अयस्क, धातुकर्म और मिश्रधातुएं: प्रक्रम तथा संघटन
परीक्षा के लिए अयस्क, धातुकर्म और मिश्रधातुओं के नोट्स: अयस्कों के सूत्र, झाग प्लवन, निस्तापन और भर्जन, मंडल परिष्करण, मॉण्ड प्रक्रम तथा मिश्रधातुओं का संघटन।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

प्रयोग में आने वाली लगभग प्रत्येक धातु हमारे पास किसी चट्टान से आती है, शुद्ध धातु की किसी खान से नहीं। उसे बाहर निकालने का रसायन धातुकर्म है, और उसे उपयोगी बनाने का रसायन मिश्रधातु बनाना है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विज्ञान का यह सर्वाधिक अंक देने वाले अध्यायों में से एक है, क्योंकि यह ऐसे युग्मों से बना है जो एक अंक के प्रश्न के रूप में पूछे जा सकते हैं: अयस्क के साथ धातु और सूत्र, प्रक्रिया के साथ वह अयस्क जिसके लिए वह उपयुक्त है, परिष्करण विधि के साथ वह धातु जिसे वह शुद्ध करती है, और मिश्रधातु के साथ उसके संघटक। ये नोट्स चारों सूचियां और उनके पीछे का तर्क प्रस्तुत करते हैं।
खनिज, अयस्क और गैंग
खनिज किसी धातु का कोई भी प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला यौगिक है। अयस्क वह खनिज है जिससे धातु व्यावहारिक मात्रा में और लाभ पर निकाली जा सके, इसलिए प्रत्येक अयस्क खनिज है किंतु प्रत्येक खनिज अयस्क नहीं। अयस्क के साथ मिली मिट्टी तथा पथरीली अशुद्धि को गैंग या आधात्री कहते हैं। प्रगलन के समय गैंग से संयोग करने के लिए मिलाया गया पदार्थ गालक है, और दोनों से बना गलनशील उत्पाद, जो पिघली धातु पर तैरता है और अलग निकाल लिया जाता है, धातुमल है। जब गैंग क्षारकीय हो तो सिलिका जैसा अम्लीय गालक और जब गैंग अम्लीय हो तो चूना पत्थर जैसा क्षारकीय गालक प्रयुक्त होता है।
| वर्ग | अयस्क | सूत्र | धातु |
|---|---|---|---|
| ऑक्साइड | हेमेटाइट | Fe2O3 | लोहा |
| ऑक्साइड | मैग्नेटाइट | Fe3O4 | लोहा |
| ऑक्साइड | बॉक्साइट | Al2O3 जलयोजन जल के साथ | एल्युमिनियम |
| ऑक्साइड | कैसिटेराइट या टिन पत्थर | SnO2 | टिन |
| सल्फाइड | गैलेना | PbS | सीसा |
| सल्फाइड | जिंक ब्लेंड | ZnS | जस्ता |
| सल्फाइड | कॉपर पायराइट | CuFeS2 | तांबा |
| सल्फाइड | सिनेबार | HgS | पारा |
| सल्फाइड | अर्जेंटाइट | Ag2S | चांदी |
| कार्बोनेट | कैलेमीन | ZnCO3 | जस्ता |
| कार्बोनेट | सिडेराइट | FeCO3 | लोहा |
| कार्बोनेट | मैग्नेसाइट | MgCO3 | मैग्नीशियम |
| हैलाइड | क्रायोलाइट | Na3AlF6 | एल्युमिनियम तथा सोडियम |
| हैलाइड | शैल लवण | NaCl | सोडियम |
| सल्फेट | जिप्सम | CaSO4 जलयोजन जल के साथ | कैल्शियम |
अयस्क का सांद्रण
- जल प्रक्षालन या गुरुत्व पृथक्करण, जो तब प्रयुक्त होता है जब अयस्क के कण गैंग से भारी हों, जैसे हेमेटाइट और टिन पत्थर में।
- चुंबकीय पृथक्करण, जो तब प्रयुक्त होता है जब अयस्क या अशुद्धि में से कोई चुंबकीय हो, जैसे मैग्नेटाइट, क्रोमाइट और वुल्फ्रेमाइट में।
- झाग प्लवन, जो जिंक ब्लेंड और कॉपर पायराइट जैसे सल्फाइड अयस्कों की मानक विधि है। चूर्णित अयस्क को जल, झाग बनाने वाले चीड़ के तेल तथा संग्राहक के साथ मथा जाता है; सल्फाइड कण तेल से भीगकर झाग के साथ ऊपर आते हैं, जबकि गैंग जल से भीगकर नीचे बैठ जाता है। सोडियम सायनाइड अवनमक का कार्य करता है और एक सल्फाइड को रोक रखता है जब दूसरा तैरता है।
