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GK24
भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत में औद्योगिक लाइसेंस किस अधिनियम द्वारा अनिवार्य किया गया था?

  1. A.उद्योग विकास और विनियमन अधिनियम, 1951
  2. B.एमआरटीपी अधिनियम, 1969
  3. C.फेरा, 1973
  4. D.कंपनी अधिनियम, 1956

सही उत्तर

A. उद्योग विकास और विनियमन अधिनियम, 1951

व्याख्या

सही उत्तर है A, उद्योग विकास और विनियमन अधिनियम, 1951। इस अधिनियम के अंतर्गत नया कारखाना लगाने, क्षमता बढ़ाने, उत्पाद बदलने या संयंत्र का स्थान बदलने के लिए सरकार से लाइसेंस लेना पड़ता था, और इसी से राज्य 1991 तक औद्योगिक विकास का स्वरूप नियंत्रित करता रहा।

विकल्प B गलत है क्योंकि 1969 का एमआरटीपी अधिनियम आर्थिक शक्ति के संकेंद्रण तथा प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार से संबंधित था और वह लाइसेंस व्यवस्था के साथ चलता था, उसे बनाता नहीं था। विकल्प C गलत है क्योंकि 1973 का विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम विदेशी मुद्रा और विदेशी हिस्सेदारी को नियंत्रित करता था, जिसका स्थान 1999 के फेमा ने लिया। विकल्प D गलत है क्योंकि 1956 का कंपनी अधिनियम कंपनियों के निगमन और प्रबंधन का कानून था। 1951 को लाइसेंस, 1969 को एकाधिकार और 1973 को विदेशी मुद्रा से जोड़ें।

पूरा लेख पढ़ें: औद्योगिक नीति और एमएसएमई: संकल्प, सुधार और योजनाएँ

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Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · 20 Dec 2020आसान

एमएसएमई का अर्थ क्या है?

  1. A.मध्यम, लघु और हाशिए के उद्यम
  2. B.सूक्ष्म, लघु और हाशिए के उद्यम
  3. C.मध्यम, सामरिक और सूक्ष्म उद्यम
  4. D.सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम

व्याख्या

सही उत्तर है D, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम। यह पद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम से आया है, जो 2 अक्तूबर 2006 से प्रवर्तन में आया और जिसने इस क्षेत्र को पहली वैधानिक परिभाषा दी तथा लघु एवं सहायक औद्योगिक उपक्रम की पुरानी शब्दावली का स्थान लिया।

विकल्प A गलत है क्योंकि पहली श्रेणी सूक्ष्म है, मध्यम नहीं; बढ़ते क्रम में तीन श्रेणियाँ सूक्ष्म, लघु और मध्यम हैं। विकल्प B इसी कारण उलटे रूप में गलत है: तीसरा शब्द मध्यम है, हाशिए का नहीं, और भारत के किसी कानून में हाशिए का उद्यम जैसा पद नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि अधिनियम में सामरिक नाम की कोई उद्यम श्रेणी ही नहीं है। यह इस क्षेत्र का सरलतम प्रश्न है, इसलिए विकल्प अंत तक पढ़ें, क्योंकि चारों आरंभ में सही से लगते हैं।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: उत्तर प्रदेश · 5 Dec 2021मध्यम

भारत में एक करोड़ रुपये तक के निवेश और पाँच करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले व्यवसाय किस श्रेणी में आते हैं?

  1. A.अति लघु उद्यम
  2. B.लघु उद्यम
  3. C.सूक्ष्म उद्यम
  4. D.मध्यम उद्यम
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सूक्ष्म उद्यम

व्याख्या

सही उत्तर है C, सूक्ष्म उद्यम। 2020 में अधिसूचित मिश्रित मानदंड के अनुसार संयंत्र, मशीनरी या उपकरण में एक करोड़ रुपये तक के निवेश और पाँच करोड़ रुपये तक के कारोबार वाला उद्यम सूक्ष्म उद्यम है, और यही सीमाएँ चाहे वह वस्तु बनाता हो या सेवा देता हो, समान रूप से लागू होती हैं। किसी एक सीमा के पार जाने पर उद्यम अगली श्रेणी में जाता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि अति लघु या टिनी उद्यम पुरानी नीति व्यवस्था की श्रेणी थी, जो वर्तमान वर्गीकरण में नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि उसी अधिसूचना में लघु उद्यम की सीमा दस करोड़ रुपये का निवेश और पचास करोड़ का कारोबार थी। विकल्प D गलत है क्योंकि मध्यम उद्यम की सीमा पचास करोड़ तथा दो सौ पचास करोड़ रुपये थी। सीमाएँ बाद में बढ़ाई गई हैं, पर इस आकार का उद्यम सूक्ष्म श्रेणी में ही रहता है, इसलिए उत्तर नहीं बदलता।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 18 Jan, 2025कठिन

आर्थिक सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत दिसंबर 1991 में किस अधिनियम में संशोधन कर सार्वजनिक उद्यमों को औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड के दायरे में लाया गया?

