भारत की जलवायु और वर्षा: मानसून, ऋतुएँ और विगत प्रश्न
परीक्षा के लिए भारत की जलवायु के नोट्स: मानसून की क्रियाविधि, चार ऋतुएँ, आगमन और निवर्तन, वर्षा का वितरण, स्थानीय तूफान तथा एल नीनो का प्रभाव।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

भारत की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी है। मानसून शब्द अरबी के मौसिम से बना है, जिसका अर्थ है ऋतु, क्योंकि यहाँ हवाएँ गर्मी और सर्दी में अपनी दिशा उलट देती हैं। लगभग चार महीने की वर्षा ऋतु पर पूरा कृषि वर्ष, जलाशयों का भरना और अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा टिका है। देश हिमालय से समुद्र तक और मरुस्थल से वर्षावन तक फैला है, इसलिए लगभग हर जलवायु प्रकार यहाँ मिल जाता है, और परीक्षक मानसून की क्रियाविधि तथा स्थानीय हवाओं के नाम दोनों पूछते हैं।
भारत में मानसूनी जलवायु क्यों है
कर्क रेखा देश के बीच से गुजरती है, इसलिए दक्षिण भाग उष्णकटिबंधीय और उत्तर भाग उपोष्ण कटिबंध में आता है। हिमालय मध्य एशिया की ठंडी हवाओं को रोकता है और मानसूनी हवाओं को मैदानों पर बनाए रखता है, यही कारण है कि उत्तर भारत का शीतकाल उसी अक्षांश के पश्चिमी एशियाई स्थानों से अधिक गर्म रहता है। ग्रीष्म में थार मरुस्थल और उत्तरी मैदान के अत्यधिक तपने से निम्न दाब की द्रोणी बनती है, जबकि दक्षिणी हिंद महासागर पर उच्च दाब रहता है। हवा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती है, और दक्षिणी गोलार्ध की दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक हवाएँ भूमध्य रेखा पार कर कोरिऑलिस बल से दाहिनी ओर मुड़कर दक्षिण-पश्चिम मानसून के रूप में आती हैं। अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र का उत्तर की ओर खिसकना, तिब्बत के पठार का तपना और प्रायद्वीप पर उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट धारा की स्थिति इस क्रियाविधि के अन्य अंग हैं।
चार ऋतुएँ
| ऋतु | महीने | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|
| शीत ऋतु | दिसंबर से फरवरी | स्वच्छ आकाश, कम आर्द्रता, उत्तर-पश्चिम में पश्चिमी विक्षोभ से और तमिलनाडु में निवर्तनी मानसून से वर्षा |
| ग्रीष्म ऋतु | मार्च से मई | बढ़ता तापमान, उत्तरी मैदान में लू, काल बैसाखी और आम्र वर्षा जैसे स्थानीय तूफान |
| दक्षिण-पश्चिम मानसून | जून से सितंबर | वर्षा ऋतु, वार्षिक वर्षा का लगभग तीन चौथाई भाग, बीच-बीच में मानसून विच्छेद |
| निवर्तनी मानसून | अक्टूबर से नवंबर | अक्टूबर की उमस, पूर्वी तट पर चक्रवात, तमिलनाडु में उत्तर-पूर्वी मानसून की वर्षा |
दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः एक जून के आसपास केरल पहुँचता है, जिसे मानसून प्रस्फोट कहते हैं। इसके बाद यह अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा के रूप में आगे बढ़ता है और दोनों उत्तर-पश्चिमी मैदानों पर मिलती हैं। खाड़ी शाखा हिमालय से टकराकर पश्चिम की ओर मुड़ती है और गंगा घाटी में ऊपर चढ़ती है, इसीलिए मैदानों में वर्षा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है। मानसून सितंबर के आरंभ में उत्तर-पश्चिम भारत से लौटना शुरू करता है और दिसंबर तक प्रायद्वीप छोड़ देता है। निवर्तन के समय हवाएँ स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं, बंगाल की खाड़ी से नमी लेती हैं और तमिलनाडु के कोरोमंडल तट को उसकी मुख्य वर्षा देती हैं, जिसे उत्तर-पूर्वी या निवर्तनी मानसून कहा जाता है।
