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GK24
भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ पुनर्खरीद अनुबंध अर्थात रेपो में वाणिज्यिक बैंक

  1. A.सरकारी प्रतिभूतियाँ रिज़र्व बैंक को बेचता है और बाद में उन्हें पुनः खरीदने का वचन देता है
  2. B.रिज़र्व बैंक से सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदता है और बाद में उन्हें पुनः बेचने का वचन देता है
  3. C.अपनी अतिरिक्त नकदी बिना किसी प्रतिभूति पर रिज़र्व बैंक के पास जमा करता है
  4. D.रिज़र्व बैंक को वाणिज्यिक पत्र जारी करता है

सही उत्तर

A. सरकारी प्रतिभूतियाँ रिज़र्व बैंक को बेचता है और बाद में उन्हें पुनः खरीदने का वचन देता है

व्याख्या

सही उत्तर A है। रेपो में कोष की आवश्यकता वाला बैंक सरकारी प्रतिभूतियाँ रिज़र्व बैंक को बेचता है और साथ ही एक दिन या कुछ दिन बाद उन्हें कुछ अधिक मूल्य पर पुनः खरीदने का अनुबंध करता है; यह अंतर ब्याज है और ली जाने वाली दर रेपो दर कहलाती है, जो देश की नीतिगत दर है। B प्रतिवर्ती रेपो का वर्णन करता है, जिसमें रिज़र्व बैंक बैंकों को प्रतिभूतियाँ बेचकर तंत्र से अतिरिक्त कोष अवशोषित करता है। C गलत है क्योंकि रिज़र्व बैंक के पास अप्रतिभूत जमा रेपो नहीं है; रेपो का मूल लक्षण यही है कि उधारी सरकारी प्रतिभूतियों से संपार्श्विक होती है। D गलत है क्योंकि बैंक वाणिज्यिक पत्र जारी करके रिज़र्व बैंक से धन नहीं जुटा सकता; वाणिज्यिक पत्र कंपनियाँ और वित्तीय संस्थाएँ बाज़ार के निवेशकों को जारी करती हैं।

पूरा लेख पढ़ें: मुद्रा बाज़ार और वित्तीय साधन: ट्रेजरी बिल, सीपी, सीडी

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Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 9 Oct 2021, Shift 2मध्यम

वाणिज्यिक पत्र के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? I. यह वचन पत्र के रूप में जारी अप्रतिभूत मुद्रा बाज़ार साधन है। II. इसे भारत में 1990 में आरंभ किया गया था। III. इन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है।

  1. A.केवल I
  2. B.I, II और III
  3. C.I और II
  4. D.केवल III
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. I और II

व्याख्या

सही उत्तर C, I और II है। कथन I सही है: वाणिज्यिक पत्र वचन पत्र के रूप में जारी अप्रतिभूत मुद्रा बाज़ार साधन है, अर्थात उसके पीछे कोई प्रतिभूति नहीं, केवल निर्गमकर्ता की साख होती है। कथन II भी सही है: वाणिज्यिक पत्र भारतीय मुद्रा बाज़ार में 1990 में आरंभ हुआ, जिससे उच्च श्रेणी की कंपनियाँ बैंक ऋण के स्थान पर सीधे बाज़ार से कार्यशील पूंजी जुटा सकें। कथन III गलत है, और इसी कारण B तथा D अनुचित हैं: वाणिज्यिक पत्र कंपनियाँ, प्राथमिक व्यापारी और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएँ जारी करती हैं, जबकि रिज़र्व बैंक केवल उसके निर्गम के नियम बनाता है और नियामक की भूमिका निभाता है। रिज़र्व बैंक ट्रेजरी बिल जारी करता है, परंतु वह भी भारत सरकार की ओर से। A अपूर्ण है क्योंकि वह 1990 वाले सही कथन को छोड़ देता है।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 23 March 2022, shift 2मध्यम

रिज़र्व बैंक मुद्रा आपूर्ति के चार वैकल्पिक माप प्रकाशित करता है। एम3 के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

  1. A.जनता के पास करेंसी + मांग जमा
  2. B.एम1 + डाकघर बचत बैंकों की बचत जमा
  3. C.एम1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा
  4. D.एम1 + डाकघर बचत संगठनों की कुल जमा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. एम1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा

व्याख्या

सही उत्तर C, एम1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा है। एम3 को व्यापक मुद्रा अथवा समग्र मौद्रिक संसाधन कहते हैं और रिज़र्व बैंक इसी पर सर्वाधिक ध्यान देता है; इसमें संकीर्ण मुद्रा के साथ बैंकिंग तंत्र की सावधि जमाएँ जोड़ी जाती हैं। A गलत है क्योंकि जनता के पास करेंसी और मांग जमा मिलकर एम1 का ही एक भाग बनाते हैं; एम1 में रिज़र्व बैंक के पास की अन्य जमाएँ भी सम्मिलित होती हैं, अतः दिया गया व्यंजक अपूर्ण है और किसी भी स्थिति में एम1 का वर्णन करता है, एम3 का नहीं। B गलत है क्योंकि एम1 में डाकघर बचत बैंकों की बचत जमा जोड़ने पर एम2 बनता है। D गलत है क्योंकि एम4, एम1 नहीं बल्कि एम3 में राष्ट्रीय बचत पत्र को छोड़कर डाकघर की कुल जमाएँ जोड़ने पर बनता है। तरलता का क्रम याद रखें: एम1 सर्वाधिक तरल और एम4 न्यूनतम।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

