मानचित्र, मानचित्र प्रक्षेप और सुदूर संवेदन: नोट्स
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मानचित्र के नोट्स: मापक और प्रकार, समोच्च रेखाएं और सम रेखाएं, मानचित्र प्रक्षेप तथा सुदूर संवेदन, उपग्रह, जीआईएस और जीपीएस।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

मानचित्र पृथ्वी अथवा उसके किसी भाग का चयनित और सामान्यीकृत निरूपण है, जो समतल सतह पर मापक के अनुसार बनाया जाता है। मानचित्र बनाने के विज्ञान को कार्टोग्राफी कहते हैं। पृथ्वी गोल है और कागज समतल, इसलिए कोई भी मानचित्र आकार, क्षेत्रफल, दिशा और दूरी चारों को एक साथ शुद्ध नहीं रख सकता; मानचित्रकार इनमें से किसे बचाता है, यही चुनाव प्रक्षेप कहलाता है। सुदूर संवेदन इसी अध्याय का नया भाग है: पृथ्वी को स्पर्श किए बिना दूर से सूचना एकत्र करना और उस सूचना को मानचित्र में बदलना।
मापक और मानचित्रों के प्रकार
मापक मानचित्र की दूरी तथा धरातल की उसी दूरी के बीच का अनुपात है। इसे तीन प्रकार से दिखाया जाता है: कथनात्मक मापक, जैसे एक सेंटीमीटर बराबर एक किलोमीटर; आरेखीय या रेखीय मापक, जो विभाजित रेखा होती है और मानचित्र को छोटा-बड़ा करने पर भी सही रहती है; तथा प्रदर्शक भिन्न, जैसे 1:50,000, जो इकाई रहित अनुपात है और किसी भी मापन पद्धति में पढ़ा जा सकता है। प्रदर्शक भिन्न का हर जितना बड़ा होगा, मापक उतना छोटा होगा और मानचित्र में विवरण उतना कम रहेगा। गाँवों के भू-अभिलेख मानचित्र अर्थात कैडेस्ट्रल मानचित्र तथा नगर योजनाएं बहुत बड़े मापक पर बनती हैं और भूखंडों की सीमा तथा स्वामित्व दर्ज करती हैं। स्थलाकृतिक मानचित्र, जैसे भारतीय सर्वेक्षण विभाग की 1:50,000 मापक की शीट, उच्चावच, अपवाह, बस्तियां और सड़कें दिखाते हैं। एटलस और भित्ति मानचित्र छोटे मापक के होते हैं, तथा विषयक या वितरण मानचित्र एक ही विषय दिखाते हैं, जैसे वर्षा, मिट्टी अथवा जनसंख्या। भारतीय सर्वेक्षण विभाग की स्थापना 1767 में हुई, मेजर जेम्स रेनेल उसके पहले सर्वेयर जनरल थे और उसका मुख्यालय देहरादून में है।
उच्चावच का निरूपण: समोच्च और सम रेखाएं
उच्चावच दिखाने के लिए हैश्यूर, पहाड़ी छायाकरण, स्तर रंजन और बिंदु ऊँचाई प्रयुक्त होते रहे हैं, परंतु मानक साधन समोच्च रेखा है, जो माध्य समुद्र तल से समान ऊँचाई वाले सभी बिंदुओं को जोड़ती है। दो क्रमागत समोच्च रेखाओं के बीच की लंबवत दूरी समोच्च अंतराल है, जो एक शीट पर स्थिर रखी जाती है; मानचित्र का मापक जितना बड़ा होगा, अंतराल उतना छोटा रखा जा सकता है। निकट-निकट खिंची समोच्च रेखाएं तीव्र ढाल बताती हैं और दूर-दूर खिंची रेखाएं मंद ढाल; मिल जाने वाली रेखाएं कगार या लंबवत ढाल दर्शाती हैं; नदी की ऊपरी दिशा में इंगित अंग्रेजी अक्षर वी जैसी रेखाएं घाटी बताती हैं, और भीतर सबसे ऊँचे मान वाली संकेंद्री बंद रेखाएं पहाड़ी बताती हैं। समान मान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा सम रेखा कहलाती है और प्रत्येक प्रकार का अपना नाम है।
| सम रेखा | किसकी समानता |
|---|---|
| समताप रेखा | तापमान |
| समदाब रेखा | वायुदाब |
| समवर्षा रेखा | वर्षा |
| समधूप रेखा | सूर्यप्रकाश की अवधि |
| सममेघ रेखा | मेघाच्छादन |
| समलवण रेखा | जल की लवणता |
| समगहराई रेखा | जल की गहराई |
| समभूकंप रेखा | भूकंप की तीव्रता |
मानचित्र प्रक्षेप
