कार्बन और उसके यौगिक: बंधन, अपररूप और परीक्षा प्रश्न
कार्बन के परीक्षोपयोगी नोट्स: सहसंयोजक बंधन, शृंखलन, हीरा और ग्रेफाइट, हाइड्रोकार्बन, समजातीय श्रेणी, क्रियात्मक समूह तथा एथेनॉल और एथेनोइक अम्ल।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

कार्बन का परमाणु क्रमांक छह है, इसलिए उसके परमाणु के बाहरी कोश में चार इलेक्ट्रॉन होते हैं और अष्टक पूरा करने के लिए चार और चाहिए। वह न चार इलेक्ट्रॉन देता है और न चार लेता है, क्योंकि दोनों ही स्थितियों में छोटे नाभिक पर बहुत बड़ा आवेश संभालना पड़ता; इसके बजाय वह साझा करता है और चार सहसंयोजक बंध बनाता है। यही एक तथ्य परीक्षा में कार्बन से जुड़ी लगभग हर बात समझा देता है, हीरे की कठोरता से लेकर यौगिकों की विशाल संख्या तक।
कार्बन इतने यौगिक क्यों बनाता है
कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या के दो कारण हैं। पहला है शृंखलन, यानी कार्बन परमाणुओं का आपस में जुड़कर लंबी शृंखलाएं, शाखित शृंखलाएं और वलय बनाना; कार्बन यह गुण किसी भी अन्य तत्व से अधिक दिखाता है क्योंकि कार्बन-कार्बन बंध छोटा और बहुत मजबूत होता है। दूसरा है चतुःसंयोजकता: चार बंध होने से एक कार्बन परमाणु कार्बन के या हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर तथा हैलोजन जैसे तत्वों के चार परमाणु थाम सकता है। जिन यौगिकों का अणुसूत्र एक हो पर संरचना भिन्न हो उन्हें समावयवी कहते हैं; C4H10 सूत्र वाले ब्यूटेन के दो, पेंटेन के तीन और हेक्सेन यानी C6H14 के पांच समावयवी होते हैं।
कार्बन के अपररूप
| अपररूप | संरचना | गुण और उपयोग |
|---|---|---|
| हीरा | हर कार्बन चार अन्य कार्बन से जुड़ा, दृढ़ त्रिविमीय जालक | सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ; विद्युत का कुचालक; काटने और छेदने में प्रयुक्त |
| ग्रेफाइट | हर कार्बन तीन अन्य से जुड़ा, षट्कोणीय परतें ढीली पकड़ में | मुलायम और फिसलनदार, विद्युत का सुचालक; स्नेहक तथा इलेक्ट्रोड में प्रयुक्त |
| फुलरीन | बंद पिंजरे के रूप में सजे कार्बन परमाणु, सबसे ज्ञात C60 | बकमिंस्टर फुलरीन, फुटबॉल जैसी आकृति; नैनो पदार्थ शोध का आधार |
हीरा और ग्रेफाइट एक ही तत्व से बने हैं और उनके गुणों का अंतर केवल परमाणुओं के जुड़ने के ढंग से आता है। ग्रेफाइट में हर परमाणु का एक संयोजी इलेक्ट्रॉन मुक्त रहकर चल सकता है, इसलिए वह चालन करता है, जबकि हीरे में हर इलेक्ट्रॉन बंध में बंधा होता है।
हाइड्रोकार्बन
केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने यौगिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। संतृप्त हाइड्रोकार्बन यानी ऐल्केन में केवल एकल बंध होते हैं और उनका सामान्य सूत्र CnH2n+2 है, जिसका पहला सदस्य मेथेन है। असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में बहुबंध होता है: ऐल्कीन में कार्बन-कार्बन द्विबंध होता है, सूत्र CnH2n, और पहला सदस्य एथीन है; ऐल्काइन में त्रिबंध होता है, सूत्र CnH2n-2, और पहला सदस्य एथाइन है, जिसे एसिटिलीन भी कहते हैं। जिस यौगिक में ठीक दो कार्बन-कार्बन द्विबंध हों उसे डाइईन कहा जाता है। जिस श्रेणी में हर सदस्य अगले से एक CH2 इकाई, यानी चौदह द्रव्यमान इकाई, से भिन्न हो वह समजातीय श्रेणी है; उसके सदस्यों के रासायनिक गुण समान रहते हैं और भौतिक गुण क्रमशः बदलते हैं।
