ध्वनि और तरंगें: गुण, चाल और परीक्षा प्रश्न
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ध्वनि नोट्स: तरंगों के प्रकार, विभिन्न माध्यमों में चाल, तारत्व प्रबलता और गुणता, श्रव्य परास, पराध्वनि, प्रतिध्वनि और सोनार।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

तरंग वह विक्षोभ है जो ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता है, पर अपने साथ पदार्थ नहीं ले जाता। माध्यम के कण केवल अपनी जगह के आसपास कंपन करते हैं; आगे ऊर्जा बढ़ती है, पदार्थ नहीं। ध्वनि इसका सबसे अधिक पूछा जाने वाला उदाहरण है, और इस अध्याय के लगभग सभी प्रश्न तीन में से किसी एक बात पर लौटते हैं: तरंग की प्रकृति, चाल तथा आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य का संबंध, या परावर्तन के समय ध्वनि का व्यवहार।
तरंगों के प्रकार
तरंगें पहले यांत्रिक तरंगों और विद्युत चुंबकीय तरंगों में बँटती हैं। यांत्रिक तरंगों को भौतिक माध्यम चाहिए, जबकि प्रकाश और रेडियो तरंगों जैसी विद्युत चुंबकीय तरंगें निर्वात से भी गुजर जाती हैं। दूसरा विभाजन कंपन की दिशा से होता है। अनुप्रस्थ तरंग में कण गति की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं और शीर्ष तथा गर्त बनते हैं, जैसे जल की सतह पर या तनी हुई डोरी में। अनुदैर्ध्य तरंग में कण गति की दिशा के अनुदिश कंपन करते हैं और वहाँ संपीडन बनता है जहाँ कण पास-पास आ जाते हैं तथा विरलन बनता है जहाँ वे दूर हट जाते हैं। ध्वनि अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंग है, इसीलिए वह निर्वात से नहीं गुजर सकती। प्रसिद्ध घंटी-जार प्रयोग में जार के भीतर बजती विद्युत घंटी हवा निकाल देने पर सुनाई देनी बंद हो जाती है, यद्यपि उसे बजते हुए देखा जा सकता है।
तरंग का वर्णन
दो क्रमागत संपीडनों या दो क्रमागत शीर्षों के बीच की दूरी तरंगदैर्घ्य कहलाती है। एक सेकंड में किसी बिंदु से गुजरने वाली पूरी तरंगों की संख्या आवृत्ति है, जिसका मात्रक हर्ट्ज है, और एक पूरी तरंग में लगा समय आवर्तकाल है, जो आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है। कण का अपनी विराम स्थिति से अधिकतम विस्थापन आयाम कहलाता है। इन तीनों को एक ही सूत्र जोड़ता है, जिसे पेपर बार-बार प्रयोग करते हैं: चाल बराबर आवृत्ति गुणा तरंगदैर्घ्य। चूँकि किसी माध्यम में निश्चित ताप पर ध्वनि की चाल नियत रहती है, अधिक आवृत्ति का अर्थ है कम तरंगदैर्घ्य।
ध्वनि की चाल
ध्वनि ठोस में सबसे तेज, द्रव में उससे धीमी और गैस में सबसे धीमी चलती है, क्योंकि ठोस के कण पास-पास होते हैं और विक्षोभ को शीघ्र आगे पहुँचा देते हैं। कमरे के ताप पर वायु में यह लगभग तीन सौ चालीस मीटर प्रति सेकंड, जल में लगभग पंद्रह सौ और इस्पात में लगभग पाँच हजार मीटर प्रति सेकंड चलती है। वायु का ताप बढ़ने पर चाल बढ़ती है और आर्द्रता बढ़ने पर भी कुछ बढ़ जाती है, क्योंकि नम हवा शुष्क हवा से हल्की होती है। केवल दाब बदलने से यह नहीं बदलती, और न ही यह ध्वनि की प्रबलता या तारत्व पर निर्भर करती है। इसके विपरीत प्रकाश तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड चलता है, इसीलिए बिजली की चमक गर्जन से बहुत पहले दिख जाती है।
