अन्य बातें समान रहने पर किसी वस्तु की कीमत में कमी से क्या होता है?
- A.मांग में वृद्धि होती है और मांग वक्र दाईं ओर खिसकता है
- B.उसी मांग वक्र पर मांग का विस्तार होता है
- C.मांग में कमी होती है और वक्र बाईं ओर खिसकता है
- D.मांगी गई मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं होता
सही उत्तर
B. उसी मांग वक्र पर मांग का विस्तार होता है
व्याख्या
सही उत्तर B है। जब केवल उसी वस्तु की कीमत बदलती है तो क्रेता उसी मांग वक्र के दूसरे बिंदु पर चला जाता है, और कम कीमत पर अधिक मात्रा की ओर जाने को मांग का विस्तार कहते हैं, जबकि उलटी स्थिति संकुचन है। विकल्प A और C गलत हैं क्योंकि मांग में वृद्धि या कमी, जिससे पूरा वक्र खिसकता है, उस वस्तु की कीमत के अतिरिक्त किसी कारण से होती है, जैसे आय, रुचि, प्रतिस्थापन या पूरक वस्तु की कीमत, अथवा क्रेताओं की संख्या। विकल्प D गलत है क्योंकि सामान्य वस्तुओं में कीमत बदलने पर मांगी गई मात्रा बदलती ही है; केवल पूर्ण बेलोचदार मांग में वह अपरिवर्तित रहती है। वक्र पर खिसकाव और वक्र के खिसकने का यही अंतर इस अध्याय में सबसे अधिक पूछा जाता है।
पूरा लेख पढ़ें: मांग, आपूर्ति और बाज़ार के प्रकार: नियम, लोच और तथ्य
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंपूर्ण प्रतिस्पर्धा की अनिवार्य शर्तों में से एक है
- A.वस्तु विभेद
- B.एक ही समय पर समरूप वस्तुओं की अनेक कीमतें
- C.अनेक विक्रेता और कुछ ही क्रेता
- D.एक ही समय पर एक ही वस्तु की एक ही कीमत
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. एक ही समय पर एक ही वस्तु की एक ही कीमत
व्याख्या
सही उत्तर D है। पूर्ण प्रतिस्पर्धा में समरूप वस्तु, बहुत अधिक क्रेता और विक्रेता, पूर्ण जानकारी तथा मुक्त प्रवेश और निर्गम मान लिए जाते हैं, और इन सबका प्रत्यक्ष परिणाम एक ही प्रचलित कीमत है: एक ही वस्तु एक ही समय पर दो कीमतों पर नहीं बिक सकती, क्योंकि कोई भी क्रेता तुरंत सस्ते विक्रेता के पास चला जाएगा। विकल्प A गलत है क्योंकि वस्तु विभेद एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की पहचान है, जहां प्रत्येक फर्म वस्तु का अपना ब्रांड बेचती है। विकल्प B गलत है क्योंकि समरूप वस्तुओं की अनेक कीमतें एक कीमत के नियम के विपरीत हैं और ऐसा वहीं होता है जहां जानकारी अपूर्ण हो। विकल्प C गलत है क्योंकि पूर्ण प्रतिस्पर्धा में विक्रेताओं के साथ क्रेता भी अनेक होने चाहिए; क्रेता कम होते तो वे कीमत को प्रभावित करते और फर्म कीमत स्वीकारक न रहती।
निम्नलिखित में से कौन अल्पाधिकार की परिभाषा के सर्वाधिक निकट है?
- A.सिगरेट उद्योग
- B.नाई की दुकान
- C.वेल्डिंग की दुकान
- D.गेहूं उगाने वाले किसान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सिगरेट उद्योग
व्याख्या
सही उत्तर A, सिगरेट उद्योग है। अल्पाधिकार वह बाज़ार है जिसमें कुछ बड़ी फर्में पूरा उत्पादन देती हैं, इसलिए प्रत्येक को देखना पड़ता है कि उसकी कीमत पर दूसरी फर्में क्या प्रतिक्रिया देंगी, और सिगरेट उद्योग इसका मानक उदाहरण है क्योंकि गिनी-चुनी कंपनियों के पास लगभग पूरा बाज़ार रहता है। विकल्प B गलत है क्योंकि नाई की दुकानें बहुत अधिक संख्या में हैं और प्रत्येक अपने क्षेत्र में थोड़ी भिन्न सेवा देती है, जिससे यह व्यवसाय एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा का उदाहरण बनता है। विकल्प C इसी कारण गलत है, क्योंकि वेल्डिंग की दुकानें भी अनेक, छोटी और स्थानीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि गेहूं उगाने वाले किसान असंख्य हैं और समरूप वस्तु उस कीमत पर बेचते हैं जिसे उनमें से कोई प्रभावित नहीं कर सकता, जो वास्तविक जगत में पूर्ण प्रतिस्पर्धा के सबसे निकट है। उदाहरण पक्के कर लें: सिगरेट, सीमेंट और विमान सेवा अल्पाधिकार, कृषि उत्पाद पूर्ण प्रतिस्पर्धा।
