मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24
भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

मूल्य स्तर के बढ़ते रहने के बावजूद मुद्रास्फीति की दर का घटना क्या कहलाता है?

  1. A.अपस्फीति
  2. B.विस्फीति
  3. C.मुद्रास्फीतिजनित मंदी
  4. D.विषम स्फीति

सही उत्तर

B. विस्फीति

व्याख्या

सही उत्तर B, विस्फीति है, जिसे अंग्रेजी में डिसइन्फ्लेशन कहते हैं। यदि मुद्रास्फीति की दर सात प्रतिशत से घटकर पाँच प्रतिशत रह जाए तो कीमतें पिछले वर्ष से ऊँची ही हैं, पर उनके बढ़ने की गति धीमी पड़ गई है। यही धीमापन विस्फीति है और ऊँची महँगाई से लड़ने के लिए ब्याज दर बढ़ाने वाला केंद्रीय बैंक सामान्यतः यही हासिल करना चाहता है।

विकल्प A अपस्फीति का अर्थ है कि कीमतें स्वयं गिर रही हैं और दर ऋणात्मक हो गई है, जो कमजोर माँग का संकेत है और कहीं अधिक हानिकारक है। विकल्प C मुद्रास्फीतिजनित मंदी ऊँची महँगाई के साथ कम वृद्धि तथा ऊँची बेरोजगारी है। विकल्प D विषम स्फीति में कुछ वस्तुओं, प्रायः खाद्य पदार्थों, के दाम तेजी से बढ़ते हैं जबकि सामान्य मूल्य स्तर स्थिर रहता है।

पूरा लेख पढ़ें: मुद्रास्फीति और मूल्य सूचकांक: थोक, उपभोक्ता सूचकांक नोट्स

Read in English
सभी देखें
Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

भारतीय रिजर्व बैंक अपने मुद्रास्फीति लक्ष्य ढाँचे में महँगाई मापने के लिए किस सूचकांक का प्रयोग करता है?

  1. A.थोक मूल्य सूचकांक
  2. B.उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (संयुक्त)
  3. C.औद्योगिक उत्पादन सूचकांक
  4. D.जीडीपी अपस्फीतिकारक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (संयुक्त)

व्याख्या

सही उत्तर B, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (संयुक्त) है। 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के संशोधन के बाद लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य ढाँचा अपनाया गया और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी ग्रामीण तथा शहरी संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को नाममात्र लंगर बनाया गया, जैसा उर्जित पटेल समिति ने सुझाया था। इसे इसलिए चुना गया कि यह वही कीमतें मापता है जो परिवार वास्तव में चुकाते हैं और इसमें सेवाएँ भी आती हैं।

विकल्प A थोक मूल्य सूचकांक इस बदलाव से पहले मुख्य माप था, पर इसमें केवल थोक में बिकने वाली वस्तुएँ आती हैं, कोई सेवा नहीं। विकल्प C औद्योगिक उत्पादन सूचकांक औद्योगिक उत्पादन की मात्रा मापता है, यह मूल्य सूचकांक है ही नहीं। विकल्प D जीडीपी अपस्फीतिकारक सबसे व्यापक माप है पर राष्ट्रीय लेखा के साथ बहुत देर से आता है।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत में थोक मूल्य सूचकांक किस निकाय द्वारा तैयार और जारी किया जाता है?

  1. A.भारतीय रिजर्व बैंक
  2. B.श्रम ब्यूरो
  3. C.आर्थिक सलाहकार कार्यालय
  4. D.राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. आर्थिक सलाहकार कार्यालय

व्याख्या

सही उत्तर C, आर्थिक सलाहकार कार्यालय है। थोक मूल्य सूचकांक हर महीने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन उद्योग संवर्धन तथा आंतरिक व्यापार विभाग के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा तैयार और जारी किया जाता है। इसके तीन समूह प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन तथा ऊर्जा और विनिर्मित उत्पाद हैं, और 2017 में जारी शृंखला का आधार वर्ष 2011-12 है।

विकल्प A भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति के लिए मूल्य सूचकांकों का उपयोग तो करता है पर उन्हें तैयार नहीं करता। विकल्प B श्रम ब्यूरो, जो श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन है, औद्योगिक श्रमिकों तथा कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता सूचकांक बनाता है। विकल्प D राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय संयुक्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और राष्ट्रीय लेखा तैयार करता है। परीक्षा में यह ध्यान रखना चाहिए कि थोक सूचकांक वाणिज्य मंत्रालय से और उपभोक्ता सूचकांक सांख्यिकी मंत्रालय से आता है।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

वस्तुओं और सेवाओं की पूर्ति की तुलना में कुल माँग के तेजी से बढ़ने से होने वाली मुद्रास्फीति क्या कहलाती है?

