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GK नोट्ससामान्य विज्ञानगुरुत्वाकर्षण और दाब

गुरुत्वाकर्षण और दाब: नियम, सूत्र और तथ्य

गुरुत्वाकर्षण और दाब के परीक्षोपयोगी नोट्स: न्यूटन का नियम, g का मान, पलायन वेग, प्रणोद और दाब, पास्कल का नियम, आर्किमिडीज सिद्धांत तथा वायुमंडलीय दाब।

लेखक · प्रकाशित · 6 मिनट

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गुरुत्वाकर्षण और दाब: नियम, सूत्र और तथ्य — GK24 title card
गुरुत्वाकर्षण और दाब: नियम, सूत्र और तथ्य — GK24 title card

गुरुत्वाकर्षण बताता है कि सेब क्यों गिरता है और चंद्रमा क्यों नहीं गिरता। दाब बताता है कि तेज चाकू क्यों काटता है, हाइड्रोलिक जैक कार क्यों उठा लेता है और इस्पात का जहाज क्यों तैरता है। दोनों अध्यायों से एक ही प्रकार के प्रश्न आते हैं: कोई सूत्र, कोई मात्रक, कोई मान या कोई उपकरण जो किसी नामित सिद्धांत पर चलता है। यह नोट दोनों को साथ रखकर हर तथ्य सीधे शब्दों में बताता है।

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम

ब्रह्मांड का प्रत्येक पिंड प्रत्येक दूसरे पिंड को ऐसे बल से आकर्षित करता है जो उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती और उनके केंद्रों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। सूत्र रूप में यह बल G गुणा m एक गुणा m दो बटा r का वर्ग है। नियतांक G सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक है, जो ब्रह्मांड में सर्वत्र समान है और जिसका मान लगभग 6.674 गुणा दस की घात ऋण ग्यारह न्यूटन मीटर वर्ग प्रति किलोग्राम वर्ग है। हेनरी कैवेंडिश ने 1798 में मरोड़ तुला से इसे मापा, और उस प्रयोग को प्रायः पृथ्वी को तौलना कहा जाता है। चूँकि बल दूरी के वर्ग के अनुपात में घटता है, दूरी दोगुनी करने पर बल घटकर एक चौथाई रह जाता है। गुरुत्वाकर्षण चार मूल बलों में सबसे दुर्बल है, फिर भी ग्रहों की गति इसी से चलती है, क्योंकि यह सदा आकर्षक होता है और कभी निरस्त नहीं होता।

g का मान और उसका परिवर्तन

पृथ्वी के आकर्षण से मुक्त रूप से गिरते पिंड में जो त्वरण उत्पन्न होता है वही g है, जो GM बटा R का वर्ग के बराबर और सतह पर लगभग 9.8 मीटर प्रति सेकंड वर्ग होता है। यह गिरते पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता, इसीलिए निर्वात में पत्थर और पंख साथ गिरते हैं। इसका मान सब जगह एक नहीं होता।

परिवर्तनg पर प्रभावकारण
विषुवत वृत्त से ध्रुवों की ओरg बढ़ता है, ध्रुवों पर सर्वाधिकपृथ्वी ध्रुवों पर चपटी है, इसलिए वहाँ R कम है, और घूर्णन विषुवत वृत्त पर g घटा देता है
सतह से ऊपर जाने परg घटता हैकेंद्र से दूरी बढ़ जाती है
खान में नीचे जाने परg घटता हैकेवल नीचे का द्रव्यमान आकर्षित करता है; पृथ्वी के केंद्र पर g शून्य है
चंद्रमा परपृथ्वी के मान का लगभग छठा भागचंद्रमा का द्रव्यमान और त्रिज्या दोनों कम हैं

द्रव्यमान पिंड में पदार्थ की मात्रा है, किलोग्राम में मापा जाता है और स्थान बदलने से कभी नहीं बदलता। भार वह बल है जिससे पृथ्वी पिंड को खींचती है, जो द्रव्यमान गुणा g के बराबर है, न्यूटन में मापा जाता है और स्थान के साथ बदलता है। साठ किलोग्राम के पिंड का द्रव्यमान चंद्रमा पर भी उतना ही रहेगा पर भार वहाँ छठा भाग रह जाएगा। पृथ्वी के केंद्र पर पिंड का भार शून्य होता है, यद्यपि उसका द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।