- निक्षालन, एक रासायनिक विधि जिसमें अयस्क को किसी उपयुक्त अभिकर्मक में घोला जाता है। बेयर प्रक्रम में बॉक्साइट को गर्म सोडियम हाइड्रॉक्साइड से निक्षालित किया जाता है, और सोना तथा चांदी वायु की उपस्थिति में तनु सोडियम सायनाइड से निक्षालित किए जाते हैं।
निस्तापन, भर्जन और अपचयन
निस्तापन अयस्क को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में, उसके गलनांक से नीचे गर्म करना है। इससे जलयोजन जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड निकल जाते हैं, इसलिए यह कार्बोनेट तथा जलयोजित अयस्कों के लिए प्रयुक्त होता है: कैलेमीन जिंक ऑक्साइड बन जाता है और बॉक्साइट अपना संयुक्त जल खो देता है। भर्जन अयस्क को वायु की पर्याप्त आपूर्ति में गर्म करना है, और यह सल्फाइड अयस्कों के लिए प्रयुक्त होता है: जिंक ब्लेंड जिंक ऑक्साइड बन जाता है और गंधक सल्फर डाइऑक्साइड के रूप में निकल जाती है। दोनों चरणों का एक ही प्रयोजन है, अयस्क को ऑक्साइड में बदलना, क्योंकि ऑक्साइड का अपचयन सबसे सरल होता है।
इसके बाद धातु की क्रियाशीलता के अनुसार ऑक्साइड का अपचयन तीन भिन्न ढंग से होता है। कार्बन अपचयन या कोक के साथ प्रगलन मध्यम क्रियाशील धातुओं के लिए है: वात्या भट्टी में लोहे का ऑक्साइड, तथा कोक के साथ गर्म किया गया जिंक ऑक्साइड, जिससे धातु बनती है और स्पेल्टर के रूप में आसवित होकर निकलती है। स्वतः अपचयन, जिसमें सल्फाइड का एक भाग भर्जित होकर ऑक्साइड बनता है और शेष सल्फाइड से अभिक्रिया करता है, तांबे तथा सीसे के लिए है। विद्युत अपचयन सर्वाधिक क्रियाशील धातुओं, अर्थात सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम का एकमात्र मार्ग है, जिनके ऑक्साइडों का अपचयन कार्बन नहीं कर सकता। एल्युमिनियम हॉल तथा हेरॉल्ट प्रक्रम से प्राप्त होता है, जिसमें शुद्ध किए गए एल्युमिना को पिघले क्रायोलाइट में घोलकर, गलनांक घटाने के लिए फ्लोरस्पार मिलाकर, कार्बन एनोड से विद्युत अपघटन किया जाता है। एक विशेष स्थिति थर्मिट या एल्युमिनोथर्मिक प्रक्रम है, जिसमें एल्युमिनियम चूर्ण क्रोमियम तथा मैंगनीज के ऑक्साइडों का अपचयन करता है, और यही अभिक्रिया रेल पटरियों की वेल्डिंग में भी प्रयुक्त होती है।
अशुद्ध धातु का परिष्करण
| विधि | सिद्धांत | धातुएं |
|---|---|---|
| आसवन | धातु कम ताप पर उबलती है और अशुद्धियां नहीं | जस्ता, पारा, कैडमियम |
| द्रवण | धातु पिघलकर ढालू चूल्हे पर बह जाती है और अशुद्धि रह जाती है | टिन |
| पोलिंग | हरी लकड़ी के डंडे हाइड्रोकार्बन छोड़ते हैं जो उपस्थित धातु ऑक्साइड का अपचयन करते हैं | तांबा, टिन |
| विद्युत परिष्करण | अशुद्ध धातु एनोड, शुद्ध धातु कैथोड और धातु का लवण विद्युत अपघट्य | तांबा, चांदी, एल्युमिनियम, जस्ता, निकल |
| मंडल परिष्करण | अशुद्धियां ठोस की अपेक्षा पिघली धातु में अधिक घुलती हैं, इसलिए चलता हुआ पिघला मंडल उन्हें एक सिरे तक ले जाता है | सिलिकॉन, जर्मेनियम, गैलियम, अर्धचालकों के लिए |
| वाष्प प्रावस्था परिष्करण, मॉण्ड प्रक्रम | धातु वाष्पशील कार्बोनिल बनाती है जो अधिक ताप पर वियोजित हो जाता है | निकल |
| वाष्प प्रावस्था परिष्करण, वान आर्केल प्रक्रम | धातु वाष्पशील आयोडाइड बनाती है जो तप्त तंतु पर वियोजित हो जाता है | टाइटेनियम तथा ज़िरकोनियम |