मुद्रा बाज़ार में कितनी अवधि तक की परिपक्वता वाली वित्तीय परिसंपत्तियों का लेन-देन होता है?

  1. A.तीन मास
  2. B.छह मास
  3. C.एक वर्ष
  4. D.तीन वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. एक वर्ष

व्याख्या

सही उत्तर C, एक वर्ष है। परिभाषा के अनुसार मुद्रा बाज़ार अल्पकालिक कोषों का बाज़ार है, और भारत सहित सर्वत्र विभाजक रेखा एक वर्ष की परिपक्वता मानी जाती है; इससे अधिक अवधि का साधन पूंजी बाज़ार का होता है। A गलत है क्योंकि तीन मास केवल 91 दिन के ट्रेजरी बिल की अवधि है, जो अनेक साधनों में से एक है, और बाज़ार में 182 तथा 364 दिन के बिल भी चलते हैं। B इसी कारण गलत है: छह मास लगभग 182 दिन के बिल से मेल खाता है, बाज़ार की सीमा से नहीं। D गलत है क्योंकि तीन वर्ष का साधन पूंजी बाज़ार की प्रतिभूति है; इस अवधि की दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियाँ, ऋणपत्र और बॉन्ड सेबी के नियमन में जारी होते हैं। एक वर्ष की यह रेखा स्मरण रखने से वाणिज्यिक पत्र और जमा प्रमाणपत्र की अधिकतम अवधि वाले प्रश्न भी हल हो जाते हैं।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

भारत में ट्रेजरी बिल जारी किए जाते हैं

  1. A.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा
  2. B.भारत सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा
  3. C.भारतीय स्टेट बैंक द्वारा
  4. D.कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारत सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा

व्याख्या

सही उत्तर B है। ट्रेजरी बिल सरकार के अल्पकालिक ऋण का साधन है, और सरकार का बैंकर तथा ऋण प्रबंधक होने के नाते भारतीय रिज़र्व बैंक उसे सरकार की ओर से नीलामी द्वारा जारी करता है। A गलत है क्योंकि सेबी प्रतिभूति बाज़ार का नियमन करता है और अंश तथा ऋणपत्र के निवेशकों की रक्षा करता है; वह कोई सरकारी पत्र जारी नहीं करता। C गलत है क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक अन्य बैंकों और प्राथमिक व्यापारियों की तरह केवल नीलामी का सहभागी है और अपने विनिधान के लिए ट्रेजरी बिल खरीदता है। D गलत है क्योंकि कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय कंपनी विधि का प्रशासन करता है और सरकारी ऋण से उसका कोई संबंध नहीं। साथ में यह भी याद रखें कि ट्रेजरी बिल पर कूपन नहीं होता: वह बट्टे पर बेचा और अंकित मूल्य पर शोधित होता है।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

भारत में ट्रेजरी बिल वर्तमान में निम्नलिखित में से किन अवधियों के लिए जारी किए जाते हैं?

  1. A.14, 91 और 182 दिन
  2. B.91, 182 और 364 दिन
  3. C.30, 60 और 90 दिन
  4. D.182, 364 और 730 दिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 91, 182 और 364 दिन

व्याख्या

सही उत्तर B, 91, 182 और 364 दिन है। रिज़र्व बैंक इन तीन अवधियों के ट्रेजरी बिल नीलाम करता है, जिनमें 91 दिन का बिल सर्वाधिक बार नीलाम होता है। A गलत है क्योंकि 14 दिन का ट्रेजरी बिल बंद कर दिया गया है और वह नियमित नीलामी कैलेंडर का भाग नहीं है; वह केवल पुरानी अध्ययन सामग्री में मिलता है। C गलत है क्योंकि 30, 60 और 90 दिन व्यापारिक बिलों तथा कुछ जमा प्रमाणपत्रों की सामान्य अवधियाँ हैं, ट्रेजरी बिल की नहीं। D गलत है क्योंकि 730 दिन का साधन दो वर्ष चलता है और इसलिए वह पूंजी बाज़ार की दिनांकित सरकारी प्रतिभूति है, जो मुद्रा बाज़ार की एक वर्ष की सीमा से बाहर है। 91 दिन से कम अवधि के लिए सरकार नकदी प्रबंध बिल का प्रयोग करती है, जो 2010 में आरंभ हुए।