प्रत्यास्थता, प्रतिबल, विकृति और हुक का नियम: परीक्षा नोट्स
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रत्यास्थता के नोट्स: प्रतिबल और विकृति के प्रकार, हुक का नियम, यंग गुणांक, आयतन गुणांक, दृढ़ता, प्वासों अनुपात तथा प्रतिबल विकृति वक्र।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

बल लगने पर प्रत्येक ठोस का आकार थोड़ा बदल जाता है। प्रत्यास्थता वह गुण है जिसके कारण विरूपक बल हटते ही वस्तु अपने मूल आकार और आकृति में लौट आती है, और सुघट्यता इसका विपरीत गुण है, जिसमें बल हटने के बाद भी परिवर्तन बना रहता है। पूर्णतः प्रत्यास्थ वस्तु पूरी तरह लौट आएगी और पूर्णतः सुघट्य वस्तु बिल्कुल नहीं लौटेगी; क्वार्ट्ज तंतु पहले के और गीली मिट्टी दूसरे के सबसे निकट है। एसएससी, रेलवे और रक्षा परीक्षाओं के विज्ञान खंड में यह अध्याय नियमित रूप से दो या तीन प्रश्न देता है, और लगभग सभी परिभाषाओं, मात्रकों तथा प्रतिबल विकृति वक्र पर आधारित होते हैं।
प्रतिबल और उसके प्रकार
जब कोई बाह्य बल किसी वस्तु को विरूपित करता है तो उसके कणों के बीच की आंतरिक शक्तियां बराबर और विपरीत प्रत्यानयन बल उत्पन्न करती हैं। प्रतिबल इसी प्रत्यानयन बल को उस सतह के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर मापा गया मान है जिस पर वह कार्य करता है, अर्थात प्रतिबल बराबर बल बटा क्षेत्रफल। इसका एसआई मात्रक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर है जिसे पास्कल नाम दिया गया है, और इसका विमीय सूत्र दाब के समान है। इसके तीन प्रकार हैं। अनुदैर्घ्य या अभिलंब प्रतिबल लंबाई की दिशा में कार्य करता है और खींचने पर तनन तथा दबाने पर संपीडन कहलाता है। आयतन या द्रवचालित प्रतिबल सभी फलकों पर समान रूप से कार्य करता है, जैसे किसी वस्तु को दाब में रखे द्रव में डालने पर। अपरूपण या स्पर्शरेखीय प्रतिबल सतह के अनुदिश कार्य करता है और एक परत को दूसरी पर सरकाने की प्रवृत्ति रखता है।
विकृति और उसके प्रकार
विकृति उत्पन्न विरूपण का माप है। यह किसी विमा में हुए परिवर्तन को उसी विमा के मूल मान से भाग देने पर मिलती है, इसलिए यह शुद्ध अनुपात है जिसका न कोई मात्रक है न विमा। अनुदैर्घ्य विकृति लंबाई में परिवर्तन बटा मूल लंबाई है, आयतन विकृति आयतन में परिवर्तन बटा मूल आयतन है, और अपरूपण विकृति वह कोण है जितना कोई फलक झुकता है, जिसे रेडियन में मापा जाता है। प्रत्येक प्रकार के प्रतिबल की अपनी विकृति होती है और प्रत्येक युग्म अपना प्रत्यास्थता गुणांक देता है।
हुक का नियम और तीन गुणांक
रॉबर्ट हुक ने सत्रहवीं शताब्दी में बताया कि प्रत्यास्थता सीमा के भीतर किसी वस्तु में उत्पन्न प्रतिबल विकृति के अनुक्रमानुपाती होता है। अनुपात का यह स्थिरांक, अर्थात प्रतिबल और विकृति का अनुपात, प्रत्यास्थता गुणांक कहलाता है, और विकृति का कोई मात्रक न होने के कारण गुणांक प्रतिबल का ही मात्रक पास्कल धारण करता है। तीन युग्मों से तीन गुणांक निकलते हैं।
| गुणांक | अनुपात | किस विरूपण का वर्णन |
|---|---|---|
| यंग प्रत्यास्थता गुणांक | अनुदैर्घ्य प्रतिबल बटा अनुदैर्घ्य विकृति | तार या छड़ का खिंचाव या संपीडन |
| आयतन गुणांक | आयतन प्रतिबल बटा आयतन विकृति | एकसमान दाब में आयतन का परिवर्तन |
| दृढ़ता गुणांक | अपरूपण प्रतिबल बटा अपरूपण विकृति | ऐंठन या परतों का सरकना |
आयतन गुणांक का व्युत्क्रम संपीड्यता कहलाता है, इसलिए गैस, जिसे दबाना आसान है, बहुत छोटा आयतन गुणांक और बहुत बड़ी संपीड्यता रखती है। यंग गुणांक और दृढ़ता गुणांक केवल ठोसों के लिए परिभाषित हैं, जबकि आयतन गुणांक ठोस, द्रव और गैस तीनों के लिए परिभाषित है। बड़ा गुणांक अधिक कठोर पदार्थ का सूचक है: इस्पात का यंग गुणांक लगभग दो खरब न्यूटन प्रति वर्ग मीटर है, जो तांबे से लगभग तिगुना और रबड़ से असंख्य गुना अधिक है, और इसीलिए भौतिकी में रबड़ नहीं बल्कि इस्पात को अधिक प्रत्यास्थ कहा जाता है।
प्रतिबल विकृति वक्र
यदि किसी तार पर भार धीरे धीरे बढ़ाकर प्रतिबल के सामने विकृति आरेखित की जाए तो यह ग्राफ पदार्थ की पूरी कहानी कह देता है। पहला भाग मूल बिंदु से होकर जाती सीधी रेखा है, और उसके ऊपरी सिरे का प्रतिबल समानुपाती सीमा कहलाता है, जहां तक हुक का नियम ठीक ठीक लागू रहता है। उससे थोड़ा आगे प्रत्यास्थता सीमा या पराभव बिंदु आता है, जहां तक तार अपनी मूल लंबाई में लौट आता है। पराभव बिंदु के बाद पदार्थ सुघट्य रूप से बहने लगता है और भार में थोड़ी वृद्धि बड़ा विस्तार देती है। पदार्थ जो अधिकतम प्रतिबल सह सकता है वह चरम तनन सामर्थ्य है, जिसके बाद तार में स्थानीय पतलापन आ जाता है जिसे ग्रीवाकरण कहते हैं, आभासी प्रतिबल गिरने लगता है और तार भंजन बिंदु पर टूट जाता है। जो पदार्थ टूटने से पहले लंबा सुघट्य विस्तार दिखाता है वह तन्य कहलाता है, जैसे तांबा, और जो प्रत्यास्थता सीमा के तुरंत बाद टूट जाता है वह भंगुर कहलाता है, जैसे कांच या ढलवां लोहा। रबड़ और अन्य प्रत्यास्थलक आकार में लौट तो आते हैं पर हुक के नियम का पालन बिल्कुल नहीं करते और उनके भारण तथा अभारण वक्र मेल नहीं खाते, इस प्रभाव को प्रत्यास्थ शैथिल्य कहते हैं।
प्वासों अनुपात, ऊर्जा और उपयोग
तार खींचे जाने पर पतला भी होता जाता है। पार्श्विक विकृति और अनुदैर्घ्य विकृति का अनुपात प्वासों अनुपात कहलाता है; इसका कोई मात्रक नहीं, इसकी सैद्धांतिक सीमाएं ऋण एक और आधा हैं, और अधिकांश सामान्य पदार्थों में इसका मान लगभग शून्य दशमलव दो से शून्य दशमलव चार के बीच रहता है। किसी वस्तु को खींचने में किया गया कार्य प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है, और प्रति इकाई आयतन संचित ऊर्जा प्रतिबल और विकृति के गुणनफल की आधी होती है। ये विचार अभियांत्रिकी का बड़ा भाग तय करते हैं: बीच में भारित धरन का अवनमन उसकी गहराई के घन के व्युत्क्रमानुपाती होता है, इसीलिए गर्डरों को अंग्रेजी अक्षर आई का आकार दिया जाता है, और क्रेन की रस्सियों की मोटाई इस्पात के भंजक प्रतिबल से तय होती है, जो केवल पदार्थ पर निर्भर करता है, नमूने की लंबाई या मोटाई पर नहीं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय के प्रश्न छोटे और परिभाषा आधारित होते हैं। सबसे अधिक पूछे जाते हैं हुक के नियम का कथन, प्रतिबल का मात्रक और विमा, यह तथ्य कि विकृति का कोई मात्रक नहीं, और कौन सा गुणांक किस विरूपण से जुड़ा है। सबसे प्रिय भ्रम यह कथन है कि रबड़ इस्पात से अधिक प्रत्यास्थ है, जो भौतिकी में गलत है क्योंकि प्रत्यास्थता गुणांक से मापी जाती है और इस्पात का गुणांक कहीं बड़ा है। दूसरा भ्रम प्रतिबल विकृति वक्र के बिंदुओं का क्रम है, जहां परीक्षार्थी चरम तनन सामर्थ्य को पराभव बिंदु से पहले रख देते हैं या भूल जाते हैं कि ग्रीवाकरण अधिकतम प्रतिबल के बाद आता है। रेलवे और रक्षा परीक्षाओं के संख्यात्मक प्रश्न यंग गुणांक से विस्तार, खिंचे तार में संचित ऊर्जा, या स्प्रिंग का विस्तार पूछते हैं, जहां अचानक लगाया गया भार स्थैतिक विस्तार का दोगुना देता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| प्रतिबल | प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रत्यानयन बल, मात्रक पास्कल, विमाएं दाब के समान |
|---|---|
| विकृति | विमा में परिवर्तन बटा मूल विमा; न मात्रक न विमा |
| हुक का नियम | प्रत्यास्थता सीमा के भीतर प्रतिबल विकृति के अनुक्रमानुपाती |
| यंग गुणांक | अनुदैर्घ्य प्रतिबल बटा अनुदैर्घ्य विकृति; केवल ठोसों के लिए |
| आयतन गुणांक | आयतन प्रतिबल बटा आयतन विकृति; ठोस, द्रव और गैस तीनों के लिए |
| दृढ़ता गुणांक | अपरूपण प्रतिबल बटा अपरूपण विकृति; केवल ठोसों के लिए |
| संपीड्यता | आयतन गुणांक का व्युत्क्रम |
| प्वासों अनुपात | पार्श्विक विकृति बटा अनुदैर्घ्य विकृति; मात्रक नहीं; व्यवहार में लगभग शून्य दशमलव दो से चार |
| प्रति इकाई आयतन ऊर्जा | आधा गुणा प्रतिबल गुणा विकृति |
| इस्पात का यंग गुणांक | लगभग दो खरब न्यूटन प्रति वर्ग मीटर |
| सर्वाधिक प्रत्यास्थ सामान्य पदार्थ | इस्पात, क्योंकि उसका गुणांक रबड़ से बहुत बड़ा है |
| ग्रीवाकरण | चरम तनन सामर्थ्य के बाद स्थानीय पतलापन, जब आभासी प्रतिबल गिरता है |
| तन्य और भंगुर | तांबा तन्य है और उसका सुघट्य परास लंबा है; कांच तथा ढलवां लोहा भंगुर हैं |
| भंजक प्रतिबल | केवल पदार्थ पर निर्भर, नमूने की लंबाई या क्षेत्रफल पर नहीं |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
हुक का नियम कहता है कि प्रत्यास्थता सीमा के भीतर
- A.प्रतिबल विकृति के अनुक्रमानुपाती होता है
- B.प्रतिबल विकृति के व्युत्क्रमानुपाती होता है
- C.विकृति प्रतिबल से स्वतंत्र होती है
- D.प्रतिबल विकृति के वर्ग के अनुपाती होता है
उत्तर देखें
हुक ने पाया कि जब तक किसी वस्तु को उसकी प्रत्यास्थता सीमा से अधिक विकृत न किया जाए, प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रत्यानयन बल आंशिक विरूपण के साथ उसी अनुपात में बढ़ता है, और इन दोनों का स्थिर अनुपात प्रत्यास्थता गुणांक कहलाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रतिबल का एसआई मात्रक क्या है?
- A.न्यूटन
- B.जूल
- C.पास्कल
- D.वाट
उत्तर देखें
प्रतिबल प्रत्यानयन बल को उस क्षेत्रफल से भाग देकर निकाला जाता है जिस पर वह कार्य करता है, इसलिए उसका मात्रक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर है, और इसी संयोजन को पास्कल नाम दिया गया है, वही मात्रक जो दाब के लिए प्रयुक्त होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विकृति एक ऐसी राशि है जिसका
- A.मात्रक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर है
- B.न कोई मात्रक है न कोई विमा
- C.मात्रक मीटर है
- D.मात्रक ऊर्जा के समान है
उत्तर देखें
विकृति की परिभाषा किसी विमा में हुए परिवर्तन को उसी विमा के मूल मान से भाग देकर की जाती है, लंबाई बटा लंबाई या आयतन बटा आयतन, इसलिए मात्रक कट जाते हैं और केवल शुद्ध संख्या बचती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रत्यास्थता सीमा के भीतर अनुदैर्घ्य प्रतिबल और अनुदैर्घ्य विकृति का अनुपात क्या कहलाता है?
- A.आयतन गुणांक
- B.दृढ़ता गुणांक
- C.यंग प्रत्यास्थता गुणांक
- D.प्वासों अनुपात
उत्तर देखें
यह किसी तार या छड़ के लंबाई की दिशा में खिंचाव या संपीडन को नियंत्रित करता है और अनुप्रस्थ काट के प्रति इकाई क्षेत्रफल बल को लंबाई के आंशिक परिवर्तन से भाग देकर प्राप्त होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी पदार्थ के आयतन गुणांक का व्युत्क्रम क्या कहलाता है?
- A.संपीड्यता
- B.दृढ़ता
- C.तन्यता
- D.तनन सामर्थ्य
उत्तर देखें
आयतन गुणांक यह मापता है कि कोई पदार्थ एकसमान दाब में आयतन के परिवर्तन का कितना प्रबल विरोध करता है, इसलिए उसका व्युत्क्रम यह मापता है कि आयतन कितनी आसानी से घटता है, और उसी राशि को संपीड्यता कहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →इस्पात और रबड़ के विषय में भौतिकी की दृष्टि से कौन सा कथन सही है?
- A.रबड़ अधिक प्रत्यास्थ है क्योंकि वह अधिक खिंचता है
- B.इस्पात अधिक प्रत्यास्थ है क्योंकि उसका प्रत्यास्थता गुणांक बहुत बड़ा है
- C.दोनों की प्रत्यास्थता बराबर है
- D.दोनों ठोस हैं इसलिए कोई भी प्रत्यास्थ नहीं है
उत्तर देखें
भौतिकी में प्रत्यास्थता दूर तक खिंच पाने की क्षमता नहीं बल्कि प्रत्यानयन प्रवृत्ति की प्रबलता है, जिसे दी गई विकृति के लिए आवश्यक प्रतिबल से मापा जाता है, और समान आंशिक विस्तार के लिए इस्पात रबड़ से कहीं अधिक प्रतिबल मांगता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी पदार्थ का प्वासों अनुपात किसका अनुपात होता है?
- A.प्रतिबल और विकृति
- B.पार्श्विक विकृति और अनुदैर्घ्य विकृति
- C.अनुदैर्घ्य विकृति और पार्श्विक विकृति
- D.अपरूपण प्रतिबल और अपरूपण विकृति
उत्तर देखें
तार खींचे जाने पर लंबा होने के साथ पतला भी होता है, और प्वासों अनुपात यह दर्ज करता है कि लंबाई में हुई वृद्धि की तुलना में बगल से हुआ संकुचन कितना है; यह शुद्ध संख्या है, जिसकी सैद्धांतिक सीमाएं ऋण एक और आधा हैं तथा व्यावहारिक मान लगभग शून्य…
पूरी व्याख्या पढ़ें →खिंचे हुए तार के प्रति इकाई आयतन में संचित प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा किसके बराबर होती है?
- A.प्रतिबल गुणा विकृति
- B.आधा गुणा प्रतिबल गुणा विकृति
- C.प्रतिबल बटा विकृति
- D.दो गुणा प्रतिबल गुणा विकृति
उत्तर देखें
तार खींचे जाने पर प्रत्यानयन बल शून्य से बढ़कर अपने अंतिम मान तक पहुंचता है, इसलिए किया गया कार्य औसत बल और विस्तार का गुणनफल होता है, और तार के आयतन से भाग देने पर प्रति इकाई आयतन संचित ऊर्जा प्रतिबल और विकृति के गुणनफल की आधी रह जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रतिबल विकृति आरेख में आभासी प्रतिबल के तेजी से घटने का कारण निम्न में से कौन सा है?
- A.ग्रीवाकरण
- B.अनुनाद
- C.कांच संक्रमण
- D.शैथिल्य
उत्तर देखें
तन्य नमूना अपनी चरम तनन सामर्थ्य पार कर लेने पर एकसमान रूप से विकृत होना छोड़ देता है और विरूपण एक छोटी लंबाई में सिमट जाता है, जो संकरी गर्दन के रूप में खिंच जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →स्प्रिंग नियतांक k वाली एक स्प्रिंग छत से लटकाई गई है और उसके दूसरे सिरे पर द्रव्यमान m का गुटका लटकाया गया है। गुटके को अचानक छोड़ दिया जाता है। स्प्रिंग में उत्पन्न अधिकतम विस्तार ज्ञात कीजिए।
- A.2mg बटा k
- B.mg बटा 2k
- C.mg बटा k
- D.mg बटा 4k
उत्तर देखें
अचानक छोड़े जाने पर गुटका पहले स्वतंत्र रूप से गिरता है, इसलिए निम्नतम बिंदु पर उसकी चाल शून्य होती है और उसने जितनी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा खोई वह सारी स्प्रिंग में चली जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक संयुक्त छड़ इस्पात और एल्युमीनियम की पट्टियों से बनी है, जिनमें से प्रत्येक का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल 3 वर्ग सेंटीमीटर है। इस संयुक्त छड़ पर 12000 न्यूटन का अक्षीय भार लगाया जाता है। यदि इस्पात का यंग गुणांक एल्युमीनियम का तिगुना हो, तो इस्पात में प्रतिबल होगा
- A.10 न्यूटन प्रति वर्ग मिलीमीटर
- B.20 न्यूटन प्रति वर्ग मिलीमीटर
- C.30 न्यूटन प्रति वर्ग मिलीमीटर
- D.इनमें से कोई नहीं
उत्तर देखें
दोनों पट्टियां जुड़ी हुई हैं और भार मिलकर उठाती हैं, इसलिए दोनों में विकृति समान रहती है। प्रतिबल गुणांक और विकृति का गुणनफल होने के कारण इस्पात में प्रतिबल एल्युमीनियम के प्रतिबल का तिगुना होगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी तार का भंजक प्रतिबल किस पर निर्भर करता है?
- A.तार की लंबाई पर
- B.तार की त्रिज्या पर
- C.तार के पदार्थ पर
- D.अनुप्रस्थ काट के आकार पर
उत्तर देखें
भंजक प्रतिबल वह अधिकतम बल प्रति इकाई क्षेत्रफल है जिसे कोई पदार्थ टूटने से पहले सह सकता है, और चूंकि बल तथा क्षेत्रफल दोनों परिभाषा में पहले ही आ चुके हैं, जो शेष बचता है वह पदार्थ का अपना स्थिरांक है, जो उसी धातु के पतले तार और मोटे रस्से…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस्पात और रबड़ में से कौन अधिक प्रत्यास्थ है?
इस्पात अधिक प्रत्यास्थ है। भौतिकी में प्रत्यास्थता प्रत्यास्थता गुणांक से आंकी जाती है, अर्थात इस बात से कि दी गई विकृति उत्पन्न करने के लिए कितना प्रतिबल चाहिए। समान आंशिक खिंचाव के लिए इस्पात को रबड़ से कहीं अधिक प्रतिबल चाहिए, इसलिए उसका यंग गुणांक बहुत अधिक है और वही अधिक प्रत्यास्थ पदार्थ है, यद्यपि रबड़ आसानी से खिंचता है और सामान्य भाषा में प्रत्यास्थ दिखता है।
विकृति का कोई मात्रक क्यों नहीं होता?
विकृति की परिभाषा किसी विमा में हुए परिवर्तन को उसी विमा के मूल मान से भाग देकर की जाती है, जैसे लंबाई में परिवर्तन बटा मूल लंबाई। दोनों राशियां एक ही प्रकार की हैं, इसलिए मात्रक कट जाते हैं और विकृति शुद्ध संख्या रह जाती है। इसी कारण प्रत्यास्थता गुणांक प्रतिबल का मात्रक धारण करता है।
प्रत्यास्थता सीमा और समानुपाती सीमा में क्या अंतर है?
समानुपाती सीमा प्रतिबल विकृति ग्राफ के सीधे भाग का अंत है, वह अंतिम बिंदु जहां तक प्रतिबल और विकृति ठीक ठीक समानुपाती रहते हैं और हुक का नियम लागू रहता है। प्रत्यास्थता सीमा उससे थोड़ा आगे होती है और वह अंतिम बिंदु है जहां से वस्तु पूरी तरह अपने मूल आकार में लौट आती है। इन दोनों के बीच पदार्थ प्रत्यास्थ तो रहता है पर हुक के नियम का पालन नहीं करता।
प्वासों अनुपात क्या है और उसकी सीमाएं क्या हैं?
किसी वस्तु को खींचने पर पार्श्विक विकृति और अनुदैर्घ्य विकृति का अनुपात प्वासों अनुपात कहलाता है, जो बताता है कि तार लंबा होते समय कितना पतला होता है। यह बिना मात्रक की शुद्ध संख्या है। इसकी सैद्धांतिक सीमाएं ऋण एक और आधा हैं, और अधिकांश धातुओं तथा सामान्य पदार्थों में इसका मान लगभग शून्य दशमलव दो से शून्य दशमलव चार के बीच रहता है।
तनन परीक्षण में ग्रीवाकरण की अवस्था में क्या होता है?
ग्रीवाकरण चरम तनन सामर्थ्य पार होने के बाद आरंभ होता है। नमूने में एक स्थान पर संकरी गर्दन बन जाती है जहां अनुप्रस्थ काट तेजी से घट जाता है, इसलिए उस पतले भाग में वास्तविक प्रतिबल बढ़ता रहने पर भी मूल क्षेत्रफल से निकाला गया आभासी प्रतिबल गिरने लगता है। इसी से ग्राफ भंजन बिंदु पर टूटने से ठीक पहले नीचे मुड़ जाता है।
गर्डर को अंग्रेजी अक्षर आई के आकार में क्यों बनाया जाता है?
सिरों पर टिकी और बीच में भारित धरन का अवनमन उसकी गहराई के घन के व्युत्क्रमानुपाती होता है, इसलिए चौड़ाई से कहीं अधिक महत्व गहराई का है। अधिकांश भार ऊपरी और निचली सतहें उठाती हैं, जबकि काट का मध्य भाग बहुत कम योगदान देता है। मध्य से पदार्थ हटाकर दो चौड़े फ्लैंज को पतले वेब से जोड़ देने पर बहुत कम धातु में वही सामर्थ्य मिल जाती है, और वही आकार अंग्रेजी अक्षर आई है।
स्रोत
- भौतिकी भाग दो, कक्षा ग्यारह, ठोसों के यांत्रिक गुण अध्याय — एनसीईआरटी
- अंतरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली और पास्कल — अंतरराष्ट्रीय माप तौल ब्यूरो