संगीत ध्वनि के अभिलक्षण
| अभिलक्षण | किस पर निर्भर | क्या बताता है |
|---|---|---|
| तारत्व या तीक्ष्णता | आवृत्ति | अधिक आवृत्ति तीखी और कम आवृत्ति भारी सुनाई देती है |
| प्रबलता | आयाम | अधिक आयाम अधिक ऊर्जा ले जाता है; मात्रक डेसिबल |
| गुणता या ध्वनि गुण | तरंग का रूप | एक ही तारत्व पर बाँसुरी और वायलिन में अंतर बताता है |
श्रव्य परास, अवश्रव्य और पराश्रव्य ध्वनि
मनुष्य का कान सामान्यतः लगभग बीस हर्ट्ज से बीस हजार हर्ट्ज तक की आवृत्तियों पर प्रतिक्रिया करता है। बीस हर्ट्ज से नीचे की ध्वनि अवश्रव्य कहलाती है; हाथी, ह्वेल और गैंडे इसका उपयोग करते हैं और भूकंप से पहले तथा ज्वालामुखीय हलचल से यह उत्पन्न होती है। बीस हजार हर्ट्ज से ऊपर की ध्वनि पराश्रव्य कहलाती है; चमगादड़, डॉल्फिन और पॉरपॉइज इसे उत्पन्न भी करते हैं और सुन भी लेते हैं, तथा कुत्ते मनुष्य की सीमा से कहीं ऊपर तक सुन सकते हैं। पराध्वनि के अनेक उपयोग हैं, जैसे उदर और गर्भस्थ शिशु की सोनोग्राफी, हृदय की इकोकार्डियोग्राफी, मशीनों के उन भागों की सफाई जहाँ पहुँचा नहीं जा सकता, धातु की ढलाई में भीतरी दरारें पकड़ना और गुर्दे की पथरी तोड़ना।
ध्वनि का परावर्तन
ध्वनि भी प्रकाश की तरह परावर्तन के नियमों का पालन करती है। किसी दूर की सतह से परावर्तित होकर ध्वनि का दोहराया जाना प्रतिध्वनि कहलाता है। मनुष्य के मस्तिष्क में ध्वनि की संवेदना लगभग एक सेकंड के दसवें भाग तक बनी रहती है, इसलिए परावर्तित ध्वनि को अलग सुनाई देने के लिए कम से कम इतनी देर बाद पहुँचना चाहिए। वायु में ध्वनि की चाल लगभग तीन सौ चवालीस मीटर प्रति सेकंड मानने पर परावर्तक सतह कम से कम लगभग सत्रह मीटर दूर होनी चाहिए। बंद हॉल में बार-बार परावर्तन से ध्वनि देर तक बनी रहती है, जिसे अनुरणन कहते हैं; इसे कम करने के लिए छत और दीवारों पर फाइबर बोर्ड, परदे और कालीन जैसे अवशोषक पदार्थ लगाए जाते हैं। बहु परावर्तन का उपयोग मेगाफोन, भोंपू, तुरही और स्टेथोस्कोप में होता है, और सभागारों की घुमावदार छत इस तरह बनाई जाती है कि परावर्तित ध्वनि समान रूप से फैले।
सोनार और मानव कान
सोनार का पूरा नाम साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग है। जहाज पर लगा प्रेषित्र पराश्रव्य स्पंद भेजता है, ये स्पंद समुद्र तल, पनडुब्बी या मछलियों के झुंड से टकराते हैं और संसूचक लौटती प्रतिध्वनि पकड़ लेता है। चूँकि स्पंद दूरी दो बार तय करता है, गहराई निकालने के लिए जल में ध्वनि की चाल को लगे समय से गुणा करके दो से भाग दिया जाता है। मानव कान में बाहरी कान ध्वनि एकत्र करके कर्णपटह तक पहुँचाता है, हथौड़ी, निहाई और रकाब नामक तीन छोटी हड्डियाँ कंपन को बढ़ाती हैं, और कुंडलित कर्णावर्त उन्हें विद्युत संकेतों में बदल देता है जिन्हें श्रवण तंत्रिका मस्तिष्क तक ले जाती है।
परीक्षा की दृष्टि से
