खनिज और ऊर्जा संसाधन: खदानें, पेटियाँ और विद्युत
परीक्षा के लिए भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधन: वर्गीकरण, खनिज पेटियाँ, प्रसिद्ध खदानें और उनके राज्य, कोयले के प्रकार, तेल क्षेत्र तथा नवीकरणीय ऊर्जा।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

खनिज वह प्राकृतिक पदार्थ है जिसकी रासायनिक संरचना निश्चित होती है, और भारत में खनिजों की विविधता बहुत है, यद्यपि उनका वितरण असमान है। इस अध्याय से प्रश्न लगभग सदा जोड़ी मिलाने के रूप में आते हैं, अर्थात किसी खदान या क्षेत्र का उसके राज्य से और किसी खनिज का उसके उपयोग से मेल, साथ ही कोयले का वर्गीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा के स्थल। यह नोट उन जोड़ियों को उसी क्रम में रखता है जिस क्रम में परीक्षक पूछते हैं।
खनिजों का वर्गीकरण
खनिज पहले धात्विक और अधात्विक में बाँटे जाते हैं। धात्विक खनिज लौह होते हैं जब उनमें लोहा हो, जैसे लौह अयस्क, मैंगनीज़, क्रोमाइट और निकल, और अलौह जब लोहा न हो, जैसे ताँबा, बॉक्साइट, सीसा, जस्ता और सोना। अधात्विक खनिजों में अभ्रक, चूना पत्थर, जिप्सम, डोलोमाइट और हीरा आते हैं। ईंधन या ऊर्जा खनिज, अर्थात कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम और थोरियम, अलग गिने जाते हैं। लौह अयस्क के चार प्रकार हैं: मैग्नेटाइट, जिसमें लोहे का अंश सर्वाधिक है और जो चुंबकीय है, हेमेटाइट, जिसका उद्योग में सबसे अधिक प्रयोग होता है, तथा निम्न श्रेणी के लिमोनाइट और सिडेराइट।
तीन खनिज पेटियाँ
| पेटी | क्षेत्र | प्रमुख खनिज |
|---|---|---|
| उत्तर पूर्वी पठार | झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल का छोटानागपुर पठार | कोयला, लौह अयस्क, मैंगनीज़, बॉक्साइट, अभ्रक, यूरेनियम |
| दक्षिण पश्चिमी पठार | कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु और केरल | लौह अयस्क, मैंगनीज़, सोना, चूना पत्थर, मोनाज़ाइट रेत |
| उत्तर पश्चिमी क्षेत्र | अरावली के सहारे राजस्थान और गुजरात | ताँबा, जस्ता, सीसा, जिप्सम, संगमरमर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस |
याद रखने योग्य खदानें और क्षेत्र
| खनिज | प्रसिद्ध केंद्र | राज्य |
|---|---|---|
| लौह अयस्क | बैलाडीला, नोआमुंडी, कुद्रेमुख | छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक |
| मैंगनीज़ | बालाघाट, भंडारा और नागपुर | मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र |
| ताँबा | खेतड़ी, मलाजखंड | राजस्थान, मध्य प्रदेश |
| बॉक्साइट | कोरापुट क्षेत्र का पंचपटमाली, अमरकंटक पठार | ओडिशा, मध्य प्रदेश |
| अभ्रक | कोडरमा और गया पेटी, नेल्लोर | झारखंड तथा बिहार, आंध्र प्रदेश |
| सोना | कोलार और हट्टी | कर्नाटक |
| यूरेनियम | जादूगोड़ा, तुम्मलपल्ले | झारखंड, आंध्र प्रदेश |
| हीरा | पन्ना | मध्य प्रदेश |
| जस्ता और सीसा | ज़ावर और रामपुरा आगूचा | राजस्थान |
कोयला और उसके प्रकार