पलायन वेग और उपग्रह

पलायन वेग वह न्यूनतम चाल है जिससे फेंकने पर पिंड लौटकर नहीं आता, और पृथ्वी के लिए यह लगभग 11.2 किलोमीटर प्रति सेकंड है। यह पिंड के द्रव्यमान या प्रक्षेपण की दिशा पर नहीं, केवल ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर निर्भर करता है। चंद्रमा का पलायन वेग केवल लगभग 2.4 किलोमीटर प्रति सेकंड है, जो गैस अणुओं को रोक रखने के लिए बहुत कम है, इसीलिए चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है। परिक्रमा करते यान में अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता इसलिए अनुभव होती है कि गुरुत्व नहीं है, बल्कि इसलिए कि यान और उसमें रखी हर वस्तु पृथ्वी के चारों ओर निरंतर मुक्त पतन में हैं, इसलिए कोई वस्तु किसी दूसरी पर दबाव नहीं डालती।

प्रणोद, दाब और द्रव

किसी सतह पर लंबवत लगने वाला बल प्रणोद कहलाता है और प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रणोद दाब कहलाता है। दाब बल बटा क्षेत्रफल होता है और इसका एसआई मात्रक पास्कल है, जो एक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर के बराबर है। चूँकि क्षेत्रफल हर में है, उतना ही बल छोटे क्षेत्रफल पर बड़ा दाब देता है: इसी कारण चाकू की धार तेज की जाती है, कील नुकीली बनाई जाती है और सुई पतली होती है, जबकि ऊँट का चौड़ा पैर, चौड़ा टायर और बाँध का चौड़ा आधार भार फैलाकर दाब घटाते हैं।

किसी द्रव में h गहराई पर दाब h गुणा घनत्व गुणा g होता है। इसलिए यह गहराई और द्रव के घनत्व के साथ बढ़ता है, एक ही गहराई के सभी बिंदुओं पर समान होता है, और बर्तन के आकार या उसके तल के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता। द्रव दीवारों पर पार्श्व दाब भी डालता है, इसीलिए बाँध नीचे की ओर अधिक मोटा बनाया जाता है।

पास्कल का नियम और आर्किमिडीज सिद्धांत

पास्कल का नियम कहता है कि बंद द्रव पर लगाया गया दाब बिना घटे सभी दिशाओं में द्रव के हर भाग तथा पात्र की दीवारों तक पहुँचता है। इसलिए पतले पिस्टन पर लगाया गया छोटा बल चौड़े पिस्टन पर बड़ा बल उत्पन्न कर देता है, और यही हाइड्रोलिक लिफ्ट, हाइड्रोलिक प्रेस तथा हाइड्रोलिक ब्रेक का कार्यकारी सिद्धांत है।

आर्किमिडीज सिद्धांत कहता है कि किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डूबे पिंड पर ऊपर की ओर उत्प्लावन बल लगता है, जो उसके द्वारा विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है। जल में पिंड के भार में जो आभासी कमी दिखती है वह विस्थापित जल के भार के बराबर होती है। पिंड तब तैरता है जब विस्थापित द्रव का भार उसके अपने भार के बराबर हो जाए, यही प्लवन का नियम है; इसी से इस्पात का जहाज तैरता है और इस्पात की कील डूब जाती है, क्योंकि खोखला ढाँचा बहुत अधिक जल विस्थापित करता है। आपेक्षिक घनत्व किसी पदार्थ के घनत्व और जल के घनत्व का अनुपात है, और प्लवन पर आधारित उपकरणों में द्रवों का आपेक्षिक घनत्व मापने वाला हाइड्रोमीटर तथा दूध की शुद्धता जाँचने वाला लैक्टोमीटर आते हैं।

