विद्युत रसायन: विद्युत अपघटन, विद्युत लेपन और बैटरी
विद्युत रसायन पर परीक्षा नोट्स: विद्युत अपघटन और उसके उत्पाद, फैराडे के नियम, विद्युत लेपन, शुष्क तथा लेड-अम्ल सेल, ईंधन सेल और संक्षारण की रोकथाम।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

विद्युत रसायन बिजली और रासायनिक परिवर्तन के संबंध का विज्ञान है, और जब भी किसी नई बैटरी सामग्री अथवा ईंधन सेल की घोषणा होती है यह समाचारों में आ जाता है; परंतु परीक्षा में वही पूछा जाता है जो स्थिर विज्ञान है, अर्थात सेल, विद्युत अपघटन तथा संक्षारण। इस विषय के दो भाग एक-दूसरे के ठीक विपरीत हैं। विद्युत अपघटन में विद्युत ऊर्जा देकर वह रासायनिक अभिक्रिया करवाई जाती है जो स्वयं नहीं होती। गैल्वेनिक अथवा वोल्टीय सेल में स्वतः होने वाली रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत ऊर्जा प्राप्त की जाती है। प्रत्येक बैटरी, प्रत्येक लेपित नल तथा ऐलुमिनियम का निष्कर्षण इन्हीं दो विचारों से निकलते हैं।
विद्युत अपघट्य और विद्युत चालन
वह पदार्थ जिसका जलीय विलयन या गलित रूप आयनों में विभक्त होकर विद्युत का चालन करता है, विद्युत अपघट्य कहलाता है: साधारण नमक, सल्फ्यूरिक अम्ल, कॉपर सल्फेट। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम क्लोराइड जैसे प्रबल विद्युत अपघट्य लगभग पूर्ण आयनित होते हैं, जबकि एसिटिक अम्ल तथा अमोनियम हाइड्रॉक्साइड जैसे दुर्बल विद्युत अपघट्य अंशतः ही आयनित होते हैं। चीनी, यूरिया, ऐल्कोहॉल तथा आसुत जल अविद्युत अपघट्य हैं। धातु में चालन मुक्त इलेक्ट्रॉनों से होता है और धातु अपरिवर्तित रहती है; विद्युत अपघट्य में चालन आयनों से होता है, अतः पदार्थ इलेक्ट्रोडों तक पहुँचता है और रासायनिक परिवर्तन अनिवार्य हो जाता है।
विद्युत अपघटन और इलेक्ट्रोड
विद्युत अपघटनी सेल में दो इलेक्ट्रोड अपघट्य में डुबोकर बैटरी से जोड़े जाते हैं। धनात्मक सिरे से जुड़ा इलेक्ट्रोड एनोड है, जहाँ ऑक्सीकरण होता है और ऋण आयन अर्थात ऋणायन इलेक्ट्रॉन त्याग देते हैं। ऋणात्मक सिरे से जुड़ा इलेक्ट्रोड कैथोड है, जहाँ अपचयन होता है और धन आयन अर्थात धनायन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं। नियम इस प्रकार स्मरण रखें: एनोड पर ऑक्सीकरण, कैथोड पर अपचयन, और यह दोनों प्रकार के सेलों में लागू होता है।
| किसका विद्युत अपघटन | कैथोड पर | एनोड पर | उपयोग |
|---|---|---|---|
| अम्लीकृत जल | हाइड्रोजन | ऑक्सीजन, हाइड्रोजन के आधे आयतन में | दोनों गैसों का निर्माण |
| गलित सोडियम क्लोराइड | सोडियम धातु | क्लोरीन | सोडियम के लिए डाउन प्रक्रम |
| ब्राइन अर्थात नमक का सांद्र विलयन | हाइड्रोजन | क्लोरीन | क्लोर-अल्कली उद्योग; विलयन में सोडियम हाइड्रॉक्साइड बचता है |
| गलित क्रायोलाइट में घुला ऐलुमिना | ऐलुमिनियम | ऑक्सीजन, जो कार्बन एनोड को जला देती है | ऐलुमिनियम के लिए हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रम |
| कॉपर सल्फेट विलयन में अशुद्ध ताँबा | शुद्ध ताँबा जमता है | अशुद्ध ताँबा घुलता है | ताँबे का विद्युत परिष्करण |
फैराडे के विद्युत अपघटन के नियम