| कपेलन | अशुद्धि ऑक्सीकृत होकर अस्थि भस्म के कपेल में सोख ली जाती है | सीसा युक्त चांदी |
मिश्रधातुएं और उन्हें क्यों बनाया जाता है
मिश्रधातु दो या अधिक धातुओं का, अथवा किसी धातु का किसी अधातु की थोड़ी मात्रा के साथ समांगी मिश्रण है, जो कठोरता, सामर्थ्य, संक्षारण प्रतिरोध, रूप या विद्युत व्यवहार सुधारने के लिए बनाया जाता है। पारे की किसी अन्य धातु के साथ मिश्रधातु को अमलगम कहते हैं। इस्पात कार्बन के साथ लोहा है, और कार्बन का अनुपात उत्पाद तय करता है: पिटवां लोहा सबसे शुद्ध रूप है जिसमें कार्बन सबसे कम होता है, इस्पात में मध्यम मात्रा और ढलवां लोहे में सर्वाधिक।
| मिश्रधातु | मुख्य संघटक | उपयोग |
|---|---|---|
| पीतल | तांबा और जस्ता | बर्तन, फिटिंग, वाद्य यंत्र |
| कांसा | तांबा और टिन | मूर्तियां, सिक्के, पदक |
| जर्मन सिल्वर | तांबा, जस्ता और निकल, इसमें चांदी नहीं होती | मेज के बर्तन तथा आभूषण |
| गन मेटल | तांबा, टिन और जस्ता | गियर, बेयरिंग, भाप फिटिंग |
| बेल मेटल | तांबा और टिन, कांसे से अधिक टिन अनुपात के साथ | घंटे और घड़ियाल |
| सोल्डर | सीसा और टिन | धातु भागों तथा तारों को जोड़ना |
| ड्यूरालुमिन | एल्युमिनियम, तांबा, मैग्नीशियम और मैंगनीज | वायुयान तथा दाब पात्र |
| मैग्नेलियम | एल्युमिनियम और मैग्नीशियम | हल्की तुला भुजाएं तथा उपकरण |
| स्टेनलेस स्टील | लोहा, क्रोमियम तथा निकल के साथ | छुरी-कांटे, बर्तन, शल्य उपकरण |
| नाइक्रोम | निकल, क्रोमियम और लोहा | विद्युत उपकरणों के तापन तत्व |
| इन्वार | लोहा और निकल | दोलक, मापन फीते, जहां प्रसार कम रहना चाहिए |
| अल्निको | एल्युमिनियम, निकल और कोबाल्ट, लोहे के साथ | स्थायी चुंबक |
| कॉन्स्टैन्टन | तांबा और निकल | प्रतिरोध तार तथा तापयुग्म |
| टाइप मेटल | सीसा, एंटिमनी और टिन | छपाई के टाइप |
दो तथ्य इस अध्याय को पूरा करते हैं। संक्षारण रोकने के लिए लोहे पर अधिक क्रियाशील धातु की परत चढ़ाई जाती है, और जब वह परत जस्ते की हो तो उसे जस्तीकरण कहते हैं; जस्ता लोहे की रक्षा वहां भी करता है जहां परत खुरच गई हो, और इस व्यवहार को बलिदानी सुरक्षा कहते हैं। तथा भौतिक कीर्तिमान स्मरण रखने योग्य हैं: एल्युमिनियम भूपर्पटी की सर्वाधिक बहुल धातु है, लोहा दूसरी, पारा कक्ष ताप पर द्रव रहने वाली एकमात्र धातु, टंगस्टन सर्वोच्च गलनांक वाली धातु, चांदी विद्युत की सर्वोत्तम चालक, तथा सोना और चांदी सभी धातुओं में सर्वाधिक आघातवर्ध्य एवं तन्य।
परीक्षा की दृष्टि से
यहां लगभग सभी अंक चार सूचियां देती हैं, और चारों मिलान प्रश्नों के रूप में पूछी जाती हैं। पहली है अयस्क के साथ धातु तथा सूत्र, जहां जस्ते के लिए कैलेमीन और जिंक ब्लेंड तथा लोहे के लिए सिडेराइट और हेमेटाइट भ्रम पैदा करते हैं। दूसरी है प्रक्रम के साथ उपयुक्त अयस्क: सल्फाइडों के लिए झाग प्लवन, मैग्नेटाइट तथा क्रोमाइट के लिए चुंबकीय पृथक्करण, कार्बोनेटों के लिए निस्तापन और सल्फाइडों के लिए भर्जन, और निस्तापन तथा भर्जन का यही भेद अध्याय का सर्वाधिक पूछा जाने वाला बिंदु है। तीसरी है परिष्करण विधि के साथ धातु: जस्ते तथा पारे के लिए आसवन, टिन के लिए द्रवण, तांबे के लिए पोलिंग, सिलिकॉन तथा जर्मेनियम के लिए मंडल परिष्करण, निकल के लिए मॉण्ड प्रक्रम और टाइटेनियम के लिए वान आर्केल प्रक्रम। चौथी है मिश्रधातु के साथ संघटक, जहां चांदी रहित जर्मन सिल्वर और तापन तत्वों का नाइक्रोम लगभग प्रत्येक वर्ष आते हैं। इनके साथ भौतिक कीर्तिमान जोड़ें, अर्थात भूपर्पटी की सर्वाधिक बहुल धातु एल्युमिनियम, सर्वोच्च गलनांक वाली टंगस्टन और एकमात्र द्रव धातु पारा।
