पदार्थ की अवस्थाएं और गुण: नोट्स और प्रश्न
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पदार्थ की अवस्थाओं और गुणों के नोट्स: ठोस, द्रव, गैस, अवस्था परिवर्तन, गुप्त ऊष्मा, गैस के नियम, प्लाज्मा और बीईसी।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

पदार्थ वह है जिसमें द्रव्यमान हो और जो स्थान घेरे। एसएससी, रेलवे, रक्षा और राज्य सेवाओं के सामान्य विज्ञान के हर पेपर में इस अध्याय से एक प्रश्न आता है, क्योंकि इसमें गणना नहीं, परिभाषा पूछी जाती है: किस अवस्था का आयतन निश्चित है पर आकार नहीं, कौन सा ठोस सीधे वाष्प बन जाता है, पिघलते समय एक ग्राम बर्फ कितनी ऊष्मा सोखती है, कौन सा नियम दाब को आयतन से जोड़ता है। अध्याय छोटा है और तथ्य स्थिर हैं, इसलिए इसे पूरा समाप्त कर लेना चाहिए।
तीन सामान्य अवस्थाएं और उनका अंतर
अणुगति सिद्धांत दो विचारों से तीनों अवस्थाओं को समझाता है: पदार्थ के कण सदा गति में रहते हैं, और वे एक दूसरे को आकर्षित करते हैं। ठोस में आकर्षण बल सबसे अधिक होता है और कण निश्चित स्थानों पर केवल कंपन करते हैं, इसलिए ठोस का अपना आकार और आयतन होता है तथा वह लगभग असंपीड्य होता है। द्रव में बल कम होता है, कण एक दूसरे पर सरकते हैं, इसलिए द्रव का आयतन निश्चित रहता है पर आकार पात्र का हो जाता है। गैस में बल नगण्य होता है और कण स्वतंत्र रूप से उड़ते हैं, इसलिए गैस का न आकार निश्चित होता है न आयतन, और वह अत्यधिक संपीड्य होती है।
| गुण | ठोस | द्रव | गैस |
|---|---|---|---|
| आकार और आयतन | दोनों निश्चित | आयतन निश्चित, आकार नहीं | दोनों अनिश्चित |
| अंतराअणुक बल | सर्वाधिक | मध्यम | नगण्य |
| संपीड्यता | नगण्य | बहुत कम | बहुत अधिक |
| विसरण | लगभग शून्य | धीमा | तेज |
| घनत्व | सर्वाधिक | अधिक | न्यूनतम |
| प्रवाह | नहीं बहता | बहता है | बहती है |
प्रयोगशाला की दो विशेष बातें बार-बार पूछी जाती हैं। पारा एकमात्र धातु है जो कमरे के ताप पर द्रव है, और ब्रोमीन एकमात्र अधातु है जो कमरे के ताप पर द्रव है। कांच अतिशीतित द्रव है, एक अक्रिस्टलीय ठोस जिसका कोई निश्चित गलनांक नहीं होता और जो अत्यंत धीमी गति से बहता है; इसी कारण उसे छद्म ठोस कहा जाता है।
अवस्था परिवर्तन और उसकी ऊष्मा
ऊष्मा देने या हटाने से, अथवा दाब बदलने से अवस्था बदलती है। गलन ठोस को गलनांक पर द्रव बनाता है, जो बर्फ के लिए एक वायुमंडल दाब पर 0 डिग्री सेल्सियस या 273.15 केल्विन है। क्वथन द्रव को क्वथनांक पर पूरे आयतन में गैस बनाता है, जो जल के लिए 100 डिग्री सेल्सियस या 373.15 केल्विन है। हिमीकरण और संघनन इनके विपरीत परिवर्तन हैं और उतनी ही ऊष्मा मुक्त करते हैं।
अवस्था परिवर्तन के समय स्थिर ताप पर सोखी गई ऊष्मा गुप्त ऊष्मा कहलाती है। बर्फ की गलन की गुप्त ऊष्मा लगभग 334 जूल प्रति ग्राम यानी 80 कैलोरी प्रति ग्राम है; जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा लगभग 2260 जूल प्रति ग्राम यानी 540 कैलोरी प्रति ग्राम है। इसी कारण 100 डिग्री की भाप 100 डिग्री के जल से कहीं अधिक जलाती है, और बर्फ पेय को केवल ठंडा नहीं करती बल्कि ठंडा बनाए रखती है।