तीन तरह के प्रश्न आते हैं। पहला, चाल बराबर आवृत्ति गुणा तरंगदैर्घ्य पर आधारित संख्यात्मक प्रश्न, जो प्रायः दिए गए समय में तय दूरी या दी गई दूरी में लगे समय के रूप में पूछे जाते हैं; पहले चाल निकालें, फिर दूरी बराबर चाल गुणा समय लगाएँ। दूसरा, एक पंक्ति के गुण प्रश्न: प्रबलता का आयाम से, तारत्व का आवृत्ति से, गुणता का तरंग रूप से संबंध, डेसिबल प्रबलता का मात्रक और हर्ट्ज आवृत्ति का। तीसरा, परावर्तन: प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम दूरी, अनुरणन और उसे घटाने के उपाय, सोनार तथा गहराई के सूत्र में दो का भाग। आम भ्रांतियाँ हैं यह मानना कि तेज ध्वनि अधिक चाल से चलती है, कि वायु में ध्वनि जल से तेज चलती है, कि रिंगटोन की आवाज बढ़ाने से आवृत्ति बदल जाती है, और कि गर्जन चमक से पहले पहुँचता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| ध्वनि की प्रकृति | संपीडन और विरलन वाली अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंग |
|---|---|
| तरंग सूत्र | चाल बराबर आवृत्ति गुणा तरंगदैर्घ्य |
| आवृत्ति का मात्रक | हर्ट्ज; एक हर्ट्ज अर्थात एक कंपन प्रति सेकंड |
| प्रबलता का मात्रक | डेसिबल |
| वायु में चाल | कमरे के ताप पर लगभग 340 मीटर प्रति सेकंड |
| जल में चाल | लगभग 1500 मीटर प्रति सेकंड |
| इस्पात में चाल | लगभग 5000 मीटर प्रति सेकंड |
| प्रकाश की चाल | लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड, ध्वनि से कहीं अधिक |
| श्रव्य परास | लगभग 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज |
| अवश्रव्य ध्वनि | 20 हर्ट्ज से नीचे; हाथी, ह्वेल और गैंडा |
| पराश्रव्य ध्वनि | 20,000 हर्ट्ज से ऊपर; चमगादड़, डॉल्फिन और पॉरपॉइज |
| श्रवण संवेदना का बने रहना | लगभग 0.1 सेकंड, जिससे प्रतिध्वनि की न्यूनतम दूरी तय होती है |
| स्पष्ट प्रतिध्वनि की न्यूनतम दूरी | वायु में लगभग 17 मीटर |
| सोनार | साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग; गहराई बराबर चाल गुणा समय भाग दो |
| मध्य कर्ण की हड्डियाँ | हथौड़ी, निहाई और रकाब |
| अनुरणन | बंद हॉल में बार-बार परावर्तन से ध्वनि का देर तक बने रहना |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
किसी ध्वनि तरंग की आवृत्ति 50 हर्ट्ज और तरंगदैर्घ्य 4 मीटर है। यह तरंग 3 सेकंड में कितनी दूरी तय करेगी?
- A.100 मीटर
- B.600 मीटर
- C.200 मीटर
- D.300 मीटर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 600 मीटर
व्याख्या
सही उत्तर B, 600 मीटर है। तरंग की चाल उसकी आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य का गुणनफल होती है, इसलिए यहाँ चाल 50 हर्ट्ज गुणा 4 मीटर अर्थात 200 मीटर प्रति सेकंड है। दूरी बराबर चाल गुणा समय, इसलिए 3 सेकंड में तरंग 200 गुणा 3 अर्थात 600 मीटर चलेगी। ऐसे प्रश्नों में सदा पहले चाल निकालें और उसके बाद ही समय लगाएँ।
विकल्प A, 100 मीटर, तब आता है जब कहीं गुणा के स्थान पर भाग कर दिया जाए। विकल्प C, 200 मीटर, एक सेकंड में तय दूरी है, अर्थात चाल; यह पूछा गया उत्तर नहीं है। विकल्प D, 300 मीटर, किसी सही चरण से नहीं निकलता और केवल इसलिए दिया गया है कि यह वायु में ध्वनि की मोटी चाल जैसा लगता है, जो यहाँ अप्रासंगिक है क्योंकि चाल स्वयं आँकड़ों से निकल आती है।
उत्सर्जित ध्वनि की आवृत्ति की जो व्याख्या मस्तिष्क करता है, उसे क्या कहते हैं?