प्रथम नियम के अनुसार किसी इलेक्ट्रोड पर मुक्त पदार्थ का द्रव्यमान प्रवाहित विद्युत की मात्रा के समानुपाती होता है, अर्थात m बराबर Z गुणा i गुणा t, जहाँ Z पदार्थ का विद्युत रासायनिक तुल्यांक, i धारा और t समय है। द्वितीय नियम के अनुसार भिन्न अपघट्यों से समान मात्रा की विद्युत प्रवाहित करने पर मुक्त द्रव्यमान उनके रासायनिक तुल्यांकों के समानुपाती होते हैं। एक फैराडे, अर्थात एक मोल इलेक्ट्रॉनों का आवेश, लगभग 96,500 कूलॉम होता है और वह किसी भी पदार्थ का एक ग्राम तुल्यांक निक्षेपित करता है।
विद्युत लेपन
विद्युत लेपन विद्युत अपघटन द्वारा एक धातु पर दूसरी धातु की पतली परत चढ़ाना है, जिससे संक्षारण रुके, रूप सुंदर बने अथवा घिसाव कम हो। जिस वस्तु पर लेप करना है उसे सदैव कैथोड बनाया जाता है, लेप की शुद्ध धातु की पट्टी एनोड होती है, और अपघट्य उसी धातु के लवण का विलयन होता है, जिससे विलयन कभी समाप्त नहीं होता: एनोड उसी गति से घुलता है जिस गति से कैथोड पर धातु जमती है। क्रोमियम कार के पुर्ज़ों और नलों पर, निकेल सस्ते आभूषणों तथा मशीन के पुर्ज़ों पर, चाँदी छुरी-काँटों पर और टिन खाद्य डिब्बों की लोहे की चादर पर चढ़ाया जाता है, क्योंकि खाद्य पदार्थों के अम्ल टिन पर प्रभाव नहीं डालते। जस्तीकरण अर्थात लोहे पर जिंक की परत इससे भिन्न है: वह सामान्यतः लोहे को गलित जिंक में डुबोकर की जाती है, और जिंक लोहे की रक्षा वहाँ भी करता है जहाँ परत खुरच जाए, क्योंकि जिंक अधिक क्रियाशील धातु है और लोहे के स्थान पर स्वयं संक्षारित होता है।
सेल और बैटरी
प्राथमिक सेल पुनः आवेशित नहीं हो सकता, क्योंकि उसकी अभिक्रिया उत्क्रमणीय नहीं होती। सामान्य शुष्क सेल, अर्थात लेक्लांशे प्रकार, में जिंक का पात्र एनोड होता है, मैंगनीज़ डाइऑक्साइड से घिरी ग्रेफाइट की छड़ कैथोड होती है, और अमोनियम क्लोराइड तथा जिंक क्लोराइड की नम लेई अपघट्य होती है; यह लगभग 1.5 वोल्ट देता है। द्वितीयक सेल अथवा संचायक सेल को विपरीत दिशा में धारा प्रवाहित करके पुनः आवेशित किया जा सकता है। कार के लेड-अम्ल सेल में स्पंजी सीसा ऋण प्लेट, लेड डाइऑक्साइड धन प्लेट तथा तनु सल्फ्यूरिक अम्ल अपघट्य होता है, और वह लगभग 2 वोल्ट देता है, अतः श्रेणीक्रम में छह सेल मिलकर 12 वोल्ट की बैटरी बनाते हैं। निकेल-कैडमियम तथा लिथियम-आयन अन्य महत्वपूर्ण द्वितीयक सेल हैं, और दूसरा मोबाइल फ़ोन तथा विद्युत वाहनों में प्रयुक्त होता है। श्रेणीक्रम में जुड़े सेलों की वोल्टता जुड़ जाती है और क्षमता वही रहती है; समानांतर क्रम में जुड़े सेलों की वोल्टता एक सेल के बराबर रहती है और क्षमताएँ जुड़ जाती हैं। संचायक बैटरी सामान्यतः उसकी ऐंपियर-घंटा क्षमता के लगभग दसवें भाग की धारा से आवेशित की जाती है।
ईंधन सेल
ईंधन सेल ईंधन की रासायनिक ऊर्जा को सीधे विद्युत में बदलता रहता है, जब तक ईंधन मिलता रहे, जबकि बैटरी नियत मात्रा की ऊर्जा संचित रखती है। हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल में एनोड पर हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण और कैथोड पर ऑक्सीजन का अपचयन होता है, एकमात्र उत्पाद जल है, और दक्षता उसी ईंधन को जलाने वाले ऊष्मा इंजन से कहीं अधिक होती है। इसी प्रकार के ईंधन सेलों ने अपोलो अंतरिक्ष यान में बिजली तथा पीने का जल दिया, और अब ये बसों और रेलगाड़ियों में लगाए जा रहे हैं।