ऊर्ध्वपातन में ठोस द्रव अवस्था से गुजरे बिना सीधे वाष्प बनता है; कपूर, नेफ्थलीन, आयोडीन, अमोनियम क्लोराइड और शुष्क बर्फ सभी ऊर्ध्वपातित होते हैं। शुष्क बर्फ ठोस कार्बन डाइऑक्साइड है और लगभग ऋण 78.5 डिग्री सेल्सियस पर ऊर्ध्वपातित होती है, इसलिए वह पानी नहीं छोड़ती। वाष्पन क्वथन से भिन्न है: यह केवल सतह पर होता है और क्वथनांक से नीचे भी चलता रहता है; सबसे तेज अणु निकल जाते हैं और शेष द्रव ठंडा हो जाता है। यही शीतलन प्रभाव पसीने को सुखाता है और मिट्टी के घड़े का पानी ठंडा रखता है।
परीक्षा में पूछे जाने वाले गुण
- घनत्व। जल 4 डिग्री सेल्सियस पर सर्वाधिक घना होता है, जहां एक घन सेंटीमीटर का भार एक ग्राम होता है। इससे नीचे वह फिर फैलता है, इसलिए बर्फ जल से हल्की होकर तैरती है; इस असामान्य प्रसार से जमी झील के नीचे मछलियां जीवित रहती हैं।
- पृष्ठ तनाव। वह खिंचाव जिससे द्रव की स्वतंत्र सतह तनी झिल्ली जैसी बनती है। इसका एसआई मात्रक न्यूटन प्रति मीटर है, ताप बढ़ने पर यह घटता है, अपमार्जक इसे कम करते हैं, और इसी से पारे की बूंद गोल होती है तथा सुई जल पर तैर सकती है।
- श्यानता। प्रवाह का विरोध करने वाला आंतरिक घर्षण। गर्म करने पर द्रव की श्यानता घटती है, पर गैस की श्यानता बढ़ती है; यह उलटाव एक अंक का प्रिय जाल है।
- केशिकत्व। पतली नली गुरुत्व के विरुद्ध द्रव को ऊपर खींच लेती है, जिससे दीपक की बत्ती में तेल, स्याही सोख कागज में स्याही और मिट्टी में जल ऊपर चढ़ता है।
- विसरण। ग्राहम का नियम कहता है कि गैस के विसरण की दर उसके घनत्व या मोलर द्रव्यमान के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है, इसलिए हाइड्रोजन सबसे तेज विसरित होती है।
- ब्राउनी गति। निलंबित सूक्ष्म कणों की अनियमित टेढ़ी-मेढ़ी गति, जिसे वनस्पतिशास्त्री रॉबर्ट ब्राउन ने 1827 में देखा, इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अणु निरंतर गति में हैं।
गैस के नियम एक साथ
बॉयल का नियम, जो 1662 में दिया गया, कहता है कि स्थिर ताप पर गैस की निश्चित मात्रा का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है, अर्थात दाब और आयतन का गुणनफल स्थिर रहता है। चार्ल्स का नियम कहता है कि स्थिर दाब पर आयतन केल्विन में परम ताप के समानुपाती होता है। दाब नियम, जिसे अक्सर गे-लुसाक का नाम दिया जाता है, कहता है कि स्थिर आयतन पर दाब परम ताप के समानुपाती होता है। आवोगाद्रो का नियम कहता है कि समान ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है, और एक मोल में वह संख्या 6.022 गुणा 10 की घात 23 है। इन्हें मिलाकर आदर्श गैस समीकरण बनता है: दाब गुणा आयतन बराबर मोलों की संख्या गुणा गैस नियतांक गुणा परम ताप, जहां गैस नियतांक 8.314 जूल प्रति मोल प्रति केल्विन है। किसी भी गैस का एक मोल 0 डिग्री सेल्सियस और एक वायुमंडल पर 22.4 लीटर स्थान घेरता है।
तीन अवस्थाओं से आगे