- A.तरंगदैर्घ्य
- B.तरंग वेग
- C.तारत्व
- D.दोलन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. तारत्व
व्याख्या
सही उत्तर C, तारत्व है। तारत्व ध्वनि का वह अभिलक्षण है जिससे मस्तिष्क उसे तीखा या भारी मानता है, और यह तरंग की आवृत्ति से तय होता है। अधिक आवृत्ति अधिक तारत्व के रूप में सुनाई देती है, इसीलिए सीटी या स्त्री का स्वर ढोल या पुरुष के स्वर से अधिक तीखा लगता है। भौतिक राशि आवृत्ति है; मस्तिष्क में उत्पन्न संवेदना तारत्व है।
विकल्प A, तरंगदैर्घ्य, दो क्रमागत संपीडनों के बीच की दूरी है और यह आकाश में तरंग का माप है, कोई संवेदना नहीं। विकल्प B, तरंग वेग, माध्यम और उसके ताप पर निर्भर करता है और एक ही हवा में तीखी तथा भारी दोनों ध्वनियों के लिए समान रहता है। विकल्प D, दोलन, का अर्थ है एक पूरा आगे-पीछे कंपन; प्रति सेकंड दोलन गिनने से आवृत्ति मिलती है, पर यह शब्द स्वयं किसी ऐसे गुण का नाम नहीं जिसकी व्याख्या मस्तिष्क करता हो।
किसी ध्वनि तरंग की आवृत्ति 1 किलोहर्ट्ज और तरंगदैर्घ्य 50 सेंटीमीटर है। इसे 1 किलोमीटर चलने में कितना समय लगेगा?
- A.5 सेकंड
- B.4 सेकंड
- C.3 सेकंड
- D.2 सेकंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 2 सेकंड
व्याख्या
सही उत्तर D, 2 सेकंड है। पहले मात्रक बदलें: 1 किलोहर्ट्ज अर्थात 1000 हर्ट्ज और 50 सेंटीमीटर अर्थात 0.5 मीटर। चाल आवृत्ति गुणा तरंगदैर्घ्य है, अर्थात 1000 गुणा 0.5, जो 500 मीटर प्रति सेकंड देता है। समय बराबर दूरी भाग चाल, इसलिए 1000 मीटर भाग 500 मीटर प्रति सेकंड अर्थात 2 सेकंड।
विकल्प A, 5 सेकंड, तब आता जब चाल 200 मीटर प्रति सेकंड ली जाती। विकल्प B, 4 सेकंड, 250 मीटर प्रति सेकंड की चाल से मेल खाता है, जो तरंगदैर्घ्य को भूल से आधा कर देने पर मिलती है। विकल्प C, 3 सेकंड, वह समय है जो ध्वनि साधारण हवा में लगभग 340 मीटर प्रति सेकंड की चाल से एक किलोमीटर चलने में लेती है, और यह उन विद्यार्थियों के लिए जाल है जो दिए गए आँकड़ों से निकली चाल के बजाय याद की हुई चाल लगा देते हैं।
ध्वनि की प्रबलता किस पर निर्भर करती है?