  1. A.उद्योग अधिनियम
  2. B.कंपनी अधिनियम
  3. C.वित्तीय पुनर्वास अधिनियम
  4. D.रुग्ण औद्योगिक कंपनी अधिनियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. रुग्ण औद्योगिक कंपनी अधिनियम

व्याख्या

सही उत्तर है D, रुग्ण औद्योगिक कंपनी अधिनियम। 1985 के इस अधिनियम ने निजी क्षेत्र की रुग्ण औद्योगिक इकाइयों के लिए औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड बनाया था। सुधारों के अंतर्गत दिसंबर 1991 में उसमें संशोधन हुआ, जिससे रुग्ण सार्वजनिक उद्यम भी बोर्ड को भेजे जा सकें; यह उस नई नीति से मेल खाता था जो सार्वजनिक उपक्रमों को व्यावसायिक मानदंड पर परखना चाहती थी।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1951 का उद्योग विकास और विनियमन अधिनियम लाइसेंस से संबंधित था, रुग्णता या पुनर्जीवन से नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि कंपनी अधिनियम सामान्यतः कंपनियों के गठन और संचालन का कानून है और उसके अंतर्गत परिसमापन अलग मार्ग है। विकल्प C गलत है क्योंकि भारतीय कानून में वित्तीय पुनर्वास अधिनियम नाम का कोई कानून नहीं है। 1985 के अधिनियम की व्यवस्था का स्थान आगे 2016 की दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता ने लिया।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 24 Mar, 2026, Shift 2मध्यम

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम की स्थापना भारत में किस वर्ष हुई?

  1. A.1954
  2. B.1982
  3. C.1955
  4. D.1975
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1955

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1955। राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम की स्थापना 1955 में हुई, जिसका कार्य लघु इकाइयों को किराया क्रय पर मशीनें, कच्चे माल की आपूर्ति, विपणन और सरकारी खरीद में सहायता देना है, और वह सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि 1954 ग्रामीण तथा लघु उद्योगों पर कार्वे समिति के कार्य का वर्ष है, और वह यहाँ उस अभ्यर्थी को फँसाने के लिए है जिसे केवल इतना याद है कि निगम पचास के दशक के मध्य का है। विकल्प B गलत है क्योंकि 1982 में ग्रामीण तथा कृषि ऋण के लिए नाबार्ड बना। विकल्प D गलत है क्योंकि 1975 कोयला कंपनियों के राष्ट्रीयकरण और कोल इंडिया की स्थापना का वर्ष है, जिसका लघु उद्योग से संबंध नहीं। इस क्षेत्र की तिथियाँ एक पंक्ति में रखें: एनएसआईसी 1955, केवीआईसी 1957, नाबार्ड 1982 और सिडबी 1990।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम किस वर्ष प्रवर्तन में आया?

  1. A.2002
  2. B.2004
  3. C.2006
  4. D.2010
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 2006

व्याख्या

सही उत्तर है C, 2006। एमएसएमईडी अधिनियम 2 अक्तूबर 2006 से प्रवर्तन में आया। उसने पहली बार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की कानूनी परिभाषा दी, एमएसएमई के लिए राष्ट्रीय बोर्ड का उपबंध किया, पंजीकरण ज्ञापन की व्यवस्था की और यह नियम रखा कि क्रेता को सूक्ष्म या लघु उद्यम का भुगतान पैंतालीस दिन में करना होगा।

विकल्प A गलत है क्योंकि 2002 प्रतिस्पर्धा अधिनियम का वर्ष है, जिसने एमआरटीपी अधिनियम का स्थान लिया। विकल्प B गलत है क्योंकि 2004 में इस क्षेत्र का कोई कानून नहीं आया; वह वर्ष केवल सही उत्तर के निकट होने के कारण रखा गया है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2010 में इस क्षेत्र की कोई विधि नहीं बनी, यद्यपि 2011 में राष्ट्रीय विनिर्माण नीति आई। वर्ष के साथ तिथि भी ध्यान रखें, क्योंकि गाँव और लघु उद्यम के कानून के लिए 2 अक्तूबर जानबूझकर चुना गया।