पृथ्वी की संरचना और चट्टानें: परतें, तरंगें और प्रकार
परीक्षा के लिए पृथ्वी की आंतरिक संरचना और चट्टानों के नोट्स: भूपर्पटी, मैंटल तथा क्रोड, असंबद्धताएँ, पी और एस तरंगें, छाया क्षेत्र और तीनों प्रकार की चट्टानें।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

पृथ्वी का आंतरिक भाग और भूपर्पटी बनाने वाली चट्टानें भौतिक भूगोल के सबसे भरोसेमंद अंक दिलाने वाले भाग हैं, क्योंकि इनमें लगभग सब कुछ निश्चित है: हर सीमा का एक नाम, हर चट्टान का एक जनक और हर तरंग का एक गुण। पृथ्वी के भीतर आज तक कोई नहीं पहुँचा, इसलिए यह पूरा चित्र प्रमाणों से बना है, और परीक्षक यह भी उतना ही पूछते हैं कि प्रमाण क्या है, जितना कि वह क्या दिखाता है।
भीतर की जानकारी कैसे मिलती है
प्रत्यक्ष स्रोत बहुत उथले हैं। खदानें और गहरे वेधन कुछ ही किलोमीटर तक जाते हैं, और इनमें सबसे गहरा रूस का कोला वेधन लगभग बारह किलोमीटर पर रुक गया, जबकि पृथ्वी की त्रिज्या लगभग 6,371 किलोमीटर है। ज्वालामुखी का लावा ऊपरी मैंटल से पदार्थ ऊपर लाता है, और उल्कापिंड, जो पृथ्वी के समान पदार्थ से बने हैं, गहरी परतों की संरचना का संकेत देते हैं। असली काम अप्रत्यक्ष स्रोत करते हैं: भूकंपीय तरंगें, पृथ्वी का औसत घनत्व लगभग 5.5 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर जबकि भूपर्पटी का घनत्व 3 से भी कम, गहराई के साथ बढ़ता दाब और तापमान, तथा चुंबकीय क्षेत्र जो एक धात्विक और तरल क्रोड की ओर संकेत करता है।
परतें और उनकी सीमाएँ
| परत | विस्तार | स्मरणीय तथ्य |
|---|---|---|
| भूपर्पटी | महासागरों के नीचे लगभग 5 किमी, महाद्वीपों के नीचे 30 से 70 किमी | सबसे पतली और हल्की परत; महाद्वीपीय भाग सियाल कहलाता है, जिसमें सिलिका और एल्युमिनियम अधिक हैं, तथा महासागरीय भाग सीमा, जिसमें सिलिका और मैग्नीशियम अधिक हैं |
| मैंटल | भूपर्पटी के नीचे से लगभग 2,900 किमी तक | आयतन में सबसे बड़ी परत; इसका ऊपरी भाग दुर्बलमंडल मैग्मा का स्रोत है और इसी पर प्लेटें चलती हैं |
| बाह्य क्रोड | लगभग 2,900 किमी से 5,150 किमी तक | तरल अवस्था में, इसीलिए एस तरंगें यहीं रुक जाती हैं; इसी की गति चुंबकीय क्षेत्र बनाती है |
| आंतरिक क्रोड | लगभग 5,150 किमी से केंद्र तक | अत्यधिक ताप के बावजूद ठोस, क्योंकि दाब बहुत अधिक है; क्रोड का पदार्थ निफे यानी निकेल और लोहा कहलाता है |
परतों के बीच की सीमाएँ असंबद्धता कहलाती हैं और हर एक का अपना नाम है। कॉनराड असंबद्धता ऊपरी और निचली भूपर्पटी को अलग करती है; मोहोरोविसिक असंबद्धता, जिसे मोहो कहते हैं, भूपर्पटी को मैंटल से अलग करती है; रेपेटी असंबद्धता ऊपरी और निचले मैंटल के बीच है; गुटेनबर्ग असंबद्धता लगभग 2,900 किलोमीटर पर मैंटल को क्रोड से अलग करती है; और लेहमान असंबद्धता तरल बाह्य क्रोड को ठोस आंतरिक क्रोड से अलग करती है। भूपर्पटी और मैंटल का कठोर ऊपरी भाग मिलकर स्थलमंडल बनाते हैं, जो प्लेटों में बँटा है।
भूकंपीय तरंगें और छाया क्षेत्र