प्रक्षेप ग्लोब की अक्षांश और देशांतर रेखाओं को समतल कागज पर व्यवस्थित रूप से उतारना है। प्रक्षेपों का वर्गीकरण उस सतह के आधार पर होता है जिस पर ग्लोब को प्रक्षेपित माना जाता है, जिससे बेलनाकार, शंक्वाकार तथा खमध्य या दिगंशीय वर्ग बनते हैं; विधि के आधार पर परिदृश्य, अपरिदृश्य और रूढ़ प्रक्षेप बनते हैं; तथा सुरक्षित रखे गए गुण के आधार पर भी वर्ग बनते हैं। जो प्रक्षेप क्षेत्रफल शुद्ध रखता है उसे समक्षेत्र या होमोलोग्राफिक कहते हैं, और जो आकार शुद्ध रखता है उसे शुद्ध आकृति या ऑर्थोमॉर्फिक कहते हैं। 1569 में जेरार्डस मर्केटर द्वारा बनाया मर्केटर प्रक्षेप बेलनाकार और शुद्ध आकृति वाला है, जिस पर प्रत्येक रंब रेखा सरल रेखा बनती है, इसलिए वह सदैव नाविकों का मानचित्र रहा; उसकी कमजोरी यह है कि ध्रुवों की ओर क्षेत्रफल अत्यधिक बढ़ा दिखता है और ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका के बराबर प्रतीत होता है। शंक्वाकार प्रक्षेप मध्य अक्षांशों के पूर्व-पश्चिम विस्तार वाले देशों के लिए, ध्रुवीय खमध्य प्रक्षेप ध्रुवीय प्रदेशों के लिए तथा मोलवाइड और साइनुसॉइडल जैसे समक्षेत्र प्रक्षेप विश्व वितरण मानचित्रों के लिए उपयुक्त हैं।
सुदूर संवेदन
सुदूर संवेदन किसी वस्तु या क्षेत्र के भौतिक संपर्क में आए बिना, विद्युत चुंबकीय विकिरण के माध्यम से उसके विषय में सूचना एकत्र करना है। इसकी प्रक्रिया में कई अंग जुड़े हैं: ऊर्जा का स्रोत, सामान्यतः सूर्य; उस ऊर्जा का वायुमंडल से गुजरना; लक्ष्य के साथ उसकी अंतःक्रिया, जहाँ प्रत्येक वस्तु अपने ढंग से परावर्तन, अवशोषण या उत्सर्जन करती है और यही उसका वर्णक्रमीय अभिलक्षण कहलाता है; किसी प्लेटफॉर्म पर लगा संवेदक जो विकिरण अंकित करता है; आंकड़ों का भू-केंद्र तक प्रेषण; तथा प्रसंस्करण और विवेचन। संवेदक निष्क्रिय होते हैं जब वे सूर्य के प्रकाश अथवा पृथ्वी के उत्सर्जन पर निर्भर रहते हैं, और सक्रिय होते हैं जब वे स्वयं ऊर्जा उत्पन्न करते हैं, जैसे रडार और लिडार; इसीलिए सक्रिय संवेदक रात में और बादलों के आर-पार भी कार्य कर सकता है। प्लेटफॉर्म भू-आधारित, वायुयान आधारित अथवा उपग्रह आधारित हो सकते हैं। आंकड़ों की गुणवत्ता चार विभेदनों से बताई जाती है: स्थानिक, अर्थात सबसे छोटी पहचानी जा सकने वाली वस्तु का आकार; वर्णक्रमीय, अर्थात अंकित तरंगदैर्घ्य बैंडों की संख्या और चौड़ाई; विकिरणमितीय, अर्थात तीव्रता के अंतर के प्रति संवेदनशीलता; तथा कालिक, अर्थात एक ही स्थान का चित्र कितने अंतराल पर लिया जाता है।
उपग्रह और भारत का कार्यक्रम
भू-प्रेक्षण के उपग्रह अधिकतर कुछ सौ किलोमीटर ऊँचाई की निकट-ध्रुवीय सूर्य तुल्यकालिक कक्षाओं में रहते हैं, जो भूमध्य रेखा को प्रत्येक बार समान स्थानीय समय पर पार करती हैं और इससे चित्र तुलनीय बनते हैं; मौसम और संचार उपग्रह भूमध्य रेखा के ऊपर लगभग 36,000 किलोमीटर की भू-स्थिर कक्षा में रहते हैं, जहाँ उनका परिक्रमण काल पृथ्वी के घूर्णन के बराबर होता है और वे आकाश में स्थिर प्रतीत होते हैं। 1979 में प्रक्षेपित भास्कर-एक भारत का पहला प्रायोगिक भू-प्रेक्षण उपग्रह था और 1988 में प्रक्षेपित आईआरएस-1ए भारतीय सुदूर संवेदन श्रेणी का पहला परिचालनिक उपग्रह। कार्टोसैट उपग्रह मानचित्रण के लिए, रिसोर्ससैट भूमि और फसलों के लिए, ओशनसैट समुद्र के लिए तथा रीसैट रडार प्रतिबिंबन के लिए बने हैं, जो बादलों के आर-पार देख सकता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, जिसका मुख्यालय हैदराबाद और भू-केंद्र शाडनगर में है, आंकड़े प्राप्त कर वितरित करता है, और इसरो का भुवन भू-पोर्टल चित्र तथा विषयक मानचित्र जनता के लिए उपलब्ध कराता है। इन आंकड़ों का उपयोग फसल पूर्वानुमान, वन आवरण और बंजर भूमि मानचित्रण, भूजल तथा खनिज संभावना, बाढ़ और चक्रवात चेतावनी, नगर नियोजन और आपदा प्रबंधन में होता है।