प्लाज्मा गर्म, आयनित गैस है जिसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन और आयन होते हैं; यह प्रतिदीप्ति नलिकाओं, नियॉन साइन और तड़ित में चमकता है, सूर्य और तारे इसी से बने हैं, और इसलिए यह ब्रह्मांड में पदार्थ की सर्वाधिक पाई जाने वाली अवस्था है। दूसरे छोर पर बोस-आइंस्टाइन संघनित है, परम शून्य के अत्यंत निकट की वह अवस्था जिसमें विरल गैस के परमाणु एक ही क्वांटम अवस्था में आ जाते हैं। अल्बर्ट आइंस्टाइन ने 1924 में भारतीय भौतिकशास्त्री सत्येंद्र नाथ बोस द्वारा भेजे गए सांख्यिकीय विवेचन से इसकी भविष्यवाणी की, और इसे पहली बार 1995 में प्रयोगशाला में बनाया गया, जिस कार्य को 2001 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। परम शून्य स्वयं 0 केल्विन यानी ऋण 273.15 डिग्री सेल्सियस है, वह ताप जिस पर अणुगति रुक जाएगी और जिस तक पहुंचना ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम असंभव बताता है।
परीक्षा की दृष्टि से
पेपर इस अध्याय को चार रूपों में पूछते हैं। पहला, अवस्था और गुण की जोड़ी: कौन अवस्था संपीड्य है, किसका आयतन निश्चित पर आकार अनिश्चित। दूसरा, अवस्था परिवर्तन के शब्द: ऊर्ध्वपातन, गलन, संघनन और कौन पदार्थ क्या करता है, जिसमें कपूर और शुष्क बर्फ निश्चित उत्तर हैं। तीसरा, संख्याएं: 0 और 100 डिग्री सेल्सियस, जल का अधिकतम घनत्व 4 डिग्री पर, 80 और 540 कैलोरी प्रति ग्राम गुप्त ऊष्मा, 22.4 लीटर मोलर आयतन, ऋण 273.15 डिग्री परम शून्य। चौथा, कौन नियम किसका: बॉयल बनाम चार्ल्स सबसे बड़ा जाल है, और उसके बाद यह कि गर्म करने पर द्रव की श्यानता घटती है पर गैस की बढ़ती है। प्लाज्मा का सर्वाधिक होना और 1924 का वर्ष, दोनों दोहराए जाने वाले प्रश्न हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| बर्फ का गलनांक | एक वायुमंडल पर 0 डिग्री सेल्सियस या 273.15 केल्विन |
|---|---|
| जल का क्वथनांक | एक वायुमंडल पर 100 डिग्री सेल्सियस या 373.15 केल्विन |
| बर्फ की गलन की गुप्त ऊष्मा | लगभग 334 जूल प्रति ग्राम यानी 80 कैलोरी प्रति ग्राम |
| जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा | लगभग 2260 जूल प्रति ग्राम यानी 540 कैलोरी प्रति ग्राम |
| जल का अधिकतम घनत्व | 4 डिग्री सेल्सियस पर, एक ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर |
| शुष्क बर्फ | ठोस कार्बन डाइऑक्साइड; लगभग ऋण 78.5 डिग्री सेल्सियस पर ऊर्ध्वपातित |
| कमरे के ताप पर द्रव एकमात्र धातु | पारा |
| कमरे के ताप पर द्रव एकमात्र अधातु | ब्रोमीन |
| पृष्ठ तनाव का एसआई मात्रक | न्यूटन प्रति मीटर |
| ब्राउनी गति | रॉबर्ट ब्राउन द्वारा 1827 में देखी गई |
| बॉयल का नियम | 1662 में दिया; स्थिर ताप पर दाब गुणा आयतन स्थिर |
| आवोगाद्रो संख्या | एक मोल में 6.022 गुणा 10 की घात 23 कण |
| सार्वत्रिक गैस नियतांक | 8.314 जूल प्रति मोल प्रति केल्विन |
| गैस का मोलर आयतन | 0 डिग्री सेल्सियस और एक वायुमंडल पर 22.4 लीटर |
| ब्रह्मांड में सर्वाधिक अवस्था | प्लाज्मा |
| बोस-आइंस्टाइन संघनित | आइंस्टाइन द्वारा 1924 में भविष्यवाणी; पहली बार 1995 में बना |
| परम शून्य | 0 केल्विन यानी ऋण 273.15 डिग्री सेल्सियस |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
पदार्थ की एक अवस्था को दूसरी अवस्था में कैसे बदला जा सकता है?