क्रियात्मक समूह
| समूह | सूत्र | यौगिक वर्ग |
|---|---|---|
| हाइड्रॉक्सिल | -OH | ऐल्कोहॉल, जैसे एथेनॉल |
| ऐल्डिहाइड | -CHO | ऐल्डिहाइड, जैसे एथेनल |
| कीटोन | -CO- | कीटोन, जैसे प्रोपेनोन |
| कार्बोक्सिल | -COOH | कार्बोक्सिलिक अम्ल, जैसे एथेनोइक अम्ल |
याद रखने योग्य अभिक्रियाएं
भरपूर वायु में हाइड्रोकार्बन के दहन से कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊष्मा मिलती है तथा ज्वाला साफ नीली रहती है; वायु की कमी होने पर दहन अपूर्ण होता है और ज्वाला पीली तथा कज्जली हो जाती है, इसीलिए गैस बर्नर के वायु छिद्र साफ रखे जाते हैं। जिन यौगिकों में कार्बन का अनुपात अधिक होता है, जैसे ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन, वे इसी कारण जल्दी धुआं देते हैं। योगात्मक अभिक्रिया में असंतृप्त यौगिक निकल या पैलेडियम की उपस्थिति में हाइड्रोजन ग्रहण कर संतृप्त हो जाता है, जिसका औद्योगिक उदाहरण वनस्पति तेल से वनस्पति घी बनाना है। प्रतिस्थापन अभिक्रिया में संतृप्त यौगिक का एक परमाणु दूसरे से बदल जाता है, जैसे सूर्य के प्रकाश में मेथेन और क्लोरीन की अभिक्रिया। एथेनॉल सोडियम से क्रिया कर हाइड्रोजन देता है और सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करने पर जल खोकर एथीन बनाता है। एथेनोइक अम्ल, जिसका पांच से आठ प्रतिशत विलयन सिरका कहलाता है, अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल से क्रिया कर मीठी गंध वाला एस्टर देता है और सोडियम हाइड्रॉक्साइड से क्रिया कर वह लवण देता है जिससे साबुन बनता है; इस अभिक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं।
ईंधन और रोजमर्रा के कार्बन यौगिक
रसोई में प्रयुक्त द्रवित पेट्रोलियम गैस मुख्यतः प्रोपेन और ब्यूटेन है, जबकि संपीडित प्राकृतिक गैस मुख्यतः मेथेन है। साबुन लंबी शृंखला वाले वसा अम्ल का सोडियम या पोटैशियम लवण है; उसके अणु मिसेल बनाते हैं जिनमें तैलीय पूंछ भीतर और आवेशित सिरे जल की ओर रहते हैं, और इसी से मैल कपड़े से उखड़ता है। कठोर जल में साबुन कैल्शियम तथा मैग्नीशियम लवणों से क्रिया कर अघुलनशील झाग-मल बना देता है, इसीलिए सल्फोनिक अम्लों के लवण यानी अपमार्जक वहां काम करते हैं जहां साबुन विफल रहता है।
परीक्षा की दृष्टि से
लगभग सभी प्रश्न तीन क्षेत्रों से आते हैं। पहला, संरचना और बंधन: कार्बन कितने सहसंयोजक बंध बनाता है, शृंखलन तथा चतुःसंयोजकता का अर्थ, और हीरे तथा ग्रेफाइट का अंतर, जिसमें सबसे प्रिय प्रश्न यह है कि ग्रेफाइट चालक और हीरा कुचालक क्यों है। दूसरा, श्रेणियों और सदस्यों के नाम: ऐल्केन, ऐल्कीन तथा ऐल्काइन के सामान्य सूत्र, प्रत्येक का पहला सदस्य, किसी सूत्र के समावयवियों की संख्या और डाइईन का अर्थ। तीसरा, रोजमर्रा का रसायन: एलपीजी और सीएनजी में क्या होता है, ज्वाला नीली या कज्जली क्यों होती है, तेल से वनस्पति घी किस अभिक्रिया से बनता है और सिरका क्या है। नामों के साथ सूत्र भी याद रखें, क्योंकि प्रश्नपत्र प्रायः सूत्र देकर वर्ग पूछते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कार्बन का परमाणु क्रमांक | छह, संयोजी इलेक्ट्रॉन चार |
