिक के चारों ओर कोशों में |
| प्रोटॉन | ई. गोल्डस्टीन ने कैनाल किरणें पाईं; रदरफोर्ड ने प्रोटॉन की पहचान की | धनात्मक | नाभिक में |
| न्यूट्रॉन | जेम्स चैडविक, 1932 | उदासीन | नाभिक में |
परमाणु शब्द स्वयं बहुत पुराना है। अंग्रेजी का एटम यूनानी शब्द एटोमोस से आया है, जिसका अर्थ है जिसे काटा न जा सके, और इस शब्द को गढ़ने का श्रेय यूनानी दार्शनिक डेमोक्रिटस को दिया जाता है। जॉन डाल्टन ने 1808 में इस विचार को वैज्ञानिक सिद्धांत बनाया और कहा कि पदार्थ अविभाज्य परमाणुओं से बना है, किसी तत्व के सभी परमाणु समान हैं, और परमाणु निश्चित पूर्ण संख्या अनुपात में जुड़ते हैं।
परमाणु के तीन मॉडल
- थॉमसन का मॉडल: परमाणु धन आवेश का गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन धँसे हैं, जैसे तरबूज में बीज। इसने विद्युत उदासीनता समझाई, परंतु नाभिक नहीं।
- रदरफोर्ड का मॉडल: पतली सोने की पन्नी पर अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि लगभग सारा द्रव्यमान और सारा धन आवेश एक अत्यंत छोटे केंद्रीय नाभिक में है, परमाणु का अधिकांश भाग खाली है, और इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमते हैं। इसकी कमजोरी यह थी कि नाभिक के चारों ओर घूमते इलेक्ट्रॉन को ऊर्जा खोकर उसमें गिर जाना चाहिए।
- बोर का मॉडल: इलेक्ट्रॉन केवल कुछ अनुमत कक्षाओं या कोशों में घूमते हैं और उनमें रहते हुए ऊर्जा नहीं छोड़ते, जिससे परमाणु स्थायी बना। नाभिक से बाहर की ओर इन कोशों के नाम K, L, M और N हैं।
कोश, इलेक्ट्रॉन और उससे निकलने वाली संख्याएँ
किसी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n वर्ग सूत्र से मिलती है, जहाँ n कोश संख्या है। इसलिए K में 2, L में 8, M में 18 और N में 32 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं। बोर-बरी योजना के दो और नियम पूछे जाते हैं: परमाणु के सबसे बाहरी कोश में आठ से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं रह सकते, और कोई कोश भरना तब ही आरंभ होता है जब उससे पहले का कोश पूरा हो जाए।
परमाणु संख्या, जिसे Z लिखते हैं, नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या है और वही तत्व की पहचान है। द्रव्यमान संख्या, जिसे A लिखते हैं, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की कुल संख्या है। एक ही तत्व के वे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान पर द्रव्यमान संख्या भिन्न हो, समस्थानिक कहलाते हैं: प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्राइटियम हाइड्रोजन के समस्थानिक हैं, और क्लोरीन क्लोरीन-35 तथा क्लोरीन-37 के रूप में मिलती है। भिन्न तत्वों के वे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या समान हो, समभारिक कहलाते हैं, जैसे आर्गन-40 और कैल्सियम-40। संयोजकता परमाणु की संयोजन क्षमता है और वह उसके सबसे बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉनों से तय होती है।
आवर्त सारणी कैसे बनी
- डोबराइनर के त्रिक, 1817: तीन तत्वों के ऐसे समूह जिनमें बीच वाले का परमाणु द्रव्यमान अन्य दो के औसत के लगभग बराबर था। ऐसे त्रिक थोड़े ही मिल सके।
- न्यूलैंड्स का अष्टक नियम, 1866: बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में रखे तत्वों में प्रत्येक आठवाँ तत्व पहले जैसा दिखता था। उन्होंने 56 तत्व रखे, हाइड्रोजन से आरंभ करके थोरियम पर समाप्त किया, और नए तत्वों की खोज के बाद यह नियम टूट गया।