- A.माध्यम में ध्वनि तरंगों के वेग पर
- B.ध्वनि तरंगों के आयाम पर
- C.ध्वनि तरंगों की आवृत्ति पर
- D.ध्वनि तरंगों की आवृत्ति और वेग दोनों पर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ध्वनि तरंगों के आयाम पर
व्याख्या
सही उत्तर B, ध्वनि तरंगों के आयाम पर है। आयाम माध्यम के कण का उसकी विराम स्थिति से अधिकतम विस्थापन है, और तरंग द्वारा वहन की गई ऊर्जा आयाम के वर्ग के अनुपात में बढ़ती है। इसलिए अधिक आयाम कान तक अधिक ऊर्जा पहुँचाता है और वह अधिक प्रबल ध्वनि के रूप में सुनाई देता है। प्रबलता का मात्रक डेसिबल है।
विकल्प A, तरंग का वेग, माध्यम और उसके ताप से तय होता है; एक ही कमरे में तेज और धीमी ध्वनि ठीक समान चाल से चलती हैं। विकल्प C, आवृत्ति, तारत्व तय करती है, अर्थात ध्वनि तीखी है या भारी, यह नहीं कि वह कितनी तेज है; रिंगटोन की आवाज बढ़ाने से उसकी आवृत्ति नहीं बदलती। विकल्प D दो ऐसी राशियों को जोड़ता है जो प्रबलता के अलावा अन्य गुण तय करती हैं, इसलिए वह भी इन्हीं कारणों से गलत है।
बिजली की चमक गर्जन सुनाई देने से पहले दिखाई देती है। यह किस बात की पुष्टि करता है?
- A.ध्वनि प्रकाश से कहीं तेज चलती है
- B.प्रकाश ध्वनि से कहीं तेज चलता है
- C.प्रकाश और ध्वनि दोनों समान चाल से चलते हैं
- D.तूफान के समय बिजली की चमक की तीव्रता बहुत अधिक होती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रकाश ध्वनि से कहीं तेज चलता है
व्याख्या
सही उत्तर B, प्रकाश ध्वनि से कहीं तेज चलता है है। चमक और गर्जन दोनों एक ही विद्युत विसर्जन से एक ही क्षण उत्पन्न होते हैं। प्रकाश एक सेकंड में लगभग तीन लाख किलोमीटर चलता है, इसलिए वह देखने वाले तक लगभग तुरंत पहुँच जाता है, जबकि वायु में ध्वनि एक सेकंड में केवल लगभग 340 मीटर चलती है और प्रत्येक किलोमीटर के लिए लगभग तीन सेकंड लेती है। देखने और सुनने के बीच का अंतराल इसीलिए दूरी का सीधा माप है।
विकल्प A क्रम को उलट देता है और उससे गर्जन पहले पहुँचना चाहिए, जो कभी नहीं होता। विकल्प C गलत है क्योंकि समान चाल होने पर चमक और गर्जन एक साथ पहुँचते और कोई अंतराल ही न होता। विकल्प D चमक की तीव्रता को चाल से मिला देता है; चमक वास्तव में बहुत तेज होती है, पर तीव्रता का पहले पहुँचने से कोई संबंध नहीं, और मंद चमक भी ध्वनि से पहले ही दिखेगी।
ध्वनि तरंगें किस प्रकार की होती हैं?
- A.अनुप्रस्थ विद्युत चुंबकीय तरंगें
- B.अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंगें
- C.केवल ठोसों में चलने वाली अनुप्रस्थ यांत्रिक तरंगें
- D.ऐसी तरंगें जिन्हें चलने के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंगें
व्याख्या
सही उत्तर B, अनुदैर्ध्य यांत्रिक तरंगें है। ध्वनि तरंग में माध्यम के कण उसी रेखा पर आगे-पीछे कंपन करते हैं जिस दिशा में तरंग चल रही है, जिससे वे क्षेत्र बनते हैं जहाँ कण पास आ जाते हैं, अर्थात संपीडन, और वे क्षेत्र जहाँ वे दूर हट जाते हैं, अर्थात विरलन। कणों का कंपन अनिवार्य होने के कारण ध्वनि यांत्रिक तरंग है और उसे भौतिक माध्यम चाहिए।
विकल्प A दोनों दृष्टि से गलत है: ध्वनि विद्युत चुंबकीय नहीं है और उसके कण गति की दिशा के लंबवत कंपन नहीं करते। विकल्प C एक विशेष स्थिति बताता है; ठोस के भीतर ध्वनि अनुप्रस्थ तरंग के रूप में भी चल सकती है, पर वायु, जल और ठोसों में साधारण ध्वनि अनुदैर्ध्य होती है और यह विकल्प ध्वनि को गलत ढंग से केवल ठोसों तक सीमित कर देता है। विकल्प D प्रकाश, रेडियो तरंगों और एक्स किरणों जैसी विद्युत चुंबकीय तरंगों का वर्णन है, जो ध्वनि के विपरीत निर्वात से भी गुजर जाती हैं।
ध्वनि निम्नलिखित में से किससे होकर नहीं गुजर सकती?