|---|---|
| सहसंयोजक बंधों की संख्या | चार, यानी चतुःसंयोजकता |
| सबसे कठोर अपररूप | हीरा |
| चालक अपररूप | ग्रेफाइट |
| बकमिंस्टर फुलरीन | C60, फुटबॉल जैसी आकृति |
| सामान्य सूत्र | ऐल्केन CnH2n+2, ऐल्कीन CnH2n, ऐल्काइन CnH2n-2 |
| पहला ऐल्केन, ऐल्कीन और ऐल्काइन | मेथेन, एथीन और एथाइन |
| C6H14 के समावयवी | पांच |
| समजातीय श्रेणी का अंतर | एक CH2 इकाई, चौदह द्रव्यमान इकाई |
| सिरका | जल में एथेनोइक अम्ल का पांच से आठ प्रतिशत विलयन |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
रसोई गैस (एलपीजी) मुख्यतः किससे बनी होती है?
- A.एथीन
- B.एथाइन
- C.प्रोपीन
- D.प्रोपेन और ब्यूटेन
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. प्रोपेन और ब्यूटेन
व्याख्या
सही उत्तर D, प्रोपेन और ब्यूटेन है। द्रवित पेट्रोलियम गैस इन्हीं दो संतृप्त हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण है, जो सामान्य दाब पर गैस रहते हैं पर हल्के दाब पर द्रव बन जाते हैं, जिससे बहुत सारा ईंधन छोटे सिलेंडर में आ जाता है; रिसाव पकड़ने के लिए इसमें तेज गंध वाला यौगिक मिलाया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि एथीन असंतृप्त गैस है, जो पॉलिथीन बनाने और फल पकाने में काम आती है, रसोई ईंधन के रूप में नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि एथाइन यानी एसिटिलीन को ऑक्सीजन के साथ वेल्डिंग टॉर्च में जलाया जाता है और वह घरेलू सिलेंडर में नहीं आती। विकल्प C गलत है क्योंकि प्रोपीन प्लास्टिक उद्योग का कच्चा माल है, मुख्यतः पॉलिप्रोपिलीन के लिए। यह भी याद रखें कि वाहनों में प्रयुक्त सीएनजी मुख्यतः मेथेन है।
C6H14 के कितने समावयवी होते हैं?
- A.3
- B.6
- C.4
- D.5
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 5
व्याख्या
सही उत्तर D, पांच है। हेक्सेन यानी C6H14 को छह कार्बन की सीधी शृंखला के रूप में, पांच कार्बन की शृंखला पर अलग-अलग स्थानों पर मेथिल शाखा के साथ दो रूपों में, तथा चार कार्बन की शृंखला पर शाखाओं के साथ दो रूपों में लिखा जा सकता है, जिससे एक ही अणुसूत्र की पांच भिन्न संरचनाएं बनती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि तीन समावयवी पेंटेन यानी C5H12 के होते हैं, और छोटे सदस्य को याद रखने वाले अभ्यर्थी प्रायः यही चुन बैठते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि आरंभिक ऐल्केनों में छह किसी की संख्या नहीं है; अगला सदस्य हेप्टेन नौ समावयवी देता है। विकल्प C गलत है क्योंकि चार भी इस भाग के किसी ऐल्केन से मेल नहीं खाता। याद रखने योग्य क्रम सरल है: ब्यूटेन दो, पेंटेन तीन, हेक्सेन पांच, हेप्टेन नौ।
जिन यौगिकों में ठीक दो कार्बन-कार्बन द्विबंध होते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है?
