चक्रवात: नामकरण, आईएमडी श्रेणियां और चेतावनी चरण
परीक्षा के लिए चक्रवातों के संपूर्ण नोट्स: निर्माण, स्थानीय नाम, पवन गति श्रेणियां, नामकरण पैनल, चार चरणों की चेतावनी, रंग संकेत और पिछले वर्ष के प्रश्न।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

चक्रवात वायुदाब की उस निम्न केंद्रीय व्यवस्था को कहते हैं जिसमें हवाएं सर्पिल रूप में भीतर की ओर केंद्र की तरफ चलती हैं। उत्तरी गोलार्ध में ये हवाएं वामावर्त यानी घड़ी की सुई के विपरीत घूमती हैं और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिणावर्त। इसके विपरीत प्रतिचक्रवात उच्च दाब की व्यवस्था है जिसमें हवाएं केंद्र से बाहर की ओर चलती हैं। परीक्षाओं में इस अध्याय से तीन बातें बार-बार पूछी जाती हैं: किस महासागर में चक्रवात को क्या कहा जाता है, भारत मौसम विज्ञान विभाग की किस श्रेणी के लिए कितनी पवन गति चाहिए, और तट पर पहुंचने से पहले चेतावनी के कितने चरण और कौन-कौन से रंग संकेत जारी होते हैं। अक्टूबर 2026 में भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चक्रवात चेतावनी के लिए एक निर्णय सहायता प्रणाली शुरू की है, इसलिए इस विषय के स्थिर तथ्यों को दोहरा लेना उपयोगी है।
उष्णकटिबंधीय चक्रवात कैसे बनता है
उष्णकटिबंधीय चक्रवात गर्म उष्णकटिबंधीय समुद्रों पर बनने वाली तीव्र निम्न दाब व्यवस्था है। इसके लिए पांच दशाएं आवश्यक हैं। समुद्र की सतह का तापमान लगभग 26.5 डिग्री सेल्सियस या अधिक होना चाहिए और गर्म जल की परत कम से कम 50 मीटर गहरी, जिससे नम हवा लगातार ऊपर उठती रहे। कोरिऑलिस बल पर्याप्त होना चाहिए ताकि उठती हवा को घुमाव मिले, इसी कारण भूमध्य रेखा के लगभग पांच डिग्री के भीतर कोई चक्रवात नहीं बनता। ऊर्ध्वाधर पवन अपरूपण कमजोर होना चाहिए, अन्यथा बनता हुआ स्तंभ टूट जाता है। एक पूर्व विद्यमान विक्षोभ और ऊपरी वायुमंडल में अपसरण भी चाहिए।
विकसित चक्रवात के तीन भाग होते हैं। चक्षु या आई उसका शांत केंद्र है, जो दस से पचास किलोमीटर चौड़ा होता है, जहां हवा नीचे उतरती है, दाब सबसे कम रहता है और आकाश साफ भी हो सकता है। इसके चारों ओर चक्षु भित्ति में सबसे तेज हवाएं और सबसे भारी वर्षा होती है। उसके बाहर सर्पिल वर्षा पट्टियां व्यवस्था को ऊर्जा देती रहती हैं। जलवाष्प के संघनन से निकलने वाली गुप्त ऊष्मा इसका इंजन है, इसीलिए तट पार करने के बाद नम हवा की आपूर्ति कटने से चक्रवात तेजी से कमजोर पड़ जाता है। सबसे अधिक जानें हवा से नहीं, तूफानी उद्वाह यानी स्टॉर्म सर्ज से जाती हैं, जो समुद्री जल की दीवार बनकर निचले तट पर चढ़ आता है।
कहां किस नाम से जाना जाता है
| क्षेत्र | स्थानीय नाम |
|---|---|
| उत्तर हिंद महासागर (बंगाल की खाड़ी, अरब सागर) | चक्रवात |
| उत्तरी अटलांटिक, कैरिबियन, पूर्वी उत्तरी प्रशांत | हरिकेन |
| पश्चिमी उत्तरी प्रशांत, फिलीपींस, चीन, जापान | टाइफून |
| ऑस्ट्रेलिया | विली-विली |
| जापान | ताइफू |
| फिलीपींस (स्थानीय शब्द) | बैगुइओ |
आईएमडी की पवन गति श्रेणियां
भारत मौसम विज्ञान विभाग किसी व्यवस्था का वर्गीकरण उसके केंद्र पर बनी रहने वाली पवन गति से करता है। ये सीमाएं निश्चित हैं और इस अध्याय में सबसे अधिक पूछी जाती हैं।