  1. A.लागत-जनित मुद्रास्फीति
  2. B.माँग-जनित मुद्रास्फीति
  3. C.संरचनात्मक मुद्रास्फीति
  4. D.आयातित मुद्रास्फीति
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. माँग-जनित मुद्रास्फीति

व्याख्या

सही उत्तर B, माँग-जनित मुद्रास्फीति है। इसे प्रसिद्ध वाक्य में यूँ कहा जाता है कि बहुत अधिक मुद्रा बहुत कम वस्तुओं के पीछे दौड़ रही है। मुद्रा आपूर्ति की तेज वृद्धि, सरकारी व्यय में बड़ी बढ़ोतरी, सस्ता ऋण या निर्यात में अचानक उछाल कुल माँग को उस स्तर से आगे ले जाते हैं जितना अर्थव्यवस्था मौजूदा कीमतों पर उत्पादित कर सकती है, और तब कीमतें बढ़कर संतुलन बनाती हैं।

विकल्प A लागत-जनित मुद्रास्फीति पूर्ति पक्ष से आती है, जब महँगा कच्चा तेल, बढ़ी मजदूरी या महँगे आयातित कच्चे माल उत्पादन लागत बढ़ा देते हैं। विकल्प C संरचनात्मक मुद्रास्फीति भंडारण, परिवहन या कुशल श्रम की कमी जैसी अड़चनों से आती है। विकल्प D आयातित मुद्रास्फीति लागत-जनित का ही रूप है, जिसमें मुद्रा का मूल्य गिरने या विश्व कीमतें बढ़ने से आयात महँगा होता है।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

ऊँची मुद्रास्फीति के साथ ठहरी हुई वृद्धि और ऊँची बेरोजगारी की स्थिति क्या कहलाती है?

  1. A.पुनर्स्फीति
  2. B.विस्फीति
  3. C.मुद्रास्फीतिजनित मंदी
  4. D.अपस्फीति
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. मुद्रास्फीतिजनित मंदी

व्याख्या

सही उत्तर C, मुद्रास्फीतिजनित मंदी है, जिसे अंग्रेजी में स्टैगफ्लेशन कहते हैं और यह शब्द ठहराव तथा मुद्रास्फीति को जोड़कर बना है। यह वह विषम स्थिति है जिसमें कीमतें तेजी से बढ़ रही हों जबकि उत्पादन ठहरा हो और बेरोजगारी ऊँची हो। इसका उपचार कठिन है, क्योंकि कीमतें रोकने के लिए ब्याज दर बढ़ाने से उत्पादन और गिरता है, जबकि रोजगार के लिए माँग बढ़ाने से कीमतें और चढ़ती हैं। सत्तर के दशक के तेल संकटों ने विश्व अर्थव्यवस्था में इसका सबसे प्रसिद्ध दौर खड़ा किया।

विकल्प A पुनर्स्फीति अपस्फीति के बाद माँग और कीमतें बढ़ाने की सोची-समझी नीति है। विकल्प B विस्फीति में दर घटती है पर कीमतें बढ़ती रहती हैं। विकल्प D अपस्फीति में मूल्य स्तर वास्तव में गिरता है और यह प्रायः कमजोर माँग के साथ आती है, ऊँची महँगाई के साथ नहीं।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

ऊँची मुद्रास्फीति के दौर में सामान्यतः किस वर्ग को लाभ होता है?

  1. A.ऋण लेने वाले
  2. B.ऋण देने वाले
  3. C.पेंशनभोगी
  4. D.सावधि जमा रखने वाले
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ऋण लेने वाले

व्याख्या

सही उत्तर A, ऋण लेने वाले है। ऋण एक निश्चित रुपये राशि में चुकाया जाता है और मुद्रास्फीति उन रुपयों की क्रय शक्ति घटा देती है। इस तरह ऋणी उधार ली गई राशि से कम वास्तविक मूल्य की मुद्रा लौटाता है और कर्ज का वास्तविक बोझ घट जाता है। माल का भंडार रखने वाले उत्पादक और व्यापारी भी इसी तरह लाभ में रहते हैं, क्योंकि उनके भंडार का मूल्य मूल्य स्तर के साथ बढ़ता है।

विकल्प B ऋण देने वालों को इसी कारण हानि होती है, क्योंकि मिलने वाला ब्याज क्रय शक्ति की हानि तक की भरपाई नहीं कर पाता। विकल्प C पेंशनभोगी निश्चित राशि पर जीते हैं और जब तक पेंशन कीमतों से न जुड़ी हो, घाटे में रहते हैं। विकल्प D सावधि जमा पर निश्चित नाममात्र दर मिलती है; मुद्रास्फीति उससे अधिक हो तो वास्तविक प्रतिफल ऋणात्मक हो जाता है।