- A.विकिरित ऊष्मा ऊर्जा का अवशोषण करके
- B.विद्युत अपघट्यों का उपयोग करके
- C.दाब बढ़ाकर
- D.अम्ल और क्षार का उपयोग करके
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. विकिरित ऊष्मा ऊर्जा का अवशोषण करके
व्याख्या
सही उत्तर A, विकिरित ऊष्मा ऊर्जा का अवशोषण करके है। अवस्था परिवर्तन कणों की ऊर्जा से तय होता है। जब ठोस ऊष्मा सोखता है तो उसके कण अधिक तेजी से कंपन करते हैं, जब तक जालक में बांधने वाला बल पार नहीं हो जाता और वह पिघल जाता है; और ऊष्मा मिलने पर द्रव के कण वाष्प बनकर निकल जाते हैं। ऊष्मा हटाने पर दोनों चरण उलट जाते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि विद्युत अपघट्य विलयन में विद्युत चालन करते हैं और रासायनिक परिवर्तन में भाग लेते हैं, अवस्था नहीं बदलते। विकल्प D इसी कारण गलत है, क्योंकि अम्ल और क्षार रासायनिक अभिक्रिया करके नए पदार्थ बनाते हैं, भौतिक अवस्था परिवर्तन नहीं। विकल्प C लुभावना जाल है: दाब का महत्व है और गैस को पर्याप्त दबाने पर वह द्रव बन जाती है, पर यह विकल्प अपूर्ण है क्योंकि केवल ठोस या द्रव पर दाब बढ़ाने से अवस्था नहीं बदलती, उलटे क्वथनांक बढ़ जाता है। प्रश्न सामान्य कारक ऊष्मा पूछ रहा है।
अल्बर्ट आइंस्टाइन ने भारतीय भौतिकशास्त्री सत्येंद्र नाथ बोस के क्वांटम विवेचन के आधार पर पदार्थ की नई अवस्था बोस-आइंस्टाइन संघनित (बीईसी) की भविष्यवाणी किस वर्ष की थी?
- A.1935
- B.1924
- C.1930
- D.1919
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1924
व्याख्या
सही उत्तर B, 1924 है। 1924 में सत्येंद्र नाथ बोस ने अल्बर्ट आइंस्टाइन को एक शोधपत्र भेजा जिसमें अविभेद्य प्रकाश क्वांटा की गणना से प्लांक का विकिरण नियम व्युत्पन्न किया गया था। आइंस्टाइन ने तुरंत समझ लिया कि यही सांख्यिकी परमाणुओं पर भी लागू होती है, उन्होंने शोधपत्र का जर्मन में अनुवाद कराकर प्रकाशित कराया और उसे आगे बढ़ाया, तथा भविष्यवाणी की कि ऐसे कणों की विरल गैस को परम शून्य के निकट ठंडा करने पर वह एक ही निम्नतम क्वांटम अवस्था में सिमट जाएगी। वही अवस्था बोस-आइंस्टाइन संघनित है और वह सांख्यिकी बोस-आइंस्टाइन सांख्यिकी कहलाती है। विकल्प A, 1935, क्वांटम उलझाव पर आइंस्टाइन-पोडोल्स्की-रोजन शोधपत्र का वर्ष है, इस भविष्यवाणी का नहीं। विकल्प D, 1919, उस सूर्य ग्रहण प्रेक्षण का वर्ष है जिसने सामान्य आपेक्षिकता की पुष्टि की। विकल्प C, 1930, का संघनित से कोई संबंध नहीं। क्रम याद रखें: 1924 में बोस की सांख्यिकी और आइंस्टाइन की भविष्यवाणी, 1995 में प्रयोगशाला में पहला संघनित, और 2001 में उसके लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार।
पूर्ण गैस के लिए बॉयल के नियम के अनुसार
- A.T2/T1 = P2/P1, यदि V स्थिर रखा जाए
- B.T2/T1 = V2/V1, यदि P स्थिर रखा जाए
- C.P1/P2 = V2/V1, यदि T स्थिर रखा जाए
- D.इनमें से कोई नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. P1/P2 = V2/V1, यदि T स्थिर रखा जाए
व्याख्या
सही उत्तर C, P1/P2 = V2/V1 यदि T स्थिर रखा जाए है। बॉयल का नियम स्थिर ताप पर गैस की निश्चित मात्रा पर लागू होता है और कहता है कि दाब आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है, इसलिए दोनों का गुणनफल स्थिर रहता है: P1 गुणा V1 बराबर P2 गुणा V2। इस समता को पुनर्व्यवस्थित करने पर ठीक वही अनुपात मिलता है जो विकल्प C में है, यानी पहला दाब दूसरे दाब से उसी अनुपात में है जिसमें दूसरा आयतन पहले आयतन से है। विकल्प A दाब नियम है, जिसका श्रेय अक्सर गे-लुसाक को दिया जाता है: स्थिर आयतन पर गैस का दाब उसके परम ताप के समानुपाती होता है। विकल्प B चार्ल्स का नियम है: स्थिर दाब पर आयतन परम ताप के समानुपाती होता है। दोनों अन्य नियमों के सही कथन हैं, इसीलिए वे यहां अच्छे जाल बनते हैं, पर कोई भी बॉयल का नियम नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि विकल्प C सही कथन है। ध्यान दें कि A और B में ताप केल्विन में होना चाहिए, डिग्री सेल्सियस में नहीं।
जल का घनत्व किस ताप पर अधिकतम होता है?