संक्षारण और उसकी रोकथाम
संक्षारण धातु की सतह पर वायु, नमी और रसायनों की क्रिया से धातु का धीरे-धीरे क्षय होना है। लोहे में जंग लगने के लिए वायु और नमी दोनों आवश्यक हैं, और जंग जलयोजित फेरिक ऑक्साइड है; इसे रंग, तेल और ग्रीस लगाकर, जस्तीकरण से, स्टेनलेस स्टील जैसे मिश्रातु बनाकर, विद्युत लेपन से तथा बलिदान रक्षा से रोका जाता है, जिसमें जिंक या मैग्नीशियम जैसी अधिक क्रियाशील धातु का टुकड़ा जहाज़ के पेंदे अथवा भूमिगत पाइपलाइन से जोड़ दिया जाता है और वह लोहे के स्थान पर संक्षारित होता है। ऐलुमिनियम को इतनी सावधानी की आवश्यकता नहीं, क्योंकि उस पर बनी ऑक्साइड की पतली परत सतह से चिपकी रहकर भीतर की धातु की रक्षा करती है।
परीक्षा की दृष्टि से
तीन तथ्य प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं: एनोड पर ऑक्सीकरण और कैथोड पर अपचयन, फैराडे का मान 96,500 कूलॉम, तथा विद्युत लेपन में वस्तु का कैथोड होना। विद्युत अपघटन के उत्पादों पर प्रश्न अपेक्षित है, जिसमें ब्राइन से एनोड पर क्लोरीन, कैथोड पर हाइड्रोजन और विलयन में कॉस्टिक सोडा सर्वाधिक प्रिय है। प्राथमिक और द्वितीयक सेल का अंतर भी निश्चित प्रश्न है, जिसमें शुष्क सेल तथा लेड-अम्ल सेल उदाहरण हैं और उनकी वोल्टता लगभग 1.5 तथा 2 वोल्ट है। रेलवे और तकनीकी प्रश्नपत्र बैटरी के व्यावहारिक नियम जोड़ते हैं: श्रेणीक्रम में वोल्टता जुड़ती है, समानांतर क्रम में नहीं, और बैटरी उसकी ऐंपियर-घंटा क्षमता के लगभग दसवें भाग से आवेशित होती है। संक्षारण से जिंक द्वारा जस्तीकरण तथा बलिदान रक्षा स्मरण रखें, और जस्तीकरण को, जो गलित जिंक में डुबोकर होता है, विद्युत लेपन से भ्रमित न करें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| एनोड | वह इलेक्ट्रोड जहाँ ऑक्सीकरण होता है; विद्युत अपघटनी सेल का धनात्मक इलेक्ट्रोड |
|---|---|
| कैथोड | वह इलेक्ट्रोड जहाँ अपचयन होता है; विद्युत अपघटनी सेल का ऋणात्मक इलेक्ट्रोड |
| फैराडे नियतांक | प्रति मोल इलेक्ट्रॉन लगभग 96,500 कूलॉम |
| फैराडे का प्रथम नियम | m = Zit, जहाँ Z विद्युत रासायनिक तुल्यांक है |
| ब्राइन का विद्युत अपघटन | एनोड पर क्लोरीन, कैथोड पर हाइड्रोजन, विलयन में सोडियम हाइड्रॉक्साइड |
| ऐलुमिनियम का निष्कर्षण | हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रम; गलित क्रायोलाइट में घुला ऐलुमिना |
| विद्युत लेपन | वस्तु कैथोड, लेप की धातु एनोड |
| जस्तीकरण | लोहे या स्टील पर जिंक की परत |
| शुष्क सेल | जिंक एनोड, मैंगनीज़ डाइऑक्साइड सहित ग्रेफाइट कैथोड, अमोनियम क्लोराइड लेई; लगभग 1.5 वोल्ट |
| लेड-अम्ल सेल | तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में सीसा तथा लेड डाइऑक्साइड की प्लेटें; प्रति सेल लगभग 2 वोल्ट |
| कार की बैटरी | श्रेणीक्रम में छह लेड-अम्ल सेल, कुल 12 वोल्ट |
| आवेशन धारा | बैटरी की ऐंपियर-घंटा क्षमता का लगभग दसवाँ भाग |
| ईंधन सेल का उत्पाद | हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल में जल |
| जंग | जलयोजित फेरिक ऑक्साइड; वायु और नमी दोनों आवश्यक |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
आदर्श स्थिति में 200 ऐंपियर-घंटा की बैटरी के लिए आवेशन धारा कितनी होगी?