| श्रेणी | पवन गति |
|---|---|
| निम्न दाब क्षेत्र | 31 किमी/घंटा से कम |
| अवदाब | 31 से 49 किमी/घंटा |
| गहरा अवदाब | 50 से 61 किमी/घंटा |
| चक्रवाती तूफान | 62 से 88 किमी/घंटा |
| गंभीर चक्रवाती तूफान | 89 से 117 किमी/घंटा |
| अति गंभीर चक्रवाती तूफान | 118 से 166 किमी/घंटा |
| अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान | 167 से 221 किमी/घंटा |
| महा चक्रवाती तूफान | 222 किमी/घंटा और अधिक |
नाम तभी दिया जाता है जब व्यवस्था चक्रवाती तूफान की श्रेणी यानी 62 किमी/घंटा तक पहुंच जाए। अटलांटिक और पूर्वी प्रशांत में सैफिर-सिम्पसन मापनी प्रयोग होती है, जिसमें श्रेणी एक लगभग 119 किमी/घंटा से शुरू होकर श्रेणी पांच 252 किमी/घंटा और उससे अधिक पर पूरी होती है, और श्रेणी तीन या उससे ऊपर के तूफान को प्रमुख हरिकेन कहा जाता है।
नामकरण की व्यवस्था
उत्तर हिंद महासागर के चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन तथा एशिया और प्रशांत के लिए आर्थिक एवं सामाजिक आयोग के उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल के सदस्य देश देते हैं। इस क्षेत्र में नामकरण 2004 में आठ सदस्यों के साथ शुरू हुआ, जो थे बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड। वर्ष 2018 में ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन के जुड़ने से पैनल तेरह सदस्यों का हो गया, और 2020 में 169 नामों की नई सूची जारी हुई, जिसमें प्रत्येक सदस्य के तेरह नाम हैं। नाम देशों के अंग्रेजी वर्णक्रम में क्रमानुसार लिए जाते हैं और इस क्षेत्र में कोई नाम दोबारा प्रयोग नहीं होता। नाम छोटा, बोलने में आसान, धर्म, राजनीति और लिंग की दृष्टि से तटस्थ तथा किसी सदस्य के लिए अपमानजनक नहीं होना चाहिए। वर्ष 2020 का अम्फान 2004 की सूची का अंतिम नाम था। क्षेत्र के लिए नामकरण करने वाली संस्था नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र है, जिसे भारत मौसम विज्ञान विभाग चलाता है और जो तेरह सदस्य देशों को चक्रवात परामर्श भी जारी करता है।
चार चरणों की चेतावनी और रंग संकेत
- पहला चरण, चक्रवात पूर्व निगरानी, प्रतिकूल मौसम से 72 घंटे पहले।
- दूसरा चरण, चक्रवात अलर्ट, 48 घंटे पहले।
- तीसरा चरण, चक्रवात चेतावनी, 24 घंटे पहले।
- चौथा चरण, तट पार करने के बाद का परिदृश्य, लैंडफॉल से 12 घंटे पहले।
रंग संकेतों में हरा का अर्थ कोई चेतावनी नहीं, पीला का अर्थ सूचनाओं पर नजर रखें, नारंगी का अर्थ तैयार रहें और लाल का अर्थ कार्रवाई करें है। क्षेत्रीय चक्रवात चेतावनी केंद्र चेन्नई, मुंबई और कोलकाता में तथा चक्रवात चेतावनी केंद्र विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, अहमदाबाद और तिरुवनंतपुरम में कार्य करते हैं। राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम न्यूनीकरण परियोजना तटीय राज्यों में आश्रय स्थल और पूर्व चेतावनी तंत्र बनाती है।
भारत में कहां और कब