- प्राथमिक या पी तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं, सबसे तेज चलती हैं और सबसे पहले दर्ज होती हैं; ये ठोस, द्रव और गैस तीनों से गुजर जाती हैं।
- द्वितीयक या एस तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं और केवल ठोस माध्यम से गुजरती हैं, और यही बाह्य क्रोड के तरल होने का सबसे मजबूत प्रमाण है।
- धरातलीय या एल तरंगें सतह के साथ चलती हैं, सबसे बाद में पहुँचती हैं और भवनों को सबसे अधिक क्षति पहुँचाती हैं।
क्रोड इन तरंगों को मोड़ता और रोकता है, इसलिए अधिकेंद्र से लगभग 105 से 145 अंश के बीच रखा भूकंपलेखी न पी तरंगें दर्ज करता है न एस, और 105 अंश से आगे एस तरंगें कहीं नहीं मिलतीं। इसे छाया क्षेत्र कहते हैं और यह लगभग हर वर्ष पूछा जाता है।
भूपर्पटी किन तत्वों से बनी है
भार के अनुसार भूपर्पटी का लगभग आधा भाग ऑक्सीजन है, लगभग 46.6 प्रतिशत, उसके बाद सिलिकॉन लगभग 27.7 प्रतिशत, एल्युमिनियम लगभग 8.1 प्रतिशत और लोहा लगभग 5 प्रतिशत, इसलिए सिलिकेट खनिज ही प्रमुख हैं। फेल्सपार भूपर्पटी का सबसे प्रचुर खनिज समूह है और क्वार्ट्ज, जो सिलिका से बना है, अपक्षय को सबसे अच्छा सहता है, इसीलिए बालू और बलुआ पत्थर में वही भरा रहता है।
चट्टानों के तीन वर्ग
| वर्ग | निर्माण | उदाहरण |
|---|---|---|
| आग्नेय | मैग्मा या लावा के ठंडा होने से; इसे जनक चट्टान कहते हैं | ग्रेनाइट, गैब्रो और डोलेराइट भूपर्पटी के भीतर ठंडे होते हैं; बेसाल्ट और प्यूमिस सतह पर, और बेसाल्ट से ही दक्कन ट्रैप बना |
| अवसादी | परतों में जमे अवसादों के दबने से; केवल इन्हीं में जीवाश्म मिलते हैं | बलुआ पत्थर और संगुटिकाश्म यांत्रिक, चूना पत्थर और कोयला जैविक तथा सेंधा नमक और जिप्सम रासायनिक रूप से बनते हैं |
| कायांतरित | पहले से बनी चट्टानों के ताप और दाब से बदलने पर, बिना पिघले | संगमरमर, स्लेट, क्वार्टजाइट, नाइस, शिस्ट और ग्रेफाइट |
कायांतरण और शैल चक्र
कायांतरण दो प्रकार का होता है: संस्पर्श या तापीय कायांतरण, जिसमें गर्म मैग्मा चट्टान को छूता है, और प्रादेशिक या गतिक कायांतरण, जिसमें पर्वत निर्माण का दाब विस्तृत क्षेत्र पर काम करता है। याद रखने योग्य जोड़े हैं चूना पत्थर से संगमरमर, बलुआ पत्थर से क्वार्टजाइट, शेल या चिकनी मिट्टी से स्लेट, स्लेट से फिलाइट और फिर शिस्ट, ग्रेनाइट से नाइस तथा कोयले से ग्रेफाइट। शैल चक्र तीनों वर्गों को जोड़ता है: आग्नेय चट्टान का अपक्षय अवसाद देता है जो जमकर अवसादी चट्टान बनते हैं, ताप और दाब किसी भी चट्टान को कायांतरित कर देते हैं, और कोई भी चट्टान पिघलकर पुनः मैग्मा बन सकती है। आग्नेय और कायांतरित चट्टानें कठोर तथा रवेदार होती हैं और उनमें जीवाश्म नहीं मिलते; अवसादी चट्टानें परतदार और अपेक्षाकृत मुलायम होती हैं तथा कोयला, पेट्रोलियम और जीवाश्म इन्हीं में मिलते हैं, जिससे यह वर्ग आर्थिक दृष्टि से सबसे उपयोगी बनता है।
परीक्षा की दृष्टि से
यहाँ प्रश्न छोटे और तथ्यात्मक होते हैं। किसी असंबद्धता को उन परतों से जोड़ना जिन्हें वह अलग करती है, किसी तरंग को उसके गुण से जोड़ना और किसी कायांतरित चट्टान को उसकी जनक चट्टान से जोड़ना, यही सामान्य प्रारूप है। भ्रम के स्थायी बिंदु हैं गुटेनबर्ग बनाम मोहोरोविसिक, पी तरंग बनाम एस तरंग तथा संगमरमर बनाम क्वार्टजाइट। दूसरा वर्ग पूछता है कि कौन सी परत तरल है, किस चट्टान में जीवाश्म मिलते हैं और किसे जनक चट्टान कहते हैं। याद रखने योग्य अंक हैं मैंटल और क्रोड की सीमा के लिए 2,900 किलोमीटर, छाया क्षेत्र के लिए 105 से 145 अंश तथा भूपर्पटी में ऑक्सीजन, सिलिकॉन, एल्युमिनियम और लोहे का क्रम। कथन आधारित प्रश्न प्रायः यही जाँचते हैं कि बेसाल्ट बहिर्भेदी है और ग्रेनाइट अंतर्भेदी।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पृथ्वी की त्रिज्या | लगभग 6,371 किमी; सबसे गहरा वेधन केवल लगभग 12 किमी तक पहुँचा है |
|---|---|
| मोहोरोविसिक असंबद्धता | भूपर्पटी और मैंटल के बीच की सीमा |
| गुटेनबर्ग असंबद्धता | मैंटल और क्रोड के बीच की सीमा, लगभग 2,900 किमी गहराई पर |
| लेहमान असंबद्धता | तरल बाह्य क्रोड और ठोस आंतरिक क्रोड के बीच की सीमा |
| पी तरंगें | अनुदैर्ध्य, सबसे तेज, ठोस, द्रव और गैस तीनों से गुजरती हैं |
| एस तरंगें | अनुप्रस्थ, केवल ठोस से गुजरती हैं, 105 अंश से आगे नहीं मिलतीं |
| छाया क्षेत्र | अधिकेंद्र से लगभग 105 से 145 अंश, जहाँ पी और एस दोनों तरंगें नहीं पहुँचतीं |
| भूपर्पटी की संरचना | भार के अनुसार ऑक्सीजन लगभग 46.6, सिलिकॉन 27.7, एल्युमिनियम 8.1 और लोहा 5 प्रतिशत |
| सियाल, सीमा और निफे | क्रमशः महाद्वीपीय भूपर्पटी, महासागरीय भूपर्पटी और क्रोड |
| जनक चट्टान | आग्नेय चट्टान, जो मैग्मा या लावा के ठंडा होने से बनती है |
| जीवाश्म युक्त चट्टानें | केवल अवसादी चट्टानें, जो परतों में बनती हैं |
| प्रमुख कायांतरण जोड़े | चूना पत्थर से संगमरमर, बलुआ पत्थर से क्वार्टजाइट, शेल से स्लेट, ग्रेनाइट से नाइस, कोयले से ग्रेफाइट |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भूपर्पटी को मैंटल से अलग करने वाली सीमा किस नाम से जानी जाती है?
- A.कॉनराड असंबद्धता
- B.मोहोरोविसिक असंबद्धता
- C.गुटेनबर्ग असंबद्धता
- D.लेहमान असंबद्धता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मोहोरोविसिक असंबद्धता
व्याख्या
सही उत्तर B, मोहोरोविसिक असंबद्धता है। क्रोएशियाई भूकंपविज्ञानी मोहोरोविसिक ने देखा कि एक निश्चित गहराई पर भूकंपीय तरंगों की गति अचानक बढ़ जाती है, और उन्हीं के नाम पर यह सीमा पड़ी, जो भूपर्पटी की तली तथा मैंटल के ऊपरी भाग को बाँटती है; संक्षेप में इसे मोहो कहा जाता है।
विकल्प A, कॉनराड असंबद्धता स्वयं भूपर्पटी के भीतर है, उसके हल्के ऊपरी और भारी निचले भाग के बीच। विकल्प C, गुटेनबर्ग असंबद्धता बहुत गहरी है, लगभग 2,900 किलोमीटर पर, और मैंटल को बाह्य क्रोड से अलग करती है; इसी प्रश्न में यही सामान्य भ्रम है। विकल्प D, लेहमान असंबद्धता तरल बाह्य क्रोड और ठोस आंतरिक क्रोड के बीच है। चारों नामों को गहराई के क्रम में, कॉनराड से लेहमान तक, दोहरा लें तो मिलान वाले प्रश्न सरल हो जाते हैं।
निम्नलिखित में से कौन सी भूकंपीय तरंगें द्रव माध्यम से नहीं गुजर सकतीं?
- A.प्राथमिक या पी तरंगें
- B.द्वितीयक या एस तरंगें
- C.धरातलीय या एल तरंगें
- D.तीनों प्रकार की तरंगें
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. द्वितीयक या एस तरंगें
व्याख्या
सही उत्तर B, द्वितीयक या एस तरंगें है। ये अनुप्रस्थ तरंगें हैं, जिनमें कण गति की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं, और द्रव में ऐसा कंपन टिक नहीं सकता, इसलिए एस तरंगें बाह्य क्रोड पर समाप्त हो जाती हैं। अधिकेंद्र से लगभग 105 अंश के आगे इनका न मिलना ही बाह्य क्रोड के तरल होने का मुख्य प्रमाण है।
विकल्प A, पी तरंगें अनुदैर्ध्य हैं, सबसे तेज चलती हैं और भूकंपलेखी पर सबसे पहले पहुँचती हैं तथा ठोस, द्रव और गैस तीनों से गुजर जाती हैं। विकल्प C, एल तरंगें धरातल के साथ चलती हैं, सबसे बाद में आती हैं पर भवनों को सबसे अधिक हिलाती हैं और सर्वाधिक विनाश करती हैं। विकल्प D इसलिए गलत है कि तीनों में केवल एक ही द्रव से रुकती है। तरंग का गुण, आगमन का क्रम और विनाशकारी क्षमता, इन्हीं तीन बिंदुओं को प्रश्नपत्र यहाँ मिलाते हैं।
संगमरमर किस जनक चट्टान के कायांतरण से बनता है?
- A.बलुआ पत्थर
- B.शेल
- C.चूना पत्थर
- D.ग्रेनाइट
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चूना पत्थर
व्याख्या
सही उत्तर C, चूना पत्थर है। चूना पत्थर मुख्यतः कैल्शियम कार्बोनेट से बनी अवसादी चट्टान है, और जब ताप तथा दाब उसे बिना पिघलाए पुनः रवेदार बना देते हैं तो संगमरमर बनता है, वही पत्थर जिससे ताजमहल और दिलवाड़ा के मंदिर बने हैं।
विकल्प A, बलुआ पत्थर कायांतरण से क्वार्टजाइट बनता है, जो इतना कठोर होता है कि अपक्षय सहकर कटक बनाता है। विकल्प B, शेल या चिकनी मिट्टी से स्लेट बनती है, जो पतली परतों में चिरती है और छत तथा पट्टी के काम आती रही है। विकल्प D, ग्रेनाइट एक अंतर्भेदी आग्नेय चट्टान है, जिससे कायांतरण पर पट्टीदार नाइस बनती है। इनमें से कोई न कोई जोड़ा लगभग हर प्रश्नपत्र में आता है, इसलिए पूरी सूची एक साथ याद करें: चूना पत्थर से संगमरमर, बलुआ पत्थर से क्वार्टजाइट, शेल से स्लेट, ग्रेनाइट से नाइस और कोयले से ग्रेफाइट।
प्रायद्वीपीय भारत का दक्कन ट्रैप मुख्यतः किस चट्टान से बना है?
- A.ग्रेनाइट
- B.बेसाल्ट
- C.चूना पत्थर
- D.नाइस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बेसाल्ट
व्याख्या
सही उत्तर B, बेसाल्ट है। दक्कन ट्रैप का निर्माण विशाल दरारी उद्गारों से हुआ, जिनमें लावा सतह पर फैलकर तेजी से ठंडा हुआ और महीन रवों वाली बहिर्भेदी आग्नेय चट्टान बेसाल्ट बनी। इसी के अपक्षय से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात की काली रेगुर मिट्टी बनती है।
विकल्प A, ग्रेनाइट भी आग्नेय है पर अंतर्भेदी: वह भूपर्पटी के भीतर धीरे ठंडी होती है, इसलिए उसके रवे बड़े और स्पष्ट दिखते हैं। विकल्प C, चूना पत्थर समुद्री उत्पत्ति की अवसादी चट्टान है, जिसका उपयोग सीमेंट बनाने में होता है, लावा से उसका संबंध नहीं। विकल्प D, नाइस प्रायद्वीपीय ढाल की प्राचीन कायांतरित चट्टान है, जो पट्टीदार दिखती है और ग्रेनाइट से बनती है। यह प्रश्न एक साथ दो बातें जाँचता है, कि बेसाल्ट बहिर्भेदी है और काली मिट्टी का जनक भी वही है।
प्राचीन पेड़ पौधों और जीव जंतुओं के जीवाश्म मुख्य रूप से किस प्रकार की चट्टानों में मिलते हैं?
- A.आग्नेय चट्टानें
- B.अवसादी चट्टानें
- C.कायांतरित चट्टानें
- D.प्लूटोनिक चट्टानें
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अवसादी चट्टानें
व्याख्या
सही उत्तर B, अवसादी चट्टानें है। ये परत दर परत तब बनती हैं जब अवसाद जीव जंतुओं और वनस्पति के अवशेषों पर जमकर धीरे धीरे कठोर होते हैं, इसलिए शंख, हड्डियाँ और पादप अवशेष जीवाश्म के रूप में सुरक्षित रह जाते हैं। इन्हीं परतदार बेसिनों में कोयला और पेट्रोलियम भी मिलते हैं, जिससे यह वर्ग आर्थिक दृष्टि से सबसे उपयोगी है।
विकल्प A, आग्नेय चट्टानें पिघले मैग्मा या लावा से इतने अधिक ताप पर बनती हैं कि कोई जैविक अवशेष बच ही नहीं सकता। विकल्प C, कायांतरित चट्टानें भले ही जीवाश्म युक्त अवसादी चट्टान से बनी हों, पर ताप और दाब उन जीवाश्मों को विकृत कर देते हैं। विकल्प D, प्लूटोनिक चट्टानें अंतर्भेदी आग्नेय चट्टानों का ही दूसरा नाम हैं, जैसे ग्रेनाइट, इसलिए वे भी उसी कारण से गलत हैं। परतबंदी और जीवाश्म, दोनों संकेत सदैव अवसादी वर्ग की ओर ले जाते हैं।
भार के अनुसार पृथ्वी की भूपर्पटी में सबसे अधिक मात्रा किस तत्व की है?
- A.सिलिकॉन
- B.एल्युमिनियम
- C.ऑक्सीजन
- D.लोहा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. ऑक्सीजन
व्याख्या
सही उत्तर C, ऑक्सीजन है। भूपर्पटी के भार का लगभग आधा भाग, यानी लगभग 46.6 प्रतिशत, ऑक्सीजन है, क्योंकि वह मुक्त गैस के रूप में नहीं बल्कि सिलिकेट खनिजों में बँधी रहती है, और भूपर्पटी की लगभग सभी चट्टानें इन्हीं खनिजों से बनी हैं।
विकल्प A, सिलिकॉन लगभग 27.7 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है और ऑक्सीजन के साथ मिलकर सिलिका बनाता है, जो भूपर्पटी का मूल स्वभाव तय करती है। विकल्प B, एल्युमिनियम लगभग 8.1 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है और भूपर्पटी की सबसे प्रचुर धातु है, जो अलग प्रश्न के रूप में पूछा जाता है। विकल्प D, लोहा भूपर्पटी में लगभग 5 प्रतिशत है, यद्यपि क्रोड में वही प्रमुख है, जिसे निकेल और लोहे के कारण निफे कहते हैं। दो उत्तर तैयार रखें: सर्वाधिक तत्व ऑक्सीजन और सर्वाधिक धातु एल्युमिनियम।
बाह्य क्रोड को आंतरिक क्रोड से अलग करने वाली असंबद्धता कौन सी है?
- A.रेपेटी असंबद्धता
- B.लेहमान असंबद्धता
- C.मोहो असंबद्धता
- D.कॉनराड असंबद्धता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लेहमान असंबद्धता
व्याख्या
सही उत्तर B, लेहमान असंबद्धता है। यह तरल बाह्य क्रोड से ठोस आंतरिक क्रोड में परिवर्तन को दर्शाती है और डेनमार्क की भूकंपविज्ञानी इंगे लेहमान के नाम पर है, जिन्होंने भूकंपीय तरंगों के व्यवहार से यह निष्कर्ष निकाला कि पृथ्वी का अंतरतम भाग ठोस है।
विकल्प A, रेपेटी असंबद्धता इससे बहुत ऊपर, ऊपरी और निचले मैंटल के बीच स्थित है। विकल्प C, मोहो या मोहोरोविसिक असंबद्धता भूपर्पटी और मैंटल की सीमा है और कॉनराड के बाद सबसे उथली नामित सतह है। विकल्प D, कॉनराड असंबद्धता स्वयं भूपर्पटी के भीतर उसके ऊपरी तथा निचले भाग को बाँटती है। विद्यार्थी केवल दो नाम याद करके यह अंक गँवाते हैं, इसलिए ऊपर से नीचे पाँचों नाम क्रम से लिखें: कॉनराड, मोहो, रेपेटी, गुटेनबर्ग और लेहमान, और इनके साथ गुटेनबर्ग की 2,900 किलोमीटर वाली गहराई भी जोड़ लें, क्योंकि वही अंक पूरे चित्र को स्थिर कर देता है।
ग्रेनाइट किस प्रकार की चट्टान का उदाहरण है?
- A.अंतर्भेदी आग्नेय चट्टान
- B.बहिर्भेदी आग्नेय चट्टान
- C.रासायनिक रूप से बनी अवसादी चट्टान
- D.पत्रित कायांतरित चट्टान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अंतर्भेदी आग्नेय चट्टान
व्याख्या
सही उत्तर A, अंतर्भेदी आग्नेय चट्टान है। ग्रेनाइट तब बनती है जब मैग्मा धरातल के बहुत नीचे धीरे धीरे ठंडा होता है, जिससे रवों को बढ़ने का समय मिलता है और चट्टान मोटे दाने वाली तथा चितकबरी दिखती है। ऐसी चट्टानों को प्लूटोनिक भी कहा जाता है और ग्रेनाइट इसका मानक उदाहरण है।
विकल्प B, बहिर्भेदी आग्नेय चट्टान उस लावा से बनती है जो सतह पर तेजी से ठंडा होता है, जैसे बेसाल्ट और जल पर तैरने वाली प्यूमिस। विकल्प C, रासायनिक रूप से बनी अवसादी चट्टानों में सेंधा नमक और जिप्सम आते हैं, जो खनिज युक्त जल के वाष्पन से जमते हैं। विकल्प D, पत्रित कायांतरित चट्टानों में नाइस और शिस्ट आती हैं; ग्रेनाइट का कायांतरण होने पर नाइस ही बनती है। अर्थात एक ही नाम वर्ग बदल सकता है, और प्रश्न में दी गई प्रक्रिया ही उत्तर तय करती है।
भूकंप के अधिकेंद्र से लगभग 105 से 145 अंश के बीच का वह क्षेत्र, जहाँ भूकंपीय तरंगें दर्ज नहीं होतीं, क्या कहलाता है?
- A.भूकंप मूल
- B.छाया क्षेत्र
- C.बेनिऑफ क्षेत्र
- D.भ्रंश क्षेत्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. छाया क्षेत्र
व्याख्या
सही उत्तर B, छाया क्षेत्र है। क्रोड पी तरंगों को तेजी से मोड़ देता है और एस तरंगों को पूरी तरह रोक देता है, इसलिए धरातल की एक पट्टी पर किसी भूकंप की कोई तरंग नहीं पहुँचती। 105 अंश से आगे एस तरंगें बिल्कुल नहीं मिलतीं और लगभग 105 से 145 अंश के बीच पी तरंगें भी दर्ज नहीं होतीं।
विकल्प A, भूकंप मूल या अवकेंद्र वह बिंदु है जहाँ पृथ्वी के भीतर चट्टानें टूटती हैं, और उसके ठीक ऊपर धरातल पर अधिकेंद्र होता है। विकल्प C, बेनिऑफ क्षेत्र प्लेट विवर्तनिकी का शब्द है, जो अधोगामी प्लेट के साथ बनी भूकंपों की झुकी पट्टी को कहते हैं। विकल्प D, भ्रंश क्षेत्र वह दरार पट्टी है जिसके सहारे चट्टानें खिसकती हैं, अर्थात भूकंप का स्थल, उसका अभिलेख नहीं। यह प्रश्न लगभग हर वर्ष आता है, इसलिए दोनों अंश ठीक ठीक याद रखें।
ऊपरी मैंटल की वह परत, जिस पर विवर्तनिक प्लेटें गति करती हैं, क्या कहलाती है?
- A.स्थलमंडल
- B.दुर्बलमंडल
- C.बेरीमंडल
- D.जैवमंडल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दुर्बलमंडल
व्याख्या
सही उत्तर B, दुर्बलमंडल है। यह कठोर बाहरी कवच के ठीक नीचे ऊपरी मैंटल में स्थित है, दुर्बल तथा अंशतः पिघला हुआ है और ज्वालामुखियों से निकलने वाले मैग्मा का मुख्य स्रोत है; प्लेटें इसी के ऊपर सरकती हैं।
विकल्प A, स्थलमंडल वही कठोर बाहरी कवच है, जिसमें भूपर्पटी और मैंटल का ऊपरी ठोस भाग आता है, अर्थात प्लेटें इसी की बनी हैं, इस पर चलती नहीं। विकल्प C, बेरीमंडल पृथ्वी के भारी केंद्रीय भाग यानी क्रोड के लिए प्रयुक्त पुराना शब्द है। विकल्प D, जैवमंडल वह क्षेत्र है जहाँ स्थल, जल और वायु मिलकर जीवन को संभव बनाते हैं, और उसका आंतरिक संरचना से कोई संबंध नहीं। भ्रम स्थलमंडल और दुर्बलमंडल की जोड़ी से होता है, इसलिए याद रखें कि कठोर परत दुर्बल परत पर टिकी है।
अत्यधिक ताप और दाब के कारण कोयला किसमें परिवर्तित हो जाता है?
- A.ग्रेफाइट
- B.स्लेट
- C.क्वार्टजाइट
- D.नाइस
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ग्रेफाइट
व्याख्या
सही उत्तर A, ग्रेफाइट है। कोयला दबे हुए वनस्पति अवशेषों से बनी अवसादी चट्टान है, और लंबे समय तक ताप तथा दाब पड़ने पर उसके वाष्पशील अंश निकल जाते हैं और कार्बन पुनः व्यवस्थित होकर पहले कठोर एन्थ्रेसाइट और अंततः लगभग शुद्ध कार्बन वाली कायांतरित चट्टान ग्रेफाइट बनाता है।
विकल्प B, स्लेट शेल या चिकनी मिट्टी का कायांतरित रूप है, कोयले का नहीं। विकल्प C, क्वार्टजाइट बलुआ पत्थर से बनती है और सामान्य चट्टानों में सबसे कठोर मानी जाती है। विकल्प D, नाइस ग्रेनाइट से बनती है और उसमें हल्की तथा गहरी पट्टियाँ बारी बारी दिखती हैं। ध्यान रखें कि ग्रेफाइट और हीरा दोनों कार्बन के ही रूप हैं, इसीलिए यह प्रश्न कभी सामान्य विज्ञान में अपररूपों के उदाहरण के रूप में भी आता है।
निफे शब्द पृथ्वी के किस भाग के लिए प्रयुक्त होता है?
- A.महाद्वीपीय भूपर्पटी
- B.महासागरीय भूपर्पटी
- C.मैंटल
- D.क्रोड
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. क्रोड
व्याख्या
सही उत्तर D, क्रोड है। निफे शब्द निकेल और लोहे के रासायनिक प्रतीकों से बना है, और यही दोनों धातुएँ पृथ्वी के केंद्रीय भाग की मुख्य संरचना मानी जाती हैं; तरल बाह्य क्रोड में इसी धातु की गति से पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
विकल्प A, महाद्वीपीय भूपर्पटी को सियाल कहते हैं, जो सिलिका और एल्युमिनियम से बना शब्द है, क्योंकि उसमें यही तत्व प्रमुख हैं और उसका घनत्व कम है। विकल्प B, महासागरीय भूपर्पटी को सीमा कहते हैं, जो सिलिका और मैग्नीशियम से बना है, और वह पतली होते हुए भी महाद्वीपीय भाग से भारी है। विकल्प C, मैंटल आयतन में सबसे बड़ी परत है और उसमें लोहे तथा मैग्नीशियम के सिलिकेट अधिक हैं, पर उसके लिए निफे शब्द प्रयुक्त नहीं होता। तीनों संक्षिप्त नाम ऊपर से नीचे के क्रम में सियाल, सीमा और निफे के रूप में याद रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बाह्य क्रोड को तरल क्यों माना जाता है?
द्वितीयक या एस तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं और द्रव माध्यम से नहीं गुजर सकतीं। अधिकेंद्र से लगभग 105 अंश के आगे रखे भूकंपलेखी में एस तरंगें बिल्कुल दर्ज नहीं होतीं, जिससे सिद्ध होता है कि मैंटल के नीचे कोई द्रव परत उन्हें रोक रही है। वही बाह्य क्रोड है, जबकि आंतरिक क्रोड अत्यधिक दाब के कारण ठोस बना रहता है।
स्थलमंडल और दुर्बलमंडल में क्या अंतर है?
स्थलमंडल पृथ्वी का कठोर बाहरी कवच है, जिसमें भूपर्पटी और मैंटल का सबसे ऊपरी ठोस भाग सम्मिलित है, और यही विवर्तनिक प्लेटों में बँटा है। दुर्बलमंडल इसके ठीक नीचे ऊपरी मैंटल में है, दुर्बल तथा अंशतः पिघला हुआ है और मैग्मा का स्रोत है; प्लेटें इसी पर सरकती हैं।
जीवाश्म केवल अवसादी चट्टानों में क्यों मिलते हैं?
अवसादी चट्टानें तब बनती हैं जब अवसाद पौधों और जंतुओं के अवशेषों के ऊपर परतों में जमते हैं और धीरे धीरे कठोर होते हैं, जिससे अवशेष जीवाश्म के रूप में सुरक्षित रह जाते हैं। आग्नेय चट्टानें पिघले पदार्थ से बनती हैं और कायांतरित चट्टानें ताप तथा दाब से बदलती हैं, और दोनों प्रक्रियाएँ जैविक अवशेषों को नष्ट कर देती हैं। इसी कारण कोयला और पेट्रोलियम भी अवसादी बेसिनों में ही मिलते हैं।
शैल चक्र किसे कहते हैं?
यह एक वर्ग की चट्टान का दूसरे वर्ग में निरंतर बदलते रहना है। मैग्मा ठंडा होकर आग्नेय चट्टान बनाता है, अपक्षय उसे अवसाद में तोड़ता है जो दबकर अवसादी चट्टान बनते हैं, ताप और दाब दोनों प्रकार की चट्टानों को कायांतरित कर देते हैं, और गहराई में पिघलकर कोई भी चट्टान फिर मैग्मा बन जाती है। कोई चट्टान स्थायी नहीं होती, इसीलिए आग्नेय को शेष दोनों की जनक कहा जाता है।
दक्कन ट्रैप किस चट्टान से बना है?
बेसाल्ट से, जो एक बहिर्भेदी आग्नेय चट्टान है और तब बनी जब लावा सतह पर फैलकर तेजी से ठंडा हुआ, इसलिए उसके रवे बहुत महीन हैं। इसी बेसाल्ट के अपक्षय से महाराष्ट्र और आसपास के राज्यों की काली रेगुर मिट्टी बनी, जो नमी रोकती है और कपास के लिए उपयुक्त है, और चट्टान तथा मिट्टी का यही संबंध बार बार पूछा जाता है।
स्रोत
- भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (कक्षा 11), पृथ्वी की आंतरिक संरचना तथा खनिज और शैल अध्याय — एनसीईआरटी
- भारत: भौतिक पर्यावरण (कक्षा 11), भू आकृति विज्ञान अध्याय — एनसीईआरटी