- A.12 A
- B.15 A
- C.10 A
- D.20 A
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर D, 20 A है। संचायक बैटरी के आवेशन का व्यावहारिक नियम यह है कि आवेशन धारा बैटरी की ऐंपियर-घंटा क्षमता के लगभग दसवें भाग के बराबर रखी जाए, जिसे सी बटा दस दर कहा जाता है। 200 ऐंपियर-घंटा की बैटरी के लिए 200 का दसवाँ भाग 20 ऐंपियर होता है, और इस दर पर पूर्णतः निरावेशित बैटरी लगभग दस से बारह घंटे में आवेशित होती है। इससे बहुत अधिक धारा प्लेटों को गरम कर देती है, अपघट्य को उबाल देती है और सेल का जीवन घटा देती है, जबकि बहुत कम धारा बैटरी को अपूर्ण आवेशित छोड़ देती है और सल्फेटीकरण होने देती है। A अर्थात 12 A तथा B अर्थात 15 A गलत हैं, क्योंकि ये दसवें भाग से कम हैं और 200 ऐंपियर-घंटा के सेल के लिए मनमाने आँकड़े हैं। C अर्थात 10 A जाल है: यह क्षमता का बीसवाँ भाग है, और जो अभ्यर्थी दस प्रतिशत का नियम गलत संख्या पर लगा देते हैं वे इसे चुन लेते हैं।
यदि 12 वोल्ट के छह सेल समानांतर क्रम में जोड़े जाएँ, तो निर्गत वोल्टता होगी:
- A.6 V
- B.72 V
- C.12 V
- D.2 V
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 12 V है। समानांतर क्रम में जोड़ने पर सभी सेलों के धनात्मक सिरे एक साथ और सभी ऋणात्मक सिरे एक साथ जुड़ जाते हैं, अतः प्रत्येक सेल उन्हीं दो बिंदुओं के बीच रहता है और संयोजन की वोल्टता एक सेल की वोल्टता अर्थात 12 वोल्ट ही रहती है। समानांतर व्यवस्था जो बढ़ाती है वह धारा क्षमता है: छह समान सेल समानांतर में छह गुनी धारा दे सकते हैं अथवा उतनी ही धारा छह गुने समय तक, और समूह का आंतरिक प्रतिरोध एक सेल के छठे भाग के बराबर हो जाता है। B अर्थात 72 V गलत है, क्योंकि वोल्टताओं का जुड़ना श्रेणीक्रम में होता है, जहाँ एक सेल का धन सिरा अगले के ऋण सिरे से जुड़ता है। A अर्थात 6 V तथा D अर्थात 2 V गलत हैं, क्योंकि समान सेलों को जोड़ने की कोई विधि टर्मिनल वोल्टता को एक सेल से नीचे नहीं लाती; 2 वोल्ट संयोगवश एक लेड-अम्ल सेल की वोल्टता है, जिनमें से छह श्रेणीक्रम में ऐसी 12 वोल्ट बैटरी बनाते हैं।
विद्युत अपघटन के समय ऑक्सीकरण कहाँ होता है?
