शुंग वंश की स्थापना निम्नलिखित में से किस मौर्य शासक की हत्या के बाद हुई?
- A.दशरथ
- B.संप्रति
- C.बृहद्रथ
- D.देवभूति
सही उत्तर
C. बृहद्रथ
व्याख्या
सही उत्तर C, बृहद्रथ है। बृहद्रथ मौर्य वंश का अंतिम शासक था। लगभग 185 ईसा पूर्व उसके अपने सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने, परंपरा के अनुसार सेना के निरीक्षण के अवसर पर, उसकी हत्या कर पाटलिपुत्र का सिंहासन ले लिया। इस घटना से मौर्य शासन समाप्त होता है और मौर्योत्तर काल आरंभ होता है, इसलिए लगभग 185 ईसा पूर्व की यह तिथि दोनों युगों की सीमा के रूप में याद रखनी चाहिए।
विकल्प A दशरथ अशोक का पौत्र था, जिसने नागार्जुनी गुफाएँ आजीवकों को दान दीं और वह वंश के अंत से काफी पहले हुआ। विकल्प B संप्रति एक अन्य परवर्ती मौर्य शासक था, जिसे जैन परंपरा जैन धर्म के प्रसार से जोड़ती है। विकल्प D देवभूति मौर्य था ही नहीं; वह अंतिम शुंग शासक था, जिसकी हत्या उसके मंत्री वासुदेव ने कर कण्व वंश की नींव रखी।
पूरा लेख पढ़ें: मौर्योत्तर काल: कुषाण, सातवाहन और विगत प्रश्न
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंप्राचीन भारत में कुषाणों की दूसरी राजधानी निम्नलिखित में से कौन सी थी?
- A.पाटलिपुत्र
- B.दिल्ली
- C.लाहौर
- D.मथुरा
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सही उत्तर: D. मथुरा
व्याख्या
सही उत्तर D, मथुरा है। कुषाणों की मुख्य राजधानी पुरुषपुर यानी आज का पेशावर थी, जिसे कनिष्क प्रथम ने अपनी सत्ता का केंद्र बनाया। जैसे-जैसे साम्राज्य गंगा-यमुना के मैदान में फैला, यमुना तट पर बसा मथुरा उसकी दूसरी राजधानी और दक्षिणी मुख्यालय बन गया। मथुरा मूर्तिकला का बड़ा केंद्र भी बना और नगर के पास मात नामक स्थान से कुषाण राजाओं की प्रतिमाओं का देवकुल मिला है, जिसमें कनिष्क की प्रसिद्ध शीशविहीन मूर्ति भी है।
विकल्प A पाटलिपुत्र नंद, मौर्य और बाद में गुप्त शासकों की राजधानी थी, कुषाणों की नहीं। विकल्प B दिल्ली इस काल में राजधानी के रूप में थी ही नहीं और बारहवीं शताब्दी के बाद दिल्ली सल्तनत के समय उभरी। विकल्प C लाहौर कुषाण क्षेत्र में अवश्य था, पर कभी उनकी राजधानी नहीं रहा।
निम्नलिखित में से कौन कुषाण वंश का शासक नहीं था?
- A.नहपान
- B.वासिष्क
- C.वासुदेव
- D.हुविष्क
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सही उत्तर: A. नहपान
व्याख्या
सही उत्तर A, नहपान है। नहपान शकों के क्षहरात कुल का था, अर्थात पश्चिमी भारत में शासन करने वाले पश्चिमी क्षत्रपों का, और उसका कुषाण वंश से कोई संबंध नहीं था। वह इसलिए याद किया जाता है कि सातवाहन राजा गौतमीपुत्र सातकर्णि ने उसे पराजित कर उसके चाँदी के सिक्कों पर अपनी मुहर फिर से अंकित करवाई, जिनका बड़ा भंडार महाराष्ट्र के जोगलथेंबी से मिला है।
विकल्प B वासिष्क कनिष्क के कुल का कुषाण शासक था और अभिलेखों से ज्ञात है। विकल्प C वासुदेव अंतिम प्रमुख कुषाण राजा था, जिसके सिक्के और शिव भक्ति वंश के भारतीयकरण को दिखाते हैं; इसे कण्व वंश के संस्थापक वासुदेव से नहीं मिलाना चाहिए। विकल्प D हुविष्क कनिष्क और वासुदेव के बीच शासक था तथा अपने विपुल सिक्कों के लिए जाना जाता है।
बुद्ध की जीवनी बुद्धचरित की रचना करने वाले कवि अश्वघोष किस शासक के दरबार में थे?