- मेंडलीव का आवर्त नियम, 1869: तत्वों के गुण उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्त फलन हैं। उन्होंने अनखोजे तत्वों के लिए स्थान खाली छोड़े और एका-बोरॉन, एका-ऐलुमिनियम तथा एका-सिलिकॉन के गुणों की भविष्यवाणी की, जो बाद में स्कैंडियम, गैलियम और जर्मेनियम के रूप में मिले। उनकी सारणी हाइड्रोजन को ठीक स्थान न दे सकी, समस्थानिकों के लिए उसमें जगह नहीं थी, और कोबाल्ट तथा निकल जैसी कुछ जोड़ियों को द्रव्यमान क्रम से बाहर रखना पड़ा।
- मोजले का कार्य, 1913: उन्होंने दिखाया कि तत्व का मूल गुण परमाणु द्रव्यमान नहीं, परमाणु संख्या है। इससे आधुनिक आवर्त नियम मिला, कि तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्याओं के आवर्त फलन हैं।
आधुनिक आवर्त सारणी
आधुनिक सारणी में 7 क्षैतिज पंक्तियाँ हैं, जिन्हें आवर्त कहते हैं, और 18 ऊर्ध्व स्तंभ हैं, जिन्हें समूह कहते हैं। पहले आवर्त में 2 तत्व, दूसरे और तीसरे में 8-8, चौथे तथा पाँचवें में 18-18 और छठे में 32 तत्व हैं। एक ही समूह के तत्वों के सबसे बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, इसलिए उनका रासायनिक व्यवहार मिलता-जुलता रहता है, और इसी कारण समूहों के कुल-नाम हैं: समूह 1 क्षार धातुएँ, समूह 2 क्षारीय मृदा धातुएँ, समूह 17 हैलोजन और समूह 18 उत्कृष्ट गैसें। लैंथेनाइड और ऐक्टिनाइड सारणी के नीचे दो अलग पंक्तियों में रखे जाते हैं। भरे जा रहे उपकोश के आधार पर सारणी बाईं ओर s-खंड, दाईं ओर p-खंड, बीच में संक्रमण तत्वों का d-खंड और नीचे आंतरिक संक्रमण तत्वों का f-खंड में बँटती है।
याद रखने योग्य आवर्ती प्रवृत्तियाँ
किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ चलने पर परमाणु त्रिज्या घटती है, क्योंकि बढ़ता नाभिकीय आवेश उसी कोश को भीतर खींचता है, जबकि विद्युत ऋणात्मकता तथा इलेक्ट्रॉन बंधुता बढ़ती है और धात्विक गुण घटता है। समूह में नीचे जाने पर हर चरण पर नया कोश जुड़ता है, इसलिए परमाणु त्रिज्या बढ़ती है, विद्युत ऋणात्मकता घटती है और धात्विक गुण बढ़ता है। फ्लुओरीन सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है, इसीलिए वह हैलोजन समूह के शीर्ष पर है, और उत्कृष्ट गैसें रासायनिक रूप से निष्क्रिय हैं क्योंकि उनके सबसे बाहरी कोश पहले से पूर्ण हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस विषय के प्रश्न लगभग सदा एक-एक तथ्य के होते हैं। 'न्यूट्रॉन की खोज किसने की', 'एटम शब्द किसने गढ़ा', 'M कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन', 'सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व कौन है' और 'क्षार धातुएँ किस समूह में हैं' जैसे प्रश्न आते हैं। रेलवे तथा एसएससी के प्रश्नपत्रों में यह भी पूछा जाता है कि कौन सा मॉडल किस वैज्ञानिक ने दिया और अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग ने क्या सिद्ध किया। सुमेलित प्रश्न कण को उसके खोजकर्ता से और समूह को उसके कुल-नाम से जोड़ते हैं। भ्रम ये हैं: इलेक्ट्रॉन थॉमसन ने खोजा पर प्रोटॉन का नामकरण रदरफोर्ड ने किया, और गोल्डस्टीन ने केवल कैनाल किरणें पाईं; मेंडलीव के नियम में परमाणु द्रव्यमान था और आधुनिक नियम में परमाणु संख्या, जिन्हें प्रश्नपत्र अक्सर बदल देते हैं; न्यूलैंड्स की सारणी थोरियम पर समाप्त हुई, यूरेनियम पर नहीं; और 2n वर्ग नियम कोश की क्षमता देता है, पर सबसे बाहरी कोश में आठ से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं रह सकते, इसीलिए कैल्सियम के 20 इलेक्ट्रॉन 2, 8, 8, 2 में रहते हैं, 2, 8, 10 में नहीं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| एटम शब्द की उत्पत्ति | यूनानी एटोमोस, अर्थ अविभाज्य; श्रेय डेमोक्रिटस को |