कोयले की श्रेणी उसमें उपस्थित कार्बन से तय होती है। एंथ्रेसाइट सर्वोच्च श्रेणी है, कठोर और सर्वाधिक कार्बन वाला, और भारत में वह केवल जम्मू कश्मीर में थोड़ी मात्रा में मिलता है। उसके बाद बिटुमिनस कोयला आता है, जो सबसे सामान्य है और धातुकर्म में प्रयुक्त होता है, फिर लिग्नाइट, जो अधिक नमी वाला मुलायम भूरा कोयला है और तमिलनाडु के नेवेली में निकाला जाता है, और अंत में पीट, जो प्रक्रिया की पहली अवस्था है और जिसका ऊष्मा मान बहुत कम है। आयु के आधार पर भारतीय कोयला दो प्रकार का है: गोंडवाना कोयला, जो बीस करोड़ वर्ष से भी पुराना है और देश की अधिकांश आपूर्ति का स्रोत है, तथा जो दामोदर, महानदी, सोन, गोदावरी और वर्धा घाटियों में मिलता है, जिनमें रानीगंज, झरिया, बोकारो, कोरबा, तालचेर और सिंगरौली प्रमुख क्षेत्र हैं; और असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश तथा नागालैंड का नया टर्शियरी कोयला। पश्चिम बंगाल का रानीगंज, जहाँ 1774 में खनन आरंभ हुआ, सबसे पुराना कोयला क्षेत्र है और झारखंड का झरिया सबसे बड़ा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस
भारत के तेल की कहानी असम के डिगबोई से आरंभ होती है, जहाँ उन्नीसवीं सदी में पहला सफल कुआँ खोदा गया और उसके पास बनी रिफाइनरी देश की सबसे पुरानी है। असम के अन्य क्षेत्र नहरकटिया और मोरान हैं, गुजरात में अंकलेश्वर, कलोल और खंभात बेसिन हैं, और अपतटीय उत्पादन मुख्यतः अरब सागर के मुंबई हाई से आता है, जो 1974 में मिला, तथा बंगाल की खाड़ी के कृष्णा गोदावरी बेसिन से। प्राकृतिक गैस, जो तेल के साथ या अकेली मिलती है, हज़ीरा विजयपुर जगदीशपुर पाइपलाइन से भेजी जाती है, और खोज का अधिकांश कार्य 1956 में स्थापित तेल और प्राकृतिक गैस आयोग तथा ऑयल इंडिया करते हैं।
परंपरागत और गैर परंपरागत ऊर्जा
कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलावन लकड़ी और बड़ी जल विद्युत परंपरागत स्रोत हैं; सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय, बायोगैस और परमाणु ऊर्जा गैर परंपरागत मानी जाती हैं। जल विद्युत बड़ी बहुउद्देशीय परियोजनाओं के साथ आई, जैसे सतलुज पर भाखड़ा नांगल, महानदी पर हीराकुंड, कृष्णा पर नागार्जुन सागर और 1948 में टेनेसी वैली प्राधिकरण के आदर्श पर बना दामोदर घाटी निगम। याद रखने योग्य परमाणु विद्युत गृह हैं महाराष्ट्र का तारापुर, जो देश का पहला है, राजस्थान का रावतभाटा, तमिलनाडु के कलपक्कम और कुडनकुलम, उत्तर प्रदेश का नरोरा, गुजरात का काकरापार और कर्नाटक का कैगा। नवीकरणीय स्रोतों में सबसे बड़े सौर पार्क राजस्थान और गुजरात में हैं, तमिलनाडु का मुप्पंडल तथा जैसलमेर पेटी सबसे प्रसिद्ध पवन स्थल हैं, खंभात की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी में ज्वारीय परिसर सर्वाधिक है, और भूतापीय क्षेत्र हिमाचल प्रदेश की पार्वती घाटी का मणिकरण तथा लद्दाख की पुगा घाटी हैं। 1851 में स्थापित भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण देश के खनिजों का सर्वेक्षण करता है, भारतीय खान ब्यूरो खनन पद्धति का नियमन करता है, और खनन 1957 के खान और खनिज विकास तथा विनियमन अधिनियम से शासित होता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से तीन प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, स्थान और खनिज, जो दोनों दिशाओं में पूछा जाता है: बैलाडीला तथा कुद्रेमुख के साथ लौह अयस्क, खेतड़ी और मलाजखंड के साथ ताँबा, पंचपटमाली के साथ बॉक्साइट, कोडरमा के साथ अभ्रक, कोलार और हट्टी के साथ सोना, जादूगोड़ा