- A.कैथोड पर
- B.एनोड पर
- C.विद्युत अपघट्य में
- D.लवण सेतु में
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, एनोड पर है। एनोड वह इलेक्ट्रोड है जो स्रोत के धनात्मक सिरे से जुड़ा होता है, अतः ऋणावेशित आयन अर्थात ऋणायन उसी की ओर जाते हैं और वहाँ इलेक्ट्रॉन त्याग देते हैं; इलेक्ट्रॉनों का त्याग ही ऑक्सीकरण है। A गलत है क्योंकि कैथोड ऋणात्मक सिरे से जुड़ा होता है, धनावेशित धनायनों को आकर्षित करता है और उन्हें इलेक्ट्रॉन देता है, अतः वहाँ अपचयन होता है, ऑक्सीकरण नहीं। यह नियम गैल्वेनिक सेल में भी लागू रहता है, जहाँ एनोड ऋणात्मक सिरा होते हुए भी ऑक्सीकरण का स्थान है, और परीक्षक इसी बिंदु को जाँचते हैं। C गलत है क्योंकि विद्युत अपघट्य केवल वह माध्यम है जिसमें आयन चलते हैं; अभिक्रिया वहीं होती है जहाँ आयन इलेक्ट्रोड से मिलते हैं। D गलत है क्योंकि लवण सेतु दो अर्ध-सेलों वाले गैल्वेनिक सेल का भाग है और वह केवल परिपथ पूरा करते हुए विलयनों को विद्युत रूप से उदासीन रखता है; वह ऑक्सीकरण का स्थान नहीं है।
एक फैराडे नामक विद्युत की मात्रा लगभग कितनी होती है?
- A.9,650 कूलॉम
- B.96,500 कूलॉम
- C.1,600 कूलॉम
- D.6,023 कूलॉम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 96,500 कूलॉम है। एक फैराडे एक मोल इलेक्ट्रॉनों द्वारा वहन किया गया आवेश है, जो एक इलेक्ट्रॉन के आवेश को आवोगाद्रो संख्या से गुणा करने पर मिलता है और लगभग 96,500 कूलॉम होता है; किसी अपघट्य से एक फैराडे प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रोड पर पदार्थ का एक ग्राम तुल्यांक मुक्त होता है। A गलत है क्योंकि 9,650 कूलॉम सही मान का दसवाँ भाग है और असावधानी से पढ़ने वालों के लिए जाल है। C गलत है क्योंकि 1.6 का अंक एक इलेक्ट्रॉन के आवेश से जुड़ा है, जो 1.6 गुणा दस की घात ऋण उन्नीस कूलॉम है, फैराडे से नहीं। D गलत है क्योंकि 6.023 गुणा दस की घात तेईस आवोगाद्रो संख्या है, जो कणों की गिनती है, आवेश की मात्रा नहीं, यद्यपि फैराडे की गणना में दोनों साथ आते हैं।
विद्युत लेपन की प्रक्रिया में जिस वस्तु पर लेप करना होता है, उसे बनाया जाता है
- A.एनोड
- B.कैथोड
- C.विद्युत अपघट्य
- D.सुविधानुसार कोई भी इलेक्ट्रोड
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, कैथोड है। लेपन विलयन में धातु के आयन धनावेशित होते हैं, अतः वे ऋणात्मक इलेक्ट्रोड की ओर जाते हैं और वहाँ अपचयित होकर धातु में बदल जाते हैं; इसलिए लेप जमाने के लिए वस्तु को कैथोड बनाना ही पड़ता है। A गलत है क्योंकि एनोड लेप की शुद्ध धातु की पट्टी होती है, जो लेपन के साथ-साथ विलयन में घुलती जाती है और विलयन की सांद्रता स्थिर रखती है, जिससे विलयन बार-बार बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ती। C गलत है क्योंकि विद्युत अपघट्य लेप की धातु के लवण का विलयन होता है, जैसे ताँबे के लेपन के लिए कॉपर लवण, और वह इलेक्ट्रोड नहीं है। D गलत है क्योंकि ध्रुवता मनमाने ढंग से नहीं चुनी जा सकती: उसे उलट देने पर वस्तु पर धातु जमने के स्थान पर उससे धातु हटने लगेगी, और वास्तव में विद्युत पॉलिशिंग तथा ऐनोडीकरण इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
ब्राइन अर्थात साधारण नमक के सांद्र विलयन के विद्युत अपघटन में एनोड पर कौन-सी गैस मुक्त होती है?