- A.वायु
- B.जल
- C.निर्वात
- D.लोहा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. निर्वात
व्याख्या
सही उत्तर C, निर्वात है। निर्वात में कोई कण नहीं होते, और ध्वनि जैसी यांत्रिक तरंग केवल कणों को कंपित करके तथा विक्षोभ को पड़ोसी कणों तक पहुँचाकर ही चल सकती है। घंटी-जार प्रयोग इसे स्पष्ट दिखाता है: काँच के जार के भीतर बजती विद्युत घंटी की ध्वनि हवा निकालते जाने पर धीमी होकर अंततः बंद हो जाती है, यद्यपि हथौड़ी को घंटी से टकराते हुए देखा जा सकता है।
विकल्प A, वायु, कमरे के ताप पर लगभग 340 मीटर प्रति सेकंड की चाल से ध्वनि ले जाती है और यही वह माध्यम है जिसमें हम सामान्यतः सुनते हैं। विकल्प B, जल, इसे और तेज, लगभग 1500 मीटर प्रति सेकंड से ले जाता है, इसीलिए ह्वेल और सोनार समुद्र में दूर तक संदेश भेज पाते हैं। विकल्प D, लोहा, ठोस है जिसके कण पास-पास बँधे होते हैं और वह तीनों में सबसे तेज, कई हजार मीटर प्रति सेकंड की चाल से ध्वनि पहुँचाता है।
सामान्य मानव कान के लिए श्रव्य आवृत्ति परास लगभग कितना होता है?
- A.2 हर्ट्ज से 200 हर्ट्ज
- B.20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज
- C.200 हर्ट्ज से 2,00,000 हर्ट्ज
- D.20 हर्ट्ज से 2,000 हर्ट्ज
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज
व्याख्या
सही उत्तर B, 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज है। यही वह आवृत्ति पट्टी है जिस पर स्वस्थ मानव कान प्रतिक्रिया करता है, और आयु बढ़ने के साथ ऊपरी सीमा घटती जाती है। निचली सीमा से नीचे की ध्वनि अवश्रव्य कहलाती है, जो हाथी, ह्वेल तथा भूकंप से पहले होने वाली भूगर्भीय हलचल से उत्पन्न होती है; ऊपरी सीमा से ऊपर की ध्वनि पराश्रव्य कहलाती है, जिसे चमगादड़, डॉल्फिन और पॉरपॉइज उत्पन्न भी करते हैं और सुनते भी हैं।
विकल्प A, 2 से 200 हर्ट्ज, का निचला भाग लगभग पूरा अवश्रव्य क्षेत्र में है और ऊपरी सीमा साधारण बोलचाल तथा संगीत को भी काट देती है। विकल्प C, 200 से 2,00,000 हर्ट्ज, गलत ढंग से पराश्रव्य क्षेत्र तक फैल जाता है, जिसे कोई मनुष्य नहीं सुन सकता। विकल्प D, 20 से 2,000 हर्ट्ज, का आरंभ सही है पर ऊपरी सीमा दस गुना कम है, जिससे संगीत के वे ऊँचे स्वर छूट जाएँगे जिन्हें लोग सरलता से सुनते हैं।
निम्नलिखित में से किस माध्यम में ध्वनि सबसे तेज चलती है?