वायुमंडलीय दाब

हमारे ऊपर की वायु स्तंभ का भार वायुमंडलीय दाब डालता है, जो समुद्र तल पर लगभग एक लाख एक हजार पास्कल होता है और 76 सेंटीमीटर ऊँचे पारे के स्तंभ को सँभालता है। टॉरिसेली ने पहले बैरोमीटर से इसे दिखाया, और उसमें पारा इसलिए प्रयुक्त होता है कि वह बहुत घना है, काँच को भिगोता नहीं और उसका वाष्प दाब कम है; जल का बैरोमीटर बनाने के लिए दस मीटर से लंबी नली चाहिए होगी। वायुमंडलीय दाब ऊँचाई के साथ घटता है, इसीलिए वायुयान में फाउंटेन पेन रिस सकता है, अधिक ऊँचाई पर नकसीर फूट सकती है, और पहाड़ों पर पानी सौ डिग्री सेल्सियस से नीचे ही उबल जाता है जिससे भोजन पकने में अधिक समय लगता है। प्रेशर कुकर इसका उल्टा करता है, द्रव के ऊपर दाब बढ़ाकर क्वथनांक ऊँचा कर देता है जिससे भोजन जल्दी पकता है। निर्द्रव बैरोमीटर बिना द्रव का बैरोमीटर है, और ऊँचाई पढ़ने के लिए अंशांकित करने पर वही वायुयानों में प्रयुक्त अल्टीमीटर बन जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से

लगभग हर प्रश्न एक पंक्ति का तथ्य या सिद्धांत से जुड़ा उपकरण होता है। नियमित प्रश्न हैं दाब का एसआई मात्रक, g का मान और कहाँ अधिकतम, पृथ्वी का पलायन वेग, चंद्रमा पर भार, पास्कल के नियम से हाइड्रोलिक ब्रेक, आर्किमिडीज सिद्धांत से लैक्टोमीटर और जहाज का तैरना, तथा वायुमंडलीय दाब से बैरोमीटर। जाल ये हैं: भार को अदिश मानकर किलोग्राम में बताना, यान में गुरुत्व का अभाव कहना जबकि वास्तव में यान मुक्त पतन में है, द्रव दाब को तल के क्षेत्रफल पर निर्भर मानना, और G तथा g को मिला देना। यह भी याद रखें कि पृथ्वी के केंद्र पर g शून्य होता है पर द्रव्यमान वही रहता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांकलगभग 6.674 गुणा दस की घात ऋण ग्यारह न्यूटन मीटर वर्ग प्रति किलोग्राम वर्ग
मापने वाले वैज्ञानिकहेनरी कैवेंडिश, 1798, मरोड़ तुला द्वारा
सतह पर g का मानलगभग 9.8 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
g कहाँ अधिकतम और कहाँ न्यूनतमध्रुवों पर अधिकतम, विषुवत वृत्त पर न्यूनतम; पृथ्वी के केंद्र पर शून्य
चंद्रमा पर भारपृथ्वी पर के भार का लगभग छठा भाग
पृथ्वी का पलायन वेगलगभग 11.2 किलोमीटर प्रति सेकंड
दाब का एसआई मात्रकपास्कल, अर्थात एक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर
द्रव में दाबगहराई गुणा घनत्व गुणा g; बर्तन के आकार से स्वतंत्र
पास्कल नियम के उपकरणहाइड्रोलिक लिफ्ट, हाइड्रोलिक प्रेस और हाइड्रोलिक ब्रेक
आर्किमिडीज सिद्धांत के उपकरणजहाज, पनडुब्बी, हाइड्रोमीटर और लैक्टोमीटर
समुद्र तल पर वायुमंडलीय दाब76 सेंटीमीटर पारे के स्तंभ को सँभालता है
बैरोमीटरवायुमंडलीय दाब मापता है; ऊँचाई के लिए अंशांकित निर्द्रव प्रकार अल्टीमीटर कहलाता है

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.सामान्य विज्ञानआसान

दाब का एसआई मात्रक क्या है?