- A.हाइड्रोजन
- B.ऑक्सीजन
- C.क्लोरीन
- D.कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, क्लोरीन है। क्लोर-अल्कली प्रक्रम में सोडियम क्लोराइड के सांद्र विलयन का विद्युत अपघटन किया जाता है; एनोड पर क्लोराइड आयन ऑक्सीकृत होकर क्लोरीन गैस के रूप में निकलते हैं, कैथोड पर हाइड्रोजन मुक्त होती है, और विलयन में सोडियम हाइड्रॉक्साइड बचा रहता है, इसी कारण यह उद्योग एक साथ तीन उपयोगी उत्पाद देता है। A गलत है क्योंकि हाइड्रोजन कैथोड पर मिलती है, एनोड पर नहीं। B गलत है क्योंकि ऑक्सीजन तब एनोड उत्पाद होती है जब जल अथवा किसी अम्ल या अत्यधिक क्रियाशील धातु के लवण के तनु विलयन का अपघटन किया जाए; सांद्र ब्राइन में जल के स्थान पर क्लोराइड आयन निस्सारित होता है। D गलत है क्योंकि विलयन में कोई कार्बोनेट अथवा कार्बन स्रोत ही नहीं होता, अतः कार्बन डाइऑक्साइड बन नहीं सकती। ब्राइन से क्लोरीन, हाइड्रोजन और कॉस्टिक सोडा की तिकड़ी स्मरण रखें।
निम्नलिखित में से कौन द्वितीयक सेल है?
- A.शुष्क सेल
- B.लेड-अम्ल सेल
- C.डेनियल सेल
- D.मर्करी बटन सेल
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, लेड-अम्ल सेल है। उसकी अभिक्रिया उत्क्रमणीय है, अतः विपरीत दिशा में धारा प्रवाहित करने पर उत्पाद पुनः सीसा तथा लेड डाइऑक्साइड में बदल जाते हैं और सेल दोबारा प्रयोग में आ जाता है; ऐसे सेल को द्वितीयक अथवा संचायक सेल कहते हैं और कार की बैटरी इसका सामान्य उदाहरण है। A गलत है क्योंकि लेक्लांशे प्रकार का शुष्क सेल प्राथमिक सेल है: जिंक पात्र और मैंगनीज़ डाइऑक्साइड के क्षय हो जाने पर उसे फेंक दिया जाता है, और उसे पुनः आवेशित करने के प्रयास से रिसाव हो सकता है। C गलत है क्योंकि जिंक और ताँबे के इलेक्ट्रोडों वाला डेनियल सेल प्रयोगशाला का प्रसिद्ध प्राथमिक सेल है। D गलत है क्योंकि घड़ियों में प्रयुक्त मर्करी बटन सेल भी प्राथमिक सेल है। निकेल-कैडमियम तथा लिथियम-आयन अन्य महत्वपूर्ण द्वितीयक सेल हैं।
सामान्य शुष्क सेल में एनोड किस धातु का बना होता है?
- A.ताँबा
- B.ग्रेफाइट
- C.जिंक
- D.मैंगनीज़ डाइऑक्साइड
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, जिंक है। लेक्लांशे शुष्क सेल में बाहरी पात्र स्वयं जिंक का बना होता है और वही एनोड का कार्य करता है, जो सेल के चलने के साथ ऑक्सीकृत होकर जिंक आयन में बदलता जाता है, और इसी कारण पुराना सेल पात्र गल जाने पर रिसने लगता है। A गलत है क्योंकि इस सेल में ताँबे की कोई भूमिका नहीं; वह डेनियल सेल की कैथोड धातु है, जो भिन्न व्यवस्था है। B गलत है क्योंकि शुष्क सेल के मध्य की ग्रेफाइट छड़ कैथोड है, जो निष्क्रिय चालक के रूप में अपचयन अभिक्रिया से धारा बाहर ले जाती है, स्वयं भाग नहीं लेती। D गलत है क्योंकि मैंगनीज़ डाइऑक्साइड ग्रेफाइट छड़ के चारों ओर भरा विध्रुवक है: वह अपचयित होकर उस हाइड्रोजन को सोख लेता है जो अन्यथा एकत्र होकर सेल को रोक देती, परंतु वह एनोड नहीं है। अपघट्य अमोनियम क्लोराइड और जिंक क्लोराइड की नम लेई है, और सेल लगभग 1.5 वोल्ट देता है।
लेड-अम्ल संचायक बैटरी में प्रयुक्त विद्युत अपघट्य है
- A.तनु सल्फ्यूरिक अम्ल
- B.सांद्र नाइट्रिक अम्ल
- C.अमोनियम क्लोराइड की लेई
- D.पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड विलयन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, तनु सल्फ्यूरिक अम्ल है। लेड-अम्ल सेल में स्पंजी सीसे की ऋण प्लेट और लेड डाइऑक्साइड की धन प्लेट तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में डूबी रहती हैं, और निरावेशन के साथ दोनों प्लेटें लेड सल्फेट में बदलती जाती हैं तथा अम्ल दुर्बल होता जाता है, इसी कारण उसकी आवेश स्थिति अम्ल के आपेक्षिक घनत्व से जानी जाती है। B गलत है क्योंकि सांद्र नाइट्रिक अम्ल प्रबल ऑक्सीकारक है, जो अपघट्य का कार्य करने के स्थान पर सीसे की प्लेटों और पात्र को ही खा जाएगा। C गलत है क्योंकि अमोनियम क्लोराइड की नम लेई लेक्लांशे शुष्क सेल की है, जो प्राथमिक सेल है और पुनः आवेशित नहीं हो सकता। D गलत है क्योंकि पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड निकेल-कैडमियम तथा निकेल-लोहा सेलों का क्षारीय अपघट्य है, जो द्वितीयक सेलों का भिन्न परिवार है। प्रत्येक लेड-अम्ल सेल लगभग दो वोल्ट देता है, अतः श्रेणीक्रम में छह सेल बारह वोल्ट की बैटरी बनाते हैं।
हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रम में ऐलुमिनियम किसमें घुले ऐलुमिना के विद्युत अपघटन से प्राप्त होता है?