जीआईएस, जीपीएस और नाविक
भौगोलिक सूचना तंत्र मानचित्र की सूचना को परतों में रखता है, जिसमें प्रत्येक परत रैस्टर अथवा वेक्टर रूप में स्थानिक आंकड़े तथा सारणियों में गुण आंकड़े रखती है, जिससे परतों को एक पर एक रखकर प्रश्न पूछे जा सकते हैं; इसी से नियोजक पूछ सकता है कि कौन से गाँव नदी से दो किलोमीटर के भीतर और एक निश्चित ऊँचाई से ऊपर हैं। उपग्रह नौसंचालन इससे जुड़ी तकनीक है: संयुक्त राज्य अमेरिका का ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम एक साथ कई उपग्रहों के संकेतों से स्थिति निर्धारित करता है, और भारत के पास इसरो द्वारा निर्मित और संचालित अपनी क्षेत्रीय प्रणाली नाविक है, जो देश तथा आस-पास के क्षेत्र को आवरित करती है; नागर विमानन के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ विकसित गगन संवर्धन प्रणाली भी है।
परीक्षा की दृष्टि से
परीक्षाओं में मापक दिखाने के तीन तरीके और प्रदर्शक भिन्न का अर्थ, सम रेखाओं के नाम, समोच्च रेखाओं की दूरी से ढाल का अनुमान, मर्केटर प्रक्षेप का वर्ग और गुण, सक्रिय तथा निष्क्रिय संवेदक का अंतर, चार विभेदन, दो कक्षाएं और भू-स्थिर कक्षा की ऊँचाई तथा भारतीय उपग्रह श्रेणियां और आंकड़े संभालने वाली संस्था पूछी जाती है। जाल ये हैं: बड़े हर को बड़ा मापक समझ लेना, समवर्षा और समधूप रेखा मिला देना, मर्केटर को समक्षेत्र मान लेना, रडार को निष्क्रिय संवेदक कहना, तथा राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र को हैदराबाद के बजाय बेंगलुरु में बताना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कार्टोग्राफी | मानचित्र निर्माण का विज्ञान और कला |
|---|---|
| प्रदर्शक भिन्न | इकाई रहित अनुपात, जैसे 1:50,000; भारतीय सर्वेक्षण विभाग की स्थलाकृतिक शीट का मापक |
| भारतीय सर्वेक्षण विभाग | स्थापना 1767; पहले सर्वेयर जनरल मेजर जेम्स रेनेल; मुख्यालय देहरादून |
| समोच्च रेखा | माध्य समुद्र तल से समान ऊँचाई के बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखा; दो के बीच की दूरी समोच्च अंतराल |
| समक्षेत्र प्रक्षेप | होमोलोग्राफिक; शुद्ध आकृति वाला प्रक्षेप ऑर्थोमॉर्फिक या कनफॉर्मल |
| मर्केटर प्रक्षेप | बेलनाकार और शुद्ध आकृति वाला, 1569; रंब रेखाएं सरल, नौसंचालन में प्रयुक्त |
| सक्रिय संवेदक | रडार और लिडार, जो स्वयं ऊर्जा उत्पन्न करते हैं और रात में तथा बादलों के पार काम करते हैं |
| विभेदन | स्थानिक, वर्णक्रमीय, विकिरणमितीय और कालिक |
| भू-स्थिर कक्षा | भूमध्य रेखा के ऊपर लगभग 36,000 किलोमीटर, परिक्रमण काल पृथ्वी के घूर्णन के बराबर |
| पहले भारतीय उपग्रह | भास्कर-एक (1979) प्रायोगिक; आईआरएस-1ए (1988) पहला परिचालनिक सुदूर संवेदन उपग्रह |
| भारतीय श्रेणियां | कार्टोसैट मानचित्रण, रिसोर्ससैट भूमि और फसल, ओशनसैट समुद्र, रीसैट रडार प्रतिबिंबन |
| आंकड़ा संस्था | राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, इसरो, हैदराबाद; भू-केंद्र शाडनगर; भुवन भू-पोर्टल |
| भारतीय नौसंचालन | नाविक, इसरो की क्षेत्रीय उपग्रह नौसंचालन प्रणाली; नागर विमानन के लिए गगन |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
किसी मानचित्र का प्रदर्शक भिन्न 1:50,000 लिखा है। इसका अर्थ क्या है?