|---|---|
| डाल्टन का परमाणु सिद्धांत | 1808; परमाणु अविभाज्य और निश्चित पूर्ण संख्या अनुपात में संयोजित |
| इलेक्ट्रॉन | जे. जे. थॉमसन ने 1897 में खोजा; ऋण आवेश |
| प्रोटॉन | कैनाल किरणें ई. गोल्डस्टीन ने पाईं; प्रोटॉन की पहचान रदरफोर्ड ने की |
| न्यूट्रॉन | जेम्स चैडविक ने 1932 में खोजा; आवेश शून्य |
| थॉमसन का मॉडल | तरबूज मॉडल; धन आवेश के गोले में इलेक्ट्रॉन |
| रदरफोर्ड का प्रयोग | पतली सोने की पन्नी पर अल्फा कण प्रकीर्णन; नाभिक की खोज |
| बोर का मॉडल | इलेक्ट्रॉन नियत अनुमत कोशों K, L, M, N में; स्थायित्व समझाता है |
| कोश में इलेक्ट्रॉन | 2n वर्ग: K में 2, L में 8, M में 18, N में 32 |
| बाहरी कोश की सीमा | 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं |
| परमाणु संख्या (Z) | नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या |
| द्रव्यमान संख्या (A) | प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का योग |
| समस्थानिक | परमाणु संख्या समान, द्रव्यमान संख्या भिन्न: प्रोटियम, ड्यूटीरियम, ट्राइटियम |
| समभारिक | द्रव्यमान संख्या समान, परमाणु संख्या भिन्न: आर्गन-40 और कैल्सियम-40 |
| डोबराइनर | त्रिक, 1817; बीच का द्रव्यमान अन्य दो के औसत के लगभग बराबर |
| न्यूलैंड्स | अष्टक नियम, 1866; हाइड्रोजन से थोरियम तक 56 तत्व |
| मेंडलीव | 1869 का आवर्त नियम, परमाणु द्रव्यमान पर आधारित; तीन एका तत्वों की भविष्यवाणी |
| मोजले | 1913; परमाणु संख्या तत्व का मूल गुण है |
| आधुनिक आवर्त सारणी | 7 आवर्त और 18 समूह; s, p, d तथा f खंड |
| सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व | फ्लुओरीन |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
'एटम' शब्द किसने गढ़ा था?
- A.डेमोक्रिटस
- B.थॉमसन
- C.ई. रदरफोर्ड
- D.जॉन डाल्टन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. डेमोक्रिटस
व्याख्या
सही उत्तर A, डेमोक्रिटस है। ईसा पूर्व पाँचवीं शताब्दी में कार्य करने वाले यूनानी दार्शनिक डेमोक्रिटस ने तर्क दिया कि पदार्थ को एक सीमा तक ही विभाजित किया जा सकता है, और उस सबसे छोटे अविभाज्य कण को उन्होंने एटोमोस कहा, जिससे एटम शब्द बना। उनका कथन दार्शनिक था, प्रायोगिक नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि जे. जे. थॉमसन ने 1897 में इलेक्ट्रॉन की खोज की और परमाणु का तरबूज मॉडल प्रस्तुत किया। विकल्प C गलत है क्योंकि अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग किया, नाभिक की खोज की और प्रोटॉन की पहचान की, परंतु यह शब्द उनसे बहुत पहले से प्रयोग में था। विकल्प D गलत है क्योंकि जॉन डाल्टन ने 1808 में पहला वैज्ञानिक परमाणु सिद्धांत दिया और पहले से चले आ रहे शब्द का ही प्रयोग किया, उसे गढ़ा नहीं।
निम्नलिखित में से न्यूट्रॉन की खोज किसने की?