- A.गलित बॉक्साइट
- B.गलित क्रायोलाइट
- C.गलित सोडियम क्लोराइड
- D.गलित चूना-पत्थर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, गलित क्रायोलाइट है। शुद्ध ऐलुमिना अत्यधिक ऊँचे ताप पर पिघलता है, अतः उसे गलित क्रायोलाइट अर्थात सोडियम ऐलुमिनियम फ्लुओराइड में घोला जाता है, सामान्यतः कुछ फ्लुओरस्पार मिलाकर; इससे कार्य करने का ताप बहुत घट जाता है और पिघला मिश्रण अच्छा चालक बन जाता है। ऐलुमिनियम सेल के तल पर कार्बन से आस्तरित कैथोड पर एकत्र होता है और कार्बन एनोडों पर ऑक्सीजन मुक्त होती है, जो उन्हें धीरे-धीरे जला देती है और उन्हें बदलना पड़ता है। A गलत है क्योंकि बॉक्साइट वह अयस्क है जिससे पहले बायर प्रक्रम द्वारा ऐलुमिना शुद्ध किया जाता है; अयस्क का स्वयं विद्युत अपघटन नहीं होता। C गलत है क्योंकि गलित सोडियम क्लोराइड का अपघटन डाउन प्रक्रम में सोडियम धातु और क्लोरीन के लिए किया जाता है। D गलत है क्योंकि चूना-पत्थर लोहा बनाने की वात्या भट्टी का गालक है और इस सेल में उसकी कोई भूमिका नहीं।
जस्तीकरण लोहे या स्टील पर किस धातु की परत चढ़ाने की प्रक्रिया है?
- A.टिन
- B.क्रोमियम
- C.जिंक
- D.निकेल
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, जिंक है। जस्तीकरण लोहे या स्टील पर जिंक की परत चढ़ाना है, जो सामान्यतः वस्तु को गलित जिंक में डुबोकर किया जाता है, और वह लोहे की दोहरी रक्षा करता है: परत वायु और नमी रोकती है, तथा जिंक अधिक क्रियाशील धातु होने के कारण परत खुरचने पर भी लोहे के स्थान पर स्वयं संक्षारित होता है, जिसे बलिदान रक्षा कहते हैं। A गलत है क्योंकि लोहे पर टिन की परत, जैसे खाद्य डिब्बों की चादर पर, टिनिंग कहलाती है; वह केवल तभी तक रक्षा करती है जब तक अखंड रहे, क्योंकि टिन लोहे से कम क्रियाशील है। B गलत है क्योंकि क्रोमियम का लेपन विद्युत अपघटन से होता है और नलों तथा कार के पुर्ज़ों पर मुख्यतः चमकदार और कठोर सतह के लिए किया जाता है। D गलत है क्योंकि निकेल लेपन भी विद्युत लेपन है, जो मशीन के पुर्ज़ों तथा सस्ते आभूषणों पर, प्रायः क्रोमियम के नीचे की परत के रूप में किया जाता है।
हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल में अभिक्रिया का उत्पाद होता है
- A.कार्बन डाइऑक्साइड
- B.जल
- C.हाइड्रोजन परॉक्साइड
- D.अमोनिया
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, जल है। इस सेल में एनोड पर हाइड्रोजन दी जाकर ऑक्सीकृत होती है और कैथोड पर ऑक्सीजन दी जाकर अपचयित होती है, दोनों मिलकर जल बनाते हैं, अतः गैसें मिलती रहने तक सेल विद्युत देता रहता है और कोई प्रदूषक निर्गम नहीं छोड़ता। इसी प्रकार के सेलों ने अपोलो अंतरिक्ष यान में बिजली और पीने का जल दोनों दिए, और अब ये बसों, रेलगाड़ियों