- A.मानचित्र की एक इकाई धरातल पर उसी इकाई के 50,000 के बराबर है
- B.मानचित्र का एक सेंटीमीटर धरातल पर 50,000 किलोमीटर दर्शाता है
- C.मानचित्र 50,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र दिखाता है
- D.मानचित्र को वायु फोटोचित्र से 50,000 गुना छोटा किया गया है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A है। प्रदर्शक भिन्न इकाई रहित शुद्ध अनुपात है, इसलिए मानचित्र पर लंबाई की एक इकाई धरातल पर उसी इकाई के पचास हजार के बराबर होती है; इसे सेंटीमीटर, इंच अथवा किसी भी इकाई में पढ़ा जा सकता है, इसीलिए यह सर्वत्र समझा जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि इसमें इकाइयां मिला दी गई हैं: ऐसी शीट पर एक सेंटीमीटर पचास हजार सेंटीमीटर अर्थात आधा किलोमीटर दर्शाता है, पचास हजार किलोमीटर नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि प्रदर्शक भिन्न यह नहीं बताता कि शीट कितना क्षेत्र आवरित करती है; वह कागज के आकार पर निर्भर है। विकल्प D गलत है क्योंकि यह भिन्न मानचित्र की तुलना धरातल से करती है, फोटोचित्र से नहीं, और मानचित्र भू-सर्वेक्षण से भी बन सकता है। इसी कारण प्रदर्शक भिन्न को अंतरराष्ट्रीय मापक भी कहा जाता है, क्योंकि कोई भी देश उसे अपनी मापन पद्धति में पढ़ सकता है और मानचित्र का अर्थ वही रहता है।
1:10,000 मापक वाले मानचित्र के लिए उपयुक्त समोच्च अंतराल कितना होता है?
- A.2 मीटर
- B.5 मीटर
- C.10 मीटर
- D.20 मीटर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, 2 मीटर है। किसी शीट के लिए चुना गया समोच्च अंतराल मुख्यतः उसके मापक तथा धरातल के उच्चावच पर निर्भर करता है: बड़े मापक का मानचित्र रेखाओं को एक-दूसरे में मिलने दिए बिना निकट-निकट समोच्च रेखाएं दिखा सकता है, इसलिए छोटा अंतराल संभव और वांछनीय होता है। एक बटे दस हजार का मापक विस्तृत सर्वेक्षण तथा अभियांत्रिकी कार्य में प्रयुक्त बड़ा मापक है, जिसके लिए दो मीटर का अंतराल सामान्य चुनाव है। विकल्प B, C और D गलत हैं क्योंकि पाँच, दस और बीस मीटर के अंतराल क्रमशः छोटे मापकों के लिए उपयुक्त होते हैं; एक बटे दस हजार की शीट पर इतना बड़ा अंतराल ढालों को लगभग खाली छोड़ देगा और मापक से मिलने वाली शुद्धता व्यर्थ हो जाएगी। स्मरणीय नियम यह है कि मापक जितना छोटा और धरातल जितना विषम, समोच्च अंतराल उतना बड़ा।
1569 का मर्केटर प्रक्षेप किस वर्ग का है और कौन सा गुण सुरक्षित रखता है?
