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GK24
भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

व्यवहार्यता अंतर निधि योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार का पूंजी अनुदान सामान्यतः कुल परियोजना लागत के कितने हिस्से तक सीमित रहता है?

  1. A.10 प्रतिशत
  2. B.20 प्रतिशत
  3. C.40 प्रतिशत
  4. D.50 प्रतिशत

सही उत्तर

B. 20 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर B, 20 प्रतिशत है। व्यवहार्यता अंतर निधि उस परियोजना के लिए एकबारगी या विलंबित पूंजी अनुदान है जो आर्थिक रूप से आवश्यक पर व्यावसायिक रूप से अव्यवहार्य हो, जैसे ग्रामीण सड़क या जलापूर्ति लाइन, जिसके उपयोग शुल्क से पूंजी कभी नहीं निकल सकती। आर्थिक कार्य विभाग परियोजना लागत का बीस प्रतिशत तक देता है, और प्रायोजक मंत्रालय, राज्य सरकार या सांविधिक प्राधिकरण बीस प्रतिशत और दे सकता है, इसलिए कुल सहायता चालीस प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसी कारण C आकर्षक भ्रामक विकल्प है: चालीस प्रतिशत संयुक्त सीमा है, अकेले केंद्र का हिस्सा नहीं। A योजना को कम आंकता है और D इसमें उपलब्ध ही नहीं है। इन अंकों को बीस और बीस की जोड़ी के रूप में याद रखें। परीक्षा में यही जोड़ी बार-बार बदली जाती है, इसलिए दोनों आंकड़े अलग-अलग याद रखें।

पूरा लेख पढ़ें: अवसंरचना और पीपीपी: मॉडल, वीजीएफ और मास्टर प्लान

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Q1.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC Civil Services General Studies Offमध्यम

नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक अभिकथन (A) और दूसरा कारण (R) के रूप में। अभिकथन (A): सरकार ने राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) 2020-30 की अवधि के लिए शुरू की है। कारण (R): एनआईपी का उद्देश्य सभी को अवसंरचना तक समान पहुंच देना है। नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए।

  1. A.(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. B.(A) और (R) दोनों सही हैं पर (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. C.(A) सही है पर (R) गलत है
  4. D.(A) गलत है पर (R) सही है
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. (A) गलत है पर (R) सही है

व्याख्या

सही उत्तर D, (A) गलत है पर (R) सही है है। राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन की घोषणा 2019-20 के बजट भाषण में हुई और आर्थिक कार्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाले कार्यबल ने इसे 2019-20 से 2024-25 के पांच वर्षों के लिए तैयार किया, जिसमें लगभग 111 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का अनुमान था। इसलिए अभिकथन में दी अवधि 2020-30 गलत है, जिससे A और B दोनों कट जाते हैं, क्योंकि वे अभिकथन को सही मानते हैं। कारण एनआईपी का उद्देश्य ठीक बताता है: रिपोर्ट का लक्ष्य हर नागरिक को विश्वस्तरीय अवसंरचना तक समान पहुंच देना है, और यह उद्देश्य वास्तविक है। C गलत है क्योंकि वह स्थिति उलट देता है, गलत अभिकथन को सही और सही कारण को गलत कहता है। ऐसे युग्मों में पहले अभिकथन की जांच करें, क्योंकि गलत अभिकथन उत्तर तुरंत तय कर देता है।

Q2.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में प्रयुक्त हाइब्रिड एन्युटी मॉडल में निर्माण के दौरान सरकार परियोजना लागत का कितना हिस्सा अनुदान के रूप में देती है?

  1. A.20 प्रतिशत
  2. B.40 प्रतिशत
  3. C.60 प्रतिशत
  4. D.100 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 40 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर B, 40 प्रतिशत है। टोल और वार्षिकी दोनों मॉडल अड़चन में आने के बाद सड़क निर्माण को पुनर्जीवित करने के लिए हाइब्रिड एन्युटी मॉडल अपनाया गया। काम चलने के दौरान प्राधिकरण बोली परियोजना लागत का चालीस प्रतिशत निर्माण अनुदान के रूप में किश्तों में जारी करता है, और शेष साठ प्रतिशत रियायतग्राही अपनी पूंजी तथा ऋणदाताओं से जुटाता है। वही साठ प्रतिशत पूरा होने के बाद बैंक दर से जुड़े ब्याज के साथ वार्षिकियों की श्रृंखला में वापस मिलता है, और टोल प्राधिकरण स्वयं वसूलता है। A यानी बीस प्रतिशत केंद्रीय व्यवहार्यता अंतर निधि की सीमा है, एचएएम अनुदान नहीं। C यानी साठ प्रतिशत रियायतग्राही का हिस्सा है, इसलिए यह विकल्प बंटवारा उलट देता है। D होने पर यह भागीदारी नहीं, ईपीसी अनुबंध बन जाता।

Q3.भारतीय अर्थव्यवस्थाकठिन

केंद्रीय क्षेत्र की सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं का मूल्यांकन कौन निकाय करता है, जिसका अध्यक्ष आर्थिक कार्य विभाग का सचिव होता है?