- A.टरपीन
- B.डाइईन
- C.ट्राइऐल्काइन
- D.डाइऐल्काइन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. डाइईन
व्याख्या
सही उत्तर B, डाइईन है। उपसर्ग डाइ का अर्थ दो है और अंत में आने वाला ईन कार्बन-कार्बन द्विबंध बताता है, इसलिए डाइईन वह हाइड्रोकार्बन है जिसमें ठीक दो द्विबंध हों; कृत्रिम रबर का कच्चा माल ब्यूटा-1,3-डाइईन इसका मानक उदाहरण है। विकल्प A गलत है क्योंकि टरपीन प्राकृतिक यौगिकों का वह वर्ग है जो आइसोप्रीन इकाइयों से बनता है और पौधों के तेलों में मिलता है; उनमें कई द्विबंध हो सकते हैं पर नाम से संख्या तय नहीं होती। विकल्प C गलत है क्योंकि आइन अंत त्रिबंध बताता है, इसलिए ऐसा नाम तीन त्रिबंध का संकेत देगा, द्विबंध का नहीं। विकल्प D भी इसी कारण गलत है, क्योंकि उसका अर्थ दो त्रिबंध होगा। उपसर्ग से संख्या और अंत से बंध का प्रकार पढ़ लेना इस पूरे वर्ग के प्रश्न हल कर देता है।
हाइड्रोकार्बनों की ऐल्काइन श्रेणी का पहला सदस्य कौन-सा है?
- A.प्रोपाइन
- B.एथाइन
- C.मेथाइन
- D.ब्यूटाइन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एथाइन
व्याख्या
सही उत्तर B, एथाइन है। ऐल्काइन में कार्बन-कार्बन त्रिबंध होता है, जिसके लिए कम से कम दो कार्बन परमाणु चाहिए, इसलिए श्रेणी एथाइन यानी C2H2 से आरंभ होती है, जिसे एसिटिलीन भी कहते हैं और जो ऑक्सीजन के साथ वेल्डिंग में जलाई जाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि तीन कार्बन वाला प्रोपाइन इस श्रेणी का दूसरा सदस्य है, पहला नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि मेथाइन नाम का कोई ऐल्काइन हो ही नहीं सकता: मेथेन में एक ही कार्बन परमाणु है और त्रिबंध बनाने के लिए दूसरा कार्बन है ही नहीं, और यही इस विकल्प का जाल है। विकल्प D गलत है क्योंकि चार कार्बन वाला ब्यूटाइन तीसरा सदस्य है। श्रेणी का सामान्य सूत्र CnH2n-2 है और n बराबर दो रखने पर C2H2 मिलता है, जो एथाइन को पहला सदस्य सिद्ध करता है।
गैस चूल्हे की ज्वाला नीली किस कारण जलती है?
- A.ईंधन का पूर्ण दहन
- B.वायु में हाइड्रोजन की उपस्थिति
- C.खतरनाक दहन
- D.अपर्याप्त ऑक्सीजन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ईंधन का पूर्ण दहन
व्याख्या
सही उत्तर A, ईंधन का पूर्ण दहन है। जब बर्नर तक पर्याप्त वायु पहुंचती है तो ईंधन का हर कार्बन परमाणु पूरी तरह ऑक्सीकृत होकर कार्बन डाइऑक्साइड बनता है और ज्वाला नीली तथा अधिक गर्म रहती है, जिससे उतनी ही गैस से अधिकतम ऊष्मा मिलती है। विकल्प B गलत है क्योंकि साधारण वायु में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन होते हैं तथा हाइड्रोजन केवल नाममात्र, और ज्वाला के रंग का वायुमंडलीय हाइड्रोजन से कोई संबंध नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि खतरनाक दहन कोई रासायनिक पद ही नहीं है; बर्नर में खतरा अपूर्ण दहन से होता है, जिससे विषैली कार्बन मोनोऑक्साइड बनती है। विकल्प D गलत है क्योंकि ऑक्सीजन की कमी से उल्टा परिणाम मिलता है, यानी पीली कज्जली ज्वाला जिसमें बिना जले कार्बन कण चमकते हैं, और उपाय यह है कि बर्नर के वायु छिद्र साफ किए जाएं।
कार्बन परमाणुओं का आपस में जुड़कर लंबी शृंखलाएं और वलय बनाने का गुण क्या कहलाता है?