तथा आपातकालीन विद्युत इकाइयों में प्रयुक्त होते हैं। A गलत है क्योंकि इस अभिक्रिया में कार्बन का प्रवेश ही नहीं होता; कार्बन डाइऑक्साइड तब बनती जब ईंधन कोई हाइड्रोकार्बन अथवा ऐल्कोहॉल होता। C गलत है क्योंकि हाइड्रोजन परॉक्साइड समग्र सेल अभिक्रिया का उत्पाद नहीं है, यद्यपि दुर्बल उत्प्रेरक पर परॉक्साइड स्पीशीज़ अवांछित मध्यवर्ती के रूप में बन सकती हैं। D गलत है क्योंकि अमोनिया में नाइट्रोजन होती है, जो यहाँ अभिकारक नहीं, यद्यपि अमोनिया का अध्ययन हाइड्रोजन ईंधन के संभावित वाहक के रूप में अलग से होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ऑक्सीकरण किस इलेक्ट्रोड पर होता है?
ऑक्सीकरण सदैव एनोड पर और अपचयन कैथोड पर होता है, विद्युत अपघटनी सेल में भी और गैल्वेनिक सेल में भी। विद्युत अपघटनी सेल में एनोड बैटरी के धनात्मक सिरे से जुड़ा होता है, जबकि गैल्वेनिक सेल में एनोड स्वयं सेल का ऋणात्मक सिरा होता है।
एक फैराडे का मान कितना होता है?
एक फैराडे एक मोल इलेक्ट्रॉनों द्वारा वहन किया गया आवेश है, जो लगभग 96,500 कूलॉम होता है। किसी अपघट्य से एक फैराडे प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रोड पर पदार्थ का एक ग्राम तुल्यांक मुक्त होता है, जो फैराडे के द्वितीय नियम से निकलता है।
लेप की जाने वाली वस्तु को कैथोड क्यों बनाया जाता है?
क्योंकि विलयन में धातु के आयन धनावेशित होते हैं, वे ऋणात्मक इलेक्ट्रोड की ओर जाते हैं और वहाँ अपचयित होकर धातु बन जाते हैं। अतः वस्तु को कैथोड होना ही पड़ता है, जबकि लेप की शुद्ध धातु की पट्टी एनोड बनती है और घुलकर विलयन की सांद्रता बनाए रखती है।
प्राथमिक और द्वितीयक सेल में क्या अंतर है?
सामान्य शुष्क सेल जैसा प्राथमिक सेल पुनः आवेशित नहीं हो सकता, क्योंकि उसकी रासायनिक अभिक्रिया उत्क्रमणीय नहीं होती। लेड-अम्ल या लिथियम-आयन जैसा द्वितीयक अथवा संचायक सेल विपरीत दिशा में धारा प्रवाहित करके पुनः आवेशित किया जा सकता है, जिससे अभिक्रिया उलट जाती है।
जस्ती लोहे पर परत खुरचने के बाद भी जंग क्यों नहीं लगती?
जिंक लोहे से अधिक क्रियाशील है, अतः जहाँ परत टूटती है वहाँ जिंक लोहे के स्थान पर स्वयं संक्षारित होता है और लोहा सुरक्षित रहता है। यही बलिदान रक्षा है, और इसी सिद्धांत से जहाज़ों के पेंदे तथा भूमिगत पाइपलाइनों पर जिंक या मैग्नीशियम के टुकड़े लगाए जाते हैं।
ईंधन सेल बैटरी से किस प्रकार भिन्न है?
बैटरी नियत मात्रा की रासायनिक ऊर्जा संचित रखती है और उसके समाप्त होने पर रुक जाती है, जबकि ईंधन सेल बाहर से ईंधन और ऑक्सीकारक मिलते रहने तक विद्युत देता रहता है। हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन सेल का एकमात्र उत्पाद जल है, इसलिए उसे स्वच्छ माना जाता है।