- A.शंक्वाकार, और क्षेत्रफल सुरक्षित रखता है
- B.बेलनाकार, और आकार सुरक्षित रखता है
- C.खमध्य, और दूरी सुरक्षित रखता है
- D.शंक्वाकार, और दिशा केवल ध्रुवों पर सुरक्षित रखता है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, बेलनाकार, और आकार सुरक्षित रखता है है। मर्केटर बेलनाकार प्रक्षेप है, जिस पर अक्षांश और देशांतर दोनों सरल रेखाएं हैं और समकोण पर मिलती हैं; यह ऑर्थोमॉर्फिक अर्थात शुद्ध आकृति वाला है, जिससे स्थानीय आकार सही रहते हैं और स्थिर दिक्मान की रंब रेखा सरल रेखा बनती है। विकल्प A दोनों दृष्टि से गलत है: प्रक्षेप शंक्वाकार नहीं है और उच्च अक्षांशों में क्षेत्रफल बहुत बढ़ा दिखाता है, जो उस पर सबसे बड़ी आपत्ति है। विकल्प C गलत है क्योंकि खमध्य या दिगंशीय प्रक्षेप ग्लोब को स्पर्श करने वाले समतल पर बनते हैं और मुख्यतः ध्रुवीय प्रदेशों के लिए प्रयुक्त होते हैं, तथा मर्केटर दूरियां शुद्ध नहीं रखता। विकल्प D गलत है क्योंकि इसमें गलत वर्ग और ऐसा गुण जोड़ा गया है जिसका यह प्रक्षेप दावा नहीं करता।
मानचित्र पर समवर्षा रेखा किन स्थानों को जोड़ती है?
- A.समान तापमान वाले
- B.समान वर्षा वाले
- C.समान वायुदाब वाले
- D.समान सूर्यप्रकाश अवधि वाले
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, समान वर्षा वाले है। समवर्षा रेखा उन स्थानों को जोड़ती है जहाँ निर्धारित अवधि में समान मात्रा में वर्षा होती है, और भारत के वर्षा मानचित्र इसी रेखा से आर्द्र तथा शुष्क पेटियां दिखाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि समान तापमान वाली रेखा समताप रेखा कहलाती है, जो तापमान और जलवायु मानचित्रों में प्रयुक्त होती है। विकल्प C गलत है क्योंकि समान वायुदाब वाली रेखा समदाब रेखा है, जिस पर मौसम मानचित्र आधारित होते हैं और जिससे दाब प्रवणता तथा पवन पढ़ी जाती है। विकल्प D गलत है क्योंकि समान सूर्यप्रकाश अवधि वाली रेखा समधूप रेखा है, और परीक्षा में यही जोड़ा समवर्षा रेखा से सबसे अधिक भ्रमित करता है। दो अन्य स्मरणीय रेखाएं हैं मेघाच्छादन की सममेघ रेखा और जल गहराई की समगहराई रेखा।
स्थलाकृतिक शीट पर निकट-निकट खिंची समोच्च रेखाएं किसका संकेत देती हैं?
- A.मंद ढाल
- B.तीव्र ढाल
- C.मैदान
- D.पठार का शीर्ष
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, तीव्र ढाल है। चूंकि एक शीट पर समोच्च अंतराल स्थिर रहता है, दो रेखाओं के बीच की क्षैतिज दूरी यह बताती है कि उस निश्चित ऊँचाई तक चढ़ने के लिए कितनी दूर चलना होगा; कम दूरी का अर्थ है तेज चढ़ाई अर्थात तीव्र ढाल। विकल्प A गलत है क्योंकि मंद ढाल पर रेखाएं दूर-दूर फैली रहती हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि मैदान में समोच्च रेखाएं बहुत कम और बहुत दूर-दूर होती हैं, क्योंकि ऊँचाई में अंतर कम है। विकल्प D गलत है क्योंकि पठार का समतल शीर्ष दूर-दूर अथवा अनुपस्थित रेखाओं से दिखता है, और निकट रेखाएं केवल उसके तीव्र किनारों या कगार पर आती हैं। जो रेखाएं वस्तुतः मिल जाती हैं वे कगार या लंबवत ढाल बताती हैं, और ऊपरी दिशा में इंगित वी आकार घाटी बताता है।
भारत का पहला परिचालनिक सुदूर संवेदन उपग्रह कौन था और उसका प्रक्षेपण किस वर्ष हुआ?
- A.आर्यभट्ट, 1975
- B.भास्कर-एक, 1979
- C.आईआरएस-1ए, 1988
- D.कार्टोसैट-1, 2005
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, आईआरएस-1ए, 1988 है। यह भारतीय सुदूर संवेदन श्रेणी का पहला उपग्रह था और इसी से भारत में कृषि, वानिकी, जल संसाधन तथा भू-उपयोग के लिए परिचालनिक भू-प्रेक्षण आरंभ हुआ। विकल्प A गलत है क्योंकि 1975 में प्रक्षेपित आर्यभट्ट भारत का पहला उपग्रह था और उसमें खगोल तथा भौतिकी के प्रयोग थे, परिचालनिक भू-प्रेक्षण पेलोड नहीं। विकल्प B निकट है परंतु गलत है: 1979 का भास्कर-एक भारत का पहला प्रायोगिक भू-प्रेक्षण उपग्रह था, और प्रश्न में आया परिचालनिक शब्द ही उसे आईआरएस-1ए से अलग करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2005 में प्रक्षेपित कार्टोसैट-1 कार्यक्रम में बहुत बाद में आया और उच्च विभेदन मानचित्रण के लिए बना था, जब भारतीय सुदूर संवेदन श्रेणी स्थापित हो चुकी थी। परीक्षा में आर्यभट्ट, भास्कर और आईआरएस श्रेणी के वर्ष एक साथ पूछे जाते हैं, इसलिए पहला उपग्रह, पहला प्रायोगिक भू-प्रेक्षण उपग्रह और पहला परिचालनिक उपग्रह अलग-अलग याद रखना आवश्यक है।
निम्नलिखित में से कौन सक्रिय सुदूर संवेदन संवेदक का उदाहरण है?