- A.चतुःसंयोजकता
- B.शृंखलन
- C.समावयवता
- D.अपररूपता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. शृंखलन
व्याख्या
सही उत्तर B, शृंखलन है। शृंखलन एक ही तत्व के परमाणुओं का आपस में जुड़ना है, और कार्बन यह गुण किसी भी अन्य तत्व से अधिक दिखाता है क्योंकि कार्बन-कार्बन बंध छोटा और असाधारण रूप से मजबूत होता है, इसीलिए अनेक कार्बन परमाणुओं की शृंखला भी स्थायी रहती है। विकल्प A गलत है क्योंकि चतुःसंयोजकता अलग गुण है, यानी चार बंध उपलब्ध होना, जिससे कार्बन चार अन्य परमाणु थाम पाता है; दोनों गुण मिलकर कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या समझाते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि समावयवता एक ही अणुसूत्र की भिन्न संरचनाओं का होना है, जैसे ब्यूटेन के दो रूप, और वह शृंखलन का परिणाम है, उसका नाम नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि अपररूपता किसी तत्व का भिन्न भौतिक रूपों में मिलना है, जैसे हीरा, ग्रेफाइट और फुलरीन।
ग्रेफाइट विद्युत का चालन करता है जबकि हीरा नहीं, इसका कारण क्या है?
- A.ग्रेफाइट में धातु की अशुद्धियां होती हैं
- B.ग्रेफाइट में हर कार्बन परमाणु का एक इलेक्ट्रॉन मुक्त रहता है
- C.ग्रेफाइट किसी अन्य तत्व से बना है
- D.हीरे का गलनांक कम होता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ग्रेफाइट में हर कार्बन परमाणु का एक इलेक्ट्रॉन मुक्त रहता है
व्याख्या
सही उत्तर B है। ग्रेफाइट में हर कार्बन परमाणु परत के भीतर केवल तीन अन्य परमाणुओं से बंधा होता है, इसलिए हर परमाणु का चौथा संयोजी इलेक्ट्रॉन परत में मुक्त रूप से चल सकता है और चलते इलेक्ट्रॉन ही विद्युत धारा बनाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि शुद्ध ग्रेफाइट स्वयं चालन करता है; अशुद्धियां कारण नहीं हैं और उच्च शुद्धता वाला कृत्रिम ग्रेफाइट भी उतना ही चालक है। विकल्प C गलत है क्योंकि हीरा और ग्रेफाइट दोनों केवल कार्बन से बने हैं, और इसी कारण उन्हें अपररूप कहा जाता है; अंतर केवल परमाणुओं की व्यवस्था का है। विकल्प D गलत है क्योंकि दृढ़ त्रिविमीय जालक के कारण हीरे का गलनांक वास्तव में बहुत ऊंचा होता है, और गलनांक से चालकता तय होती भी नहीं। हीरे में हर परमाणु चार अन्य से बंधा होने से कोई इलेक्ट्रॉन मुक्त नहीं बचता।
समजातीय श्रेणी के दो क्रमागत सदस्यों में कितना अंतर होता है?