- A.0 डिग्री सेल्सियस
- B.4 डिग्री सेल्सियस
- C.10 डिग्री सेल्सियस
- D.100 डिग्री सेल्सियस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 4 डिग्री सेल्सियस
व्याख्या
सही उत्तर B, 4 डिग्री सेल्सियस है। अन्य द्रवों की तरह जल भी ऊंचे ताप से ठंडा होने पर सिकुड़ता है, पर केवल 4 डिग्री सेल्सियस तक। उससे नीचे हाइड्रोजन आबंध अणुओं को एक खुली, पिंजरे जैसी व्यवस्था में जकड़ने लगते हैं और जल फिर फैलने लगता है। इसलिए उसका घनत्व 4 डिग्री सेल्सियस पर सर्वाधिक होता है, जहां एक घन सेंटीमीटर का द्रव्यमान लगभग एक ग्राम होता है। इस व्यवहार को जल का असामान्य प्रसार कहते हैं। विकल्प A, 0 डिग्री सेल्सियस, हिमांक है, जहां जल पहले ही फैल चुका होता है और बनी बर्फ लगभग नौ प्रतिशत कम घनी होती है, इसलिए तैरती है। विकल्प C, 10 डिग्री सेल्सियस, अधिकतम घनत्व के ताप से ऊपर है, इसलिए वहां जल कुछ कम घना होता है। विकल्प D, 100 डिग्री सेल्सियस, क्वथनांक है, जहां द्रव रूप में जल का घनत्व सबसे कम होता है। इसका व्यावहारिक परिणाम यह है कि तालाब ऊपर से नीचे की ओर जमता है और तली 4 डिग्री सेल्सियस पर रहती है, जिससे मछलियां जीवित रहती हैं।
निम्नलिखित में से ब्रह्मांड में पदार्थ की सर्वाधिक पाई जाने वाली अवस्था कौन सी है?
- A.ठोस
- B.द्रव
- C.गैस
- D.प्लाज्मा
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. प्लाज्मा
व्याख्या
सही उत्तर D, प्लाज्मा है। प्लाज्मा मुक्त इलेक्ट्रॉनों और धनायनों का गर्म, विद्युत चालक मिश्रण है, जो गैस को गर्म करने या प्रबल आयनन से बनता है। सूर्य सहित सभी तारे प्लाज्मा से बने हैं, और चूंकि तारे तथा उनके बीच की आयनित गैस ब्रह्मांड के दृश्य पदार्थ का अत्यधिक बड़ा भाग रखते हैं, इसलिए प्लाज्मा सर्वाधिक पाई जाने वाली अवस्था है। पृथ्वी पर यह असामान्य है और तड़ित, ध्रुवीय प्रकाश, विद्युत आर्क की ज्वाला, नियॉन साइन तथा प्रतिदीप्ति नलिकाओं में दिखती है। विकल्प A, ठोस, ग्रहों, उपग्रहों और धूल की अवस्था है, जो ब्रह्मांडीय पदार्थ का अत्यंत छोटा अंश है। विकल्प B, द्रव, ब्रह्मांड में उससे भी विरल है, क्योंकि द्रव के अस्तित्व के लिए ताप और दाब की संकरी सीमा चाहिए। विकल्प C, गैस, प्रायः दिया जाने वाला गलत उत्तर है, क्योंकि अंतरतारकीय बादलों में उदासीन गैस होती है, पर ब्रह्मांड का कहीं अधिक भाग आयनित है, उदासीन नहीं। प्लाज्मा को अक्सर पदार्थ की चौथी अवस्था कहा जाता है।
निम्नलिखित में से कौन एकमात्र अधातु है जो कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में रहती है?