- A.निर्वात
- B.वायु
- C.जल
- D.इस्पात
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. इस्पात
व्याख्या
सही उत्तर D, इस्पात है। ध्वनि ठोसों में सबसे तेज चलती है क्योंकि उनके कण पास-पास और मजबूती से बँधे होते हैं, इसलिए विक्षोभ लगभग तुरंत अगले कण तक पहुँच जाता है। इस्पात में चाल लगभग पाँच हजार मीटर प्रति सेकंड, जल में लगभग पंद्रह सौ और वायु में केवल लगभग तीन सौ चालीस मीटर प्रति सेकंड होती है। याद रखने का क्रम है ठोस, फिर द्रव, फिर गैस।
विकल्प A, निर्वात, ध्वनि को बिलकुल नहीं ले जाता, क्योंकि कंपन करने के लिए कोई कण ही नहीं होता। विकल्प B, वायु, दिए गए तीनों वास्तविक माध्यमों में सबसे धीमी है क्योंकि उसके कण दूर-दूर होते हैं और विक्षोभ पहुँचाने में अधिक समय लेते हैं। विकल्प C, जल, वायु से तेज है पर इस्पात से कहीं धीमा। इसी कारण रेल की पटरी आती हुई गाड़ी की आवाज हवा के माध्यम से पहुँचने से बहुत पहले ले आती है।
समुद्र की गहराई नापने और पनडुब्बियों का पता लगाने में प्रयुक्त सोनार किस सिद्धांत पर काम करता है?
- A.प्रकाश तरंगों का अपवर्तन
- B.पराश्रव्य तरंगों का परावर्तन
- C.रेडियो तरंगों का वर्ण विक्षेपण
- D.अवश्रव्य तरंगों का व्यतिकरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पराश्रव्य तरंगों का परावर्तन
व्याख्या
सही उत्तर B, पराश्रव्य तरंगों का परावर्तन है। सोनार का पूरा नाम साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग है। जहाज पर लगा प्रेषित्र जल में छोटे पराश्रव्य स्पंद भेजता है, ये स्पंद समुद्र तल, पनडुब्बी, हिमशैल या मछलियों के झुंड से परावर्तित होते हैं और संसूचक लौटती प्रतिध्वनि दर्ज कर लेता है। चूँकि स्पंद नीचे जाकर वापस आता है, गहराई बराबर जल में ध्वनि की चाल गुणा लगा समय, भाग दो।
विकल्प A गलत है क्योंकि समुद्री जल में प्रकाश थोड़ी ही दूरी में अवशोषित हो जाता है और गहरे समुद्र की थाह लेने में किसी काम का नहीं। विकल्प C भी इसी कारण गलत है, क्योंकि खारे जल में रेडियो तरंगें तेजी से क्षीण होती हैं, इसीलिए पनडुब्बियों को संपर्क के लिए सतह पर आना पड़ता है या बहुत कम आवृत्ति का प्रयोग करना पड़ता है। विकल्प D में पट्टी और परिघटना दोनों गलत हैं: अवश्रव्य ध्वनि श्रव्य सीमा से नीचे है और दूरी मापने में व्यतिकरण का प्रयोग नहीं होता।
वायु में स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए परावर्तक सतह की न्यूनतम दूरी लगभग कितनी होनी चाहिए?
- A.1.7 मीटर
- B.17 मीटर
- C.34 मीटर
- D.170 मीटर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 17 मीटर
व्याख्या
सही उत्तर B, लगभग 17 मीटर है। मनुष्य के मस्तिष्क में ध्वनि की संवेदना लगभग एक सेकंड के दसवें भाग तक बनी रहती है, इसलिए परावर्तित ध्वनि को अलग प्रतिध्वनि के रूप में सुनने के लिए मूल ध्वनि के कम से कम इतनी देर बाद पहुँचना चाहिए। उस दसवें भाग में वायु में ध्वनि लगभग 34 मीटर चलती है, पर उसे सतह तक जाकर लौटना भी है, इसलिए सतह स्वयं कम से कम उसकी आधी दूरी, लगभग 17 मीटर पर होनी चाहिए।
विकल्प A, 1.7 मीटर, दस गुना कम है और उससे परावर्तन लगभग एक सौवें सेकंड में लौट आएगा, जो अलग सुनाई देने के लिए बहुत जल्दी है। विकल्प C, 34 मीटर, ध्वनि द्वारा तय कुल पथ है, दीवार तक की दूरी नहीं, और इस प्रश्न में यही सबसे आम भूल है। विकल्प D, 170 मीटर, दस गुना अधिक है; सतह इतनी दूर होने से बहुत पहले ही प्रतिध्वनि सुनाई देने लगती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ध्वनि निर्वात से क्यों नहीं गुजर सकती?