के साथ यूरेनियम, पन्ना के साथ हीरा तथा नेवेली के साथ लिग्नाइट। दूसरा, वर्गीकरण: एंथ्रेसाइट से पीट तक कोयले की श्रेणियाँ क्रम में, लौह अयस्क के चार प्रकार जिनमें मैग्नेटाइट सर्वोत्तम है, और खनिजों का लौह, अलौह, अधात्विक तथा ईंधन में विभाजन। तीसरा, ऊर्जा: कौन स्रोत परंपरागत है और कौन नहीं, प्रत्येक परमाणु विद्युत गृह का राज्य, प्रत्येक बहुउद्देशीय परियोजना की नदी और भूतापीय तथा ज्वारीय ऊर्जा के स्थल। उत्पादन के आँकड़ों का अनुमान न लगाएँ, क्योंकि वे हर वर्ष बदलते हैं; परीक्षा निश्चित जोड़ियाँ पूछती है। संस्थाएँ भी पूछी जाती हैं, विशेषकर भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और उसका 1851 में गठन।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कोयले की सर्वोत्तम श्रेणी | एंथ्रेसाइट, भारत में जम्मू कश्मीर में |
|---|---|
| लिग्नाइट | नेवेली, तमिलनाडु |
| सबसे पुराना कोयला क्षेत्र | रानीगंज, पश्चिम बंगाल, 1774 से खनन |
| सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र | झरिया, झारखंड |
| सर्वोत्तम लौह अयस्क | मैग्नेटाइट |
| लौह अयस्क खदानें | छत्तीसगढ़ में बैलाडीला, झारखंड में नोआमुंडी, कर्नाटक में कुद्रेमुख |
| ताँबा | राजस्थान में खेतड़ी, मध्य प्रदेश में मलाजखंड |
| बॉक्साइट | ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र का पंचपटमाली |
| अभ्रक | झारखंड तथा बिहार की कोडरमा और गया पेटी, आंध्र प्रदेश का नेल्लोर |
| सोना | कर्नाटक में कोलार और हट्टी |
| यूरेनियम | झारखंड में जादूगोड़ा, आंध्र प्रदेश में तुम्मलपल्ले |
| सबसे पुराना तेल क्षेत्र और रिफाइनरी | डिगबोई, असम |
| अपतटीय तेल क्षेत्र | मुंबई हाई, 1974 में खोजा गया |
| पहला परमाणु विद्युत गृह | तारापुर, महाराष्ट्र |
| भूतापीय क्षेत्र | हिमाचल प्रदेश का मणिकरण और लद्दाख की पुगा घाटी |
| खनिज सर्वेक्षण संस्था | भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, स्थापना 1851 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
निम्नलिखित में से कोयले की सर्वोच्च श्रेणी कौन सी है, जिसमें कार्बन का अंश सर्वाधिक होता है?
- A.पीट
- B.लिग्नाइट
- C.बिटुमिनस
- D.एंथ्रेसाइट
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. एंथ्रेसाइट
व्याख्या
सही उत्तर है D, एंथ्रेसाइट। यह सबसे कठोर और चमकदार कोयला है, इसमें कार्बन का प्रतिशत सर्वाधिक होता है, ऊष्मा सबसे अधिक मिलती है और धुआँ लगभग नहीं निकलता। भारत में यह केवल जम्मू कश्मीर में थोड़ी मात्रा में मिलता है, इसीलिए देश को कुछ उपयोगों के लिए कोकिंग कोल आयात करना पड़ता है।
विकल्प A गलत है क्योंकि पीट कोयला बनने की पहली अवस्था है, जिसमें नमी बहुत अधिक और ऊष्मा मान बहुत कम होता है, वह कोयले से अधिक लकड़ी के निकट है। विकल्प B गलत है क्योंकि लिग्नाइट मध्यम श्रेणी का मुलायम भूरा कोयला है, जो तमिलनाडु के नेवेली में निकलता है। विकल्प C गलत है क्योंकि बिटुमिनस, चाहे सर्वाधिक प्रयुक्त और धातुकर्म में मूल्यवान हो, कार्बन में एंथ्रेसाइट से नीचे है। क्रम याद रखें: पीट, लिग्नाइट, बिटुमिनस और एंथ्रेसाइट।
तमिलनाडु का महत्वपूर्ण खनन केंद्र नेवेली किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है?