- A.ब्रोमीन
- B.आयोडीन
- C.सल्फर
- D.फॉस्फोरस
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ब्रोमीन
व्याख्या
सही उत्तर A, ब्रोमीन है। ब्रोमीन साधारण कमरे के ताप पर गहरे लाल-भूरे रंग का, घना, धूम देता द्रव है, जिसका गलनांक लगभग ऋण 7 डिग्री सेल्सियस और क्वथनांक लगभग 59 डिग्री सेल्सियस है। इन परिस्थितियों में यह एकमात्र द्रव अधातु है, जैसे पारा कमरे के ताप पर एकमात्र द्रव धातु है, और यह जोड़ी एक अंक का मानक प्रश्न है। विकल्प B, आयोडीन, कमरे के ताप पर चमकदार धूसर-काला ठोस है; उसे इसके बजाय उस ठोस के रूप में याद रखा जाता है जो सरलता से ऊर्ध्वपातित होकर बैंगनी वाष्प देता है। विकल्प C, सल्फर, भंगुर पीला ठोस है जो लगभग 115 डिग्री सेल्सियस के पास ही पिघलता है। विकल्प D, फॉस्फोरस, भी कमरे के ताप पर ठोस है, जिसमें श्वेत फॉस्फोरस मोमी और लाल फॉस्फोरस चूर्णी होता है। गैलियम और सीजियम कभी-कभी निकट उत्तर के रूप में दिए जाते हैं, पर दोनों धातुएं हैं जो कमरे के ताप से कुछ ऊपर पिघलती हैं।
बर्फ की गलन की गुप्त ऊष्मा का लगभग मान है
- A.22.4 कैलोरी प्रति ग्राम
- B.80 कैलोरी प्रति ग्राम
- C.540 कैलोरी प्रति ग्राम
- D.1000 कैलोरी प्रति ग्राम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 80 कैलोरी प्रति ग्राम
व्याख्या
सही उत्तर B, 80 कैलोरी प्रति ग्राम है, यानी लगभग 334 जूल प्रति ग्राम। यह वह ऊष्मा है जो 0 डिग्री सेल्सियस की एक ग्राम बर्फ को उसी ताप का एक ग्राम जल बनने के लिए सोखनी पड़ती है; पिघलते समय ताप तनिक भी नहीं बढ़ता, क्योंकि ऊर्जा हाइड्रोजन आबंध वाले जालक को तोड़ने में लगती है। जल जमने पर उतनी ही ऊष्मा मुक्त होती है। विकल्प C, 540 कैलोरी प्रति ग्राम, जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा है, यानी 100 डिग्री सेल्सियस के एक ग्राम जल को उसी ताप की भाप बनाने की ऊष्मा; अभ्यर्थी इन दोनों मानों को अक्सर बदल देते हैं, इसलिए गलन के लिए 80 और क्वथन के लिए 540 पक्का कर लें। विकल्प A, 22.4, ऊष्मा का मान ही नहीं है, बल्कि 0 डिग्री सेल्सियस और एक वायुमंडल पर गैस का लीटर में मोलर आयतन है। विकल्प D बहुत बड़ा है। गलन की गुप्त ऊष्मा अधिक होने के कारण बर्फ कुशल शीतलक है और पेय को देर तक ठंडा रखती है।
द्रव के वाष्पन से शीतलन होता है क्योंकि
- A.द्रव अपने परिवेश से गुप्त ऊष्मा सोखता है
- B.द्रव अपने परिवेश को गुप्त ऊष्मा देता है
- C.द्रव के ऊपर का दाब घट जाता है
- D.वाष्पित होते समय द्रव फैलता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. द्रव अपने परिवेश से गुप्त ऊष्मा सोखता है
व्याख्या
सही उत्तर A, द्रव अपने परिवेश से गुप्त ऊष्मा सोखता है है। वाष्पन सतही परिघटना है जिसमें द्रव के सर्वाधिक तेज गति वाले अणु मुक्त हो जाते हैं। इसके लिए वाष्पन की गुप्त ऊष्मा चाहिए, और वह ऊर्जा पीछे बचे द्रव तथा उस वस्तु से ली जाती है जिससे द्रव छूता है, इसलिए दोनों ठंडे हो जाते हैं। इसी से पसीना त्वचा को ठंडा करता है, इसी से बिना लेप वाले मिट्टी के घड़े में जल ठंडा रहता है जिसके छिद्रों से जल रिसकर वाष्पित होता है, और इसी से हाथ पर स्पिरिट की बूंद ठंडी लगती है। विकल्प B उलटी प्रक्रिया संघनन है, जो गुप्त ऊष्मा मुक्त करती है और परिवेश को गर्म करती है। विकल्प C कारण और परिणाम में भ्रम करता है: द्रव के ऊपर दाब घटाने से वाष्पन तेज होता है, पर शीतलन स्वयं हटाई गई गुप्त ऊष्मा से होता है, दाब के घटने से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि शीतलन प्रसार पर निर्भर नहीं है; खुले में वाष्पित होता द्रव फैलकर उपयोगी कार्य नहीं करता।
ताप बढ़ाने पर द्रव की और गैस की श्यानता का क्या होता है?