ध्वनि यांत्रिक तरंग है, अर्थात वह माध्यम के कणों को कंपित करके और विक्षोभ को अगले कणों तक पहुँचाकर चलती है। निर्वात में कण होते ही नहीं, इसलिए संपीडन और विरलन को आगे ले जाने वाला कुछ नहीं बचता। घंटी-जार प्रयोग यही दिखाता है: बजती विद्युत घंटी वाले जार से हवा निकालते जाने पर ध्वनि धीमी होकर समाप्त हो जाती है, यद्यपि हथौड़ी को टकराते हुए देखा जा सकता है।
क्या तेज ध्वनि धीमी ध्वनि से अधिक चाल से चलती है?
नहीं। ध्वनि की चाल माध्यम और उसके ताप पर निर्भर करती है, ध्वनि की प्रबलता या तारत्व पर नहीं। एक ही कमरे में फुसफुसाहट और चीख समान चाल से चलती हैं; चीख केवल अधिक ऊर्जा ले जाती है, और आयाम तथा प्रबलता यही मापते हैं। इसी कारण रिंगटोन की आवाज बढ़ाने से उसकी आवृत्ति नहीं बदलती।
प्रतिध्वनि और अनुरणन में क्या अंतर है?
प्रतिध्वनि एक बार परावर्तित होकर मूल ध्वनि से अलग सुनाई देने वाली ध्वनि है, जिसके लिए परावर्तक सतह पर्याप्त दूर, वायु में लगभग सत्रह मीटर, होनी चाहिए। अनुरणन बंद स्थान में दीवारों, छत और फर्श से बार-बार परावर्तन के कारण ध्वनि का देर तक बने रहना है, जिसमें परावर्तन इतनी जल्दी आते हैं कि अलग नहीं सुनाई देते। हॉल में अवशोषक पदार्थ लगाकर इसे घटाया जाता है।
सोनार समुद्र की गहराई कैसे मापता है?
प्रेषित्र नीचे की ओर पराश्रव्य स्पंद भेजता है और संसूचक यह समय नोट करता है कि समुद्र तल से प्रतिध्वनि लौटने में कितना समय लगा। चूँकि स्पंद नीचे जाकर वापस आता है, कुल दूरी गहराई की दुगुनी होती है। इसलिए गहराई बराबर समुद्री जल में ध्वनि की चाल गुणा लगा समय, भाग दो। इसी विधि से पनडुब्बियाँ, हिमशैल और मछलियों के झुंड भी खोजे जाते हैं।
बिजली की चमक गर्जन से पहले क्यों दिखती है?
दोनों एक ही क्षण उत्पन्न होते हैं, पर प्रकाश लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड चलता है जबकि वायु में ध्वनि केवल लगभग 340 मीटर प्रति सेकंड। इसलिए प्रकाश देखने वाले तक लगभग तुरंत पहुँच जाता है और ध्वनि को प्रत्येक किलोमीटर के लिए लगभग तीन सेकंड लगते हैं। चमक और गर्जन के बीच के सेकंड गिनकर तीन से भाग देने पर दूरी का मोटा अनुमान किलोमीटर में मिल जाता है।
स्रोत
- विज्ञान (कक्षा 9), ध्वनि अध्याय — एनसीईआरटी
- विज्ञान (कक्षा 8), ध्वनि अध्याय — एनसीईआरटी





