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GK नोट्ससामान्य विज्ञानआधुनिक भौतिकी: प्रकाश-विद्युत प्रभाव, लेज़र और अतिचालकता

प्रकाश-विद्युत प्रभाव, लेज़र और अतिचालकता नोट्स

परीक्षा के लिए आधुनिक भौतिकी नोट्स: प्रकाश-विद्युत प्रभाव और आइंस्टाइन का समीकरण, लेज़र के गुण, प्रकार तथा उपयोग, अतिचालकता और माइसनर प्रभाव।

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प्रकाश-विद्युत प्रभाव, लेज़र और अतिचालकता नोट्स — GK24 title card
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आधुनिक भौतिकी के तीन सर्वोत्तम प्रश्न एक ही विचार से निकलते हैं: प्रकाश और पदार्थ का व्यवहार उन रूपों में होता है जिन्हें उन्नीसवीं शताब्दी की भौतिकी समझा नहीं सकी। प्रकाश-विद्युत प्रभाव ने भौतिकविदों को मानने पर विवश किया कि प्रकाश पुड़ियों के रूप में आता है। लेज़र ने उसी क्वांटम चित्र से ऐसी शुद्धता वाला प्रकाश बनाया जो प्रकृति में कहीं नहीं मिलता। अतिचालकता ने दिखाया कि विद्युत प्रतिरोध, जो अनिवार्य लगता है, पूरी तरह लुप्त हो सकता है। सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्र इन तीनों से परिभाषा, खोजकर्ता और उपयोग के प्रश्न बनाते हैं, और यह अध्याय तथ्यों को उसी क्रम में रखता है।

प्रकाश-विद्युत प्रभाव

जब उचित आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु की सतह पर पड़ता है तो उससे इलेक्ट्रॉन निकल आते हैं। इस प्रभाव को 1887 में हेनरिक हर्ट्ज ने विद्युत स्फुलिंगों का अध्ययन करते हुए देखा, और हालवाक्स तथा लेनार्ड ने इसकी आगे जाँच की। निकले इलेक्ट्रॉनों को प्रकाश-इलेक्ट्रॉन और उनसे बनी धारा को प्रकाश-विद्युत धारा कहते हैं। इस प्रभाव की चार विशेषताओं ने प्रकाश के तरंग सिद्धांत को हरा दिया। पहली, उत्सर्जन केवल एक न्यूनतम आवृत्ति से ऊपर होता है, जिसे देहली आवृत्ति कहते हैं, चाहे प्रकाश कितना ही तीव्र हो। दूसरी, प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करती है और उसकी तीव्रता पर बिल्कुल नहीं। तीसरी, प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की संख्या, और इसलिए धारा, तीव्रता पर निर्भर करती है। चौथी, उत्सर्जन तत्क्षण होता है, उसमें कोई मापने योग्य समय-विलंब नहीं है।

आइंस्टाइन की व्याख्या

1905 में अल्बर्ट आइंस्टाइन ने प्रकाश को क्वांटा की धारा मानकर इस प्रभाव की व्याख्या की, जिन्हें बाद में फोटॉन कहा गया और जिनमें से प्रत्येक की ऊर्जा प्लांक नियतांक और आवृत्ति के गुणनफल के बराबर होती है। एक फोटॉन अपनी पूरी ऊर्जा एक इलेक्ट्रॉन को दे देता है। उसका एक भाग इलेक्ट्रॉन को धातु से मुक्त करने में लगता है और शेष गतिज ऊर्जा के रूप में प्रकट होता है। यही आइंस्टाइन का प्रकाश-विद्युत समीकरण है: फोटॉन की ऊर्जा कार्यफलन और प्रकाश-इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा के योग के बराबर होती है। कार्यफलन वह न्यूनतम ऊर्जा है जो इलेक्ट्रॉन को धातु से बाहर खींचने के लिए आवश्यक है, और यह प्लांक नियतांक तथा देहली आवृत्ति के गुणनफल के बराबर होती है। निरोधी विभव वह ऋण वोल्टता है जो सबसे तेज प्रकाश-इलेक्ट्रॉन को ठीक रोक देती है, इसलिए वह अधिकतम गतिज ऊर्जा नापती है। इस कार्य के लिए आइंस्टाइन को 1921 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला, और रॉबर्ट मिलिकन के सावधान प्रयोगों ने इस समीकरण की पुष्टि की तथा प्लांक नियतांक का अच्छा मान दिया, लगभग 6.63 गुणा दस की घात ऋण चौंतीस जूल सेकंड।