- A.दोनों बढ़ती हैं
- B.दोनों घटती हैं
- C.द्रव की घटती है और गैस की बढ़ती है
- D.द्रव की बढ़ती है और गैस की घटती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. द्रव की घटती है और गैस की बढ़ती है
व्याख्या
सही उत्तर C, द्रव की घटती है और गैस की बढ़ती है है। द्रव में प्रवाह का विरोध मुख्यतः पड़ोसी अणुओं के बीच के आकर्षण से आता है। गर्म करने पर अणुओं को एक दूसरे के पास से सरकने की ऊर्जा मिल जाती है, इसलिए आकर्षण का महत्व घट जाता है और द्रव पतला हो जाता है; गर्म शहद और गर्म इंजन तेल ठंडे की तुलना में कहीं सरलता से ढलते हैं। गैस में अणु पहले से बहुत दूर होते हैं और आकर्षण नगण्य होता है, इसलिए श्यानता इस कारण उत्पन्न होती है कि अणु इधर-उधर जाते हुए प्रवाह के आर-पार संवेग ले जाते हैं। गर्म करने पर वे तेज चलते हैं, जिससे अधिक संवेग का परिवहन होता है, इसलिए गैस अधिक श्यान हो जाती है। विकल्प A और विकल्प B में एक आधा सही और दूसरा आधा गलत है, तथा विकल्प D दोनों को उलट देता है। परीक्षक इसी विरोधाभास को जांचते हैं, इसलिए इस जोड़ी को एक ही तथ्य के रूप में याद रखें: ऊष्मा द्रव को पतला और गैस को गाढ़ा करती है।
निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित है?
- A.शुष्क बर्फ - ठोस नाइट्रोजन
- B.शुष्क बर्फ - ठोस कार्बन डाइऑक्साइड
- C.शुष्क बर्फ - ठोस अमोनिया
- D.शुष्क बर्फ - जमा आसुत जल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. शुष्क बर्फ - ठोस कार्बन डाइऑक्साइड
व्याख्या
सही उत्तर B, शुष्क बर्फ ठोस कार्बन डाइऑक्साइड है। साधारण वायुमंडलीय दाब पर कार्बन डाइऑक्साइड की कोई द्रव अवस्था नहीं होती: ठोस लगभग ऋण 78.5 डिग्री सेल्सियस पर सीधे वाष्प बन जाता है। चूंकि वह पीछे पानी नहीं छोड़ती, उसे शुष्क बर्फ कहा जाता है और उसका उपयोग आइसक्रीम तथा टीकों को ठंडा रखने, मंच पर कोहरा बनाने और मेघ बीजन में होता है। विकल्प A, ठोस नाइट्रोजन, इस शब्द का अर्थ नहीं है; नाइट्रोजन का उपयोग ऋण 196 डिग्री सेल्सियस पर निम्नतापी द्रव के रूप में होता है, शुष्क बर्फ के रूप में नहीं। विकल्प C, ठोस अमोनिया, भी गलत है, यद्यपि अमोनिया द्रव रूप में एक सामान्य प्रशीतक है। विकल्प D सबसे आम भूल है: साधारण जमा हुआ जल, चाहे कितना भी शुद्ध हो, केवल बर्फ है, पिघलकर द्रव बनता है और गीला होता है। परीक्षा का बिंदु शब्दों की जोड़ी है: शुष्क इसलिए कि द्रव अवस्था नहीं होती, और कार्बन डाइऑक्साइड इसलिए कि वायुमंडलीय दाब पर यही पदार्थ ऐसा व्यवहार करता है।
ग्राहम के नियम के अनुसार किसी गैस के विसरण की दर होती है
- A.उसके मोलर द्रव्यमान के समानुपाती
- B.उसके मोलर द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती
- C.उसके मोलर द्रव्यमान के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती
- D.उसके मोलर द्रव्यमान से स्वतंत्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. उसके मोलर द्रव्यमान के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती
व्याख्या
सही उत्तर C, उसके मोलर द्रव्यमान के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती है। थॉमस ग्राहम ने 1833 में पाया कि हल्की गैस छिद्रयुक्त पट्टी से भारी गैस की तुलना में तेज फैलती है, और दो गैसों की दरें उनके घनत्वों तथा इसलिए उनके मोलर द्रव्यमानों के वर्गमूलों के व्युत्क्रम अनुपात में होती हैं। हाइड्रोजन सबसे हल्की गैस है और सबसे तेज विसरित होती है, और चूंकि ऑक्सीजन का मोलर द्रव्यमान हाइड्रोजन का सोलह गुना है, हाइड्रोजन चार गुना तेज विसरित होती है। विकल्प A सत्य के उलटा है, क्योंकि भारी गैस धीमी होती है। विकल्प B में दिशा सही है पर घात गलत: निर्भरता वर्गमूल पर है, स्वयं द्रव्यमान पर नहीं, इसलिए वह हाइड्रोजन को ऑक्सीजन से सोलह गुना तेज बताएगा। विकल्प D नियम का ही खंडन करता है। यही नियम बताता है कि एक साथ छोड़ी गई किसी भारी वाष्प से पहले अमोनिया की गंध कमरे में क्यों फैल जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पदार्थ की पांच अवस्थाएं कौन सी हैं?