- A.CH2 और 14 द्रव्यमान इकाई
- B.CH3 और 15 द्रव्यमान इकाई
- C.C2H4 और 28 द्रव्यमान इकाई
- D.CH4 और 16 द्रव्यमान इकाई
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. CH2 और 14 द्रव्यमान इकाई
व्याख्या
सही उत्तर A, एक CH2 इकाई और चौदह द्रव्यमान इकाई है। मेथेन से एथेन जाने पर, या एथेनॉल से प्रोपेनॉल जाने पर, बारह द्रव्यमान का एक कार्बन और एक-एक द्रव्यमान के दो हाइड्रोजन जुड़ते हैं, जो कुल चौदह होते हैं, और यही निश्चित पग समजातीय श्रेणी को परिभाषित करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि CH3 एक समूह है, क्रमागत सदस्यों का अंतर नहीं; ऐसे विषम खंड से भिन्न होकर कोई अणु उसी श्रेणी का स्थायी सदस्य नहीं रह सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि C2H4 का अंतर एक साथ दो सदस्यों की छलांग होगी, जिसमें बीच का एक समजात छूट जाएगा। विकल्प D गलत है क्योंकि CH4 तो मेथेन का पूरा अणु है, श्रेणी का पग नहीं। ऐसी श्रेणी के सदस्यों में एक ही क्रियात्मक समूह होता है और क्वथनांक तथा घनत्व क्रमशः बदलते हैं।
निकल उत्प्रेरक पर हाइड्रोजन प्रवाहित कर वनस्पति तेल से वनस्पति घी बनाना किसका उदाहरण है?
- A.प्रतिस्थापन अभिक्रिया
- B.योगात्मक अभिक्रिया
- C.विस्थापन अभिक्रिया
- D.उदासीनीकरण अभिक्रिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. योगात्मक अभिक्रिया
व्याख्या
सही उत्तर B, योगात्मक अभिक्रिया है। वनस्पति तेलों में कार्बन-कार्बन द्विबंध वाली असंतृप्त शृंखलाएं होती हैं; निकल या पैलेडियम की उपस्थिति में हाइड्रोजन इन द्विबंधों पर जुड़ जाती है और वे एकल बंध बन जाते हैं, जिससे तेल संतृप्त होकर ठोस वसा में बदल जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि प्रतिस्थापन अभिक्रिया में संतृप्त यौगिक का कोई परमाणु या समूह दूसरे से बदलता है, जैसे सूर्य के प्रकाश में मेथेन और क्लोरीन की क्रिया, जबकि यहां कुछ बदला नहीं जाता। विकल्प C गलत है क्योंकि विस्थापन अभिक्रिया में अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से बाहर कर देता है, जो प्रायः धातुओं की अभिक्रियाओं का वर्णन है। विकल्प D गलत है क्योंकि उदासीनीकरण अम्ल और क्षार से लवण तथा जल बनाता है, और इस हाइड्रोजनीकरण में कोई अम्ल या क्षार भाग नहीं लेता।
एथेनोइक अम्ल में कौन-सा क्रियात्मक समूह उपस्थित होता है?
- A.हाइड्रॉक्सिल, -OH
- B.ऐल्डिहाइड, -CHO
- C.कार्बोक्सिल, -COOH
- D.कीटोन, -CO-
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कार्बोक्सिल, -COOH
व्याख्या
सही उत्तर C, कार्बोक्सिल समूह है। एथेनोइक अम्ल, जिसे एसिटिक अम्ल कहा जाता है और तनु रूप में सिरका के नाम से जाना जाता है, का सूत्र CH3COOH है, और अंत में लगा -COOH समूह ही उसे अम्लीय बनाता है, क्योंकि वह जल में हाइड्रोजन आयन देता है और नीले लिटमस को लाल कर देता है। विकल्प A गलत है क्योंकि हाइड्रॉक्सिल समूह ऐल्कोहॉल की पहचान है, जैसे एथेनॉल यानी C2H5OH, जो लिटमस के प्रति उदासीन रहता है। विकल्प B गलत है क्योंकि ऐल्डिहाइड समूह -CHO पर समाप्त होता है, जैसे एथेनल में, और ऐल्डिहाइड आसानी से ऑक्सीकृत होकर संगत अम्ल बनता है पर स्वयं अम्लीय नहीं होता। विकल्प D गलत है क्योंकि कीटोन समूह दो कार्बन परमाणुओं के बीच रहता है, जैसे प्रोपेनोन में, और वह भी अम्लीय नहीं है।
साठ कार्बन परमाणुओं वाला फुटबॉल जैसी आकृति का कार्बन अपररूप क्या कहलाता है?