वर्षा का वितरण
भारत की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 125 सेंटीमीटर है, पर इसका वितरण बहुत असमान है। मेघालय की खासी पहाड़ियों में मौसिनराम और चेरापूंजी देश की सर्वाधिक वर्षा पाते हैं, क्योंकि कीप के आकार की पहाड़ियाँ नम खाड़ी शाखा को तेजी से ऊपर उठने पर विवश कर देती हैं। पश्चिमी घाट का पवनमुखी ढाल, केरल और कर्नाटक का तटीय मैदान, पूर्वोत्तर राज्य तथा पश्चिम बंगाल की उप-हिमालयी पट्टी 200 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा पाते हैं। घाट के पूर्व का दक्कन पठार और पूर्वी राजस्थान 60 से 100 सेंटीमीटर वर्षा पाते हैं क्योंकि वे वृष्टिछाया में हैं। पश्चिमी राजस्थान, गुजरात का कच्छ क्षेत्र और लद्दाख का शीत मरुस्थल 60 सेंटीमीटर से कम वर्षा पाते हैं। मानचित्र पर समान वर्षा वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा समवर्षा रेखा यानी आइसोहाइट कहलाती है, जैसे समान दाब वाली रेखा समदाब रेखा और समान तापमान वाली रेखा समताप रेखा होती है।
स्थानीय तूफान और हवाएँ
- लू: मई और जून में उत्तरी मैदान में दोपहर बाद चलने वाली गर्म, शुष्क और तेज हवा, जिससे लू लगने का खतरा रहता है।
- काल बैसाखी या नॉर्वेस्टर: पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और असम में मानसून से पहले आने वाले प्रचंड सांध्य तूफान, जो जूट और धान के लिए उपयोगी हैं।
- आम्र वर्षा: केरल और तटीय कर्नाटक में मानसून पूर्व की वर्षा, जो आम पकने में सहायक होती है।
- पुष्प वर्षा या चेरी ब्लॉसम: कर्नाटक में मानसून पूर्व की वर्षा, जो कॉफी के फूल खिलने में सहायक है।
- बारदोली छीड़ा: असम में मानसून पूर्व की वर्षा का नाम।
- अक्टूबर की उमस: निवर्तनी मानसून के समय उत्तरी मैदान का उमस भरा कष्टकर मौसम।
पश्चिमी विक्षोभ, एल नीनो और ला नीना
पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागरीय क्षेत्र में बनने वाले निम्न दाब तंत्र हैं, जो पछुआ जेट धारा के साथ पूर्व की ओर बढ़ते हैं। ये जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शीतकालीन वर्षा तथा हिमपात लाते हैं, और यह वर्षा रबी की फसल, विशेषकर गेहूँ के लिए बहुत मूल्यवान होती है। एल नीनो पेरू के तट के पास मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के सतही जल का समय-समय पर गर्म होना है; इससे भारतीय मानसून प्रायः कमजोर पड़ता है और वर्षा में कमी रहती है। ला नीना इसका उल्टा है, अर्थात प्रशांत का जल सामान्य से ठंडा, और यह प्रायः अच्छे मानसून से जुड़ा रहता है। हिंद महासागर द्विध्रुव, यानी पश्चिमी और पूर्वी हिंद महासागर के सतही तापमान का अंतर, भी मानसून की शक्ति को प्रभावित करता है। वर्षा ऋतु के भीतर कई शुष्क दिनों के दौर को मानसून विच्छेद कहते हैं, और फसल गलत समय पर पड़े विच्छेद से बिगड़ती है, कुल वर्षा से नहीं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस पाठ से तीन तरह के प्रश्न आते हैं। पहला, क्रियाविधि से: कौन सी हवा, कौन सी दाब पेटी, कौन सी जेट धारा, मानसून की कौन सी शाखा। दूसरा, स्थानीय हवाओं और तूफानों के नाम, जिसमें काल बैसाखी, लू, आम्र वर्षा, पुष्प वर्षा और बारदोली छीड़ा को उनके क्षेत्रों से मिलाना होता है। तीसरा, वर्षा के आँकड़े और शब्दावली, जहाँ समवर्षा रेखा, सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान, पश्चिमी घाट की वृष्टिछाया और राजस्थान की वर्षा पूछी जाती है। सामान्य जाल ये हैं: तमिलनाडु की शीतकालीन वर्षा का कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून बता देना, समवर्षा रेखा को समदाब रेखा समझ लेना, पुष्प वर्षा को कर्नाटक के बजाय मेघालय से जोड़ना और एल नीनो तथा ला नीना के प्रभाव उलट देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| जलवायु प्रकार | उष्णकटिबंधीय मानसूनी; मानसून अरबी के मौसिम से, अर्थ ऋतु |
|---|---|
| केरल में आगमन | लगभग एक जून, जिसे मानसून प्रस्फोट कहते हैं |
| मानसून की शाखाएँ | अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा |
| निवर्तन | सितंबर के आरंभ में उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू |
| वर्षा ऋतु का हिस्सा | चार महीनों में वार्षिक वर्षा का लगभग तीन चौथाई |
| औसत वार्षिक वर्षा | पूरे देश के लिए लगभग 125 सेंटीमीटर |
| सर्वाधिक वर्षा | मेघालय की खासी पहाड़ियों में मौसिनराम और चेरापूंजी |
| सबसे शुष्क क्षेत्र | पश्चिमी राजस्थान, कच्छ और लद्दाख, 60 सेंटीमीटर से कम |
| समान वर्षा की रेखा | समवर्षा रेखा यानी आइसोहाइट |
| तमिलनाडु की वर्षा | उत्तर-पूर्वी या निवर्तनी मानसून, अक्टूबर से दिसंबर |
| उत्तर-पश्चिम की शीत वर्षा | भूमध्यसागरीय क्षेत्र से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ |
| स्थानीय तूफान | लू, काल बैसाखी, आम्र वर्षा, पुष्प वर्षा, बारदोली छीड़ा |
| एल नीनो | पूर्वी प्रशांत का गर्म होना; मानसून प्रायः कमजोर |
| मानसून विच्छेद | वर्षा ऋतु के भीतर शुष्क दिनों का दौर |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
शीत ऋतु के आरंभ में तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में वर्षा किस कारण होती है?
- A.उत्तर-पूर्वी मानसून
- B.स्थानीय वायु संचरण
- C.शीतोष्ण चक्रवात
- D.दक्षिण-पश्चिम मानसून
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. उत्तर-पूर्वी मानसून
व्याख्या
सही उत्तर A, उत्तर-पूर्वी मानसून है। अक्टूबर और नवंबर में मानसून के लौटने पर हवा की दिशा उलट जाती है और वायु स्थल से समुद्र की ओर बहने लगती है। बंगाल की खाड़ी पार करते समय यह नमी ग्रहण कर लेती है और कोरोमंडल तट से टकराकर तमिलनाडु तथा तटीय आंध्र प्रदेश को उनकी मुख्य वर्षा ऋतु देती है। इसी कारण तमिलनाडु भारत का वह बड़ा भाग है जिसका कृषि पंचांग ग्रीष्म के बजाय शीत ऋतु की वर्षा पर निर्भर करता है।
विकल्प B स्थानीय वायु संचरण से केवल स्थल और समुद्र समीर बनते हैं, जो पूरी ऋतु की वर्षा नहीं दे सकते। विकल्प C शीतोष्ण चक्रवात अर्थात पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में शीतकालीन वर्षा देते हैं, सुदूर दक्षिण में नहीं। विकल्प D दक्षिण-पश्चिम मानसून के महीनों में तमिलनाडु पश्चिमी घाट की वृष्टिछाया में रहने के कारण सूखा रहता है।
भारत के किस राज्य में तड़ित झंझा से होने वाली वर्षा को चेरी ब्लॉसम कहा जाता है?
- A.गुजरात
- B.मेघालय
- C.उत्तराखंड
- D.कर्नाटक
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. कर्नाटक
व्याख्या
सही उत्तर D, कर्नाटक है। कर्नाटक में मानसून से पहले होने वाली गरज-चमक वाली बौछारों को चेरी ब्लॉसम या पुष्प वर्षा कहा जाता है, क्योंकि इनसे कोडगु, चिकमगलूर और हासन पट्टी के कॉफी के पौधों में फूल आते हैं। इसी परिवार की बौछारों को केरल तथा तटीय कर्नाटक में आम्र वर्षा कहते हैं, क्योंकि उनसे आम पकने में सहायता मिलती है, और परीक्षा में ये दोनों नाम प्रायः साथ पूछे जाते हैं।
विकल्प A गुजरात में इस प्रकार की कोई स्थानीय बौछार मानक सूची में नहीं है। विकल्प B मेघालय मौसिनराम और चेरापूंजी की सर्वाधिक वर्षा के लिए प्रसिद्ध है, पर वह वर्षा बंगाल की खाड़ी शाखा से आती है। विकल्प C उत्तराखंड में शीत ऋतु में पश्चिमी विक्षोभ से और ग्रीष्म में मानसून से वर्षा होती है, इनमें से कोई पुष्प वर्षा नहीं कहलाती।
भारत में अक्टूबर-नवंबर के दौरान सूर्य के दक्षिण की ओर आभासी गमन के साथ उत्तरी मैदानों पर ______ कमजोर पड़ जाती है।
- A.ऊपरी स्तर की द्रोणी
- B.मानसून द्रोणी
- C.प्रतिपवन द्रोणी
- D.उलटी द्रोणी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मानसून द्रोणी
व्याख्या
सही उत्तर B, मानसून द्रोणी है। मानसून द्रोणी वर्षा ऋतु में उत्तरी मैदानों पर फैली निम्न दाब की पेटी है, जो वर्षा लाने वाले अवदाबों का मार्ग तय करती है। सितंबर विषुव के बाद जब सूर्य भूमध्य रेखा के दक्षिण जाता दिखता है, स्थल ठंडा होने लगता है, निम्न दाब कमजोर पड़ता है और द्रोणी की जगह उच्च दाब ले लेता है। द्रोणी का यही हटना मानसून का निवर्तन कहलाता है, जो सितंबर के आरंभ में उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होता है।
विकल्प A ऊपरी स्तर की द्रोणी ऊपरी वायु संचरण से संबंधित है, यहाँ वर्णित विशेषता नहीं। विकल्प C प्रतिपवन द्रोणी पर्वत के पवनविमुख ढाल पर बनने वाली स्थानीय रचना है। विकल्प D उलटी द्रोणी मानसून द्रोणी के बंगाल की खाड़ी में फैले एक विशेष आकार का नाम है, मैदानों की वह विशेषता नहीं जो अक्टूबर में कमजोर पड़ती है।
समान वर्षा वाले क्षेत्रों को जोड़ने वाली रेखा क्या कहलाती है?
- A.समदाब रेखा
- B.समवर्षा रेखा
- C.समताप रेखा
- D.समलवण रेखा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. समवर्षा रेखा
व्याख्या
सही उत्तर B, समवर्षा रेखा है। समवर्षा रेखा यानी आइसोहाइट मानचित्र पर उन सभी स्थानों से होकर खींची जाती है जहाँ किसी निश्चित अवधि में समान मात्रा में वर्षा होती है। भारत के वर्षा मानचित्र इन्हीं रेखाओं से बनाए जाते हैं, और पश्चिमी घाट के सहारे इनका पास-पास आ जाना दिखाता है कि पवनमुखी तट से पठार की वृष्टिछाया तक वर्षा कितनी तेजी से घटती है।
विकल्प A समदाब रेखा समान वायुदाब वाले स्थानों को जोड़ती है और मौसम चार्ट पर अवदाब तथा प्रतिचक्रवात दिखाने के काम आती है। विकल्प C समताप रेखा समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ती है। विकल्प D समलवण रेखा समुद्र में समान लवणता वाले स्थानों को जोड़ती है। चारों में यूनानी उपसर्ग आइसो है, जिसका अर्थ समान है, और परीक्षक इसी भ्रम पर प्रश्न बनाते हैं।
जलवायु प्रकार और क्षेत्र का निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही नहीं है? I. अर्ध-शुष्क स्टेपी जलवायु - पंजाब। II. शुष्क ग्रीष्म वाली मानसूनी जलवायु - तमिलनाडु का कोरोमंडल तट।
- A.केवल I
- B.न I और न ही II
- C.केवल II
- D.I और II दोनों
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. न I और न ही II
व्याख्या
सही उत्तर B, न I और न ही II है, अर्थात दिए गए दोनों युग्म सही हैं और कोई भी गलत नहीं है। भारत पर लागू कोपेन वर्गीकरण में अर्ध-शुष्क स्टेपी जलवायु, जिसे BShw लिखा जाता है, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा प्रायद्वीप के शुष्क भीतरी भागों में मिलती है, जहाँ वर्षा कम तो है पर सच्चे मरुस्थल जितनी कम नहीं। शुष्क ग्रीष्म वाली मानसूनी जलवायु, जिसे As लिखा जाता है, तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर मिलती है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के महीनों में सूखा रहता है और शीत ऋतु में निवर्तनी मानसून से वर्षा पाता है।
विकल्प A और C में से प्रत्येक एक सही युग्म को गलत ठहराता है और विकल्प D दोनों को। जाल यह मान लेने में है कि ऐसे प्रश्न में कोई न कोई कथन गलत अवश्य होगा।
दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः केरल तट पर किस तिथि के आसपास पहुँचता है?
- A.1 अप्रैल
- B.1 मई
- C.1 जून
- D.1 जुलाई
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1 जून
व्याख्या
सही उत्तर C, 1 जून है। दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः एक जून के आसपास केरल तट पर आता है, और उसके आगमन के साथ होने वाली अचानक भारी वर्षा को मानसून प्रस्फोट कहा जाता है। केरल से यह दो शाखाओं में आगे बढ़ता है, एक अरब सागर पर और दूसरी बंगाल की खाड़ी पर, लगभग दस जून तक मुंबई और मध्य जुलाई तक पूरे देश को ढक लेता है।
विकल्प A एक अप्रैल ग्रीष्म ऋतु में पड़ता है जब स्थल तपना आरंभ ही करता है। विकल्प B एक मई तक आम्र वर्षा और काल बैसाखी जैसी मानसून पूर्व बौछारों का समय रहता है। विकल्प D एक जुलाई बहुत देर का समय है, क्योंकि तब तक मानसून देश के अधिकांश भाग को ढक चुका होता है और मैदानों में पूरी वर्षा चल रही होती है।
भारत में सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा किस स्थान पर होती है?
- A.मेघालय का मौसिनराम
- B.कर्नाटक का आगुंबे
- C.महाराष्ट्र का आंबोली
- D.अरुणाचल प्रदेश का पासीघाट
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मेघालय का मौसिनराम
व्याख्या
सही उत्तर A, मेघालय का मौसिनराम है। मौसिनराम खासी पहाड़ियों में है और पड़ोसी चेरापूंजी, जिसे अब सोहरा कहा जाता है, उसके ठीक पीछे आता है। मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा इन पहाड़ियों की कीप जैसी घाटियों में सिमटकर तेजी से ऊपर उठने को विवश होती है, जिससे उसकी सारी नमी निचुड़ जाती है और देश की सबसे अधिक वर्षा यहीं दर्ज होती है।
विकल्प B कर्नाटक के पश्चिमी घाट में स्थित आगुंबे को दक्षिण का चेरापूंजी कहा जाता है और वहाँ वर्षा बहुत होती है, पर मौसिनराम से कम। विकल्प C महाराष्ट्र का आंबोली घाट का एक और भारी वर्षा वाला स्थान है, पर उससे भी कम। विकल्प D अरुणाचल प्रदेश का पासीघाट हिमालय की तलहटी में अधिक वर्षा पाता है, फिर भी खासी पहाड़ियों के आँकड़ों तक नहीं पहुँचता।
पश्चिम बंगाल और असम में मानसून पूर्व आने वाले प्रचंड सांध्य तूफान किस नाम से जाने जाते हैं?
- A.लू
- B.काल बैसाखी
- C.आम्र वर्षा
- D.पुष्प वर्षा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. काल बैसाखी
व्याख्या
सही उत्तर B, काल बैसाखी है। ये पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और असम में मानसून से पहले के महीनों में आने वाले प्रचंड सांध्य तड़ित झंझा हैं, और नाम का अर्थ है बैसाख महीने का काल, क्योंकि इनकी आँधी झोपड़ियाँ और पेड़ गिरा देती है। दिशा के कारण इन्हें नॉर्वेस्टर भी कहते हैं और असम में इन्हीं बौछारों को बारदोली छीड़ा कहा जाता है। इनकी वर्षा चाय, जूट और धान के लिए लाभदायक रहती है।
विकल्प A लू कोई तूफान नहीं, बल्कि मई और जून की दोपहर में उत्तरी मैदान पर चलने वाली गर्म तथा शुष्क हवा है। विकल्प C आम्र वर्षा केरल और तटीय कर्नाटक की मानसून पूर्व बौछारें हैं, जिनसे आम पकते हैं। विकल्प D पुष्प वर्षा कर्नाटक की वे बौछारें हैं जिनसे कॉफी में फूल आते हैं।
पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शीतकालीन वर्षा किसके कारण होती है?
- A.निवर्तनी मानसून
- B.बंगाल की खाड़ी के उष्णकटिबंधीय चक्रवात
- C.पश्चिमी विक्षोभ
- D.दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पश्चिमी विक्षोभ
व्याख्या
सही उत्तर C, पश्चिमी विक्षोभ है। ये निम्न दाब तंत्र यानी शीतोष्ण चक्रवात भूमध्यसागर तथा कैस्पियन क्षेत्र में बनते हैं और पछुआ जेट धारा के साथ पूर्व की ओर बढ़ते हैं। शीत ऋतु में उत्तर-पश्चिम भारत पहुँचकर ये मैदानों में हल्की वर्षा देते हैं, जिसे महावट कहा जाता है, और पश्चिमी हिमालय में हिमपात कराते हैं। यह थोड़ी सी वर्षा रबी की फसल, विशेषकर गेहूँ के लिए बहुत मूल्यवान होती है।
विकल्प A निवर्तनी मानसून अक्टूबर से दिसंबर के बीच तमिलनाडु और दक्षिण-पूर्वी तट को वर्षा देता है। विकल्प B बंगाल की खाड़ी के उष्णकटिबंधीय चक्रवात मुख्यतः मानसून पूर्व और मानसून पश्चात के महीनों में पूर्वी तट से टकराते हैं। विकल्प D अरब सागर शाखा ग्रीष्म मानसून का अंग है और शीतकालीन वर्षा नहीं देती।
कमजोर भारतीय मानसून से जोड़ा जाने वाला एल नीनो किस महासागर के सतही जल के गर्म होने को कहते हैं?
- A.अटलांटिक महासागर
- B.प्रशांत महासागर
- C.हिंद महासागर
- D.आर्कटिक महासागर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रशांत महासागर
व्याख्या
सही उत्तर B, प्रशांत महासागर है। एल नीनो पेरू और इक्वाडोर के तट के पास मध्य तथा पूर्वी प्रशांत के सतही जल का समय-समय पर गर्म होना है, और इसका नाम, जिसका अर्थ शिशु है, मछुआरों ने इसलिए दिया कि यह क्रिसमस के आसपास प्रकट होता है। गर्म जल ऊपर उठती हवा और वर्षा की पेटी को पूर्व की ओर, भारतीय क्षेत्र से दूर खिसका देता है, इसलिए एल नीनो वाला वर्ष प्रायः भारत में कम मानसूनी वर्षा का वर्ष होता है। ला नीना इसकी उल्टी अवस्था है, जिसमें जल सामान्य से ठंडा रहता है और मानसून प्रायः अच्छा रहता है।
विकल्प A, C और D गलत महासागरों के नाम हैं। हिंद महासागर का अपना हिंद महासागर द्विध्रुव है, जो मानसून को प्रभावित करता है, पर एल नीनो प्रशांत की परिघटना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तमिलनाडु में वर्षा शीत ऋतु में क्यों होती है, दक्षिण-पश्चिम मानसून में क्यों नहीं?
दक्षिण-पश्चिम मानसून के समय कोरोमंडल तट पश्चिमी घाट की वृष्टिछाया में पड़ता है, इसलिए अरब सागर शाखा पूर्वी तट तक पहुँचने से पहले ही नमी खो चुकी होती है। अक्टूबर-नवंबर में मानसून के निवर्तन के समय हवाएँ स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं, बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर तट से टकराती हैं और तमिलनाडु को उसकी मुख्य वर्षा ऋतु देती हैं, जिसे उत्तर-पूर्वी या निवर्तनी मानसून कहा जाता है।
मानसून विच्छेद क्या होता है?
वर्षा ऋतु के बीच कई दिनों तक चलने वाला शुष्क दौर मानसून विच्छेद कहलाता है, जो मानसून द्रोणी के खिसकने से आता है। मैदानों में वर्षा रुक जाती है जबकि तराई और पूर्वी तट पर बौछारें पड़ती रह सकती हैं। बुवाई या फूल आने के समय लंबा विच्छेद सामान्य कुल वर्षा वाले वर्ष में भी फसल बिगाड़ देता है, इसीलिए वर्षा का वितरण कुल मात्रा से अधिक महत्व रखता है।
समवर्षा रेखा, समदाब रेखा और समताप रेखा में क्या अंतर है?
तीनों मानचित्र पर खींची जाने वाली ऐसी रेखाएँ हैं जो किसी मौसम तत्व के समान मान वाले स्थानों को जोड़ती हैं। समवर्षा रेखा समान वर्षा वाले स्थानों को, समदाब रेखा समान वायुदाब वाले स्थानों को और समताप रेखा समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ती है। समलवण रेखा समुद्र में समान लवणता वाले स्थानों को जोड़ती है। परीक्षा में यह एक पंक्ति के मिलान के रूप में पूछा जाता है, इसलिए चारों शब्द साथ याद रखने चाहिए।
एल नीनो और ला नीना भारत को कैसे प्रभावित करते हैं?
एल नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के सतही जल का असामान्य रूप से गर्म होना है, जिससे ऊपर उठती हवा और वर्षा की पेटी भारतीय क्षेत्र से दूर खिसक जाती है और मानसून की वर्षा प्रायः सामान्य से कम रहती है। ला नीना उन्हीं जलों के ठंडे होने की अवस्था है और प्रायः सामान्य या अधिक वर्षा से जुड़ी रहती है। यह संबंध एक प्रवृत्ति है, नियम नहीं, क्योंकि हिंद महासागर द्विध्रुव जैसे अन्य कारक भी ऋतु को प्रभावित करते हैं।
उत्तर भारत का शीतकाल उसी अक्षांश के अन्य स्थानों से अधिक गर्म क्यों रहता है?
हिमालय उत्तर में दीवार की तरह खड़ा है और शीत ऋतु में मध्य एशिया से आने वाली अत्यंत ठंडी हवाओं को रोक देता है। यही पर्वत ग्रीष्म में मानसूनी हवाओं को उपमहाद्वीप के भीतर रोककर वर्षा कराते हैं। यदि यह अवरोध न होता तो उत्तरी मैदान का शीतकाल पश्चिमी और मध्य एशिया के समान अक्षांश वाले स्थानों जैसा कहीं अधिक ठंडा होता।
स्रोत
- समकालीन भारत दो (कक्षा दस), जलवायु अध्याय — एनसीईआरटी
- भारत: भौतिक पर्यावरण (कक्षा ग्यारह), जलवायु अध्याय — एनसीईआरटी