- A.लिग्नाइट
- B.मैंगनीज़
- C.बॉक्साइट
- D.अभ्रक
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लिग्नाइट
व्याख्या
सही उत्तर है A, लिग्नाइट। तमिलनाडु के कुड्डालोर क्षेत्र का नेवेली देश की सबसे प्रसिद्ध लिग्नाइट खदान है, जहाँ खुली खदान पद्धति से खनन होता है, और उसके पास बने तापीय विद्युत गृह वहीं लिग्नाइट जलाते हैं, क्योंकि इस मुलायम भूरे कोयले को दूर ले जाना लाभकारी नहीं होता।
विकल्प B गलत है क्योंकि मैंगनीज़ मुख्यतः मध्य प्रदेश के बालाघाट तथा महाराष्ट्र की भंडारा और नागपुर पेटी से आता है। विकल्प C गलत है क्योंकि बॉक्साइट ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र के पंचपटमाली तथा अमरकंटक पठार से जुड़ा है। विकल्प D गलत है क्योंकि अभ्रक झारखंड तथा बिहार की कोडरमा और गया पेटी और आंध्र प्रदेश के नेल्लोर का खनिज है। चूँकि अधिकांश कोयला पूर्व में है और लिग्नाइट दक्षिण में, नेवेली लगभग हर राज्य स्तरीय प्रश्नपत्र में पूछा जाता है।
बैलाडीला लौह अयस्क खदानें किस राज्य में स्थित हैं?
- A.ओडिशा
- B.छत्तीसगढ़
- C.कर्नाटक
- D.झारखंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. छत्तीसगढ़
व्याख्या
सही उत्तर है B, छत्तीसगढ़। दक्षिणी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा क्षेत्र की बैलाडीला श्रेणी में उच्च कोटि का हेमेटाइट मिलता है, और वहाँ का अयस्क विशेष रेल लाइन से विशाखापत्तनम बंदरगाह तक निर्यात के लिए तथा क्षेत्र के इस्पात कारखानों तक भेजा जाता रहा है।
विकल्प A गलत है क्योंकि ओडिशा का लौह अयस्क मयूरभंज और क्योंझर पेटी से आता है, जिसमें गुरुमहिसानी तथा बादामपहाड़ जैसी खदानें हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि कर्नाटक का लौह अयस्क पश्चिमी घाट के कुद्रेमुख तथा बेल्लारी होस्पेट क्षेत्र से जुड़ा है। विकल्प D गलत है क्योंकि झारखंड की खदानें सिंहभूम क्षेत्र की नोआमुंडी और गुआ हैं। चार जोड़ियाँ अधिकांश प्रश्न हल कर देती हैं: बैलाडीला छत्तीसगढ़, नोआमुंडी झारखंड, कुद्रेमुख कर्नाटक और बादामपहाड़ ओडिशा। राज्य स्तरीय परीक्षाओं में बैलाडीला के साथ दंतेवाड़ा ज़िला और विशाखापत्तनम बंदरगाह का संबंध भी पूछ लिया जाता है, इसलिए ये दोनों विवरण साथ रखें।
किस प्रकार के लौह अयस्क में लोहे का अंश सर्वाधिक होता है और जो चुंबकीय प्रकृति का होता है?
- A.हेमेटाइट
- B.मैग्नेटाइट
- C.लिमोनाइट
- D.सिडेराइट
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मैग्नेटाइट
व्याख्या
सही उत्तर है B, मैग्नेटाइट। मैग्नेटाइट सर्वोत्तम कोटि का लौह अयस्क है, रंग में काला, जिसमें उत्कृष्ट चुंबकीय गुण होते हैं, इसीलिए इस्पात के साथ विद्युत उद्योग में भी उसका मूल्य है। कर्नाटक का कुद्रेमुख वह निक्षेप है जिसका नाम उसके साथ सर्वाधिक लिया जाता है।
विकल्प A गलत है क्योंकि लाल रंग के हेमेटाइट में लोहे का अंश मैग्नेटाइट से कम होता है, यद्यपि उद्योग में उसी का सर्वाधिक प्रयोग होता है और भारतीय उत्पादन का बड़ा भाग वही है। विकल्प C गलत है क्योंकि लिमोनाइट निम्न कोटि का अयस्क है जिसमें लोहा जलयोजित रूप में रहता है। विकल्प D गलत है क्योंकि सिडेराइट लोहे का कार्बोनेट अयस्क है और निम्न श्रेणी का है। यहाँ जाल हेमेटाइट है, क्योंकि सर्वाधिक प्रयोग वाला अयस्क सर्वोत्तम समझ लिया जाता है। परीक्षा में यह भी पूछा जाता है कि किस अयस्क में लोहे का अंश घटते क्रम में रहता है, इसलिए मैग्नेटाइट, हेमेटाइट, लिमोनाइट और सिडेराइट का क्रम स्मरण रखें।
भारत के प्रसिद्ध बॉक्साइट निक्षेप पंचपटमाली किस राज्य में हैं?
- A.ओडिशा
- B.गुजरात
- C.महाराष्ट्र
- D.झारखंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ओडिशा
व्याख्या
सही उत्तर है A, ओडिशा। ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र का पंचपटमाली पठार बॉक्साइट की मोटी परतें रखता है, वही अयस्क जिससे एल्युमिनियम प्राप्त होता है, और उसी के उपयोग के लिए उस क्षेत्र में परिष्करण तथा प्रगलन संयंत्र बनाए गए।
विकल्प B गलत है क्योंकि गुजरात में बॉक्साइट सौराष्ट्र के तट पर छोटे भागों में मिलता है, इस निक्षेप में नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि महाराष्ट्र में बॉक्साइट कोंकण की ओर कोल्हापुर तथा रत्नागिरी ज़िलों में है। विकल्प D गलत है क्योंकि झारखंड का बॉक्साइट लोहरदगा और राँची पठार पर है, और राज्य उत्पादक होने पर भी पंचपटमाली उसमें नहीं है। साथ याद रखने योग्य नाम हैं ओडिशा में पंचपटमाली तथा कोरापुट और मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ की सीमा पर अमरकंटक पठार। बॉक्साइट से एल्युमिनियम बनने की बात भी पूछी जाती है, इसलिए पंचपटमाली के साथ यह उपयोग और कोरापुट का नाम दोनों जोड़कर याद रखें।
राजस्थान का खेतड़ी किस खनिज के खनन के लिए प्रसिद्ध है?
- A.ताँबा
- B.सोना
- C.लौह अयस्क
- D.कोयला
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ताँबा
व्याख्या
सही उत्तर है A, ताँबा। राजस्थान के झुंझुनूँ क्षेत्र की खेतड़ी पेटी भारत के प्रमुख ताँबा खनन क्षेत्रों में है, दूसरा मध्य प्रदेश का मलाजखंड और तीसरा झारखंड का सिंहभूम है। ताँबा तन्य होता है और विद्युत का सुचालक है, इसलिए वह तार, केबल और मिश्र धातुओं में जाता है।
विकल्प B गलत है क्योंकि भारत की सोने की खदानें कर्नाटक के कोलार और हट्टी हैं, तथा आंध्र प्रदेश का रामगिरि। विकल्प C गलत है क्योंकि राजस्थान लौह अयस्क का महत्वपूर्ण राज्य नहीं है; लौह अयस्क पूर्वी और दक्षिणी पठारों का खनिज है। विकल्प D गलत है क्योंकि राजस्थान में थोड़ा लिग्नाइट है, पर गोंडवाना प्रकार का कोई कोयला क्षेत्र नहीं। राजस्थान की खनिज संपदा अलौह और अधात्विक है, इसलिए उसे ताँबा, जस्ता, सीसा, जिप्सम और संगमरमर से जोड़ें। राजस्थान के खेतड़ी के साथ झुंझुनूँ ज़िले का नाम और मलाजखंड के साथ बालाघाट का नाम जोड़ लेने से ताँबे के प्रश्न किसी भी रूप में हल हो जाते हैं।
कोडरमा पेटी देश में किस खनिज का प्रमुख स्रोत है?