ठोस, द्रव और गैस वे तीन अवस्थाएं हैं जो दैनिक जीवन में दिखती हैं। इनमें विज्ञान प्लाज्मा जोड़ता है, जो तारों, तड़ित और प्रतिदीप्ति नलिकाओं में पाई जाने वाली गर्म आयनित गैस है, तथा बोस-आइंस्टाइन संघनित, जो परम शून्य के अत्यंत निकट बनता है। पृथ्वी पर ठोस, द्रव और गैस ही मिलते हैं, पर ब्रह्मांड में प्लाज्मा सर्वाधिक है।
बर्फ जल पर क्यों तैरती है?
जल 0 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच असामान्य व्यवहार करता है। वह 4 डिग्री सेल्सियस पर सर्वाधिक घना होता है, और उससे अधिक ठंडा होने पर सिकुड़ने के बजाय फैलता है। इसलिए बर्फ द्रव जल से लगभग नौ प्रतिशत कम घनी होती है और तैरती है, जिसका लगभग दसवां भाग सतह से ऊपर रहता है। इसी असामान्य प्रसार से जमी झील की तली का जल द्रव बना रहता है और मछलियां शीत ऋतु में जीवित रहती हैं।
वाष्पन और क्वथन में क्या अंतर है?
वाष्पन केवल द्रव की खुली सतह पर होता है, क्वथनांक से नीचे किसी भी ताप पर होता है और धीमा होता है; निकलते अणु ऊर्जा ले जाते हैं और शेष द्रव ठंडा हो जाता है। क्वथन पूरे द्रव में होता है, केवल निश्चित क्वथनांक पर होता है, और भीतर वाष्प के बुलबुले बनते हैं। वाष्पन शीतलन करता है, इसी से पसीना और मिट्टी का घड़ा काम करते हैं।
कौन से पदार्थ ऊर्ध्वपातित होते हैं?
कपूर, नेफ्थलीन की गोलियां, आयोडीन, अमोनियम क्लोराइड, एंथ्रेसीन और शुष्क बर्फ सभी पिघले बिना ठोस से सीधे वाष्प अवस्था में चले जाते हैं। शुष्क बर्फ, जो ठोस कार्बन डाइऑक्साइड है, मानक उदाहरण है क्योंकि वह कोई द्रव नहीं छोड़ती, जिससे वह आइसक्रीम ठंडी रखने और मंच के धुएं के लिए उपयोगी है।
100 डिग्री सेल्सियस की भाप 100 डिग्री सेल्सियस के जल से अधिक क्यों जलाती है?
दोनों का ताप समान है, पर भाप में छिपी ऊष्मा का अतिरिक्त भंडार होता है। 100 डिग्री सेल्सियस के एक ग्राम जल को उसी ताप की भाप बनाने में वाष्पन की लगभग 540 कैलोरी गुप्त ऊष्मा लगती है। जब भाप त्वचा से छूती है तो वह संघनित होकर वही गुप्त ऊष्मा लौटा देती है, इसलिए त्वचा को उबलते जल की उतनी ही मात्रा से बहुत अधिक ऊष्मा मिलती है।
कांच को अतिशीतित द्रव क्यों कहा जाता है?
कांच अक्रिस्टलीय ठोस है: उसके कणों की व्यवस्था क्रिस्टल की तरह नियमित और दोहराव वाली नहीं होती। उसका कोई निश्चित गलनांक नहीं होता, वह ताप की एक सीमा में नरम पड़ता है और बहुत लंबे समय में अत्यंत धीमी गति से बहता है। चूंकि वह अत्यधिक श्यानता वाले द्रव जैसा व्यवहार करता है, कांच को अतिशीतित द्रव या छद्म ठोस कहा जाता है।
स्रोत
- विज्ञान, कक्षा 9 (एनसीईआरटी), अध्याय 1: हमारे आस-पास के पदार्थ — एनसीईआरटी
- विज्ञान, कक्षा 9 (एनसीईआरटी), अध्याय 2: क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं — एनसीईआरटी
- भौतिकी, कक्षा 11 भाग 2 (एनसीईआरटी), तरलों के यांत्रिक गुण तथा पदार्थ के तापीय गुण — एनसीईआरटी