उत्तर हिंद महासागर में चक्रवात के दो शिखर काल हैं, मानसून पूर्व अप्रैल से जून और मानसून पश्चात अक्टूबर से दिसंबर, जिनमें नवंबर सबसे सक्रिय रहता है। अरब सागर के एक चक्रवात की तुलना में बंगाल की खाड़ी में लगभग चार चक्रवात बनते हैं, क्योंकि यह अधिक गर्म है, सतह पर कम खारी है, प्रशांत की कमजोर पड़ी व्यवस्थाएं यहां आकर फिर सक्रिय हो जाती हैं और इसके उत्तरी सिरे की कीपनुमा आकृति उद्वाह को ऊंचा कर देती है। इसलिए तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल का पूर्वी तट सर्वाधिक संवेदनशील है, जबकि गुजरात और कोंकण अरब सागर के तूफानों का सामना करते हैं।
शीतोष्ण चक्रवात
शीतोष्ण या अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात मध्य अक्षांशों में वहां बनते हैं जहां गर्म वायुराशि ठंडी वायुराशि से वाताग्र के सहारे मिलती है, जिसे बर्कनीज का ध्रुवीय वाताग्र सिद्धांत समझाता है। ये बड़े और धीमे होते हैं, इनमें चक्षु नहीं होता, ये पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हैं और पश्चिमी विक्षोभ के रूप में उत्तर-पश्चिम भारत में शीतकालीन वर्षा लाते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न महासागर के अनुसार स्थानीय नाम पूछते हैं, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के लिए विली-विली और पश्चिमी प्रशांत के लिए टाइफून स्थायी जाल हैं; किसी श्रेणी की पवन गति सीमा, विशेषकर चक्रवाती तूफान 62 किमी/घंटा और महा चक्रवाती तूफान 222 किमी/घंटा; इस क्षेत्र में नामकरण का वर्ष 2004 और 2018 से पैनल के तेरह सदस्य; नामकरण करने वाली संस्था, जिसका उत्तर आरएसएमसी नई दिल्ली है और विकल्प में अकेला डब्ल्यूएमओ भ्रम पैदा करता है; प्रत्येक चेतावनी चरण के घंटे; तथा दोनों गोलार्धों में घूमने की दिशा। दूसरा समूह बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की तुलना या उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण चक्रवात का अंतर पूछता है, जहां चक्षु का अभाव और वाताग्र की उपस्थिति उत्तर तय करती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| न्यूनतम समुद्र सतह तापमान | लगभग 26.5 डिग्री सेल्सियस, गर्म परत लगभग 50 मीटर गहरी |
|---|---|
| उत्तर हिंद महासागर में नामकरण आरंभ | 2004 |
| पैनल के सदस्य | 2018 से तेरह, जब ईरान, कतर, सऊदी अरब, यूएई और यमन मूल आठ में जुड़े |
| 2020 की सूची में नाम | 169, प्रत्येक सदस्य देश के तेरह |
| नामकरण प्राधिकरण | क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली (आईएमडी) |
| चक्रवाती तूफान | 62 से 88 किमी/घंटा, इसी पर नाम दिया जाता है |
| महा चक्रवाती तूफान | 222 किमी/घंटा और अधिक |
| चेतावनी के चरण | घटना से 72, 48, 24 और 12 घंटे पहले |
| लाल रंग संकेत | कार्रवाई करें |
| बंगाल की खाड़ी और अरब सागर | लगभग चार और एक का अनुपात |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
चक्रवात को विश्व के विभिन्न भागों में भिन्न नामों से जाना जाता है। फिलीपींस में इसे _______ कहा जाता है।
- A.विली-विली
- B.हरिकेन
- C.टाइफून
- D.मैंगो शावर
उत्तर देखें
फिलीपींस पश्चिमी उत्तरी प्रशांत में स्थित है और इस क्षेत्र के प्रत्येक उष्णकटिबंधीय चक्रवात को, चाहे वह फिलीपींस, चीन या जापान से टकराए, टाइफून कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनने के लिए समुद्र सतह का न्यूनतम तापमान सामान्यतः कितना आवश्यक होता है?