- A.अभ्रक
- B.क्रोमाइट
- C.जिप्सम
- D.एस्बेस्टस
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अभ्रक
व्याख्या
सही उत्तर है A, अभ्रक। झारखंड और बिहार में फैली कोडरमा तथा गया पेटी भारत का सबसे समृद्ध अभ्रक उत्पादक क्षेत्र है, और उसके बाद आंध्र प्रदेश का नेल्लोर तथा राजस्थान का अजमेर क्षेत्र आता है। अभ्रक पतली परतों में विभाजित हो जाता है, ऊष्मा सहता है और विद्युत का कुचालक है, इसलिए वह विद्युत तथा इलेक्ट्रॉनिक सामग्री में प्रयुक्त होता है।
विकल्प B गलत है क्योंकि भारत में क्रोमाइट लगभग पूरा ओडिशा की सुकिंदा घाटी से जुड़ा है। विकल्प C गलत है क्योंकि जिप्सम राजस्थान तथा तमिलनाडु से आता है और सीमेंट व प्लास्टर में काम आता है। विकल्प D गलत है क्योंकि एस्बेस्टस राजस्थान, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में थोड़ी मात्रा में निकलता है। अभ्रक पर गुण आधारित प्रश्न भी आता है, इसलिए कोडरमा पेटी और उपयोग का कारण दोनों याद रखें।
भारत का सबसे पुराना तेल क्षेत्र और सबसे पुरानी रिफाइनरी कहाँ स्थित है?
- A.असम का डिगबोई
- B.गुजरात का अंकलेश्वर
- C.महाराष्ट्र तट के पास मुंबई हाई
- D.बिहार का बरौनी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. असम का डिगबोई
व्याख्या
सही उत्तर है A, असम का डिगबोई। ऊपरी असम घाटी के डिगबोई में उन्नीसवीं सदी में तेल निकला, जो भारत का पहला सफल कुआँ था, और उसके पास बनी रिफाइनरी देश की सबसे पुरानी चालू रिफाइनरी है। असम के अन्य क्षेत्र नहरकटिया और मोरान हैं।
विकल्प B गलत है क्योंकि गुजरात का अंकलेश्वर, कलोल तथा खंभात बेसिन के साथ, उन्नीस सौ साठ के दशक में विकसित हुआ, डिगबोई के बहुत बाद। विकल्प C गलत है क्योंकि सबसे बड़ा अपतटीय क्षेत्र मुंबई हाई 1974 में खोजा गया और वह बहुत नया है, चाहे उत्पादन में उसका बड़ा हिस्सा हो। विकल्प D गलत है क्योंकि बिहार के बरौनी में रिफाइनरी है पर तेल क्षेत्र नहीं; रिफाइनरी और तेल क्षेत्र भिन्न बातें हैं और यही इस प्रश्न का जाल है। रिफाइनरी और तेल क्षेत्र के इस अंतर के साथ यह भी याद रखें कि डिगबोई असम की ऊपरी घाटी में है और भारत का पहला सफल कुआँ वहीं खोदा गया था।
झारखंड के जादूगोड़ा की खदानें किस खनिज के लिए चलाई जाती हैं?
- A.यूरेनियम
- B.मैंगनीज़
- C.बॉक्साइट
- D.सीसा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. यूरेनियम
व्याख्या
सही उत्तर है A, यूरेनियम। झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र का जादूगोड़ा भारत की सबसे पुरानी यूरेनियम खदान है, और वहाँ का अयस्क उन संयंत्रों को जाता है जो देश के दबावयुक्त भारी जल रिएक्टरों के लिए ईंधन बनाते हैं। यूरेनियम के लिए दूसरा नाम आंध्र प्रदेश का तुम्मलपल्ले याद रखना चाहिए।
विकल्प B गलत है क्योंकि मैंगनीज़ मध्य प्रदेश के बालाघाट और महाराष्ट्र की भंडारा तथा नागपुर पेटी से आता है। विकल्प C गलत है क्योंकि बॉक्साइट झारखंड में लोहरदगा पठार पर और ओडिशा में पंचपटमाली में निकलता है, जादूगोड़ा में नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि सीसा, जस्ते के साथ, राजस्थान के ज़ावर तथा रामपुरा आगूचा में मिलता है। यूरेनियम और थोरियम के प्रश्न साथ चलते हैं: यूरेनियम जादूगोड़ा और तुम्मलपल्ले, थोरियम केरल तट की मोनाज़ाइट रेत। जादूगोड़ा के साथ सिंहभूम क्षेत्र का नाम और परमाणु खनिज के रूप में यूरेनियम का वर्गीकरण भी परीक्षा में पूछा जाता है।
भारत का पहला परमाणु विद्युत गृह कहाँ स्थापित किया गया था?
- A.महाराष्ट्र का तारापुर
- B.तमिलनाडु का कलपक्कम
- C.राजस्थान का रावतभाटा
- D.उत्तर प्रदेश का नरोरा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. महाराष्ट्र का तारापुर
व्याख्या
सही उत्तर है A, महाराष्ट्र का तारापुर। मुंबई से उत्तर कोंकण तट पर स्थित तारापुर विद्युत गृह भारत का पहला परमाणु विद्युत गृह था जिसने बिजली बनाई और वह आज भी कार्यरत है। उसके आरंभिक रिएक्टर क्वथन जल प्रकार के थे, बाद में बने दबावयुक्त भारी जल रिएक्टरों से भिन्न।
विकल्प B गलत है क्योंकि तमिलनाडु का कलपक्कम बाद में आया और वह फास्ट ब्रीडर कार्यक्रम के लिए जाना जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि कोटा के निकट चंबल पर राजस्थान का रावतभाटा दूसरा विद्युत गृह था और भारी जल रिएक्टर वाला पहला। विकल्प D गलत है क्योंकि गंगा पर उत्तर प्रदेश का नरोरा उन्नीस सौ नब्बे के दशक का है। विद्युत गृह और राज्य का सुमेलन सामान्य है: तारापुर महाराष्ट्र, काकरापार गुजरात, कैगा कर्नाटक और कुडनकुलम तमिलनाडु। तारापुर के साथ यह भी स्मरण रखें कि वह कोंकण तट पर है और भारत के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत उसी से मानी जाती है।
भारत में थोरियम का प्रमुख स्रोत मोनाज़ाइट रेत किस राज्य के समुद्र तट पर मिलती है?
- A.केरल
- B.गुजरात
- C.पश्चिम बंगाल
- D.गोवा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केरल
व्याख्या
सही उत्तर है A, केरल। केरल के समुद्र तट की रेत, और उससे लगे तमिलनाडु तट की रेत, मोनाज़ाइट से समृद्ध है, जिससे थोरियम प्राप्त होता है, तथा उसके साथ इल्मेनाइट जैसे अन्य भारी खनिज भी मिलते हैं। भारत में यूरेनियम सीमित और थोरियम विपुल है, इसीलिए देश के परमाणु कार्यक्रम की तीसरी अवस्था में थोरियम केंद्र में है।
विकल्प B गलत है क्योंकि गुजरात के तट की संपदा नमक, बॉक्साइट और अपतटीय तेल है, मोनाज़ाइट नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि पश्चिम बंगाल कोयला और मिट्टी का राज्य है, तटीय रेत खनिजों का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि गोवा अपने लौह तथा मैंगनीज़ अयस्क और बंदरगाहों के लिए जाना जाता है। जोड़ी निश्चित करें: मोनाज़ाइट और थोरियम केरल तट के साथ, और उसी तट की रेत से टाइटेनियम के लिए इल्मेनाइट।
भारत में भूतापीय ऊर्जा का स्थल पुगा घाटी कहाँ स्थित है?
- A.लद्दाख
- B.उत्तराखंड
- C.सिक्किम
- D.अरुणाचल प्रदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लद्दाख
व्याख्या
सही उत्तर है A, लद्दाख। गर्म जल स्रोतों और भाप छिद्रों वाली लद्दाख की पुगा घाटी भारतीय भूगोल में नामित दो भूतापीय क्षेत्रों में एक है, दूसरा हिमाचल प्रदेश की पार्वती घाटी का मणिकरण है। भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी के भीतर की ऊष्मा से जल को भाप बनाकर टर्बाइन चलाती है।
विकल्प B गलत है क्योंकि उत्तराखंड में तपोवन जैसे स्थानों पर गर्म जल स्रोत हैं, पर पुगा उनमें नहीं है। विकल्प C और विकल्प D गलत हैं क्योंकि सिक्किम तथा अरुणाचल प्रदेश जल विद्युत की संभावना से जोड़े जाते हैं, किसी नामित भूतापीय क्षेत्र से नहीं। पुनरावृत्ति के लिए गैर परंपरागत स्थल साथ रखें: भूतापीय पुगा और मणिकरण, ज्वारीय खंभात तथा कच्छ की खाड़ी, और पवन तमिलनाडु का मुप्पंडल तथा राजस्थान की जैसलमेर पेटी। लद्दाख के साथ यह भी ध्यान रखें कि पुगा घाटी की भूतापीय संभावना पर दशकों से अध्ययन होता रहा है और परीक्षा में वह मणिकरण के साथ ही पूछी जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कोयले की सर्वोत्तम श्रेणी कौन सी है?