- A.अशोक
- B.बिंदुसार
- C.कनिष्क
- D.गौतमीपुत्र श्री सातकर्णि
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कनिष्क
व्याख्या
सही उत्तर C, कनिष्क है। अश्वघोष कुषाण शासक कनिष्क प्रथम के दरबार का बौद्ध भिक्षु और संस्कृत कवि था। उसने संस्कृत पद्य में बुद्ध का जीवनचरित बुद्धचरित तथा सौंदरनंद लिखा, और कश्मीर में हुई चौथी बौद्ध संगीति में वसुमित्र के उपाध्यक्ष के रूप में भाग लिया। कनिष्क के दरबार में चिकित्सक चरक और दार्शनिक नागार्जुन भी थे, और यही समूह एक पंक्ति के प्रश्न के रूप में बार-बार पूछा जाता है। अश्वघोष को संस्कृत महाकाव्य परंपरा का आरंभिक कवि भी माना जाता है।
विकल्प A अशोक तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का शासक था, लगभग तीन सौ वर्ष पहले, और उससे मोग्गलिपुत्त तिस्स तथा तीसरी संगीति जुड़ी है। विकल्प B बिंदुसार अशोक का पिता था, जिसके दरबार में यूनानी राजदूत डाइमेकस आया था। विकल्प D गौतमीपुत्र सातकर्णि नासिक प्रशस्ति का सातवाहन राजा था।
राजा हाल द्वारा रचित गाथा सप्तशती किस भाषा में लिखी गई थी?
- A.संस्कृत
- B.पालि
- C.प्राकृत
- D.हिंदी
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सही उत्तर: C. प्राकृत
व्याख्या
सही उत्तर C, प्राकृत है। गाथासप्तशती सातवाहन राजा हाल द्वारा संकलित सात सौ छोटी गाथाओं का संग्रह है। यह महाराष्ट्री प्राकृत में रचा गया, वही बोलचाल की भाषा जिसे सातवाहन अपने अभिलेखों और साहित्य में अपनाते थे, और इसकी गाथाएँ राजकीय विजयों के बजाय दक्कन के ग्रामीण प्रेम और दैनिक जीवन का चित्र खींचती हैं। परीक्षा की दृष्टि से यह ग्रंथ इसलिए महत्वपूर्ण है कि यह दिखाता है कि सातवाहनों ने बाद के गुप्तों के विपरीत प्राकृत को राजभाषा के रूप में बढ़ावा दिया।
विकल्प A संस्कृत राजकीय अभिलेखों की भाषा बाद में बनी, जिसका पहला बड़ा उदाहरण रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख है। विकल्प B पालि बौद्ध त्रिपिटक और मिलिंदपन्हो की भाषा है, हाल के संग्रह की नहीं। विकल्प D हिंदी हाल के एक हजार वर्ष से भी अधिक बाद विकसित हुई, इसलिए पहली या दूसरी शताब्दी के ग्रंथ की भाषा नहीं हो सकती।
नालगिरि के दमन नाम से प्रसिद्ध मूर्तिशिल्प कहाँ से प्राप्त हुआ है?
- A.भरहुत
- B.अमरावती
- C.मथुरा
- D.साँची
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अमरावती
व्याख्या
सही उत्तर B, अमरावती है। देवदत्त द्वारा बुद्ध को मारने के लिए छोड़े गए मदमस्त हाथी नालगिरि के राजगृह की गली में शांत हो जाने का दृश्य आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी की निचली घाटी के अमरावती स्तूप की सबसे प्रसिद्ध पट्टिकाओं में गिना जाता है। अमरावती शैली सातवाहन संरक्षण में फली-फूली और सफेद चूना-पत्थर पर भीड़ भरे, छरहरे तथा प्रवाहमान आकृति-समूह उकेरती थी। अमरावती की अनेक पट्टिकाएँ आज चेन्नई के सरकारी संग्रहालय और लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में सुरक्षित हैं।
विकल्प A भरहुत मध्य प्रदेश का शुंगकालीन स्तूप है, जिसकी वेदिकाओं पर ब्राह्मी में नाम लिखे जातक दृश्य हैं। विकल्प C मथुरा उत्तर की लाल बलुआ पत्थर की शैली है, यह पट्टिका वहाँ की नहीं है। विकल्प D साँची अपने तोरणद्वारों के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ बुद्ध का जीवन प्रतीकों के माध्यम से दिखाया गया है।