  1. A.सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति
  2. B.आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति
  3. C.नीति आयोग का शासी परिषद
  4. D.भारत का वित्त आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति

व्याख्या

सही उत्तर A, सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति है, जिसे पीपीपीएसी लिखा जाता है। यह स्थायी अंतर-मंत्रालयी समिति केंद्रीय क्षेत्र के पीपीपी प्रस्ताव की रियायत संधि, जोखिम बंटवारे और वित्तीय ढांचे की जांच मंजूरी से पहले करती है, और इसका अध्यक्ष आर्थिक कार्य विभाग का सचिव होता है, जिसमें व्यय, विधि कार्य, नीति आयोग तथा प्रायोजक मंत्रालय के सचिव सदस्य होते हैं। B यानी आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति बड़ी परियोजनाओं पर अंतिम राजनीतिक निर्णय लेती है, तकनीकी मूल्यांकन नहीं करती। C मुख्यमंत्रियों का वह निकाय है जो नीति आयोग का मार्गदर्शन करता है और परियोजना मंजूरी से उसका संबंध नहीं है। D अनुच्छेद 280 के अंतर्गत सांविधिक निकाय है जो संघ और राज्यों के बीच करों के बंटवारे की सिफारिश करता है। याद रखें कि तकनीकी मूल्यांकन पीपीपीएसी करती है और अंतिम मंजूरी मंत्रिमंडलीय समिति देती है।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थामध्यम

टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (टीओटी) मॉडल में निजी संचालक को वास्तव में क्या सौंपा जाता है?

  1. A.निर्माणाधीन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
  2. B.पहले से टोल वसूल रहा चालू राष्ट्रीय राजमार्ग खंड
  3. C.लॉजिस्टिक्स पार्क बनाने के लिए भूमि
  4. D.राज्य सरकार के स्वामित्व वाली रेल लाइन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पहले से टोल वसूल रहा चालू राष्ट्रीय राजमार्ग खंड

व्याख्या

सही उत्तर B, पहले से टोल वसूल रहा चालू राष्ट्रीय राजमार्ग खंड है। टीओटी में प्राधिकरण उन पूर्ण राजमार्ग खंडों को गुच्छों में जोड़ता है जिनका यातायात रिकॉर्ड सिद्ध है, और एक अग्रिम भुगतान के बदले लंबी रियायत अवधि, आमतौर पर तीस वर्ष, के लिए टोल वसूली का अधिकार नीलाम करता है। इस तरह मिला धन नई सड़कें बनाने में लगता है, इसलिए टीओटी निर्माण मॉडल नहीं, मुद्रीकरण का साधन है, और अवधि के अंत में संपत्ति प्राधिकरण को लौट आती है। A बीओटी या एचएएम जैसी ग्रीनफील्ड रियायत का वर्णन है, जहां सड़क बननी बाकी है और यातायात केवल अनुमान है। C भूमि पट्टा है, टोल रियायत नहीं। D योजना के बाहर है, जो केंद्रीय प्राधिकरण के राष्ट्रीय राजमार्गों को कवर करती है। इसलिए टीओटी को मुद्रीकरण के खंड में रखकर याद करें, निर्माण मॉडलों के साथ नहीं।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थाआसान

निम्नलिखित में कौन सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल नहीं है?

  1. A.बीओटी (वार्षिकी)
  2. B.हाइब्रिड एन्युटी मॉडल
  3. C.इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण
  4. D.डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण

व्याख्या

सही उत्तर C, इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण है। ईपीसी अनुबंध में परियोजना का स्वामित्व सरकार का होता है, वह अपने बजट से उसका भुगतान करती है और केवल निर्माण सेवा खरीदती है; ठेकेदार को किए गए काम का पैसा मिलता है, उस पर संचालन की जिम्मेदारी नहीं रहती और वह आय जोखिम नहीं उठाता, इसलिए भागीदारी का कोई लक्षण मौजूद नहीं होता। A यानी वार्षिकी आधारित बीओटी वह भागीदारी है जिसमें निजी भागीदार अपनी पूंजी से निर्माण करता है और उसे तय किश्तों में भुगतान मिलता है। B यानी हाइब्रिड एन्युटी मॉडल चालीस प्रतिशत निर्माण अनुदान और शेष निजी वित्त को मिलाता है। D यानी डीबीएफओटी रियायत का पूर्णतम रूप है। परीक्षक इस प्रश्न से यही विचार जांचता है कि निजी वित्त और संचालन मिलकर पीपीपी बनाते हैं।