नालंदा के विशाल पुस्तकालय का नाम क्या था?
- A.रत्नोदधि
- B.धर्मगंज
- C.धम्मपद
- D.विद्यासागर
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, धर्मगंज है। परवर्ती तिब्बती विवरण नालंदा के पुस्तकालय को धर्मगंज यानी धर्म का कोष कहते हैं और बताते हैं कि इसमें रत्नसागर, रत्नोदधि और रत्नरंजक नाम के तीन भवन थे, जिनमें सबसे ऊंचा नौ मंजिला बताया गया है। विकल्प A गलत है क्योंकि रत्नोदधि उन्हीं तीन भवनों में से एक का नाम था, पूरे पुस्तकालय का नहीं, और इसी कारण यह इस प्रश्न का सबसे सामान्य भ्रम है। विकल्प C गलत है क्योंकि धम्मपद पालि ग्रंथों का प्रसिद्ध संकलन है, जिसमें बुद्ध के वचन संगृहीत हैं, यह कोई पुस्तकालय नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि विद्यासागर नालंदा के किसी भवन का नाम नहीं है; यह बहुत बाद में बंगाल में प्रयुक्त विद्या की उपाधि है। कहा जाता है कि यह पुस्तकालय इतना विशाल था कि बारहवीं शताब्दी के अंत में विहार के विनाश के समय वह लंबे समय तक जलता रहा।
पूरा लेख पढ़ें: प्राचीन भारत के विश्वविद्यालय: नालंदा और तक्षशिला
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंचीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग भारतीय उपमहाद्वीप में लगभग ______ वर्ष पहले आया था।
- A.1100
- B.1700
- C.2000
- D.1400
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ह्वेनसांग ईसा की सातवीं शताब्दी में, कन्नौज के हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था, जो आज से लगभग चौदह सौ वर्ष पहले का समय है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नालंदा महाविहार की स्थापना किस शासक ने की थी?
- A.अशोक
- B.कुमारगुप्त प्रथम
- C.हर्षवर्धन
- D.धर्मपाल
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गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम ने ईसा की पांचवीं शताब्दी में आज के बिहार में राजगीर के पास नालंदा महाविहार की स्थापना की और यहां से उनके नाम की मुहर भी मिली है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तांत्रिक बौद्ध शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र विक्रमशिला किस राजा ने स्थापित किया था?
- A.गोपाल
- B.धर्मपाल
- C.देवपाल
- D.महिपाल
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पाल शासक धर्मपाल ने नौवीं शताब्दी के आसपास बिहार के भागलपुर जिले के अंतीचक में विक्रमशिला की स्थापना की, जो तांत्रिक अध्ययन और द्वारपंडित कहे जाने वाले उन विद्वानों के लिए प्रसिद्ध हुआ जो द्वार पर प्रवेशार्थियों की परीक्षा लेते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्राचीन शिक्षा केंद्र तक्षशिला किस क्षेत्र में स्थित था?
- A.मगध
- B.गांधार
- C.अवंति
- D.वत्स
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तक्षशिला, जिसे यूनानी और बाद के अंग्रेज लेखक टैक्सिला कहते हैं, उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम में गांधार महाजनपद की राजधानी थी, जो आज पाकिस्तान के रावलपिंडी जिले में है, और बुद्ध के समय में ही यह विद्या का प्रसिद्ध केंद्र था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ह्वेनसांग के अध्ययन काल में नालंदा महाविहार के कुलपति कौन थे?
- A.नागार्जुन
- B.शीलभद्र
- C.धर्मकीर्ति
- D.अतीश दीपंकर
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चीनी यात्री ह्वेनसांग ने सातवीं शताब्दी में हर्षवर्धन के शासनकाल में नालंदा में शीलभद्र के पास योगाचार दर्शन का अध्ययन किया, जो उस समय विहार के वृद्ध कुलपति थे।
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