महत्वपूर्ण तथ्य
| अयस्क और खनिज | अयस्क वह खनिज है जिससे धातु लाभपूर्वक निकाली जा सके |
|---|---|
| गैंग, गालक और धातुमल | गैंग अशुद्धि है, गालक उससे संयोग करता है और गलनशील उत्पाद धातुमल है |
| हेमेटाइट और मैग्नेटाइट | Fe2O3 तथा Fe3O4, दोनों लोहे के अयस्क |
| बॉक्साइट | जलयोजित एल्युमिनियम ऑक्साइड, एल्युमिनियम का मुख्य अयस्क, बेयर प्रक्रम से शुद्ध |
| गैलेना और जिंक ब्लेंड | PbS तथा ZnS, सीसे और जस्ते के सल्फाइड अयस्क |
| झाग प्लवन | सल्फाइड अयस्कों के लिए; झाग कारक चीड़ का तेल और अवनमक सोडियम सायनाइड |
| निस्तापन | वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में गर्म करना, कार्बोनेट तथा जलयोजित अयस्कों के लिए |
| भर्जन | अधिक वायु में गर्म करना, सल्फाइड अयस्कों के लिए; गंधक सल्फर डाइऑक्साइड बनकर निकलती है |
| विद्युत अपचयन | सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम तथा एल्युमिनियम का एकमात्र मार्ग |
| हॉल तथा हेरॉल्ट प्रक्रम | पिघले क्रायोलाइट में एल्युमिना, फ्लोरस्पार तथा कार्बन एनोड, एल्युमिनियम के लिए |
| मंडल परिष्करण | अर्धचालकों में प्रयुक्त सिलिकॉन, जर्मेनियम तथा गैलियम के लिए |
| मॉण्ड तथा वान आर्केल प्रक्रम | वाष्पशील कार्बोनिल से निकल; वाष्पशील आयोडाइड से टाइटेनियम तथा ज़िरकोनियम |
| पीतल, कांसा, जर्मन सिल्वर | तांबा जस्ते के साथ; तांबा टिन के साथ; तांबा जस्ते तथा निकल के साथ |
| नाइक्रोम और इन्वार | तापन तत्वों के लिए निकल, क्रोमियम तथा लोहा; कम प्रसार के लिए लोहा तथा निकल |
| भूपर्पटी की सर्वाधिक बहुल धातु | एल्युमिनियम, उसके बाद लोहा |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
निम्नलिखित में से किस धातु में आघातवर्ध्यता तथा तन्यता दोनों गुण होते हैं:
- A.Na
- B.Au
- C.Ce
- D.Hg
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, Au अर्थात सोना है। आघातवर्ध्यता पतली चादरों में पीटे जाने का गुण है और तन्यता तारों में खींचे जाने का गुण, और सोने में ये दोनों किसी भी धातु से अधिक मात्रा में हैं: एक ग्राम सोने को लगभग एक वर्ग मीटर की चादर में पीटा जा सकता है और बहुत लंबे तार में खींचा जा सकता है, इसीलिए सदियों से सोने का वरक और सोने का तार बनाया जाता रहा है। विकल्प A गलत है क्योंकि सोडियम इतना मृदु है कि उसे चाकू से काटा जा सकता है और इतना क्रियाशील है कि उसे किरोसिन में रखा जाता है, इसलिए उसे प्रयोग योग्य तार में नहीं खींचा जा सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि सीरियम, जो लाइटर के पत्थरों तथा मिश्रधातुओं में प्रयुक्त एक लैंथेनाइड है, भंगुर है और इन दोनों गुणों के लिए नहीं जाना जाता। विकल्प D गलत है क्योंकि पारा कक्ष ताप पर द्रव रहने वाली एकमात्र धातु है, और किसी द्रव को न चादरों में पीटा जा सकता है न तारों में खींचा जा सकता है।
गैलेना किस धातु का अयस्क है?