- A.साधारण वायु कैमरा
- B.परावर्तित सूर्य प्रकाश अंकित करने वाला बहुवर्णक्रमीय स्कैनर
- C.रडार
- D.पृथ्वी के उत्सर्जन को अंकित करने वाला तापीय संवेदक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, रडार है। सक्रिय संवेदक स्वयं ऊर्जा उत्पन्न करता है, उसे लक्ष्य तक भेजता है और लौटी ऊर्जा मापता है; रडार यह कार्य सूक्ष्म तरंगों से और लिडार लेजर स्पंद से करता है, इसी कारण ऐसे संवेदक रात में तथा सूक्ष्म तरंगों की स्थिति में बादल, धुंध और धुएं के पार भी प्रतिबिंब ले सकते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि वायु कैमरा धरातल पर पड़ने वाले सूर्य प्रकाश पर निर्भर है और इसलिए निष्क्रिय है। विकल्प B इसी कारण गलत है: परावर्तित सूर्य प्रकाश अंकित करने वाला स्कैनर स्वयं कोई ऊर्जा नहीं देता। विकल्प D गलत है क्योंकि तापीय संवेदक पृथ्वी द्वारा उत्सर्जित विकिरण अंकित करता है, जो संवेदक की उत्पन्न ऊर्जा नहीं है, इसलिए वह रात में काम करते हुए भी निष्क्रिय है। विभाजक रेखा ऊर्जा का स्रोत है, दिन या रात नहीं।
भू-स्थिर उपग्रह पृथ्वी से लगभग कितनी ऊँचाई पर स्थापित किया जाता है?
- A.पृथ्वी से 900 किलोमीटर ऊपर
- B.पृथ्वी से 10,000 किलोमीटर ऊपर
- C.भूमध्य रेखा से 36,000 किलोमीटर ऊपर
- D.भूमध्य रेखा से 1,00,000 किलोमीटर ऊपर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, भूमध्य रेखा से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊपर है। इस ऊँचाई पर उपग्रह का परिक्रमण काल पृथ्वी के घूर्णन काल के बराबर हो जाता है, इसलिए वह भूमध्य रेखा के एक ही बिंदु के ऊपर रहता है और आकाश में स्थिर प्रतीत होता है, जो संचार तथा मौसम उपग्रहों के लिए आवश्यक है। विकल्प A गलत है क्योंकि कुछ सौ किलोमीटर की ऊँचाई भू-प्रेक्षण उपग्रहों की निकट-ध्रुवीय सूर्य तुल्यकालिक कक्षाओं की है, जो प्रत्येक चक्कर में भूमध्य रेखा को समान स्थानीय समय पर पार करती हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि दस हजार किलोमीटर पर परिक्रमण काल एक दिन से बहुत कम होगा और उपग्रह आकाश में खिसकता दिखेगा। विकल्प D गलत है क्योंकि एक लाख किलोमीटर भू-स्थिर पट्टी से बहुत ऊपर है और वहाँ परिक्रमण काल एक दिन से अधिक होगा।
भारत में उपग्रह आंकड़े प्राप्त तथा वितरित करने वाले राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र का मुख्यालय कहाँ है?
- A.बेंगलुरु
- B.हैदराबाद
- C.अहमदाबाद
- D.देहरादून
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, हैदराबाद है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का यह केंद्र हैदराबाद से कार्य करता है और निकट स्थित शाडनगर के भू-केंद्र का संचालन करता है, जहाँ भारतीय तथा विदेशी उपग्रहों के आंकड़े प्राप्त होते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि बेंगलुरु में इसरो का मुख्यालय तथा यू. आर. राव उपग्रह केंद्र है, जहाँ उपग्रह बनाए जाते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि अहमदाबाद में अंतरिक्ष उपयोग केंद्र है, जो पेलोड और अनुप्रयोग विकसित करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि देहरादून में भारतीय सर्वेक्षण विभाग का मुख्यालय तथा भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान है, जो प्रशिक्षण और शोध संस्थान है, आंकड़ा केंद्र नहीं। परीक्षा के लिए तीनों नगर एक साथ याद रखें: इसरो मुख्यालय बेंगलुरु, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र अहमदाबाद और राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र हैदराबाद, तथा भारतीय सर्वेक्षण विभाग देहरादून में है।
सुदूर संवेदन में धरातल पर उस सबसे छोटी वस्तु का आकार, जिसे संवेदक पहचान सकता है, क्या कहलाता है?