ऐसे बाज़ार ढांचे पर विचार कीजिए जिसमें फर्मों की संख्या बड़ी है, फर्मों का प्रवेश और निर्गम मुक्त है, परंतु उनके द्वारा उत्पादित वस्तुएं समरूप नहीं हैं। ऐसे बाज़ार ढांचे को ______ कहा जाता है।
- A.एकक्रेताधिकार
- B.अल्पाधिकार
- C.एकाधिकार
- D.एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा
व्याख्या
सही उत्तर D, एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा है। एडवर्ड चैंबरलिन द्वारा विश्लेषित यह रूप पूर्ण प्रतिस्पर्धा की दो विशेषताएं बनाए रखता है, फर्मों की बड़ी संख्या तथा मुक्त प्रवेश और निर्गम, परंतु तीसरी छोड़ देता है: प्रत्येक फर्म विभेदित या ब्रांडेड वस्तु बेचती है, इसलिए उसका मांग वक्र नीचे ढालू होता है, कीमत पर उसका थोड़ा नियंत्रण होता है और विज्ञापन जैसी विक्रय लागत महत्वपूर्ण हो जाती है। साबुन, टूथपेस्ट और भोजनालय इसके सामान्य उदाहरण हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि एकक्रेताधिकार एक ही क्रेता वाला बाज़ार है, अनेक फर्मों वाला नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि अल्पाधिकार में विक्रेता कुछ ही होते हैं और प्रवेश सामान्यतः कठिन होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि एकाधिकार में ठीक एक विक्रेता होता है जिसका निकट विकल्प नहीं होता, जो प्रश्न में दी बड़ी संख्या और मुक्त प्रवेश दोनों के विपरीत है।
मांग के नियम के अपवाद के रूप में गिफिन का विरोधाभास किसे सम्मिलित करता है?
- A.प्रतिष्ठा की वस्तुएं
- B.घटिया वस्तुएं
- C.पूरक वस्तुएं
- D.प्रतिस्थापन वस्तुएं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. घटिया वस्तुएं
व्याख्या
सही उत्तर B, घटिया वस्तुएं है। रॉबर्ट गिफिन ने देखा कि मोटे आटे जैसी सस्ती मुख्य वस्तु की कीमत घटने पर निर्धन परिवार उसे अधिक नहीं, कम खरीदते थे, क्योंकि बची राशि से वे बेहतर भोजन की ओर चले जाते थे; ऐसी घटिया वस्तुओं को इसीलिए गिफिन वस्तुएं कहा जाता है और उनका मांग वक्र ऊपर की ओर चढ़ता है। विकल्प A गलत है क्योंकि प्रतिष्ठा या दिखावे की वस्तुएं एक अलग अपवाद हैं, जिसे वेब्लेन प्रभाव कहते हैं, जिसमें ऊंची कीमत ही आकर्षण होती है। विकल्प C गलत है क्योंकि कार और पेट्रोल जैसी पूरक वस्तुएं तिर्यक लोच का विषय हैं, जो उनके लिए ऋणात्मक होती है, और उनका मांग के नियम से सीधा संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि प्रतिस्थापन वस्तुएं भी तिर्यक लोच में आती हैं, जहां मान धनात्मक होता है, और वे मांग के नियम का सामान्य रूप से पालन करती हैं। दोनों नामित प्रभाव अलग रखें: घटिया वस्तुओं के लिए गिफिन और प्रतिष्ठा वस्तुओं के लिए वेब्लेन।
मांग का नियम कहता है कि अन्य बातें समान रहने पर
- A.कीमत बढ़ने पर मांगी गई मात्रा बढ़ती है
- B.कीमत बढ़ने पर मांगी गई मात्रा घटती है
- C.कीमत से मांगी गई मात्रा नहीं बदलती
- D.मांगी गई मात्रा केवल आय पर निर्भर करती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कीमत बढ़ने पर मांगी गई मात्रा घटती है
व्याख्या
सही उत्तर B है। मांग का नियम विपरीत संबंध बताता है: ऊंची कीमत पर क्रेता किसी वस्तु की कम मात्रा लेते हैं और नीची कीमत पर अधिक, इसीलिए मांग वक्र बाएं से दाएं नीचे की ओर ढालू होता है। इसके तीन कारण हैं, कीमत घटने पर अधिक क्रय शक्ति छोड़ने वाला आय प्रभाव, महंगे विकल्पों से हटाने वाला प्रतिस्थापन प्रभाव, और सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम जिससे प्रत्येक अतिरिक्त इकाई कम मूल्यवान लगती है। विकल्प A सीधा संबंध बताता है, जो वास्तव में आपूर्ति के नियम का वर्णन है। विकल्प C गलत है क्योंकि मात्रा का न बदलना केवल पूर्ण बेलोचदार मांग की विशेष स्थिति है, सामान्य नियम नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि आय पूरे मांग वक्र को खिसकाती है, जबकि मांग का नियम आय स्थिर रखकर कीमत की बात करता है।