- A.लगभग 16.5 डिग्री सेल्सियस
- B.लगभग 20 डिग्री सेल्सियस
- C.लगभग 26.5 डिग्री सेल्सियस
- D.लगभग 36.5 डिग्री सेल्सियस
उत्तर देखें
उष्णकटिबंधीय चक्रवात जलवाष्प के संघनन से निकलने वाली गुप्त ऊष्मा पर चलता है, इसलिए उसे ऐसा समुद्र चाहिए जिसकी सतह लगभग 26.5 डिग्री सेल्सियस या अधिक गर्म हो और यह गर्म जल लगभग पचास मीटर गहराई तक हो, जिससे समुद्र के मंथन से सतह ठंडी न पड़ जाए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार किसी व्यवस्था को महा चक्रवाती तूफान कब कहा जाता है?
- A.118 किमी/घंटा
- B.167 किमी/घंटा
- C.222 किमी/घंटा
- D.300 किमी/घंटा
उत्तर देखें
भारत मौसम विज्ञान विभाग किसी व्यवस्था को सर्वोच्च श्रेणी, महा चक्रवाती तूफान, में तब रखता है जब उसके केंद्र पर बनी रहने वाली पवन गति 222 किमी/घंटा यानी 120 नॉट तक पहुंच जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर हिंद महासागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नामकरण किस वर्ष आरंभ हुआ?
- A.1999
- B.2004
- C.2013
- D.2018
उत्तर देखें
डब्ल्यूएमओ और ईएससीएपी के उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल के आठ देशों ने इस क्षेत्र के लिए नामों की सूची पर सहमति बनाई और 2004 से उनका प्रयोग शुरू किया, जबकि अटलांटिक में नामकरण दशकों पहले से चलन में था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर हिंद महासागर के उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नामकरण कौन करता है?
- A.क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली
- B.राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
- C.भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र
- D.राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र
उत्तर देखें
नाम पैनल के तेरह सदस्य देश देते हैं, परंतु भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा संचालित नई दिल्ली का यह केंद्र सूची से अगला नाम लेता है, गहरे अवदाब के चक्रवाती तूफान बनने पर उसकी घोषणा करता है और सभी सदस्य देशों को परामर्श जारी करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत मौसम विज्ञान विभाग की चेतावनी का पहला चरण, चक्रवात पूर्व निगरानी, कितने घंटे पहले जारी किया जाता है?
- A.12 घंटे
- B.24 घंटे
- C.48 घंटे
- D.72 घंटे
उत्तर देखें
चेतावनी चार चरणों में आती है और प्रत्येक चरण तट पर प्रतिकूल मौसम की संभावना से कितने घंटे पहले जारी होगा, यह निश्चित है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत मौसम विज्ञान विभाग के रंग संकेतों में किस रंग का अर्थ कार्रवाई करें है?
- A.हरा
- B.पीला
- C.नारंगी
- D.लाल
उत्तर देखें
भारत मौसम विज्ञान विभाग अपेक्षित मौसम की गंभीरता के साथ एक रंग जोड़ता है, जिससे प्रशासन पूरा बुलेटिन पढ़े बिना निर्णय ले सके।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दक्षिणी गोलार्ध में चक्रवात की हवाएं किस प्रकार चलती हैं?
- A.दक्षिणावर्त और भीतर की ओर
- B.वामावर्त और भीतर की ओर
- C.दक्षिणावर्त और बाहर की ओर
- D.वामावर्त और बाहर की ओर
उत्तर देखें
चक्रवात निम्न दाब की व्यवस्था है, इसलिए हवा केंद्र की ओर भीतर बहती है, और दक्षिणी गोलार्ध में कोरिऑलिस बल चलती हवा को बाईं ओर विक्षेपित करता है, जिससे यह अंतर्वाह दक्षिणावर्त सर्पिल बन जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उष्णकटिबंधीय चक्रवात के चक्षु के विषय में कौन-सा कथन सही है?