  1. A.न्यूटन
  2. B.पास्कल
  3. C.जूल
  4. D.वाट
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पास्कल

व्याख्या

सही उत्तर B, पास्कल है। दाब प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रणोद है, इसलिए उसका मात्रक एक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर है और इसी मात्रक का नाम ब्लेज पास्कल के सम्मान में पास्कल रखा गया है। समुद्र तल पर वायुमंडलीय दाब लगभग एक लाख एक हजार पास्कल होता है, और व्यावसायिक मात्रक बार एक लाख पास्कल के बराबर है।

विकल्प A, न्यूटन, स्वयं बल का एसआई मात्रक है, क्षेत्रफल पर फैले बल का नहीं, और वह दाब की परिभाषा में अंश है। विकल्प C, जूल, कार्य और ऊर्जा का मात्रक है और न्यूटन मीटर के बराबर है, अर्थात बल गुणा दूरी, न कि बल बटा क्षेत्रफल। विकल्प D, वाट, शक्ति का मात्रक है और एक जूल प्रति सेकंड के बराबर है। चारों को एक साथ याद करें, क्योंकि प्रश्नपत्र बार-बार पूछते हैं कि कौन सा मात्रक किस राशि का है और पास्कल, न्यूटन, जूल तथा वाट एक ही विकल्प सूची में आते हैं।

Q2.सामान्य विज्ञानमध्यम

पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण का मान निम्नलिखित में से कहाँ सर्वाधिक होता है?

  1. A.विषुवत वृत्त पर
  2. B.ध्रुवों पर
  3. C.पृथ्वी के केंद्र पर
  4. D.माउंट एवरेस्ट की चोटी पर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ध्रुवों पर

व्याख्या

सही उत्तर B, ध्रुवों पर है। पृथ्वी ध्रुवों पर चपटी है, इसलिए वहाँ केंद्र से दूरी सबसे कम है, और चूँकि g उस दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है, g ध्रुवों पर सर्वाधिक होता है। पृथ्वी का घूर्णन भी g के प्रभावी मान को घटाता है, और यह कमी विषुवत वृत्त पर सर्वाधिक तथा ध्रुवों पर शून्य होती है, जिससे अंतर और बढ़ जाता है।

विकल्प A, विषुवत वृत्त, वह स्थान है जहाँ सतह पर g का मान सबसे कम होता है, ठीक इन्हीं विपरीत कारणों से। विकल्प C, पृथ्वी का केंद्र, वह स्थान है जहाँ g शून्य हो जाता है, क्योंकि वहाँ पृथ्वी का द्रव्यमान पिंड को चारों ओर से घेरता है और उसके खिंचाव आपस में निरस्त हो जाते हैं; वहाँ पिंड का भार शून्य होता है यद्यपि द्रव्यमान वही रहता है। विकल्प D, माउंट एवरेस्ट की चोटी, समुद्र तल से बहुत ऊपर है और ऊँचाई के साथ g घटता है। क्रम याद रखें: ध्रुवों पर सर्वाधिक, विषुवत वृत्त पर कम, ऊँचाई पर और कम, केंद्र पर शून्य।

Q3.सामान्य विज्ञानआसान

पृथ्वी की सतह से पलायन वेग लगभग कितना होता है?

  1. A.7.9 किलोमीटर प्रति सेकंड
  2. B.9.8 किलोमीटर प्रति सेकंड
  3. C.11.2 किलोमीटर प्रति सेकंड
  4. D.24 किलोमीटर प्रति सेकंड
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 11.2 किलोमीटर प्रति सेकंड

व्याख्या

सही उत्तर C, 11.2 किलोमीटर प्रति सेकंड है। पलायन वेग वह न्यूनतम चाल है जो किसी पिंड को देने पर वह ग्रह के गुरुत्वीय खिंचाव से निकल जाता है और लौटकर नहीं आता। यह केवल ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर निर्भर करता है, फेंके गए पिंड के द्रव्यमान या प्रक्षेपण की दिशा पर नहीं, और पृथ्वी के लिए इसका मान लगभग 11.2 किलोमीटर प्रति सेकंड निकलता है।

विकल्प A, लगभग 7.9 किलोमीटर प्रति सेकंड, पृथ्वी की सतह के निकट परिक्रमा करने वाले उपग्रह का कक्षीय वेग है, जो पलायन वेग से दो के वर्गमूल के अनुपात में कम होता है। विकल्प B, 9.8, गुरुत्वीय त्वरण का मीटर प्रति सेकंड वर्ग में संख्यात्मक मान है और पलायन वेग से उसका कोई संबंध नहीं, वह केवल परिचित संख्या होने से रखा गया है। विकल्प D पृथ्वी के लिए बहुत अधिक है। चंद्रमा का पलायन वेग केवल लगभग 2.4 किलोमीटर प्रति सेकंड है, इसीलिए वह वायुमंडल नहीं रोक पाता।

Q4.सामान्य विज्ञानआसान

वाहनों में प्रयुक्त हाइड्रोलिक ब्रेक किस सिद्धांत पर कार्य करते हैं?