- A.जे. चैडविक
- B.ई. गोल्डस्टीन
- C.नील्स बोर
- D.अर्नेस्ट रदरफोर्ड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जे. चैडविक
व्याख्या
सही उत्तर A, जे. चैडविक है। जेम्स चैडविक ने 1932 में बेरिलियम पर अल्फा कणों की बमबारी करके न्यूट्रॉन की खोज की और दिखाया कि उससे निकली विकिरण में उदासीन कण थे, जिनका द्रव्यमान प्रोटॉन के लगभग बराबर था। इस खोज से यह समझ आया कि परमाणु का द्रव्यमान उसके प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों के कुल द्रव्यमान से अधिक क्यों होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि ई. गोल्डस्टीन ने कैनाल किरणों की खोज की, जो धन आवेश ले जाती थीं और जिनसे प्रोटॉन की पहचान हुई। विकल्प C गलत है क्योंकि नील्स बोर ने वह मॉडल दिया जिसमें इलेक्ट्रॉन नियत अनुमत कोशों में ऊर्जा छोड़े बिना घूमते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अल्फा कण प्रकीर्णन से नाभिक की खोज की थी और उन्होंने केवल यह भविष्यवाणी की थी कि कोई उदासीन कण होना चाहिए।
पतली सोने की पन्नी पर रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से कौन सा निष्कर्ष निकला?
- A.इलेक्ट्रॉन धन आवेश के गोले में धँसे रहते हैं
- B.परमाणु अविभाज्य है
- C.इलेक्ट्रॉन नियत अनुमत कक्षाओं में घूमते हैं
- D.लगभग सारा द्रव्यमान और धन आवेश एक अत्यंत छोटे नाभिक में है
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. लगभग सारा द्रव्यमान और धन आवेश एक अत्यंत छोटे नाभिक में है
व्याख्या
सही उत्तर D, लगभग सारा द्रव्यमान और धन आवेश एक अत्यंत छोटे नाभिक में है है। अधिकांश अल्फा कण पन्नी से सीधे निकल गए, कुछ थोड़े कोणों पर मुड़े और लगभग बीस हजार में एक वापस लौट आया। रदरफोर्ड ने इसका अर्थ यह निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग खाली है, उसका धन आवेश तथा लगभग सारा द्रव्यमान एक बहुत छोटे केंद्रीय नाभिक में भरा है, और इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर घूमते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि वह थॉमसन का तरबूज मॉडल है, जिसे इस प्रयोग ने असत्य सिद्ध किया। विकल्प B गलत है क्योंकि अविभाज्यता डाल्टन की परिकल्पना थी, जो इलेक्ट्रॉन की खोज से पहले ही टूट गई थी। विकल्प C गलत है क्योंकि नियत अनुमत कक्षाएँ बाद में बोर के साथ आईं, जिन्होंने उन्हें रदरफोर्ड के मॉडल की अस्थिरता दूर करने के लिए प्रस्तुत किया।
M कोश में अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं?