- A.वर्णक्रमीय विभेदन
- B.विकिरणमितीय विभेदन
- C.कालिक विभेदन
- D.स्थानिक विभेदन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर D, स्थानिक विभेदन है। इसे सामान्यतः एक पिक्सेल के धरातलीय आकार में बताया जाता है, इसलिए एक मीटर विभेदन वाला संवेदक लगभग एक मीटर की वस्तुओं को अलग कर सकता है, और इसी से उच्च विभेदन चित्र नगर मानचित्रण में उपयोगी होते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि वर्णक्रमीय विभेदन अंकित तरंगदैर्घ्य बैंडों की संख्या और उनकी संकीर्णता बताता है, जिससे तय होता है कि भिन्न पदार्थ कितनी बारीकी से पहचाने जा सकेंगे। विकल्प B गलत है क्योंकि विकिरणमितीय विभेदन संकेत की तीव्रता के अंतर के प्रति संवेदनशीलता है, जो स्तरों अथवा बिट में बताई जाती है। विकल्प C गलत है क्योंकि कालिक विभेदन वह अंतराल है जिसके बाद उसी क्षेत्र का चित्र दोबारा लिया जाता है, जो फसल की वृद्धि या बाढ़ के फैलाव को देखने में महत्वपूर्ण है।
कैडेस्ट्रल अर्थात भू-अभिलेख मानचित्र मुख्यतः किस प्रयोजन से बनाए जाते हैं?
- A.भूखंडों की सीमा और स्वामित्व का अभिलेख रखने के लिए
- B.किसी देश में वर्षा का वितरण दिखाने के लिए
- C.महाद्वीपों के बीच वायुमार्ग दिखाने के लिए
- D.किसी पर्वत श्रेणी का उच्चावच छोटे मापक पर दिखाने के लिए
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A है। कैडेस्ट्रल मानचित्र गाँव या नगर का बहुत बड़े मापक का मानचित्र है, जो भूखंडों, खेतों, उनकी सीमाओं तथा स्वामियों को दर्ज करने के लिए बनता है और भू-राजस्व अभिलेख तथा संपत्ति के पंजीकरण का आधार होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि वर्षा का मानचित्र विषयक या वितरण मानचित्र है, जो छोटे मापक पर समवर्षा रेखाओं से बनता है। विकल्प C गलत है क्योंकि वायुमार्ग छोटे मापक के मार्ग अथवा एटलस मानचित्रों पर दिखाए जाते हैं, जहाँ धरातल का विवरण जानबूझकर छोड़ा जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि उच्चावच स्थलाकृतिक मानचित्रों पर समोच्च रेखाओं से दिखाया जाता है, और छोटा मापक शब्द इसे दुगुना गलत बनाता है, क्योंकि कैडेस्ट्रल मानचित्र नियमित प्रयोग के सबसे बड़े मापक वाले मानचित्र हैं। कैडेस्ट्रल शब्द का अर्थ ही संपत्ति का पंजिका अभिलेख है, और यही इसे याद रखने का सरल सूत्र है।
जो मानचित्र प्रक्षेप दिखाए गए प्रदेशों का क्षेत्रफल शुद्ध रखता है, उसे क्या कहा जाता है?
- A.ऑर्थोमॉर्फिक
- B.होमोलोग्राफिक
- C.दिगंशीय
- D.ग्नोमोनिक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, होमोलोग्राफिक है। होमोलोग्राफिक अर्थात समक्षेत्र प्रक्षेप मानचित्र पर क्षेत्रफलों का अनुपात ग्लोब के समान रखता है, इसीलिए जनसंख्या, फसल अथवा वन के विश्व वितरण मानचित्र मोलवाइड या साइनुसॉइडल जैसे प्रक्षेपों पर बनाए जाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि ऑर्थोमॉर्फिक, जिसे कनफॉर्मल भी कहते हैं, उस प्रक्षेप के लिए प्रयुक्त होता है जो स्थानीय स्तर पर आकार शुद्ध रखता है, जैसे मर्केटर; कोई प्रक्षेप बड़े क्षेत्र पर एक साथ ऑर्थोमॉर्फिक और होमोलोग्राफिक नहीं हो सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि दिगंशीय या खमध्य उस वर्ग का नाम है जो ग्लोब को स्पर्श करते समतल पर बनता है, सुरक्षित गुण का नाम नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि ग्नोमोनिक एक विशेष परिदृश्य खमध्य प्रक्षेप है, जिस पर बृहत वृत्त सरल रेखा बनता है और जो विमानन में उपयोगी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बड़े मापक और छोटे मापक के मानचित्र में क्या अंतर है?