प्रकाश-विद्युत प्रभाव के उपयोग

उपयोगी धातुएँ वही हैं जिनका कार्यफलन कम है, इसलिए सीजियम, पोटैशियम और सोडियम साधारण दृश्य प्रकाश पर भी प्रतिक्रिया देते हैं जबकि जिंक और मैग्नीशियम को पराबैंगनी प्रकाश चाहिए। इस प्रभाव पर बने प्रकाश-सेल सड़क की बत्तियों के स्वतः स्विच, चोर-घंटी, कैमरे के प्रकाश मापक, फिल्म की ध्वनि पट्टी के पाठक और गिनने तथा छाँटने वाली मशीनों के संवेदक के रूप में कार्य करते हैं। सौर सेल इससे जुड़े प्रकाश-वोल्टीय प्रभाव से प्रकाश को सीधे विद्युत में बदलते हैं।

लेज़र

लेज़र शब्द उत्तेजित उत्सर्जन द्वारा प्रकाश के प्रवर्धन का संक्षिप्त रूप है। उत्तेजित उत्सर्जन, जिसमें किसी उत्तेजित परमाणु के पास से गुजरता फोटॉन उसे नीचे के स्तर पर गिराकर एक दूसरा समान फोटॉन उत्सर्जित करा देता है, आइंस्टाइन ने 1917 में बताया था। चार्ल्स टाउन्स ने 1954 में सूक्ष्म तरंगों पर कार्य करने वाला पहला मेसर बनाया, और थियोडोर मैमन ने 1960 में पहला कार्यशील लेज़र, रूबी लेज़र, बनाया। किसी लेज़र के लिए तीन चीजें आवश्यक हैं: एक सक्रिय माध्यम, एक पंपन स्रोत जो परमाणुओं को उत्तेजित अवस्था तक उठाए, और दो दर्पणों से बनी अनुनादी गुहा। अनिवार्य शर्त जनसंख्या प्रतिलोमन है, जिसमें ऊँचे ऊर्जा स्तर पर नीचे वाले स्तर से अधिक परमाणु होते हैं, और यह उस मेटास्टेबल अवस्था से संभव होता है जिसमें परमाणु रुक सकते हैं।

लेज़र प्रकाश का गुणअर्थ
एकवर्णीलगभग एक ही तरंगदैर्घ्य
कलासंबद्धसभी तरंगें एक ही कला में, एक साथ कदम मिलाकर
दिशात्मककिरण पुंज बहुत कम फैलता है, अपसरण कम होता है
तीव्रऊर्जा एक सँकरे पुंज में केंद्रित रहती है

लेज़र अपने सक्रिय माध्यम के आधार पर बाँटे जाते हैं। ठोस अवस्था लेज़रों में रूबी लेज़र आता है, जिसके सक्रिय केंद्र एल्युमिनियम ऑक्साइड में क्रोमियम आयन हैं, तथा नियोडिमियम वाईएजी लेज़र। गैस लेज़रों में हीलियम-नियोन लेज़र है, जो परिचित लाल किरण देता है, और कार्बन डाइऑक्साइड लेज़र, जो धातु काटने तथा जोड़ने में प्रयुक्त होता है। अर्धचालक डायोड लेज़र वे छोटे और सस्ते लेज़र हैं जो ऑप्टिकल ड्राइव तथा लेज़र पॉइंटर में लगते हैं। उपयोग सर्वत्र हैं: कॉम्पैक्ट डिस्क और बारकोड पढ़ना, प्रकाशित तंतु संचार, लेज़र मुद्रण, होलोग्राफी, जिसका आविष्कार डेनिस गाबोर ने किया और जिसके लिए उन्हें 1971 का नोबेल पुरस्कार मिला, दूरी मापन तथा लिडार, और चिकित्सा में नेत्र शल्य चिकित्सा, ट्यूमर हटाना तथा रक्तहीन चीरा।