- A.8
- B.2
- C.18
- D.32
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 18
व्याख्या
सही उत्तर C, 18 है। कोश की क्षमता 2n वर्ग सूत्र से मिलती है, जहाँ n नाभिक से बाहर की ओर गिनी गई कोश संख्या है। M कोश तीसरा है, इसलिए उसकी क्षमता 2 गुणा 3 का वर्ग, अर्थात 18 है। विकल्प A गलत है क्योंकि 8 दूसरे अर्थात L कोश की क्षमता है, और यही वह अधिकतम संख्या भी है जो सबसे बाहरी कोश में रह सकती है, जो एक भिन्न नियम है। विकल्प B गलत है क्योंकि 2 पहले अर्थात नाभिक के सबसे निकट K कोश की क्षमता है। विकल्प D गलत है क्योंकि 32 चौथे अर्थात N कोश की क्षमता है। ध्यान दें कि कैल्सियम जैसे परमाणु में M कोश 8 पर रुक जाता है क्योंकि उस अवस्था में वह सबसे बाहरी कोश है, परंतु इससे उसकी पूरी क्षमता 18 नहीं बदलती।
आधुनिक आवर्त सारणी में क्षार धातुओं को कौन सा समूह दिया गया है?
- A.दूसरा समूह
- B.अठारहवाँ समूह
- C.तीसरा समूह
- D.पहला समूह
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. पहला समूह
व्याख्या
सही उत्तर D, पहला समूह है। क्षार धातुएँ लिथियम, सोडियम, पोटैशियम, रुबिडियम, सीजियम और फ्रैंसियम हैं। इनमें से प्रत्येक के सबसे बाहरी कोश में एक ही इलेक्ट्रॉन होता है, जिसे वह सरलता से खोकर धन आयन बनाती है, इसलिए वे आधुनिक आवर्त सारणी के समूह 1 में रखी जाती हैं। ये मृदु और अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ हैं, जिनके ऑक्साइड तथा हाइड्रॉक्साइड प्रबल क्षारीय विलयन देते हैं, और यहीं से इस कुल का नाम आया है। विकल्प A गलत है क्योंकि समूह 2 में क्षारीय मृदा धातुएँ हैं, जैसे बेरिलियम, मैग्नीशियम और कैल्सियम, जिनके बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन होते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि समूह 18 में उत्कृष्ट गैसें हैं, जो निष्क्रिय हैं क्योंकि उनके बाहरी कोश पूर्ण हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि समूह 3 से d-खंड के संक्रमण तत्व आरंभ होते हैं, जिनमें पहला स्कैंडियम है।
निम्नलिखित में से किस तत्व की विद्युत ऋणात्मकता सर्वाधिक है?
- A.फ्लुओरीन
- B.ब्रोमीन
- C.आयोडीन
- D.क्लोरीन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. फ्लुओरीन
व्याख्या
सही उत्तर A, फ्लुओरीन है। विद्युत ऋणात्मकता किसी परमाणु की वह प्रवृत्ति है जिससे वह साझा इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर खींचता है। यह आवर्त में बाएँ से दाएँ बढ़ती है, क्योंकि नाभिकीय आवेश बढ़ता है, और समूह में नीचे जाने पर घटती है, क्योंकि हर नया कोश बाहरी इलेक्ट्रॉनों को नाभिक से दूर कर देता है। फ्लुओरीन समूह 17 के शीर्ष पर है और सबसे छोटा हैलोजन है, इसलिए वह साझा युग्म को सबसे कसकर पकड़ता है और सभी तत्वों में सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक है, जिसका मान पॉलिंग मापक्रम पर लगभग 4.0 है। विकल्प B, C और D गलत हैं क्योंकि ब्रोमीन, आयोडीन और क्लोरीन सभी उसी समूह में फ्लुओरीन के नीचे हैं, और नीचे जाने पर विद्युत ऋणात्मकता घटती है, अर्थात क्रम फ्लुओरीन, फिर क्लोरीन, फिर ब्रोमीन, फिर आयोडीन है।
आधुनिक आवर्त नियम कहता है कि तत्वों के गुण उनके किसके आवर्त फलन हैं?
- A.परमाणु द्रव्यमान
- B.परमाणु संख्या
- C.घनत्व
- D.संयोजकता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. परमाणु संख्या
व्याख्या
सही उत्तर B, परमाणु संख्या है। हेनरी मोजले ने 1913 में तत्वों से निकलने वाली एक्स किरणों की आवृत्तियों से दिखाया कि तत्व का अधिक मूल गुण उसकी परमाणु संख्या है, अर्थात नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या। इसलिए आवर्त नियम फिर से कहा गया: तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्याओं के आवर्त फलन हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि परमाणु द्रव्यमान मेंडलीव के 1869 के नियम का आधार था, जो समस्थानिकों को स्थान न दे सका और जिसमें कोबाल्ट तथा निकल जैसी जोड़ियों को द्रव्यमान क्रम से बाहर रखना पड़ा। विकल्प C गलत है क्योंकि घनत्व एक भौतिक गुण है, जिसमें इस प्रकार का कोई सरल आवर्ती क्रम नहीं दिखता। विकल्प D गलत है क्योंकि संयोजकता इलेक्ट्रॉन व्यवस्था से निकलती है और इसलिए वह स्वयं परमाणु संख्या का परिणाम है, नियम का आधार नहीं।
न्यूलैंड्स के अष्टक नियम के वर्गीकरण में अंतिम तत्व निम्नलिखित में से कौन है?
- A.रेडियम
- B.थोरियम
- C.लोहा
- D.रोडियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. थोरियम
व्याख्या
सही उत्तर B, थोरियम है। जॉन न्यूलैंड्स ने 1866 में ज्ञात छप्पन तत्वों को बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में रखा, जिसकी शुरुआत सबसे हल्के हाइड्रोजन से और समाप्ति छप्पनवें तत्व थोरियम पर हुई। उन्होंने देखा कि प्रत्येक आठवें तत्व के गुण पहले तत्व जैसे थे, और संगीत के स्वरक्रम के आधार पर इस प्रतिरूप को अष्टक नियम कहा। नए तत्वों की खोज के बाद यह नियम असफल हो गया, क्योंकि उस व्यवस्था में उनके लिए स्थान शेष नहीं था। विकल्प A गलत है क्योंकि रेडियम की खोज मेरी और पियरे क्यूरी ने 1898 में, न्यूलैंड्स की सारणी के बहुत बाद की। विकल्प C गलत है क्योंकि लोहा इस व्यवस्था के बीच में आता है, उसके अंत में नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि रोडियम भी पहले के तत्वों के बीच है और उनकी सूची में अंतिम नहीं था।
आधुनिक आवर्त सारणी में कितने आवर्त और कितने समूह हैं?
- A.8 आवर्त और 7 समूह
- B.18 आवर्त और 7 समूह
- C.7 आवर्त और 18 समूह
- D.7 आवर्त और 8 समूह
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 7 आवर्त और 18 समूह
व्याख्या
सही उत्तर C, 7 आवर्त और 18 समूह है। आधुनिक आवर्त सारणी में सात क्षैतिज पंक्तियाँ हैं, जिन्हें आवर्त कहते हैं, और अठारह ऊर्ध्व स्तंभ, जिन्हें समूह कहते हैं। पहले आवर्त में केवल दो तत्व हैं, दूसरे तथा तीसरे में आठ-आठ, चौथे और पाँचवें में अठारह-अठारह तथा छठे में बत्तीस, जबकि लैंथेनाइड और ऐक्टिनाइड नीचे दो अलग पंक्तियों में दिखाए जाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि इसमें दोनों संख्याएँ उलट दी गई हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि अठारह समूहों की संख्या है, आवर्तों की नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि आठ समूह मेंडलीव की पुरानी सारणी में थे, जिसमें आठ ऊर्ध्व स्तंभ थे; अठारह समूह वाला रूप आधुनिक सारणी के दीर्घ रूप के साथ आया, जिसमें एक समूह के तत्वों के सबसे बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। एक उपयोगी जाँच यह है कि दोनों संख्याओं में सात सदा छोटी होती है, क्योंकि सारणी अपनी ऊँचाई से अधिक चौड़ी है।
किसी तत्व के समस्थानिकों में क्या समान होता है?
- A.परमाणु संख्या समान, द्रव्यमान संख्या भिन्न
- B.द्रव्यमान संख्या समान, परमाणु संख्या भिन्न
- C.न्यूट्रॉनों की संख्या समान, प्रोटॉनों की संख्या भिन्न
- D.प्रोटॉनों की संख्या समान और न्यूट्रॉनों की संख्या भी समान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. परमाणु संख्या समान, द्रव्यमान संख्या भिन्न
व्याख्या
सही उत्तर A, परमाणु संख्या समान, द्रव्यमान संख्या भिन्न है। समस्थानिक एक ही तत्व के परमाणु होते हैं, इसलिए उनमें प्रोटॉनों की संख्या और अतः परमाणु संख्या समान होती है, परंतु उनमें न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है, जिससे उनकी द्रव्यमान संख्या अलग हो जाती है। हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं, प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्राइटियम, तथा क्लोरीन प्रकृति में क्लोरीन-35 और क्लोरीन-37 के रूप में मिलती है। विकल्प B गलत है क्योंकि समान द्रव्यमान संख्या पर भिन्न परमाणु संख्या वाले परमाणु समभारिक कहलाते हैं, जैसे आर्गन-40 और कैल्सियम-40। विकल्प C गलत है क्योंकि समान न्यूट्रॉन पर भिन्न प्रोटॉन वाले परमाणु समन्यूट्रॉनिक कहलाते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि समान प्रोटॉन और समान न्यूट्रॉन वाले परमाणु एक ही समस्थानिक के एक जैसे परमाणु ही हैं, आपस में समस्थानिक नहीं। चूँकि समस्थानिकों में अंतर केवल न्यूट्रॉनों का है, इसलिए उनका रासायनिक व्यवहार समान रहता है और घनत्व तथा रेडियोसक्रियता जैसे भौतिक गुणों में अंतर आता है।
परमाणु का वह तरबूज मॉडल, जिसमें इलेक्ट्रॉन धन आवेश के गोले में धँसे रहते हैं, किसने प्रस्तुत किया?
- A.जॉन डाल्टन
- B.जे. जे. थॉमसन
- C.अर्नेस्ट रदरफोर्ड
- D.नील्स बोर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जे. जे. थॉमसन
व्याख्या
सही उत्तर B, जे. जे. थॉमसन है। 1897 में इलेक्ट्रॉन की खोज के बाद जे. जे. थॉमसन ने परमाणु को धन आवेश के ऐसे गोले के रूप में देखा जिसमें ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन धँसे हैं, और इस चित्र की तुलना अक्सर तरबूज में बीजों से की जाती है। इससे यह समझ आया कि परमाणु विद्युत रूप से उदासीन क्यों है, परंतु इसमें नाभिक नहीं था और यह रदरफोर्ड के प्रकीर्णन प्रयोग के सामने टिक नहीं सका। विकल्प A गलत है क्योंकि जॉन डाल्टन के 1808 के सिद्धांत में परमाणु अविभाज्य माना गया और उसमें कोई आंतरिक रचना ही नहीं थी। विकल्प C गलत है क्योंकि रदरफोर्ड ने सोने की पन्नी के प्रयोग के बाद इस मॉडल के स्थान पर नाभिकीय मॉडल रखा। विकल्प D गलत है क्योंकि नील्स बोर ने इसके बाद रदरफोर्ड के नाभिक में नियत अनुमत कोश जोड़े, जिससे परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या हो सके।
मेंडलीव ने अपनी आवर्त सारणी में स्थान खाली छोड़े और एका-बोरॉन, एका-ऐलुमिनियम तथा एका-सिलिकॉन के गुणों की भविष्यवाणी की। ये तत्व बाद में किस रूप में खोजे गए?