बड़े मापक का मानचित्र छोटे क्षेत्र को अधिक विवरण के साथ दिखाता है और उसके प्रदर्शक भिन्न का हर छोटा होता है, जैसे गाँव का भू-अभिलेख मानचित्र या 1:50,000 की स्थलाकृतिक शीट। छोटे मापक का मानचित्र बड़े क्षेत्र को कम विवरण के साथ दिखाता है और उसका हर बड़ा होता है, जैसे विश्व का एटलस मानचित्र। परीक्षार्थी इसे उलट देते हैं, क्योंकि बड़ा शब्द बड़े क्षेत्र का भ्रम देता है।
समोच्च रेखाएं ढाल के विषय में क्या बताती हैं?
समान ऊँचाई पर खिंची समोच्च रेखाएं अपनी आपसी दूरी से धरातल का रूप बताती हैं। निकट-निकट रेखाएं तीव्र ढाल, दूर-दूर रेखाएं मंद ढाल, समान दूरी पर रेखाएं एकसमान ढाल तथा मिल जाने वाली रेखाएं कगार या लंबवत ढाल बताती हैं। नदी की ऊपरी दिशा में इंगित वी आकार की रेखाएं नदी घाटी बताती हैं और भीतर सबसे ऊँचे मान वाली संकेंद्री बंद रेखाएं पहाड़ी या शंक्वाकार शिखर बताती हैं।
विकृति के बाद भी मर्केटर प्रक्षेप नौसंचालन में क्यों प्रयुक्त होता है?
मर्केटर प्रक्षेप पर रंब रेखा, अर्थात स्थिर दिक्मान की रेखा, सरल रेखा के रूप में दिखती है, इसलिए नाविक पैमाने से मार्ग खींचकर एक ही दिक्मान पर चल सकता है। प्रक्षेप शुद्ध आकृति वाला है, इसलिए स्थानीय स्तर पर आकार सही रहते हैं। इसका मूल्य यह है कि भूमध्य रेखा से दूर क्षेत्रफल बहुत बढ़ा दिखता है, जिससे ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका जितना बड़ा प्रतीत होता है।
सक्रिय और निष्क्रिय सुदूर संवेदन में क्या अंतर है?
निष्क्रिय संवेदक वही विकिरण अंकित करता है जो उसने उत्पन्न नहीं किया, अर्थात लक्ष्य से परावर्तित सूर्य प्रकाश अथवा पृथ्वी द्वारा उत्सर्जित ताप, इसलिए दृश्य बैंडों में वह दिन के प्रकाश और स्वच्छ आकाश पर निर्भर रहता है। सक्रिय संवेदक स्वयं ऊर्जा का स्पंद भेजकर लौटी ऊर्जा मापता है, जैसे रडार सूक्ष्म तरंगों से और लिडार लेजर से; इसलिए वह रात में और सूक्ष्म तरंगों की स्थिति में बादल तथा धुएं के पार भी कार्य करता है।
भारत में सुदूर संवेदन आंकड़ों का कार्य कौन सी संस्था देखती है?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, जिसका मुख्यालय हैदराबाद और भू-केंद्र शाडनगर में है, उपग्रह आंकड़े प्राप्त कर उनका प्रसंस्करण और वितरण करता है तथा राज्यों के साथ अनुप्रयोग कार्यक्रम चलाता है। इसरो का भुवन भू-पोर्टल चित्र और विषयक मानचित्र जनता को देता है, और स्थलाकृतिक मानचित्रण की राष्ट्रीय संस्था भारतीय सर्वेक्षण विभाग ही है।
स्रोत
- भूगोल में प्रायोगिक कार्य भाग एक (कक्षा 11): मानचित्र, मापक, प्रक्षेप और स्थलाकृतिक मानचित्र — एनसीईआरटी
- भूगोल में प्रायोगिक कार्य भाग दो (कक्षा 12): सुदूर संवेदन तथा स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी — एनसीईआरटी
- राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र: केंद्र और उसके आंकड़ा उत्पादों का परिचय — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
- भारतीय सर्वेक्षण विभाग का परिचय — भारतीय सर्वेक्षण विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग





