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ऊष्मा और ऊष्मागतिकी: नियम, गुप्त ऊष्मा और ऊष्मा संचरण

परीक्षा के लिए ऊष्मा और ऊष्मागतिकी के नोट्स: ताप पैमाने, विशिष्ट और गुप्त ऊष्मा, जल का असामान्य प्रसार, ऊष्मा संचरण की विधियाँ, चारों नियम और दैनिक जीवन के उदाहरण।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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ऊष्मा और ऊष्मागतिकी: नियम, गुप्त ऊष्मा और ऊष्मा संचरण — GK24 title card
ऊष्मा और ऊष्मागतिकी: नियम, गुप्त ऊष्मा और ऊष्मा संचरण — GK24 title card

ऊष्मा गतिशील ऊर्जा है। यह अधिक ताप वाली वस्तु से कम ताप वाली वस्तु की ओर बहती है और जब दोनों का ताप समान हो जाता है तब बहना बंद कर देती है। इसके विपरीत ताप यह बताता है कि कोई वस्तु कितनी गर्म है और ऊष्मा किस दिशा में बहेगी। ऊष्मा का एसआई मात्रक जूल है; पुराना मात्रक कैलोरी वह ऊष्मा है जो एक ग्राम जल का ताप एक डिग्री सेल्सियस बढ़ाती है और लगभग 4.2 जूल के बराबर होती है। इस अध्याय से परीक्षा में आने वाले लगभग सभी प्रश्न कुछ परिभाषाओं, दो तीन नियतांकों और ऊष्मागतिकी के चार नियमों से बनते हैं।

ताप के पैमाने

तीन पैमाने प्रयोग होते हैं। सेल्सियस पैमाने पर हिमांक शून्य और भाप बिंदु सौ डिग्री है; फारेनहाइट पैमाने पर यही दो बिंदु बत्तीस और दो सौ बारह डिग्री हैं; और एसआई मात्रक केल्विन परम शून्य से आरंभ होता है, जो माइनस 273.15 डिग्री सेल्सियस है। रूपांतरण इस प्रकार लिखा जाता है कि सेल्सियस पाठ्यांक को पाँच से भाग देने पर जो आता है, वही फारेनहाइट पाठ्यांक में से बत्तीस घटाकर नौ से भाग देने पर आता है। माइनस चालीस डिग्री पर दोनों पैमाने एक ही संख्या दिखाते हैं, जो परीक्षा का प्रिय प्रश्न है। डॉक्टरी तापमापी सामान्य शरीर ताप के आसपास थोड़े परास में अंकित होता है और उसकी नली में एक मोड़ होता है, जिससे पारे का धागा पढ़ने से पहले लौट न जाए। तापमापी में पारा इसलिए लिया जाता है कि वह एकसमान रूप से फैलता है, ऊष्मा का अच्छा चालक है, अपारदर्शी है और काँच को भिगोता नहीं।

विशिष्ट ऊष्मा, गुप्त ऊष्मा और प्रसार

किसी पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता वह ऊष्मा है जो उसके एक किलोग्राम का ताप एक केल्विन बढ़ा दे। जल की विशिष्ट ऊष्मा असाधारण रूप से अधिक है, लगभग एक कैलोरी प्रति ग्राम प्रति डिग्री सेल्सियस, इसीलिए समुद्र स्थल की तुलना में धीरे गर्म और धीरे ठंडा होता है; यही अंतर स्थल और समुद्री समीर चलाता है और तटों की जलवायु को सम बनाए रखता है। गुप्त ऊष्मा वह ऊष्मा है जो अवस्था परिवर्तन के समय बिना ताप बदले ली या दी जाती है: बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा लगभग अस्सी कैलोरी प्रति ग्राम है और जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा लगभग पाँच सौ चालीस कैलोरी प्रति ग्राम। दूसरा आँकड़ा बताता है कि भाप से जला हुआ भाग उसी ताप के खौलते जल से जले भाग की तुलना में अधिक क्यों जलता है, क्योंकि भाप त्वचा पर अपनी गुप्त ऊष्मा भी छोड़ देती है।

जल का प्रसार भी असामान्य है। शून्य से चार डिग्री सेल्सियस के बीच गर्म करने पर यह फैलने के बजाय सिकुड़ता है, इसलिए इसका अधिकतम घनत्व चार डिग्री सेल्सियस पर होता है। शीत ऋतु में तालाब का सबसे ठंडा जल ऊपर ही रहकर जमता है, जबकि चार डिग्री वाला जल तल में बैठ जाता है और मछलियाँ बर्फ के नीचे जीवित रहती हैं। ठोस के लिए रैखिक, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार गुणांक एक, दो और तीन के अनुपात में होते हैं, और धातुओं का यही प्रसार रेल पटरियों के बीच छोड़े गए अंतराल, पुलों के नीचे लगे रोलर और तापस्थापी में द्विधात्विक पट्टी के काम की व्याख्या करता है।

ऊष्मा संचरण की विधियाँ

विधिकैसे काम करती हैउदाहरण
चालनकण अपनी जगह रहते हुए ऊर्जा आगे बढ़ाते हैंगर्म चाय में रखा धातु का चम्मच
संवहनतरल का गर्म भाग स्वयं चलकर ऊर्जा ले जाता हैखौलता जल, स्थल और समुद्री समीर
विकिरणविद्युत चुंबकीय तरंगें, जिन्हें माध्यम की आवश्यकता नहींसूर्य की ऊष्मा का पृथ्वी तक पहुँचना

थर्मस फ्लास्क तीनों को रोकने के लिए बना होता है: दोहरी दीवारों के बीच का निर्वात चालन और संवहन रोक देता है और चमकीली रजतित सतहें विकिरण को लौटा देती हैं। विकिरण का अच्छा अवशोषक अच्छा उत्सर्जक भी होता है, इसीलिए काली सतह सबसे तेज गर्म और सबसे तेज ठंडी होती है और गर्मियों में हल्के रंग के वस्त्र आरामदेह लगते हैं। किसी वस्तु से विकिरित ऊर्जा ताप के साथ बहुत तेजी से बढ़ती है, केल्विन ताप की चौथी घात के अनुपात में, जिसे स्टीफन का नियम कहते हैं।

ऊष्मागतिकी के नियम

शून्यवाँ नियम कहता है कि यदि दो वस्तुएँ अलग अलग किसी तीसरी वस्तु के साथ तापीय साम्य में हों तो वे आपस में भी साम्य में होंगी; इसी से तापमापी संभव होता है और ताप की अवधारणा को अर्थ मिलता है। पहला नियम कहता है कि किसी निकाय को दी गई ऊष्मा उसकी आंतरिक ऊर्जा बढ़ाने और बाह्य कार्य करने में लगती है, और यही ऊष्मा पर लागू ऊर्जा संरक्षण का नियम है। दूसरा नियम कहता है कि ऊष्मा स्वयं ठंडी वस्तु से गर्म वस्तु की ओर नहीं बह सकती, कोई इंजन ली गई सारी ऊष्मा को कार्य में नहीं बदल सकता, और किसी विलगित निकाय की एंट्रॉपी अर्थात अव्यवस्था घटती नहीं; रेफ्रिजरेटर बाहरी कार्य लगाकर ठंडे कक्ष से ऊष्मा बाहर धकेलता है और इसी नियम का पालन करता है। तीसरा नियम कहता है कि परम शून्य की ओर बढ़ते हुए किसी पूर्ण क्रिस्टल की एंट्रॉपी शून्य की ओर जाती है, और परम शून्य कभी प्राप्त नहीं किया जा सकता।

स्थिर ताप पर होने वाला परिवर्तन समतापी और बिना ऊष्मा के आदान प्रदान वाला परिवर्तन रुद्धोष्म कहलाता है; टायर का अचानक फटना और बादल बनाने वाली वायु का ऊपर उठना रुद्धोष्म प्रक्रम हैं। कार्नो के आदर्श इंजन की दक्षता एक में से सिंक और स्रोत के ताप का अनुपात घटाने पर मिलती है, और दोनों ताप केल्विन में लिए जाते हैं, इसलिए जब तक सिंक परम शून्य पर न हो कोई इंजन पूर्ण दक्ष नहीं हो सकता।

परीक्षा की दृष्टि से

इस अध्याय से चार प्रकार के प्रश्न आते हैं: परिभाषा, जैसे ताप की अवधारणा किस नियम से मिलती है; नियतांक, जैसे बर्फ की गुप्त ऊष्मा या जल के अधिकतम घनत्व का ताप; दैनिक जीवन का कारण, जैसे प्रेशर कुकर में भोजन जल्दी क्यों पकता है या भाप अधिक क्यों जलाती है; और छोटी गणना, प्रायः पैमाने का रूपांतरण या कार्नो इंजन की दक्षता। सबसे आम भ्रम विशिष्ट ऊष्मा और गुप्त ऊष्मा में, 80 और 540 के मानों में, सूर्य की ऊष्मा को संवहन कह देने में तथा दक्षता के सूत्र में ताप को केल्विन में न बदलने में होता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

ऊष्मा का एसआई मात्रकजूल; एक कैलोरी लगभग 4.2 जूल
परम शून्यमाइनस 273.15 डिग्री सेल्सियस अर्थात 0 केल्विन
दोनों पैमानों पर समान पाठ्यांकमाइनस 40 डिग्री पर सेल्सियस और फारेनहाइट समान
जल का अधिकतम घनत्व4 डिग्री सेल्सियस पर, जल का असामान्य प्रसार
बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मालगभग 80 कैलोरी प्रति ग्राम
जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मालगभग 540 कैलोरी प्रति ग्राम
जल की विशिष्ट ऊष्मालगभग 1 कैलोरी प्रति ग्राम प्रति डिग्री सेल्सियस, सामान्य द्रवों में सर्वाधिक
प्रसार गुणांकरैखिक, क्षेत्रीय और आयतन का अनुपात 1:2:3
शून्यवाँ नियमताप की अवधारणा देता है और तापमापी को संभव बनाता है
पहला नियमदी गई ऊष्मा बराबर आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि जोड़ किया गया कार्य
दूसरा नियमऊष्मा स्वयं ठंडे से गर्म की ओर नहीं बहती; एंट्रॉपी घटती नहीं
कार्नो दक्षताएक में से सिंक ताप बटा स्रोत ताप, दोनों केल्विन में

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.सामान्य विज्ञानआसान

ऊष्मा का एसआई मात्रक क्या है?

  1. A.कैलोरी
  2. B.जूल
  3. C.केल्विन
  4. D.वाट
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. जूल

व्याख्या

सही उत्तर B, जूल है। ऊष्मा गतिशील ऊर्जा का एक रूप है, इसलिए इसे कार्य और ऊर्जा के समान मात्रक जूल में मापा जाता है, जो एक न्यूटन मीटर के बराबर होता है।

विकल्प A कैलोरी ऊष्मा का पुराना और परिचित मात्रक है, जिसे एक ग्राम जल का ताप एक डिग्री सेल्सियस बढ़ाने वाली ऊष्मा के रूप में परिभाषित किया गया है; यह लगभग 4.2 जूल के बराबर है, पर एसआई मात्रक नहीं है। विकल्प C केल्विन ताप का एसआई मात्रक है, ऊष्मा का नहीं, और ऊष्मा तथा ताप का यही अंतर इस प्रश्न में परखा जाता है। विकल्प D वाट शक्ति का मात्रक है, अर्थात कार्य करने या ऊर्जा देने की दर, एक जूल प्रति सेकंड; इसलिए वाट में दी गई हीटर की क्षमता बताती है कि वह कितनी तेजी से ऊष्मा देता है, कुल कितनी नहीं।

Q2.सामान्य विज्ञानआसान

जल का घनत्व किस ताप पर सर्वाधिक होता है?

  1. A.0 डिग्री सेल्सियस
  2. B.4 डिग्री सेल्सियस
  3. C.100 डिग्री सेल्सियस
  4. D.माइनस 4 डिग्री सेल्सियस
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 4 डिग्री सेल्सियस

व्याख्या

सही उत्तर B, 4 डिग्री सेल्सियस है। शून्य से चार डिग्री के बीच जल असामान्य व्यवहार करता है: इस परास में गर्म करने पर यह सिकुड़ता है और चार डिग्री से ऊपर फिर फैलने लगता है, इसलिए उतना ही द्रव्यमान चार डिग्री पर सबसे कम आयतन घेरता है और उसका घनत्व सबसे अधिक होता है।

विकल्प A हिमांक है, जहाँ जल बर्फ में बदलता है; बर्फ का घनत्व जल से कम होता है, इसीलिए वह तैरती है। विकल्प C सामान्य वायुमंडलीय दाब पर क्वथनांक है, जहाँ द्रव रूप में जल सबसे अधिक फैला होता है। विकल्प D हिमांक से नीचे है, जहाँ सामान्य दाब पर शुद्ध जल ठोस रहता है। यही गुण प्रकृति में महत्वपूर्ण है, क्योंकि शीत ऋतु में चार डिग्री वाला जल तल में बैठ जाता है, ठंडा जल ऊपर जमता है और बर्फ के नीचे मछलियाँ जीवित रहती हैं।

Q3.सामान्य विज्ञानमध्यम

जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा लगभग कितनी होती है?

  1. A.80 कैलोरी प्रति ग्राम
  2. B.540 कैलोरी प्रति ग्राम
  3. C.336 कैलोरी प्रति ग्राम
  4. D.2260 कैलोरी प्रति ग्राम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 540 कैलोरी प्रति ग्राम

व्याख्या

सही उत्तर B, लगभग 540 कैलोरी प्रति ग्राम है। यह वह ऊष्मा है जो सौ डिग्री सेल्सियस पर एक ग्राम जल को उसी ताप की भाप में बदलने के लिए चाहिए, जिसमें ताप बिल्कुल नहीं बढ़ता; भाप के वापस जल में संघनित होने पर यही मात्रा मुक्त होती है।

विकल्प A 80 कैलोरी प्रति ग्राम बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा है, अर्थात शून्य डिग्री पर एक ग्राम बर्फ को गलाने के लिए आवश्यक ऊष्मा, और इन दोनों मानों की अदला बदली इस अध्याय की सबसे आम भूल है। विकल्प C 336 वही गलन की गुप्त ऊष्मा है, पर कैलोरी के बजाय जूल प्रति ग्राम में, और यहाँ गलत मात्रक के साथ रखी गई है। विकल्प D 2260 वाष्पन की गुप्त ऊष्मा जूल प्रति ग्राम में है; राशि सही पर मात्रक गलत है, क्योंकि 2260 जूल लगभग 540 कैलोरी के बराबर होते हैं।

Q4.सामान्य विज्ञानमध्यम

थर्मस फ्लास्क की दो दीवारों के बीच का निर्वात मुख्यतः किन विधियों से ऊष्मा संचरण रोकता है?

  1. A.चालन और संवहन
  2. B.केवल विकिरण
  3. C.केवल चालन
  4. D.न चालन, न संवहन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. चालन और संवहन

व्याख्या

सही उत्तर A, चालन और संवहन है। इन दोनों विधियों के लिए द्रव्य आवश्यक है: चालन में ऊर्जा कण से कण तक जाती है और संवहन में तरल स्वयं चलकर ऊर्जा ले जाता है। निर्वात में कण लगभग नहीं होते, इसलिए इनमें से कोई भी विधि वहाँ काम नहीं कर सकती।

विकल्प B इसलिए गलत है कि विकिरण निर्वात से भी भली भाँति गुजर जाता है, क्योंकि वह विद्युत चुंबकीय तरंग है; फ्लास्क उसे दूसरे उपाय से रोकता है, अर्थात आमने सामने की सतहों की रजतित परत से, जो विकिरण को लौटा देती है। विकल्प C अधूरा है, क्योंकि निर्वात चालन के साथ संवहन भी रोकता है। विकल्प D सत्य के विपरीत है। ढक्कन गर्म वाष्प को निकलने से रोककर इस रचना को पूरा करता है, और परीक्षक यही तीनों भाग वाला उत्तर चाहते हैं।

Q5.सामान्य विज्ञानआसान

ऊष्मागतिकी का पहला नियम मूलतः किसका कथन है?

  1. A.ऊर्जा संरक्षण
  2. B.एंट्रॉपी की वृद्धि
  3. C.तापीय साम्य
  4. D.परम शून्य की अप्राप्यता
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ऊर्जा संरक्षण

व्याख्या

सही उत्तर A, ऊर्जा संरक्षण है। पहला नियम कहता है कि किसी निकाय को दी गई ऊष्मा उसकी आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि और उसके द्वारा किए गए बाह्य कार्य के योग के बराबर होती है। न कुछ नष्ट होता है न बनता है; ऊर्जा केवल रूप बदलती है, और यही ऊष्मा पर लागू संरक्षण का सिद्धांत है।

विकल्प B दूसरे नियम से संबंधित है, जो एंट्रॉपी की अवधारणा देता है और कहता है कि विलगित निकाय में वह कभी घटती नहीं। विकल्प C शून्यवें नियम से संबंधित है, जो कहता है कि किसी तीसरी वस्तु के साथ तापीय साम्य में रहने वाली दो वस्तुएँ आपस में भी साम्य में होती हैं और जिससे ताप मापना संभव होता है। विकल्प D तीसरे नियम से संबंधित है, जो कहता है कि परम शून्य की ओर बढ़ते हुए पूर्ण क्रिस्टल की एंट्रॉपी शून्य की ओर जाती है और परम शून्य प्राप्त नहीं किया जा सकता।

Q6.सामान्य विज्ञानमध्यम

ताप की अवधारणा का आधार ऊष्मागतिकी का कौन सा नियम देता है?

  1. A.शून्यवाँ नियम
  2. B.पहला नियम
  3. C.दूसरा नियम
  4. D.तीसरा नियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. शून्यवाँ नियम

व्याख्या

सही उत्तर A, शून्यवाँ नियम है। यह कहता है कि यदि वस्तु क वस्तु ग के साथ तापीय साम्य में है और वस्तु ख भी वस्तु ग के साथ तापीय साम्य में है, तो क और ख आपस में भी तापीय साम्य में होंगी। इसी से तापमापी का प्रयोग संभव होता है, क्योंकि तापमापी उसी तीसरी वस्तु की भूमिका निभाता है और जिन दो वस्तुओं पर वह एक ही पाठ्यांक दे उनका ताप समान होता है।

विकल्प B पहला नियम ऊर्जा के हिसाब किताब से संबंधित है, ताप के अर्थ से नहीं। विकल्प C दूसरा नियम ऊष्मा के बहने की दिशा तय करता है और इंजन की दक्षता पर सीमा लगाता है। विकल्प D तीसरा नियम परम शून्य के निकट के व्यवहार से संबंधित है। शून्यवें नियम को तब पहचाना और नाम दिया गया जब शेष तीन नियमों की संख्या पहले ही तय हो चुकी थी, इसीलिए इसे शून्य कहा गया।

Q7.सामान्य विज्ञानआसान

सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक मुख्यतः किस विधि से पहुँचती है?

  1. A.चालन
  2. B.संवहन
  3. C.विकिरण
  4. D.पहले चालन, फिर संवहन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. विकिरण

व्याख्या

सही उत्तर C, विकिरण है। सूर्य और पृथ्वी के बीच का स्थान लगभग खाली है, और विकिरण ही ऊष्मा संचरण की वह विधि है जिसे किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती: ऊर्जा विद्युत चुंबकीय तरंगों के रूप में प्रकाश की चाल से चलती है और द्रव्य से टकराने पर अवशोषित होती है।

विकल्प A चालन के लिए संपर्क में रहे कणों का होना आवश्यक है, इसलिए वह खाली अंतरिक्ष में काम नहीं कर सकता। विकल्प B संवहन के लिए ऐसा तरल चाहिए जो स्वयं चलकर ऊर्जा ले जा सके, जो सूर्य और पृथ्वी के बीच उपलब्ध नहीं है, यद्यपि वायुमंडल में आने के बाद उसी ऊष्मा को संवहन ही फैलाता है। विकल्प D दोनों कारणों से गलत है। विकिरण का अच्छा अवशोषक अच्छा उत्सर्जक भी होता है, इसीलिए काली सतह धूप में सबसे तेज गर्म होती है।

Q8.सामान्य विज्ञानकठिन

एक कार्नो इंजन 500 केल्विन के स्रोत और 300 केल्विन के सिंक के बीच काम करता है। इसकी दक्षता कितनी है?

  1. A.40 प्रतिशत
  2. B.60 प्रतिशत
  3. C.20 प्रतिशत
  4. D.लगभग 66.7 प्रतिशत
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 40 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर A, 40 प्रतिशत है। आदर्श कार्नो इंजन की दक्षता एक में से सिंक ताप और स्रोत ताप का अनुपात घटाने पर मिलती है, और दोनों ताप केल्विन में लिए जाते हैं। यहाँ यह अनुपात 300 बटा 500 अर्थात 0.6 है, और एक में से 0.6 घटाने पर 0.4 आता है, जो 40 प्रतिशत है।

विकल्प B 60 प्रतिशत स्वयं वही अनुपात है, दक्षता नहीं, अर्थात उस छात्र का उत्तर जो एक में से घटाना भूल जाता है। विकल्प C 20 प्रतिशत दोनों तापों के अंतर को उनके योग से भाग देने पर आता है, जो सूत्र ही नहीं है। विकल्प D लगभग 66.7 प्रतिशत स्रोत को सिंक से भाग देने पर आता है, जो सूत्र का फिर से गलत प्रयोग है। यह भी ध्यान रहे कि ताप केल्विन में ही लेने चाहिए; डिग्री सेल्सियस रखने पर उत्तर सदा गलत आएगा।

Q9.सामान्य विज्ञानमध्यम

प्रेशर कुकर में भोजन जल्दी क्यों पक जाता है?

  1. A.अधिक दाब से जल का क्वथनांक बढ़ जाता है
  2. B.अधिक दाब से जल का क्वथनांक घट जाता है
  3. C.भाप की विशिष्ट ऊष्मा जल से अधिक होती है
  4. D.कुकर खुले बर्तन से बेहतर ऊष्मा चालक होता है
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अधिक दाब से जल का क्वथनांक बढ़ जाता है

व्याख्या

सही उत्तर A है। कुकर बंद रहता है, इसलिए उसमें बनी भाप बाहर नहीं निकल पाती और भीतर का दाब बढ़ जाता है। चूँकि दाब बढ़ने पर द्रव का क्वथनांक बढ़ता है, कुकर में जल सौ डिग्री सेल्सियस से काफी ऊपर उबलता है और उसी ऊँचे ताप पर पकने वाला भोजन जल्दी तैयार हो जाता है।

विकल्प B इसका उल्टा कहता है और वह स्थिति पर्वत पर बनती है, जहाँ दाब कम होने से जल सौ डिग्री से नीचे उबलता है और पकने में अधिक समय लगता है। विकल्प C कारण के रूप में गलत है, और भाप की जलाने की क्षमता विशिष्ट ऊष्मा से नहीं, गुप्त ऊष्मा से आती है। विकल्प D इसलिए गलत है कि बर्तन का पदार्थ केवल यह तय करता है कि ऊष्मा जल तक कितनी जल्दी पहुँचे; वह उस ताप को नहीं बढ़ा सकता जिस पर जल उबलता है, और समय की बचत उसी से होती है।

Q10.सामान्य विज्ञानमध्यम

फूले हुए टायर का अचानक फट जाना किस प्रकार के प्रक्रम का उदाहरण है?

  1. A.समतापी
  2. B.रुद्धोष्म
  3. C.समदाबी
  4. D.समआयतनी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रुद्धोष्म

व्याख्या

सही उत्तर B, रुद्धोष्म है। रुद्धोष्म परिवर्तन वह है जिसमें परिवेश के साथ ऊष्मा का आदान प्रदान नहीं होता। टायर इतनी तेजी से फटता है कि निकलती हुई वायु को ऊष्मा लेने या देने का समय ही नहीं मिलता; वह फैलने में कार्य करती है, उसकी आंतरिक ऊर्जा घटती है और इसलिए वह ठंडी हो जाती है, यही कारण है कि निकलती वायु ठंडी लगती है।

विकल्प A समतापी परिवर्तन स्थिर ताप पर होता है, जिसके लिए प्रक्रम इतना धीमा होना चाहिए कि ऊष्मा आती जाती रहे और ताप स्थिर बना रहे। विकल्प C समदाबी परिवर्तन स्थिर दाब पर होता है, जैसे स्वतंत्र रूप से चलने वाले पिस्टन के नीचे गैस को गर्म करना। विकल्प D समआयतनी परिवर्तन स्थिर आयतन पर होता है, जैसे दृढ़ बंद पात्र में गैस को गर्म करना। बादल बनाने वाली नम वायु का ऊपर उठना भी रुद्धोष्म प्रक्रम है।

Q11.सामान्य विज्ञानकठिन

किसी ठोस के रैखिक, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार गुणांक किस अनुपात में होते हैं?

  1. A.1 : 2 : 3
  2. B.3 : 2 : 1
  3. C.1 : 1 : 1
  4. D.2 : 3 : 4
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 1 : 2 : 3

व्याख्या

सही उत्तर A, एक, दो और तीन है। गर्म करने पर यदि ठोस की प्रत्येक लंबाई किसी छोटे अंश से बढ़ती है, तो क्षेत्रफल, जो दो लंबाइयों का गुणनफल है, लगभग उसी अंश के दुगुने से बढ़ता है, और आयतन, जो तीन लंबाइयों का गुणनफल है, लगभग तिगुने से। इसलिए क्षेत्रीय गुणांक रैखिक का दुगुना और आयतन गुणांक रैखिक का तिगुना होता है।

विकल्प B क्रम उलट देता है, जिसका अर्थ यह होता कि वस्तु का आयतन सबसे कम बढ़े, जो वास्तविकता के विपरीत है। विकल्प C तभी सही होता जब क्षेत्रफल और आयतन एक से अधिक लंबाई पर निर्भर न करते, जो संभव नहीं। विकल्प D किसी नियम पर आधारित नहीं है। यही अनुपात बताता है कि रेल पटरियों के बीच अंतराल क्यों छोड़ा जाता है और अलग अलग रैखिक गुणांक वाली दो धातुओं की द्विधात्विक पट्टी गर्म होने पर क्यों मुड़ जाती है और तापस्थापी में स्विच का काम करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाप से जलने पर खौलते जल से जलने की तुलना में अधिक कष्ट क्यों होता है?

दोनों सौ डिग्री सेल्सियस पर होते हैं, पर भाप अपने साथ वाष्पन की गुप्त ऊष्मा भी लाती है, जो लगभग पाँच सौ चालीस कैलोरी प्रति ग्राम है। त्वचा पर पहुँचकर भाप पहले संघनित होती है और यह पूरी ऊष्मा छोड़ती है, उसके बाद जल के रूप में ठंडी होती है, इसलिए त्वचा को कहीं अधिक ऊर्जा मिलती है।

जल का अधिकतम घनत्व चार डिग्री सेल्सियस पर क्यों होता है?

जल के असामान्य प्रसार के कारण। शून्य से चार डिग्री सेल्सियस के बीच जल गर्म करने पर फैलने के बजाय सिकुड़ता है, इसलिए दी हुई मात्रा चार डिग्री पर सबसे कम आयतन घेरती है। तालाब में चार डिग्री वाला जल तल में बैठ जाता है और उससे ठंडा जल ऊपर आकर जमता है, जिससे बर्फ के नीचे मछलियाँ जीवित रहती हैं।

प्रेशर कुकर में भोजन जल्दी क्यों पकता है?

किसी द्रव का क्वथनांक उस पर पड़ने वाले दाब के बढ़ने से बढ़ जाता है। कुकर भाप को भीतर रोककर दाब बढ़ा देता है, जिससे जल सौ डिग्री से काफी ऊपर उबलता है। भोजन उसी ऊँचे ताप पर पकता है और जल्दी तैयार हो जाता है। ऊँचे पर्वत पर इसका उल्टा होता है: दाब कम होने से जल सौ डिग्री से नीचे उबलता है और पकने में अधिक समय लगता है।

थर्मस फ्लास्क तरल को गर्म या ठंडा कैसे रखता है?

यह ऊष्मा संचरण की तीनों विधियों पर प्रहार करता है। दोहरी काँच की दीवारों के बीच निर्वात में कण नहीं होते, इसलिए चालन और संवहन लगभग रुक जाते हैं। भीतरी रजतित सतहें विकिरण को तरल की ओर लौटा देती हैं, और कुचालक ढक्कन गर्म वाष्प के निकलने तथा ऊपर से ऊष्मा के आने को रोकता है।

ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम क्या कहता है?

एक रूप में यह कहता है कि ऊष्मा स्वयं ठंडी वस्तु से गर्म वस्तु की ओर नहीं बह सकती; दूसरे रूप में कि चक्र में चलने वाला कोई इंजन ली गई सारी ऊष्मा को कार्य में नहीं बदल सकता, इसलिए सौ प्रतिशत दक्षता वाली मशीन असंभव है। इसे इस नियम के रूप में भी कहा जाता है कि विलगित निकाय की एंट्रॉपी कभी घटती नहीं।

तापमापी में पारे का प्रयोग क्यों किया जाता है?

पारा ताप के साथ लगभग एकसमान फैलता है, इसलिए पैमाने के अंक बराबर दूरी पर अंकित हो सकते हैं। यह ऊष्मा का अच्छा चालक है और वस्तु का ताप शीघ्र ग्रहण कर लेता है, अपारदर्शी और चमकीला होने से धागा आसानी से दिखता है, काँच को भिगोता नहीं और लगभग माइनस उनतालीस से लगभग तीन सौ सत्तावन डिग्री सेल्सियस तक द्रव बना रहता है।

स्रोत

  • विज्ञान (कक्षा 7), ऊष्मा अध्याय — एनसीईआरटी
  • भौतिकी भाग 2 (कक्षा 11), द्रव्य के तापीय गुण तथा ऊष्मागतिकी अध्याय — एनसीईआरटी
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