- A.जस्ता
- B.सीसा
- C.टिन
- D.पारा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, सीसा है। गैलेना सीसे का सल्फाइड है, जिसका सूत्र PbS है, और यह वही मुख्य अयस्क है जिससे सीसा निकाला जाता है; सल्फाइड होने के कारण इसका सांद्रण झाग प्लवन से होता है और अपचयन से पहले इसे भर्जित करके ऑक्साइड में बदला जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि जस्ते के अयस्क जिंक ब्लेंड हैं, जो सल्फाइड ZnS है, तथा कैलेमीन, जो कार्बोनेट ZnCO3 है। विकल्प C गलत है क्योंकि टिन कैसिटेराइट या टिन पत्थर से आता है, जो ऑक्साइड SnO2 है, और उसका परिष्करण द्रवण से होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि पारा सिनेबार से आता है, जो सल्फाइड HgS है, और उसका परिष्करण आसवन से होता है क्योंकि वह कम ताप पर उबलता है। बनाने योग्य आदत यह है कि नाम का अंत देखें: इस समूह के अधिकांश सल्फाइड ब्लेंड, पायराइट, गैलेना या सिनेबार पर समाप्त होते हैं, जबकि कार्बोनेट आइट पर समाप्त होते हैं और उनका भर्जन नहीं, निस्तापन होता है।
झाग प्लवन किस प्रकार के अयस्क के सांद्रण के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विधि है?
- A.ऑक्साइड अयस्क
- B.सल्फाइड अयस्क
- C.कार्बोनेट अयस्क
- D.हैलाइड अयस्क
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, सल्फाइड अयस्क है। झाग प्लवन में चूर्णित अयस्क को जल, चीड़ के तेल जैसे झाग कारक तथा संग्राहक के साथ मथा जाता है। सल्फाइड कण तेल से अधिमानतः भीगते हैं और झाग के साथ ऊपर चले जाते हैं, जबकि मिट्टी वाला गैंग जल से भीगकर तल में बैठ जाता है, इसलिए जिंक ब्लेंड और कॉपर पायराइट का सांद्रण इसी से होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि ऑक्साइड अयस्क सामान्यतः गैंग से भारी होते हैं और उनका सांद्रण जल प्रक्षालन से होता है, जैसे हेमेटाइट तथा टिन पत्थर में। विकल्प C गलत है क्योंकि कार्बोनेट अयस्क तेल से नहीं भीगते और उनका सांद्रण निस्तापन से पहले सामान्यतः प्रक्षालन से होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि शैल लवण जैसे हैलाइड अयस्क जल में घुलनशील हैं और उन्हें घोलकर तथा क्रिस्टलन से संभाला जाता है। सोडियम सायनाइड जैसा अवनमक एक सल्फाइड को रोक सकता है जब दूसरा तैरता है।
निस्तापन भर्जन से इस बात में भिन्न है कि निस्तापन किया जाता है
- A.वायु की पर्याप्त आपूर्ति में
- B.वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में
- C.किसी अपचायक की उपस्थिति में
- D.अयस्क के गलनांक से ऊपर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। निस्तापन अयस्क को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में तथा उसके गलनांक से नीचे गर्म करना है, जिससे जलयोजन जल और कार्बन डाइऑक्साइड निकल जाएं; इसलिए यही चरण कैलेमीन जैसे कार्बोनेट अयस्कों तथा बॉक्साइट जैसे जलयोजित अयस्कों के लिए प्रयुक्त होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि वायु की पर्याप्त आपूर्ति में गर्म करना भर्जन है, जो जिंक ब्लेंड जैसे सल्फाइड अयस्कों पर लागू होता है, जहां गंधक सल्फर डाइऑक्साइड के रूप में निकलती है। विकल्प C गलत है क्योंकि कोक जैसा अपचायक मिलाना प्रगलन या अपचयन का अलग चरण है, जो निस्तापन या भर्जन के बाद आता है। विकल्प D गलत है क्योंकि निस्तापन और भर्जन दोनों जानबूझकर गलनांक से नीचे किए जाते हैं; अयस्क को पिघलाना प्रगलन का कार्य है। दोनों चरणों का एक ही उद्देश्य है, ऑक्साइड प्राप्त करना, जो अपचयन के लिए सबसे सरल रूप है।
मंडल परिष्करण अत्यंत उच्च शुद्धता की धातुएं प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त होता है और किस सिद्धांत पर निर्भर है?
- A.धातु का क्वथनांक उसकी अशुद्धियों से कम होता है
- B.अशुद्धियां ठोस धातु की अपेक्षा पिघली धातु में अधिक घुलनशील होती हैं
- C.अशुद्धि वाष्पशील कार्बोनिल बनाती है
- D.अशुद्धि ऑक्सीकृत होकर सरंध्र कपेल में सोख ली जाती है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। मंडल परिष्करण इस तथ्य पर आधारित है कि अशुद्धियां उसी धातु के ठोस रूप की अपेक्षा पिघले रूप में अधिक घुलनशील होती हैं। चल तापक से एक संकरा पिघला मंडल बनाया जाता है और छड़ के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जाता है, जिससे अशुद्धियां पिघले भाग के साथ चलकर एक सिरे पर संचित हो जाती हैं, और वह सिरा काट दिया जाता है; यही विधि अर्धचालकों में प्रयुक्त अत्यंत शुद्ध सिलिकॉन, जर्मेनियम और गैलियम देती है। विकल्प A गलत है क्योंकि कम क्वथनांक आसवन द्वारा परिष्करण का आधार है, जो जस्ता, पारा और कैडमियम के लिए प्रयुक्त होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि वाष्पशील कार्बोनिल बनना निकल के मॉण्ड प्रक्रम का आधार है, जिसमें निकल कार्बोनिल अधिक ताप पर वियोजित हो जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि सरंध्र कपेल में ऑक्सीकरण कपेलन का वर्णन है, जो चांदी को सीसे से अलग करने में प्रयुक्त होता है।
पीतल किन दो धातुओं की मिश्रधातु है?
