बंगाल में स्थायी बंदोबस्त 1793 में किस गवर्नर-जनरल ने लागू किया था?
- A.वारेन हेस्टिंग्स
- B.लॉर्ड कॉर्नवालिस
- C.लॉर्ड वेलेजली
- D.लॉर्ड डलहौजी
सही उत्तर
B. लॉर्ड कॉर्नवालिस
व्याख्या
सही उत्तर B, लॉर्ड कॉर्नवालिस है। स्थायी बंदोबस्त, जिसे जमींदारी व्यवस्था भी कहते हैं, 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू हुआ। इसने जमींदारों को भूमि का स्वामी माना और उनकी राजस्व मांग सदा के लिए निश्चित कर दी, जिससे राज्य को निश्चित आय तो मिली पर बढ़ते उत्पादन में हिस्सा नहीं रहा। इसकी तैयारी जॉन शोर ने की थी और कॉर्नवालिस ने इसे लागू किया।
विकल्प A गलत है क्योंकि वारेन हेस्टिंग्स ने पंचवर्षीय और फिर वार्षिक इजारेदारी व्यवस्था आजमाई थी, स्थायी नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि लॉर्ड वेलेजली सहायक संधि और चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध से जुड़ा है, भू-राजस्व बंदोबस्त से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड डलहौजी आधी शताब्दी बाद आया और व्यपगत के सिद्धांत, रेल तथा तार के लिए याद किया जाता है।
परीक्षा में इसे प्रायः रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्थाओं के साथ पूछा जाता है, इसलिए यह भी याद रखें कि स्थायी बंदोबस्त जमींदार से, रैयतवाड़ी सीधे किसान से और महालवाड़ी पूरे गांव से राजस्व लेता था।
पूरा लेख पढ़ें: ब्रिटिश विस्तार और भारत के गवर्नर-जनरल: परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंसालबाई की संधि निम्नलिखित में से किस वर्ष हुई थी?
- A.1817
- B.1769
- C.1800
- D.1782
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1782
व्याख्या
सही उत्तर D, 1782 है। सालबाई की संधि ने प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त किया, जो वारेन हेस्टिंग्स के कार्यकाल में लड़ा गया था। इसकी शर्तों के अनुसार साल्सेट कंपनी के पास रहा, रघुनाथराव का पेशवा पद का दावा छोड़ दिया गया और माधवराव द्वितीय को पेशवा माना गया। इससे अंग्रेजों को मराठों के साथ लगभग बीस वर्ष की शांति मिली।
विकल्प A गलत है क्योंकि 1817 में लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध आरंभ हुआ, जिसने मराठा शक्ति ही समाप्त कर दी। विकल्प B गलत है क्योंकि 1769 में मद्रास की संधि हुई थी, जिसने हैदर अली के विरुद्ध प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध समाप्त किया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1800 में ऐसी कोई संधि नहीं हुई; चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध एक वर्ष पहले 1799 में श्रीरंगपट्टनम में टीपू सुल्तान की मृत्यु के साथ समाप्त हो चुका था। केवल 1782 सालबाई से मेल खाता है।
बक्सर का युद्ध किस वर्ष लड़ा गया था?
- A.1757
- B.1764
- C.1765
- D.1772
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1764
व्याख्या
सही उत्तर B, 1764 है। बक्सर का युद्ध 22 अक्टूबर 1764 को वर्तमान बिहार में लड़ा गया, जहां हेक्टर मुनरो के नेतृत्व में कंपनी की सेना ने बंगाल के मीर कासिम, अवध के शुजाउद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेनाओं को हराया। प्लासी के विपरीत यह वास्तविक सैन्य विजय थी और इसी ने कंपनी को पूर्वी भारत की असली शक्ति बना दिया।
विकल्प A गलत है क्योंकि 1757 सिराजुद्दौला के विरुद्ध प्लासी के युद्ध का वर्ष है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1765 इलाहाबाद की संधि का वर्ष है, जो बक्सर के बाद हुई और जिससे कंपनी को बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा की दीवानी मिली, पर उस वर्ष कोई युद्ध नहीं हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि 1772 में वारेन हेस्टिंग्स बंगाल का गवर्नर बना और उसने द्वैध शासन समाप्त किया, वह भी युद्ध का वर्ष नहीं है।
बंगाल का पहला गवर्नर-जनरल कौन था?