- A.ग्रेफाइट
- B.बकमिंस्टर फुलरीन
- C.कोक
- D.चारकोल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बकमिंस्टर फुलरीन
व्याख्या
सही उत्तर B, बकमिंस्टर फुलरीन है। यह साठ कार्बन परमाणुओं का वह अणु है जो पंचभुजों और षट्भुजों के बंद पिंजरे में सजा होता है, ठीक फुटबॉल के टुकड़ों की तरह, और इसका नाम उसी ज्यामिति के गुंबद बनाने वाले वास्तुकार के नाम पर पड़ा। विकल्प A गलत है क्योंकि ग्रेफाइट एक के ऊपर एक जमी सपाट षट्कोणीय परतों से बना है, जिससे वह मुलायम और फिसलनदार होता है, पिंजरेनुमा नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि कोक वह अशुद्ध कार्बन है जो कोयले को वायु की अनुपस्थिति में गर्म करने पर बचता है और धातु निष्कर्षण में काम आता है; वह निश्चित अणुसूत्र वाला क्रिस्टलीय अपररूप नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि चारकोल भी लकड़ी से प्राप्त कार्बन का अक्रिस्टलीय रूप है, जो गैसों और रंगकणों के अधिशोषण के लिए उपयोगी है, किसी नियमित संरचना के लिए नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कार्बन आयनिक बंध के बजाय सहसंयोजक बंध क्यों बनाता है?
स्थायी होने के लिए कार्बन परमाणु को या तो चार इलेक्ट्रॉन खोने होंगे या चार पाने होंगे। चार खोने में बहुत अधिक ऊर्जा लगती है और चार पाने पर छह प्रोटॉन वाला छोटा नाभिक दस इलेक्ट्रॉन नहीं थाम सकता। इसलिए चार इलेक्ट्रॉन युग्मों का साझा ही एकमात्र रास्ता बचता है और कार्बन सहसंयोजक बंध बनाता है।
ग्रेफाइट विद्युत का चालक और हीरा कुचालक क्यों है?
ग्रेफाइट में हर कार्बन परमाणु केवल तीन अन्य से बंधा होता है, इसलिए हर परमाणु का एक इलेक्ट्रॉन परत में मुक्त रूप से चल सकता है, और चलते इलेक्ट्रॉन ही धारा हैं। हीरे में हर परमाणु चार अन्य से बंधा है, इसलिए कोई संयोजी इलेक्ट्रॉन मुक्त नहीं बचता और धारा नहीं बहती।
समजातीय श्रेणी क्या है?
यह यौगिकों का वह परिवार है जिसमें हर सदस्य पिछले से एक CH2 इकाई, यानी चौदह अणु द्रव्यमान इकाई, से भिन्न होता है। सभी सदस्यों में एक ही क्रियात्मक समूह होने से रासायनिक गुण समान रहते हैं, जबकि गलनांक, क्वथनांक और घनत्व श्रेणी में क्रमशः बदलते जाते हैं।
गैस चूल्हे की ज्वाला पीली क्यों हो जाती है?
पीली और कज्जली ज्वाला बताती है कि वायु कम मिल रही है और ईंधन अपूर्ण रूप से जल रहा है, जिससे बिना जले कार्बन कण चमकते हैं। बर्नर के वायु छिद्र साफ करने पर ऑक्सीजन की आपूर्ति लौट आती है और ज्वाला फिर नीली हो जाती है, जो पूर्ण दहन और अधिक ऊष्मा का संकेत है।
वनस्पति तेल से वनस्पति घी कैसे बनता है?
वनस्पति तेलों में द्विबंध वाली असंतृप्त शृंखलाएं होती हैं। निकल उत्प्रेरक की उपस्थिति में तेल में हाइड्रोजन प्रवाहित करने पर ये द्विबंध योगात्मक अभिक्रिया से हाइड्रोजन ग्रहण कर एकल बंध बन जाते हैं, जिससे तेल संतृप्त होकर ठोस वनस्पति घी में बदल जाता है।
स्रोत
- विज्ञान (कक्षा दस), अध्याय: कार्बन एवं उसके यौगिक — एनसीईआरटी
- रसायन विज्ञान भाग दो (कक्षा ग्यारह), अध्याय: हाइड्रोकार्बन — एनसीईआरटी