- A.तांबा और टिन
- B.तांबा और जस्ता
- C.तांबा और निकल
- D.तांबा और एल्युमिनियम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, तांबा और जस्ता है। पीतल तांबे को जस्ते के साथ मिलाकर बनाया जाता है, जिससे तांबे से कठोर, ढालने तथा मशीनन में सरल और साधारण संक्षारण से बची रहने वाली धातु मिलती है, इसलिए वह बर्तनों, नलों, फिटिंग तथा वाद्य यंत्रों के ढांचे में प्रयुक्त होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि तांबा और टिन कांसा बनाते हैं, जो मूर्तियों, सिक्कों और पदकों की मिश्रधातु है; बेल मेटल वही युग्म है जिसमें टिन का अनुपात अधिक होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि तांबा और निकल कॉन्स्टैन्टन बनाते हैं, जो प्रतिरोध तार तथा तापयुग्म में प्रयुक्त होता है, और तांबा, जस्ता तथा निकल तीनों मिलकर जर्मन सिल्वर बनाते हैं, जिसमें नाम के विपरीत चांदी नहीं होती। विकल्प D गलत है क्योंकि तांबा एल्युमिनियम मिश्रधातु ड्यूरालुमिन का एक संघटक है, किंतु ड्यूरालुमिन वायुयानों में प्रयुक्त एल्युमिनियम मिश्रधातु है और उसे पीतल नहीं कहा जाता।
जर्मन सिल्वर तांबे, जस्ते और किस तीसरी धातु की मिश्रधातु है?
- A.चांदी
- B.निकल
- C.टिन
- D.सीसा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, निकल है। जर्मन सिल्वर तांबे, जस्ते और निकल की मिश्रधातु है, और इसका नाम उसके सफेद चांदी जैसे रूप से आया है, उसके संघटन से नहीं, क्योंकि उसमें चांदी बिल्कुल नहीं होती; वह मेज के बर्तनों, आभूषणों तथा विद्युत संपर्कों में प्रयुक्त होता है। विकल्प A ठीक इसी भ्रम के कारण गलत है: जो अभ्यर्थी नाम से अनुमान लगाएगा वह चांदी चुनेगा और अंक खो देगा। विकल्प C गलत है क्योंकि टिन तांबे के साथ कांसा देता है, और टिन तांबे तथा जस्ते के साथ मिलकर गन मेटल देता है, जो गियर तथा भाप फिटिंग में प्रयुक्त होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि सीसा टिन के साथ सोल्डर देता है, और सीसा एंटिमनी तथा टिन के साथ छपाई का टाइप मेटल देता है। भ्रामक नामों की सूची स्वयं सीखने योग्य है: जर्मन सिल्वर में चांदी नहीं होती, और निकल सिल्वर तथा डच मेटल भी इसी प्रकार अपने रूप के कारण नामित हैं।
विद्युत अपघटन द्वारा एल्युमिनियम के निष्कर्षण में एल्युमिना में क्रायोलाइट मुख्यतः किस कारण मिलाया जाता है?
- A.अपचायक का कार्य करने के लिए
- B.गलनांक घटाने तथा पिघले मिश्रण की चालकता बढ़ाने के लिए
- C.कार्बन एनोड का ऑक्सीकरण करने के लिए
- D.लोहे को धातुमल के रूप में हटाने के लिए
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। शुद्ध एल्युमिना अत्यंत उच्च ताप पर पिघलता है, इसलिए हॉल तथा हेरॉल्ट प्रक्रम में उसे पिघले क्रायोलाइट, अर्थात सोडियम हेक्साफ्लुओरोएल्युमिनेट में घोला जाता है, सामान्यतः कुछ फ्लोरस्पार के साथ, जो नांद का कार्यकारी ताप घटाता है और पिघले मिश्रण को विद्युत का बहुत अच्छा चालक बना देता है। इसके बाद कार्बन एनोड प्रयुक्त होते हैं और एल्युमिनियम कैथोड पर संचित होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि क्रायोलाइट अपचायक के रूप में कोई भाग नहीं लेता; यहां अपचयन विद्युतीय है, इसीलिए एल्युमिनियम लोहे की तरह कोक से प्रगलन द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि कार्बन एनोड वास्तव में मुक्त ऑक्सीजन से धीरे-धीरे क्षय होता है, किंतु वह एक अवांछित दुष्प्रभाव है, क्रायोलाइट मिलाने का प्रयोजन नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि लोहे तथा सिलिका की अशुद्धियां पहले ही हट जाती हैं, जब बॉक्साइट का गर्म सोडियम हाइड्रॉक्साइड से बेयर निक्षालन होता है।
जंग रोकने के लिए लोहे पर जस्ते की परत चढ़ाने की प्रक्रिया कहलाती है
- A.कलई करना
- B.जस्तीकरण
- C.एनोडीकरण
- D.क्रोमियम की विद्युत लेपन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, जस्तीकरण है। जस्तीकरण लोहे या इस्पात पर जस्ते की परत चढ़ाना है, जो सामान्यतः उसे पिघले जस्ते में डुबोकर किया जाता है। जस्ता लोहे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए परत खुरच जाने पर भी जस्ता नीचे के लोहे के स्थान पर स्वयं संक्षारित होता है, और इस व्यवहार को बलिदानी सुरक्षा कहते हैं, इसीलिए जस्तीकृत चादरें तथा पाइप खुले लोहे से कहीं अधिक चलते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि कलई करना टिन की परत चढ़ाना है, जो खाद्य डिब्बों के भीतर प्रयुक्त होता है; टिन लोहे से कम क्रियाशील है, इसलिए टिन चढ़ी चादर में खरोंच वस्तुतः जंग लगने को तेज कर देती है। विकल्प C गलत है क्योंकि एनोडीकरण एल्युमिनियम पर प्राकृतिक ऑक्साइड परत को मोटा करना है, लोहे का उपचार नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि क्रोमियम लेपन मुख्यतः रूप तथा कठोरता के लिए किया जाता है और लोहे को कोई बलिदानी सुरक्षा नहीं देता।
मॉण्ड प्रक्रम किस धातु के परिष्करण के लिए प्रयुक्त होता है?
- A.निकल
- B.टाइटेनियम
- C.तांबा
- D.जस्ता
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, निकल है। मॉण्ड प्रक्रम में अशुद्ध निकल को कार्बन मोनोऑक्साइड की धारा में मध्यम ताप पर गर्म किया जाता है, जिससे वाष्पशील यौगिक निकल टेट्राकार्बोनिल बनता है; इस वाष्प को ठोस अशुद्धियों से दूर ले जाकर अधिक ताप पर गर्म किया जाता है, जिससे वह वियोजित होकर अत्यंत शुद्ध निकल जमा कर देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि टाइटेनियम का, ज़िरकोनियम के साथ, परिष्करण वान आर्केल प्रक्रम से होता है, जिसमें धातु वाष्पशील आयोडाइड बनाती है जो तप्त टंगस्टन तंतु पर वियोजित हो जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि तांबे का परिष्करण विद्युत अपघटन से होता है, जिसमें अशुद्ध तांबा एनोड और शुद्ध तांबा कैथोड होता है, और पहले हरी लकड़ी से पोलिंग द्वारा होता था। विकल्प D गलत है क्योंकि जस्ते का परिष्करण आसवन से होता है, क्योंकि वह तुलनात्मक रूप से कम ताप पर उबलता है और अशुद्धियां नहीं।
वात्या भट्टी में हेमेटाइट तथा कोक के साथ चूना पत्थर मुख्यतः किस कारण मिलाया जाता है?
- A.लोहे के ऑक्साइड का लोहे में अपचयन करने के लिए
- B.गालक का कार्य करके सिलिका को धातुमल के रूप में हटाने के लिए
- C.भट्टी का ताप बढ़ाने के लिए
- D.कच्चे लोहे में कार्बन की मात्रा बढ़ाने के लिए
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। चूना पत्थर भट्टी में वियोजित होकर कैल्शियम ऑक्साइड बनाता है, जो एक क्षारकीय गालक है और अयस्क के अम्लीय सिलिका गैंग से संयोग करके कैल्शियम सिलिकेट बनाता है, जो एक गलनशील धातुमल है, पिघले लोहे पर तैरता है और अलग निकाल लिया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि लोहे के ऑक्साइड का अपचयन कोक तथा उससे बने कार्बन मोनोऑक्साइड से होता है, चूना पत्थर से नहीं; यही वह प्रतिष्ठित कार्बन अपचयन है जो मध्यम क्रियाशील धातुओं के लिए प्रयुक्त होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि ताप गर्म वायु की धौंकनी में कोक के जलने से आता है, और चूना पत्थर का वियोजन वस्तुतः ताप सोखता है। विकल्प D गलत है क्योंकि कच्चा लोहा कोक से कार्बन लेता है और उसमें लोहे के उत्पादों में सर्वाधिक कार्बन होता है, किंतु उसमें चूना पत्थर की कोई भूमिका नहीं; पिटवां लोहे में कार्बन सबसे कम और इस्पात में मध्यम मात्रा होती है।
विद्युत इस्तरी तथा टोस्टर के तापन तत्वों में कौन सी मिश्रधातु प्रयुक्त होती है?