- A.रॉबर्ट क्लाइव
- B.लॉर्ड कॉर्नवालिस
- C.वारेन हेस्टिंग्स
- D.लॉर्ड विलियम बेंटिंक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. वारेन हेस्टिंग्स
व्याख्या
सही उत्तर C, वारेन हेस्टिंग्स है। 1773 के रेग्युलेटिंग एक्ट ने बंगाल के गवर्नर का पदनाम बदलकर बंगाल का गवर्नर-जनरल कर दिया और उसे चार सदस्यों की परिषद दी, तथा वारेन हेस्टिंग्स, जो पहले से गवर्नर था, इस नई पदवी को धारण करने वाला पहला व्यक्ति बना। इसी अधिनियम ने कलकत्ता में उच्चतम न्यायालय का प्रावधान किया, जो 1774 में स्थापित हुआ।
विकल्प A गलत है क्योंकि रॉबर्ट क्लाइव बंगाल का गवर्नर और द्वैध शासन का जनक था, पर उसके समय गवर्नर-जनरल का पद था ही नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि लॉर्ड कॉर्नवालिस बाद में, 1786 में आया और स्थायी बंदोबस्त के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड विलियम बेंटिंक भारत का पहला गवर्नर-जनरल था, जो पदवी 1833 के चार्टर एक्ट ने बनाई, और यही इस प्रश्न का सबसे बड़ा जाल है।
लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि को स्वीकार करने वाला पहला भारतीय शासक कौन था?
- A.अवध का नवाब
- B.पेशवा बाजीराव द्वितीय
- C.हैदराबाद का निजाम
- D.मैसूर का राजा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. हैदराबाद का निजाम
व्याख्या
सही उत्तर C, हैदराबाद का निजाम है। उसने वेलेजली के कार्यकाल के पहले ही वर्ष, 1798 में सहायक संधि पर हस्ताक्षर किए और अपनी फ्रांसीसी प्रशिक्षित सेना भंग करके अपने खर्च पर ब्रिटिश सेना रखना स्वीकार किया। इस व्यवस्था में शासक अपने विदेशी संबंधों का नियंत्रण भी छोड़ देता था और अपने दरबार में ब्रिटिश रेजीडेंट स्वीकार करता था, जिससे वह संरक्षित पर परावलंबी राजा बन जाता था।
विकल्प A गलत है क्योंकि अवध ने यह संधि तीन वर्ष बाद, 1801 में मानी और उसका खर्च चुकाने के लिए रुहेलखंड तथा निचला दोआब देना पड़ा। विकल्प B गलत है क्योंकि पेशवा ने 1802 में बेसीन की संधि की, जब होल्कर ने उसे पूना से बाहर कर दिया था। विकल्प D गलत है क्योंकि मैसूर 1799 में, चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध में टीपू सुल्तान की पराजय और मृत्यु के बाद इस व्यवस्था में आया।
निम्नलिखित में से किस रियासत का विलय व्यपगत के सिद्धांत के अंतर्गत नहीं हुआ था?
- A.सतारा
- B.झांसी
- C.नागपुर
- D.अवध
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. अवध
व्याख्या
सही उत्तर D, अवध है। अवध को लॉर्ड डलहौजी ने 1856 में मिलाया, किंतु इसका आधार नवाब वाजिद अली शाह का कथित कुशासन बताया गया, प्राकृतिक उत्तराधिकारी का अभाव नहीं। इसीलिए इसे व्यपगत वाले विलयों से अलग गिना जाता है, और यही अंतर इस प्रश्न का मर्म है।
विकल्प A गलत है क्योंकि सतारा 1848 में व्यपगत के सिद्धांत से मिलाई गई पहली रियासत थी। विकल्प B गलत है क्योंकि झांसी 1853 में राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद मिलाई गई, जब रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र का दावा अस्वीकार कर दिया गया, और इसी अस्वीकृति ने उन्हें 1857 के विद्रोह की नायिका बनाया। विकल्प C गलत है क्योंकि नागपुर 1854 में भोंसले वंश के रघुजी तृतीय की मृत्यु के बाद इसी सिद्धांत से मिलाया गया।
इस प्रश्न में यह भी ध्यान रखें कि व्यपगत के सिद्धांत से मिलाई गई रियासतों का क्रम सतारा 1848, जैतपुर और संबलपुर 1849, उदयपुर 1852, झांसी 1853 तथा नागपुर 1854 है, और अवध इस सूची से बाहर रहता है।