अतिचालकता

अतिचालकता कुछ पदार्थों में विद्युत प्रतिरोध का पूर्णतः लुप्त हो जाना है, जब उन्हें एक विशेष ताप से नीचे ठंडा किया जाए, जिसे क्रांतिक ताप या संक्रमण ताप कहते हैं। इसकी खोज 1911 में डच भौतिकविद हाइके कामरलिंग ओंस ने की, जिन्होंने पाया कि पारा लगभग 4.2 केल्विन से नीचे अपना सारा प्रतिरोध खो देता है, जो द्रव हीलियम के क्वथनांक के निकट है। किसी अतिचालक छल्ले में एक बार चली धारा बिना किसी लगाई गई वोल्टता के बहती रहती है, क्योंकि ऊष्मा के रूप में कोई ऊर्जा नष्ट नहीं होती।

अतिचालक अपने भीतर से चुंबकीय क्षेत्र को बाहर भी धकेल देता है और पूर्ण प्रतिचुंबकीय जैसा व्यवहार करता है। यही माइसनर प्रभाव है, जो 1933 में बताया गया, और इसी कारण किसी ठंडे किए गए अतिचालक के ऊपर चुंबक को तैराया जा सकता है। यदि चुंबकीय क्षेत्र किसी क्रांतिक मान से अधिक बढ़ा दिया जाए, या धारा क्रांतिक धारा से अधिक, तो अतिचालकता नष्ट हो जाती है। सूक्ष्म स्तर की व्याख्या बीसीएस सिद्धांत है, जो 1957 में बार्डीन, कूपर और श्रीफर ने दिया, जिसमें इलेक्ट्रॉन कूपर युग्म नामक बंधित जोड़ों में चलते हैं और जालक से प्रकीर्णित नहीं होते। 1986 में बेडनोर्ज और म्यूलर ने एक सिरैमिक ऑक्साइड में बहुत ऊँचे ताप पर अतिचालकता पाई, और उसके बाद आया यिट्रियम बेरियम कॉपर ऑक्साइड यौगिक 77 केल्विन से ऊपर कार्य करता है, इसलिए उसे द्रव हीलियम के स्थान पर द्रव नाइट्रोजन से ठंडा किया जा सकता है। अतिचालक चुंबक चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन मशीनों, कण त्वरकों, चुंबकीय उत्प्लावन रेलगाड़ियों तथा स्क्विड नामक अत्यंत संवेदी चुंबकत्वमापियों में प्रयुक्त होते हैं।

परीक्षा की दृष्टि से

तीन प्रकार के प्रश्न आते हैं। खोजकर्ता वाले प्रश्न नाम को वर्ष से जोड़ते हैं, और याद रखने योग्य समूह है - 1887 में हर्ट्ज, 1905 में आइंस्टाइन तथा 1921 का पुरस्कार, 1954 में टाउन्स, 1960 में मैमन, 1911 में कामरलिंग ओंस, 1933 में माइसनर, 1957 में बीसीएस और 1986 में बेडनोर्ज तथा म्यूलर। परिभाषा वाले प्रश्न पूछते हैं कि कार्यफलन, देहली आवृत्ति, निरोधी विभव, कलासंबद्धता और जनसंख्या प्रतिलोमन का अर्थ क्या है। उपयोग वाले प्रश्न पूछते हैं कि प्रकाश-सेल, लेज़र और अतिचालक चुंबक कहाँ प्रयुक्त होते हैं, और अतिचालक चुंबकों वाली चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन मशीन सबसे प्रिय उत्तर है। स्थायी जाल तीव्रता बनाम आवृत्ति है: तीव्रता तय करती है कि कितने प्रकाश-इलेक्ट्रॉन निकलेंगे, आवृत्ति तय करती है कि वे कितने ऊर्जावान होंगे। दूसरा जाल लेज़र का पूर्ण रूप है, जिसमें प्रवर्धन और उत्तेजित के स्थान पर अवशोषण तथा स्वतःस्फूर्त रख दिए जाते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

प्रकाश-विद्युत प्रभाव का प्रेक्षणहेनरिक हर्ट्ज, 1887
व्याख्याअल्बर्ट आइंस्टाइन, 1905; 1921 का नोबेल पुरस्कार
प्लांक नियतांकलगभग 6.63 गुणा दस की घात ऋण चौंतीस जूल सेकंड
कार्यफलनप्लांक नियतांक गुणा देहली आवृत्ति
आवृत्ति पर निर्भरप्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा
तीव्रता पर निर्भरप्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की संख्या, अर्थात धारा
लेज़र का पूर्ण रूपउत्तेजित उत्सर्जन द्वारा प्रकाश का प्रवर्धन
पहला लेज़ररूबी लेज़र, थियोडोर मैमन, 1960
लेज़र क्रिया की शर्तमेटास्टेबल अवस्था की सहायता से जनसंख्या प्रतिलोमन
अतिचालकता की खोजहाइके कामरलिंग ओंस, 1911, पारे में लगभग 4.2 केल्विन से नीचे
माइसनर प्रभावअतिचालक द्वारा चुंबकीय क्षेत्र का बाहर धकेला जाना, 1933
बीसीएस सिद्धांतबार्डीन, कूपर और श्रीफर, 1957, कूपर युग्म

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.सामान्य विज्ञानमध्यम

प्रकाश-विद्युत प्रभाव का प्रथम प्रेक्षण किस वैज्ञानिक ने किया?

  1. A.अल्बर्ट आइंस्टाइन
  2. B.हेनरिक हर्ट्ज
  3. C.मैक्स प्लांक
  4. D.रॉबर्ट मिलिकन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हेनरिक हर्ट्ज

1887 में दो इलेक्ट्रोडों के बीच उत्पन्न स्फुलिंगों का अध्ययन करते समय हर्ट्ज ने देखा कि जब इलेक्ट्रोडों पर पराबैंगनी प्रकाश पड़ता है तो स्फुलिंग अधिक सरलता से कूदती है, और यही प्रकाश-विद्युत प्रभाव का पहला प्रेक्षण था; इसके बाद हालवाक्स तथा लेनार्ड ने इसका क्रमबद्ध अध्ययन किया।

Q2.सामान्य विज्ञानमध्यम

अल्बर्ट आइंस्टाइन को 1921 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मुख्यतः किस कार्य के लिए दिया गया?

  1. A.विशिष्ट आपेक्षिकता सिद्धांत
  2. B.सामान्य आपेक्षिकता सिद्धांत
  3. C.प्रकाश-विद्युत प्रभाव की व्याख्या
  4. D.फोटॉन के विराम द्रव्यमान की खोज
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. प्रकाश-विद्युत प्रभाव की व्याख्या

पुरस्कार की प्रशस्ति सैद्धांतिक भौतिकी में उनकी सेवाओं और विशेष रूप से प्रकाश-विद्युत प्रभाव के नियम की खोज का उल्लेख करती है, अर्थात उस समीकरण की, जिसमें फोटॉन की ऊर्जा कार्यफलन और उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा के योग के बराबर होती है।

Q3.सामान्य विज्ञानमध्यम

किसी धातु की सतह से निकले प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा किस पर निर्भर करती है?

  1. A.आपतित प्रकाश की तीव्रता
  2. B.आपतित प्रकाश की आवृत्ति
  3. C.प्रकाशित सतह के क्षेत्रफल
  4. D.प्रकाश पड़ने के समय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आपतित प्रकाश की आवृत्ति

आइंस्टाइन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार फोटॉन प्लांक नियतांक और आवृत्ति के गुणनफल के बराबर ऊर्जा देता है, जिसका एक भाग कार्यफलन में व्यय होता है, इसलिए इलेक्ट्रॉन के पास बची अधिकतम गतिज ऊर्जा आवृत्ति के साथ बढ़ती है और प्रकाश की चमक पर निर्भर नहीं करती।

Q4.सामान्य विज्ञानआसान

किसी धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को क्या कहते हैं?

  1. A.कार्यफलन
  2. B.निरोधी विभव
  3. C.आयनन ऊर्जा
  4. D.बंधन ऊर्जा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कार्यफलन

किसी धातु का कार्यफलन वह न्यूनतम ऊर्जा है जो उसकी सतह से एक इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने के लिए चाहिए, और यह उस धातु की देहली आवृत्ति तथा प्लांक नियतांक के गुणनफल के बराबर होती है; सीजियम और पोटैशियम का कार्यफलन कम है, इसी कारण वे दृश्य प्रकाश पर भी…

Q5.सामान्य विज्ञानआसान

लेज़र शब्द किसका संक्षिप्त रूप है?

  1. A.स्वतःस्फूर्त उत्सर्जन द्वारा प्रकाश का अवशोषण
  2. B.उत्तेजित उत्सर्जन द्वारा प्रकाश का प्रवर्धन
  3. C.विकिरण द्वारा संचित ऊर्जा का रैखिक प्रवर्धन
  4. D.सांख्यिकीय उत्सर्जन द्वारा किरणों का संरेखण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उत्तेजित उत्सर्जन द्वारा प्रकाश का प्रवर्धन

यह युक्ति उत्तेजित उत्सर्जन से कार्य करती है, जिसमें किसी उत्तेजित परमाणु के पास से गुजरता फोटॉन उसे नीचे के स्तर पर गिराकर एक दूसरा फोटॉन उत्सर्जित कराता है, जो आवृत्ति, कला और दिशा में पहले के समान होता है, इसलिए एक फोटॉन से दो बनते हैं और प्रकाश प्रवर्धित…

Q6.सामान्य विज्ञानमध्यम

पहला कार्यशील लेज़र, रूबी लेज़र, 1960 में किसने बनाया?

  1. A.चार्ल्स टाउन्स
  2. B.थियोडोर मैमन
  3. C.डेनिस गाबोर
  4. D.आर्थर शॉलो
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. थियोडोर मैमन

मैमन ने 1960 में पहला कार्यशील लेज़र बनाया, जिसमें कृत्रिम रूबी की छड़, अर्थात एल्युमिनियम ऑक्साइड में क्रोमियम आयन, प्रयुक्त थी और जिसे फ्लैश लैंप से पंप किया जाता था; वह गहरे लाल प्रकाश की स्पंदें देता था।

Q7.सामान्य विज्ञानमध्यम

लेज़र प्रकाश का वह गुण, जिसके कारण उसकी सभी तरंगें एक ही कला में होती हैं, क्या कहलाता है?

  1. A.एकवर्णता
  2. B.कलासंबद्धता
  3. C.अपसरण
  4. D.ध्रुवण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कलासंबद्धता

कलासंबद्धता का अर्थ है कि पुंज की तरंगें एक स्थिर कला संबंध बनाए रखती हैं, अर्थात शृंग शृंग के साथ कदम मिलाकर चलता है; यह सीधे उत्तेजित उत्सर्जन का परिणाम है, क्योंकि प्रत्येक नया फोटॉन उसी कला में निकलता है जिसमें उसे उत्पन्न करने वाला फोटॉन था, और इसी से…

Q8.सामान्य विज्ञानमध्यम

1911 में लगभग 4.2 केल्विन तक ठंडे किए गए पारे में अतिचालकता की खोज किसने की?

  1. A.हाइके कामरलिंग ओंस
  2. B.वाल्थर माइसनर
  3. C.जॉन बार्डीन
  4. D.जॉर्ज बेडनोर्ज
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. हाइके कामरलिंग ओंस

डच भौतिकविद कामरलिंग ओंस, जो हीलियम को द्रव बनाने में पहले ही सफल हो चुके थे, ने 1911 में उसी द्रव हीलियम से पारे को ठंडा किया और पाया कि लगभग 4.2 केल्विन से नीचे उसका विद्युत प्रतिरोध पूर्णतः लुप्त हो जाता है; यही अतिचालकता का पहला प्रेक्षण था।

Q9.सामान्य विज्ञानकठिन

अतिचालक के भीतर से चुंबकीय फ्लक्स के बाहर निकल जाने को क्या कहते हैं?

  1. A.हॉल प्रभाव
  2. B.माइसनर प्रभाव
  3. C.जीमान प्रभाव
  4. D.सीबेक प्रभाव
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. माइसनर प्रभाव

जब कोई पदार्थ अतिचालक बनता है तो वह चुंबकीय क्षेत्र को अपने भीतर से बाहर धकेल देता है और पूर्ण प्रतिचुंबकीय जैसा व्यवहार करता है; यह प्रभाव माइसनर तथा ओक्सेनफेल्ड ने 1933 में बताया, और इसी कारण किसी ठंडे किए गए अतिचालक के ऊपर छोटा चुंबक तैरता रहता है, जैसा…

Q10.सामान्य विज्ञानकठिन

लेज़र क्रिया के लिए अनिवार्य शर्त क्या है?

  1. A.जनसंख्या प्रतिलोमन
  2. B.पूर्ण आंतरिक परावर्तन
  3. C.तापायनिक उत्सर्जन
  4. D.नाभिकीय विखंडन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जनसंख्या प्रतिलोमन

साधारण पदार्थ में अधिकांश परमाणु नीचे के ऊर्जा स्तर पर रहते हैं, इसलिए उससे गुजरता प्रकाश प्रवर्धित होने की तुलना में अधिक अवशोषित होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रकाश-विद्युत प्रभाव की खोज किसने की और व्याख्या किसने की?

हेनरिक हर्ट्ज ने 1887 में विद्युत स्फुलिंगों का अध्ययन करते समय इसका प्रेक्षण किया, और अल्बर्ट आइंस्टाइन ने 1905 में प्रकाश को क्वांटा की धारा मानकर इसकी व्याख्या की। इस नियम के लिए आइंस्टाइन को 1921 का नोबेल पुरस्कार मिला और मिलिकन ने उनके समीकरण की प्रायोगिक पुष्टि की।

किसी धातु का कार्यफलन क्या होता है?

यह उस धातु की सतह से एक इलेक्ट्रॉन मुक्त करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा है, जो प्लांक नियतांक और उस धातु की देहली आवृत्ति के गुणनफल के बराबर होती है। सीजियम तथा पोटैशियम जैसी कम कार्यफलन वाली धातुएँ दृश्य प्रकाश से भी इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित कर देती हैं।

लेज़र प्रकाश साधारण प्रकाश से किस प्रकार भिन्न है?

चार गुणों से। वह एकवर्णी है, अर्थात लगभग एक ही तरंगदैर्घ्य का; कलासंबद्ध है, जिसमें सभी तरंगें एक ही कला में हैं; अत्यधिक दिशात्मक है, इसलिए पुंज लगभग फैलता नहीं; और तीव्र है, क्योंकि ऊर्जा एक सँकरे पुंज में केंद्रित रहती है।

जनसंख्या प्रतिलोमन क्या है?

यह वह अवस्था है जिसमें सक्रिय माध्यम के अधिक परमाणु नीचे के स्तर की तुलना में ऊँचे ऊर्जा स्तर पर होते हैं। साधारण पदार्थ में वितरण इसके उलट होता है, इसलिए पंपन से यह प्रतिलोमन बनाया जाता है, और इसमें उस मेटास्टेबल स्तर की सहायता ली जाती है जहाँ परमाणु पर्याप्त देर रुक सकें।

अतिचालकों का उपयोग कहाँ होता है?

मुख्यतः बहुत प्रबल चुंबक बनाने में, क्योंकि उनमें धारा बिना हानि बहती है। इनका उपयोग चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन मशीनों, कण त्वरकों के चुंबकों, चुंबकीय उत्प्लावन रेलगाड़ियों, स्क्विड चुंबकत्वमापियों तथा प्रायोगिक विद्युत केबलों में होता है।

स्रोत

  • भौतिकी भाग दो (कक्षा 12), अध्याय 11: विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति — एनसीईआरटी
  • भौतिकी भाग एक (कक्षा 12), विद्युत धारा अध्याय: प्रतिरोधकता और ताप के साथ उसका परिवर्तन — एनसीईआरटी
  • भौतिकी का नोबेल पुरस्कार 1921 तथा 1971: प्रशस्तियाँ — नोबेल फाउंडेशन
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