- A.इन्वार
- B.नाइक्रोम
- C.ड्यूरालुमिन
- D.सोल्डर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, नाइक्रोम है। नाइक्रोम निकल, क्रोमियम और लोहे की मिश्रधातु है जिसका विद्युत प्रतिरोध तथा गलनांक उच्च होता है, और वह लाल तप्त होने पर भी सरलता से ऑक्सीकृत नहीं होती, इसलिए नाइक्रोम का तार वर्षों तक जलकर नष्ट हुए बिना दहकता रह सकता है; यही संयोजन उसे इस्तरी, टोस्टर, गीजर तथा हेयर ड्रायर के तापन तत्वों की मानक सामग्री बनाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि इन्वार लोहे तथा निकल की मिश्रधातु है जो अपने अत्यंत कम तापीय प्रसार के कारण चुनी जाती है और दोलकों तथा मापन फीतों में प्रयुक्त होती है, जहां गर्म होने से लंबाई नहीं बदलनी चाहिए। विकल्प C गलत है क्योंकि ड्यूरालुमिन, जो एल्युमिनियम की तांबे, मैग्नीशियम और मैंगनीज के साथ मिश्रधातु है, वायुयानों में प्रयुक्त हल्की संरचनात्मक मिश्रधातु है। विकल्प D गलत है क्योंकि सोल्डर, जो सीसे तथा टिन की मिश्रधातु है, जानबूझकर कम गलनांक वाली बनाई जाती है और तार जोड़ने में प्रयुक्त होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खनिज और अयस्क में क्या अंतर है?
खनिज किसी धातु का कोई भी प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला यौगिक है, जबकि अयस्क वह खनिज है जिससे धातु व्यावहारिक मात्रा में और लाभ पर निकाली जा सके। इसलिए प्रत्येक अयस्क खनिज है, किंतु जो खनिज बहुत निर्धन या बहुत कठिन हो वह अयस्क नहीं है।
निस्तापन भर्जन से किस प्रकार भिन्न है?
निस्तापन अयस्क को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में गर्म करना है, और यह कैलेमीन तथा बॉक्साइट जैसे कार्बोनेट और जलयोजित अयस्कों के लिए प्रयुक्त होता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल निकल जाते हैं। भर्जन वायु की पर्याप्त आपूर्ति में गर्म करना है और जिंक ब्लेंड जैसे सल्फाइड अयस्कों के लिए प्रयुक्त होता है, जहां गंधक सल्फर डाइऑक्साइड बनकर निकल जाती है।
एल्युमिनियम का निष्कर्षण कार्बन से अपचयन द्वारा क्यों नहीं होता?
क्योंकि एल्युमिनियम अत्यधिक क्रियाशील धातु है और उसका ऑक्साइड बहुत स्थायी है, इसलिए कार्बन उसका अपचयन नहीं कर सकता। एल्युमिनियम हॉल तथा हेरॉल्ट प्रक्रम में विद्युत अपचयन से प्राप्त होता है, जिसमें शुद्ध एल्युमिना को फ्लोरस्पार सहित पिघले क्रायोलाइट में घोलकर कार्बन एनोड से विद्युत अपघटित किया जाता है।
मंडल परिष्करण किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
इस तथ्य पर कि अशुद्धियां ठोस की अपेक्षा पिघली धातु में अधिक घुलनशील होती हैं। धातु की छड़ पर एक संकरा पिघला मंडल धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जाता है, जो अशुद्धियों को अपने साथ एक सिरे तक ले जाता है, और वह सिरा काट दिया जाता है। यह अर्धचालकों के लिए सिलिकॉन, जर्मेनियम तथा गैलियम पर प्रयुक्त होता है।
क्या जर्मन सिल्वर में चांदी होती है?
नहीं। जर्मन सिल्वर तांबे, जस्ते और निकल की मिश्रधातु है, और यह नाम केवल उसके सफेद, चांदी जैसे रूप का संकेत देता है। वह मेज के बर्तनों, आभूषणों तथा विद्युत संपर्कों में प्रयुक्त होता है, और यह नाम वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्रों का एक मानक भ्रम है।
परत खुरच जाने पर भी जस्तीकरण लोहे की रक्षा क्यों करता है?
क्योंकि जस्ता लोहे से अधिक क्रियाशील है। खरोंच पर जस्ता नीचे के लोहे के स्थान पर स्वयं संक्षारित होता है और इस प्रकार उसकी रक्षा करता रहता है, और इसे बलिदानी सुरक्षा कहते हैं। कलई करने से ऐसी रक्षा नहीं मिलती, क्योंकि टिन लोहे से कम क्रियाशील है और टिन चढ़ी चादर में खरोंच जंग लगने को तेज कर देती है।