- A.सोडियम, पोटैशियम और कैल्सियम
- B.कोबाल्ट, निकल और ताँबा
- C.स्कैंडियम, गैलियम और जर्मेनियम
- D.रेडियम, रेडॉन और रीनियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. स्कैंडियम, गैलियम और जर्मेनियम
व्याख्या
सही उत्तर C, स्कैंडियम, गैलियम और जर्मेनियम है। मेंडलीव ने 1869 में तत्वों को बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में रखा और वहाँ स्थान खाली छोड़े जहाँ उनके प्रतिरूप के अनुसार कोई अभी अज्ञात तत्व होना चाहिए था। उन्होंने उनमें से तीन का द्रव्यमान, घनत्व तथा यौगिक पहले ही बता दिए और उन्हें एका-बोरॉन, एका-ऐलुमिनियम तथा एका-सिलिकॉन कहा, और जब स्कैंडियम, गैलियम और जर्मेनियम खोजे गए तो वे उनके विवरण से बहुत मिलते निकले, जिससे आवर्त नियम को व्यापक स्वीकृति मिली। विकल्प A गलत है क्योंकि सोडियम, पोटैशियम और कैल्सियम 1869 से बहुत पहले से ज्ञात थे। विकल्प B गलत है क्योंकि कोबाल्ट, निकल और ताँबा भी ज्ञात थे, और कोबाल्ट तथा निकल वही जोड़ी थी जिसे उन्हें कड़े द्रव्यमान क्रम से बाहर रखना पड़ा। विकल्प D गलत है क्योंकि रेडियम, रेडॉन और रीनियम बहुत बाद में मिले और उनकी तीन भविष्यवाणियों में नहीं थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की खोज किसने की?
जे. जे. थॉमसन ने 1897 में कैथोड किरण प्रयोगों से इलेक्ट्रॉन की खोज की। प्रोटॉन की पहचान अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने की, जिसका आधार ई. गोल्डस्टीन द्वारा पाई गई कैनाल किरणें थीं। जेम्स चैडविक ने 1932 में न्यूट्रॉन की खोज की।
रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग ने क्या सिद्ध किया?
यह कि परमाणु में एक अत्यंत छोटा, घना और धन आवेशित नाभिक होता है जिसमें उसका लगभग सारा द्रव्यमान रहता है; परमाणु का अधिकांश भाग खाली है, क्योंकि अधिकांश अल्फा कण सोने की पन्नी से सीधे निकल गए; और इलेक्ट्रॉन इस नाभिक के चारों ओर घूमते हैं।
प्रत्येक कोश में कितने इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं?
कोश की क्षमता 2n वर्ग होती है, जहाँ n कोश संख्या है, इसलिए K कोश में 2, L में 8, M में 18 और N में 32 इलेक्ट्रॉन आते हैं। इससे अलग नियम यह है कि परमाणु के सबसे बाहरी कोश में कभी 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं रह सकते।
समस्थानिक और समभारिक में क्या अंतर है?
समस्थानिक एक ही तत्व के वे परमाणु हैं जिनकी परमाणु संख्या समान पर द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है, जैसे क्लोरीन-35 और क्लोरीन-37। समभारिक भिन्न तत्वों के वे परमाणु हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या संयोगवश समान होती है, जैसे आर्गन-40 और कैल्सियम-40।
मेंडलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में क्या अंतर है?
मेंडलीव के 1869 के नियम के अनुसार तत्वों के गुण उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्त फलन हैं। 1913 में मोजले के कार्य के बाद आधुनिक नियम कहता है कि वे परमाणु संख्याओं के आवर्त फलन हैं, जिससे समस्थानिकों तथा कोबाल्ट-निकल जैसी जोड़ियों का स्थान ठीक हो गया।
आधुनिक आवर्त सारणी में कितने आवर्त और समूह हैं?
इसमें 7 आवर्त हैं, जो क्षैतिज पंक्तियाँ हैं, और 18 समूह, जो ऊर्ध्व स्तंभ हैं। पहले आवर्त में 2 तत्व, दूसरे और तीसरे में 8-8, चौथे तथा पाँचवें में 18-18 और छठे में 32 तत्व हैं।
सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व कौन है?
फ्लुओरीन। विद्युत ऋणात्मकता आवर्त में बाएँ से दाएँ बढ़ती और समूह में नीचे जाने पर घटती है, इसलिए समूह 17 के शीर्ष पर स्थित फ्लुओरीन साझा इलेक्ट्रॉन युग्म को किसी भी अन्य तत्व से अधिक बल से खींचता है।