- A.इसमें तूफान की सर्वाधिक पवन गति होती है
- B.यह नीचे उतरती हवा का शांत केंद्र है जहां दाब सबसे कम होता है
- C.यह सर्वाधिक वर्षा की पट्टी है
- D.यह केवल शीतोष्ण चक्रवातों में पाया जाता है
उत्तर देखें
चक्षु दस से पचास किलोमीटर चौड़ा होता है, इसके भीतर हवा ऊपर उठने के बजाय नीचे उतरती है, पवन मंद रहती है, आकाश साफ भी हो सकता है और वायुदाब पूरी व्यवस्था में सबसे कम होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चक्रवातों की संख्या का अनुपात लगभग क्या है?
- A.एक और एक
- B.बंगाल की खाड़ी के पक्ष में चार और एक
- C.अरब सागर के पक्ष में चार और एक
- D.अरब सागर के पक्ष में दस और एक
उत्तर देखें
अरब सागर में बनने वाले प्रत्येक एक चक्रवात की तुलना में बंगाल की खाड़ी में लगभग चार चक्रवात बनते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सैफिर-सिम्पसन मापनी का प्रयोग किसके वर्गीकरण के लिए होता है?
- A.निर्मुक्त ऊर्जा के आधार पर भूकंप
- B.पवन गति के आधार पर हरिकेन
- C.क्षति के आधार पर बवंडर
- D.वर्षा की कमी के आधार पर सूखा
उत्तर देखें
सैफिर-सिम्पसन हरिकेन पवन मापनी अटलांटिक और पूर्वी प्रशांत के तूफान को बनी रहने वाली पवन गति के आधार पर पांच श्रेणियों में रखती है, श्रेणी एक लगभग 119 किमी/घंटा से आरंभ होकर श्रेणी पांच 252 किमी/घंटा और अधिक पर, और श्रेणी तीन या उससे ऊपर के तूफान को प्रमुख हरिकेन…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के चक्रवातों का नाम कौन रखता है?
नाम डब्ल्यूएमओ और ईएससीएपी के उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल के तेरह सदस्य देश देते हैं, और भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा संचालित नई दिल्ली का क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र सूची से अगला नाम लेकर उसकी घोषणा करता है।
कितनी पवन गति पर चक्रवात को नाम मिलता है?
62 किमी/घंटा पर, जब भारत मौसम विज्ञान विभाग गहरे अवदाब को चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखता है। इससे नीचे वह निम्न दाब क्षेत्र, अवदाब या गहरा अवदाब रहता है और उसे केवल संख्या दी जाती है।
चक्रवात, हरिकेन और टाइफून में क्या अंतर है?
कोई अंतर नहीं, केवल महासागर का फर्क है। वही तूफान उत्तर हिंद महासागर में चक्रवात, अटलांटिक, कैरिबियन तथा पूर्वी उत्तरी प्रशांत में हरिकेन और पश्चिमी उत्तरी प्रशांत में टाइफून कहलाता है।
बंगाल की खाड़ी में अरब सागर से अधिक चक्रवात क्यों बनते हैं?
उसका सतही जल अधिक गर्म और कम खारा है, प्रशांत से आई कमजोर व्यवस्थाएं यहां फिर सक्रिय हो जाती हैं, और उत्तरी सिरे की कीपनुमा आकृति निचले तट पर उद्वाह को ऊंचा कर देती है।
चक्रवात चेतावनी के रंग संकेतों का क्या अर्थ है?
हरा का अर्थ कोई चेतावनी नहीं, पीला का अर्थ सूचनाओं पर नजर रखें, नारंगी का अर्थ तैयार रहें और लाल का अर्थ कार्रवाई करें। ये चार चरणों के साथ चलते हैं, जिनकी शुरुआत 72 घंटे पहले की निगरानी से होती है।
स्रोत
- भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (कक्षा ग्यारह), अध्याय 10: वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियां — एनसीईआरटी
- भारत में चक्रवात चेतावनी: मानक प्रचालन प्रक्रिया — भारत मौसम विज्ञान विभाग
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात नामकरण — विश्व मौसम विज्ञान संगठन