  1. A.आर्किमिडीज सिद्धांत
  2. B.पास्कल का नियम
  3. C.बर्नूली सिद्धांत
  4. D.न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पास्कल का नियम

व्याख्या

सही उत्तर B, पास्कल का नियम है। पास्कल का नियम कहता है कि बंद द्रव पर लगाया गया दाब बिना घटे हर दिशा में द्रव के सभी भागों तथा पात्र की दीवारों तक पहुँचता है। हाइड्रोलिक ब्रेक में पतले मुख्य पिस्टन पर लगा छोटा बल ऐसा दाब बनाता है जो पहियों के चौड़े पिस्टनों तक पहुँचता है, जहाँ वही दाब बड़े क्षेत्रफल पर कहीं बड़ा बल देता है और सभी पहिए एक ही क्षण में समान रूप से रुकते हैं।

विकल्प A, आर्किमिडीज सिद्धांत, द्रव में डूबे पिंड पर लगने वाले ऊपर की ओर उत्प्लावन बल से संबंधित है और जहाज, पनडुब्बी तथा लैक्टोमीटर की व्याख्या करता है। विकल्प C, बर्नूली सिद्धांत, बहते द्रव की चाल और दाब का संबंध बताता है तथा वायुयान के पंख की उत्थापक शक्ति और एटमाइजर की क्रिया समझाता है। विकल्प D, न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम, द्रव्यमानों के बीच आकर्षण से संबंधित है। हाइड्रोलिक लिफ्ट और हाइड्रोलिक प्रेस पास्कल नियम के अन्य दो मानक अनुप्रयोग हैं।

Q5.सामान्य विज्ञानआसान

किसी द्रव में डूबे पिंड पर ऊपर की ओर लगने वाला बल उसके द्वारा विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है। यह कथन किस नाम से जाना जाता है?

  1. A.पास्कल का नियम
  2. B.आर्किमिडीज सिद्धांत
  3. C.हुक का नियम
  4. D.बॉयल का नियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आर्किमिडीज सिद्धांत

व्याख्या

सही उत्तर B, आर्किमिडीज सिद्धांत है। इसके अनुसार किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डूबे पिंड पर ऊपर की ओर उत्प्लावन बल लगता है जो विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है, इसलिए पिंड के भार में दिखने वाली आभासी कमी विस्थापित द्रव के भार के बराबर होती है। पिंड तब तैरता है जब विस्थापित द्रव का भार उसके अपने भार के बराबर हो, यही प्लवन का नियम है, और इसी से जहाज, पनडुब्बी, हाइड्रोमीटर तथा लैक्टोमीटर की व्याख्या होती है।

विकल्प A, पास्कल का नियम, बंद द्रव में दाब के संचरण से संबंधित है और हाइड्रोलिक मशीनों की व्याख्या करता है। विकल्प C, हुक का नियम, प्रत्यास्थता से संबंधित है और कहता है कि प्रत्यास्थ सीमा के भीतर प्रतिबल विकृति के अनुक्रमानुपाती होता है। विकल्प D, बॉयल का नियम, गैस नियम है, जिसके अनुसार स्थिर ताप पर निश्चित द्रव्यमान की गैस का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है। तरलों के दोनों नियम, पास्कल और आर्किमिडीज, वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में सबसे अधिक आपस में बदले जाते हैं।

Q6.सामान्य विज्ञानआसान

चंद्रमा की सतह पर किसी पिंड का भार पृथ्वी की सतह पर उसके भार का लगभग कितना होता है?

  1. A.आधा
  2. B.एक चौथाई
  3. C.छठा भाग
  4. D.उतना ही
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. छठा भाग

व्याख्या

सही उत्तर C, छठा भाग है। भार द्रव्यमान गुणा गुरुत्वीय त्वरण के बराबर होता है, और चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के मान का लगभग छठा भाग है, क्योंकि चंद्रमा का द्रव्यमान बहुत कम और त्रिज्या भी छोटी है। इसलिए साठ किलोग्राम के पिंड का द्रव्यमान चंद्रमा पर भी साठ किलोग्राम ही रहेगा, पर भार पृथ्वी के भार का लगभग छठा भाग रह जाएगा, इसीलिए अंतरिक्ष यात्री वहाँ लंबी उछाल भरकर चल पाते हैं।

विकल्प A और B, आधा तथा एक चौथाई, ऐसे गढ़े हुए अंश हैं जिनका चंद्रमा के द्रव्यमान और त्रिज्या से कोई संबंध नहीं। विकल्प D, उतना ही, पिंड के द्रव्यमान के लिए सही होता पर भार के लिए कभी नहीं, और यही वह भ्रम है जिसे यह प्रश्न पकड़ना चाहता है। एक पंक्ति का नियम याद रखें: द्रव्यमान स्थान से नहीं बदलता, भार बदलता है, और चंद्रमा पर यह परिवर्तन लगभग छठे भाग का होता है।

Q7.सामान्य विज्ञानआसान

बैरोमीटर का प्रयोग निम्नलिखित में से किसे मापने के लिए किया जाता है?

  1. A.वायुमंडलीय दाब
  2. B.वायु की आर्द्रता
  3. C.पवन की गति
  4. D.महासागर की गहराई
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. वायुमंडलीय दाब

व्याख्या

सही उत्तर A, वायुमंडलीय दाब है। पारद बैरोमीटर वायुमंडल के दाब को पारे के स्तंभ से संतुलित करता है, जो समुद्र तल पर लगभग 76 सेंटीमीटर ऊँचा रहता है। पारा इसलिए चुना जाता है कि वह बहुत घना है, काँच को भिगोता नहीं और उसका वाष्प दाब कम है; जल के बैरोमीटर के लिए दस मीटर से लंबी नली चाहिए होगी। बैरोमीटर के पाठ में अचानक गिरावट तूफान की चेतावनी देती है।

विकल्प B, आर्द्रता, आर्द्रतामापी से मापी जाती है, जिसमें शुष्क और आर्द्र बल्ब वाला प्रकार सामान्य है। विकल्प C, पवन की गति, एनीमोमीटर से मापी जाती है, जिसमें प्रायः घूमते प्याले लगे होते हैं। विकल्प D, महासागर की गहराई, प्रतिध्वनि गहराईमापी अर्थात फैदोमीटर से ज्ञात की जाती है, जो समुद्र तल से परावर्तित ध्वनि तरंग का समय नापता है। यह भी ध्यान रखें कि बिना द्रव वाला निर्द्रव बैरोमीटर ऊँचाई के पैमाने पर अंशांकित करने पर अल्टीमीटर बन जाता है।

Q8.सामान्य विज्ञानमध्यम

सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक G को प्रयोग द्वारा सर्वप्रथम किसने मापा था?

  1. A.आइजक न्यूटन
  2. B.हेनरी कैवेंडिश
  3. C.गैलीलियो गैलिली
  4. D.योहानेस केपलर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. हेनरी कैवेंडिश

व्याख्या

सही उत्तर B, हेनरी कैवेंडिश है। कैवेंडिश ने 1798 में अत्यंत संवेदनशील मरोड़ तुला से प्रयोगशाला में सीसे के गोलों के बीच लगने वाले अत्यंत सूक्ष्म आकर्षण को मापा और उससे G का मान निकाला, लगभग 6.674 गुणा दस की घात ऋण ग्यारह न्यूटन मीटर वर्ग प्रति किलोग्राम वर्ग। चूँकि G, g के सूत्र में आता है, उसी प्रयोग से पृथ्वी का द्रव्यमान और औसत घनत्व भी निकल आया, इसीलिए उसे लोकप्रिय रूप से पृथ्वी को तौलना कहा जाता है।

विकल्प A, आइजक न्यूटन, ने सत्रहवीं शताब्दी में सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम दिया पर G को कभी मापा नहीं, इसीलिए उनके जीवनकाल में यह नियतांक अज्ञात रहा। विकल्प C, गैलीलियो गैलिली, ने दिखाया कि भिन्न द्रव्यमान के पिंड समान त्वरण से गिरते हैं और प्रक्षेप्य गति का अध्ययन किया, पर G पर काम नहीं किया। विकल्प D, योहानेस केपलर, ने ग्रहों की गति के तीन नियम दिए, जिनकी व्याख्या बाद में न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण से की। कैवेंडिश और G के जोड़े को न्यूटन और नियम से अलग रखें।

Q9.सामान्य विज्ञानमध्यम

किसी द्रव के भीतर किसी बिंदु पर लगने वाला दाब निम्नलिखित में से किस पर निर्भर नहीं करता?

  1. A.सतह से उस बिंदु की गहराई पर
  2. B.द्रव के घनत्व पर
  3. C.बर्तन के आकार और उसके तल के क्षेत्रफल पर
  4. D.गुरुत्वीय त्वरण पर
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बर्तन के आकार और उसके तल के क्षेत्रफल पर

व्याख्या

सही उत्तर C, बर्तन के आकार और उसके तल के क्षेत्रफल पर है। द्रव के भीतर किसी बिंदु पर दाब गहराई गुणा द्रव के घनत्व गुणा गुरुत्वीय त्वरण के बराबर होता है। इस व्यंजक में पात्र के आकार का कोई उल्लेख नहीं है, इसलिए एक ही स्तर तक भरी पतली नली और चौड़ी टंकी में समान गहराई पर दाब समान रहता है, जिसे शास्त्रीय द्रवस्थैतिक विरोधाभास से दिखाया जाता है।

विकल्प A उत्तर के रूप में गलत है क्योंकि दाब गहराई के साथ बढ़ता ही है, इसीलिए बाँध नीचे की ओर मोटा बनाया जाता है और गोताखोर को नीचे जाते हुए बढ़ता दाब अनुभव होता है। विकल्प B इसलिए गलत है कि पारा जैसा अधिक घना द्रव उसी गहराई पर जल से कहीं अधिक दाब देता है। विकल्प D इसलिए गलत है कि सूत्र में g सीधे आता है, इसलिए उतना ही द्रव स्तंभ चंद्रमा पर कम दाब डालेगा। प्रश्न यह पूछता है कि कौन सा कारक प्रभाव नहीं डालता, इसलिए शब्द ध्यान से पढ़ें।

Q10.सामान्य विज्ञानमध्यम

पृथ्वी की परिक्रमा करते अंतरिक्ष यान में बैठे यात्री को भारहीनता का अनुभव क्यों होता है?

  1. A.उस ऊँचाई पर गुरुत्व बिलकुल नहीं होता
  2. B.यान और यात्री दोनों पृथ्वी के चारों ओर मुक्त पतन में होते हैं
  3. C.यात्री का द्रव्यमान शून्य हो जाता है
  4. D.यान वायुमंडल से बाहर निकल जाता है
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. यान और यात्री दोनों पृथ्वी के चारों ओर मुक्त पतन में होते हैं

व्याख्या

सही उत्तर B, यान और यात्री दोनों पृथ्वी के चारों ओर मुक्त पतन में होते हैं है। कक्षा में पृथ्वी का गुरुत्वीय खिंचाव ही वह बल है जो यान को ग्रह के चारों ओर मोड़े रखता है, और यान, यात्री तथा भीतर की हर वस्तु समान दर से पृथ्वी की ओर त्वरित होती है। चूँकि फर्श अब यात्री को ऊपर की ओर नहीं धकेलता, कोई वस्तु किसी दूसरी पर दबाव नहीं डालती और भार का अनुभव समाप्त हो जाता है, यद्यपि वास्तविक भार शून्य नहीं होता।

विकल्प A एक सामान्य भ्रांति है: निचली कक्षा की ऊँचाई पर गुरुत्व सतह की तुलना में केवल थोड़ा कम होता है, अनुपस्थित तो कदापि नहीं। विकल्प C इसलिए गलत है कि द्रव्यमान पिंड में पदार्थ की मात्रा है और स्थान बदलने से नहीं बदलता; लुप्त होता है केवल आभासी भार। विकल्प D इसलिए गलत है कि वायुमंडल से बाहर निकलने का गुरुत्वीय बल से कोई संबंध नहीं, जो रिक्त अंतरिक्ष में भी कार्य करता है। याद रखने योग्य वाक्य यह है कि भारहीनता मुक्त पतन की अवस्था है, गुरुत्वहीनता की नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्रव्यमान और भार में क्या अंतर है?

द्रव्यमान पिंड में पदार्थ की मात्रा है। यह अदिश राशि है, किलोग्राम में मापा जाता है और पृथ्वी, चंद्रमा या अंतरिक्ष कहीं भी समान रहता है। भार पिंड पर लगने वाला गुरुत्वीय बल है, जो द्रव्यमान गुणा g के बराबर होता है। यह सदिश राशि है, न्यूटन में मापा जाता है और स्थान के साथ बदलता है, चंद्रमा पर लगभग छठा भाग और पृथ्वी के केंद्र पर शून्य। परीक्षा में यही अंतर इस रूप में पूछा जाता है कि चंद्रमा पर ले जाने से क्या बदलता है।

g का मान ध्रुवों पर सर्वाधिक और विषुवत वृत्त पर सबसे कम क्यों होता है?

इसके दो कारण साथ काम करते हैं। पृथ्वी पूर्ण गोला नहीं है, वह ध्रुवों पर चपटी और विषुवत वृत्त पर उभरी हुई है, इसलिए केंद्र से दूरी ध्रुवों पर कम है और g, जो त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती है, वहाँ अधिक होता है। साथ ही पृथ्वी के घूर्णन के कारण गुरुत्वीय खिंचाव का एक भाग पिंडों को वृत्ताकार गति में बनाए रखने में लगता है, और यह प्रभाव विषुवत वृत्त पर सर्वाधिक तथा ध्रुवों पर शून्य होता है।

चंद्रमा पर वायुमंडल क्यों नहीं है?

चंद्रमा का पलायन वेग केवल लगभग 2.4 किलोमीटर प्रति सेकंड है, जबकि पृथ्वी का लगभग 11.2 किलोमीटर प्रति सेकंड, क्योंकि चंद्रमा का द्रव्यमान और त्रिज्या दोनों बहुत कम हैं। चंद्रमा पर पाए जाने वाले तापमानों पर गैस अणुओं की औसत चाल उस कम पलायन वेग के तुलनीय होती है, इसलिए गैस अणु रुकने के बजाय धीरे-धीरे अंतरिक्ष में निकल जाते हैं। परिणामस्वरूप वहाँ उल्लेखनीय वायुमंडल, मौसम या ध्वनि संचरण नहीं है।

हाइड्रोलिक ब्रेक कैसे काम करता है?

हाइड्रोलिक ब्रेक पास्कल के नियम पर चलता है, जिसके अनुसार बंद द्रव पर लगाया गया दाब बिना घटे द्रव के हर भाग तक पहुँचता है। ब्रेक पैडल दबाने पर पतले पिस्टन पर छोटा बल लगता है और वही दाब पहियों के चौड़े पिस्टनों पर काम करता है। चूँकि बल दाब गुणा क्षेत्रफल होता है, चौड़े पिस्टन ब्रेक शू पर कहीं बड़ा बल पहुँचाते हैं और चारों पहियों को एक ही क्षण में समान दाब मिलता है।

लोहे का जहाज तैरता है पर लोहे की कील क्यों डूब जाती है?

आर्किमिडीज सिद्धांत के अनुसार पिंड तब तैरता है जब उसके द्वारा विस्थापित द्रव का भार उसके अपने भार के बराबर हो। जहाज खोखला होता है, इसलिए उसका बड़ा आयतन बहुत अधिक भार का जल विस्थापित करता है जबकि उसका अपना भार सीमित रहता है, और भीतर भरी वायु सहित जहाज का औसत घनत्व जल से कम होता है। कील ठोस होती है, केवल अपने छोटे आयतन जितना जल हटाती है और उसका घनत्व जल से कहीं अधिक होता है, इसलिए उत्प्लावन बल कम पड़ जाता है और वह डूब जाती है।

स्रोत

  • विज्ञान (कक्षा IX), गुरुत्वाकर्षण वाला अध्याय — एनसीईआरटी
  • भौतिकी भाग I (कक्षा XI), गुरुत्वाकर्षण तथा तरलों के यांत्रिक गुण वाले अध्याय — एनसीईआरटी
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