एंथ्रेसाइट, क्योंकि उसमें कार्बन का अंश सर्वाधिक है, ऊष्मा मान सबसे ऊँचा है और धुआँ सबसे कम निकलता है। वह कठोर और चमकदार होता है और भारत में केवल जम्मू कश्मीर में थोड़ी मात्रा में मिलता है। घटते क्रम में श्रेणियाँ हैं एंथ्रेसाइट, बिटुमिनस, लिग्नाइट और पीट, तथा उद्योग एवं धातुकर्म में सर्वाधिक प्रयोग बिटुमिनस का होता है।
गोंडवाना और टर्शियरी कोयले में क्या अंतर है?
गोंडवाना कोयला बहुत पुराना है, बीस करोड़ वर्ष से अधिक पहले बना, और भारत की अधिकांश आपूर्ति उसी से होती है; वह दामोदर, महानदी, सोन, गोदावरी तथा वर्धा घाटियों में मिलता है, जिनमें रानीगंज, झरिया, बोकारो, कोरबा और तालचेर प्रमुख हैं। टर्शियरी कोयला बहुत नया है, उसमें कार्बन कम तथा नमी और गंधक अधिक होता है, और वह असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश तथा नागालैंड में मिलता है।
छोटानागपुर पठार में कौन से खनिज मिलते हैं?
छोटानागपुर पठार और उसके आसपास का क्षेत्र, जिसमें झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ तथा पश्चिम बंगाल का भाग आता है, भारत की सबसे समृद्ध खनिज पेटी है। वहाँ कोयला, लौह अयस्क, मैंगनीज़, बॉक्साइट, अभ्रक, ताँबा, क्रोमाइट और यूरेनियम मिलते हैं, इसीलिए जमशेदपुर, बोकारो, राउरकेला, दुर्गापुर और भिलाई के लोहा तथा इस्पात कारखाने उसके चारों ओर विकसित हुए।
कौन से ऊर्जा स्रोत गैर परंपरागत कहे जाते हैं?
सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय, बायोगैस और परमाणु ऊर्जा को गैर परंपरागत या वैकल्पिक स्रोत कहा जाता है, जबकि कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलावन लकड़ी और बड़ी जल विद्युत परंपरागत हैं। गैर परंपरागत स्रोत अधिकांशतः नवीकरणीय हैं, प्रदूषण कम करते हैं और बिखरी ग्रामीण बस्तियों के लिए उपयुक्त हैं, इसीलिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय उन्हें बढ़ावा देता है।
भारत में भूतापीय ऊर्जा के स्थल कहाँ हैं?
दो सर्वाधिक प्रसिद्ध भूतापीय क्षेत्र हिमाचल प्रदेश की पार्वती घाटी का मणिकरण और लद्दाख की पुगा घाटी हैं, जहाँ गर्म जल स्रोत पृथ्वी के भीतर की ऊष्मा ऊपर लाते हैं। भूतापीय ऊर्जा उस ऊष्मा से जल को भाप बनाकर टर्बाइन चलाती है; भारत में गोदावरी और सोन घाटियों में भी गर्म जल स्रोत हैं, परंतु परीक्षा में यही दो स्थल पूछे जाते हैं।
स्रोत
- समकालीन भारत 2, कक्षा 10, अध्याय 5: खनिज तथा ऊर्जा संसाधन — एनसीईआरटी
- खान और खनिज विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1957 और राष्ट्रीय खनिज नीति — खान मंत्रालय, भारत सरकार
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: सौर, पवन, लघु जल और बायोगैस — नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार





